RSI Swing Strategy that really works in the market | By ‪@HOLDwithPriyank‬ — backtested on Indian market data | FakeTrades
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RSI Swing Strategy that really works in the market | By ‪@HOLDwithPriyank‬

Upsurge Club · watch on YouTube ↗
Analysed 01 Aug 2026, 04:04 PM IST
★★☆☆☆ 2.0 / 5

Why 2.0/5? (stars grade the EDGE — per-trade expectancy, consistency, drawdown — not the headline return)

  • Roughly ZERO per-trade edge (+0.02R) — real costs eat whatever is there
  • Max drawdown -40% on the ₹2L portfolio — the compounded return came with deep pain along the way

Verdict

Auto-backtested. AI-decoded: RSI-based divergence swing trading: wait for RSI oversold (<30) or overbought (>70), identify bearish/bullish divergence, confirm with structure break, then enter on retest with 1:1+ risk-reward targe Ran on 159 large/mid-caps, real costs. 3,280 trades, win 50%, payoff 1.02, expectancy +0.02R/trade (avg -0.06%/trade).

This is essentially breakeven. The payoff ratio is thin. Reasonably consistent (78% of years positive).

Mechanically decoded from the transcript and scored from the metrics. Flagged for human review; a hand-vetted verdict can override it.

See strategies that scored 4★+ →
Know someone trading this?

🔴 Live forward test (no hindsight — only trades the rules fired AFTER we published this verdict)

Tracking since 2026-07-06 — no qualifying signals have fired yet. The engine re-checks every night on fresh data; results appear here the day the rules trigger.

Is it profitable? (green above the line = made money, red below = lost it)

₹2,00,000 portfolio (max 5 positions, across the stock universe — real delivery costs)

Return-20.3%
CAGR-2.8%
Max drawdown-39.6%
Trades592 · 286 won
₹200,000 → ₹159,448  ·  2018-07-10 → 2026-06-08
201820192020202120222023202420252026
-8%+4%-15%+18%-10%+7%+2%-9%-8%

Simulated on the 159 large/mid-cap universe. Capital-constrained, daily mark-to-market.

Year by year (every trade the rules fired, across the tested stocks)

YearTradesWin %ExpectancyAvg return / trade
201824752% +0.00R +0.14%
201943354% +0.08R +0.53%
202046534% -0.31R -2.17%
202119066% +0.32R +1.86%
202248250% +0.01R -0.16%
202329059% +0.18R +0.44%
202437350% -0.00R -0.27%
202549254% +0.09R +0.35%
202630847% +0.01R +0.24%

Where this strategy made & lost money (the full stock-by-stock breakdown — 158 stocks, incl. 2026)

#StockTradesWin%Avg/tradeBestTotal2026
1 ████████ 2756% +0.8% +25% +21% +38%
2 ████████ 2157% -0.4% +18% -8% +27%
3 ████████ 2255% +1.5% +26% +34% +26%
4 ████████ 1650% +0.4% +12% +7% +18%
5 ████████ 1974% +3.9% +20% +73% +17%
6 ████████ 1856% +1.8% +15% +33% +15%
7 ████████ 2264% +0.8% +8% +17% +15%
8 INFY free peek 3142% -0.5% +23% -16% +15%
9 ████████ 3161% +2.5% +16% +76% +14%
10 ████████ 2552% +0.3% +14% +9% +14%
11 ████████ 2544% -1.2% +8% -31% +14%
12 ████████ 1921% -4.7% +20% -90% +14%
13 ████████ 2065% +2.0% +13% +39% +13%
14 ████████ 1464% +2.7% +17% +38% +13%
15 ████████ 2060% -0.0% +7% +0% +13%
16 ████████ 2152% -1.5% +19% -31% +13%
17 ████████ 1560% +2.6% +16% +38% +12%
18 ████████ 2065% +1.1% +11% +22% +12%
19 ████████ 1765% +1.9% +15% +32% +11%
20 ████████ 2756% +0.9% +18% +25% +11%
21 ████████ 3043% -1.3% +7% -40% -31%
22 ████████ 2446% -0.6% +15% -15% -27%
23 ████████ 2119% -4.5% +12% -94% -25%
24 ████████ 1729% -1.6% +10% -27% -18%
25 ████████ 2255% +0.4% +11% +8% -18%
26 ████████ 2532% -2.6% +7% -66% -17%
27 ████████ 2934% -1.8% +15% -52% -17%
28 ████████ 2133% -2.2% +8% -45% -16%
29 ████████ 1547% +0.1% +7% +1% -16%
30 ████████ 1258% +1.0% +23% +12% -16%
You can see the numbers — see the names. Unlock every stock in this breakdown and download it as Excel. The worst stock in this table returned -94% under these exact rules — one wrong pick costs many times the unlock.

Educational backtest output only — not investment advice or a recommendation to buy/sell any security. AI-generated from stored historical data; not 100% accurate. Past performance is not indicative of future results.

On the index (same rules applied to NIFTY & BANKNIFTY)

