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अगर आप ऑप्शंस ट्रेड करते हैं तो आपने स्ट्रडल, स्ट्रेंगल और आयरन कॉडोर के नाम तो जरूर सुने होंगे। तीनों पॉपुलर स्ट्रेटजीस हैं। लेकिन जब इनमें से एक चूज़ करना हो तब कंफ्यूजन शुरू हो जाता है। किस में ज्यादा प्रॉफिट होगा? मार्केट आपके अगेंस्ट गई तो कौन सी स्ट्रेटजी लॉस को लिमिट कर सकती है? और क्या कोई स्ट्रेटजी है जो यह दोनों चीजें कंबाइन कर सकती है। यही देखने के लिए हमने निफ्टी के 6.5 इयर्स से ज्यादा के डाटा को तीनों स्ट्रेटजीस पे टेस्ट किया। वेलकम टू अनदर एपिसोड ऑफ़ बैक टेस्टेड बाय ग्रो। इस सीरीज में हम पॉपुलर ट्रेडिंग स्ट्रेटजीस और आइडियाज को निफ्टी के हिस्टोरिकल डाटा पर टेस्ट करते हैं ताकि समझ सके कि कब काम करती हैं, कब नहीं और इनमें कितना रिस्क होता है। तो चलिए शुरू करते हैं। यूजुअली ट्रेडिंग के बारे में सोचते ही पहला सवाल होता है कि मार्केट ऊपर जाएगा या नीचे। अगर आपको लगता है कि मार्केट ऊपर जाएगा तो आप कॉल खरीद सकते हैं। एंड नीचे जाने की एक्सपेक्टेशन है तो पुट। लेकिन हर बार आपका व्यू डायरेक्शनल हो यह जरूरी नहीं है। मान लीजिए निफ्टी 22,500 पर है। आपके एनालिसिस के हिसाब से 22,000 के आसपास सपोर्ट है और 23,000 के आसपास रेजिस्टेंस। अब आपको यह नहीं लग रहा कि मार्केट किसी एक डायरेक्शन में बड़ा मूव देगा। आपकी एक्सपेक्टेशन बस इतनी है कि निफ़ी इस रेंज के अंदर रहेगा। तो, क्या इस व्यू को भी ट्रेड किया जा सकता है? इसके लिए आप 22,500 की एक कॉल और एक पुट दोनों सेल कर सकते हैं। दोनों की एक्सपायरी सेम होगी। मान लीजिए दोनों ऑप्शन सेल करके आपको टोटल 500 पॉइंट्स का प्रीमियम मिलता है। अब निफ्टी को एग्जैक्टली ₹2,500 पर ही एक्सपायर होना जरूरी नहीं है। यह प्रीमियम आपको दोनों तरफ थोड़ी-थोड़ी जगह देता है। अगर निफ्टी एक्सैक्टली ₹2,500 पर एक्सपायर होता है, तो दोनों ऑप्शंस की वैल्यू ज़ीरो हो जाएगी और आपके पूरे 500 पॉइंट्स आपके पास रहेंगे। लेकिन जैसे-जैसे निफ्टी इस लेवल से दूर जाएगा किसी एक ऑप्शन की वैल्यू बढ़ेगी और आपका प्रॉफिट कम होने लगेगा। 22,000 पर कॉल की वैल्यू 500 पॉइंट्स होगी जो आपके कलेक्ट किए हुए प्रीमियम को पूरी तरह ऑफसेट कर देगी और 22,000 पर पुट के साथ यही होगा। यह आपके दो ब्रेक इवन लेवल्स हैं। एक्सपायरी पर निफ्टी इनके बीच रहे तो कॉस्ट से पहले प्रॉफिट होगा। इसके बाहर जाए तो लॉस शुरू हो जाएगा। इसी को हम शॉर्ट स्ट्रडल कहते हैं। आप एक फिक्स्ड प्रीमियम कलेक्ट कर रहे हैं। बदले में आप यह रिस्क ले रहे हैं कि निफ्टी आपकी एक्सपेक्टेशन से काफी ज्यादा मूव कर सकता है। और अब यहां एक और सवाल आता है। अब यह व्यू कितने टाइम के लिए ले रहे हैं? हो सकता है आप सिर्फ एक्सपायरी