Order Flow Trading Strategy Masterclass | How To Trade Order Flow | Trading For Beginners — backtested on Indian market data | FakeTrades
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Order Flow Trading Strategy Masterclass | How To Trade Order Flow | Trading For Beginners

Neeraj joshi · watch on YouTube ↗
Analysed 01 Aug 2026, 02:41 PM IST
⏳ Backtest pending — a data-backed verdict will be attached.

Verdict

Not backtestable — no mechanical strategy to test. Educational explanation of order flow analysis and auction market theory with no mechanical, backtestable entry/exit rules defined.

We only score videos that teach a rule-based strategy (a defined entry trigger, stop and exit a computer could follow). This one doesn't contain one, so there is nothing to backtest — we show no number rather than a made-up one.

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Full transcript (4287 words)
यह जो अभी आपको स्क्रीन पर नजर आ रहा है, इसको कहते हैं ऑर्डर फ्लो। और यह इतने काम की चीज है कि इसके बेसिस पर जो स्ट्रेटजी बनाई जाती है ना, उसका यूज [संगीत] करके जो ट्रेडर है वो रॉबिनस कप जीत चुके हैं। जिन्हें नहीं पता उन्हें मैं बता दूं कि रॉबिंस कप एक तरीके की ट्रेडिंग चैंपियनशिप होती है जिसमें एक साल के लिए ट्रेडर्स को मॉनिटर किया जाता है और उसमें जो सबसे ज्यादा रिटर्न्स कमाता है वो उस चैंपियनशिप को जीत जाता है और जिस ट्रेडर ने उस चैंपियनशिप को जीता था वो ये स्ट्रेटजी का यूज कर रहा था। तो आज की वीडियो में हम ऑर्डर फ्लो को ही डिटेल में समझने वाले हैं। तो चलिए इस वीडियो को शुरू करते हैं। तो चलिए सबसे पहले समझते हैं कि ये जो हमें अलग तरीके की कैंडल्स दिखाई दे रही हैं जिसको हम ऑर्डर फ्लो बोल रहे हैं। ये आखिर होता क्या है? तो ऑर्डर फ्लो बेसिकली हमें बताता है कि मार्केट में कितने बाय एंड कितने सेल ऑर्डर्स हैं। अब ये इतना ज्यादा इंपॉर्टेंट क्यों है? यह इतना इंपॉर्टेंट इसलिए है क्योंकि अगर मार्केट में ज्यादा बायरर्स होंगे, कम सेलर्स होंगे तो आपको पता है प्राइस बढ़ती है। अगर मार्केट में ज्यादा सेलर्स होंगे, कम बायरर्स होंगे तो आपको पता है कि प्राइस गिरती है। तो ये वो रॉ डेटा है जिसके बेसिस पे आगे चलके चार्ट्स बनते हैं। क्योंकि जो ऑर्डर एग्जीक्यूट होंगे वही जाके आपकी कैंडल में दिखाई देंगे। यानी ऑर्डर फ्लो में हम बाय सेल ऑर्डर्स का एनालिसिस करते हैं ताकि हमें जो इंस्टीट्यूशनल एक्टिविटी है वो पहले दिखाई दे। यानी जो ऑर्डर्स मार्केट में लग रहे हैं उन ऑर्डर्स को नंबर्स की फॉर्म में बिल्कुल जहां पर वो ऑर्डर्स लगाए जा रहे हैं वहां से देखने को हम कहते हैं ऑर्डर फ्लो का एनालिसिस करना। तो ये जो कैंडल्स के बगल में आपको नंबर्स दिखाई दे रहे हैं ना बीच में तो यहां पर कैंडल ही है। अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको दिखाई देगा कि बीच में वही ग्रीन कैंडल