How I Turned ₹1 Lakh into ₹6 Lakhs (1 Trade A Day) — backtested on Indian market data | FakeTrades
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How I Turned ₹1 Lakh into ₹6 Lakhs (1 Trade A Day)

Ritish Labs · watch on YouTube ↗
Analysed 01 Oct 2026, 06:26 AM IST
⏳ Backtest pending — a data-backed verdict will be attached.

Verdict

Not auto-backtested — honestly, we can't. AI-decoded: VWAP breakout + momentum intraday option buying strategy on NIFTY/BANKNIFTY/SENSEX; ATM strike selection via custom engine; 1 trade per index per day; 6x return over 1 year with 4% drawdown in backtes

We give real option backtests only for fixed-entry option-selling structures (weekly credit/ratio spreads) priced on real cached NIFTY premiums. This one is directional option BUYING (needs intraday/tick option data), which needs intraday/tick option data and a chart-signal engine we don't have — so we show no number rather than a misleading proxy. Flagged for a hand-built review.

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Full transcript (3350 words)
इस ऑप्शंस ट्रेडिंग स्ट्रेटजी ने ₹1 लाख को ₹6 लाख में कन्वर्ट कर दिया। वो भी सिर्फ 4% ड्रॉडाउन के अंदर। और सबसे इंप्रेसिव बात पता क्या है? हमने इसमें कोई मैसिव कैपिटल या फिर कोई हैवी रिस्क स्केलिंग स्ट्रेटजी को यूज़ नहीं किया। हमने सिर्फ निफ्टी, बैंक निफ्टी और ससेक्स में सिर्फ एक लॉट के साथ ट्रेड किया है और हर एक दिन सिर्फ एक ही ट्रेड लिया है और सिंगल ट्रेड पर डे में भी इसने मैसिव 500% का रिटर्न जनरेट किया है। तो आज मैं आपको बताने वाला हूं कि यह ऑप्शंस ट्रेडिंग स्ट्रेटजी क्या है और साथ ही मैं आपको इसका प्रोफेशनल बैक टेस्ट रिपोर्ट भी दिखाने वाला हूं। इस रिपोर्ट में मैंने ₹1 की ब्रोकरेज, एसटीटी और जितने भी चार्जेस हमें लगते हैं उन सबको इंक्लूड किया है। और यहां तक कि रियल लाइफ स्लीपेज को भी ऐड किया है। और इन एक्सट्रीम रियलिस्टिक कंडीशंस के बाद भी इस स्ट्रेटजी ने 1 लाख कैपिटल को 6 लाख कैपिटल में कन्वर्ट कर दिया। और हमने सिर्फ इसका बैक टेस्ट ही नहीं बल्कि इसका वॉक फॉरवर्ड टेस्टिंग यानी कि आउट ऑफ सैंपल टेस्टिंग भी की है। घबराओ मत। अगर आपके लिए यह कांसेप्ट नया है तो वीडियो में आगे बहुत अच्छे से एक्सप्लेन किया है। एंड आई एम टेलिंग यू ये कांसेप्ट जानना आपके लिए बहुत ज्यादाेंट है। क्योंकि इसके बाद ही आप