डे पर ट्रेड करते हो तो आप मार्केट को सिर्फ कुछ घंटे दे रहे हैं। वीकली ट्रेड में रफली पांच ट्रेडिंग सेशंस मिलेंगे और मंथली ट्रेड्स में करीब 20। एक्चुअल सेशंस की गिनती थोड़ी बदल सकती है, लेकिन तीनों ट्रेड्स की एक्सपेक्टेशन सेम है। एक्सपायरी तक निफ़ी एक रेंज के अंदर। जनरली एक्सपायरी में जितना ज्यादा टाइम बचा हो प्रीमियम उतना ज्यादा होता है क्योंकि मार्केट कहां तक जा सकता है उसकी अनसर्टेनिटी भी ज्यादा होती है। स्ट्रैडल में ज्यादा प्रीमियम का मतलब यह है कि ब्रेक इवन लेवल्स भी दूर होंगे। सुनने में तो अच्छा लगता है लेकिन मार्केट को उन लेवल्स तक पहुंचने और उनसे आगे निकलने के लिए टाइम भी ज्यादा मिल रहा है। इसीलिए सिर्फ बड़ा प्रीमियम कलेक्ट करना काफी नहीं है। देखना यह है कि ट्रेड खत्म होने तक उसमें से कितना बचता है। इसी को हमने बैक टेस्ट किया। हमने जनवरी 2020 सेप्टेंबर 2026 तक के निफ़ी डाटा पर एक्सपायरी डे, वीकली और मंथली ट्रेड्स टेस्ट किए। एक्सपायरी डे ट्रेड में हमने एक्सपायरी डे के दिन सुबह 920 पर एंट्री ली और उसी दिन 3:15 पर एग्जिट किया। वीकली ट्रेड में पिछली वीकली एक्सपायरी के बाद अगले ट्रेडिंग डे सुबह 920 पर एंट्री ली। हमने अगली एक्सपायरी के ऑप्शन सेल किए और उस एक्सपायरी के दिन 3:15 पर एग्जिट किया। मंथली ट्रेड में पिछली मंथली एक्सपायरी के बाद अगले ट्रेडिंग डे सुबह 920 पर एंट्री ली। हमने अगली मंथली एक्सपायरी के ऑप्शन सेल किए और उस मंथली एक्सपायरी के दिन 3:15 पर एग्जिट किया। एंट्री पर जो स्ट्राइक सेलेक्ट किए वही एग्जिट तक रखे। बीच में कोई स्टॉप लॉस, प्रॉफिट, बुकिंग, एडजस्टमेंट या रीएंट्री नहीं की। इस तरह हमने देखा कि पोजीशंस को एक्सपायरी तक होल्ड करने पर मार्केट के अलग-अलग मूव्स में तीनों स्ट्रेटजीज़ का रिजल्ट कैसे बदलता है। अभी जो हमने एग्ज़ांपल समझा, वह एक्सपायरी के फ़ाइनल पे ऑफ़ का था। बैक टेस्ट में हमने 3:15 के ऑप्शन प्राइसेस पर एग्ज़िट किया। इसीलिए रिजल्ट्स फाइनल एक्सपायरी पे ऑफ से थोड़े अलग हो सकते हैं। इस कंपैरिजन में 352 एक्सपायरी डे ट्रेड्स, 352 वीकली ट्रेड्स और 80 मंथली ट्रेड्स इंक्लूडेड है। सारे रिजल्ट्स प्रीमियम पॉइंट्स में है। ब्रोकरेज, ट्रैक्सेस और स्लिपेज इंक्लूडेड नहीं है। और यह कैपिटल पर परसेंटेज रिटर्न्स भी नहीं है। तो चलिए रिजल्ट्स देखते हैं। एक्सपायरी डे, वीकली और मंथली तीनों में रफ्ली 60% रेस प्रॉफिटेबल थे। लेकिन ओवरऑल रिजल्ट्स काफी अलग थे। एक्सपायरी डे स्ट्रैडल ने पूरे बैक टेस्ट में लगभग 995 पॉइंट्स बनाए। विनिंग ट्रेड्स में एवरेज 56 पॉइंट्स मिले और लूजिंग ट्रेड्स में एवरेज 75 पॉइंट्स गए और सबसे खराब ट्रेड में 43 पॉइंट्स का लॉस हुआ। तो एक्सपायरी में कुछ ही घंटे बचे हो तब भी एक