We Backtested This Expiry Day OI Strategy on NIFTY — backtested on Indian market data | FakeTrades
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We Backtested This Expiry Day OI Strategy on NIFTY

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Analysed 21 Oct 2026, 07:06 PM IST
⏳ Backtest pending — a data-backed verdict will be attached.

Verdict

Not backtestable — no mechanical strategy to test. Educational backtesting analysis of Open Interest (OI) levels as support/resistance; no mechanical, rule-based strategy with defined entry/exit rules suitable for automation.

We only score videos that teach a rule-based strategy (a defined entry trigger, stop and exit a computer could follow). This one doesn't contain one, so there is nothing to backtest — we show no number rather than a made-up one.

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Full transcript (2443 words)
अगर आप ऑप्शंस ट्रेड करते हो तो आपने ओआई या ओपन इंटरेस्ट से सपोर्ट और रेजिस्टेंस जरूर मार्क किया होगा। सबसे ज्यादा पुट आई वाला स्ट्राइक सपोर्ट और सबसे ज्यादा कॉल ओआई वाला स्ट्राइक रेजिस्टेंस। पर क्या निफ्टी सच में इन लेवल्स को रिस्पेक्ट करता है। इसीलिए हमने जनवरी 2020 से अगस्त 2026 तक ₹1640 ट्रेडिंग सेशंस का डाटा बैक टेस्ट किया। उनका एक सिंपल सवाल था जब निफ़ी इन लेवल्स को टेस्ट करता है तो क्या हमें रिवर्सल ट्रेड लेना चाहिए या ब्रेकआउट के साथ जाना चाहिए? रिजल्ट्स में एक तरीके ने लॉस करवाया और दूसरे ने प्रॉफिट। सबसे इंटरेस्टिंग बात यह थी कि पूरा प्रॉफिट सिर्फ एक स्पेसिफिक डायरेक्शन के ट्रेड से आया। जबकि दूसरी डायरेक्शन ने टोटल प्रॉफिट्स को कम ही किया। साथ ही हमने मैक्स पेन को भी टेस्ट किया। ट्रेडर्स अक्सर एक्सपेक्ट करते हैं कि एक्सपायरी के क्लोज तक निफ्टी इस लेवल के आसपास आ सकता है। तो, हमने चेक किया क्या निफ्टी एक्सपायरी के दिन सुबह मार्क किए गए मैक्स पेन लेवल के करीब आकर क्लोज हुआ? ये है बैक टेस्टेड बाय ग्रो जहां हम पॉपुलर ट्रेडिंग आइडियाज को क्लियर रूल्स के साथ इंडियन मार्केट डेटा पर टेस्ट करते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं। पहले कंफ्यूजन क्लियर कर लेते हैं। किसी स्ट्राइक पर बहुत सारा कॉल ओआई है। इसका मतलब यह नहीं है कि लोग कॉल्स खरीद रहे हैं। ओआई सिर्फ बताता है कि उस स्ट्राइक पर कितने कॉन्ट्रैक्ट्स ओपन है। जहां हर कॉन्ट्रैक्ट में एक बयर