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इंस्टीटशंस ही कहीं ना कहीं डिमांड एंड सप्लाई के पीछे रिस्पांसिबल है। जब भी अपन शेयर्स बाय करते हैं लेट्स सपोज 1000 क्वांटिटी बाय करनी है अपने को तो अपन ने देखा होगा कि वहां पर एक बार में बहुत बार क्वांटिटी नहीं आती। क्यों? क्योंकि वहां पर उतने सेलर अवेलेबल ही नहीं है। पिछले कितने सालों से ये दो कांसेप्ट है डिमांड और सप्लाई। सबको मालूम है। लेकिन आपका फोकस सिर्फ एक चीज पे रहा। हाउ यू लुक एट डिमांड एंड सप्लाई डिफरेंटली कंपेयर टू अदर पीपल। हम कहीं ना कहीं यह भी मानते हैं कि प्राइस जो है वह अप तभी जाएगी अगर वहां पर कुछ ना कोई चीज पेंडिंग रह गई है तो। क्योंकि अगर पेंडिंग ऑर्डर नहीं रहे सारे ऑर्डर एग्जीक्यूट हो गए तो प्राइस के पास में कोई रीज़न ही नहीं है अप जाने का। यही सेम उस मंथली के अंदर ही आपको डेली पर यह एक बहुत शानदार एरिया दिखेगा जिसमें ये तीन कैंडल वो है जो एकदम नैरो रेंज की छोटी कैंडल है इनकी बॉडी पार्ट बहुत छोटा है बहुत नैरो है और उसके बाद का एक्साइटिंग कैंडल देखिए कितनी शानदार तरीके से प्राइस में रैली आती गई हाउ इज योर थ्योरी डिफरेंट फ्रॉम द नॉर्मल सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस एक चीज और है सपोर्ट रेजिस्टेंस में कहीं पर भी क्लियर एंट्री एंड एग्जिट नहीं होते रिस्क मैनेज मैनेजमेंट की सबसे बड़ी गलती लोग क्या करते हैं? मैं बताऊं सर इसका आंसर आप इन्वेस्टमेंट को ट्रेडिंग में कन्वर्ट करेंगे या फिर ट्रेडिंग को इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट करेंगे तो डेफिनेटली लॉस होगा। रिस्क मैनेजमेंट बिल्कुल फॉलो नहीं होगा। उस बात का मुझे अफसोस होना ही मेरी सबसे बेकार ट्रेड हो जाएगी। हाय गाइस, वेलकम टू अपs। दोस्तों, मेरा शुरू से यह मानना रहा है कि इस दुनिया को, इस देश को और किसी भी इंडस्ट्री को अगर कोई बदल सकता है, तो उसकी नीव एक फीचर रखता है। आई हैव मेट अ लॉट ऑफ़ पीपल। हमने यहां पर इस चैनल पर बहुत सारे पडकास्ट किए हैं। मास्टर क्लासेस करी हैं। बहुत सारे ट्रेडर से मिले हैं। बहुत ज्यादा इंप्रेसिव पडकास्ट हुए हैं। इसमें कोई डाउट नहीं है। लेकिन आज एक ऐसे पडकास्ट पे मैं आपको यहां पर आपसे मिलवाने वाला हूं दो ऐसे शख्स को जिन्होंने जो ट्रेडिंग करते हैं। देयर इज़ नो डाउट अबाउट दिस। बहुत ही बेहतरीन तरीके से ट्रेडिंग करते हैं। लेकिन सबसे पहले वो दिल से अभी तक ये डिस्कशन होने से जस्ट 5 मिनट पहले जो मेरी डिस्कशन हुई है उनके साथ। मुझे समझ में आया कि वो दिल से टीचर हैं। वो दिल से एक ट्रेनर हैं। बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जो स्टॉक मार्केट में दिल से ट्रेनर हैं और साथ में ट्रेडर भी हैं। बहुत सारे लोगों की लाइफ चेंज कर चुके हैं। एंड आई मीन दीज़ वर्ड्स बहुत सारे लोगों की लाइफ चेंज कर चुके हैं। एंड आई एम वेरी वेरीरी श्योर कि जब तक ये पॉडकास्ट जब तक ये डिस्कशन आज खत्म होगा। आई एम वेरी कॉन्फिडेंट। आप मेरी इस बात से शत प्रतिशत 100% एग्री करेंगे। आज मेरे साथ है नन अदर देन गेट टुगेदर फाइनेंस कम्युनिटी से, जीटीएफ कम्युनिटी से। अरुण जी और सूरज जी। अरुण जी थैंक यू सो मच सूरज जी थैंक यू सो मच फॉर जॉइनिंग अस टुडे। आपने इतनी दूर से ट्रैवल किया हमारे लिए हमारे व्यूअर्स के लिए। सबसे पहले दिल से थैंक यू सो मच। और आई वेलकम यू ऑन बिहाफ ऑफ द एंटायर अपसर्च टीम। आई एम रियली वेरी एक्साइटेड टुवर्ड्स हैविंग दिस पडकास्ट टुडे। एंड आई एम वेरी होपफुल कि हमें आपके टीचिंग एक्सपीरियंस से बहुत कुछ सीखने को मिलने वाला है। लेकिन आपके ट्रेडिंग के एक्सपीरियंस पे मैं बाद में आऊंगा। आपके जो ट्रेडिंग की बातें आपने मुझे अभी बैक द स्टेज डिस्कस करी वो बहुत इंप्रेसिव थी। उसमें मैं बाद में आऊंगा। सबसे पहले मैं आपसे आपकी जर्नी जानना चाहता हूं। बहुत कम लोग हैं जो टीचिंग में एज इन ट्रेडिंग को दिल से सिखाने में बिलीव करते हैं। आपकी ये ट्रेडिंग की जर्नी पहले शुरू हुई या टीचिंग की शुरू हुई। कैसे अभी तक आप यहां पर पहुंचे हैं? थैंक यू सो मच सर फॉर हैविंग बोथ ऑफ अस। वी आर रियली एक्साइटेड टू बी हियर। सो बेसिकली पहले हमने ट्रेडिंग से ही जर्नी स्टार्ट करी ट्रेनर तो हम बाद में बने थे और 2013 के एंड में हम बोल सकते हैं जब हम लोगों ने ट्रेडिंग सीखना स्टार्ट करा था 13 के एंड में 13 के एंड के अंदर में 2014 से हमने ट्रेडिंग को थोड़ा सा सीरियसली लिया और अगले एक साल में ही हमें समझ में आ गया कि यह चीज सीखे बिना हम लोग नहीं कर सकते इस चीज के अंदर में तो फिर उसके बाद में हमने यह डिसाइड किया कि पहले अपन इसको सीखें और उसके बाद ही करें क्योंकि वह जो एक साल की जर्नी रही उसमें बस तुक्के ही लग रहे थे। कभी प्रॉफिट आ रहा था, फिर चला भी जा रहा था उस चीज के ऊपर में। फिर हम दोनों ने फाइनली डिसाइड किया कि एक बार सीखते हैं और सीख के बाद में ही करेंगे। और जैसा कि एक क्यूरियोसिटी होती है कि यह जो प्राइसेस हैं शेयर्स की यह अप एंड डाउन जा किस वजह से रही हैं। इसी एक क्वेश्चन के साथ में हमने बस Google किया रैंडमली कि व्हाई डज़ शेयर प्राइस गो अप एंड डाउन? और फिर 10 में से आठ वेबसाइट पर हमें एक चीज मिली कि इट बिकॉज़ ऑफ़ डिमांड एंड सप्लाई। और फिर उसके बाद में उसी बस डिमांड एंड सप्लाई को हम इन डेप्थ के अंदर में सीखते चले गए। उन आठ वेबसाइट पर हमने जब पढ़ा तो हमें समझ में आया कि सिर्फ शेयर्स की प्राइस ही नहीं डेली रूटीन लाइफ के अंदर में भी जो हर एक चीज हम लोग देखते हैं उसकी प्राइसेस अप एंड डाउन जाना वो डिमांड एंड सप्लाई की वजह से ही है। फिर चाहे वो कोविड के अंदर में मास्क सैनिटाइजर हो। फिर चाहे हम डेली बेसिस पे जो वेजिटेबल की प्राइसेस वगैरह देखते हैं ये सब चीजें डिमांड सप्लाई की वजह से ही जा रही हैं। जब उन 810 वेबसाइट को हमने पढ़ा तो हमें समझ में आ गया कि इस डिमांड एंड सप्लाई को अगर हम डिटेल में सीख लेंगे तो हमें हमारे सारे आंसर मिल जाएंगे और उस एक क्वेश्चन को हमने नेक्स्ट थ्री टू फोर ईयर तक बस उसी के ऊपर में आंसर ढूंढते गए और सारी चीजें डिमांड सप्लाई को इन डेप्थ में हम लोग सीख गए। ओके। ये काम आप दोनों ने साथ में शुरू किया या फिर आपने बाद में ज्वाइन किया। उन्होंने बाद में ज्वाइन किया। दोनों ने साथ में ही स्टार्ट किया था। एक्चुअली हम लोग कॉलेज में मिले थे। अच्छा। मैं मेरा फर्स्ट ईयर था। इनका सेकंड ईयर था। वहां कॉलेज में हम लोगों की दोस्ती हुई और साथ में ही हमने स्टॉक मार्केट करना शुरू किया। मैं तो तब 18th में हुआ भी नहीं था। मेरा पैन कार्ड भी नहीं था। इनका ही डीमेट अकाउंट था। उसी से अपन ट्रेड किया करते थे। और ट्रेडिंग भी हमारी कमोडिटी से स्टार्ट हुई है। एमसीएक्स में हमने ट्रेड करना स्टार्ट किया था। बड़ा आज के टाइम पे लोग क्रिप्टो से इंट्रोड्यूस होते हैं या फिर डेरिवेटिव से इंट्रोड्यूस होते हैं। उस टाइम पे कम्युनिटी से इंट्रोड्यूस होते थे लोग। ये आप 2013 14 की बात 2013-4 की बात कर और उस टाइम पर जो पहला ट्रेड शायद सिल्वर का था और तो एक एक सीखने को मिला कि हां यार ट्रेडिंग ऐसेसे होती है। ऐसे प्राइस ऊपर होता है। ये कहने ही वाला था कि 2011 में सिल्वर की वो रैली आई थी तब सिल्वर बड़ा वो लाइमलाइट में रहता था। एक एक बार ऐसा था कि मतलब ये कर डीमेट अकाउंट ओपन करवाते ही जैसे ही ट्रेड करना स्टार्ट किया सिल्वर किया फिर उसके बाद क्रूड ऑयल का पता चला ये क्रूड ऑयल कुछ होता है उस दिन लकीली वेडनेसडे के दिन इन्वेंटरी आती है क्रूड ऑयल की वो इतना शानदार स्पाइक आया कि हमारा पैसा डबल हो गया [हंसी] डबल हो गया हमें लगा यार इससे अच्छी कोई चीज हो ही नहीं सकती है तो बहुत शानदार चीज है तो फिर कैलकुलेशन हो जाती है यार पैसा ऐसा डबल हो रहा है 10 दिन में इतना 20 दिन में इतना एक्स्ट्रा कहते जिंदगी भर का अगले इन्वेंटरी तो फिर नेक्स्ट वेडनेसडे आनी थी उसमें सारा चला गया [हंसी] तो ऐसे करके ये जर्नी स्टार्ट की और उसमें हम दोनों स्टार्टिंग से ही साथ रहे। अच्छा मतलब पहले दिन से ट्रेडिंग में किसी भी चीज में कुछ भी किया, एजुकेशन में किया स्टार्टिंग से साथ थे। ओके। तो ये आपकी ट्रेडिंग की एक जर्नी स्टार्ट हो गई। जर्नी स्टार्ट हुई। इसमें टीचिंग कहां पर इंट्रोड्यूस हुई? टीचिंग सर 2018 में जब हम ऐसे 13 के एंड में 14 तक करके थक लिए 15 के बाद में 15 में हमने सोचा कि यार हां अब सीखना पड़ेगा ही मतलब सीखे बिना चलेगा नहीं तो जैसा बताया कि भाई स्टॉक के प्राइस ऊपर नीचे हो रहे हैं एक ही सिंपल रीज़न है डिमांड एंड सप्लाई उसको एक्सप्लोर किया एक्सप्लोर किया 3 साल में जब कुछ समझ में आया कि यार हां ऐसा करके ही कुछ हो सकता है और उससे फिर हमें कुछ अच्छे रिजल्ट्स मिलने लगे तब फिर हमने सोचा यार कि इसको लोगों को बताना चाहिए तो 2018 में हमने ने ऑफलाइन क्लासेस स्टार्ट करें और वो ऑफलाइन क्लासेस भी इतनी ज्यादा बड़ी नहीं थी क्योंकि उस टाइम पे उतने ज्यादा अवेयर नहीं थे लोग। मतलब लोग लोग खुद से भी कन्विंस नहीं थे कि उन्हें स्टॉक मार्केट में काम करना चाहिए या सीखना चाहिए। बट सम हाउ लोग पहुंच रहे थे हमारे पास। वहां से हमने टीचिंग स्टार्ट करी। फिर 2019 में कोविड से पहले ही हमने ऑनलाइन भी स्टार्ट किया था। और फिर कोविड ने तो सबको बूम दे ही दिया। और वो एक बेस्ट टाइम था हम सबके लिए मार्केट को देखने का। उसके बाद उसकी रैली में और फिर इतने सारे एग्जांपल्स और सेक्टर एंड जनरल लाइफ की चीजों का उस टाइम पे मास्क और सैनिटाइजर आज तक हम उसको एक बेस्ट एग्जांपल मानते हैं कि भ कैसे मास्क और सैनिटाइजर की प्राइसेस इतनी शानदार तरीके से ऊपर चली गई थी कि सॉर्टेड था कि सप्लाई बहुत कम है। डिमांड बहुत ज्यादा है। और वो चीज को रिलेट करके हमने स्टॉक्स में किया। तो 2020 के बाद से फिर और ज्यादा शानदार तरीके से कंटिन्यू। आपने दोनों ने सेम वर्ड यूज़ किया डिमांड एंड सप्लाई और डिमांड एंड सप्लाई हम सभी लोगों को मालूम है क्या होती है। आपका उसको देखने का तरीका आपको क्या लगता है कैसे अलग है कंपेयर टू पीपल मतलब व्हाई और हाउ आई मीन इट इज वैरी सरप्राइजिंग कि आप पिछले कितने सालों से ये दो कांसेप्ट है डिमांड और सप्लाई सबको मालूम है लेकिन आपका फोकस सिर्फ एक चीज पे रहा हाउ यू लुक एट डिमांड एंड सप्लाई डिफरेंटली कंपेयर टू अदर पीपल आपका डिमांड सप्लाई को देखने का तरीका दुनिया से अलग कैसे है एज इन व्हाई हाउ यू आर ओनली लुकिंग एट डिमांड सप्लाई एंड मेकिंग मनी और ट्रेडिंग व्हाट सोएवर? देखिए सिंपल है कि एव्री बयर नीड ए सेलर और हर एक सेलर को एक बायर की नीड है उस चीज के ऊपर में जब भी अपन शेयर्स बाय करते हैं लेट्स सपोज 1000 क्वांटिटी बाय करनी है अपने को तो अपन ने देखा होगा कि वहां पर एक बार में बहुत बार क्वांटिटी नहीं आती। क्यों? क्योंकि वहां पर उतने सेलर अवेलेबल ही नहीं है वहां पर। तो जितनी क्वांटिटी आ गई पार्शियली वो आ गई और उसके बाद में प्राइस वहां से हक आ जाती है। तो वहां से हमें एक क्लू मिला कि लाइक कि जितने सेलर अवेलेबल है ना उतनी तो बाइंग हो सकती है। बट हम किसी को फोर्स तो नहीं कर सकते ना कि यहां पर मुझे इतनी क्वांटिटी चाहिए ही चाहिए वहां पर। एंड उसके बाद में हमने इस पैटर्न को कंटीन्यूअसली नोटिस करा कि शायद बिग प्लेयर्स यही चीज करते हैं। उनको शायद बड़ी क्वांटिटी के अंदर में बाय करना है। तो उनको वहां पर कोई ना कोई सेलर चाहिए। हमने इस चीज के अंदर में यह भी देखा कि अब शायद मे बी कि यहां पर बिग प्लेयर्स को बाय करना है तो जो उनको सेलर्स चाहिए तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] वो रैंडमली तो सेल आएंगे सेलर आएंगे नहीं वहां पर और हर कोई वहां पर क्यों सेल करना चाहेगा बट ऐसा कोई एजेंडा बन जाए ऐसी कोई न्यूज़ सर्कुलेट हो जाए जिसकी वजह से लोग पैनिकिक हो वहां पर पैनिकिक सिचुएशन क्रिएट हो तो मे बी कि वहां पर उनको सेलर मिल जाए और जब ये चीज हम लोगों ने कंटीन्यूअसली देखी तो हमें समझ में आया कि हां इंस्टीटशंस ही कहीं ना कहीं ही डिमांड एंड सप्लाई के पीछे रिस्पांसिबल है। और अगर हमें भी मार्केट में पैसा बनाना है तो अगर हमें यह पता लग जाए कि लाइक बिग प्लेयर्स कहां पर बाय कर रहे हैं, कहां पर सेल कर रहे हैं। उस चीज को अगर अपन अच्छे से सीख गए ना तो हम लोग भी पैसा बना सकते हैं। जैसे कि मतलब मेरे को आपकी बात से जो समझ में आया वो ये है कि अगर किसी इंस्टीट्यूशन ने बाय करना है। मान लेते हैं सूरज जी वो इंस्टीट्यूशन है। सूरज जी ने बाय करना है तो मार्केट में ऐसा पैनिकिक क्रिएट होगा जहां पर रिटेल पार्टिसिपेंट सेलर बनेगा और इंस्टीट्यूशन बाय करके निकल जाएगा। ऐसा कुछ नहीं हर बार ऐसा नहीं कह सकते कि हर बार इंस्टीट्यूशन बस लोगों को पे नहीं करे। बट आप एक चीज समझिए कि लाइक कि इंस्टीट्यूशन को कहीं पर बल्क के अंदर में बाय करना है। अब वहां पर जितनी क्वांटिटी अवेलेबल है सेल के लिए उतना तो हो जाएंगे। वो एक पर्टिकुलर प्राइस पे नहीं एक पर्टिकुलर रेंज पे बाय करते हैं। लेट्स सपोज 120 से लेके 125 तक उन लोगों को बाय करना है। ठीक है? अब 120 से लेके 125 के ऊपर में जितने सेलर अवेलेबल थे उनकी वहां पर उतनी क्वांटिटी एग्जीक्यूट हो गई है। अब जो क्वांटिटी रिमेनिंग रह गई है वो रिमेनिंग ही है। उनको हम बोलते हैं पेंडिंग ऑर्डर्स। ठीक है? और वो पेंडिंग ऑर्डर इंस्टीटशंस के हैं। वो कहीं ना कहीं वो कैंसिल नहीं करते उन पेंडिंग ऑर्डर्स को। अब हम कहीं ना कहीं ये भी मानते हैं कि प्राइस जो है वो अप तभी जाएगी अगर वहां पर कुछ ना कोई चीज पेंडिंग रह गई है तो। हम क्योंकि अगर पेंडिंग ऑर्डर नहीं रहे सारे ऑर्डर एग्जीक्यूट हो गए तो प्राइस के पास में कोई रीजन ही नहीं है अप जाने का। पेंडिंग ऑर्डर बच गए हैं। लेट्स सपोज कि 1 करोड़ ऑर्डर की वहां पे डिमांड आई और वहां पर 50 लाख ही एग्जीक्यूट और अगर 50 लाख पेंडिंग है तो ही प्राइस ऊपर गई। 