बड़ा मूव कई विनिंग ट्रेड्स का प्रॉफिट ले जा सकता है। तब इसी स्ट्रक्चर को हमने एक हफ्ता दिया तो क्या हुआ? वीकली स्ट्रडल ने टोटल 567 पॉइंट्स बनाए। एवरेज विनिंग ट्रेड ने 161 पॉइंट्स बनाए। जबकि एवरेज लूजिंग ट्रेड में 2004 पॉइंट्स गए। लॉसेस को कवर करने के बाद एवरेज 16.13 पॉइंट्स पर ट्रेड बचा। तीनों टाइम फ्रेम्स में सबसे ज्यादा लेकिन यह प्रॉफिट हर साल नहीं आया। 2023 और 24 में दोनों साल ओवरऑल लॉस में था और सबसे खराब ट्रेड में 947 पॉइंट्स का लॉस हुआ। तो क्या मंथली ट्रेड का और बड़ा प्रीमियम रिजल्ट को और इंप्रूव कर सकता है। मंथली स्ट्रैडल में एंट्री पर एवरेज 668 पॉइंट्स का प्रीमियम मिल रहा था। लेकिन विनिंग ट्रेड्स ने एवरेज 368 पॉइंट्स बनाए और लूजिंग ट्रेड्स में एवरेज 57 पॉइंट्स का लॉस हुआ। वीकली से मंथली जाने पर एवरेज विनिंग ट्रेड का प्रॉफिट रफी 2.3 गुना हुआ। लेकिन एवरेज लॉस 2.5 गुना से भी ज़्यादा बढ़ गया। इसीलिए बड़ा प्रीमियम कलेक्ट करने के बावजूद सारे 80 ट्रेड्स के बाद सिर्फ टोटल 267 पॉइंट्स बचे। तो क्या कुछ फिल्टर्स या कंडीशंस हैं जिनके बेसिस पर ट्रेड सेलेक्ट करने से यह रिजल्ट्स बेटर हो सकते हैं। वीडियो के एंड में हम यह एक्सप्लोर करेंगे। तीनों टाइम फ्रेम में हमने देखा कि एवरेज लूजिंग ट्रेड का लॉस एवरेज विनिंग ट्रेड के प्रॉफिट से बड़ा था। स्ट्रडल में प्रॉफिट तो कलेक्ट किए हुए प्रीमियम तक लिमिटेड था लेकिन मार्केट का बड़ा मूव उस प्रीमियम से काफी ज्यादा लॉस दे सकता था। एक ऐसे ट्रेड से समझते हैं जहां मार्केट हमारी एक्सपेक्टेशन से काफी अगेंस्ट चला गया। 25th फरवरी को एंट्री से लेकर 30th मार्च 2026 को एग्जिट तक इस मंथली स्ट्रैडल में 2557 पॉइंट्स का लॉस हुआ। बाकी 79 ट्रेड्स ने मिलाकर लगभग 25784 पॉइंट्स बनाए थे। तो एक ट्रेड ने उस नेट प्रॉफिट को ऑलमोस्ट पूरा हिस्सा ले लिया। बड़ा एंट्री प्रीमियम देते वक्त यह रिस्क आसानी से मिस हो सकता है। कितना प्रीमियम मिलेगा वो एंट्री पर पता है। लेकिन मार्केट अगेंस्ट गया तो कितना दूर जाएगा वो नहीं पता। कभी ऑप्शंस में जितनी वोलेटिलिटी प्राइस होती है, एक्चुअल मार्केट मूव उससे कम रहता है। सेलर्स इसी डिफरेंस से बेनिफिट लेने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब एक बड़ा मूव आता है, तो उसका लॉस कई ट्रेड्स में कलेक्ट किए हुए प्रीमियम से भी ज्यादा हो सकता है। तो क्या निफ्टी को मूव करने के लिए थोड़ी और जगह दे सकते हैं। अपने एग्जांपल पर वापस आते हैं। निफ्टी ₹2,500 पर है। पहले हमने इसी स्ट्राइक की कॉल और पुट सेल की थी। इस बार कॉल को 23,000 पर और पुट को ₹2,000 पर सेल करते हैं। मान लीजिए अब 500 की जगह 250 पॉइंट्स का प्रीमियम मिलता है। प्रीमियम कम है लेकिन बदले में क्या