और एक सेलर होता है। फिर हाई कॉल ओआई को रेजिस्टेंस क्यों माना जाता है? क्योंकि अगर वहां कॉल सेलर्स की पोजीशन ज्यादा है तो उनके लिए उस लेवल के ऊपर जाना अनफेवरेबल होगा। इसी लॉजिक से हाई कॉल ओआई को पोटेंशियल रेजिस्टेंस माना जाता है। क्योंकि हम सिर्फ एक साइड देख रहे हैं। हर कॉन्ट्रैक्ट के दो साइज होते हैं। बायर और सेलर। बायर का मैक्सिमम लॉस उसका प्रीमियम होता है। लेकिन अनहेज सेलर का लॉस प्रीमियम से कहीं ज्यादा हो सकता है। इसीलिए ट्रेडर्स सेलर की तरफ ज्यादा ध्यान देते हैं। एक एग्जांपल लो। निफ़ी ₹24,200 पर है और ₹24,300 कॉल में सबसे ज़्यादा ओआई है। एक सेलर यह कॉल ₹50 में बेचता है। अगर निफ़ी एक्सपायरी पर ₹24,300 या उससे नीचे रहा, तो कॉल एक्सपायर हो जाती है और सेलर के ₹50 पक्के। लेकिन अगर निफ्टी ₹24,500 पर गया, तो कॉल प्रीमियम ₹200 की हो जाती है। सेलर जहां सिर्फ ₹50 कमा सकता था, वहां ₹200 देने पड़े। लॉस ₹150 पर यूनिट। तो सेलर चाहता है कि निफ्टी ₹24,300 के ऊपर ना जाए। इसी सोच से हाई कॉल ओआई को रेजिस्टेंस माना जाता है। पुट के लिए सेम लॉजिक बट उल्टा 24100 पुट का सेलर चाहता है कि निफ्टी उसके ऊपर रहे। इसीलिए हाई पुट ओआई को सपोर्ट माना जाता है। पर यहां एक एजम्पशन है जिसे स्किप नहीं करना चाहिए। सेलर चाहता है कि लेवल होल्ड हो इसका मतलब यह नहीं है कि मार्केट मान लेगा। और सिर्फ ओआई देखकर हमें यह भी नहीं पता चलता कि उसका ऑप्शन क्यों बेचा। प्रीमियम कमाने के लिए या किसी दूसरे ट्रेड का रिस्क कम करने के लिए। तो यह एक इंटरप्रिटेशन है। अब देखना यह है कि उसके हिसाब से ट्रेड चला या नहीं। एक प्रॉब्लम है ओआई लेवल्स दिन भर चेंज होते रहते हैं। इसीलिए टेस्ट को कंसिस्टेंट रखने के लिए हमने हर दिन का लेवल सुबह ही फिक्स कर दिया। जनवरी 2020 से अगस्त 2026 तक के ₹1643 ट्रेडिंग सेशंस लिए। रोज 920 पर निफ्टी का प्राइस देखा। उसके ऊपर का हाईएस्ट कॉल ओआई और नीचे का हाईएस्ट पुट ओआई लेवल मार्क किया। यह लेवल्स पूरे दिन फिक्स रहे। चाहे ओआई बाद में चेंज हो जाए और लेवल तभी ब्रोकन माना जाए जब 1 मिनट कैंडल उसके बाहर क्लोज हुई। सारे रिजल्ट्स निफ़ी स्पॉट पॉइंट्स में है। कॉस्ट और स्लिप से पहले। यानी प्राइस लेवल को टच करके वापस आ गया तो वो ट्रेड काउंट नहीं हुआ। हम सिर्फ उन केसेस को देख रहे हैं जहां प्राइस ने लेवल को एक्चुअली ब्रेक किया। ब्रीच के बाद दो ही पॉसिबिलिटीज हैं। या तो मूव फेल होगा और निफ्टी वापस आएगा या फिर मूव और कंटिन्यू करेगा। हमने दोनों टेस्ट किए। टेस्ट वन रिवर्सल। इस अप्रोच में हम