समझ पाओगे कि ये स्ट्रेटजी इतनी पावरफुल क्यों है और क्या यह बैक टस्ट पे भरोसा किया जा सकता है या नहीं। तो ये स्ट्रेटजी काम कैसे करती है? तो मैं आपको इसका ना कोर लॉजिक बताता हूं। पूरी ट्रेडिंग इंडस्ट्री में चाहे वो इंडिया में हो, चाहे वो ग्लोबल ट्रेडिंग इंडस्ट्री हो, कोई छोटा हैच फंड हो या कोई बहुत बड़ा इंस्टीट्यूशन हो। सभी लोग इस स्पेसिफिक कांसेप्ट को यूज़ करते हैं एक अच्छे लेवल की प्रॉफिटेबल स्ट्रेटजी बनाने के लिए। और इस कांसेप्ट का नाम है वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस यानी कि वीवप। तो हमारी स्ट्रेटजी में अगर हमारा स्पॉट चार्ट वीवप के ऊपर है तो हम सिर्फ कॉल ऑप्शन बाय करते हैं। और अगर हमारा स्पॉट चार्ट वीवप के नीचे है तो हम सिर्फ पुट ऑप्शन बाय करते हैं। तो हमारी स्ट्रेटजी इतनी सिंपल तो हो नहीं सकती कि वीवप के ऊपर है तो बाय कर लिया और नीचे सेल कर लिया। तो वीवप के साथ हम मोमेंटम और स्ट्रांग ब्रेकआउट का भी यूज करते हैं। और अगर यह सारी कंडीशंस सेटिस्फाई होती हैं, तभी हमारा ऑटोमेटेड ट्रेडिंग बोट इस ट्रेड को एग्जीक्यूट करता है। और जितना इंपॉर्टेंट हमारे सेटअप का लॉजिक है, उतना ही इंपॉर्टेंट है कौन सा स्ट्राइक प्राइस चूज़ करना। और उसके लिए हमने कस्टम इंजन बनाया है जो बहुत ही स्मार्ट फ़ूले के साथ प्रिसाइज़ इन द मनी स्ट्राइक प्राइस को कैलकुलेट करता है। और उसी स्ट्राइक प्राइस में ट्रेड करता है फॉर मैक्सिमम प्रॉफिटेबिलिटी। एंड ओवर ट्रेडिंग को अवॉयड करने के लिए हमारा बोट एक दिन में सिर्फ एक ही ट्रेड लेता है पर इंडेक्स। तो यह है हमारा बनाया हुआ कस्टम बैक टेस्टिंग डैशबोर्ड जहां पर हमने वीवप ब्रेकआउट स्ट्रेटजी को बैक टेस्ट किया है। जो बैक टेस्ट आप देख रहे हो यह पूरे 1 साल का बैक टेस्ट है। जिसके अंदर इसने ₹563 ट्रेड्स लिए हैं और ₹1 लाख की स्टार्टिंग कैपिटल से इसने नेट ₹56,500 का प्रॉफिट जनरेट किया। यानी कि ₹56% का रिटर्न। इसका विन रेट 55% है। प्रॉफ़िट फैक्टर 1.85 है। और एक ऐसी चीज़ जो रिटर्न्स और विन रेट से भी ज़्यादाेंट है, वह है ड्रॉडाउन। और इस स्ट्रेटजी में हमें सिर्फ और सिर्फ 4% का ड्रॉडाउन देखने को मिला है। और मैं आपको जेन्युइनली बता रहा हूं इतने अच्छे रिटर्न जनरेट करना वो भी सिर्फ 4% ड्रॉडाउन के नीचे रहकर। बड़े-बड़े इंस्टीट्यूशन हैेज फंड्स के लिए भी एक्सट्रीमली डिफिकल्ट होता है क्योंकि यह दिखाता है कि हमारा सिस्टम रिस्क मैनेजमेंट में कितना सॉलिड है और हमारे कैपिटल को बहुत सेफ रखेगा और यहां पर है हमारा इक्विटी कर्व और आप