मिला? स्ट्रडल में पूरा प्रीमियम तभी बचता है जब निफ्टी एक्सैक्टली 22,500 पर एक्सपायर होता। लेकिन अब निफ्टी 22,000 से 23,000 के बीच कहीं भी एक्सपायर हो, दोनों ऑप्शंस की वैल्यू जीरो होगी। यानी अब एक सिंगल लेवल की जगह दोनों स्ट्राइक्स के बीच की पूरी रेंज है जहां हम पूरा प्रीमियम रख सकते हैं और कलेक्ट किया हुआ प्रीमियम दोनों तरफ 250 पॉइंट्स की एक्स्ट्रा जगह देता है। अब ब्रेक इवेंस है 21750 और 23250 पहले वाले स्ट्रैडल एग्जांपल के कंपैरिजन में दोनों तरफ 250 पॉइंट्स की एक्स्ट्रा रूम इसी को हम शॉर्ट स्ट्रायंगल कहते हैं। आईडिया रीज़नेबल लगता है थोड़ा प्रीमियम कम लो और मार्केट को मूव करने के लिए थोड़ी ज्यादा जगह दे दो। लेकिन क्या रिजल्ट्स भी बेटर हुए? फैक्टर्स में स्ट्राइक सेलेक्ट करने के लिए हमने कॉल और पुट दोनों का एब्सोल्यूट डेल्टा 0.30 के आसपास रखा। इससे करंट मार्केट प्राइस से दूर की स्ट्राइक्स चूज़ करने का एक कंसिस्टेंट रूल मिल गया और इसको भी सेम तीन टाइम फ्रेम्स पर टेस्ट किया। स्ट्रेंगल में तीनों टाइम फ्रेम्स पर स्ट्रडल से ज्यादा ट्रेस प्रॉफिटेबल रहे। मतलब विन रेट हायर था। लेकिन क्या ज्यादा बार जीतने से टोटल प्रॉफिट भी बढ़ा। एक्सपायरी डे पर ऐसा हुआ। स्ट्रेंगल ने 13352 पॉइंट्स बनाए। जबकि स्ट्रैडल ने 995 पॉइंट्स बनाए। यहां अप्रोक्स 68% ट्रेड्स प्रॉफिटेबल रहे। एवरेज विनिंग ट्रेड में 42 पॉइंट्स मिले और एवरेज लूजिंग ट्रेड में 76 पॉइंट्स गए। स्ट्रडल के कंपैरिजन में हर विनिंग ट्रेड से कम पॉइंट्स मिल रहे थे। लेकिन विन ज्यादा होने से टोटल रिजल्ट्स थोड़ा इंप्रूव हुआ। फिर भी सबसे खराब ट्रेड में 394 पॉइंट्स का लॉस हुआ। स्ट्राइक्स दूर ले जाने से बड़े लॉस का रिस्क खत्म नहीं हुआ। वीकली ट्रेड्स में यह ट्रेड ऑफ और क्लियर हो गया। एवरेज विनिंग ट्रेड ने 123 पॉइंट्स बनाए और एवरेज लूजिंग ट्रेड में 193 पॉइंट्स लूज़ किए। स्ट्रडल के एवरेज विनर के 161 पॉइंट्स से यह काफी कम था। जबकि एवरेज लॉस 2004 से घटकर 193 पॉइंट्स ही हुआ। जहां ज्यादा ट्रेड्स प्रॉफिटेबल होने के बावजूद छोटे विनर्स का असर टोटल रिजल्ट्स पर पड़ा। स्ट्रेंगल ने 516 पॉइंट्स बनाए। स्ट्रैडल केस 5677 से कम। लेकिन टोटल प्रॉफिट कंपैरिजन का सिर्फ एक हिस्सा है। उस प्रॉफिट तक पहुंचने के बीच कितनी गिरावट आई? इसके लिए हमने ड्रॉडाउन देखा। यानी कंप्लीटेड ट्रेस के क्यूमुलेटिव प्रॉफिट में किसी प्रीवियस पीक से सबसे बड़ी गिरावट। वीकली स्ट्रडल में यह लगभग 2861 पॉइंट्स थी। स्ट्रेंगल में करीब पॉइंट्स। तो स्ट्रेंगल में टोटल प्रॉफिट रफली 10% कम था लेकिन ड्रॉडाउन करीब 30 पॉइंट्स छोटा था। अब मंथली ट्रेड्स में क्या हुआ? एवरेज विनिंग ट्रेड ने 284 पॉइंट्स बनाए। लेकिन एवरेज लूजिंग ट्रेड में 