50 लाख पेंडिंग है 120 से 125 के बीच में प्राइसेस अभी चल रहे हैं मान लो 128 पे। हां राइट है। तो वहां पर जो पेंडिंग ऑर्डर फ्यूचर में कभी भी प्राइस वहां पर आएगी तो सबसे पहले वो पेंडिंग ऑर्डर एग्जीक्यूट होंगे तो प्राइस में दोबारा से हक आएगा। बस यही इंस्टीटश के पैटर्न को इसी ब्लूप्रिंट को अगर फॉलो करते हैं उनके फुटप्रिंट को तो हम लोग भी पैसा बना सकते हैं। अब इसमें ऐसा नहीं कि एग्जैक्टली कितने पेंडिंग ऑर्डर्स हैं। बट ये एक क्लू मिल गया है वहां पर कि अगर सडन प्राइस के अंदर में एक स्पाइक आए तो कुछ ना कुछ वहां पर पेंडिंग है और प्राइस अगर दोबारा वहां पर आएगी तो वो पेंडिंग ऑर्डर एग्जीक्यूट होंगे और प्राइस वहां से अप जाएगी। यह एक मैं आपको छोटी सी हिंट दे रहा हूं। बस इस चीज को और डिटेल के अंदर में हम गए तो हमें यह समझ में आया कि ऐसा एरिया कैसे आइडेंटिफाई करें जहां पे सबसे ज्यादा पेंडिंग ऑर्डर है। यही मेरा क्वेश्चन आने वाला था कि ढूंढा कैसे जाए इस चीज को। बिल्कुल एक्सैक्टली। तो उसके लिए हमने ये देखा कि लाइक कि हर एक टाइम फ्रेम के ऊपर में हम चेक करते हैं कि स्मॉलर टाइम फ्रेम के ऊपर में कम पेंडिंग ऑर्डर्स होते हैं। क्योंकि वहां पर एक रेंज छोटी सी रेंज होती है। बड़े टाइम फ्रेम के ऊपर में ज्यादा पेंडिंग ऑर्डर्स होते हैं वहां पर। तो ऐसे कुछ पैटर्न कि स्पाइक कितनी स्ट्रांग आई है जिसको हम बोलते हैं हमारी टेक्निकल लैंग्वेज के अंदर में कि एक्साइटिंग कैंडल या एक्सप्लोसिव कैंडल अगर वहां पर एक ग्रीन एक्सप्लोसिव कैंडल बनी है तो मतलब वहां पर पेंडिंग ऑर्डर्स अच्छे खासे हैं और वो ग्रीन एक्सप्लोसिव कैंडल जितने बड़े टाइम फ्रेम पे बनी है पेंडिंग ऑर्डर्स उतने ही ज्यादा है। तो ये कुछ एक हमारे पैराटर्स हैं जिनके बिहाफ पे हम ये डिसाइड करते हैं कि हां इस एरिया के अंदर में पेंडिंग ऑर्डर्स ज्यादा है और इस एरिया के अंदर में पेंडिंग ऑर्डर्स कम है। साथ में हम यह भी देखते हैं कि वहां पर बयर और सेलर की फाइट कितनी देर तक चली है। अगर बायर और सेलर की फाइट कम देर तक चली है और इमीडिएटली एक स्पाइक आती है। दैट मींस वहां पर पेंडिंग ऑर्डर्स ज्यादा होंगे और पेंडिंग ऑर्डर्स ज्यादा हैं तो फिर वहां पर जब भी प्राइस नीचे आएगी वहां से रिएक्शन आने के वापस से चांसेस रहेंगे। यहां पर दो चीजें हैं। एक मुझे पेंडिंग ऑर्डर्स पता हैं। वो तो मुझे इंट्राडे में दिख जाएंगे। मुझे पेंडिंग ऑर्डर्स पता है तो मैं समझ जाऊंगा कि प्राइसेस यहां पर आ सकते हैं। बट आपने बोला बट आपने बोला कि बड़े टाइम फ्रेम पे ये ज्यादा होगा। बड़े टाइम फ्रेम में पेंडिंग ऑर्डर तो मैं नहीं देख सकता। मैं सिर्फ एक्सप्लोसिव कैंडल देख सकता हूं। तो जहां पर मेरी कैंडल बहुत बड़ी बन रही है वहां पर मैं ये मान लेता हूं। अभी के लिए मैं मान लेता हूं कि पूरी थ्योरी सच है। मैं मान लेता हूं कि यहां पर आपका पेंडिंग ऑर्डर पेंडिंग था। तो पहला क्वेश्चन इंट्राडे में तो पेंडिंग ऑर्डर दिख जाते हैं मुझे ऑर्डर बुक के अंदर। पोजीशनली आप इसको कैसे देख रहे हैं? दूसरा अगर मैं ये अस्यूम कर रहा हूं कि ये बड़ी कैंडल जो बनी है वो पेंडिंग ऑर्डर की वजह से बनी है तो ये कैसे पता लगाया जाए कि बाकी और भी पेंडिंग ऑर्डर्स हैं या नहीं है क्योंकि ये भी तो हो सकता है कि सारे पेंडिंग ऑर्डर्स सिर्फ यहीं पर हो और वो सारे फुलफिल हो चुके हो ये दो क्वेश्चंस मैं कैसे इंटरप्रेट करूं इस चीज को हम लोग ये नहीं देखते कि इंट्राडे के अंदर में वहां पर मार्केट डेप्थ के अंदर में कितने पेंडिंग ऑर्डर्स दिख रहे हैं क्योंकि वो तो रिटेलर्स के हैं वो तो कभी भी कैंसिल भी हो सकते हैं। अच्छा हमारा मानना ये है कि अगर वो सारे एग्जीक्यूट हो चुके होते तो प्राइस ऊपर नहीं जाती। हम एग्जीक्यूट नहीं हुए हैं। कुछ ना कुछ पेंडिंग है। उसी वजह से प्राइस ऊपर गई है। और इस पैटर्न को हमने कंटीन्यूअसली मल्टीपल टाइम फ्रेम पे, मल्टीपल चार्ट्स पे, मल्टीपल स्टॉक्स के अंदर में इंडाइसेस में देखा कि जब भी प्राइस वहां पर वापस नीचे आती है वो पेंडिंग ऑर्डर एग्जीक्यूट होते हैं। प्राइस के अंदर में वहां से हक आता है। अब जो आप हायर टाइम फ्रेम की बड़े टाइम फ्रेम की बात कर रहे हैं। लेट्स सपोज मंथली, क्वार्टरली वगैरह इनके ऊपर में तो वहां पर जो बड़ी ग्रीन कैंडल बनी है ना तो हमारा यह मानना है कि वो कोई एक दिन की बाइंग नहीं है। वहां पे वो कंटीन्यूअसली बाइंग आती रही क्योंकि वन मंथ तक प्राइस कंटीन्यूअसली अप गई है तब जाके ग्रीन कैंडल बनी है। तो मतलब इंस्टीट्यूशन अग्रेसिवली उसके अंदर में बाइंग कर रहे हैं। अब अगर अपन उसी को छोटे टाइम फ्रेम के ऊपर में रिफाइन करें तो उस मंथली वाले टाइम फ्रेम को हम डेली के ऊपर में जाते हैं और वहां पर ये देखते हैं कि पेंडिंग ऑर्डर का बंच कहां पर आया है जहां से प्राइस अग्रेसिवली अप गई है। वो एरिया को हम स्पॉट करते हैं और फिर मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस के थ्रू एक बेस्ट एंट्री और एग्जिट पॉइंट निकालते हैं और उसको हम लोग ट्रेड करते हैं। सर इसको आप किसी एग्जांपल के थ्रू बता सकते हैं मे बी चार्ट्स पे या प्राइस के पैटर्न में या फिर विंडो पे कहीं पर आप मुझे दिखा देंगे पेंडिंग ऑर्डर कैसे देखे जाए या इस चार्ट को इंटरप्रेट कैसे करना है कोई एक लाइव एग्जांपल लाइव एज इन रियल लाइफ का हो सकता है या पुराना एग्जांपल हो सकता है एनएमडीसी का अभी जो मंथली का डिमांड ज़ोन था डेली का टाइम फ्रेम था वो वाला एग्जांपल दिखाना यहां पे जैसे ये एनएमडीसी का चार्ट है मंथली टाइम फ्रेम है तो हमारा डिमांड सप्लाई का कांसेप्ट क्या कह रहा है कि यार जहां पर प्राइस का इमंबैलेंस हुआ हो वहीं से प्राइस अप या डाउन बन जाती है। और इमंबैलेंस होने से पहले कहीं तो प्राइस में फाइट चल रही है और उसी फाइट में होते हैं पेंडिंग ऑर्डर्स। तो जो एक नैरो रेंज की कैंडल नैरो रेंज की कैंडल बनती है उसको हम बोलते हैं बेस कैंडल। तो जैसे यहां पर ये आपको टू रेड कैंडल दिख रही है जो अक्टूबर और नवंबर की है। ये बेस कैंडल है। मतलब यहां पर पूरे 2 महीने तक प्राइस रेंज बाउंड रही है। और इस रेंज बाउंड में प्राइस ने स्ट्रगल किया है। हम और जब वो स्ट्रगल खत्म हुआ तो इतनी शानदार स्पाइक के साथ एक ग्रीन एक्साइटिंग कैंडल बनी। ठीक है? मतलब क्लियर हो गया कि अब कुछ ना कुछ इमंबैलेंस हो गया और इमंबैलेंस में पता चला है कि बयरर्स ज्यादा हैं। तो अपना लॉजिक सिंपल है। एंबैलेंस हुआ प्राइस ऊपर गई है। बायरर्स ज्यादा है तो पेंडिंग ऑर्डर्स भी बाइंग के ही होने चाहिए। तो जब ये मंथली का एरिया बना मैं इसे मार्क करता हूं कुछ इस तरह से। सेकंड ये मंथली एरिया है। ठीक है? अब बाद में प्राइस जब इस मंथली के ज़ोन में आई ना तो देखिए यहां से ये रेड कैंडल ने बहुत अच्छी तरीके से प्राइस को ऊपर की तरफ मूव कराया। अब इसको मैं लोअर टाइम फ्रेम पर यदि ब्रेकडाउन करूं जैसे हम डेली के टाइम फ्रेम पर आते हैं तो यही सेम उस मंथली के अंदर ही आपको डेली पर ये एक बहुत शानदार एरिया दिखेगा जिसमें ये तीन कैंडल वो है जो एकदम नैरो रेंज की छोटी कैंडल है इनकी बॉडी पार्ट बहुत छोटा है बहुत नैरो है और उसके बाद का एक्साइटिंग कैंडल देखिए कितनी शानदार तरीके से प्राइस में रैली आती गई तो ऐसे करके लोअर टाइम फ्रेम और हायर टाइम फ्रेम पर जाकर हमने एक बंच पता किया कि यार बायरर्स का सबसे अच्छा बंच कहां पर है और वो हमें यही लगा कि यार मंथली वाला एरिया और डेली वाला एरिया कहीं ना कहीं कॉमन है। तो ये एरिया में सबसे अच्छी फाइट हुई है। सबसे अच्छी फाइट का मतलब सबसे सबसे अच्छे पेंडिंग ऑर्डर्स और फिर प्राइस जब भी आई इसका टाइमिंग है लाइक जैन 20 23 जैन को तो यहां पर पहुंचते ही प्राइस ने बहुत शानदार स्पाइक दिया। यह वो वाला प्राइस है जो बिल्कुल उसकी बॉटम को टच कर रहा था। जिसकी विकक उस उस बैंड को टच कर रही थी आपकी मंथली चार्ट पे। मंथली के तो जस्ट बॉडी को ही टच करी। मंथली के तो जस्ट अपर रेंज को ही टच किया। हॉरिजॉन्टल लाइन सिर्फ टच किया। मंथली के तो अपपर रेंज को ही। अच्छी बात क्या थी? जैसे ही मंथली का जो पेंडिंग ऑर्डर का स्टार्टिंग एरिया था ना वहीं पर डेली पर मेरे पास ये एक शानदार फॉर्मेशन था। तो मतलब प्राइस मंथली और डेली के एक सेम रेंज में प्राइस पहुंची है कि ये पर्टिकुलर प्राइस थी 76। तो वो मंथली का भी बाइंग एरिया है और डेली का भी बाइंग एरिया है। वहां पर पहुंची और वहां के बाद फिर इसने अच्छा अपमूव दिया और 88 के आसपास प्राइस पहुंची। ये हो गया हायर टाइम फ्रेम प्लस लोअर टाइम फ्रेम को कंबाइन करके देखना। अब इसके बाद भी देखेंगे ना जैसे ये रैली आई। फिर उसके बाद ये हमारी तरह से एक एक ज़ोन का काम कर रहा है। डिमांड ज़ोन का काम कर रहा है। प्राइस वापस इस एरिया में आती है। फिर यहां से ऊपर जाती है। तो ये ऐसे ही चलता रहता है। ओके। मतलब यहां पर हमने एग्जैक्टली वही किया जो मैंने आपको बताया ना कि मंथली के टाइम फ्रेम पे एक ग्रीन कैंडल बनी है। मतलब पूरे मंथ कंटीन्यूअसली बाइंग आई है। अब हमने वह पता किया कि उस मंथ के अंदर में सबसे ज्यादा बाइंग किस एरिया के अंदर में आई है। वो हमने स्मॉलर टाइम फ्रेम पे जाके रिफाइन करा दिल्ली के ऊपर में। दिल्ली पे हमें एग्जैक्टली वो डिमांड ज़ोन मिल गया जहां पे सबसे ज्यादा पेंडिंग ऑर्डर है। जहां से सबसे ज्यादा इमंबैलेंस आया। हमने उसको मार्क करा अलोंग वि द मंथली डिमांड ज़ोन। तो मतलब मंथली का डिमांड जोन है और उस मंथली का डिमांड जोन को रिफाइन करते हुए दिल्ली का डिमांड जोन मार्क कर रहा है। वहां पर हम एंट्री स्टॉप लॉस लगाते हैं। वहां पर प्राइस आई एंट्री लाइन को टच किया और फिर वहां से शूट अप हो गई। अब ये ज़ोन जितना ज्यादा अच्छा होगा ना रिकवरी उतनी ही स्ट्रांग आएगी। और उसके लिए मैंने आपको बताया ना कि ज़ोन अच्छा कैसे होगा? उसको कैसे आइडेंटिफाई करें कि ग्रीन एक्साइटिंग कैंडल कितनी पावरफुल बनी है। कितना गैप है बायर और सेलर के बीच का। हां। मतलब अभी ओपन क्लज़ ओपनिंग एंड क्लोजिंग का कितना अच्छा गैप है। ओपनिंग एंड क्लोज का जितना ज्यादा अच्छा गैप है तो मतलब वहां पर बाइंग अग्रेसिवली आई है और साथ के अंदर में नंबर ऑफ़ बेस कैंडल कम है तो मतलब पेंडिंग ऑर्डर्स वहां पर ज्यादा और पेंडिंग ऑर्डर्स जितने ज्यादा उतना ही स्ट्रांग रिकवरी आने के चांसेस हैं। ऐसा नहीं है कि ये एरिया कभी टूटते नहीं है। बट गेम तो पूरा प्रोबेबिलिटी का है। तो एटलीस्ट ऐसी प्रोबेबिलिटी को हम लोग खेलें कि जहां पर हमारे विनविन सिचुएशन के चांसेस ज्यादा हो। तो अगर आपने एक अच्छा स्ट्रांग डिमांड जोन आइडेंटिफाई कर लिया तो फिर यह मान के चलिए कि 80% केसेस में उसके टूटने के चांसेस कम ही रहेंगे। बट हां अगेन वी कैन नॉट स्टॉप एनीबडी फ्रॉम बाइंग एंड सेलिंग। हम ये हर क्लासेस के अंदर में ये चीज बोलते हैं क्योंकि जिसका जब मन करेगा वो उतनी बाइंग करेगा। जिसका जितना मन करेगा उतनी सेलिंग करेगा। यहीं पर इसी एरिया के ऊपर में अगर किसी ने बल्क के अंदर में सेलिंग करी तो यह एरिया टूट भी सकता है। बट अगेन वही बात है कि जो जहां पर एक अच्छे खासे पेंडिंग ऑर्डर हर बार वहां पर कोई इतनी स्ट्रांग सेलिंग क्यों करेगा? जब वहां पर दिख रहा है क्लियरली इंस्टीटश के यहां पर पेंडिंग ऑर्डर तो मे बी कि वहां पर लोग बाइंग ही ज्यादा करेंगे तो ये चीजें चलने के चांसेस उतने ही ज्यादा बढ़ जाते हैं। तो गोल यही है कि एक अच्छा स्ट्रांग वो एरिया निकालें जिसमें पेंडिंग ऑर्डर ज्यादा से ज्यादा हो और उसके टूटने के चांसेस कम से कम हो। वो अगर आपने ढूंढ लिया तो फिर ट्रेडिंग के अंदर में 70-80% प्रोबेबिलिटी 2:1 के साथ में आप प्ले करते हैं तो आपको एक अच्छी विन रेट मिल जाती है। बस इसी प्रोसेस को फॉलो करना है। अगर आप सिस्टेटिकली इसको फॉलो कर दे तो फिर पैसा बन जाता है ट्रेडिंग के अंदर में। गाइस मैं आपको ये बात बता दूं कि आज अरुण जी और सूरज जी जितने भी स्टॉक्स के नाम ले रहे हैं दे आर नॉट और दे शुड नॉट बी सीन एज अ रिकमेंडेशन टू बाय और सेल नॉट इवन टू ट्रेड। हम सिर्फ एजुकेशनल पॉइंट ऑफ व्यू से कुछ शेयर्स के नाम यहां पर ले रहे हैं आपके लिए। सो दैट आपको एग्जांपल अच्छे से समझ में आ जाए। आप जिस मर्जी स्टॉक के अंदर सेम कांसेप्ट को अप्लाई कीजिए और एक बार नहीं कम से कम 100 बार, 200 बार, 300 बार अप्लाई कीजिए। मेरा अगला क्वेश्चन भी वैसे यही होने वाला है कि वो पूरी स्कैनिंग कैसे करते हैं। बट उस पे अभी हम आएंगे लेकिन सबसे पहला आपका डिस्क्लेमर यही है आपके लिए कि इन शेयर्स को प्लीज रिकमेंडेशन टू ट्रेड भी मत समझिएगा। फॉरगेट अबाउट इन्वेस्टिंग और नॉट इन्वेस्टिंग। ये सिर्फ सीखने के पॉइंट ऑफ व्यू से रखिएगा अपने पास। सूरज जी प्लीज। जैसे रिसेंटली अभी जो भी ईरान और यूएस के क्राइसिस चल रहे हैं मार्केट काफी पैनिकिक हुआ नीचे आया तो इसमें LNT काफी अच्छा ऑल टाइम हाई के बाद 4400 के बाद काफी अच्छा नीचे आया था और ये जहां पर नीचे आया ये ये मैंने LNT का वीकली का टाइम फ्रेम ओपन कर रखा है। अब जैसे थोड़ी देर पहले जिस एग्जांपल में हमने बात करी एग्जैक्टली वैसा ही ये सेम एरिया है। इसको हम बोल रहे हैं वीकली का डिमांड ज़ोन। ये वाला एरिया। इसको हम डिमांड जोन इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि यहां पर मार्केट थोड़ी सी बड़ी-बड़ी कैंडल्स के बाद साइडवेज हो गई और उसके बाद मुझे एक एक्साइटिंग कैंडल मिली कि एक एक फॉर्मेशन नैरो रेंज का चला देन उसके बाद एक्साइटिंग कैंडल इतनी शानदार थी देखिए इसने उसको ऑल टाइम पे पहुंचा एक तरह से इस वाली रेंज को भी ब्रेक कर दिया था इसने तो अब हम ये मान कर चले यार यहां पर कुछ ना कुछ तो था पेंडिंग ऑर्डर्स अब जैसे ही प्राइस अब मैं लोअर