क्लियरली देख सकते हो यह कितना स्मूथ इक्विटी कर्व है। ऑब्वियसली यहां पर छोटे-छोटे लूजिंग स्ट्रीक्स आए। यहां पर भी लूजिंग स्ट्रीक और यहां पर थोड़ा सा बड़ा लूजिंग स्ट्रीक। बट ओवरऑल इस स्ट्रेटजी की एक्सपेक्टेंसी पॉजिटिव है और ड्रॉडाउन आते ही हर बार इसने रिकवर किया है और हमें एक स्मूथ रनिंग इक्विटी कर्व दिया है। मैं आपको इसके ट्रेड्स दिखाने से पहले यह बता देता हूं कि हमने यह बैक टेस्टिंग रिपोर्ट बनाई कैसे है। हमने इसमें कोई नॉर्मल बैक टेस्टिंग नहीं की जो आपको हर कोई बताता है। हमने इसमें इंस्टीट्यूशनल लेवल डिटेल्ड बैक टेस्टिंग की है। और वो कैसे उसके लिए मैं आपको यहां पर लेकर जाऊंगा। और यहां पर आप देखोगे कि यह वॉक फॉरवर्ड टेस्टिंग है। यानी कि आउट ऑफ सैंपल वैलिडेशन। तो जिन लोगों को नहीं पता वॉक फॉरवर्ड टेस्टिंग क्या होता है मैं आपको बहुत सिंपल लैंग्वेज में समझाता हूं। तो मान लो कल आपका एग्जाम है और मैं आपको पिछले साल के सारे क्वेश्चन पेपर्स प्रोवाइड करता हूं आपकी प्रिपरेशन करने के लिए और आपने हर एक क्वेश्चन पेपर के क्वेश्चंस को आंसर्स को अच्छे से रट्टा मार लिया। अब कल के दिन जिस दिन आपका एग्जाम है मैं आपके सामने क्वेश्चन पेपर रखता हूं। और उस क्वेश्चन पेपर में एग्जैक्टली वही क्वेश्चंस होते हैं जो आपने लास्ट ईयर वाले पेपर से याद किए तो ऑब्वियसली आप उसमें 100 में से 100 स्कोर करोगे। वेल इसी को बैक टेस्टिंग की लैंग्वेज में बोलते हैं ओवरफिटिंग। मतलब आपने डाटा को याद कर लिया और आपका बोर्ड सिर्फ उस डाटा के लिए अच्छा होगा। फ्यूचर डेटा के ऊपर वो कैसा परफॉर्म करेगा? हमें इससे कोई भी सर्टेनिटी नहीं मिलती। लेकिन अब इमेजिन करो कि एग्जाम वाले दिन मैं आपको एक ऐसा क्वेश्चन पेपर देता हूं जिसमें से एक भी क्वेश्चन आपके लास्ट ईयर वाले क्वेश्चन पेपर से मैच नहीं करता। और अगर आपने रट्टे मारकर तैयारी की थी तो आप इसमें पूरी तरह से फेल हो जाओगे। लेकिन अगर कोई स्टूडेंट इस पेपर को पास कर गया तो ये इस बात का प्रूफ है कि भाई इस स्टूडेंट में कुछ तो बात है कि ये बंदा लॉन्ग टर्म सर्वाइव कर सकता है क्योंकि इसके पास एक एज है। तो यहां पे आपने एक बात नोटिस की सेकंड केस में जो मैंने आपको क्वेश्चन पेपर दिया वो काइंड ऑफ कह सकते हैं आउट ऑफ सिलेबस था। इसलिए हम इसको आउट ऑफ आपके जो आपको सैंपल क्वेश्चन पेपर मिले थे उससे अलग था। इसलिए हम इसको बोलते हैं आउट ऑफ सैंपल टेस्टिंग। और अगर कोई ट्रेडिंग बॉट वैलिडेशन पीरियड के अलावा आउट ऑफ सैंपल टेस्टिंग को भी पास कर देता है, इसका मतलब वह रियल वर्ल्ड में