489 पॉइंट्स गए। यानी एक एवरेज लॉस लगभग 1.7 एवरेज विनिंग ट्रेड्स का प्रॉफिट ले रहा था। इस बार प्रॉफिटेबल ट्रेड्स की ज्यादा गिनती भी इस डिफरेंस को कवर नहीं कर पाई। सारे 80 मंथली ट्रेड्स को मिलाकर स्ट्रेंगल में 447 पॉइंट्स का लॉस रहा और फरवरी से मार्च 2026 वाले सेम ट्रेड में 2635 पॉइंट्स का लॉस हुआ। स्ट्रैडल से भी थोड़ा ज्यादा। लेकिन हमने स्ट्र्राइक्स दूर की थी। तो क्या डाउन साइड पर ज्यादा रूम नहीं मिलना चाहिए था। यहां दो चीजें एक साथ बदल रही हैं। स्ट्र्राइक्स दूर जाती हैं, लेकिन कलेक्ट किया हुआ प्रीमियम भी कम हो जाता है। और हमारे सिंपल एग्जांपल में स्ट्र्राइक्स दोनों तरफ इक्वल डिस्टेंस पर थी। डेल्टा के बेसिस पर स्ट्राइक सेलेक्ट करने से यह इक्वल डिस्टेंस गारंटीड नहीं है। 80 मंथली ट्रेड्स में से 59 में स्ट्रेंगल का लोअर ब्रेक इवन ऐसा था कि निफ्टी को गिरने के लिए भी स्ट्र्राइडल से भी कम रूम मिल रहा था। मार्च 2026 वाले ट्रेड में स्ट्राइडल का लोअर ब्रेक इवन करीब 24,817 था। स्ट्रेंगल का करीब था 24,955। यानी नीचे आते हुए निफ़ी स्ट्रेंगल के ब्रेक इवन को पहले क्रॉस करता है। पुट स्ट्राइक दूर थी, लेकिन प्रीमियम इतना कम हो गया कि स्ट्राइक की एक्स्ट्रा डिस्टेंस का बेनिफिट भी कवर नहीं कर पाया। इसीलिए एक्चुअल ब्रेक इवन देखना जरूरी है। सिर्फ सोल स्ट्र्राइक्स के बीच गैप बढ़ गया। इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों डायरेक्शंस में ज्यादा रूम मिल गया और ब्रेक इवन दूर भी हो तो मार्केट उनके बाहर जा सकता है। अब तक हमने ज्यादा प्रीमियम कलेक्ट करके देखा। स्ट्राइक्स को दूर ले जाकर भी देखा। लेकिन दोनों स्ट्रक्चर्स में मार्केट का बड़ा मूव अब भी बहुत बड़ा लॉस दे सकता है। तो क्या एंट्री लेने से पहले ही हम लॉस की एक लिमिट सेट कर सकते हैं? अपने स्ट्र्रांगल पर वापस आते हैं। हमने 23000 की कॉल और ₹2,000 की पुट सेल की थी। अब इसके साथ दो ऑप्शंस खरीदते हैं। 23,500 की कॉल और ₹1,500 की पुट दोनों की एक्सपायरी वही होगी। अगर निफ़ी बहुत तेजी से ऊपर जाता है, तो खरीदी हुई कॉल सोल्ड कॉल के बढ़ते हुए लॉस को ऑफसाइड करने में हेल्प करेगी। और अगर मार्केट बहुत नीचे गिरता है तो खरीदी हुई पुट डाउन साइड पर वही काम करेगी। मान लीजिए इन दोनों ऑप्शंस को खरीदने में 100 पॉइंट्स लगे। स्ट्र्रांग से 250 पॉइंट्स मिले थे। प्रोटेक्शन के 100 पॉइंट्स देने के बाद नेट प्रीमियम 150 पॉइंट्स बचा। हर सोल्ड ऑप्शन और उसके हैेज के बीच 500 पॉइंट्स का गैप है। तो एक्सपायरी पर मैक्सिमम लॉस होगा 500 पॉइंट्स - 150 यानी 350 पॉइंट्स कॉस्ट से पहले। इसी को आयरन कॉडोर कहते हैं। अब एक्सपायरी पर लॉस की एक लिमिट है। लेकिन इस प्रोटेक्शन की भी कॉस्ट है। मैक्सिमम प्रॉफिट 250 से घटकर 150 पॉइंट्स हो गया और ब्रेक इवेंट्स भी अंदर आ गए। 