एक्सपेक्ट करते हैं कि ओआई से मार्क किए गए लेवल टूटने के बाद भी प्राइस वापस लौटेगा। हाई कॉल ओआई वाले रेजिस्टेंस के ऊपर क्लोज हुआ तो सेल करेंगे। हाई पुट ओआई वाले सपोर्ट के नीचे क्लोज हुआ तो बाय करेंगे। मान लो निफ्टी में 22,800 पर हाई कॉल ओआई है जिसे हमने रेजिस्टेंस मार्क किया। अब एक मिनट कैंडल 22,810 पर क्लोज होती है। हम यहां सेल करेंगे इस एक्सपेक्टेशन में कि निफ़ी वापस नीचे आएगा। बेसिकली मार्केट मीन रिवर्ट करेगा और टारगेट सुबह का 920 का निफ़ी प्राइस। एंट्री से उस टारगेट तक की दूरी हमारा रिस्क डिफाइन करती है और स्टॉप उतनी ही दूरी पर ऑपोजिट साइड यानी 1:1 रिस्क टू रिवॉर्ड। अगर ना स्टॉप हिट हुआ और ना टारगेट तो 325 पीm पर पोजीशन क्लोज रिजल्ट 59 ट्रेड्स। विन रेट लगभग 44% एंड टोटल लॉस लगभग 2378 पॉइंट्स। और यह ऐसा नहीं था कि एक खराब साल ने बाकी साल खराब कर दिए। हर एक साल नेगेटिव था। 2026 का पार्शियल पीरियड भी कुछ साल फ्लैट के करीब थे और कुछ में बहुत बड़ा लॉस। तो पहला फाइंडिंग यह था लेवल ब्रेक होने के बाद रिवर्सल ट्रेड करना प्रॉफिटेबल नहीं रहा। तो अगला टेस्ट था रिवर्सल के बजाय अगर हम ब्रेकआउट को फॉलो करें तो रिजल्ट क्या आता है? टेस्ट टू है ब्रेकआउट। इस बार हम एक्सपेक्ट करते हैं कि लेवल टूटने के बाद प्राइस उसी डायरेक्शन में आगे बढ़ेगा। हाई कॉल ओआई वाले रेजिस्टेंस के ऊपर क्लोज हुआ तो बाय करेंगे। एंड हाई पुट ओआई वाले सपोर्ट के नीचे क्लोज हुआ तो सेल करेंगे। मान लो ₹2,500 पर हाई पोटो आई है जिसे हमने एक सपोर्ट मार्क किया है। अब एक मिनट कैंडल 22,490 पर क्लोज होती है। हम यहीं सेल करेंगे इस एक्सपेक्टेशन में कि सपोर्ट टूटने के बाद निफ्टी और नीचे जाएगा। स्टॉप लॉस होगा सुबह 920 का निफ्टी प्राइस। मान लो वो 22,600 था। तो 22,490 की एंट्री से हमारा रिस्क हुआ 110 पॉइंट्स। टारगेट इसका डबल यानी 2120 पॉइंट्स नीचे। तो टारगेट लेवल हुआ 22,270। यह हुआ 1:2 रिस्क टू रिवॉर्ड। अगर टारगेट या स्टॉप लॉस दोनों में से कुछ भी नहीं हिट होता है, तो ट्रेड 325 PM पीm पर क्लज़ कर देंगे। एक जरूरी बात हमने सिर्फ डायरेक्शन नहीं बदली, टारगेट भी बदला है। रिवर्सल में रिस्क रिवॉर्ड के बराबर था। ब्रेकआउट में डबल। तो रिजल्ट दोनों चेंजेस का मिलाजुला इफेक्ट है। सिर्फ उल्टी पोजीशन लेने का नहीं। इस बार टोटल पॉजिटिव आया। वहीं 59 एंट्रीज विनर लगभग 48% और टोटल प्लस 2460 पॉइंट्स बिफोर कॉस्ट। 