IndexTradesWin%Expectancy (R/trade)Avg return/trade
NIFTY2245% -0.10R -0.35%
BANKNIFTY2759% +0.18R +1.60%
Full transcript (5544 words)
जब हम ब्रेड बटर स्ट्रेटजी को स्विंग ट्रेडिंग के अंदर यूज़ कर रहे होते हैं तो बीच में गैप अप या गैप डाउन की वजह से कई बार कंफ्यूजन होता है कि जब भी ये बेरिश डायवर्जेंस बनता है प्राइस जनरली नीचे की तरफ जाना शुरू करता है। इसी तरह से जब ये लोज़ के बीच में बनता है तो ये अक्सर ऊपर जाना शुरू करता है। इसलिए इसको बुलिश डायवर्जेंस बोलते हैं। तो क्या ये डायवर्जेंस बनते ही हम लोगों को यह अस्यूम कर लेना चाहिए कि प्राइस अपनी डायरेक्शन बदलने वाला है। तो डायवर्जेंस बनने के बाद आपको क्या करना है? तैयारी शुरू कर देनी है ट्रेड लेने की। लेकिन ट्रेड लेनी नहीं है कब तक? जब तक ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर ना हो जाए। यह जो डायवर्जेंस है यह देखना है हमेशा ओवरबोट और ओवरसोल्ड सिचुएशन में। जब यह ओवरबोट और ओवरसोल्ड सिचुएशन क्या है? तो स्विंग ट्रेडिंग करते वक्त यह काफी इंपॉर्टेंट है कि आप अपने पोजीशंस को स्विंग हाई और स्विंग लॉस के आसपास ही बुक करें। हेलो एवरीवन, मैं प्रियांक शर्मा, एक सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट। आज आप लोगों को समझाने वाला हूं एक स्विंग ट्रेडिंग स्ट्रेटजी। अब से कुछ समय पहले अब सर्च पर मैंने जो है एक स्ट्रेटजी बनाई थी ब्रेड बटर स्ट्रेटजी और उसके अंदर आप लोगों को सिखाया था किस तरह से आप स्टॉक मार्केट के अंदर इस स्ट्रेटजी से स्कैल्पिंग कर सकते हैं और इंट्राडे ट्रेडिंग के अंदर कई बार दो से तीन ट्रेड सेटअप एक ही दिन के अंदर बना सकते हैं। उस स्ट्रेटजी को आप सब लोगों ने बहुत सारा प्यार दिया और उसके ऊपर कई 100 कमेंट्स आए जिससे लोगों ने बताया कि उन लोगों को उस स्ट्रेटजी से कितना बेनिफिट मिला। लेकिन अब सर्च की टीम ने मुझे एक बात और बताई कि उस स्ट्रेटजी में स्पेसिफिकली कई लोगों ने क्वेश्चन पूछा था कि सर इस स्ट्रेटजी को क्या स्विंग ट्रेडिंग के लिए यूज कर सकते हैं? और दूसरा क्वेश्चन था जो कि कुछ लोगों ने ट्राई किया था कि जब हम ब्रेड बटर स्ट्रेटजी को स्विंग ट्रेडिंग के अंदर यूज़ कर रहे होते हैं तो बीच में गैप अप या गैप डाउन की वजह से कई बार कंफ्यूजन होता है। और दूसरा चीज क्या हम इसको स्टॉक्स के ऊपर कर सकते हैं? क्योंकि जब मैंने आप लोगों को ब्रेड बटर स्ट्रेटजी के बारे में लास्ट बार बताया था तो उसके अंदर हम लोगों ने जो स्कैल्पिंग की थी और इंट्राडे ट्रेडिंग के सेटअप्स देखे थे वो इंडेक्स के ऊपर देखे थे। तो आज की वीडियो में मैं आप लोगों को जल्दी से समझाने वाला हूं किस तरह से आप ब्रेड बटर स्ट्रेटजी का यूज़ करके भी स्विंग ट्रेडिंग कर सकते हैं। तो चलिए स्क्रीन पर चलते हैं और चार्ट पर समझते हैं। पहले रिवीजन करते हैं ब्रेड बटर स्ट्रेटजी होती क्या है और उसके बाद स्टॉक्स पर यह काम करती है या नहीं करती है और स्विंग ट्रेडिंग इसके साथ कैसे कर सकते हैं? दोनों ही बातों पर चर्चा करेंगे। जैसा कि आप सभी को याद होगा कि ब्रेड बटर स्ट्रेटजी के अंदर हम लोग एक इंडिकेटर का यूज करते हैं जिसे बोलते हैं आरएसआई रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स। इस इंडिकेटर को लगाने के लिए आपको क्या करना होता है? आपको इंडिकेटर के सेक्शन में जाना होता है और आप यह अपने किसी भी ब्रोकर के अंदर लगा सकते हैं। जैसे कि मैं यहां पर ट्रेडिंग व्यू यूज़ कर रहा हूं। तो मैं ट्रेडिंग व्यू के इंडिकेटर सेक्शन में जाकर आरएसआई लिख सकता हूं। या फिर इसका पूरा नाम रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स लिख सकते हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यूजुअली प्राइस के साथ चलता है। जैसे कि अगर मैं आपको इसको प्राइस के साथ दिखाऊं जैसे कि यहां पर मैं एक स्टॉक का चार्ट यूज़ कर रहा हूं और मैंने आपको जैसा बोला भी वीडियो के शुरुआत में कि आज हम लोग स्टॉक पर इसको समझेंगे। तो आप देख सकते हैं आरएसआई की खास बात यह होती है कि जिस तरह से प्राइस का मोमेंटम चल रहा होता है जैसे अगर आप यहां पर ध्यान से देखें तो प्राइस यहां से ऊपर से नीचे आ रहा है तो उसी तरह से आरएसआई भी ऊपर से नीचे की तरफ बढ़ रहा है। जब प्राइस ऊपर जा रहा है तो आरएसआई भी ऊपर जा रहा है। एक और चीज आप ध्यान से देखेंगे तो आपको दिखेगा कि जभी भी प्राइस कोई लो बनाता है वैसे ही आरएसआई भी यहां पर एक लो बनाता है। उसी तरह