और लाइव कैपिटल में एक्चुअली में प्रॉफिटेबल होगा। यह बैक टेस्ट पूरे एक साल का है। यानी कि 4 सितंबर 2025 से लेकर 3 सितंबर 2026 तक। अब इसके अंदर हमने अपने डाटा को दो सैंपल्स में डिवाइड किया। यानी कि 4 सितंबर से 19th मई तक हमारा पहला डाटा का बैच है। और उसके बाद का डाटा अभी हमने छोड़ दिया। मतलब अभी हम उसको कुछ नहीं कर रहे। तो बेसिकली ये ब्लू वाले एरिया में यानी कि इतने टाइम में पहले हमने इस स्ट्रेटजी को अलग-अलग एंट्री मॉडल्स के साथ टेस्ट किया। हजारों परम्यूटेशंस को हमने टेस्ट किया। और जिन रूल्स ने एंट्री मॉडल्स ने जिन एग्जिट मॉडल्स ने प्रॉफिट टेकिंग सिस्टम्स ने हमें सबसे अच्छा रिजल्ट दिखाया। हमने उन रूल्स को एक स्ट्रेटजी बनाकर यहां पर लॉक कर दिया। हमने एक स्ट्रेटजी को बहुत ज्यादा ऑप्टिमाइज़ किया। फॉर एग्जांपल अगर हमारे पास एक बेसिक ईएमए स्ट्रेटजी है जहां पर हम 9 ईएमए और 15 ईएमए का क्रॉसओवर करते हैं। तो आप लोग बैक टेस्टिंग में क्या करते हो? आप कभी 9 ईएमए को 10 ईएमए बना दोगे। 15 ईएमए को 21 ईएमए बना दोगे। और इस तरह से उनको ट्वीक कर करके आप एक ऐसी सेटिंग ढूंढोगे जहां पर आपको यह पूरा इक्विटी कर्व बहुत अच्छा दिखेगा। और आपको लगेगा कि यार मैंने फाइनली वह सेटिंग फ़ाइंड कर ली है जो कि बहुत ज़्यादा प्रॉफ़िटेबल है। लेकिन यह बिलकुल गलत है क्योंकि इसका मतलब है आपने अपनी स्ट्रेटजी को ओवर फिट कर दिया है। मतलब वो सिर्फ उसी डाटा के लिए आपको बहुत अच्छा दिख रहा है। बहुत सुंदर दिख रहा है। लेकिन फ्यूचर में वो कैसा परफॉर्म करेगा उससे आपको कोई आईडिया नहीं लगेगा अगर आप ओवरऑप्टिमाइज कर दोगे। और इसीलिए हम एक प्रोफेशनल एप्रोच के साथ जाते हैं। जहां पर हम वॉर्क फॉरवर्ड टेस्टिंग करते हैं। मतलब हम वो सारी ऑप्टिमाइजेशन यहां इस वाले एरिया में करेंगे। और जब हमें लगेगा कि यार हां यह स्ट्रेटजी अब बहुत स्ट्रांग है। यह बहुत अच्छा परफॉर्म करेगी। उसके बाद हम अपने बैक टेस्ट डाटा में से ही कुछ डाटा को रोक कर रखते हैं। यानी कि हमने 20th मई से लेके 3 सितंबर तक का डाटा इसी के लिए रखा था ताकि जो हमने स्ट्रेटजी को ऑप्टिमाइज किया है, हम उस स्ट्रेटजी को ऐसे डाटा पर टेस्ट करें जो कभी उस स्ट्रेटजी ने देखा ही नहीं। यानी कि अनसीन डाटा यानी कि आउट ऑफ सैंपल। मतलब अगर आज मैं बोलता हूं कि आज मुझे एक स्ट्रेटजी मिल गई है और कल मैं उसे एक लाइव अकाउंट पे ट्रेड करता हूं। और अगर वह स्ट्रेटजी वैसे ही परफॉर्म करती है जैसे इसने बैक टेस्ट में किया। इसका मतलब उसका बैक टेस्ट बिल्कुल सही था। बिल्कुल सही तरीके