7 साल में से 5 साल यह अप्रोच प्रॉफिटेबल रहा। अब आप सोचोगे विन रेट तो 50% से भी कम है। फिर पैसे कैसे बने? क्योंकि सिर्फ कितनी बार जीते यह नहीं कितना जीते और कितना हारे यह भी मैटर करता है। एवरेज विनिंग ट्रेड लगभग 54 पॉइंट्स का था। एवरेज लूजिंग ट्रेड लगभग 40 पॉइंट्स का। बड़े विनर्स ने ज्यादा बार होने वाले लॉसेस को कवर कर दिया और सब विनर्स पूरे टारगेट तक नहीं पहुंचे। कुछ ट्रेड्स 325 पर छोटे प्रॉफिट या लॉस के साथ भी बंद हुए। तो अब तक लगता है कि ब्रेकआउट फॉलो करना रिवर्सल से बेहतर है। पर रुकिए। हमने यहां दो बिल्कुल अलग सिचुएशंस को मिला दिया था। कॉल ओआई के ऊपर ब्रेक और पुट ओआई के नीचे ब्रेक। क्या दोनों चले या एक ही पूरा रिजल्ट खींच रहा था। लेकिन जब हमने अपसाइड और डाउन साइड रेट्स को अलग करके देखा तो रिजल्ट्स काफी डिफरेंट थे। 2008 अपसाइड ट्रेड्स लगभग -16 पॉइंट्स। 31 डाउन साइड ट्रेड्स लगभग +2576 पॉइंट्स। पूरा नेट प्रॉफिट डाउन साइड रेट से आया। अपसाइड ट्रेज ने टोटल को थोड़ा कम ही किया। तो ओआई ब्रेकआउट का काम करता है। कहना अधूरा सच है। इस सैंपल में कॉल ओआई के ऊपर बाय करना और पुट ओआई के नीचे सेल करना दोनों का रिजल्ट सेम नहीं था। स्ट्रांग रिजल्ट सिर्फ पुट ओआई सपोर्ट के नीचे ब्रेक फॉलो करने से आया। अब एक सवाल बचा है क्या यह डाउन साइड प्रॉफिट हर तरह के सेशन में आया और यहां पे हमें एक सबसे बड़ी फाइंडिंग मिली। एक्सपायरी डे का डाउन साइड हमने 31 डाउन साइड ट्रेड्स को दो ग्रुप्स में बांटा। एक्सपायरी सेशंस और नॉन एक्सपायरी सेशंस। नॉन एक्सपायरी में 211 ट्रेड्स में लगभग 749 पॉइंट्स का गेन था। यानी लगभग 3.5 पॉइंट्स पर ट्रेड बिफोर कॉस्ट। एक्सपायरी में 90 ट्रेड्स मिले और लगभग 10827 पॉइंट्स का प्रॉफिट यानी लगभग 20 पॉइंट्स पर ट्रेड। दोनों ग्रुप्स पॉजिटिव थे लेकिन एक्सपायरी ट्रेड्स में पर ट्रेड गेन काफी ज्यादा था। डाउन साइड ट्रेड्स के 30% से भी कम एक्सपायरी ट्रेड्स थे। फिर भी इन्हीं से टोटल डाउन साइड प्रॉफिट का लगभग 71% आया। नॉन एक्सपायरी ट्रेड्स ज्यादा थे लेकिन प्रॉफिट काफी कम था। अब एक ऑनेस्ट चेक क्या एक्सपायरी ग्रुप में ऑलमोस्ट हर सिग्नल प्रॉफिटेबल था? बिल्कुल नहीं। 90 ट्रेड्स में से 47 प्रॉफिटेबल थी। यानी विन रेट लगभग 52% मतलब विन रेट बस थोड़ा सा 50% से ऊपर था। डिफरेंस यहां विनर्स और लूजर्स के कंबाइंड आउटकम में था। हिट रेट में नहीं। फिर वही सवाल जो हर बैक टेस्ट में पूछना चाहिए। क्या कोई एक एक्सेप्शनल साल पूरा पैटर्न खींच रहा है। इसीलिए हमने 90 ट्रे्स को ईयर वाइज अलग किया। रिजल्ट हर साल इस अप्रोच ने प्रॉफिट दिया। इसका मतलब यह नहीं है कि हर साल इक्वली स्ट्रांग था। 202 में रिजल्ट काफी फ्लैट था। 