टाइम फ्रेम पर जा रहा हूं जैसे ही प्राइस इस रेंज पर आती है इस रेंज पर आई है तो ये देखिए सेम डे कितनी शानदार रिकवरी थी कितनी शानदार रिकवरी और कल के दिन तो 5% एलएटी अब भी हो गया था। अच्छा। तो ये ये जो रैली आती है ये यहां से पेंडिंग ऑर्डर्स को पिक करके यही हमारा कंप्लीट कांसेप्ट है। बट इसमें कुछ एक बातें जो अपन को बहुत ज्यादा ध्यान रखनी है वो ये है कि प्राइस आ किस तरह से रही है। यदि प्राइस बहुत ही अग्रेसिवली आ रही है ना तो हम लोअर टाइम फ्रेम प्ले कर ही नहीं सकते। जाहिर सी बात है लोअर टाइम फ्रेम पर कम पेंडिंग ऑर्डर क्योंकि वहां एक दिन की ही बाइंग सेलिंग है। हायर टाइम फ्रेम पर ज़्यादा पेंडिंग ऑर्डर क्योंकि वहां पर मल्टीपल टाइम मल्टीपल डज़ की बाइंग सेलिंग है। राइट? तो यदि प्राइस में अग्रेसिव सेलिंग आ रही है और मैं किसी छोटे टाइम फ्रेम के ज़ोन की बात करूंगा तो वो आसानी से ब्रेक हो जाएगा। वही बात कि वी कांट स्टॉप एनीवन फ्रॉम बाइंग इन सेलिंग। तो अग्रेसिवली वो सेलिंग आएगी तो लोअर एरिया ब्रेक भी हो सकता है। बट अग्रेसिव सेलिंग को रोकने के लिए हायर टाइम फ्रेम काम कर जाता है क्योंकि हायर टाइम फ्रेम में पेंडिंग ऑर्डर्स भी ज्यादा है। वहां पर बाय इंस्टिटशंस का ज्यादा टाइम तक इंटरेस्ट बना रहता है। सर यहां पर अभी हम और भी एग्जांपल आई वुड डेफिनेटली लाइक टू सी लेकिन पहला क्वेश्चन आपने एक जगह पे मंथली चार्ट देखा, एक जगह पे क्वार्टरली देखा, एक पे वीकली भी देखा। डेली नहीं देखा वो मैं समझ गया। वो छोटा टाइम फ्रेम हो गया हमारा। लेकिन सबसे पहले आप अपनी स्टार्टिंग कौन से टाइम फ्रेम से करते हैं या करना चाहते हैं? मुझे जो अभी तक समझ में आया है मैं अपने व्यूअर्स के लिए भी बोल देता हूं। एंड प्लीज करेक्ट मी इफ आई एम रोंग। [नाक से की जाने वाली आवाज़] मुझे सबसे पहले देखने हैं ऐसे स्टॉक्स जब मुझे स्कैनिंग करनी है जिनमें कुछ-कुछ साइडवेज वाली कैंडल बनी हुई है और उसके बाद मुझे एकदम से कोई बड़ी एक्साइटिंग कैंडल दिख रही है तो मैं समझ जाऊंगा कि यहां कहीं पर मेरी पेंडिंग ऑर्डर्स ड्यू रह गए होंगे जिसकी वजह से ये वाली मूव आई है। उसके [नाक से की जाने वाली आवाज़] बाद मैं देखूंगा किसी छोटे टाइम फ्रेम पे अगर उसकी टेस्टिंग होती है या अगर मुझे वहां पर दोबारा से ज़ोन क्रिएट होता दिखता है तो वहां पर मैं बाय करने के बारे में सोचूंगा। दिस इज़ व्हाट आई हैव अंडरस्टुड? एम आई राइट इन सेइंग। थोड़ा सा अपन इसको ऐसा कह सकते हैं कि ऐसा नहीं कि साइडवेज पैटर्न बना तो मतलब वहां पर कुछ ना कुछ डिमांड जोन होगा और जो ये टाइम फ्रेम का सिलेक्शन है वो अपन अपनी मर्जी से रैंडमली नहीं कर सकते। हां यही मेरा क्वेश्चन था कि जरूर कोई साइंस होगी इसके पीछे जो आपने लगाई हुई होगी। देखिए ये डिपेंड करेगा कि हमारा ट्रेडिंग स्टाइल कैसा है? अगर हम इंट्राडे ट्रेडिंग कर रहे हैं तो फिर हमें छोटे टाइम फ्रेम का बंच बनाना पड़ेगा। बेसिकली तीन टाइम फ्रेम हम लोग सेलेक्ट करते हैं जिसे हम मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस बोलते हैं। ओके? अब अगर हम इंट्राडे ट्रेडिंग कर दें तो फिर हमारा जो सबसे बड़े से बड़ा टाइम फ्रेम है ना वो होगा डेली और हम जो एंट्री स्टॉप लॉस प्लॉट करते हैं वो करते हैं हम 15 मिनट के ऊपर में। अब मान के चलिए हमें करनी है स्विंग ट्रेडिंग प्लान करनी है तो फिर हमारा जो सबसे बिगर टाइम फ्रेम होगा वो होगा वीकली। अब हम सोच रहे हैं कि यार कि कुछ लॉन्ग टर्म स्पेसिफिक कुछ प्लान करना है कि किसी स्टॉक में कुछ लॉन्ग टर्म स्पेसिफिक बन रखा है। तो फिर उसके लिए फिर क्वार्टरली हाफ ईयरली ईयरली इन कैंडल्स को अपन लेते हैं। अब इसमें एक चीज और है कि ऐसा नहीं कि अपन ये डिसाइड करें कि मुझे इस एक्स व जेड स्टॉक्स के अंदर में इंट्राडे करना ही करना है। हम अगर उसमें कुछ इंट्राडे का बना है तो ही अपन वहां पर ढूंढ पाएंगे। हम और ऐसा नहीं कि लाइक कि मान के चलिए कि किसी स्टॉक के अंदर में हमें इन्वेस्टमेंट प्लान करना है। तो अगर हायर टाइम फ्रेम का कोई अच्छा डिमांड जोन नहीं है तो मतलब उसमें इन्वेस्टमेंट की कोई भी अच्छी अपॉर्चुनिटी अभी नहीं है। हम रैंडमली अपनी मर्जी से ना किसी को इंट्राडे ट्रेड कर सकते हैं ना किसी को इन्वेस्टमेंट के लिए प्लान कर सकते हैं। मार्केट और वो स्टॉक जो हमें अपॉर्चुनिटी दे रहा है वही हमें गैब करनी पड़ेगी। अगर किसी स्टॉक के अंदर में इंट्राडे मिल रही है तो इंट्राडे ट्रेड करेंगे। किसी के अंदर में स्विंग ट्रेडिंग अपॉर्चुनिटी मिल रही है तो स्विंग ट्रेड करेंगे और किसी के अंदर में इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटी मिल रही है तो हम फिर उसको इन्वेस्टमेंट ट्रेड करेंगे। अब मान के चलिए कि लाइक मुझे ऐसा है कि मुझे इन्वेस्टमेंट करना है। तो मैं मेरी मर्जी से ऐसा नहीं कि मुझे इस स्टॉक के अंदर में करना है। हो सकता है कि मैं 100 स्टॉक्स स्कैन करूं और उसके अंदर में मुझे सिर्फ 10 स्टॉक ऐसे मिले जिनमें मुझे हायर टाइम फ्रेम के डिमांड जोन मिल जाए और वो भी वो कि जो मुझे चाहिए कि लाइक इनके अंदर में एक अच्छी ग्रीन एक्सप्लोसिव कैंडल बनी है। प्रॉपर पेंडिंग एरियाज हैं। तो उनको ही मैं इन्वेस्टमेंट के लिए पिक कर सकता हूं। और उन्हीं में से मैं सोचूं कि यार इन 100 स्टॉक्स में कुछ मेरे पास में स्विंग ट्रेडिंग के लिए या इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए। तो जरूरी नहीं कि वह जो 10 स्टॉक थे वो के वही सेम रिपीट हो जाए। कोई भी उनमें से कोई एक दो स्टॉक हो सकता है और हो सकता है कि कोई अनदर फाइव टू सेवन स्टॉक्स हमें स्विंग ट्रेडिंग के लिए भी मिल जाए। तो कहने का मतलब यही कि हम हमारी मर्जी से किसी स्टॉक के अंदर में ना तो इंट्राडे जबरदस्ती क्रिएट कर सकते हैं और ना ही एक लॉन्ग टर्म अपॉर्चुनिटी क्रिएट कर सकते हैं। उस स्टॉक ने जो अपॉर्चुनिटी हमें दी है वो ही हम प्ले कर सकते हैं। अब यह हमारा गोल है कि मुझे कैसा ट्रेडर बनना है? मुझे इंट्राडे बनना है या स्विंग ट्रेडिंग खेलनी है या फिर इन्वेस्टमेंट खेलनी है। अगर मैं ओके हूं कि मुझे कोई भी अपॉर्चुनिटी मिले मैं प्ले करूं। तो फिर जिस स्टॉक में जो मिल रही है मैं उसको डायरेक्टली प्ले करूंगा। बट हम स्ट्रांगली रिकमेंड करते हैं कि एक बार हायर टाइम फ्रेम का व्यू क्लियर हो आपका क्योंकि हायर टाइम फ्रेम की पिक्चर क्लियर है ना तो फिर आपके स्मॉलर टाइम फ्रेम के व्यू भी क्लियर होंगे। आपने मेरे ख्याल से आपने जो पिछले दो मिनट डिस्कशन किया यह डिस्कशन सभी को 0.5 एक्स स्पीड पर आराम से दो बार सुनना चाहिए क्योंकि इससे बहुत सारे लोगों का सोचने का तरीका बदलेगा। ज्यादातर लोग आज की डेट में क्या करते हैं व्हेन आई मीट अ लॉट ऑफ़ ट्रेडर्स और हम सभी लोगों ने कभी ना कभी किया है उस चीज को। हम लोग ये सोच के बैठते हैं आज मैं इंट्राडे करूंगा। और मैं निफ्टी या बैंक निफ्टी खोल के बैठ गया। अब मैं इसमें इंट्राडे करूंगा। मेरे ख्याल से आप तो ऐसा कभी भी नहीं करते होंगे। जो आपने बताया है अभी उसके अकॉर्डिंग तो यह रूल फिट ही नहीं बैठता आपका कि आप डिसाइड कर रहे हैं कि आप किस में इंट्राडे या स्विंग या पोजीशन करेंगे। आप यह कह रहे हैं कि मार्केट में 2000 3000 5000 6000 अपॉर्चुनिटीज में से जिस एक दो या तीन स्टॉक में अपॉर्चुनिटीज मिलेंगी मैं सिर्फ उसमें काम करने वाला हूं। यू आर नॉट अ चूजर। नो बिल्कुल। वी आर आई पर्सनली फील दैट वी आर बिगरस्टर्स टू द मार्केट। मार्केट जो देगी उसी में से मुझे चूज़ करना पड़ेगा। मेरे ख्याल से आप भी इसी स्टेटमेंट की बात कर रहे हैं। दैट्स अमेजिंग थॉट। मतलब आपने बहुत ही बारीकी आपने बहुत ही कामली इस बात को 5 मिनट के अंदर बोल दिया है। बट मुझे पर्सनली लगता है कि यह अभी तक की डिस्कशन की एक बहुत ही इंपॉर्टेंट स्टेटमेंट है जो फोकस करनी चाहिए। सर आप एक एग्जांपल और दिखा रहे थे यूनियन बैंक का जिसमें अच्छा मुझे नहीं पता यूनियन बैंक में या किसी भी स्टॉक के अंदर क्या अपॉर्चुनिटी थी। बट मैं समझने की कोशिश करता हूं। मान लेते हैं कि मैं पोजीशनली इन्वेस्ट करना चाहता हूं या एक बड़े पीरियड के लिए इन्वेस्ट करना चाहता हूं। तो मैं इसके हाफ ईयरली को या इयरली को या क्वार्टरली चार्ट से स्टार्ट करूंगा। ऐसा मुझे करना चाहिए। परफेक्ट। मुझे नहीं पता यूनियन बैंक में क्या है। बट प्लीज बताइए सर। तो यूनियन बैंक के अंदर में जो क्वार्टरली टाइम फ्रेम की अपन बात कर रहे हैं। अब क्वार्टरली क्यों चूज़ कर रहे हैं? क्योंकि क्वार्टरली टाइम फ्रेम के ऊपर में हम कोई इन्वेस्टमेंट प्लान करना चाहते हैं। और ऐसा भी नहीं कि लाइक कि रैंडमली मैं इसके अंदर में क्वार्टरली ही टाइम फ्रेम ओपन कर रहा हूं। बट हां, मुझे ये देखना है कि मुझे इन्वेस्टमेंट के लिए इसमें कुछ मिल रहा है क्या? मैंने एक बार क्वार्टरली टाइम फ्रेम ओपन करा। मुझे यहां पर एक डिमांड ज़ोन मिल गया क्वार्टरली टाइम फ्रेम के ऊपर जो कि अभी मार्क भी कर रखा है चार्ट के ऊपर। अब ये जो क्वार्टरली का टाइम फ्रेम है यहां पर आपको एक ग्रीन एक्साइटिंग कैंडल दिख रही होगी। दिख रही है। अब इस ग्रीन एक्साइटिंग कैंडल मतलब ये तो पूरी क्वार्टरली की हो गई। स्मॉलर टाइम फ्रेम पे जाके अपन इसको रिफाइन करेंगे कि छोटा पेंडिंग एरिया मतलब छोटा एरिया जहां पर पेंडिंग ऑर्डर का बंच हो वो हमें कहां पर मिल जाता है। ठीक है? अगर वो हमें मिल गया तो मतलब यह मानेंगे कि हमें एक अच्छा सेटअप मिल रहा है इन्वेस्टमेंट करने के लिए। क्योंकि हमने सारे हायर टाइम फ्रेम लिए हैं। अच्छा मैंने जो क्वार्टरली के साथ में वीकली टाइम फ्रेम लिया वो क्यों लिया? क्योंकि मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस के अकॉर्डिंगली क्वार्टरली हायर टाइम फ्रेम है। मंथली जो है वो उसके ऊपर में हम ट्रेंड चेक करते हैं। अभी हमने ट्रेंड पे बात नहीं करी है। तो हम ऐसा कंसीडर कर रहे हैं कि ट्रेंड हमारे फेवर के अंदर में है। इसके अंदर में जब अगर अपन हमारा जो क्लासेस हमने YouTube पे और जो ऑब्सर्स के ऊपर में हम लोग डालने वाले हैं उसके ऊपर में आप लोग देखेंगे तो वहां पर आपको समझ में आ जाएगा ट्रेंड वाली क्लास के अंदर में कि ट्रेंड इसका हमारे फेवर के अंदर में है। अब हम जाते हैं वीकली टाइम फ्रेम के ऊपर में एग्जीक्यूशन ढूंढने के लिए कि हमारे पास में कोई अच्छा एग्जीक्यूशन है क्या? हम बिल्कुल भी फोर्स नहीं करेंगे। अगर कोई सेटअप मिला तो ही हम इन्वेस्ट करेंगे। अदरवाइज हम इस स्टॉक को छोड़ देंगे प्रॉफिट। हम गए वीकली टाइम फ्रेम के ऊपर में। वीकली के ऊपर में हमें एक प्रॉपर सेटअप मिल रहा है। देखिए क्वार्टरली की रेंज बहुत बड़ी है। हम डायरेक्टली क्वार्टरली पर भी प्ले कर सकते हैं। कोई प्रॉब्लम नहीं है। बट वही होता है ना कि अगर हमारा व्यू गलत हो तो स्टॉप लॉस छोटे से छोटा हो। यस। तो बस हमने उस रेंज को नैरो किया है। रिफाइन करा उस चीज को। क्वार्टरली की बड़ी रेंज को हमने रिफाइन करा वीकली पे। वीकली का मतलब ये नहीं है कि हम स्मॉलर टाइम फ्रेम पे आ गए। अब हमारा रिस्क ज्यादा हो जाएगा। क्योंकि हमने टाइम फ्रेम छोटा सेलेक्ट कर लिया। स्टिल हमारे पास में क्वार्टरली का पूरा सपोर्ट है क्योंकि हमने चेक तो पूरा क्वार्टरली से ही करा है। उस क्वार्टरली के साथ में वीकली का एक बहुत अच्छा डिमांड जोन हमें मिल गया जिसके अंदर में मल्टीपल देखिए ग्रीन एक्साइटिंग कैंडल भी है और एग्जैक्टली देखिए प्राइस फ्यूचर के अंदर में यहां पर आई है और यहां से आने के बाद में अप गई तो ये एक बहुत ही शानदार बेहतरीन एरिया हो सकता था यूनियन बैंक के अंदर में इन्वेस्ट करने के लिए और ऐसा ही नहीं जो मैं आपको यहां पर ये दिखा रहा हूं कि ये लास्ट टाइम भी जहां से चला है ना जिस डिमांड ज़ोन से वो भी क्वार्टरली का ही डिमांड जोन था अरुण जी एक क्वेश्चन पूछ सकता हूं मैं आपसे। जी सर बिलकुल। सर एक बार वो वीकली वाला चार्ट लगाएंगे प्लीज। हम तो सर यहां पे जो वीकली वाला मेरा डिमांड जोन आया वो मेरा जहां से आपका ये ब्लैक वाला एरो लाइन स्टार्ट हो रही है इस वाली एक्साइटिंग कैंडल में मुझे समझ में आया नहीं जहां पे ये लाइन स्टार्ट हो रही है हम हम हां इसी वाली कैंडल में ऊपर ये मैं एक हॉरिजॉन्टल लाइन पे यहां ये इसके साथ वाली जो डोजी कैंडल बनी हुई है हां हां राइट साइड पे इसके साथ जो बड़ी कैंडल बनी हुई है ये ग्रीन एक्साइटिंग कैंडल तो यहां पर मुझे समझ में आ गया तो ये वाली जो कैंडल बनी हुई है ग्रीन वाली एक्साइटिंग कैंडल इसकी क्लोजिंग मुझे समझ में आ गया कि मेरा डिमांड ज़ोन के बाद एक्साइटिंग कैंडल बन गई है। तो मैं इस स्टॉक को यहां पर परचेस करूंगा या जब वापस डिप आएगा वहां पर परचेस करूंगा। एग्जैक्टली कहां पर परचेस करने के बारे में आप सोचते हैं इसको? जब प्राइस वापस से उस एरिया के अंदर में आएगी तब हम परचेस करेंगे क्योंकि देखिए पहले ग्रीन कैंडल बनी है। हमें पहले तो पता ही नहीं ना कि यहां पर ग्रीन कैंडल बनने वाली है। हम कैसे आइडेंटिफाई कर सकते हैं कि कोई बड़े प्लेयर कहां पर बाय करने वाले हैं। तो जो पहली वीकली में ग्रीन कैंडल एक्साइटिंग कैंडल बन गई। उसके बाद मैं कुछ नहीं कर रहा। फिर जब ये घूम के सेप्टेंबर के आसपास जब ये वापस आया है इस रेंज पे यहां से सपोर्ट लेकर जब ये वापस ऊपर जा रहा है तो मैं इसको परचेस करूंगा। एक्सक्टली यहां पर तो बड़े प्लेयर्स ने हमें एक क्लू दिया है कि यहां पर कुछ ना कुछ पेंडिंग हमने छोड़ा है। ओ मुझे आपका वो स्टेटमेंट याद आ गया जो आपने स्टार्टिंग में बोला था कि पेंडिंग ऑर्डर ड्यू रह जाते हैं। वो कभी ना कभी जब फिल होने के लिए वापस आएंगे वहां पर हमें एंट्री करनी है। नाउ आई प्राइस जो है यहां से कंटीन्यूअसली ग्रीन कैंडल से आप गए। ये ऊपर ही नहीं जाती। अगर पेंडिंग ऑर्डर नहीं होते तो क्योंकि