से प्राइस जब कोई हाई बनाता है आरएसआई भी उसी जगह पर एक हाई बनाता है। तो कहीं ना कहीं आरएसआई इंडिकेटर प्राइस के साथ सिमेट्री में चल रहा होता है। अब आप लोगों ने कई बार सुना होगा कि प्राइस को कई बार इंस्टीट्यूशनल मनी या स्मार्ट मनी मैनपुलेट कर देती है। जी हां, ऐसा अक्सर होता है। उस सीन में आपको कई बार यह कंफ्यूजन हो जाता है कि प्राइस जिस ट्रेंड में चल रहा होता है, क्या वह सही है या गलत? या आप इसको ऐसे समझ सकते हैं कि जिन लोगों के पास ज्यादा पैसा होता है या जो इंस्टीट्यूशनल मनी होते हैं, जो स्मार्ट मनी होते हैं, वो कई बार अपने अधिक पैसे का यूज करके प्राइस को कुछ वक्त के लिए एक ऐसी डायरेक्शन में चलाते हैं जो कि एक्चुअल में प्राइस जाना नहीं चाहता। उसी को हम लोग मैनपुलेशन बोलते हैं। अब क्योंकि प्राइस को मैनपुलेट ऑर्डर लगाकर किया जा सकता है। लेकिन आरएसआई की खास बात यह है कि आरएसआई इंडिकेटर को मैनपुलेट नहीं किया जा सकता। क्यों? क्योंकि आरएसआई का मतलब है रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स। यह प्राइस के साथ-साथ वॉल्यूम की स्ट्रेंथ को भी कैलकुलेट करता है कि जिस डायरेक्शन में प्राइस जा रहा है क्या वॉल्यूम उसको सपोर्ट कर रहा है या नहीं? क्या ट्रेंड उसको सपोर्ट कर रहा है या नहीं? तो ऐसे कई सारे फैक्टर्स के साथ आरएसआई जो है काम कर रहा होता है। तो आप लोगों को यह समझने के लिए कि आरएसआई काम कर रहा है या नहीं कर रहा है। एक कांसेप्ट समझना होता है जिसको आप मैनपुलेशन भी बोलते हैं और डायवर्जेंस भी बोलते हैं। तो ये डायवर्जेंस क्या है या मैनपुलेशन क्या है? हालांकि अधिकतर लोगों को यह बात पता होगी पुरानी वीडियो से लेकिन अगर कोई पहली बार इस वीडियो को देख रहा है तो मैं थोड़ा सा बताते हुए चलना चाहूंगा। सो कभी-कभी ऐसा होता है कि जब प्राइस यह हाई और लो बना रहा होता है तो आरएसआई इसका साथ छोड़ देता है। जैसे आप यह देख रहे होंगे हाई के साथ हाई बनते जा रहे हैं। तो आरएसआई इसका साथ छोड़ देता है। साथ छोड़ने से क्या मेरा मतलब है? मेरा मतलब यह है कि आप सपोज कीजिए कि जब प्राइस इस तरह से आप देखेंगे हायर हाई हायर लो हायर हाई हायर लो हायर हाई बना रहा है तो आप देखेंगे आरएसआई भी हायर हाई हायर लो ही बनाते हुए चल रहा है क्योंकि वो उसको सपोर्ट करता है। लेकिन कई बार ऐसी सिचुएशन आती है कि प्राइस तो इसी तरह से ऊपर जाना शुरू कर देता है। प्राइस तो ऊपर जाना शुरू कर देता है लेकिन आरएसआई उसके साथ ऊपर जाना शुरू नहीं करता। जैसे मान लीजिए प्राइस लगातार नए हाई बना रहा है और आप अचानक से देखें कि आरएसआई नए हाई बनाने की जगह पर लोअर हाई बनाना शुरू कर दे। तो जब आपको ऐसा दिखाई दे कि प्राइस हाई पर हाई बनाया जा रहा है लेकिन आरएसआई हाई पर हाई नहीं बना रहा है बल्कि लोअर हाई बना रहा है। इसी को हम लोग बोलते हैं मैनपुलेशन या फिर डायवर्जेंस। और यह हाईज़ के बीच में भी हो सकता है और कई बार स्विंग लोज़ के बीच में भी हो सकता है। और इन्हीं इस मैनपुलेशन को लोज़ के बीच में और हाईज़ के बीच के इस मैनपुलेशन को हम लोग इस स्ट्रेटजी के अंदर यूज़ करते हैं। अब कुछ लोग जो पहली बार वीडियो देख रहे होंगे ब्रेड बटर स्ट्रेटजी जानते नहीं होंगे। लेकिन डायवर्जेंस जानते होंगे क्योंकि डायवर्जेंस एक बहुत ही कॉमन फिनोमिना है और बहुत ही पुराने वक्त से सिखाई जा रही है। तो बहुत सारे लोग बोलेंगे कि डायवर्जेंस को तो मैं पता नहीं कब से यूज़ करते हुए आ रहा हूं। लेकिन यह तो काम नहीं करता। वो इसलिए काम नहीं करता क्योंकि आपने आज से पहले मेरी ब्रेड बटर स्ट्रेटजी को देखा नहीं था। मजाक कर रहा हूं। लेकिन सही बात यही है क्योंकि जैसा मैंने आपको वीडियो के शुरुआत में बताया कि इसी स्ट्रेटजी पर इतने सारे कमेंट्स आए जिनके लिए काम कर रहा था। काम कर रहा है तो फिर कुछ तो अलग होगा। इसलिए वीडियो को पूरा देखो तो आपको समझ में आएगा। अब अगर आप थोड़ा ध्यान से यहां पर देखेंगे तो मैं आपको एक एग्जांपल दिखा देता हूं जहां पर यह डायवर्जेंस बना हो जिससे कि आप लोग इस चीज को थोड़ा अच्छे से समझ पाए क्योंकि प्रैक्टिकल एग्जांपल थोड़ा सा मदद करता है प्राइस को समझने में। सो एग्जांपल के लिए अगर आप देखेंगे यहां पर तो इस जगह पर अगर आप देखेंगे प्राइस यहां पर अगर आप देखेंगे इस हाई से लगातार ऊपर गया है। आप देख सकते हैं यहां पर प्राइस जो है पिछले हाई से ऊपर गया है। लेकिन अगर आप आरएसआई को देखेंगे आरएसआई इस हाई के ऊपर नहीं गया है। आरएसआई नीचे