से किया गया था। लेकिन अब मैं 3-4 महीने और वेट नहीं कर सकता सिर्फ देखने के लिए कि वो स्ट्रेटजी सही थी या नहीं। इसीलिए हम बैक टेस्ट डाटा को ही अनसीन डाटा में डिवाइड कर देते हैं। तो बेसिकली यह ग्रीन डाटा वो डाटा है जो यह स्ट्रेटजी बिल्कुल पहली बार देखेगी और इन पे ट्रेड्स लेगी। और अगर यह इसको भी पास कर देता है ना, इसका मतलब यह स्ट्रेटजी एक बहुत ही रोबस्ट स्ट्रेटजी है और इसने वर्क फ़ॉरवर्ड टेस्टिंग को भी पास कर दिया है। तो इसी अप्रोच के साथ हमने इसे टेस्ट किया था। एंड टू माय सरप्राइज़ आल्सो इसने इस ग्रीन एरिया पर भी कंसिस्टेंटली वैसे ही परफॉर्म किया। सेम विन रेट दिया। सेम प्रॉफिट फैक्टर, सेम रिस्क टू रिवॉर्ड जो इसने डेवलपमेंट वाले टाइम में दिया था। हमने इसका बैक टेस्ट बिल्कुल रियलिस्टिक बनाने के लिए और भी कुछ एडवांस स्टेप्स किए हैं। फॉर एग्जांपल, हमने वर्स्ट केस 1 मिनट कैंडल रूल लिया। अब इसका मतलब अब देखो यार आपको भी पता है कई बार 1 मिनट कैंडल बहुत ज्यादा वोलेटाइल हो सकती है और ऐसा भी हो सकता है कि हमारा एक ही 1 मिनट कैंडल में स्टॉप लॉस भी चला गया टेक प्रॉफिट भी चला गया। अब क्योंकि हमारे पास जो बैक टेस्ट डाटा है वो 1 मिनट कैंडल का ही है। हमें धन एपीआई 1 मिनट से कम का कैंडल डाटा नहीं देती कि 1 सेकंड डाटा दे दे या टिक बाय टिक। तो जब तक हमारे पास टिक बाय टिक डाटा नहीं है हमें नहीं पता चलेगा कि पहले स्टॉप लॉस हिट हुआ था या पहले टेक प्रॉफिट हिट हुआ था। क्योंकि हमारे पास सिर्फ़ 1 मिनट कैंडल ही है। इसीलिए जिन-जिन केसेस में 1 मिनट कैंडल में हमारा स्टॉप लॉस और टेक प्रॉफ़िट दोनों हिट हो गए, हम उसमें जानबूझकर यह कंसीडर कर रहे हैं कि भाई हमारा स्टॉप लॉस ही पहले हिट हुआ था। इसका मतलब हमारा बैक टेस्ट वर्स्ट केस कंडीशन के साथ चल रहा है। हमने इसे जानबूझकर अच्छा दिखाने के लिए प्रॉफिट नहीं दिखाया। हमने स्टॉप लॉस पहले लिया है। उसके बाद ज्यादातर लोग आपको कॉस्ट कभी नहीं दिखाएंगे। वो आपको सिर्फ दिखा देंगे कि भाई यहां स्टॉप लॉस आया। यहां टेक प्रॉफिट आया और इस हिसाब से हमारे जो नंबर्स हैं वह ऐड अप हो रहे हैं। लेकिन यहां पर हमने ब्रोकरेज, एसटीटी, एक्सचेंज ट्रांजैक्शन चार्जेस, सेबी चार्जेस, स्टैंप ड्यूटी, जीएसटी सब कुछ ऐड किया है। और इवन कि हमने यहां पर एक छोटा सा स्लीपेज भी ऐड किया है। तो यह बैक टेस्ट जो हमें नंबर्स दिखा रहा है ना, यह एक्चुअल वो नंबर्स हैं जो आपकी रियल ट्रेडिंग में आपके सामने आएंगे सारे चार्जेस कटने के बाद। और कुछ लोगों के बैक टेस्ट में ना लुक अहेड बायस