जितनी डिमांड आई उतनी सप्लाई आ जाती तो फिर प्राइस वहीं पर रेंज बाउंड रहती शायद अनदर बेस कैंडल हमारे पास में बनती लेकिन कंटीन्यूअसली ऊपर गई तो मतलब अग्रेसिवली बाइंग आई है उस क्वार्टरली को बस हमने रिफाइन करा कि वो एरिया कौन सा है जहां पर ये अग्रेसिवली बाइंग स्टार्ट हुई वो वीकली पर हमने क्लियरली सपोर्ट कर लिया कि यहां से ग्रीन ग्रीन एक्साइटिंग कैंडल बनने लगे उस एरिया को हमने एज अ डिमांड ज़ोन मार्क करा और वहां पर बेस्ट एंट्री एंड एग्जिट प्लान करें और इन्वेस्टमेंट के लिए हमें एक बेहतरीन अपॉर्चुनिटी यूनियन बैंक के अंदर में मिली। ओके। अब यहां पर एक क्वेश्चन है मेरा। वैसे तो मुझे पता है लेकिन स्टिल हाउ मच कॉन्फिडेंट आर यू? कि मार्केट इतने लंबे पीरियड के बाद घूम के वापस आएगी? ये भी तो हो सकता था कि वहां से सीधा निकल जाती और आपने जितना रिसर्च किया वो सब आपका टाइम वेस्ट हो गया होता। टाइम वेस्ट तो नहीं बोलते उसको लेकिन बहुत ज्यादा टाइम आपने इन्वेस्ट कर दिया होता। ये कॉन्फिडेंस कितना होता है आपको कि मार्केट यहां पर आती है। मतलब कितने परसेंट टाइम मैं इसको क्वेश्चन को रिफ्रेश कर देता हूं। कितने परसेंटाइल मार्केट आपके लेवल को टेस्ट करने के लिए आती है? देखिए बहुत बार ऐसा भी होता है कि कोई डिमांड जोन अच्छा प्लॉट हुआ हम उसका वेट कर रहे हैं। वहां पर प्राइस आई नहीं है। प्राइस ऊपर जा रही है। बट अच्छी बात ये है कि प्राइस ऊपर जा रही है तो नए डिमांड ज़ोन भी क्रिएट कर रही है। अगर ऊपर कोई नया डिमांड ज़ोन अच्छा बन गया तो नीचे वाले का वेट क्यों करेंगे? ऊपर वाले पे डायरेक्टली एंट्री ले लेंगे। जब ये यूनियन बैंक यहां से बॉटम आउट हो के चलने लगा था। तो मीनवाइल इसने हाफ इयरली पर इनके ऊपर में भी कुछ एक डिमांड ज़ोन बनाए। हम उनप सब पे एंट्री नहीं मिली है। लेकिन यह जो क्वार्टरली का डिमांड जोन है यह तो नया बना था। हम शायद पहले नीचे वाले का वेट कर रहे थे। यह बाद में बना। इसके अंदर में एंट्री मिल गई। हमने एंट्री ले ली। अब उसके बाद में जो ये रैली अभी कंटीन्यूअसली आप लोग देख रहे हैं। यहां पर वापस से एक ट्रेड बनी थी जो कि अभी रिसेंटली मैंने कुछ एक सेशन में डिस्कस भी किया था कि एक जो मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस के अकॉर्डिंगली मंथली इनकम ट्रेड मिली मिली थी। हम उसके अंदर में हमें वापस से अगेन एंट्री मिल गई। अब मान लीजिए कि उसमें एंट्री नहीं मिलती। प्राइस अग्रेसिवली ऊपर जाती है तो डेफिनेटली बड़े टाइम फ्रेम स्मॉलर टाइम फ्रेम के नए डिमांड ज़ोन बनते हैं। अब ऐसा नहीं है कि कोई स्ट्रेट लाइन में प्राइस ऊपर जाती रहेगी। करेक्शन कहीं ना कहीं से आएगा। हो सकता है 20% अप जाने के बाद में आए। हो सकता है 30% 40% अप जाने के बाद आए लेकिन करेक्शन आएगा। अगर प्राइस इतनी स्ट्रांगली अप गई है 40% तक करेक्शन नहीं आए तो वो डिमांड ज़ोन उतना ही ज्यादा स्ट्रांग और होगा और उसके चलने के चांसेस उतने ही ज्यादा और होंगे। तो गोल ये नहीं है कि हर एक डिमांड ज़ोन में प्राइस आए ही आए। उसको हमें ट्रेड करना ही करना है। गोल यह है कि जब किसी भी डिमांड जोन के अंदर में प्राइस आ रही है ना वह हमसे छूटे ना। जो क्वालिटी के डिमांड जोन मार्क हो रहे हैं मिस हो रहा है कोई प्रॉब्लम नहीं। ऊपर जा रही है अग्रेसिवली नया डिमांड ज़ोन क्रिएट करेगी। आप नीचे वाले को छोड़िए ऊपर वाले के ऊपर में प्लान कीजिए। ऊपर वाले के अंदर में भी नहीं आई तो कोई ना कोई तीसरा डिमांड ज़ोन बनाएगी। ऐसा नहीं कि 100 से 1000 जाए प्राइस और कोई डिमांड ज़ोन ही ना बनाए। तो जो छूटे जा रहे हैं डिमांड ज़ोन उनको छोड़ दीजिए। जो नए बन रहे हैं उनके अंदर में शायद एंट्री मिल जाए। तो ऐसा नहीं कि लाइक कि हम ये कहें कि बहुत सारे डिमांड जोन हमने मार्क कर लिए और उसमें किसी में भी एंट्री नहीं मिल रही। आपने क्वालिटी के डिमांड जोन मार्क करें ना और बड़े प्लेयर्स का तो देखिए सिंपल सा फंडा है। उनको जहां तक प्राइस को लेके जाना है वो लेके भी जाते हैं और जहां पर जब प्राइस नीचे लेके आनी है तो वो लेके भी आते हैं। फिर चाहे उनको कोई भी मेथड्स यूज़ करना पड़े उस चीज के लिए। बहुत बार ऐसा भी हुआ कि लाइक कि प्राइस जब टूट कर नीचे आती है जैसे पहले पहले लोगों का एक ये क्वेश्चन होता है जैसे अभी आपने पूछा कि अगर इस डिमांड ज़ोन तक प्राइस आई नहीं तो मैं दो-ती महीने से वेट कर रहा हूं। डिमांड ज़ोन में प्राइस आ जाती है। चाहे वो फाइव टू सिक्स मंथ बाद में आई। प्रॉब्लम पता है कहां आती है? जब वो प्राइस आती है। अब वो 40% 30% करेक्ट हो के आई। वहां पर लोग पैनिकिक हो जाते हैं। बाय करूं या ना करूं। और फिर वहां पर सडनली एक छोटी सी भी न्यूज़ आ गई तो वो उस माहौल को और ज्यादा गरम कर देती है। और ज्यादा पैनिकिक सिचुएशन ऐसे टाइम पे न्यूज़ आती है। 100% न्यूज़ जरूर आती है। हमने देखा कि जब भी एक क्वालिटी का डिमांड जोन के अंदर में प्राइस आती है ना उस स्टॉक में उस दिन कोई ना कोई न्यूज़ जरूर आती है ताकि रिटेलर बाय ना कर पाए। हमारे अगेंस्ट न्यूज़ चल रही होती है वो वाली कि हम बाय ना कर पाए। देखिए सिंपल सा एजेंडा है कि वहां पर पेंडिंग ऑर्डर्स हैं। तो इस बार भी शायद हो सकता है कि बिग प्लेयर्स को डर है कि इस बार वापस से पेंडिंग रह गए दौर। यह एरिया किसी ने स्पोर्ट कर रखा है। यहां पर सब लोग अग्रेसिवली बाइंग करने लग गए। तो शायद हो सकता है कि यह वापस से हमारे कुछ ऑर्डर पेंडिंग रह जाए। तो उनका एजेंडा यही है कि यहां पर जब प्राइस आई ना तो रिटेलर कम इंटरेस्टेड हो उस चीज के ऊपर में। तो इसीलिए हम जनरली देखते हैं कि एक अच्छे डिमांड ज़ोन में प्राइस आई। कोई ना कोई न्यूज़ आई। रिटेलर सोचते हैं कि शायद और नीचे आएगी और उस डिमांड ज़ोन से फिर प्राइस वापस ऊपर चली जाती है। सर एक क्वेश्चन है थोड़ा सा ऑफ द टॉपिक। आपने एक थ्योरी बताई। यह थ्योरी बुक्स में तो मेंशंड नहीं है। राइट? तो यह एक सेकंड के लिए मान लेते हैं कि आपकी बनाई हुई थ्योरी है। आपको इस थ्योरी पे 100% विश्वास कब होगा कि ये थ्योरी सही है। देखो एक तो होता है कि रिजल्ट अच्छे आ रहे हैं तो चल रहा है तब तक। लेकिन रिजल्ट अच्छे आने के लिए भी कन्विक्शन चाहिए होती है क्योंकि आपने बहुत सारे स्टॉक्स में पैसा लगाया होगा। हम उससे पहले कन्विक्शन आई हो कि नहीं यार मेरी थ्योरी बिल्कुल सही है और मैंने ये थ्योरी अभी तक किसी बुक्स में नहीं पढ़ी है। मतलब मैंने सीएमटी लेवल वन लेवल टू लेवल थ्री बुक्स पढ़ ली क्लियर किया है एग्जाम वहां पर कहीं पे ये चीज डिस्कस नहीं है। आईसीटी कांसेप्ट में कुछ-कुछ हद तक डिमांड सप्लाई डिस्कस है। बट ये वाला मेथड डिस्कस नहीं है। ये कन्विक्शन कब आई और कैसे आई? सर ये कन्विक्शन किसी चीज को पढ़कर नहीं आई। चार्ट को समझ कर आई। ये पढ़कर तो नहीं आई है। क्योंकि तो बनाई हुई थी। जी जब जब आप चार्ट्स को लगातार देख रहे होते हैं और आपके सामने हर सिक्स मंथ वन ईयर में कोई बहुत बड़ा इवेंट आ रहा होता है। ये वॉर हो गया। ये क्राइसिस हो गए यहां इकोनमिक स्लो डाउन हो गया। कोविड आ गया। जब ये पैटर्न सेम जिनकी हम बात कर रहे हैं। उन क्राइसिस में बिल्कुल उनके अपोजिट बिहेव करने लगते हैं ना। तब कॉन्फिडेंस आता है कि यार हां इस इस चीज में दम है। 2018 के टाइम पे यही ट्रंप गवर्नमेंट में मेटल में क्राइसिस आए थे बहुत ज्यादा। वह टाइम ऐसा था जब यूएस और चाइना ट्रेड वॉर चल रहा था। जैसे अभी हो गया टेरिफ वॉर वो था ट्रेड वॉर नाम दिया था उसको। वह ट्रेड वॉर के टाइम पे मेटल सेक्टर बहुत शानदार तरीके से डाउन था। और जहां से भी मेटल के शेयर्स चले वो सब के सब इसी तरह के डिमांडों से चले और वो सब कुछ हमारे रिकमेंडेड थे। हमारे एक चैनल्स पर, प्राइवेट चैनल्स पर, पब्लिक चैनल्स पर वो सब कुछ हमने बताया हुआ था कि यार मेडल खरीदो आराम से बिंदास चलेगा। ठीक ऐसे ही 2020 में सबसे अंडर परफॉर्मिंग कोई सेक्टर था वो था निफ्टी पीएसयू और वो सबसे फेवरेट था हमारा और वो इसी डिमांड के सप्लाई के दम पर यानी पैटर्न्स के दम पर और 2020 से ही लोग तो 2023 के बाद पीएसयू को प्यार करने लगे। हम 2020 से ऑन द रिकॉर्ड है सब कुछ कि 2020 से रिकमेंड कर रहे हैं यार पीएसयू खरीदो। जितना हो सकता है खरीदो। पीएसू शेयर्स को खरीदा और वो पूरा का पूरा रैली हमने हमारे ट्रेडर्स ने सब ने एंजॉय किया। देखिए एक बुक है द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर्स सबने पढ़ी होगी बट उसमें एक बहुत शानदार लाइन है कि ए्री न्यूज़ इज एडवर्टाइजमेंट। हर एक न्यूज़ एक एडवर्टाइजमेंट है। हम तो यहां तक भी कहते हैं कि जैसे आपने पूछा कि इस पर कन्विक्शन कैसे आया? एक छोटी सी चीज कि कंपनीज़ के रिजल्ट्स आते हैं। क्वार्टरली क्वार्टर में कैसा परफॉर्म किया है उन्होंने वो अनाउंस होता है। एक रिटेलर उसको भी इवेंट समझने लगता है कि यार ये सब कुछ मेरे पास सबसे पहले आ रहा है। वाओ इतने अच्छे नंबर्स हैं और वो उस उस नंबर्स के ऊपर दाव लगाएगा, बाइंग करेगा, सेलिंग करेगा। ना जाने कितने सारे एक्शन ले लेगा। एंड ऑफ़ द डे उसको कुछ हाथ नहीं आना। ब्रोकरेज देगा और कुछ नहीं। सिर्फ कुछ नहीं। तो हमारा क्या मानना है कि यार ये जो आपके सामने नंबर्स आ रहे हैं ना रिजल्ट्स के वो तो यार एक प्रोटोकॉल है एक्सचेंजेस का सेबी का एक नॉर्म्स है कि कंपनीज को अपने शेयर होल्डर को बताना है कि उनके क्या नंबर्स रहे हैं क्या प्रॉफिट एंड लॉस रहे हैं क्या कहां वो अपना पैसा लगा रहे हैं लोगों ने उस प्रोटोकॉल को अपॉर्चुनिटी समझ लिया आप सब लोग इस बात को जो थोड़ा अवेयरनेस के साथ मार्केट में रहते हैं कंपनी कंपनी के रिजल्ट बहुत अच्छे हैं बट स्टॉक नीचे आ जाता है। कंपनी के रिजल्ट बिल्कुल अच्छे नहीं है पर स्टॉक बहुत ऊपर चला जाता है। अब इसको आप क्या समझोगे? और हम उस चीज को हमारा एक ही चश्मा है। हम उसी में देखते हैं डिमांड एंड सप्लाई। प्राइस किसी भी वजह से नीचे आ रही है। चाहे कोई भी इवेंट है। चाहे वो रिजल्ट्स ही क्यों ना हो अच्छे हो, बुरे हो मुझे कोई मतलब नहीं। मैं अपोजिट नहीं कर रहा। डिमांड में आई है। मुझे बाय करना है। सप्लाई में आई है और सेल करना है। जैसे भैया ने कहा कि भाई हमारा ये ये गोल नहीं है कि हर एक डिमांड सप्लाई ट्रेड हो। जिस डिमांड सप्लाई में आ रही है प्राइस वो मिस ना हो बस और वो मतलब ऐसी ही छोटी-छोटी चीजों के कन्विक्ंस हैं। अब 2025 में स्टार्टिंग में कितना शानदार मार्केट डाउन आया। जैसे लास्ट जनरल इलेक्शन का जो रिजल्ट था उसके बाद मार्केट दो महीने ऊपर रहा। फिर अक्टूबर 24 के बाद लगातार नीचे आता रहा। हम मार्च 25 के बाद मार्केट ने वापस रिकवरी दी। हमारा एक वीडियो था उसमें हमने जैन 2025 में ही एक एरिया बताया था निफ्टी में कि ये यहां से रिकवर हो जाएगा। एग्जजेक्टली उसी एरिया से प्राइस रिकवर हुई। मतलब ऐसा नहीं कि निफ्टी सिर्फ हमारे उस एरिया का ही वेट कर रही थी। बट वो एक थ्योरी का एक बहुत अच्छी तरीके से कि भ ये थ्योरी पर ये कॉन्फिडेंस हमें ऐसे आता है कि भ मार्केट आ रहा है नीचे। सब लोग कह रहे हैं इकोनॉमिक स्लो डाउन है। ये 50 तरह की चीज सब कुछ हो रही है। बट वो चीज कहां पर आई? हम हमारे किसी भी प्रेडिक्टिव जो हमने प्रेडिक्ट किया उस वाले एरिया में और वहां से आकर यदि वह रैली दे जाती है और ऐसे तमाम तरह के इवेंट्स हमने देखे हैं अपनी अभी तक की ट्रेडिंग जर्नी में तो उसे 99.9 भी नहीं कहते हम तो 100% कन्विक्शन कहते हैं कि इसी वजह से आता है। सिर्फ चार्ट्स को देखने से और उस चीज को मान लेने से कि हां यार ये कोई इस बात पे कोई दम है। कितने चार्ट्स देखते हैं आप एक दिन में? जितना टाइम मिलता है मतलब सबसे अच्छा काम ही यह लगता है पढ़ना और पढ़ाना और यह भी पढ़ाई है मतलब मॉर्निंग में 9 टू 3:30 स्क्रीन के सामने रहना है वो तो हर एक ट्रेडर को रहना ही होता है खासकर फुल टाइम ट्रेडर्स को उसके बाद भी जितना ज्यादा टाइम हो सकता है 3 आवर फोर आवर हम चार्ट के साथ रहते हैं और वो खुद के लिए भी रहते हैं अपने स्टूडेंट्स के लिए भी रहते हैं कि यार हमें एनालिसिस हमारी ऐसी करनी है कि खुद का तो स्ट्रांग हो ही रहा है बट अपने स्टूडेंट्स तक भी कोई मैसेज पहुंचा रहे हैं वो भी एकदम से दमदार रहा हो। साथ में हम यह भी बिलीव करते हैं कि ऐसा नहीं कि जितनी कंपनी ट्रेड कर रही हैं जितने स्टॉक्स लिस्टेड हैं उन सबके चार्ट आप देखो। आप एक लिस्ट बना लो 200 300 जिनको आप डेली बेसिस के ऊपर भी मॉनिटर कर सको। चाहे फिर वो 100 स्टॉक्स की हो या फिर 200 की हो जितना मतलब आप टाइम देते हैं उसके अकॉर्डिंगली 200 300 ये लिस्ट मतलब सफिशिएंट है। आप उसको रेगुलर ट्रेड करिए। आप यकीन मानिए वो स्टॉक्स आपसे बात करने लग जाएंगे। जैसे कि लाइक होता है ना कि अभी आप जैसे हमारा नाम बोल पा रहे हैं। हम आपका नाम बोल पा रहे हैं। अपन एक बार में एक दूसरे का नाम जान गए। लेकिन यहीं पर आपको अगर 50 लोगों के नाम याद करने को बोला जाए तो आप हार्डली पांच लोगों के नाम याद रख पाएंगे। और मे बी कि नेक्स्ट मीटिंग के अंदर में आप दो चार लोगों के नाम और याद रख लें। उसके नेक्स्ट मीटिंग में आप दो चार लेकिन 50 लोगों के नाम याद रखना मतलब प्रैक्टिकली इंपॉसिबल हो जाता है उस चीज पे। तो जैसे कहते हैं ना कि बेस्ट फ्रेंड कुछ ही बनते हैं। सारे बेस्ट फ्रेंड नहीं बनते हैं। तो उसी तरह से ऐसा नहीं कि हर एक स्टॉक जो लिस्ट हो रहा है मार्केट के अंदर में सबको आप ट्रैक करो। आप 200 300 स्टॉक्स उनको डेली बेसिस के ऊपर में आप देखोगे। उनका डेली बेसिस पे प्राइस एक्शन रीड करोगे तो आप उनके अंदर में ही बहुत अच्छी अपॉर्चुनिटीज़ ढूंढ पाओगे। और यकीन मानिए कि वो आपको पेशेंस भी सिखा देंगे और आपका पैसा भी बना देंगे उस चीज के ऊपर में और लिमिटेड स्टॉक्स रखो और उन्हीं के साथ में बस चलते रहो। तो आप पर्सनली इस चीज को क्वार्टरली मंथली