2025 और 26 के पहले 8 मंथ्स में गेंस काफी बड़े थे। और एक और ऑनेस्ट बात हर साल का सैंपल छोटा है। सिर्फ फाइव टू 21 ट्रेड्स के बीच। तो हमारी फाइंडिंग अब काफी स्पेसिफिक हो गई है। डाउन साइड ट्रेड्स अपसाइड ट्रेड्स से स्ट्रांग थे। एक्सपायरी सेशंस ने डाउन साइड का ज्यादातर प्रॉफिट दिया और एक्सपायरी डाउन साइड ग्रुप सैंपल के हर साल में ग्रॉस पॉइंट्स में पॉजिटिव रहा। अब तक हमने इंडिविजुअल ओआई लेवल्स देखे। यानी वह स्ट्राइक जहां सबसे ज्यादा ओआई था। लेकिन एक और मैट्रिक है जो सारे स्ट्राइक्स से कॉल और पुट वाई को एक साथ देखता है। यह है मैक्स पेन। वह लेवल जहां एक्सपायरी पर कॉल और पुट बयरर्स को मिलने वाला टोटल पे आउट सबसे कम होता है और उसके बारे में भी एक पॉपुलर बिलीफ है कि निफ्टी एक्सपायरी तक उस लेवल की तरफ खींचा चला जाता है। तो हमने इसको भी टेस्ट किया। मैक्स पेन एक सिंपल सवाल पूछता है किस एक्सपायरी प्राइस पर ऑप्शन सेलर्स को बायर्स को टोटल पे आउट सबसे कम देना पड़ेगा? सोचो सारे आउटस्टैंडिंग ऑप्शंस की वैल्यू कैलकुलेट करो अगर निफ्टी अलग-अलग स्ट्राइक्स पर एक्सपायर हो। किसी प्राइस पर कॉल्स में ज्यादा वैल्यू बचेगी किसी पर पुट्स में। हर स्ट्राइक के ओआई को यूज करके मैक्स पेन वो प्राइस ढूंढता है जहां कंबाइंड पे आउट सबसे छोटा हो। पर एक इंपॉर्टेंट क्लेरिफिकेशन। यहां पे आउट का मतलब है एक्सपायरी पर ऑप्शंस की बची हुई वैल्यू। बायस का एक्चुअल प्रॉफिट या लॉस इस बात पर भी डिपेंड करेगा कि उन्होंने ऑप्शन कितने में खरीदा। लेकिन ट्रेडिंग बिलीफ एक स्टेप आगे जाता है। अगर पेआउट इस लेवल पर सबसे कम है तो शायद एक्सपायरी पास आते-आते निफ्टी इसी तरफ खींचेगा। हमने यह टेस्ट किया। 348 एक्सपायरी सेशंस हर सेशन में सुबह 920 पर निफ्टी का प्राइस और मैक्स पेन नोट किया और फिर 325 PM के निफ्टी प्राइस से कंपेयर किया। पहले की तरह मैक्स पेन दिन भर अपडेट नहीं किया। सुबह का लेवल फिक्स रहा। पहला सवाल क्या निफ्टी का नेट मूव मैक्स पेन की डायरेक्शन में था? यानी मैक्स पेन सुबह के प्राइस से ऊपर था तो निफ्टी ऊपर बंद हुआ। नीचे था तो नीचे 348 में से 178 बार लगभग 50% ऑफ़ द टाइम ऑलमोस्ट अ कॉइन टॉस। पर डायरेक्शन सही होना और लेवल के करीब पहुंचना दो अलग बातें हैं। एग्जांपल लो निफ्टी 24,200 पर है। मैक्स पेन है 24,250। दूरी है 50 पॉइंट्स की। अब निफ्टी 325 तक 24,400 पर पहुंच गया। डायरेक्शन सही थी। मैक्स पेन को क्रॉस भी किया लेकिन अब वो लेवल से 150 पॉइंट्स दूर है। यानी स्टार्टिंग दूरी से तीन गुना ज्यादा। इसीलिए हमने उन 178 सेशंस