भी होती है। मतलब वह फ़्यूचर कैंडल को देखकर अपनी एंट्री एग्जिट चेंज कर लेते हैं। और जहां स्टॉप लॉस दिखाना होता है, वहां पर भी टेक प्रॉफ़िट दिखाते हैं। लेकिन, हमारे बैक टेस्ट में हमने इसका भी ध्यान रखा है कि बैक टेस्ट करते वक्त किसी भी ट्रेड में फ्यूचर डाटा ना देखा जाए। और सबसे बड़ी बात यह जो आउट ऑफ सैंपल वैलिडेशन है ना, यह बहुत हार्ड टू अचीव होती है। और यह हमें बताती है कि यह स्ट्रेटजी एक्चुअली में लाइव मार्केट में बहुत अच्छा काम कर सकती है। तो, अब चलते हैं हमारी रिपोर्ट पर। अब यहां पर आपको दिखेगा चार्जेस 42,000 मतलब इतने प्रॉफिट पे हमें 42,000 चार्जेस देने पड़े थे। एंड हमारी मैक्सिमम विनिंग स्ट्रीक है 11 और लूजिंग स्ट्रीक है नाइन। मतलब लगातार नाइन लॉसेस हुए थे एक टाइम पर और लगातार 11 प्रॉफिट्स हुए थे एक टाइम पर। यह है इसका इक्विटी कर्व। और यहां पर आपको दिखेंगे ट्रेड्स। फॉर एग्जांपल, यह 2025 4 सितंबर को निफ़ी में इस वाले ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट में पुट साइड में हमें एक ट्रेड मिला। एंट्री टाइम है 9:15 एग्जिट टाइम इतना है और यहां पर हमारा प्रॉफ़िट आया था और बाय द वे इस पूरे बैक टेस्ट में हमने सिर्फ वन लॉट यूज़ किया है। सिर्फ वन लॉट मतलब इसमें हमने निफ्टी ससेक्स और बैंक निफ्टी जो कि सबसे ज्यादा वोलेटाइल सबसे ज्यादा लिक्विडिटी वाले इंडेक्सेस हैं हमने उनमें ट्रेड किया है। और हर एक ट्रेड में सिर्फ वन लॉट यूज़ किया है। तो यहां पर हमें दिखेगा वन लॉट क्वांटिटी 75 और 2025 में यहां पर 75 होती थी लॉट साइज अब तो 65 हो चुकी है ना तो तो ये सब भी हमने इंक्लूड किया है तो यहां पर हमारी एंट्री 205 पे थी और हमारा एग्जिट था 286 पर यानी कि 81 पॉइंट्स हमने कैप्चर किए हमारा 15000 कैपिटल डिप्लॉय हुई थी जहां से हमने 6000 का प्रॉफिट निकाला ऐसे ही अगला डेट बैंक निफ्टी में है। यहां पर भी आपको सेम चीजें दिखेंगी। इन डिटेल एंट्री यहां पर एग्जिट यहां पर यहां पर हमने लॉस लिया 28,000 कैपिटल यूज़ हुई थी और यहां पर 3000 का लॉस ससेक्स में भी आपको दिखेगा हमारा इतना लॉस हुआ। ठीक है? तो प्रॉफिट आया फिर पांच लॉस आए। फिर छोटा सा प्रॉफिट फिर लॉस और आप देख सकते हो यहां पर हर एक दिन एक ही ट्रेड लिया गया है। मतलब निफ़ी में देखो फोर्थ सितेंंबर को निफ़ी में एक ट्रेड। फोर्थ सप्टेंबर को बैंक निफ़ी में एक ट्रेड। फिर फिफ्थ को हमें ससेक्स और निफ्टी में ट्रेड मिला। 