डेली पर करते हैं या फिर डेली 15 मिनट्स मतलब इंट्राडे के लिए करते हैं। आप पर्सनली इसको सबसे ज्यादा कौन से टाइम फ्रेम पे प्रेफर करते हैं और क्या आप आप भी इंट्राडे करते हैं उसके अंदर? यस देखिए मैं बताऊं मैं अगर इंट्राडे भी करूंगा ना तो सबसे पहले हायर टाइम फ्रेम जरूर देखूंगा। मतलब मुझे इयरली का व्यू क्लियर होना चाहिए। इयरली, हाफ ईयरली, क्वार्टरली, मंथली, वीकली मतलब हायर टाइम फ्रेम से देखते हुए हम लोअर टाइम फ्रेम तक आते हैं। अगर हमें इंट्राडे ट्रेड करनी है ना तो भी हमारा हायर टाइम फ्रेम व्यू क्लियर हो। अगर मुझे कोई छोटी सी स्विंग ट्रेड प्लान करनी है तो भी मैं इयरली टाइम फ्रेम तो जरूर देखूंगा। देखो क्योंकि हायर टाइम फ्रेम की अगर एक बार आपको पिक्चर समझ में आ गई ना तो जो शॉर्ट टर्म वाली अपॉर्चुनिटीज़ है ना उनको आप रेगुलर ट्रेड कर सकते हैं। मान के चलिए कि आपको लग रहा है कि इस स्टॉक के अंदर में हायर टाइम फ्रेम का व्यू ये कह रहा है कि बुलिश है उस चीज़ पे। बट वो ऐसा नहीं कि स्ट्रेट लाइन में बुलिश होगा। कहीं ना कहीं जिगजैग करेक्शन आएंगे। अगर वो जिगजैग करेक्शन आपने आइडेंटिफाई कर लिया तो फिर आप इंट्राडे कीजिए ना उनके अंदर में कोई प्रॉब्लम नहीं है। आप डायरेक्टली ही टाइम फ्रेम ही सेलेक्ट करेंगे 15 मिनट 5 मिनट उसमें आपको समझ में ही नहीं आएगा कि मैं जिस स्ट्रेटजी पे काम कर रहा हूं वो चल क्यों नहीं रही है। बहुत बार क्वेश्चन आता है ना कि यार ये चल नहीं रही है। जबकि मैंने पैटर्न तो बिल्कुल वो आइडेंटिफाई किया जैसा मेरे को सिखाया गया। मैंने इसमें सबसे ज्यादा से ज्यादा ग्रीन एक्सप्लोसिव कैंडल ढूंढी हैं। बेस कैंडल कम से कम ढूंढी है मैंने। फिर यह डिमांड ज़ोन जो बना था वो टूट कैसे गया? ब्रीच कैसे होगा? उसके पीछे वजह ये रहती है कि मे बी कि कोई बड़े टाइम फ्रेम के सप्लाई ज़ोन से प्राइस हिट हो के नीचे आ रही हो। वो चीज आप तब तक आइडेंटिफाई नहीं कर सकते जब तक आप बड़े टाइम फ्रेम की पिक्चर को साथ में लेके नहीं चल रहे। तो भले ही अगर हमें इंट्राडे ट्रेडिंग करनी है ना तो भी हम हायर टाइम फ्रेम जरूर चेक करेंगे। लेकिन अब हायर टाइम फ्रेम फॉर एग्जांपल ईयरली वाला बुलिश है। चलो स्टॉक्स की अगर हम बात करें निफ्टी 200 स्टॉक्स में ईयरली सबके बुलिश चल रहे हैं। मोटा-मोटा पकड़ लेते हैं। फिर उसके बाद हमने अ क्वार्टरली पे आए या हाफ ईयरली पे आए वो भी चलो मान लेते हैं बुलिश चल रहे हैं। लेकिन फिर उसके बाद मंथली बयरिश चल रहा है। वीकली बियरिश चल रहा है। डेली बुलिश चल रहा है। तो जहां-जहां पर भी वो मैच नहीं कर रहा। आप उनको बाहर करते जाते हैं। नहीं देखिए मैं बताता हूं। अब मान लीजिए मंथली बरिश चल रहा है, वीकली बेरिश चल रहा है। वहां पर हम शॉर्ट की ट्रेड कर रहे हैं। कोई ना कोई शॉर्ट की ट्रेड कर रहे हैं और वो भी इंट्राडे या स्विंग ट्रेडिंग कुछ ना कुछ हम प्लान कर रहे हैं वहां पर। अब वहां पर हमें पता तो होना चाहिए ना हम टारगेट कहां पे बुक करें। हम तो वहां पर अगर कोई मंथली बुलिश है या मैं कहूं हाफ ईयरली बुलिश है तो मतलब कहीं ना कहीं उनके डिमांड ज़ोन बन चुके हैं। तो जब वो शॉर्ट की ट्रेड हमने एग्जीक्यूट कर दिए उसमें हमारा प्रॉफिट चल रहा। अगर वो किसी हायर टाइम फ्रेम के क्वार्टरली या हाफ ईयरली के डिमांड ज़ोन को हिट कर रही तो मतलब हमें उस शॉर्ट की ट्रेड को बुक कर लेना चाहिए। नहीं तो क्या होगा कि हो सकता है प्रॉफिट मिल रहा है और वो वापस से रिवर्स हो जाए। जो रेडरे कैंडल बन रही है हो सकता है वो सारी ग्रीन कैंडल बनने लग जाए और पूरा प्रॉफिट चला जाए। और यह पता कब लगेगा जब आपने हायर टाइम फ्रेम के भी डिमांड ज़ोन सप्लाई ज़ोन मार्क कर रखे हैं। तो इसलिए ये कि भले ही स्मॉलर टाइम फ्रेम आप ट्रेड करो लेकिन हायर टाइम फ्रेम का व्यू क्लियर लेके चलो ताकि ऐसा ना हो कि इंट्राडे जो ट्रेड आप कर रहे हैं वो कहीं आपके उल्टी ना पड़ जाए। क्योंकि प्रॉफिट बुक करना भी तो जरूरी है ना। सिमिलरली मान के चलिए कि अगर डेली, वीकली, मंथली ये बुलिश चल रहे हैं वहां पर। कंटीन्यूअसली आप ट्रेड कर रहे हैं छोटे इंट्राडे ट्रेडिंग वगैरह कर रहे हैं। लेकिन जस्ट प्राइस ने अभी-अभी एक हाफ ईयरली के सप्लाई जोन को हिट करा। तो वहां पे आपको समझ जाना चाहिए कि हायर टाइम फ्रेम का सप्लाई ज़ोन ट्रिगर हो चुका। अब यहां से प्राइस में एक अच्छा खासा करेक्शन आ सकता है। तो शायद अब आप इंट्राडे लॉन्ग की अवॉइड करने लग जाओगे। लेकिन अगेन इसका आईडिया कहां से मिला? हायर टाइम फ्रेम से ही। तो इसलिए हम ये कहते हैं कि हायर टाइम फ्रेम को हमेशा साथ में लेके चलो। चाहे फिर आप इंट्राडे ट्रेडर ही क्यों ना हो। हायर टाइम फ्रेम का व्यू क्लियर है तो इंट्राडे वाली ट्रेड आपकी 70-80% आपके फेवर में हींगी और फिर उनको रिस्क मैनेजमेंट के साथ में 1:2 के साथ में खेलिए। आप प्रॉफिटेबल रहेंगे ही रहेंगे। सर मुझे पर्सनली ऐसा लगता है कि इंट्राडे ट्रेडिंग में नॉइज़ बहुत ज्यादा होता है। तो यह स्ट्रेटजी आपके इंट्राडे में एक बार आप एक एग्जांपल दिखा सकते हैं कि इंट्राडे में कोई एग्जांपल आपका रिसेंटली या कोई पुराना रहा हो कि आप वहां पर एग्जैक्टली कौन-कौन से टाइम फ्रेम देखते हैं क्योंकि हमारे बहुत सारे व्यूअर्स ऐसे होंगे जो इंट्राडे ट्रेडिंग करना चाहते हैं। नॉट एवरीवन इज़ वेरी कंफर्टेबल विथ स्विंग आल्सो वी शुड अंडरस्टैंड। व्हाई? बिकॉज़ अ लॉट ऑफ़ पीपल मे बी डू नॉट वांट टू कैरी फॉरवर्ड द पोजीशन। आजकल हम देख भी रहे हैं कि ओवरनाइट वॉर शुरू हो जाते हैं। पोजीशन सबकी चेंज हो जाती है। तो अगर मुझे इस पूरी स्ट्रेटजी को इंट्राडे में करना है। जब आप बोलते हैं बड़ा टाइम फ्रेम कौन से बड़े टाइम फ्रेम से शुरू किया जाए। ऑलदो आपने बताया कि इयरली से शुरू करो। लेकिन प्रैक्टिकली कौन-कौन से टाइम फ्रेम हमें देखने चाहिए वहां पर? देखिए इयरली से स्टार्ट करने से हमें एक ओवरऑल व्यू मिल रहा है कि हम कुछ भी मिस नहीं कर रहे। सबसे पहले हमने बड़ा टाइम फ्रेम देखा। फिर ईयरली से हम हाफ ईयर आए, क्वार्टरली आए। अब जैसे ही मंथली से हम नीचे आते तो इनका मतलब ये नहीं है कि अब भी हम कुछ इन्वेस्टमेंट प्लान कर रहे हैं। जैसे अभी रिसेंटली एनएमडीसी का अपन एग्जांपल डिस्कस करा था। तो उस एनएमडीसी के अंदर में ये नहीं कि वहां पर सिर्फ और सिर्फ इन्वेस्टमेंट ही करना है। भले ही टाइम फ्रेम मंथली हो लेकिन उसका एग्जीक्यूशन हमने डेली टाइम फ्रेम के ऊपर में जाके लिया क्योंकि डेली अपने आप में एक छोटा टाइम फ्रेम है। तो वो डेली का टाइम फ्रेम जहां पर प्राइस आई है तो वो बाय डिफ़ॉल्ट ही एक इंट्राडे अपॉर्चुनिटी भी तो हो गई ना आपके पास में। कहने का मतलब मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस के अकॉर्डिंगली एक एमआईटी ट्रेड जिसको हम बोलते हैं कि मंथली पर हम बड़ा टाइम फ्रेम देखा। डेली के ऊपर में हमने छोटे टाइम फ्रेम पे एग्जीक्यूशन मार्क करा वो भी काइंड ऑफ आपकी एक इंट्राडे अपॉर्चुनिटी हो सकती है। बट मेक श्योर वो सेटअप बहुत अच्छा हो वहां पर। सो दोस्तों अभी हम यहां पर एक इंट्राडे का एग्जांपल देखने वाले हैं। और उसके बाद मेरा अगला क्वेश्चन कुछ और इंटरेस्टिंग स्टॉक्स या सेक्टर्स के ऊपर रह सकता है। तो प्लीज यहां पर अगर आप अभी तक एंजॉय कर रहे हैं व्हिच आई एम वेरी वेरीरी कॉन्फिडेंट। मैं पर्सनली बहुत कुछ सीख रहा हूं। एंजॉय कर रहा हूं। तो यहां पर अभी के अभी आप चैनल को सब्सक्राइब कर दीजिए और वीडियो को आई एम वेरी श्योर आपको वीडियो पसंद आ रही है। तभी आप यहां तक हैं। वीडियो को अभी के अभी लाइक कर दीजिए। आइए अब हम चलते हैं इंट्राडे एग्जांपल की ओर। जैसे ये बंधन बैंक है। ये जो मेरा मार्क्ड एरिया है ना ये एक हमारा रैली बेस रैली का एक डिमांड जोन है। डेली टाइम फ्रेम मैंने ओपन कर रखा है। जब भी हम इंट्राडे होते हैं तो डेली और बिलो डेली अपन को देखना होता है। तो एग्जैक्टली वैसा ही एक ये रैली बेस रैली का एक एरिया था। ठीक है? क्योंकि ये बायर सेलर की फाइट और एक नैरो रेंज की कैंडल बना देन उसके बाद अच्छी अपमूव आना प्राइस इसमें आई थी फोर्थ मार्च को और उसके 4 मार्च के दिन आकर बहुत शानदार स्पाइक आया सेम डे तो आया ही उसके नेक्स्ट डे मतलब कल बहुत शानदार तरीके से चली अब ये इंट्राडे होकर भी पोजीशनल हो गई और ऐसा नहीं कि उसने इंट्राडे नहीं मूव दिया इंट्राडे तो शानदार मूव दी आई उसके बाद नेक्स्ट डे भी चली क्योंकि ऐसा कभी भी फिक्स नहीं होगा कि इंट्राडे की ट्रेड है तो सेम डे के बाद फिर वो काम करना बंद कर देगी वो तो मार्केट ने साथ दिया चल गई आगे भी चल अब इसमें यदि हम लोअर टाइम फ्रेम पर जाएं जैसा कि 15 मिनट का हमारा एग्जीक्यूशन रहता है तो 15 मिनट पर ये एक एरिया है। एक सेकंड ये वाला एरिया हम ये बिल्कुल एग्जैक्टली डेली के अंदर है। डेली और ये एक दूसरे से ओवरलैप कर रहा है। और उससे पहले की जो मुझे फाइट देखनी होती है वो फाइट है भी। ऑलदो हम इस तरह के एरिया को हमेशा कंसीडर नहीं करते क्योंकि इसके आसपास भी फाइट है और उसको एक गार्बेज की तरह कंसीडर करते हैं। बट स्टिल ये रैली को देखते हुए लग रहा है यार ये बहुत शानदार चीज है। प्राइस इसमें आई भी है और आने के बाद सेम डे जब ओपनिंग के टाइम पर आई उसके बाद किसी को स्कैल्प करना है तुरंत एक क्विक ट्रेड करनी है तो वो कर लो और वो फिर एक ट्रेडर का माइंडसेट है कि भ वो वो किस तरह से इसको देख रहा है। देन उसके बाद थोड़े टाइम बाद आई और मार्केट के क्लोजिंग के टाइम पे उसने बहुत शानदार मूव दे दिया। 174 से 178 हो जाना। तो यह सब कुछ ऐसीऐसी अपॉर्चुनिटीज होती हैं जो आपको खुद से क्रिएट नहीं करनी होती। वो मार्केट ही आपको क्रिएट करके देता है और एक ट्रेडर को हमेशा अपॉर्चुनिस्ट बने रहना चाहिए। वो ये वो ये सोच करेगा कि मुझे इंट्राडे ही ट्रेड करना है तो पैसा लगेगा। वह यह सोच कर करेगा कि मुझे स्विंग ही करना है तो पैसा लगेगा कि आज मैं यही करके मानूंगा। नहीं मार्केट जैसा है वैसा बिहेव होगा। वैसा आपको एक्शन लेना है। क्योंकि अब अब जैसे इस डेली के एरिया का इस तरह से चल जाना और 15 मिनट के उस एरिया का चल जाना सिर्फ़ यह डेली और 15 मिनट की ही बात नहीं है। यदि हम जो टॉप टू डाउन एप्रोच की बात करते हैं हायर टाइम फ्रेम और लोअर टाइम फ्रेम देखने की बात करते हैं ना कि अभी जैसे भैया ने बताया कि यार प्राइस हायर टाइम फ्रेम के एरिया से चल रही है तो उसमें फिर लोअर टाइम फ्रेम वाले एरियाज भी रेस्पेक्ट हो रहे हैं। एग्जैक्टली ये मैंने क्वार्टरली का टाइम फ्रेम ओपन किया। इसमें मेरे पास हमारी थ्योरी ये कह रही है कि प्राइस क्वार्टरली के डिमांड जोन में एंटर हुई थी और उसके बाद ऊपर जा रही है। तो कहीं ना कहीं ये हो गया यार उसने हायर टाइम फ्रेम का तो सपोर्ट ले लिया। अब हायर टाइम फ्रेम के पेंडिंग ऑर्डर्स को पिक करके जा रही है ना तो वो फिर लोअर टाइम फ्रेम की सब चीजें उसमें रिस्पेक्ट हो रही है। मतलब ये समझो कि हम किसी बहुत बड़े इंसान से मिलकर आ रहे हैं और उसके बाद फिर जो हमारे छोटे-मोटे काम निकल जाने हैं वो सब अपने आप हो जाएंगे। एक्सक्टली कुछ ऐसा हम कह सकते हैं। राइट? जनरली ऐसा कोई इंट्राडे का सेटअप होता है ना कि डेली और 15 मिनट पे तो उस पे हम बहुत ही अच्छी क्वालिटी ढूंढते हैं। जैसे अभी जो एग्जांपल लिया तो इसके अंदर में हम इंटरेस्टेड क्यों हो गया? क्योंकि हायर टाइम फ्रेम का सपोर्ट है। अगर मैं डायरेक्टली इसको 15 मिनट पे देख रहा होता या डायरेक्टली मैं डेली पे देख रहा हूं तो शायद मैं इसमें इंटरेस्टेड नहीं होता। पहली प्रॉब्लम तो ये थी। मुझे ये नहीं पता मुझे बाय करना है या सेल करना है। अगर मैं बड़े टाइम फ्रेम से नहीं आ रहा। बिल्कुल एक्सैक्टली। क्योंकि जो 15 मिनट का एरिया था ना वहां पर अच्छी ग्रीन एक्सप्लोसिव कैंडल थी। लेकिन उसके आसपास का जो एरिया था ना वो कहीं ना कहीं हमें थोड़ा काइंड ऑफ़ गार्बेज लग रहा था। बट हमने देखा कि उस 15 वाले को प्रॉपर दिल्ली का सपोर्ट मिल गया। तो एक हायर टाइम फ्रेम का सपोर्ट मिल गया। फिर भी हमें डाउट है कि ये एक प्रॉपर सेटअप कंसीडर कर लें क्या इंट्राडे के लिए? तो मतलब जहां पे डाउट है फिर छोड़ दो। क्योंकि आपको ऑलरेडी आंसर मिल चुका है कि इसको नहीं कंसीडर करना है। लेकिन फिर भी अपन इसको कंसीडर कर रहे हैं तो वह कर रहे हैं जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ द हायर टाइम फ्रेम कि प्राइस क्वार्टरली के डिमांड ज़ोन से भी चल रही है। हायर टाइम फ्रेम के डिमांड ज़ोन का सपोर्ट होता है ना तो लोअर टाइम फ्रेम के जो डिमांड ज़ोन है ना वो काइंड ऑफ जो डाइस है ना वो भी चल जाते हैं। तो उस वजह से अपन ने इसको कंसीडर कर लिया। डायरेक्टली स्मॉलर टाइम फ्रेम पे जाते डाउट आता हम क्लियरली छोड़ देते हैं। ट्रेड को फोर्स तो करना ही नहीं है। अगर अपॉर्चुनिटी बहुत बेहतरीन है जिससे आप फुल्ली कन्विंस्ड हैं तो ही फिर आप उसको ट्रेड करें। अदरवाइज ना करें। सर आपने अभी तक हमने जितने एग्जांपल देखे हैं वो आई डोंट नो वेदर इट इज अ कोइंसिडेंस या बाय चॉइस। आपने सारे लार्ज कैप और बड़े अच्छे क्वालिटी मिड कैप के एग्जांपल्स हमें दिखाए हैं। क्या आपका यह पूरा थॉट प्रोसेस आपकी ये पूरी स्ट्रेटजी स्माल कैप, माइक्रो कैप इन पे भी काम करती है? देखिए काम पूरे सब चीजों पे करती है। पर प्रॉब्लम समझिए कि अगर कोई पेनी स्टॉक है जिसमें छोटी सी इक्विटी है तो हर कोई उसको ऑपरेट कर सकता है ना। मैं इसी पॉइंट ऑफ व्यू से मैंने पूछा कि उनकी तो इक्विटी बहुत छोटी है। उसको मैनपुलेट करना बड़ा आसान है। आप बीपीसीएल की बात कर रहे हैं। आप एनएमडीसी की बात कर रहे हैं। उनको मैनपुलेट करना तो बहुत मुश्किल काम हो सकता है। किसी छोटी कंपनी में डिमांड ज़ोन क्रिएट किया जा सकता है। पेंडिंग ऑर्डर थे नहीं लेकिन किसी ने आपको बताने के लिए के एंड