21850 और 2310। बड़ा मूव आए तो प्रोटेक्शन लॉस को लिमिट करती है। लेकिन ट्रेड हमारे फेवर में रहे तो इसी प्रोटेक्शन की कॉस्ट प्रॉफिट कम करती है। तो यह प्रोटेक्शन कब अपनी कॉस्ट जस्टिफाई करती है। बैक टेस्ट में हमने स्ट्र्रांगल के शॉर्ट ऑप्शंस का एब्सोल्यूट डेल्टा 0.30 के आसपास रखा और प्रोटेक्शन के लिए 0.10 एब्सोल्यूट डेल्टा के आसपास के ऑप्शंस खरीदे। अब देखते हैं प्रोटेक्शन ऐड करने के बाद रिजल्ट्स कैसे बदले। आयरन कॉडोर में तीनों टाइम फ्रेम्स पर रेफ्ली 59 टू 61% ट्रेस प्रॉफिटेबल थे। एक्सपायरी डे आयरन कॉडोर में एवरेज विनिंग ट्रेड्स ने 32 पॉइंट्स बनाए। जबकि एवरेज लूजिंग ट्रेड में 48 पॉइंट्स गए। स्ट्रेंगल में ये फिगर्स 42 और 76 पॉइंट्स थे। प्रोटेक्शन से एवरेज लॉस कम हुआ लेकिन विनिंग ट्रेड से मिलने वाले पॉइंट्स भी कम हो गए। सबसे खराब ट्रेड में 160 पॉइंट्स का लॉस हुआ। जबकि स्ट्रेंगल का सबसे बड़ा लॉस था 394 पॉइंट्स का। यानी प्रोटेक्शन का बेनिफिट तो दिखा लेकिन उसी कॉस्ट ने ओवरऑल प्रॉफिट का भी काफी हिस्सा ले लिया। वीकली ट्रेड्स में भी यही ट्रेड ऑफ था। एवरेज विनिंग ट्रेड में 95 पॉइंट्स मिले और एवरेज लूजिंग ट्रेड में 128 पॉइंट्स गए। लेकिन छोटे विनर्स और कम विनिंग ट्रेड्स के साथ टोटल प्रॉफिट भी घटकर 2387 पॉइंट्स रहा। एवरेज 6.78 पॉइंट्स पर ट्रेड। इसके बदले में ड्रॉडाउन करीब 1181 पॉइंट्स था। तीनों वीकली स्ट्रेटजीज़ में सबसे छोटा। सबसे खराब ट्रेड में 496 पॉइंट्स का लॉस हुआ। अब मंथली ट्रेड्स में पिक्चर बदली। एवरेज विनिंग ट्रेड ने 210 पॉइंट्स बनाए। वहीं एवरेज लूजिंग ट्रेड में 276 पॉइंट्स गए। मंथली स्ट्रेंगल में एवरेज विनर 284 पॉइंट्स का था और एवरेज लॉस 489 पॉइंट्स का। प्रोटेक्शन ऐड करने पर एवरेज विनर रफली 26% छोटा हुआ। लेकिन एवरेज लॉस करीब 44% कम हो गया। सारे 80 मंथली ट्रेड्स मिलाकर आयरन कंडोर ने 766 पॉइंट्स बनाए। एवरेज 9.57 पॉइंट्स पर ट्रेड। इस बैक टेस्ट में यह मंथली स्ट्रडल और स्ट्रेंगल दोनों से आगे रहा। फरवरी से मार्च 2026 की गिरावट में स्ट्रेंगल ने 2635 पॉइंट्स लूज किए थे। हैजेस ऐड करने के बाद भी लॉस करीब 753 पॉइंट्स रहा। काफी बड़ा डिफरेंस। लेकिन अब एक इंटरेस्टिंग चीज देखिए। 80 मंथली ट्रेड्स में प्रोटेक्शन ऐड करने से रिजल्ट सिर्फ 13 बार बेटर हुआ। बाकी 67 ट्रेड्स में हैेज वर्जन का रिजल्ट वर्स्ट था। यानी ज्यादातर ट्रेड्स में प्रोटेक्शन की कॉस्ट ने प्रॉफिट कम किया या लॉस बढ़ाया। फिर भी सारे 80 ट्रेड्स को साथ देखें तो हैजेस ने टोटल रिजल्ट को करीब 123 पॉइंट से इंप्रूव किया। कुछ ट्रेड्स में प्रोटेक्शन का बेनिफिट इतना बड़ा था कि उसने बाकी कई ट्रेड्स की