8th सप्टेंबर को हमें तीनों में एक-एक ट्रेड मिला। निफ्टी, ससेक्स, बैंक निफ्टी में और नाइंथ को भी हमने हमें तीनों में ट्रेड मिला। तो, हर एक दिन हम पर एसेट सिर्फ एक ही ट्रेड ले रहे हैं। सिर्फ एक लॉट यूज़ करके और यह पीएनएल आपके सामने है। लॉसेस भी हो रहे हैं, प्रॉफ़िट भी हो रहे हैं, लॉसेस भी हो रहे हैं प्रॉफ़िट। और इस तरह से हमारे पास पूरे 1 साल के ट्रेड्स हैं। और एक सरप्राइज़ है अगर मैं इसको और स्क्रॉल करूं तो आपको दिखेगा इसमें चार्जेस कितने लगे। मतलब यहां पर ₹40 तो हमारे ब्रोकरेज लग गया होगा और उसके ऊपर एसटीटी स्टैंप ड्यूटी जीएसटी सब कुछ डाल के 84 रिस्क पे चार्जेस लगे। और हमारा जो और जो हमारा नेट पीएनएल है वो 6113 से कम हो के 6028 तो बेसिकली हर एक ट्रेड में हमने चार्जेस को इंक्लूड किया है 100 यहां पे ऑलमोस्ट ₹100 का चार्ज 5870 तो यहां पर हमारा नेट पीएनएल है चार्जेस के बाद और यहां पर हमारी इक्विटी तो ₹1 लाख लगाए थे और फर्स्ट ट्रेड में जैसे हमारा प्रॉफिट हुआ ₹16000 हो गए फिर लॉस के बाद ₹12000 फिर 95000 90000 88 88000 86 बस इसके बाद हमारे प्रॉफिट होने शुरू हुए और और यहां पर हमारी रियल ग्रोथ शुरू हो गई और लगातार यह बढ़ता ही चला गया और ऐसे ही 2 लाख 3 लाख यहां पर 4 लाख और यह 5 लाख हो चुका है और यह 6 लाख ओके सो यह हमारा थर्ड ऑफ़ सितंबर 2026 में निफ़ी का जो ट्रेड है हमारा लास्ट रिकॉर्डेड। अब यहां पर आप नोटिस करोगे 65 लॉट्स हैं क्योंकि बीच में कहीं पे हमारा लॉट साइज़ 75 से कम होके निफ़ी में 65 हो गया था। तो वह भी हमने अपने बैक टेस्ट में इंक्लूड किया है। एंड दैट इज़ व्हाई दिस इज़ द मोस्ट रियलिस्टिक बैक टेस्ट पॉसिबल। और इस ट्रेड में भी हमें 208 पे एंट्री मिली। 233 पे एग्जिट। ₹25 हमने प्रॉफिट किया और लॉट के हिसाब से चार्जेस के बाद यह हमारा नेट प्रॉफिट। और यह है हमारी क्लोजिंग कैपिटल। अब आप इमेजिन करो कि अगर हम सिर्फ एक लॉट यूज़ करके हम हर एक ट्रेड में ऑलमोस्ट मैक्सिमम 30ज़ तक की कैपिटल डिप्लॉय कर रहे हैं। कभी-कभी तो 10,000, 5,000, 6,000 तक की कैपिटल भी डिप्लॉय कर रहे हैं। तो अगर हम 1 लाख कैपिटल पे दो लॉट से भी ट्रेड करते तो भी हम आराम से अपने मार्जिन के अकॉर्डिंग ट्रेड्स कर सकते थे। और जो आपको रिटर्न यहां पे दिख रहा है, वह इस वो इसका डबल हो जाता। यानी कि 1000% रिटर्न। और सिमिलरली अगर आप चाहते, तो चार लॉट भी यूज़ करते। वो डिपेंडिंग ऑन योर कैपिटल है। अगर आप ज्यादा कैपिटल यूज़ करो, आप ज्यादा रिस्क ले सकते हो। या फिर हम एक इंक्रीमेंटल रिस्क एप्रोच भी यूज़ कर सकते हैं। जहां पर जब हमारा एक पर्टिकुलर प्रॉफिट बन जाए यानी कि कैपिटल मान लो जब 50% ग्रो हो गया