यू आर फेमस पर्सनालिटी। सबको पता है कि आपका ये वाला ज़ोन है। कोई आपको फंसाने के लिए काम कर ले। या फिर फॉर दैट मैटर कोई वैसे भी किसी का मन किया यहां पर बाय करने के लिए। तो आप ऐसे स्टॉक्स को टच नहीं करते हैं? बिल्कुल भी नहीं करते हैं। मतलब जो छोटी इक्विटी है जिनके अंदर में हमें पता लग रहा है कि यार इसके अंदर में हार्डली मतलब वॉल्यूम बिल्कुल नाम का ही है। हम इसके अंदर में तो कोई भी खुद बाइंग करेगा तो भी शायद हो सकता है कि डिमांड जोन क्रिएट हो जाए वहां पर और फिर वहां पर वो पेंडिंग ऑर्डर रहे या ना रहे कोई गारंटी नहीं। बड़ा शेयर्स है उसको हर कोई मैनपुलेट नहीं कर सकता। जिसके अंदर में एक अच्छी मतलब इक्विटी है। वहां पर एक वो काइंड ऑफ दिख रहा है कि हां ये एक अच्छी कंपनी है। अच्छा वॉल्यूम है। इसका अच्छा मार्केट कैप है। उनको कोई मैनपुलेट नहीं कर सकता है। तो पूरी कोशिश यही करें कि अच्छे क्वालिटी के शेयर्स के अंदर में ये डिमांड जोन ढूंढे। कचरे के अंदर में आप ढूंढने निकलेंगे कुछ नहीं मिलेगा उस चीज के ऊपर में। तो हम हमेशा रिकमेंड करते हैं कि क्वालिटी के स्टॉक्स को ही स्कैन करो। जो पेनी स्टॉक हैं जिनमें वॉल्यूम नाम का ही है उनके पीछे मत भागो। लोगों ने एक कीवर्ड पकड़ लिया पेनी स्टॉक। रिटेलर आ रहा है। पेनी स्टॉक में जा रहा है कि यार मैं छोटे हां मैं मैं कम पैसे का शेयर उठाऊंगा और वो फटाक से इतना हो जाएगा। ये सब पता नहीं जैसे स्टार्टअप का कहते हैं कि यार 1000 स्टार्टअप में से सिर्फ दो चल रहा है। एग्जैक्टली पेनी स्टॉक 1000 में से सिर्फ दो ही चल रहा है और वही एक एग्जांपल सेट हो जाता है तो हर एक रिटेलर उधर की तरफ ही भाग रहा है। शेयर का चीप होना सिर्फ उसके शेयर प्राइस से नहीं डिसाइड हो रहा है ना। यदि आपको फंडामेंटल्स नहीं आते हैं तो आप टेक्निकल देख लो। कोई स्टॉक किसी टाइम पे आज से 5 साल पहले यदि 180 ट्रेड कर रहा था वो उसका मार्केट कैप था वहां उसकी बुक्स इतनी अच्छी थी सब कुछ इतना अच्छा था और आज यदि वो आपको 45 पर मिल रहा है और आपकी कोई भी थ्योरी कह रही है कि ये परफेक्ट है वो लार्ज कैप का मिड कैप का और अच्छे स्माल कैप का तो फिर आपको ये लॉजिक लगाने में कितना सा टाइम जा रहा है कि यार एक टाइम पर इसका वैल्यू्यूएशन 180 के प्राइस का था आज ये 45 पे मिल रहा है कंपनी कर थोड़ा सा भी रिसर्च आप करोगे ना चाहे फंडामेंटली फंडामेंटली करो या टेक्निकल हो आपको समझ आ जाएगा ये भी मेरा एक ऐसा शेयर बन सकता है जो मैं पेनी ढूंढता हूं ना जिसमें 1000 में से सिर्फ दो चलने के चांसेस हैं। ये 100% चल जाएगा। इसमें मेरा कन्विक्शन हमेशा हो सकता है। लेकिन सूरज जी ऐसे केस में जब मैं उसके बारे में पढ़ने जाता हूं ना जब वो 180 से गिर के 45 आया हुआ होता है। उस समय कोई पॉजिटिव न्यूज़ ही नहीं मिलती मुझे उसके बारे में। अब बात यही है कि हमें न्यूज़ ही तो नहीं पढ़नी है। न्यूज़ ही नहीं पढ़नी है। यही हमें सोचना है न्यूज़ नहीं हमें बुक्स पढ़नी है। यदि आपको धन का skinnx एक बहुत अच्छा प्लेटफार्म है। उस पर आप जाएंगे कंपनी का सारा हिस्टोरिकल डाटा आ जाएगा। क्या उसके रिजल्ट्स रहे अभी तक के क्या प्रॉफिट एंड लॉस है? क्या बेटा है? सारे मार्जिन सब कुछ आ जाएगा। आप पिछले पांच छ साल का वो भी पढ़ लेंगे ना तो वो किसी न्यूज़ से नहीं है। वो तो रियल एक्चुअल नंबर्स हैं। वो पढ़ना आता है तो वो पढ़िए। अदरवाइज आप चार्ट को देख तो रही हैं। चार्ट का कोई पैटर्न आपको पता है कि यार 180 से 40 आ गया है स्टॉक वो एक बहुत बेहतरीन इयरली हाफ ईयरली के डिमांड ज़ोन वाले एरिया में है। तो डेफिनेटली उसको चलना ही है। फिर फिर न्यूज़ तो देखनी नहीं है। आप मार्केट में किसी भी रिटेलर किसी भी इंसान को सर्वाइव करना है ना तो न्यूज़ देखना तो छोड़ना पड़ेगा। क्योंकि हर एक भाई मैं झूठ बोल सकता हूं। आप झूठ बोल सकते हो। कोई टीवी एनालिस्ट कोई कहीं पर भी बैठकर झूठ बोल सकता है और जो होता भी है कोई एक छोटी सी बात की वजह से मार्केट ऊपर चला गया। कोई एक छोटी सी बात उसको डिनाई कर देंगे तो मार्केट नीचे आ जाएगा। अब ये सब कुछ [हंसी] ये तो अब किस बात पर विश्वास करोगे? आपको खुद को पहचानना है कि आप एक न्यूज़ एनालिस्ट हो जो न्यूज़ को देखकर प्रेडिक्ट कर पाते हो कि मार्केट कहां जाएगा या कोई चार्ट एनालिस्ट हो आप जो चार्ट को देखकर पता लगा पाओगे। अब सब कुछ इतना आसपास सब कुछ इतना आसपास अपने साथ रख रखा है। न्यूज़ भी है, चार्ट भी है, फंडामेंटल भी है तो कंफ्यूजन क्रिएट होगा ही होगा। चार्ट देखो जो चीज आता है उसमें एक्सपर्ट बनो। यदि यूएस को, ईरान को, इजराइल को लड़ाई लड़ना आता है, वॉर करना आता है। वो वो काम कर रहे हैं। आपका काम ना वो रोकना हो सकता है, ना ही उसमें कुछ और कोई पार्टिसिपेशन हो सकता है। आपका काम आपको जो आता है, मार्केट के इंसान हैं। चार्ट देखो। आपकी जो थ्योरी है वह देखो उसके अकॉर्डिंग स्टेप्स दो सोशल मीडिया से और उस वॉर की वजह से कोई स्टेप नहीं लेना कभी सर आपने भी कमोडिटी मार्केट से अपनी ट्रेडिंग जर्नी स्टार्ट करी थी तो ये स्ट्रेटजी आप कमोडिटी मार्केट में भी यूज़ करते हैं क्या वहां पर काम करती है क्योंकि जो मेरा क्वेश्चन था पिछली बार कि स्माल कैप में तो वॉल्यूम नहीं होता है कमोडिटी में तो वॉल्यूम इक्विटी से भी ज्यादा होता है तो वहां पर ये स्ट्रेटजी कैन वी से कि और अच्छी काम कर सकती है या सेम तरीके से काम करती है सेम सेम तरीके से काम करती है देखिए ऐसा नहीं है कि जिसमें वॉल्यूम बहुत ही ज्यादा है बहुत ही हाई इक्विटी के उसमें अच्छा करेगा करेगा। नहीं तो फिर लोग बहुत ज्यादा स्पेसिफिक हो जाएंगे ना कि हमें बस ये जो ब्लू टिप ब्लू चिप शेयर हैं टॉप 30 शेयर हैं बस उन्हीं के अंदर में ट्रेड करें। मतलब गार्बेज ना हो कचरा ना हो। बाकी हर एक शेयर के अंदर में ये इक्वली काम करेगी वहां पर। अब बात करें कमोडिटीज की चाहे अच्छा वॉल्यूम हो इक्विटी में जैसे काम करती है वैसे कमोडिटी में करती है। और सिर्फ कमोडिटी में नहीं हर एक एसेट ऑफ क्लास के अंदर में ये थ्योरी डिमांड सप्लाई काम करती है। सिर्फ मार्केट को छोड़िए। आप बाहर की लाइफ के अंदर में देख लीजिए जो डेली बेसिस के ऊपर में हम लोग देख रहे हैं। फिर चाहे वो गाड़ियों की प्राइसेस हो, चाहे वेजिटेबल की प्राइसेस हो, मास्क से सैनिटाइजर कोविड के टाइम पे हमने कितने एग्जांपल देखे उनमें हर एक चीज के ऊपर में डिमांड सप्लाई तो चल रही है उस चीज के ऊपर में। तो थ्योरी हर एक एसेट में एंड इनफैक्ट जनरल लाइफ के अंदर में भी काम करती है। हाउ इज योर थ्योरी डिफरेंट फ्रॉम थोड़ा बहुत तो मैं गेस कर गेस कर पा रहा हूं लेकिन आपसे सुनना चाहूंगा हाउ इज योर थ्योरी डिफरेंट फ्रॉम द नॉर्मल सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस? देखिए सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस क्या होता है कि बेसिकली एक ही पर्टिकुलर एरिया के अंदर में जैसे कि मान के चलिए कि सपोर्ट क्रिएट हो गया। जितनी ज्यादा बार टेस्ट हो रहा है उतना ही स्टंग सपोर्ट होता है। ये थ्योरी जस्ट अपोजिट है। जितनी बार टेस्ट होता जा रहा है वो डिमांड ज़ोन उतना ही वीक होता जा रहा है। सिमिलरली ऊपर की तरफ कोई रेजिस्टेंस बन गया वहां पर जितनी बार टेस्ट होगा वो रेजिस्टेंस उतना ही स्ट्रांग होगा। हमारे डिमांड सप्लाई के अकॉर्डिंगली वो सप्लाई ज़ोन जितनी बार टेस्ट हो रहा है ना वो उतना ही ज्यादा वीक होगा। दूसरी चीज़ सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस। जब तीनचार बार टेस्ट हो चुके होते हैं तब तो जाके उन पे कॉन्फिडेंस आना स्टार्ट होता है कि हां स्ट्रांग सपोर्ट स्ट्रांग रेजिस्टेंस बन चुका। अगली बार जरूरी नहीं कि वह काम करे भी या ना करे क्योंकि तीन चार बार ऑलरेडी वहां पर वो चीज हो चुकी है। एक चीज और है सपोर्ट रेजिस्टेंस में कहीं पर भी क्लियर एंट्री एंड एग्जिट नहीं होते हैं। यहां पर डिमांड एंड सप्लाई के अंदर में हम प्रॉपर डिमांड जोन मार्क करते हैं और वहां पर क्लियर एंट्री और एग्जिट दोनों के दोनों प्लॉट करते हैं जो कि सपोर्ट रेजिस्टेंस में पॉसिबल नहीं है। तो आपका जो स्टॉप लॉस है वो जहां से आपकी रैली शुरू हुई है उसके नीचे का ही आप छोटा सा स्टॉप लॉस रख सकते हैं। वहां पर जो बेस कैंडल वाले एरिया है जहां पर हम ये कहते हैं कि यहां पर पेंडिंग ऑर्डर का ओरिजिन है उस पूरे एरिया को हम लोग मार्क करते हैं। वहां पर जस्ट उसके ऊपर में एंट्री रहती है और थोड़ा सा गैप देके उस रेंज के नीचे वहां पर हम स्टॉप लॉस प्लॉट करते हैं। मतलब प्रॉपर रहेगा कि ये एंट्री है ये स्टॉप लॉस। अब आपको रिस्क मैनेजमेंट के अकॉर्डिंगली क्वांटिटी कैलकुलेट करनी है। 1:2 का टारगेट रखना है और आप उसको ट्रेड करना है। और बस इस प्रोसेस को फॉलो करना। ये नहीं सोचना कि बोरिंग है वही सेम चीज़ है। इसको फॉलो करना डेफिनेटली प्रॉफिटेबल हो जाएंगे। जो बोरिंग है वही प्रॉफिटेबल प्रॉफिटेबल है। लेकिन प्रोसेस तो ऑलवेज बोरिंग ही होता है। लेकिन ज्यादातर लोगों को जल्दी अमीर बनना है। एक्साइटमेंट रखनी है। प्रॉफिटेबल एक मन में है प्रॉफिटेबल होना ही लेकिन एक्साइटमेंट मजा आते रहना चाहिए। मतलब जो नहीं करना चाहिए वही लोग कर रहे हैं। आपको एक्साइटेड जो होना चाहिए वो रिजल्ट्स के टाइम पर होना चाहिए। प्रोसेस के टाइम पर नहीं होना चाहिए। प्रैक्टिस के टाइम पर नहीं होना चाहिए। यहां पर लोग उल्टा कर रहे हैं। लोग ट्रेड करने में उतने एक्साइटमेंट है, उतना एक्साइटमेंट दिखाते हैं जितना जरूरत है ही नहीं। आपको जितना कामली एक एक प्रोसेस को फॉलो किया जा सकता है और वो ऑलवेज बोरिंग होगा ही होगा। ऑलवेज बोरिंग होगा। आपका एक्साइटमेंट आना ही रिजल्ट के टाइम पर चाहिए। बट लोग बिल्कुल अपोजिट कर रहे हैं कि मार्केट में ट्रेड कर रहे हैं फुल एक्साइटमेंट के साथ और वहां जो फिर उसके बाद रिजल्ट है वो सबको पता ही है। फिर वो बोरिंग लगने लगता है। लगना शुरू हो जाता है। कहते हैं ना कि प्रॉफिटेबल ट्रेडिंग इज ऑफन बोरिंग। वो बोरिंग है। हर बड़े ट्रेडर और इन्वेस्टर ने सेम बात बोली है। बट ये बोली हुई बात है। मतलब बात ये है कि बोली हुई बात है। लोग मान ही तो नहीं रहा। आपको मालूम भी है लेकिन कोई मानता नहीं। कोई कोई नहीं मान रहा है और कुछ टाइम पहले से मतलब पिछले दो साल में हमारी कम्युनिटी मतलब हम जीटीएफ कम्युनिटी हमारा जो ट्रेडर्स की कम्युनिटी है स्टूडेंट्स है उसको हम जीटीएफ कम्युनिटी बोलते हैं सबसे ज्यादा लाइमलाइट में रहने वाला वर्ड था मेंटल क्लेरिटी वो मेंटल क्लेरिटी पर 24 में बनाया था 25th के ज़हन में 25th के ज़हन में एक वीडियो बनाया था मेंटल क्लेरिटी के ऊपर में कि मेंटल क्लेरिटी इज द न्यू वेल्थ इन ए वर्ल्ड डिजाइन टू कंफ्यूज यू तो ये स्टॉक मार्केट हो चाहे लाइफ हो। यह हमारा मतलब मान के चलिए कि सबसे बेहतरीन वो वीडियो था जो हम रिकमेंड करते हैं कि जो स्टॉक मार्केट में काम कर रहा है वो तो देखे ही देखे। जो नहीं कर रहा है ना वो भी देखिए। आपको जो लाइफ को जीने का तरीका है ना वो भी सच में बदल जाएगा। मेंटल क्लेरिटी इज द न्यू वेल्थ इन द वर्ल्ड दैट इज मेंट टू कंफ्यूज यू। हम डिज़ टू कंफ्यूजन टू कंफ्यूज। तो उसके अंदर में कुछ इतने इंटरेस्टिंग फैक्ट्स हमने बताएं। स्टॉक मार्केट को लेके, स्टॉक मार्केट की हिस्ट्री को लेके और जनरल लाइफ को लेके। वो वीडियो एक बार अगर आप देखेंगे ना तो आपको सच में मजा आ जाएगा। आपको समझ में आएगा कि हां इस तरह से भी सोचने की जरूरत है। इस तरह से भी सोचा जा सकता है। अगर इस तरह से सोचे तो शायद यह जो इंटरनेट पे नॉइज़ है ना यह हमें बिल्कुल भी डिस्टर्ब नहीं कर पाएगा और हम एक प्रोसेस को फॉलो कर पाएंगे। क्योंकि क्या कहते कहते हैं ना कि नॉलेज लेना बहुत आसान है और देना भी आसान है। हमने कोई चीज बोली लोगों ने सीख लिया। नॉलेज मिल गया पूरा। सबसे डिफिकल्ट टास्क क्या है? उसको एग्जीक्यूट करना। ्यूट कर एग्जीक्यूट नहीं कर पाते हैं। आज यह ट्राई कर रहे हैं। कल कुछ और ट्राई करेंगे, कल कुछ और ट्राई करेंगे। उसका एग्जीक्यूशन ही सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है। और अगर हमें उस लेवल की क्लेरिटी मिल जाए। मतलब हमारा जो विज़न है ना वो यही है कि लोगों को स्टॉक मार्केट में वो क्लेरिटी मिले। क्योंकि देखिए इंटरनेट पे तो बहुत ज्यादा नॉइज़ है। बहुत ज्यादा। बहुत ज्यादा। तो लोगों को अगर वह क्लेरिटी मिल गई ना तो वह स्टॉक मार्केट में बेहतरीन तरीके से ट्रेड कर सकते हैं और वह क्लेरिटी अगर वह लाइफ में भी अप्लाई कर ले तो शायद उनको जीने का भी एक बहुत अच्छा वे मिल जाए उन लोगों को। उस वीडियो की हमारी यही थीम है। ग्रेट सर। तो स्ट्रेटजी के ऊपर तो हमने काफी सारे डिस्कशन कर लिए हैं। बहुत सारे एग्जांपल आपने अच्छे से समझा भी दिए हैं। कॉनसेप्चुअली बहुत क्लियर हो गए हैं। बस लास्ट के दो से तीन मिनट कुछ ऐसे क्वेश्चंस हैं जो मेरे माइंड में है जो आई एम वेरी श्योर मेरे व्यूअर्स को जरूर हेल्प करेंगे। पहला और यह जरूरी नहीं है कि आपकी स्ट्रेटजी के अराउंड हो। यह इन जनरल भी क्योंकि यू आर ट्रेनर्स आल्सो। आप स्टॉक मार्केट के पूरे कांसेप्ट को होलिस्टिक लेवल पर सिखाते हैं। रिस्क मैनेजमेंट पे आज की डेट में बिकॉज़ यू मेड अ लॉट ऑफ़ पीपल। रिस्क मैनेजमेंट के पॉइंट ऑफ व्यू से आपके अकॉर्डिंग लोग सबसे बड़ी गलती इस समय क्या कर रहे हैं? ट्रेडर्स क्योंकि 2000 मेरा मेरा प्रीटेक्स्ट समझ लीजिए। तो मेरा प्रीटेक्स्ट ये है कि 2020 से बहुत सारे लोग हमारा अभी आज के शूट से पहले भी जो डिस्कशन हो रहा था 2020 से ऑल अ सडन देयर इज़ अ लॉट ऑफ़ पीपल हु हैव एंटर्ड द स्टॉक मार्केट [नाक से की जाने वाली आवाज़] उनमें से बहुत सारे लोगों ने पैसा कमाया होगा। बहुत सों ने गवाया होगा। एंड आई एम वेरी श्योर आपके पास बहुत सारे लोग आए होंगे पढ़ने के लिए और उनमें से बहुत सारे लोग गलतियां कर रहे होंगे। रिस्क मैनेजमेंट की सबसे बड़ी गलती लोग क्या करते हैं? मैं बताऊं सर इसका आंसर आप प्लीज। सबसे बड़ी जो गलती आज की डेट में ग्रे टेलर कर रहा है वो क्या कर रहा है? ट्रेडिंग को इन्वेस्टिंग बनाना और इन्वेस्टिंग को ट्रेडिंग में बना देना। यह समझना जरूरी है कि दोनों अलग-अलग चीजें हैं। इन्वेस्टिंग कंप्लीटली अलग चीज है। ट्रेडिंग कंप्लीटली अलग चीज है। आप इन्वेस्ट को इन्वेस्टमेंट को ट्रेडिंग में कन्वर्ट करेंगे या फिर ट्रेडिंग को इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट करेंगे तो डेफिनेटली लॉस होगा। रिस्क मैनेजमेंट बिल्कुल फॉलो नहीं होगा। अगर आप इसको थोड़ा सा डिटेल में सोच के देखिए कि एक ट्रेडिंग अपॉर्चुनिटी है। हमने ट्रेड करने के लिए। हमारा व्यू गलत हो गया। हम हमने सोचा कि कोई प्रॉब्लम नहीं है। आज नहीं तो कल ऊपर आ जाएगा। हमने उसको इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट कर दिया। अब हर एक ट्रेडिंग अपॉर्चुनिटी इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट होने लगी। तो सोचिए हमारा पोर्टफोलियो कितने स्टॉक्स का हो जाएगा वहां पर। जितने भी होंगे वो सारे लॉस में ही दिख रहे होंगे। फिर हमें सारे के सारे लॉस में दिख रहे हैं। और वो पोर्टफोलियो बस बढ़ता ही जाएगा। नंबर ऑफ स्टॉक उसमें ऐड होते जाएंगे। क्यों? क्योंकि जिस भी हमारी ट्रेडिंग अपॉर्चुनिटी में व्यू गलत हो रहा है उसको हम इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट करते रहे वहां पर। अब 10 में से मान के चलिए कि दो बार तो व्यू गलत हो ही सकता है। 