है। लेकिन उसके बगल में ये जो हमें नंबर्स देखने को मिल रहे हैं ये नंबर्स हैं। नंबर ऑफ ऑर्डर्स जो मार्केट में लग रखे हैं। कितने बाय ऑर्डर्स हैं, कितने सेल ऑर्डर्स हैं? यह हमें यहां पर दिखाई दे रहा है। तो अगर हम अपना जो स्मार्ट मनी का एनालिसिस करते हैं जिसमें हम लिक्विडिटी देखते हैं, मार्केट स्ट्रक्चर देखते हैं, उसके साथ अगर हम इस ऑर्डर फ्लो को भी मिला दें तो यहां पर हम एक बहुत ही स्ट्रांग स्ट्रेटजी बना सकते हैं। लेकिन इसके लिए पहले आपको थोड़ा बहुत समझना होगा और मैं आपको कहूंगा कि इस वीडियो को बहुत ध्यान से देखना। अगर आप चलते फिरते देखोगे तो फिर आपको ज्यादा चीजें समझ नहीं आएंगी क्योंकि इसमें बहुत सारी ऐसी भी चीजें आपको पता चलेंगी जो शायद आपने इससे पहले नहीं सुनी होंगी। इसलिए बहुतेंट है और पेशेंस के साथ आपको इस वीडियो को देखना है और वीडियो पसंद आएगी तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर देना और कमेंट करके जरूर बताना कि आप कहां से इस वीडियो को देख रहे हैं। तो अब ये जो ऑर्डर फ्लो है इसको समझने से पहले एक कांसेप्ट है जो आपके लिए समझना बहुत ज्यादा जरूरी है। अगर आप उसको क्लियर नहीं करोगे तो फिर एक तरह से आपको बेस ही क्लियर नहीं होगा और फिर ये चीज आपको समझ नहीं आएगी और वो चीज है ऑक्शन मार्केट थ्योरी। तो ऑक्शन मार्केट थ्योरी कहती है कि मार्केट एक ऑक्शन की तरह है जहां पर जो बायरर्स होते हैं वो हमेशा बड लगाते रहते हैं और जो सेलर्स होते हैं वो आस्क करते रहते हैं और जब इनके बीच में डील हो जाती है दोनों एक प्राइस पर पहुंच जाते हैं तो उसको कहा जाता है फेयर प्राइस और जब एक फेयर प्राइस बनती है तो दोनों के बीच में डील हो जाती है। यानी बड एंड आस्क किस लिए चल रहा है? एक फेयर प्राइस को डिसाइड करने के लिए चल रहा है। अब यह जो ऑक्शन होता है ना इसके बेसिकली तीन स्टेज होते हैं। सबसे पहला स्टेज होता है बैलेंस जिसमें आपको देखने को मिलता है कि मान लो यह एक प्रॉपर्टी है जो कि ₹100 की मिल रही है और आप ₹100 में खरीदने के लिए तैयार है। मैं ₹100 में बेचने के लिए तैयार हूं। यानी यहां पर हमारे बीच में एक बैलेंस बना हुआ है। या तो 100 में कोई खरीद रहा है। दूसरा 100 के आसपास में बेच रहा है। फिर 100 में खरीद रहा है। 100 के आसपास में बेच रहा है। 1000 101 के बीच में यहां पर जो प्राइस है वो ऊपर नीचे घूम रही है। तो ये क्या है? इसको कहते हैं हम बैलेंस है मार्केट में। लेकिन यह बैलेंस हमेशा नहीं बना रहेगा। कभी ना कभी मार्केट में एक इमंबैलेंस आएगा और जब इमंबैलेंस आएगा तभी मार्केट में प्राइस बढ़ती है। अगर मार्केट में बैलेंस है सब 100 में खरीद के 101 में बेच रहे हैं। 