तब हम एक लॉट से दो लॉट पे शिफ्ट हो गए। फिर जब हमारा कैपिटल 100% हो गया तब हम तीन लॉट पे शिफ्ट हो गए। तो इस तरह से भी हम कर सकते थे। और उस केस में आप सोचो कंपाउंडिंग के साथ ये इक्विटी कर्व आपको यहां से ये ग्रो तो हो ही रहा है। अगर हम कंपाउंडिंग करते हैं तो ये एक्सपोनेंशियल ग्रोथ तो भाई कुछ भी कहो ये वेक्टर्स टेक्निकली और मैथमेटिकली बहुत ही आउट ऑफ द वर्ल्ड रिटर्न्स दे रहा है। वन लॉट के साथ ये इतना रिटर्न जनरेट कर सकता है। तो आप लोग तो आराम से चार लॉट पांच लॉट तो मार ही देते हो। तो उसमें कितना रिटर्न जनरेट होगा। वेल मैंने अपनी पूरी कोशिश की है कि मैं इस बैक टेस्ट को क्लोजेस्ट टू रियलिटी सिमुलेट कर सकूं इंक्लूडिंग ऑल दी चार्जेस एंड स्लिपेज। लेकिन इतना सब कुछ करने के बाद भी बैक टेस्ट में और रियल मार्केट में बहुत ज्यादा डिफरेंस होता है। तो अगर आप चाहते हो कि मैं इस स्ट्रेटजी को अपने लाइव अकाउंट पर फॉरवर्ड टेस्ट करके दिखाऊं और आपके साथ अपना लाइव पीएनएल शेयर करूं तो मुझे कमेंट्स में बताओ अगर इनफ कमेंट्स आएंगे तो मैं आने वाली वीडियोस में इसका लाइव टेस्ट भी शेयर करूंगा। इसीलिए अभी कमेंट सेक्शन में जाओ और लिखो निफ्टी और हां एक लास्ट सबसेेंट बात अगर आपके पास खुद की एक प्रॉफिटेबल स्ट्रेटजी है जिसको आप इंडियन स्टॉक मार्केट पे रन करते हो और आप उसे मैनुअली ट्रेड करके थक चुके हो या फिर आपके पास टाइम नहीं है और आप उसको पूरी तरह से ऑटोमेट करवाना चाहते हो इन अ प्रोफेशनल वे तो आप मेरे साथ एक वन टू वन कॉल बुक कर सकते हो। ऑलरेडी 45 प्लस लोगों ने मेरे से अपनी ट्रेडिंग स्ट्रेटजी को फुल्ली ऑटोमेट करवाया है। कॉल बुक करने का लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। यह वीडियो अपने उस फ्रेंड के साथ शेयर करो जो ऑप्शंस ट्रेडिंग करता है लेकिन अभी तक लॉस में है ताकि वह भी ट्रेडिंग को एक रियलिस्टिक एंगल के साथ देख सके। आने वाली वीडियोस में मैं इंडियन स्टॉक मार्केट को लेकर बहुत सारी ऑटोमेशंस करने वाला हूं। बहुत सारे ट्रेडिंग बोर्ड्स दिखाने वाला हूं और आपको भी सीखने को मिलेगा। अगर आपको कोई कोडिंग भी नहीं आती, कुछ भी नहीं आता तब भी आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा कि किसी भी तरह की ट्रेडिंग स्ट्रेटजी को ऑटोमेट किया जा सकता है। तो इसलिए फॉलो भी कर लेना अगर नहीं किया तो। वीडियो को लाइक करो। हम मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में और आपको ट्रेडिंग के लिए ऑल द बेस्ट।

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