80% एक्यूरेसी बहुत बड़ी चीज होती है। ट्रेडर के लिए दो बार व्यू गलत हुआ। बस उन दो को कोई ट्रेडर कट नहीं करना चाहता। उसको वो फिर क्या करता है? रिस्क मैनेजमेंट को साइड में रखता है। इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट कर देता है। एक प्रॉब्लम यहां पर क्या है? क्वांटिटी ली है ट्रेडिंग के अकॉर्डिंगली। क्योंकि अगर आप इन्वेस्टमेंट करते हैं ना तो आप ये सोचते हैं कि यार ठीक है 100 क्वांटिटी 200 क्वांटिटी लेता हूं और लेके रख लेता हूं। हम जब ट्रेड करते हैं तो वहां पर तो यह रहता है कि ₹5 की मूव पूरी कैप्चर करनी है। तो एटलीस्ट ₹1000 क्वांटिटी तो लूं [नाक से की जाने वाली आवाज़] ताकि ₹5,000 का तो प्रॉफिट हो। अब 1000 क्वांटिटी किसी ने बाय करी और वो ट्रेडिंग को इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट कर दिया। तो सोचिए 5000 क्वांटिटी कंटीन्यूअसली डाउन जाते तभी तो लोगों का पोर्टफोलियो इतना इमंबैलेंस रहता है क्योंकि वहां पर क्या होता है कि आपने देखा होगा किसी एक स्टॉक के अंदर में 20000 इन्वेस्टेड है दूसरे में 20000 फिर 25 30 ऐसे करके और अचानक से दो तीन स्टॉक ऐसे मिलेंगे जिसमें किसी में 2.5 लाख इन्वेस्टेड हैं किसी में 3 लाख इन्वेस्टेड है जबकि रूल क्या है कि सबके अंदर में थोड़ा बैलेंस बना के रखो ताकि अगर कोई एक आधा स्टॉक नीचे जा भी रहा है ना तो ऐसा ना लगे कि पूरा पोर्टफोलियो बेकार हो गया उस चीज के ऊपर और यह तभी तभी पॉसिबल है कि आप पहले से एक प्री कमिटेड प्लान को फॉलो करें कि यह चीज मैंने ट्रेडिंग के लिए ही ली है। इसको इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट नहीं होने दे सकता। होप कोई स्ट्रेटजी नहीं होती है कि ये अल्टीमेटली ऊपर आ ही जाएगा। आपका व्यू गलत है। आप काटिए उसको क्योंकि अब उसके चांसेस क्या है? सिर्फ 50-50% वो भी आ गया तो आ गया। दोनों केस में नुकसान आ गया तो उस चीज की आदत लग चुकी है। क्योंकि आपको अल्टीमेटली हमेशा एक होप रहेगी कि ऊपर तो आ ही जाता है। आ ही जाता है। फिर एक ऐसा होगा जो नहीं आएगा। तक नहीं आता। और जो नीचे जाते बस उनके अंदर में लॉस रखता जा रहा। तो बेटर यह है ना कि उस 50% वाले खेल को छोड़िए ना उसको कट कीजिए और कोई ऐसी अपॉर्चुनिटी जिसमें आपको लग रहा है कि हां ये नई अपॉर्चुनिटी है और बहुत शानदार लग रही है। तो उसमें आपको 70-80% तो कॉन्फिडेंस होगा ना। तो 50% वाली बैट से बेटर है ना कि 80% की कोई बैट खेलिए आप वहां। ट्रेडिंग को इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट मत होने दीजिए। एक प्री कमिटेड प्लान फॉलो कीजिए कि यह ट्रेडिंग के लिए ले रहा हूं। इसको मैं कट कर दूंगा। व्यू सही हो या गलत हो। यह मेरा टारगेट है। ये मेरा स्टॉप लॉस है। ये मैं इन्वेस्टमेंट के लिए ले रहा हूं। तो उसमें क्वांटिटी भी हमारी लिमिटेड रहती है। और एक चीज और रहती है। क्वांटिटी जब कम रहती है ना तो हम उसको लंबा होल्ड कर पाते हैं। यस। कम ज्यादा ले लिया अपन ने तो भी वैसे भी ज्यादा ज्यादा ₹5 की मूव के ऊपर में कि यार बहुत प्रॉफिट आ गया। उसको अपन एग्जिट करते हैं। प्रॉब्लम तब आ रही है नीचे जा रहा है ना कोई एग्जिट नहीं करना चाह रहा। बट अरुण जी मुझे ऐसा लगता है कि हम सबको लगता है कि मेरा अगला ट्रेड मुझे करोड़पति बनाने वाला है। नहीं सर। इसीलिए बड़ी क्वांटिटी लेकर हम बैठ जाते हैं। हम एक एक वर्ड यूज़ करते हैं क्लिटी ऑन ऑब्जेक्टिव। लोगों का ऑब्जेक्टिव तो है पैसा बनाना है और उसी को ही मानकर बैठे हैं। वो ऑब्जेक्टिव नहीं हो सकता। गोल है एक। क्लिटी एंड ऑब्जेक्टिव का मतलब ये है कि आप जिस ट्रेड में एंटर हो रहे हो उसमें आपको यह मालूम होना चाहिए कि यह इंट्राडे के लिए है तो इंट्राडे के लिए ही है। यह स्विंग है तो स्विंग ही है और यह इन्वेस्टमेंट के लिए तो इन्वेस्टमेंट के लिए कि वही जो कि आप अपने प्लान को ट्रेड करो ना। प्लान को ट्रेड करो। रिएक्शन मत दो। मैंने कह दिया कि यार एक कोई एक्स वz करके शेयर है। यह ऊपर चला जाएगा। तो इंसान कहीं ना कहीं से पैसा लाकर उसमें सारा पैसा उसी में लगा देगा। अब जरूरी नहीं कि यह बोलते ही एक दो 5 10 दिन में आप शेयर ऊपर चला जाएगा। एक महीने में ऊपर चला जाएगा। 2 महीने में। नहीं। वो हो सकता है 3 महीने तक रेंज बाउंड रह जाए। और किसी ने इन्वेस्टमेंट के लिए भी बोला है ना तब भी इंसान उसमें इतनी क्वांटिटी ले लेता है जितनी कि उसको ट्रेडिंग में लेनी चाहिए ना कि इन्वेस्टमेंट का। पैसा तो ले आया। पेशेंस कहां से लाएगा? करेक्ट। ये ये ना मतलब ट्रेडिंग कुछ ऐसा है कि सिर्फ थ्योरी नहीं है। एक थ्योरी के जितना साइकोलॉजी भी इंपॉर्टेंट है। ये दोनों ही एक ही सिक्के के दो पहलू है। जितना इधर साइकोलॉजी डेवलप करोगे उतना ही उधर आपका डीमेट अकाउंट डेवलप होता जाएगा। इधर से डाउन वो व्हेन एक कोई लाइन है। व्हेन इमोशंस गोज़ अप, इंटेलिजेंस गोज़ डाउन। एंड व्हेन इंटेलिजेंस गोज़ अप, इमोशंस गोज़ डाउन। बिल्कुल सही बात है। नहीं हम रिस्क मैनेजमेंट और बिहेवियर मैनेजमेंट के ऊपर आपके साथ दोबारा से एक बार मिलेंगे बैठेंगे। बहुत कुछ है सीखने के लिए। सर मुझे आपका ब्रॉडली कांसेप्ट समझ में आ गया है। इंट्राडे भी, स्विंग भी, पोजीशनल भी और रादर मैं बोलूंगा इन्वेस्टमेंट भी। एंड हाउ इज इट डिफरेंट फ्रॉम सपोर्ट, रेजिस्टेंस? आप इतने सारे स्टॉक्स को कैसे स्कैन करना होता है, ये सब कुछ मुझे समझ में आया है। अगर मुझे और डिटेल में इसको समझना है। मुझे पर्सनली अगर मुझे और डिटेल में इसको समझना है, तो मैं और कहां-कहां पे जाके इसको आपसे सीख सकता हूं। हम किसी को भी रिकमेंड नहीं करते कि डायरेक्टली आप आओ, हमें पैसा दो, सीखो। हमने सबसे पहले फ्री रिसोर्सेज क्रिएट कर रखे हैं। अभी यह कोर्स अब सर्च के ऊपर में भी आ जाएगा जो कि कंप्लीटली फ्री ऑफ कॉस्ट रहेगा। कोई भी चार्ज नहीं है। और 52 आवर्स का ये कंटेंट है 52 आवर्स का। इसमें स्टॉक मार्केट का बेसिक से लेके एडवांस तक हमने सब कुछ कवर करा। मतलब जो हमारा पेड कोर्स है ना कंप्लीटली हमने फ्री डाल रखा है। ऐसा नहीं कि आधा अधूरा डाल रखा है। कंप्लीटली हमने फ्री डाल रखा है। पहले यही हमारा प्रीमियम कंटेंट हुआ करता था जिसका हम चार्ज लेते थे। अब हम पढ़ाने के नाम पे कुछ भी चार्जेस नहीं ले रहे हैं। अगर कोई इस फ्री के रिसोर्सेज से इस कोर्स को देखता है। जैसे कि मैंने कहा कि ना बेसिक से लेके एडवांस तक सब कुछ है जो एक ट्रेडर को प्रॉफिटेबल बनने के लिए चाहिए। और हम ये दावा करते हैं कि एक बार किसी ने ये 52 आवर्स का कोर्स सीरियसली देख लिया ना उसको कहीं से भी कुछ और सीखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये हम मतलब दावा करते हैं। एंड आई एम श्योर कि अब सर्च के ऊपर में भी लोगों को बहुत ज्यादा पसंद आएगा ये करके। आई एम वेरी श्योर कि इसका लिंक मैं डिस्क्रिप्शन में डलवा दूंगा। सो दैट ये सभी लोग इसका बेनिफिट उठा सके। तो मतलब यह काइंड ऑफ़ एक डेमो क्लास नहीं है। हमारा पूरा का पूरा कोर्स ही हमने कंप्लीटली फ्री दे रखा है। वह अगर कोई ट्रेडर देख लेगा तो हम बहुत अच्छे से श्योर हैं कि उसको ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग करने का नजरिया पूरी तरह से चेंज हो जाएगा उस पर्सन का। ये पूरे के पूरे कोर्स का जो लिंक है जो अपs अवेलेबल है। मैं वो आपके साथ डिस्क्रिप्शन में शेयर कर दूंगा। प्लीज मेक श्योर कि आप उसको जाके क्लिक कर लीजिएगा और उसको देख लीजिए अच्छे से। सो दैट आपको सब कुछ समझ में आ जाएगा। डिटेल में काफी सारी चीजें हमें समझ में आ जाएंगी। [नाक से की जाने वाली आवाज़] सर अब मैं आता हूं एक इंपॉर्टेंट क्वेश्चन पे जिससे आई एम वेरी श्योर बहुत सारे लोगों को सीखने को मिलेगा। हम बहुत सारे एज अ ट्रेडर अच्छे ट्रेड्स होते हैं, खराब ट्रेड्स होते हैं और हर ट्रेड कुछ ना कुछ सिखा के जाता है। ज्यादा खराब ट्रेड मुझे ज्यादा सिखा के जाते हैं कंपेयर टू अच्छे ट्रेड्स। आपकी लाइफ के सबसे अच्छे ट्रेड्स या कोई सबसे खराब ट्रेड और सबसेेंट चीज उनसे आपको लेसंस क्या मिले? देखिए सबसे अच्छा ट्रेड क्या होता है और वो क्या लेसन देता है? ऐसा कोई एक पर्टिकुलर ट्रेड नहीं हो सकता कि ये इस ट्रेड ने मुझे यह सिखाया। सबसे शानदार टाइम हमारा कौन सा होता है? जब लोग पैनिकिक हो रहे होते हैं, जब लोग पैनिकिक हो रहे होते हैं और हम वहां पर अपने एक प्लान को फॉलो कर रहे होते हैं कि लोग वॉर की वजह से पैनिकिक हैं। बजट की वजह से पैनिकिक हैं। इकोनमिक क्राइसिस की वजह से पैनिकिक है। जो भी वजह रही हो उस वजह से लोग पैनिकिक हो रहे हैं। मार्केट डाउन आ रहा है। सब जगह सेलिंग है और हम ये इस बात से खुश हो रहे हैं कि यार ठीक है मार्केट हमारे बाइंग एरिया में आ रहा है। अब हम बाइंग करेंगे। और अब वो जो हमने सोचा हुआ है उसे एग्जीक्यूट कर लेते हैं। वही हमें सबको सिखा देता है कि यार हमें कैसे थोड़ा सा हटकर डिफरेंट तरीके से सोचना है। नहीं मैं प्रॉफिट और लॉस के पॉइंट ऑफ व्यू से पूछा ये तो मैं आपकी बात से एग्री करता हूं। लेकिन प्रॉफिट और लॉस के पॉइंट ऑफ व्यू से कोई ऐसा बहुत प्रॉफिटेबल ट्रेड आपका रहा हो और वहां से कुछ सीखने को मिला। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि ट्रेड बहुत प्रॉफिटेबल था। लेकिन वो मेरा उतना स्ट्रांग ट्रेड था ही नहीं। वो तो मैंने ऐसे ही लिया था सिर्फ। और कभी-कभी बहुत अच्छे ट्रेड्स में मुझे बहुत बड़े लॉसेस देकर चले जाते हैं। फॉर एग्जांपल तो कोई सबसे बड़ा प्रॉफिटेबल ट्रेड या कोई लॉस ऐसा कुछ रहा है? नहीं रहा तो ठीक है। दैट्स ओके। नहीं ऐसे बहुत सारे ट्रेड्स होते हैं कि बहुत शानदार शानदार प्रॉफिट होता है कि जाहिर सी बात है आज से तीन साल पहले मैं जिस कैपिटल से ट्रेड कर रहा था उससे आज के टाइम पर ज्यादा कर रहा हूं। और आगे चलकर 2 साल बाद मैं उससे भी बड़े कैपिटल से ट्रेड करूंगा। तो वो प्रॉफिट के नंबर्स तो बढ़ते ही जाएंगे। चाहे वो कोई भी ट्रेड हो और वो जितनी शानदार ट्रेड होगी जिसमें मैंने जितना ज्यादा पेशेंस रखा वेट किया होल्ड किया वही मुझे सबसे ज्यादा पैसा देकर जाने वाली है तो वो वो बात सिर्फ अमाउंट की नहीं है वो बात पैसे की नहीं कितना पैसा बना सीखने वाली बात ये है कि मेरा सोचा हुआ था मेरा प्लान ये था कि ये कोल इंडिया में मैं यहां पर वेट कर रहा हूं इधर आएगी प्राइस मैं मुझे इधर बाय करना है चाहे वो किन्ही हालातों में आए मेरा प्री कमिटेड प्लान यदि मुझे अलव कर रहा है ना मैं बाय करूंगा और मेरा टारगेट जो है मैं यदि वहां तक होल्ड कर लूंगा वो वही मेरे लिए सबसे बेस्ट ट्रेड है और ऐसे कोल इंडिया हो गया। पीएसयू में तो ना जाने कितने सारे ट्रेड्स हमारी कम्युनिटी को पता है जीtएफ कम्युनिटी को कि पी पीएसयू सेक्टर में सिर्फ इन्वेस्टमेंट के पॉइंट ऑफ व्यू से नहीं ट्रेडिंग के पॉइंट ऑफ व्यू से भी कितनी सारी ट्रेड्स चाहे PNB हो, चाहे यूनियन बैंक हो, चाहे बैंक ऑफ इंडिया हो। इसमें इतनी शानदार शानदार ट्रेड पिछले एक साल में हुई है। पहले तो हुई है। पिछले एक साल में हुई है। जिन्होंने हमें यही सिखाया है कि यार जब लोग उनसे दूर हो रहे हो तब आप उस ट्रेड में एंटर करो। लोग लोग जिस चीज से दूर हो रहे हैं उसमें आप एंटर करो। लोग जिसको ज्यादा लाइमलाइट में लेकर आ रहे हैं उससे आप दूर हो जाओ। उससे आप दूर हो जाओ। ये सिंपल सी बात है। तो ऐसे तमाम तरह के शेयर हैं। एक एक कोई नाम नहीं हो सकता और ना ही कोई एक एक अमाउंट हो सकता है कि भाई इतने नंबर्स में मेरा प्रॉफिट अच्छा रहा। रही बात वर्स्ट ट्रेड की। वर्स्ट ट्रेड भी ऐसा है कि देखने को मिलती है। मतलब रोजाना की नहीं कह सकते। डेली मैं ऐसे एक्सपीरियंसेस कर रहा हूं कि मुझे बेकार ट्रेड भी मिल रही हैं। बहुत शानदार शानदार ट्रेड भी मिल रही है। वो वो वो भी एक इवेंट ही होता है कि मैंने जिस प्रीम्लीटेड प्लान को फॉलो करते हुए भी वो वैसा सक्सीड नहीं हो पाया जैसा मैं चाहता था। मानकर चलिए कि मेरी कोई ट्रेड थी। dमar की मैं वेट कर रहा था। उसमें प्राइस डीमार्ट में आती भी है और वहां से रिएक्शन देना शुरू किया तो मैं ठीक है मैं मैं खुश भी हूं कि यार हां प्राइस में रिएक्शन आ रहा