गया है। तो आप यहां पर देख सकते हैं प्राइस ऊपर की तरफ बढ़ा है और आरएसआई नीचे की तरफ बढ़ा है। इसी जगह को हम लोग बोलते हैं मैनपुलेशन और यह ऊपर की तरफ और नीचे की तरफ दोनों तरफ बन सकता है। जैसे आप नीचे की तरफ भी देखें। यहां पर प्राइस लगातार नीचे की तरफ़ जा रहा है। लेकिन आरएसआई ने अचानक से ऊपर की तरफ़ जाना शुरू कर दिया है। तो, आप यहां पर देख सकते हैं कि प्राइस और आरएसआई की डायरेक्शन में मैनपुलेशन है। इसी को हम लोग डायवर्जेंस बोलते हैं। जब ये हाईज़ के बीच में बनता है, जैसे यहां बना था, आप यहां देख सकते हैं जैसे ये हाई के बीच में बना है, तो हम इसको बेरिश डायवर्जेंस बोलते हैं। और अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब भी ये बेरिश डायवर्जेंस बनता है, प्राइस जनरली नीचे की तरफ जाना शुरू करता है। इसी तरह से जब यह लोज़ के बीच में बनता है तो यह अक्सर ऊपर जाना शुरू करता है। इसलिए इसको बुलिश डायवर्जेंस बोलते हैं। तो क्या यह डायवर्जेंस बनते ही हम लोगों को यह अस्यूम कर लेना चाहिए कि प्राइस अपनी डायरेक्शन बदलने वाला है? जी नहीं। बस यही चीज डिफरेंशिएट करती है ब्रड बर्डर स्ट्रेटजी को बाकी नॉर्मल डायवर्जेंस से। हम लोग ब्रेड बटर स्ट्रेटजी के अंदर क्या करते हैं? हम लोग इंतजार करते हैं अपने सही सेटअप बनने का और एक ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर का। तो ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर कैसे? मैं आपको पहले पेन से समझाता हूं। फिर मैं आपको एग्जांपल से समझाऊंगा। जैसे कि मान लीजिए प्राइस लगातार ऊपर की तरफ जाए और आपने नोटिस किया कि जब प्राइस इस तरह से ऊपर जा रहा है आरएसआई ने अचानक से ऊपर जाना बंद कर दिया और वो नीचे की तरफ जाने लग गया। तो आपने जब यह डिफरेंस देखा तो आपको पता चला कि प्राइस और आरएसआई दोनों के बीच में डायवर्जेंस बना हुआ है। तो डायवर्जेंस बनने के बाद आपको क्या करना है? तैयारी शुरू कर देनी है ट्रेड लेने की। लेकिन ट्रेड लेनी नहीं है कब तक? जब तक ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर ना हो जाए। तो ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर से क्या मतलब है? एक ऐसा वक्त जब प्राइस हायर हाई बनाने के साथ-साथ अचानक से अपने पिछले लो को ब्रेक कर दे। तो अगर आप देखेंगे जब प्राइस इस लो को ब्रेक कर दे। क्लियर है? जैसे ही प्राइस इस लो को ब्रेक करता है, यहां पर आपको मिलती है एक कंफर्मेशन कि प्राइस जो ऊपर की तरफ मूव बना रहा था, यह फेक है। यह ध्यान रखिएगा, जब तक मार्केट इस लो को ब्रेक नहीं करता, तब तक आप क्लेरिटी से नहीं कह सकते कि मार्केट एक फेक मूव कर रहा है। क्योंकि कई बार प्राइस लगातार और बहुत लंबे वक्त तक लगातार बरिश या बुलिश डायवर्जेंस बनाए रख सकता है। तो, आपको क्या करना है? इस लो के ब्रेक होने का वेट करना है। जैसे ही यह लो ब्रेक होता है, इसके बाद ब्रेक होने के बाद आपको कंफर्मेशन मिल जाती है। अब आप अपनी एंट्री प्लान कर सकते हैं इस लेवल के आसपास। स्टॉप लॉस आप अपना हाईएस्ट हाई रखते हैं। यह आपका स्टॉप लॉस हो जाता है। और मिनिमम 1:1 को आप अपना टारगेट रखते हैं। उसके बाद आप उसको ट्रेल कर सकते हैं। 1:2 या 1:2.5 या 1:3 तक। अधिकतर मैं इतना ही टारगेट रखना पसंद करता हूं। यह होती है हमारी ब्रेड बटर स्ट्रेटजी। इस ब्रेड बटर स्ट्रेटजी के अंदर एक और कंडीशन होती है कि आपको यह जो डायवर्जेंस है यह देखना है हमेशा ओवरबोट और ओवरसोल्ड सिचुएशन में। अभी ये ओवरबोट और ओवरसोल्ड सिचुएशन क्या है? चलिए इसके ऊपर बात करते हैं। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले मैं आप लोगों से एक बात पूछना चाहूंगा। क्या आप भी इंट्राडे में किसी स्टॉक के 10-15% पंप होने से एक्साइटेड हो जाते हो? अरे यार यह स्टॉक तो कल ऊपर ही जाएगा। लेकिन अगले दिन वो स्टॉक नीचे आ जाता है और आप निराश हो जाते हो। अगर हां तो मैं आप लोगों को बताना चाहूंगा शायद ये प्रॉब्लम उस स्टॉक की नहीं है। ये हमारे सिंगल टाइम फ्रेम एनालिसिस की प्रॉब्लम है। क्योंकि कई बार हमें जो इंट्राडे पर ब्रेकआउट दिखता है हो सकता है कि वो नेक्स्ट डे हमें पता चले कि वो तो हाई टाइम फ्रेम का डिस्ट्रीब्यूशन था या करेक्शन था। इसलिए मार्केट की डायरेक्शन एक टाइम फ्रेम पर एनालिसिस करने से नहीं पता चलती। इसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए मैं अब सर्च पर लेकर आया हूं मल्टी टाइम फ्रेम स्विंग ट्रेडिंग कोर्स जिसमें आप