कॉस्ट को कवर कर दिया। अब तक हमने हर स्ट्रेटजी के रिजल्ट अलग देखे। स्ट्रडल के रिजल्ट देखते वक्त हमने एक सवाल छोड़ा था। क्या कुछ कंडीशंस के बेसिस पर ट्रेड सेलेक्ट करने से रिजल्ट्स बेटर हो सकते हैं? अब तक हम हर एक्सपायरी सल में एंट्री ले रहे थे। लेकिन हर बार मिलने वाला प्रीमियम एक जैसा नहीं था। तो हमने चेक किया कि कम प्रीमियम और ज्यादा प्रीमियम वाले ट्रेड से डिफरेंस क्या आया? पहले ज़्यादा प्रीमियम को डिफाइन करते हैं। निफ़ी 20,000 पर हो और स्ट्रडल का प्रीमियम 200 पॉइंट्स हो, तो वह इंडेक्स का 1% है। निफ़ी 30,000 पर हो और प्रीमियम 300 पॉइंट्स हो तब भी 1% है। फिर 2020 सेप्टेंबर 2026 तक के सारे ट्रेड्स लिए और हर टाइम फ्रेम के प्रीमियम्स को छोटे से बड़े ऑर्डर में तीन बकेट्स में रखा। लो, मीडियम और हाई। एक्सपायरी डे, वीकली और मंथली के ग्रुप्स अलग बनाए। क्योंकि तीनों में एक्सपायरी तक बचा हुआ टाइम अलग है। और तीनों स्ट्रेटजीज़ को कंपेयर करने के लिए वही एटीएम स्ट्रडल प्रीमियम से बनाए हुए ग्रुप्स को यूज़ किया। यह पूरे हिस्टोरिकल सैंपल का ब्रेकडाउन है। इससे हम पोटेंशियल फ़्टर्स आइडेंटिफाई कर सकते हैं। तो, पहले एक्सपायरी डे रिजल्ट्स देखते हैं। लो प्रीमियम ग्रुप में तीनों स्ट्रेटजीज़ एवरेज में लॉस में थी। मीडियम और हाई ग्रुप्स में रिजल्ट्स पॉजिटिव रहे। स्ट्रडल ने दोनों में से एवरेज अप्रोक्स 9 टू 10 पॉइंट्स बनाए। स्ट्रेंगल और आयरन कॉडोर का एवरेज हाई प्रीमियम ग्रुप में बेटर था। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ज्यादा प्रीमियम मिलने पर मार्केट कम मूव हुआ। लो प्रीमियम एक्सपायरी डेट ट्रेड्स में निफ्टी का एंट्री से एग्जिट तक 1% या उससे बड़ा मूव करीब 8.5% बार हुआ। हाई प्रीमियम ग्रुप्स में यह बढ़कर 27% हो गया। यानी बड़े मूव ज्यादा कॉमन थे। फिर भी एक्स्ट्रा प्रीमियम कलेक्ट करने के बाद एवरेज रिजल्ट लो प्रीमियम ट्रे से बेटर रहा। अब वीकली ट्रेस देखते हैं। यहां हाई प्रीमियम ग्रुप का डिफरेंस और क्लियर था। स्ट्रडल ने एवरेज करीब 50 पॉइंट्स बनाए। स्ट्रेंगल ने 42 और आयरन कंडोर ने 30। बिना फ़्टर के इन्हीं स्ट्रेटजीज़ का एवरेज अराउंड 16, 15 और से पॉइंट्स का था। लेकिन हाई प्रीमियम ग्रुप्स में बड़े लॉसेस भी आए। स्ट्रगल का 947 पॉइंट्स और स्ट्रेंगल का 931 पॉइंट्स का लॉस भी इसी ग्रुप में था। तो ज्यादा प्रीमियम ने एवरेज रिजल्ट्स इंप्रूव किए पर बड़े लॉस का रिस्क खत्म नहीं किया। अब तक लग सकता है कि प्रीमियम जितना ज्यादा सेलिंग का रिजल्ट उतना ज्यादा बेटर होगा। मंथली ट्रेड्स में यह पैटर्न बदल गया। मंथली में बेस्ट एवरेज रिजल्ट्स मीडियम प्रीमियम ग्रुप में आए। स्ट्रैडल ने एवरेज 282 पॉइंट्स बनाए। रैंक ने 244 और आयरन कंडोर ने 