है सब कुछ ठीक है वो रिएक्शन आने के बाद जब वापस प्राइस ने टर्न किया टर्न बैक किया और वो मेरा स्टॉप लॉस हिट हुआ वो स्टॉप लॉस हिट रिएक्शन और स्टॉप लॉस हिट होने के बीच में मुझे कहीं ना कहीं आईडिया हो गया था कि यार यह ना ज्यादा टाइम तक सर्वाइव नहीं कर पाएगी इस ट्रेड को स्टॉप लॉस होना है बट वो एक होती है आप एक ट्रेडर की जिद समझ समझ लो या ट्रेडर का एक सॉफ्ट ईगो समझ लो कि यार यह मेरा प्लान है। इसको मैं मतलब मालूम है कि यह शायद स्टॉप लॉस हो जाएगा। बट मैं इस वजह से बैठा हूं कि ये मेरी ट्रेड है। मैंने की हुई है मार्क है और मैं तो अपनी प्रीकमिटेड प्लान को फॉलो कर रहा हूं। तो कई-कई बार एक छोटे-छोटे से हर्डल होते हैं ना वो आपको एक बार पीछे की तरफ धकेल देते हैं किसी पर्टिकुलर ट्रेड में। तो ऐसे होते हैं एक्सपीरियंस कि आप सब कुछ सोच कर बैठे हो। को वही प्लान करना ही करना है। बट बीच में कोई भी हालात बदल सकते हैं। सरकमटेंसेस कभी भी बदल सकते हैं। उस हिसाब से आपको फ्लेक्सिबल भी होना चाहिए। तो कोई ट्रेड ऐसी भी होती है जहां पर पता है बट उसमें लॉस हो जाता है। कुछ स्टॉप लॉस को टच करने से जस्ट पहले से वापस रिकवर करके चली जाती हैं। [हंसी] वो बहुत अच्छी लगती है। मतलब ऐसा ऐसा भी है कि भ उनको हम बोलते हैं ट्रैप एरियाज। तो वो एक हमारा पर्टिकुलर टॉपिक भी है ट्रैप एरिया के ऊपर इसी कोर्स में क्लासेस में कि जब भी प्राइस हमारे एक बहुत शानदार एरिया को ब्रेक कर दिया ना और वो इतना शानदार एरिया था उसके बाद कहीं पीछे कोई छोटा सा एरिया है बहुत छोटा जिस पर हमें बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंस भी नहीं है उससे प्राइस चल जाती है तो वो वाले ट्रैप एरियाज होते हैं ना वो कभी-कभी परेशान करते हैं। बट यदि मैं रेगुलर मेरी वॉच लिस्ट है। मैं किसी दूसरे की वॉच लिस्ट नहीं देख रहा। मेरी वॉच लिस्ट है। उसमें से मुझसे कोई ट्रैप एरिया भी मिस नहीं होता। हां जी। चलिए ग्रेट। बस लास्ट में मैं एक चीज आपसे और पूछूंगा। व्हाट इज वन लेसन यू वुड लाइक टू गिव टू आवर व्यूअर्स ऑफ अप सर्च जिसमें आई एम वेरी श्योर उसमें से कुछ लोग जीटीएफ के मेंबर होंगे आपके कम्युनिटी मेंबर्स होंगे। सो एक लेसन जो आपको लगता है कि किसी ट्रेडर को नहीं भूलना चाहिए। वैसे देयर कैन बी 100्स ऑफ़ सच लेसंस। आपने बहुत सारे डिस्कस भी किए हैं। बट एक हमारा कोर फिलॉसफी होती है। कोर थॉट होता है हमारा। ऐसी क्या लाइन है जो आप बोलना चाहेंगे? देखिए मार्केट में आ रहे हैं ना तो ईगो को घर पर छोड़ के आइए और मार्केट में प्रूव करने की कोशिश मत कीजिए। मार्केट को समझने की कोशिश कीजिए। सबसे बेस्ट लेसन यही है। और [नाक से की जाने वाली आवाज़] एक चीज और समझना है कि पेशेंस सबसे बड़ा जो वेपन है वो पेशेंस है जो कि इसका इंटरेस्ट भी कंपाउंड होता है। तो कोई इस चीज को सीख गए ना पेशेंस को तो वो सच में मतलब उसको फिर कोई भी नहीं रोक सकता। वो ना तो मार्केट में कभी भी अपने को प्रूव करने की कोशिश करेगा। वो बस मार्केट को हमेशा समझने की कोशिश करे और पेशेंस जब बढ़ता है ना बाय डिफॉल्ट ही वो ईगो अपने आप ही घर पे छूट जाता है। एक चीज और हम लोगों को बोलते हैं कि जैसे कि एक चीज चलती रहती है कि कंटीन्यूअसली कि हर दिन पैसा बनाना हर दिन पैसा बनाना कि आज का बस 2000 बने कैसे भी बने। उसमें एक प्रॉब्लम क्या है कि आज अगर आपका 2000 नहीं बना ना तो अननेसेसरी आप कोई ना कोई ट्रेड लेके ही मानेंगे कि मेरा 2000 बन जाए। और अगर पहली ट्रेड में ही लॉस लग गया ना फिर आप उसको कवर करने के चक्कर में रेवेंस ट्रेडिंग के लिए और ज्यादा लॉस करेंगे करेंगे। हम यहां पर एक जो हमारे स्टूडेंट को एडवाइस देते हैं कि गोल यह नहीं होना चाहिए कि हर दिन पैसा बनाना। मतलब द गोल इज नॉट टू मेक ए डेली प्रॉफिट। द गोल इज नॉट टू मिस ए सिंगल बेस्ट ट्रेड सेटअप। जो आपने सेटअप बनाए हैं जो मार्क करें बेहतरीन से बेहतरीन। बस वो आपसे मिस ना हो वो गोल होना चाहिए। अब उसमें चाहे एंट्री आज मिले या फिर कल मिले वो अगर सेटअप मिस नहीं हुआ ना तो फिर प्रॉफिट डेफिनेटली आपके पीछे आएगा और जो आप एक्सपेक्ट कर रहे हैं ना उससे भी ज्यादा आएगा। आप हर दिन ये सोचेंगे आज का 2000 बन गया छोड़ता हूं बंद करता हूं। आप अगले दिन दोबारा 2000 के लिए बैठे कल नहीं बना। कल हो सकता है 9 से 3 उस 2000 के चक्कर में 20,000 देके चले जाए। लेकिन आपने इस चीज को बिल्कुल साइड में रख दिया कि मुझे यह गोल रखना ही नहीं कि हर दिन प्रॉफिट बने और वो इतना बने। मुझे गोल ये रखना है कि जिस स्ट्रेटजी को जिस प्लान को जिस प्रोसेस को मैं फॉलो कर रहा हूं उसमें जो बेहतरीन से बेहतरीन ट्रेड सेटअप मैंने मार्क करें वो बस मुझसे मिस ना हो उसके लिए मुझे एक्टिवली 9 टू 330 मतलब मार्केट के सामने रहना है और मेरा कोई भी सिंगल ट्रेड सेटअप जो कि बेस्ट है वो मिस ना हो प्रॉफिट डेफिनेटली बहुत अच्छा बनेगा तो बेसिकली स्कोर कार्ड पे नजर नहीं रखनी है अच्छा प्लेयर बनना है अच्छी शॉट्स खेलनी है सिर्फ ये ज्यादा बड़ा मोटिव होना चाहिए जैसे अभी रिसेंटली फोर्थ मार्च को एलए हमारे एक अच्छे एरिया में आया। बहुत शानदार ट्रेड था। बहुत शानदार ट्रेड। उसको मैंने सिर्फ इंट्राडे में ही एग्जिट कर दिया। मुझे जो प्रॉफिट मिला मैं लेकर निकल गया। वो स्विंग ट्रेड हो सकता था। मेरे भी दिमाग में था कि वो स्विंग ट्रेड ही होना चाहिए। बट क्योंकि ये सब कुछ अप एंड डाउन चल रहा है। मार्केट भी एकदम से कभी भी अप कभी भी डाउन। इवेंट्स जो हो रहा है। मुझे इवेंट्स का डर नहीं है। मैं मार्केट में एक ऐसा ऐसा ट्रेडर हूं। हर ट्रेडर को जैसे होना चाहिए जैसे हम है अपॉर्चुनिस्ट है कि अभी मार्केट है ऐसा कि वोलेटिलिटी में आपको ट्रेड करना है और निकल जाना है मतलब वो बस वो वो माइंडसेट है कि भ लिया मुझे इंट्राडे निकल जाना है ठीक है कोई बात नहीं इतना ट्रेड अब नेक्स्ट डे वो 5% अप हो गया उस बात का मुझे अफसोस होना ही मेरी सबसे बेकार ट्रेड हो जाएगी क्योंकि उसके 5% अप होने में या 3% अप होने में मैं सोचूंगा कि यार ये मेरे पास होना चाहिए था शायद मैं गलती कर दूं दोबारा उसमें एंट्री करने के लिए लूंगा उसके कि 3 से 5% की रैली में एंजॉय करो। यह अफसोस हो गया तो मैं गलत स्टेप उठा जाऊंगा। और मैंने उस बात पर अफसोस नहीं किया। रिग्रेट नहीं किया कि ठीक है जो हुआ सो हुआ। मुझे जितना मिलना था क्योंकि मैंने इतना सोचा हुआ था। तो वो मेरे लिए सबसे वही ट्रेड मेरे लिए सबसे अच्छी बात हो गई कि यार मुझे इस बात का तरीका ही बदल दिया। राइट राइट राइट। बेसिकली इसमें ऐसा कह सकते हैं कि जैसे बहुत सारे लोगों को लगता है कि मार्केट उसके अगेंस्ट उनके अगेंस्ट में है। मार्केट किसी के भी अगेंस्ट में नहीं है। मार्केट बिल्कुल न्यूट्रल है। तो ये चीज मानना बंद कर दें कि मार्केट मेरे अगेंस्ट के अंदर में ही चलता है। अगर ये चीज मानना बंद कर दिया ना तो मार्केट से जबरदस्ती लड़ोगे नहीं। उसको समझोगे और समझ गए तो अपने आप ही पैसा बन जाएगा। पैसा बनना शुरू। सर थैंक यू सो मच। थैंक यू सो मच अरुण जी। थैंक यू सो मच सूरज जी। इसमें आपको बहुत प्यार मिला है। ठीक है? और हर जगह पर आपकी चर्चा होती है। यू आर नोन वेल नोन फेस अक्रॉस द कंट्री मे बी अब्रॉड आल्सो। हाउ डू यू रिसीव दिस? एज इन आज की डेट में आप इतने लंबे टाइम से काम कर रहे हैं। आई एम वेरी श्योर जब आप घूमने जाते होंगे अपने घर के आसपास यू वुड बी सीइंग अ लॉट ऑफ़ पीपल जो पहचानते होंगे। हाउ डू यू सी ऑल दिस? मतलब ये सक्सेस को आप कैसे रिसीव करते हैं? हम लोग फेस के साथ हमारा बहुत कम कंटेंट है। फिर भी कहीं पर भी जाते हैं लोग हमें पहचान ही लेते हैं। कहीं पर भी जाएं लोग पहचान लेते हैं। और सबसे खुशी की बात ये होती है कि जितने भी लोग मिलते हैं ना वो इस बात का दावा करते हैं कि यार सर हम बदल गए। ये सबसे सर हम बदल गए। चार लोग मिले लेकिन वो चार लोग ऐसे मिले जो थैंकफुल हो। कि हम बदल गए। सर ये कंटेंट आपका पढ़ने का पढ़ाने का तरीका है। लाइफ के बारे में जो है ट्रेडिंग के बारे में उससे हमारे जिंदगी में तो बहुत सारे चेंजेस आए। इसके पीछे लोगों का इतना शानदार प्यार मिलता है और उसके पीछे एक और वजह है कि हमने कभी भी लोगों को ऐसे लूटने का नहीं सोचा कि यार ये प्रोडक्ट ये प्रोडक्ट ये ये हम बेचे सेल करने का कभी भी ज्यादा नहीं सोचा। हमने हमेशा से सोचा कि लोगों को कैसे ना कैसे करके एजुकेट करें। समझदार बनाएं। हमें लोग कोई इन्फ्लुएंसरर कह देता है तो हमें बड़ी चिढ़ होती है कि यार हम इन्फ्लुएंसरर नहीं होना चाहते। हमें इन्फ्लुएंसरर नहीं होना है। हमें लोगों को कैसे ना कैसे करके समझदार बनाना है। तो जब लोग समझदार बनते हैं तो बड़ी खुशी होती है। और वो हमारे पास सबसे बड़ी बड़ा डाटा जो है वो इस चीज का ये है कि आज तक हम जितने भी स्टूडेंट्स को जोड़ पाए ना वो सब उसमें से आज भी 40-50% जो है वो रेफरेंस से हैं। हमारा एडवर्टाइजमेंट चल रहा है पिछले एक दो साल से। बहुत अच्छा चल रहा है। एडवर्टाइजमेंट कंपनी बहुत बढ़िया है। एसइओ बहुत अच्छा है। उसके बावजूद भी हमारे पास आज भी यदि कोई डाटा आता है। हाउ डिड यू फाइंड अस करके हमने एक वेबसाइट पर कॉलम दे रखा है। तो वहां पर 50% से ज्यादा आज भी हमारे पास फ्रेंड रेफरेंस ही है। दो साल पहले तो हमारा कोई कुछ था भी नहीं कि हम लोग एडवर्टाइजमेंट वगैरह करते हैं। सब फ्रेंड रेफरेंस ही था। दैट इज द बिगेस्ट अचीवमेंट आई वास। और ये ये इस चीज को देखना सब परमेश्वर की कहानी है। हम अच्छा करते जा रहे हैं और लोग जुड़ते जा रहे हैं। बस सब ऐसे सही चलता जा रहा है। बस लोगों को चीट नहीं करके कि कुछ अच्छा करो, कुछ अच्छा करो, कुछ अच्छा बनो, समझदार बनो, समझदार बनो। उनको पुश करना है। कैसे ना कैसे करके उनको समझदारी की तरफ पुश करना है कि समझदार बनो, समझदार बनो, रिएक्ट मत करो, रिसोंड करो। ऐसी तमाम तरह की चीजें जो हम कहते हैं वो चीजें हैं और वो सब कुछ हम एक इनविज़िबल ताकत परमेश्वर को बहुत अच्छी तरीके से मानते हैं। सब उन्हीं का किया हुआ है और कुछ नहीं। हम उस परमात्मा में बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं। बहुत ही ज्यादा मतलब कि हम ये मानते हैं कि जो कुछ हो रहा है ना उसकी वजह से हो रहा है। तो अपने मैथ वाली कैलकुलेशन के पीछे नहीं भाग रहा। लोग खुश है ना सबसे बड़ी खुशी वही है। क्योंकि वो खुश हैं तो ही आपके 24 घंटे बहुत खुशी से निकल रहे। वरना मैथ वाली कैलकुलेशन तो 24 घंटे बस वही वही दिमाग में घूमेगी। बस कितने लोग खुश हो और अच्छी बात यह कि मजेदार बात यह है कि लोग पीठ पीछे कितना अच्छे से आपको रेस्पेक्ट दे रहे हैं। तो वो चीज हम फील करते हैं कि लोग किस हद तक हमसे खुश होते हैं। जैसा कि इन्होंने बताया ना कि आज जैसे वेबसाइट पे हमारे पे 5 लाख प्लस रजिस्टर्ड यूजर हैं। जिन्होंने हमारा फ्री कोर्स देखा, सर्टिफिकेट, नोट्स, चेक लिस्ट सब कुछ डाउनलोड करा। उनमें से हम मानेंगे 3 लाख प्लस जो है वो फ्रंट रेफरेंस है सिर्फ। स्टिल मतलब एसइओ एडवरटाइजमेंट जो अभी हमने एकद साल पहले स्टार्ट करा उससे पहले हम करते भी नहीं बिल्कुल नहीं करते थे। आज की डेट में वो एसइओ और ऐड एजेंसी भी उस फ्रेंड रेफरेंस वाले को बीट नहीं कर पा रहे। तो वो समझ में आता है कि यार लोग जो हैं अगर आपने उनको सच में उनसे दिल से कनेक्ट हो गए ना तो आप उस पैसे वाली मैथ को खुद ही छोड़ देते हैं। करेक्ट क्योंकि वो तो एक नंबर है ना नंबर के रेस तो कभी खत्म ही नहीं हो सकते ना। आप कितना अमीर बने कितना अमीर बने। एक्चुअल में खुशी जो वो खैर कितने लोग कितना ज्यादा प्यार करते हैं। एक्चुअल खुशी कितने लोगों की जिंदगी में आप बदलाव लेकर आ पाए हैं। कितने लोगों की जिंदगी बदल पाए हैं पॉजिटिव। थैंक यू सो मच अरुण जी। थैंक यू सो मच सूरज जी। आपके कोर्स का लिंक आई विल मेक श्योर के डिस्क्रिप्शन में जरूर जाएगा। सो दैट सभी लोग उसको देखें। उससे बहुत कुछ समझे। मैं पर्सनली उसको डिटेल में स्टडी करने वाला हूं। आई विल मेक श्योर कि मैं पूरा टाइम निकाल के कितने घंटे का कोर्स होगा ये वाला आपका? 52 आवर्स के 52 आवर्स का पूरा आवर्स 50 आवर्स का पूरा आवर्स का है। तो वो पूरा का पूरा कोर्स आई विल मेक श्योर कि मैं जरूर देखूं। आज की डेट में जहां पर सबको डर है कि एआई उनको रिप्लेस कर देगा। देयर आर टू पीपल। आई पर्सनली नो कि एआई इनको रिप्लेस नहीं कर पाएगा। क्योंकि एआई कभी भी ह्यूमन इमोशंस को चेंज नहीं कर सकता और आपकी पूरी स्ट्रेटजी भी ह्यूमन इमोशंस के ऊपर बेस्ड है। डिमांड सप्लाई वाले कांसेप्ट के ऊपर बेस्ड है। और आपका जो थॉट प्रोसेस है जो अभी हमने एंड में डिस्कस किया वो भी पूरा का पूरा इमोशंस के ऊपर बेस्ड था। सो थैंक यू सो मच। इट वास अ वंडरफुल इंटरेक्शन विथ यू। आई कैन ऑनेस्टली से दैट दिस इज़ वन ऑफ़ द बेस्ट टाइम्स आई एवर हैड लर्निंग फ्रॉम समवन पर्सनली। सो थैंक यू सो मच। एंड दोस्तों आपके माइंड में कोई भी क्वेश्चन है उस क्वेश्चन को क्वेश्चन की तरह लेकर मत जाइएगा। उसको कमेंट्स में डाल दीजिएगा। आई विल मेक श्योर कि अरुण जी और सूरज जी दोनों से मैं पर्सनली टाइम लूं। आई विल मेक श्योर कि आपके सारे क्वेश्चंस के आंसर जरूर मिलेंगे। चाहे वो अपनी टीम से आंसर कराएं चाहे वो आपसे खुद से करें। मुझे उसके बारे में अभी कोई आईडिया नहीं है। कोई डिस्कशन नहीं हुआ है। लेकिन आपके क्वेश्चन का आंसर आपको जरूर मिलेगा। ये मेरा आपको प्रॉमिस है। तो प्लीज मेक श्योर कि आप जाने से पहले वीडियो को लाइक कर दीजिए। चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए और डिस्क्रिप्शन में कोर्स का लिंक दिया हुआ है। उसको डाउनलोड कर लीजिए। उसको व्यू कर लीजिए और आपका जो भी थॉट है, जो भी फीडबैक है, जो भी कमेंट है प्लीज कमेंट्स में डाल के जाइएगा। मिलते हैं अगली वीडियो में। बाय-बाय। थैंक यू सो मच बई।