101 में खरीद के 100 में बेच रहे हैं तो फिर तो प्राइस कभी बढ़ेगी नहीं। कभी ना कभी मार्केट में इमंबैलेंस आता है जिसकी वजह से प्राइस बढ़ती है। जब बैलेंस वाला रेंज आपको दिखाई दे रही है। कोई 100 में खरीद रहा है, 101 में बेच रहा है, 101 में खरीद रहा, 100 में बेच रहा है। ये चल रहा था। लेकिन अचानक से मान लीजिए ये एक प्रॉपर्टी है तो न्यूज़ आ जाती है कि इस प्रॉपर्टी के आगे से तो भैया हाईवे निकलने वाला है। अब जैसे ही ये खबर आएगी कि अच्छा हाईवे निकल रहा है फिर तो यहां पर बहुत सारे लोग आ जाएंगे अरे 100 में मैं खरीदूंगा मैं खरीदूंगा मैं खरीदूंगा सब आ जाएंगे खरीदने के लिए तो बायरर्स ज्यादा हो जाएंगे फिर सेलर चौड़ा हो जाएगा बोले मैं 100 में क्यों बेचूंगा अब तो मैं ₹300 में बेचूंगा। यानी यहां पर क्या हुआ कि एक अचानक से डिमांड आई बिकॉज़ ऑफ़ एनी रीज़न एक मार्केट में इमंबैलेंस क्रिएट हो गया जिसकी वजह से जो प्राइस है वो बढ़के सीधा ₹300 में पहुंच गई। तो इसको हम कहते हैं इमंबैलेंस जिसमें जो सेलर्स थे वो तो उतने ही थे लेकिन अचानक से बायरर्स बहुत सारे आ गए। तो मार्केट में एक इमंबैलेंस क्रिएट हो गया। तो वो ज्यादा से ज्यादा बड लगाने लग गए। जिसकी वजह से जो प्राइस है वो बढ़कर सीधा 300 पे चली गई या कहें कि जो सेलर है वो आस्क ज्यादा करने लग गया। जिसकी वजह से प्राइस जो है वो बढ़ गई है। तो प्राइस बढ़ने के पीछे हमेशा जो रीजन होता है या प्राइस गिरने के पीछे भी जो सबसे बड़ा रीजन होता है वो होता है मार्केट में एक इमंबैलेंस क्रिएट होना। तो जब इमंबैलेंस क्रिएट होता है प्राइस तभी बढ़ती है। अगर मार्केट में बैलेंस होगा तो प्राइस नहीं बढ़ेगी। तो अब जब हाईवे बनने की खबर आ गई थी और उसके बाद प्राइस जो है वो ₹300 पहुंच गई थी। तो फिर यहां पर एक नया बैलेंस बन चुका है। जिसमें अगेन एक बयर होगा जो कहेगा जी मैं 300 में खरीद लूंगा। दूसरा कहेगा जी ठीक है 300 में बेच दो। तो मैं भी ले लूंगा। तो ऐसे ही दोनों के बीच में डील चलती जा रही है। 300 305 310 ऐसे ही रेट चलता जा रहा है। लेकिन अब फिर से या तो कोई पॉजिटिव न्यूज़ आ जाएगी तो प्राइस बढ़ेगी फिर से इमंबैलेंस बनेगा। लेकिन इस बार एक नेगेटिव न्यूज़ आ जाती है। पता चलता है कि वो जो खबर थी ना कि यहां से हाईवे निकलने वाला है। वो एक फेक खबर थी। अब जैसे ही यह खबर मार्केट में आएगी तो यहां पर बेचने वाला बोलेगा अरे भाई लोगों को पता ना चल जाए अभी बेच देता हूं। अब खरीदने वाले को पता चल चुका है। वो कहेगा भाई मैं 300 में तो नहीं खरीदूंगा। 200 में दे रहा है तो चल सोचूंगा। तो वहां पर सेलर जो है वो 200 में बेचने के लिए रेडी हो जाता है और इस वजह से यहां पर फिर क्या बनता है? फिर यहां पर प्राइस जो है वो गिर जाती है क्योंकि एक इमंबैलेंस बना होता है। यह जो आपको एकदम से मूव देखने को मिल रहा है वो देखने को मिल रहा है इमंबैलेंस की वजह से और इस बार जो इमंबैलेंस बना है इस टाइम पर बयर तो कम हो गए हैं लेकिन जो सेलर्स हैं वो बढ़ चुके हैं। वो बेचने को बहुत ज्यादा एग्रेसिव हैं। जिस वजह से यहां पर प्राइस गिरी है क्योंकि अगेन एक इमंबैलेंस आया है। और जब फिर से इमंबैलेंस आता है तो अगेन हमें दोबारा एक नया बैलेंस यहां पर देखने को मिलता है। जिसमें जो प्राइस है वह ₹200 पहुंच गई है और फिर से प्राइस इस तरीके से घूमती रहती है। यानी प्राइस किस तरीके से मूव कर रही है यह अब आपको समझ आ गया होगा और मार्केट में यही जो बैलेंस