को और करीब से देखा। उनमें से 86 सेशंस में निफ्टी मैक्स पेन के पास जाकर दूसरी तरफ और दूर चला गया। तो बचते हैं 92 सेशंस। पूरे 348 में से लगभग 26% जहां निफ्टी सच में सुबह के मैक्स पेन के करीब फिनिश हुआ। यह दोनों रिजल्ट्स अलग चीज बताते हैं। मैक्स पेन ने निफ्टी की डायरेक्शन लगभग आधी बार सही प्रेडिक्ट की। लेकिन निफ्टी मैक्स पेन के क्लोजर सिर्फ फोर में से वन बार आया। अगर बिलीफ यह है कि सुबह का मैक्स पेन वो डेस्टिनेशन है जहां निफ्टी दोपहर तक पहुंच जाएगा तो इस सैंपल में यह कन्विंसिंग नहीं निकला। चलो अब अपने ओरिजिनल सवाल पर वापस आते हैं। क्या ओपन इंटरेस्ट हमें यूज़फुल ट्रेडिंग लेवल्स ढूंढने में हेल्प कर सकता है? जवाब इस पर डिपेंड करता है कि आप इन लेवल्स को कैसे यूज करते हैं? ब्रीच के तुरंत बाद रिवर्सल की उम्मीद लगाना हमारे रूल्स में पैसे गवा गया। ब्रेकआउट फॉलो करना पॉजिटिव रहा पर प्रॉफिट सिर्फ पुट y के नीचे ब्रेक से आया और एक्सपायरी सेशंस में एवरेज सबसे ज्यादा था। मैक्स पेन का डायरेक्शन लगभग आधी बार सही था। पर निफ़ी उसके पास सिर्फ लगभग चार में से एक एक्सपायरी पर फिनिश हुआ। तो, एक ओआई नंबर अकेले एक कंप्लीट ट्रेडिंग सिग्नल नहीं था। कौन सा लेवल चुना, प्राइस उसके पास कैसे बिहेव हुई और ट्रेड की डायरेक्शन क्या थी और सेशन कैसा था यह सब भी मैटर करता है। अब एक आखिरी बात यह सब हिस्टोरिकल रिजल्ट्स हैं कॉस्ट से पहले निफ्टी स्पॉट पर। फ्यूचर से ऑप्शन से एग्जीक्यूट करोगे तो रिजल्ट अलग आ सकते हैं और सबसे स्ट्रांग ग्रुप इसी सैंपल के अंदर ढूंढा गया है। तो यह आगे टेस्ट करने का कैंडिडेट है। अगले ट्रेड की गारंटी नहीं। इसीलिए अगली बार जब आप ओआई से सपोर्ट या रेजिस्टेंस मार्क करो तो सिर्फ यह मत पूछना कि लेवल होल्ड होगा या नहीं? यह भी पूछना कि अगर प्राइस इसके बाहर क्लोज हो गया तो मेरा प्लान क्या है? इस स्टडी में यही एक सवाल रिजल्ट को पूरी तरह बदल रहा है। और जो अप्रोचेस हमने टेस्ट किए उनमें सबसे स्ट्रांग फाइंडिंग यह थी। सुबह के हाईएस्ट पुट वाई लेवल के नीचे डाउन साइड ब्रेक फॉलो करना खासकर एक्सपायरी पर। अब आपकी बारी। अगर कोई ओआई आईडिया है जो आप हमसे टेस्ट करवाना चाहते हो जैसे फ्रेश बिल्ड अप, अनवाइंडिंग या वो लेवल्स जो सेशंस के दौरान बदलते हैं तो कमेंट्स में जरूर बताओ। मिलते हैं अगले बैक टेस्टेड बाय ग्रो में। इन्वेस्टमेंट एंड सिक्योरिटी मार्केट सब्जेक्ट टू मार्केट रिस्क। रीड ऑल द रिलेटेड डॉक्यूमेंट्स केयरफुली बिफोर इन्वेस्टिंग।

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