डिटेल में सीखेंगे कैसे हायर टाइम फ्रेम से ट्रेंड कंफर्म करना है। कैसे स्विंग ट्रेडिंग को करना है स्टॉक्स में फ्यूचर्स में ऑप्शंस में कैसे फेक ब्रेकआउट्स को अवॉइड करना है मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस की हेल्प से और लोअर टाइम फ्रेम पर प्रिसाइज एंट्री एग्जिट और स्टॉप लॉस कैसे लगाने हैं? इसका मतलब ये है कि अगर किसी ट्रेड को कॉन्फिडेंस के साथ होल्ड करना है ना तो मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस को सीखना ही पड़ेगा। इसलिए डिस्क्रिप्शन में दिए हुए लिंक पर क्लिक करो और मार्केट को समझ कर ट्रेड करो। चलो अब वापस चलते हैं अपनी वीडियो पर। सो आपको क्या ध्यान रखना होता है कि जभी भी आप यह डायवर्जेंस देख रहे होते हैं तो इस आरएसआई के अंदर आपको अक्सर एक बैंड दिखाई देता है। जहां पर आप देख सकते हैं एक ऊपर वाली लाइन आपको यहां पर दिखाई दे रही होगी। एक नीचे वाली लाइन दिखाई दे रही होगी। इसी को अपर या लोअर बैंड कहते हैं। जो अपर बैंड वैल्यू होता है, जभी भी आप आरएसआई इंडिकेटर लगाते हैं, इसकी वैल्यू 70 पहले से ही सेट होती है। स्टॉक मार्केट में ट्रेड करने के लिए आपको इसको 70 पर ही रखना है। कोई चेंज इसके अंदर नहीं करना है। नीचे वाला जो बैंड होता है, इसको लोअर बैंड बोलते हैं और इसकी वैल्यू पहले से ही 30 के आसपास सेट होती है। ठीक है? आप यहां देख भी सकते हैं। यहां पर ये 30 है और ऊपर की तरफ 70 है। सो जभी भी आरएसआई की वैल्यू 70 के ऊपर जाती है तो इस सिचुएशन को हम लोग बोलते हैं जब यह 70 के ऊपर जाता है तो हम इसको बोलते हैं ओवरबोट। ओवरबोट मतलब इसको अधिक बाय कर लिया गया है। और जभी भी प्राइस की या आरएसआई की वैल्यू 30 के नीचे जाती है तो हम इस सिचुएशन को बोलते हैं ओवर सोल्ड मतलब कि अधिक सेलिंग हो गई है। सो ओवरबोट और ओवरसोल्ड सिचुएशन के बाद अगर आप इस डायवर्जेंस को ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर के साथ यूज़ करेंगे तब हम इसे बोलेंगे कि हमारी ब्रेड बटर स्ट्रेटजी कंप्लीट हो गई। आइए अब हम लोग इससे स्विंग ट्रेडिंग कैसे करेंगे इसको समझते हैं। इसके लिए आपको दो चीजें समझने की जरूरत है। अगर आप किसी ऐसे स्टॉक के अंदर ट्रेड कर रहे हैं जो निफ्ट्टी 50 के अंदर आता है या फिर निफ्ट्टी 50 के मार्केट कैप के जो स्टॉक्स होते हैं उसके आसपास के स्टॉक्स हैं जैसे निफ्ट्टी nex 50 या निफ्टt 100 इस तरह के स्टॉक्स अगर आप ट्रेड कर रहे हैं तो उसके अंदर अगर आप एक बार निफ्ट्टी 50 का भी व्यू देख लेंगे तो आपको इसके अंदर एडिशनल विन रेट मिल सकती है। मतलब अगर आप निफ्टी पर बुलिश हैं तो आप जिस भी स्टॉक के अंदर इस कांसेप्ट को ट्रेड करना चाहते हैं कोशिश करें कि आप बुलिश ट्रेड लेने की कोशिश करें। अगर निफ्टी 50 का व्यू बेरिश है तो आप कोशिश करें आप जब स्विंग ट्रेड करें तो बेरिश ट्रेड लें यानी कि शॉर्ट ट्रेड लेने की कोशिश करें। ऐसा मैं आपको क्यों बोल रहा हूं? क्योंकि इससे आपकी विन रेट बेहतर हो सकती है क्योंकि आप मार्केट के फेवर में ट्रेड कर रहे हैं। अगर आप किसी ऐसे स्टॉक को ट्रेड कर रहे हैं जो निफ्ट्टी 50 के अंदर नहीं आता, इंडेक्स के अंदर नहीं आता तो आप बेझिझक होकर आपका आरएसआई या फिर आपकी स्ट्रेटजी आपको जिस तरफ की ट्रेड लेने के लिए कह रही है, आप उस तरफ ट्रेड ले सकते हैं। ठीक है? चलिए, अब आपको ध्यान क्या रखना है? लेट्स सपोज़ यहां पर मैंने एक स्टॉक लिया है। अब मैं थोड़ा पुराना ही चार्ट यूज़ कर रहा हूं यहां पर। तो आपको यह ध्यान रखना है कि आप इस स्ट्रेटजी को किसी भी टाइम फ्रेम पर तो यूज़ कर सकते हैं। लेकिन स्विंग ट्रेडिंग करने के लिए मैं यहां पे आपको दो चीजें रिकमेंड करना चाहूंगा। पहला चीज कि मैं इसको 1 घंटे के चार्ट पर ज्यादा प्रेफर करता हूं। क्यों? क्योंकि जब आप 1 घंटे के चार्ट पर यूज़ कर रहे होते हैं तो यूजुअली आपकी स्विंग ट्रेडिंग का टारगेट जो है वह 3 से 5 दिन के अंदर आ जाता है। बट अगर आप थोड़ी लंबी स्विंग ट्रेडिंग करना चाहते हैं जैसे कि आप 15 दिन 20 दिन 1 महीने की ट्रेड करना चाहते हैं तब आप डेली टाइम फ्रेम यूज़ कर सकते हैं। जितना बड़ा आप टाइम फ्रेम यूज़ करेंगे उतना ही कम बार यह स्ट्रेटजी चार्ट पर बनेगी। क्योंकि डेली टाइम फ्रेम की एक ही कैंडल स्टिक को बनने में 1 दिन लगता है। तो आपको वहां पर पेशेंस दिखाना होगा। इसलिए मैं आपको जो स्ट्रेटजी दिखा रहा हूं 1 घंटे के चार्ट पर ही दिखाऊंगा। सो यहां पर आप देख सकते हैं मैंने 1 घंटे