1136 लेकिन हाईएस्ट प्रीमियम ग्रुप में तीनों का एवरेज रिजल्ट नेगेटिव था। लेकिन ऐसा क्यों हुआ? मीडियम प्रीमियम ग्रुप के 26 ट्रेज़ में से सिर्फ टू में निफ्टी एंट्री से एग्जिट तक 4% या उससे ज्यादा मूव हुआ। हाई प्रीमियम ग्रुप में 27 में से 17 ट्रेड्स में। यानी मीडियम ग्रुप में रफली 8% ट्रेड्स और हाई ग्रुप में 63%। मंथली हाई प्रीमियम ट्रेड्स में बड़े मूव्स इतने कॉमन थे कि एक्स्ट्रा प्रीमियम भी ओवरऑल पॉजिटिव रिजल्ट के लिए काफी नहीं पड़ा। तो इस बैक टेस्ट से स्ट्रेटजी चूज़ करने के बारे में ऐसा क्या समझ आया? बिना किसी फिल्टर के एक्सपायरी डे ट्रेड्स में स्ट्रेंगल ने सबसे ज्यादा पॉइंट्स बनाए। वीकली में स्ट्रडल आगे था और मंथली में आयरन कॉडोर। लेकिन सिर्फ इस रैंकिंग से ट्रेड डिसाइड करना काफी नहीं है। मंथली आयरन कॉडोर का रिजल्ट बाकी दोनों से बेटर था। पर एवरेज सिर्फ 9.57 पॉइंट्स पर ट्रेड था। कंपैरिजन में आगे रहना और एक अट्रैक्टिव ट्रेड होना दोनों अलग बातें हैं। जब हमने एंट्री प्रीमियम के बेसिस पर रिजल्ट्स देखे तो पिक्चर और क्लियर हुई। लो प्रीमियम ग्रॉस में तीनों टाइम फ्रेम्स पर तीनों स्ट्रेटजीस का एवरेज रिजल्ट नेगेटिव था। वीकली में हाई प्रीमियम ग्रुप के रिजल्ट सबसे अच्छे थे। लेकिन मंथली में मीडियम प्रीमियम ग्रुप आगे था। सबसे ज्यादा प्रीमियम वाली ट्रेड्स नहीं। यानी स्ट्रेटजी सिलेक्शन के साथ यह भी मैटर करता है कि आप कितने टाइम के लिए ट्रेड ले रहे हैं और उस रिस्क के बदले कितना प्रीमियम मिल रहा है। स्ट्र्राइडल में ज्यादा प्रीमियम मिलता है। स्ट्र्रांगल में सोल्ड स्ट्राइक्स दूर होती हैं और आयरन कंडोर लॉस की लिमिट सेट करता है। लेकिन उस प्रोटेक्शन की कॉस्ट भी प्रॉफिट को कम कर सकती है। इसीलिए एंट्री से पहले सिर्फ प्रीमियम मत देखिए। यह भी देखिए कि मार्केट को कितनी रूम मिल रही है और उस रेंज के बाहर जाने पर आपका कितना लॉस हो सकता है। प्रीमियम के यह ग्रुप्स पूरे हिस्टोरिकल डाटा से बनाए गए हैं। इन्हें रेडीमेड ट्रेडिंग रूल समझने से पहले नए डाटा पर टेस्ट करना जरूरी है और एक्चुअल ट्रेड की यूज़फुलनेस जज करने के लिए कॉस्ट और रिक्वायर्ड कैपिटल भी देखना जरूरी है। तो आपके पास भी कोई ऐसी ट्रेडिंग स्ट्रेटजी या आईडिया है जिसे आप चाहते हैं कि हम अगले एपिसोड में कवर करें तो कमेंट्स में जरूर बताएं। एंड ऐसे ही और एपिसोड्स के लिए सब्सक्राइब टू ट्रेडिंग वि g। इन्वेस्टमेंट एंड सिक्योरिटी मार्केट आर सब्जेक्ट टू मार्केट रिस्क रीड ऑल द रिलेटेड डॉक्यूमेंट्स केयरफुली बिफोर इन्वेस्टिंग। प्लीज रीड द रिस्क डिस्क्लोजर डॉक्यूमेंट्स केयरफरली बिफोर इन्वेस्टिंग इन इक्विटी शेयर डेरिवेटिव्स म्यूचुअल फंड एंड ऑल अदर इंस्ट्रूमेंट्स ट्रेड ऑन स्टॉक एक्सचेंजेस