का चार्ट यूज़ किया और थोड़ा पुराना डाटा यूज़ करेंगे क्योंकि लाइव प्राइस हम यूज़ नहीं करना चाहते। इसके बाद आप आरएसआई इंडिकेटर यूज़ क्लिक कर लेंगे। जब आप सेलेक्ट कर देंगे यहां से इंडिकेटर आरएसआई तो नीचे की तरफ इस तरह से इंडिकेटर आपके सामने आ जाएगा। आने के बाद आपको क्या करना है? आप चाहें तो इसमें एक येलो लाइन होती है जिसे मूविंग एवरेज कहते हैं। आप इसको सेटिंग्स में जाके हटा सकते हैं या आप इसको रखना चाहे रख सकते हैं। यहां से यह हट जाता है। तो अब आपको सिर्फ आरएसआई ही दिखाई दे रहा है। अब आपको क्या करना है? सबसे पहले आरएसआई की वैल्यू को 70 के ऊपर या 30 के नीचे पहुंचने का वेट करना है। जैसे कि आप यहां देख सकते हैं। सो अगर आप ध्यान से देखें तो मैं थोड़ा सा आपको रीप्ले मोड से समझाऊं। तो आप जब देखें जैसे ही आपको पहली बार आरएसआई की वैल्यू 30 के नीचे दिखाई दे। तो यहां पर आप देख सकते हैं आरएसआई की वैल्यू 30 के नीचे दिखाई दे। तो आपको करना क्या है? आपको इस स्टॉक को अपनी वॉच लिस्ट में ऐड कर लेना है। ऐड करने के बाद अब अब आपको वेट करना है क्या यहां डायवर्जेंस बनेगा या नहीं बनेगा? अगर नहीं बनता है तो कोई दिक्कत वाली बात नहीं। बनता है तो बहुत ही बढ़िया बात है। तो अब आप देखेंगे कि जब प्राइस इसके नीचे गया इस लो के नीचे गया तो यहां पर प्राइस ने जब इस लो के नीचे प्राइस तो गया लेकिन अगर आप थोड़ा सा ध्यान से देखेंगे मैं इसको थोड़ा थिक कर देता हूं जिससे आपको और क्लेरिटी के साथ यह दिखे। यह देखिए जब प्राइस पिछले लो के नीचे गया तो आप देखेंगे आरएसआई पिछले लो के नीचे नहीं गया। यहां पर आपको क्लेरिटी से दिख रहा है कि प्राइस जो है वो डायवर्जेंस बना रहा है। देखिए प्राइस यहां पर नीचे की तरफ बढ़ा है। लेकिन अगर आप नीचे की तरफ देखें तो आरएसआई जो है ऊपर की तरफ बढ़ा है। यह जो डायवर्जेंस आपको दिखाई दे रहा है आपको बस इसके बाद वेट करना होता है ब्रेड बटर स्ट्रेटजी के फॉर्म होने का। यहां तक ये सिर्फ और सिर्फ डायवर्जेंस है। अब इन दोनों लो के बीच में देखिए कौन सा हाई इंपॉर्टेंट है। जैसा कि मैंने आपको वीडियो के शुरुआत में बताया कि क्वेश्चन ये था गैप अप या गैप डाउन की वजह से कई बार कंफ्यूजन होता है कहां पर ट्रेड लेना चाहिए। तो आपको ध्यान क्या रखना है? आपको अपना फोकस सिर्फ और सिर्फ स्विंग हाई और स्विंग लॉस पर ही लगाना है। तो आपको अगर देखें ध्यान से तो यहां पर यह वाला हाई इन दोनों के बीच में आपको दिखाई दे रहा होगा। इसके बीच में कोई और स्विंग हाई नहीं है। तो आप किसी और स्विंग हाई के ऊपर फोकस नहीं करेंगे। आप वेट करेंगे कि प्राइस इसके ऊपर ब्रेकआउट दे दे। अगर प्राइस इसके ऊपर ब्रेकआउट नहीं देता है और फिर से नीचे चला जाता है तो आप फिर से सेम डायवर्जेंसी देखेंगे। अब आप यहां देखेंगे कि मार्केट ने ऊपर की तरफ अगले दिन आप यहां पर देखिए अगले दिन मार्केट ओपन होती है और लगातार ब्रेकआउट दे देती है। जैसे ही मार्केट ब्रेकआउट देती है, जैसे ही दो कैंडल स्टिक इस हाई के ऊपर क्लोज होती है, आपका ब्रेकआउट कंफर्म हो जाता है। अब आप इस लेवल के आसपास जो आपका ब्रेकआउट लेवल था, इस लेवल के आसपास आप अपनी एंट्री प्लान कर सकते हैं। अपनी एंट्री के वक्त आपको यह ध्यान रखना है कि आप अपनी एंट्री एक पर्टिकुलर एरिया में कीजिए। यानी कि जो यह आपका लेवल है इससे थोड़ा सा ऊपर से लेके इस बीच में अगर आप इस तरह से इस हिस्से में अपनी एंट्री प्लान करेंगे तो आपको अक्सर ट्रेड के अंदर एंट्री मिल जाएगी क्योंकि कई बार प्राइस इस लेवल को एग्जैक्ट रिटेस्ट नहीं करता है और कई बार इसके अंदर डीप डाउन भी आ जाता है। जैसे कि प्राइस कई बार आपका इस तरह से यहां से डायरेक्ट ऊपर चला जाएगा और कई बार वो यहां से नीचे आके इस तरह से ऊपर जा सकता है। तो आप अगर प्राइस नीचे आता है आप ऐड करके एवरेजिंग कर सकते हैं। लेकिन ध्यान ये रखते हुए कि आप अपना रिस्क ज्यादा एक्सपोज ना कर दें। इस बीच में जभी भी प्राइस आता है आप अपनी एंट्री प्लान कर सकते हैं। तो लेट्स सपोज आपने अपनी एंट्री यहां पर इस कैंडल की क्लोजिंग के बाद अगले कैंडल की ओपनिंग पर ही लगा दी। अब आप अपना स्टॉप लॉस जो रखेंगे वो हमेशा इस लो के नीचे ही रखेंगे और आपका जो पहला टारगेट होना चाहिए वो 1:1 होना चाहिए। अब यहां पर आपको ध्यान क्या रखना है? स्विंग ट्रेडिंग करते वक्त कई बार मार्केट जो है अलग-अलग तरह की वोलेटिलिटी से गुजर सकती है। जैसे कि किसी न्यूज़ के कारण भी। तो जभी भी आप अपना 1:1 का टारगेट प्लान करें तो यह ध्यान रखें इस टारगेट के आसपास कोई ना कोई स्विंग हाई जरूर हो। उस स्विंग हाई की वजह से कई बार आपका टारगेट95 या 0.91 के आसपास तक रह सकता है। जैसे कि इस केस में यह देखेंगे आप स्विंग हाई यहां पर है। तो यह थोड़ा सा नीचे अगर करेंगे तो यह 98 हो गया और कई बार यह बढ़ के 1.2 के आसपास आ जाएगा। तो आप दोनों ही केसेस में इस स्विंग हाई के आसपास ही अपना पहला टारगेट प्लान करें। दूसरा टारगेट प्लान करने या फिर इसके आगे एक्सटेंड करने के कई सारे तरीके होते हैं। जैसे कि इससे पिछला कोई भी बढ़िया स्विंग हाई आपको दिखाई दे रहा है। जैसे कि यह यहां तक आप अपना टारगेट प्लान कर सकते हैं। या फिर आप डायरेक्टली 1:2 या 1:2.5 पर अपनी पोजीशन क्लोज कर सकते हैं। जैसे कि अगर 2.5 पर देखें तो यहां पर आप अपना नेक्स्ट टारगेट लगा सकते हैं। यह आपका टारगेट वन हो गया और यहां पर आपका टारगेट टू हो गया इस स्विंग हाई पर। तो स्विंग ट्रेडिंग करते वक्त यह काफी इंपॉर्टेंट है कि आप अपने पोजीशंस को स्विंग हाई और स्विंग लॉस के आसपास ही बुक करें। टारगेट वन कंप्लीट होने के बाद हमेशा अपने पोजीशन पर अपना ट्रेलिंग स्टॉप लॉस जरूर ऊपर कर लें। तो देखते हैं मार्केट नीचे आती है। आपके एंट्री ज़ोन में आती है। जैसे कि आप देखेंगे यहां पर इस ज़ोन के अंदर आई। आने के बाद मार्केट ने पहला टारगेट कंप्लीट कर दिया। अब यहां पे ध्यान देने वाली बात ये है कि मार्केट अगले दिन गैप अप या गैप डाउन ओपन होकर आपकी साइकोलॉजी को खराब कर सकती है। जैसे कि यहां पर जिस तरह टारगेट हुआ उसी तरह मार्केट नीचे गैप डाउन होकर भी आपको परेशान कर सकती है। तो आप अपने स्टॉप लॉस को जहां पर है वहीं पर लगा के रखें। स्विंग ट्रेडिंग करने के लिए आप लोग GT गुड टिल ट्रेडेड वाले स्टॉप लॉस ऑर्डर का यूज़ कर सकते हैं। जिससे कि अगर किसी वजह से आप स्क्रीन पर ना हो तो भी यह ट्रिगर हो जाए। टारगेट के लिए भी आप सेम ऑर्डर एग्जीक्यूट कर सकते हैं। इसके बाद जैसे ही आपका टारगेट वन क्लियर हो जाता है, आपको अपनी एंट्री के आसपास जो भी स्विंग लो दिखाई दे उसके पास आप अपना स्टॉप लॉस इस तरह से खिसका दें जिससे कि अगर मार्केट वापस नीचे गिरे तो अब आपका लॉस ना हो और आपने पार्शियल प्रॉफिट जरूर बुक कर लिए हो। इसके बाद मार्केट जहां जाता है दैट इज़ ओके। अगर वह नीचे आता है आपको वापस से स्टॉप आउट कर देता है तो ठीक है। अगर वह टारगेट तक चला जाता है तो भी वह ठीक बात है। उसमें ऐसी कोई परेशानी वाली बात नहीं है। इस बात से आपको समझना यह है कि जब मार्केट टारगेट्स की तरफ चल रहा होगा तो वह वक्त लगाएगा। अब इस चीज पर अधिकतर लोग उम्मीद तोड़ देते हैं। होता क्या है कि कई बार मार्केट पहला टारगेट तेजी से करती है। लेकिन दूसरा टारगेट पूरा करने से पहले वह वक्त लगा देता है। लेकिन आपको ट्रेडिंग सिस्टम के हिसाब से करनी होगी। और स्विंग ट्रेडिंग का पर्पस ये होता है कि आपको टाइम के हिसाब से अपने टारगेट सेलेक्ट नहीं करने होते हैं। आपको मूव के हिसाब से अपने टारगेट सेलेक्ट करने होते हैं। तो यहां पर टाइम कितना भी लगे आपको होल्ड करने की कैपेसिटी तो रखनी ही पड़ेगी। और इस तरह से आप देख सकते हैं कि ब्रेड बटर स्ट्रेटजी स्टॉक पर भी काम करती है और दूसरा वो स्विंग के लिए भी काम करती है। इसी तरह से आप लोग बुलिश के साथ-साथ बेरिश टारगेट भी देख सकते हैं। बेरिश कहां बना है वह भी देख लेते हैं। इसको देखना बड़ा आसान है। आप सिंपली क्या कर सकते हैं? आप नजर दौड़ाइए और देखिए आरएसआई की वैल्यू इसके ऊपर कहां गई? क्या वहां डायवर्जेंस बना था? यहां पर नहीं बना है। ठीक है? यहां पर ऊपर गई है। देखते हैं यहां डायवर्जेंस बना है क्या? अगर आप देखेंगे चलिए मुझे लगता है शायद यहां पर हमें वापस से एक डायवर्जेंस देखने को मिल जाए। अगर आप ध्यान देंगे प्राइस लगातार ऊपर जा रहा है। लेकिन अगर आप देखेंगे तो अचानक से आरएसआई ने नीचे आना शुरू कर दिया। मुझे फिर से डायवर्जेंस दिख रहा है। लेकिन ध्यान दें प्राइस लगातार तीन बार हाई बना चुका है। उसने एक भी बार पिछला लो ब्रेक नहीं किया। तो डायरेक्टली ट्रेड नहीं करना है। किसी लो के ब्रेक होने का वेट करना है। तो जैसे कि अगर हम देखें तो पहली बार जब यह हाई के बीच में गैप बना तो हमने इंतजार किया होगा यह लो ब्रेक होने का। लेकिन मार्केट ऊपर चली गई तो अब आप इस लो को खिसका देंगे पिछले स्विंग लो के पास यहां पर। अगर मार्केट और ऊपर जाती है तो हम सेम काम करते रहेंगे। लेकिन हम लोग जब तक ब्रेकआउट नहीं मिल जाता तब तक ट्रेड के अंदर एंट्री नहीं करेंगे। यह देखिए आपके पास यहां पर इमीडिएट फेक आउट हो गया। दो क्लोजिंग इसके नीचे नहीं आई है। अगर ऐसी सिचुएशन बनती है तो मैं यूजुअली ट्रेड नहीं करता। बल्कि अब मैं ट्रेड करूंगा अगर मार्केट इस लो के नीचे वापस से आ जाती है। अगर मार्केट इस लो के नीचे वापस आ जाती है इसका मतलब यह है कि मार्केट जो है वीक है लेकिन अगर यह फेक आउट है तो मार्केट जो है वापस से ऊपर चला जाएगा। तो अब देखते हैं मार्केट डायरेक्टली वापस ऊपर चला जाता है कि नीचे जाता है। यह फिर से नीचे आ गया। बस जैसे ही मार्केट दोबारा से नीचे आता है, इस केस में मैं अब ट्रेड के अंदर एंट्री प्लान कर सकता हूं। सो मैं यहां पर अपनी शॉर्ट ट्रेड में एंट्री प्लान कर लूंगा। जो भी अगली कैंडल स्टिक बनेगी इस जगह पर। ठीक है? स्टॉप लॉस जो रहेगा वो कोशिश तो यही करेंगे कि हम लोग यहीं रखें। अगर ऐसा सिनेरियो है जिसमें फेक आउट डबल हुआ है तो आप इस वाले लो को भी कंसीडर कर सकते हैं। जिससे कि आप रिस्क टू रिवॉर्ड मेंटेन कर पाएं। ध्यान दें 1:1 से नीचे टारगेट बुक नहीं करना। अगर ट्रेड का टारगेट 1:1 से कम आ रहा है, आपको ऐसा लगता है कोईेंट लो मिस हो रहा है, तो आप उस ट्रेड को ना ट्रिगर करें। तो जो सबसे पहला अगर मेरा स्विंग लो देखें लगभग यह 1:1 के आसपास है। इसलिए इस ट्रेड को किया जा सकता है। अगर आप देखेंगे लगभग 1:1 है और अगर इससे भी नीचे गिरता है तो मेरे पास जो अगला टारगेट होगा वो लगभग इस लो के आसपास होगा। तो इस ट्रेड के अंदर मैं एग्जीक्यूशन करना चाहूंगा। क्यों करना चाहूंगा? क्योंकि मेरे पास डबल ब्रेकआउट है, डायवर्जेंस है और डायवर्जेंस कहां बना हुआ है? ओवरबोट सिचुएशन में बना हुआ है। तो देखते हैं इस ट्रेड के अंदर क्या होता है। ध्यान रखिए किसी भी स्ट्रेटजी के अंदर स्टॉप लॉस और टारगेट दोनों ही होते हैं। तो आपको तैयार यह रहना है कि मेरा स्टॉप लॉस हो जाए, टारगेट हो जाए। मुझे फर्क नहीं पड़ता। तो आप यहां देखेंगे कि मार्केट ने जो है ऊपर जाकर आपका स्टॉप लॉस कर दिया। ठीक है? सो यहां पर जब आपका स्टॉप लॉस हो जाए तो आपने क्या देखा? मैंने यहां पर आपका स्टॉप लॉस कहां लगाया था? मैंने आपका स्टॉप लॉस लगाया था दूसरे वाले हाई के ऊपर। अब इस चीज से हमें क्या समझ में आया कि हमने हाई के ऊपर क्यों लगाया? क्योंकि अगर मार्केट नीचे जाना चाहती है तो मार्केट किसी भी वजह से इस वाले हाई के ऊपर नहीं जाएगी। तो अगर यह गई तो हमारा स्टॉप लॉस यहां पर कंप्लीट हो गया। तो अब आप लोग देख सकते हैं कि स्विंग ट्रेडिंग आरएसआई के साथ किस तरह से करते हैं। सो आपको अब इस स्ट्रेटजी के साथ क्या करना है? सबसे पहली चीज जिस तरह से यहां पे मैंने आपको दिखाया कि मेरी एक ट्रेड का स्टॉप लॉस हो गया। एक ट्रेड का मेरा जो है यहां पर टारगेट हो गया। उसी तरह से जब आप स्विंग ट्रेडिंग करने जाएंगे ब्रेड बटर स्ट्रेटजी से तो आपके भी स्टॉप लॉस और टारगेट होंगे। अब आप देखिए इस तरह से मैं यहां पर कई सारे एग्जांपल्स दिखा सकता हूं। आपको टारगेट्स दिखा सकता हूं। आपको स्टॉप लॉस दिखा सकता हूं। लेकिन यह स्ट्रेटजी आपके लिए काम करेगी या नहीं करेगी ये इस बात के ऊपर डिपेंड करता है कि आप लोगों ने इसके लिए प्रैक्टिस करी भी है या फिर नहीं। तो अगर आप प्रैक्टिस करेंगे तो आपके लिए हो सकता है यह काम करें। अगर आप प्रैक्टिस नहीं करें तो आप लोग सिर्फ सोचते रह जाएंगे। तो इसलिए क्या करना है? किसी भी स्ट्रेटजी की तरह इस स्ट्रेटजी को स्विंग ट्रेडिंग में कम से कम 50 से 100 ट्रेड्स लेकर पेपर ट्रेड करके देखना है। पेपर ट्रेड करने के बाद यह देखना है क्या यह स्ट्रेटजी मेरे लिए काम करती है या मेरे लिए काम नहीं करती है। कितना इसका विन रेट आता है? इस रिस्क टू रिवॉर्ड से क्या रिजल्ट निकल के आते हैं और जब आप यह करेंगे तो यह आपके लिए काम करेगी क्योंकि इसी स्ट्रेटजी को मैं पिछले 7 सालों से जो है काम कर रहा हूं। इसी स्ट्रेटजी के साथ बहुत सारे लोग काम कर रहे हैं और सबके लिए काम करते जा रही है। तो आई होप यह स्ट्रेटजी आप लोगों को भी हेल्प करेगी। ट्राई कीजिए, प्रैक्टिस कीजिए। कमेंट करके मुझे जरूर बताना जब आप लोग 50 ट्रेड करके देख लें। यह स्ट्रेटजी ने आप लोगों के लिए काम किया या नहीं किया। चलिए फिर मैं मिलता हूं आप लोगों को किसी नेक्स्ट वीडियो में। तब तक रखिए अपना ध्यान। टेक केयर। बाय बाय।

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