और इमंबैलेंस की साइकिल है ये कंटिन्यू होती रहती है। तो अब आपको ये जो ऑक्शन मार्केट थ्योरी है ये समझ आ गई है। तो चलिए अब बात करते हैं ऑर्डर फ्लो के उन कंपोनेंट्स की जिनके बिना भी ऑर्डर फ्लो को समझना बहुत ज्यादा मुश्किल है और अगेन इसमें आप बहुत ज्यादा कंफ्यूज होंगे अगर आप ध्यान से इस वीडियो को नहीं देखेंगे। तो सबसे पहला कॉम्पोनेंट जो आपको यहां पर समझना जरूरी है ये शायद आपको पता भी होगा वो है मार्केट ऑर्डर वर्सेस लिमिट ऑर्डर। अब ये यहां पर समझना बहुत ज्यादा जरूरी है क्योंकि अगर आपने इसको नहीं समझा आपने सारे ऑर्डर्स को एक समान समझा तो फिर क्या होगा फिर आप कंफ्यूज होंगे और आप गलत डिसीजन ले सकते हैं। तो अब क्लियर करते हैं कि मार्केट ऑर्डर होता क्या है? तो, यह मैंने आपको पहले ही बताया है कि जब आप किसी ट्रेड को मार्केट ऑर्डर पर लेते हैं, तो इसका मतलब क्या है? है कि उस टाइम पर जो भी प्राइस मार्केट में चल रही है, आप उसी प्राइस में उस ट्रेड को एग्जीक्यूट करना चाहते हैं। यानी एक तरह से यहां पर आप एक एग्रेसिव बायर हैं जो कि मार्केट से लिक्विडिटी को ले रहा है। जिसे हम टेकर भी बोलते हैं क्योंकि आपने लिक्विडिटी को यहां पर लिया है। जबकि अगर आप अपना जो ट्रेड है वो लिमिट ऑर्डर के थ्रू एग्जीक्यूट करते हैं। यहां पर आपको दिखाई देता है डेल्टा एक्सचेंज में अगर आप लिमिट ऑर्डर के थ्रू ट्रेड एग्जीक्यूट करेंगे। इसका मतलब क्या है? कि आप एक पर्टिकुलर प्राइस डिसाइड कर चुके हैं। जिस प्राइस पे ही आप अपने ट्रेड को एग्जीक्यूट करेंगे। अगर प्राइस उस लेवल पे आती है तो आपका ट्रेड एग्जीक्यूट होगा। अगर प्राइस उस लेवल पे नहीं आती है तो ट्रेड एग्जीक्यूट नहीं होगा। तो लिमिट ऑर्डर में क्या हो रहा है? हम खुद से प्राइस डिसाइड कर रहे हैं। प्राइस आएगी तो ट्रेड एग्जीक्यूट होगा। जबकि मार्केट ऑर्डर में जो भी प्राइस उस टाइम पर चल रही है, हम उस प्राइस पर खरीदने के लिए रेडी हैं। यह समझना इसलिए बहुत ज्यादा जरूरी है क्योंकि अगर आप मार्केट ऑर्डर लगा रहे हैं, इसका मतलब आप एक अग्रेसिव बायर या सेलर हैं। और अग्रेसिव बायर या सेलर का मतलब है कि अगर मान लो बहुत सारी क्वांटिटी कोई बायर या सेलर ले रहा है तो उसके पीछे कोई ना कोई बड़ा रीजन हो सकता है। जबकि अगर किसी ने लिमिट ऑर्डर लगा रखा है तो यहां पर वो एक पेंडिंग लिक्विडिटी है जिसके पास प्राइस आएगी तब वो लिक्विडिटी जो है वो यूज़ होगी। अब चलिए सीधा चार्ट पे चलते हैं और वहां पर समझते हैं। लेकिन उससे पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अकाउंट ओपन कर सकते हैं। मैं खुद डेल्टा एक्सचेंज का यूज़ करता हूं। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके अपना अकाउंट ओपन करेंगे तो आपको हमारी तरफ से अधीराई का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलेगा। साथ ही हम आपको हमारे tlegram चैनल में भी ऐड करेंगे। बट उसके लिए आपने हमारे लिंक से अकाउंट ओपन करने के बाद Google फॉर्म को जरूर फिल करना है। तो ऑर्डर फ्लो चार्ट को लगाने के लिए आपने सबसे पहले ट्रेडिंग व्यू में जाना है और यहां पर जाने के बाद आपके पास ऑप्शन आता है आपको कौन से टाइप का चार्ट देखना है। तो यहां पर आपको दिखाई दे रहा है नीचे एक वॉल्यूम फुटप्रिंट दिखाई दे रहा है। आपने इस पे क्लिक करना है। जैसे ही आप इस पे क्लिक करते हैं तो आपका जो चार्ट होगा वो कुछ इस तरीके का आपको नजर आने लग जाएगा। तो यहां पर अब आप जब ज़ूम करेंगे तब आपको यह जो ऑर्डर्स हैं वो देखने को मिल जाएंगे। लेकिन यहां पर आपको उतने अच्छे से दिखाई नहीं देता है। इसलिए आपको इस चार्ट की ना थोड़ी सी सेटिंग्स चेंज करनी होगी। अब उन सेटिंग्स में क्या चेंज करना है वो भी मैं आपको दिखा देता हूं। तो, जो सेटिंग्स मैं यूज़ करता हूं, वो आपको यहां पर नजर आ रही है। आप सेम सेटिंग्स अपने चार्ट में भी अप्लाई करके रख सकते हैं। और उसके बाद ओके पे हमने यहां पे क्लिक कर देना है। तो, जैसे ही हम इस पे क्लिक कर देते हैं, तो अब आप देख सकते हैं कि आपके सामने जो चार्ट है वो कुछ इस तरीके का नज़र आ रहा है। जिसमें साइड में आपको यहां पर ऑर्डर फ्लो भी देखने को मिल रहा है। तो, जब आप यह सेटिंग्स कर लेंगे, उसके बाद देखिए यहां पर जो ये नंबर्स आपको दिखाई दे रहे हैं, इनका मतलब क्या है वो समझते हैं। तो ये जो नंबर्स हैं बेसिकली ये ऑर्डर्स हैं जो मार्केट में लगे हुए हैं उस पर्टिकुलर प्राइस में। जैसे यहां पर हम देखें तो हमें दिखाई देता है 623 यहां पर बाय करने के ऑर्डर हैं और 432 सेल करने के ऑर्डर हैं। जबकि इस जगह पर 65,000 सेल करने के ऑर्डर हैं और 65,000 ही बाय करने के भी आर्डर हैं। यहां पर थोड़ा बहुत हमें ऑर्डर्स में डिफरेंस देखने को मिल रहा है। इसके अलावा जो सबसे ज्यादा डार्क कलर आपको यहां पर दिखाई देता है बेसिकली ब्लैक कलर आपको दिखाई दे रहा है वो सबसे ज्यादा ऑर्डर्स होते हैं। यानी 1,12,000 यहां पर बाय करने के ऑर्डर्स हैं। 98,000 यहां पर सेल करने के ऑर्डर्स हैं। तो यहां पर हमें ऑर्डर्स तो पता चल रहे हैं और डार्क कलर है मतलब ज्यादा ऑर्डर्स हैं। लाइट कलर है मतलब कम ऑर्डर्स हैं। इसके अलावा आप यहां पर देखिए यहां पर एक और चीज हमें दिखाई देती है और वो हर कैंडल के नीचे होती है जिसको हम बोलते हैं डेल्टा। अब डेल्टा क्या होता है? वो समझने से पहले नीचे देखिए। यहां पर टोटल भी लिखा हुआ है। तो टोटल का मतलब है कि इस कैंडल में टोटल कितने ऑर्डर्स हैं? चाहे वो बाय के ऑर्डर्स हो, सेल के ऑर्डर्स हो। आपको बाय के ऑर्डर्स इस साइड दिखाई दे रहे हैं। सेल के ऑर्डर्स इस साइड दिखाई दे रहे हैं। और टोटल ऑर्डर्स यहां पे दिखाई दे रहे हैं। और इसके बाद अब बात करते हैं डेल्टा की ये डेल्टा आखिर होता क्या है? तो डेल्टा हमें बताता है बाय ऑर्डर्स और सेल ऑर्डर्स के बीच का डिफरेंस। [संगीत] यानी अगर मान लो मार्केट में 100 बाय करने के ऑर्डर्स हैं और 90 सेल करने के ऑर्डर्स हैं। तो यह जो डेल्टा होगा यह होगा 10। जबकि अगर मान लो आपको दिखाई देता है मार्केट में 100 बाय करने के ऑर्डर हैं लेकिन 110 जो है वो सेल करने के ऑर्डर हैं। तो ये जो डेल्टा आपको दिखाई देगा ये होगा -10 यानी मैथमेटिक्स के हिसाब से डेल्टा का अगर फार्मूला देखें तो वो है बाय ऑर्डर्स माइनस सेल ऑर्डर्स। तो अभी ये नंबर पॉजिटिव है। ग्रीन है। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब यहां पर बाय ऑर्डर्स ज्यादा हैं। ऐसे ही यहां पर भी आप देख सकते हैं इस कैंडल में बाय ऑर्डर्स ज्यादा थे। इस कैंडल में भी बाय ऑर्डर्स ज्यादा थे क्योंकि डेल्टा पॉजिटिव था, ग्रीन था। यहां पर भी बाय ऑर्डर्स ज्यादा थे। लेकिन यहां पर आप देख सकते हैं कि बाय ऑर्डर्स कम और सेल ऑर्डर्स ज्यादा थे। क्योंकि हमें - 29,000 का यहां पर डेल्टा देखने को मिल रहा है। मतलब यहां पर सेल ऑर्डर्स ज्यादा हैं। अब इससे आप एकदम से कंक्लूजन में मत पहुंच जाना कि सेल ऑर्डर्स ज्यादा है मतलब प्राइस गिरेगी। बाय ऑर्डर ज्यादा है मतलब प्राइस बढ़ेगी। यह तो हमारे हाथ में गोल्ड माइन लग गई। यह ऐसे काम नहीं करता है। इसको हम और दूसरे तरीके से यूज कर सकते हैं। क्योंकि मैंने आपको एक चीज बताई थी ना लिमिट ऑर्डर तो हो सकता है कि उस जगह पर लिमिट ऑर्डर्स ज्यादा हो। तो वो ऑर्डर्स जरूरी नहीं है कि एग्जीक्यूट होंगे। वो ऑर्डर्स पर मार्केट में लगे हुए हैं। जिससे आप कंफ्यूज हो के समझोगे कि भाई यहां पे तो ज्यादा ऑर्डर्स हैं। हो सकता है उसमें से 500 जो ऑर्डर्स हो यहां पर जो हमें दिखाई दे रहा है 19,000 का डेल्टा इसमें जो 500 ऑर्डर्स हो वो लिमिट ऑर्डर हो। तो ऐसे में तो हो सकता है ना कि वह एक्चुअल में नेगेटिव है लेकिन हमें पॉजिटिव दिखाई दे रहा है क्योंकि वो ऑर्डर्स अभी एग्जीक्यूट नहीं होने वाले हैं। इसलिए हमें एकदम से कंक्लूजन पे नहीं पहुंचना है। तो अब हम इसका यूज़ करेंगे कैसे? चलिए ये समझते हैं। तो सबसे पहला आप यूज़ कर सकते हैं ऑर्डर फ्लो का मार्केट में रिवर्सल पता करने के लिए। लेकिन वो हमें पता कैसे चलेगा? तो इसके लिए हमें देखना होगा डेल्टा। अगर आपको कभी दिखाई देता है कि भाई प्राइस तो बढ़ रही है लेकिन डेल्टा ना वीक होता हुआ जा रहा है। तो अगर प्राइस बढ़ रही है और डेल्टा वीक हो रहा है तो इसका मतलब है कि यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस होंगे। जैसे यहां पर आप एक एग्जांपल देख सकते हैं कि यहां पर 3400 का पॉजिटिव डेल्टा था। बट उसके बाद जो डेल्टा है वो 67000 पे आ गया। जबकि प्राइस बढ़ी है। उसके बाद डेल्टा जो है वो -241000 पे आ गया। जबकि इसमें भी प्राइस बहुत ज्यादा नहीं गिरी थी। यानी एक तरह से हमें क्या देखने को मिला कि भाई जो डेल्टा है वो कमजोर पड़ रहा है। पहले 3400 से सीधा 67000 फिर सीधा - 241000 जबकि इस टाइम फ्रेम में प्राइस बढ़ रही है। तो प्राइस तो बढ़ रही है लेकिन डेल्टा कमजोर पड़ रहा है। तो इसका मतलब होता है कि यहां पर प्राइस के गिरने के चांसेस होते हैं। ये हमें एक रिवर्सल बताता है। अब मैं यह नहीं कह रहा हूं कि भाई सीधा जाके आपने यह देखा और वहां पे शॉर्ट कर दिया। आप साथ में अपना प्राइस एक्शन लगाइए। आप साथ में अपने स्मार्ट मनी कांसेप्ट का यूज़ कीजिए। एसपीजी का यूज कीजिए और उसके साथ में आपको यह देखने को मिल रहा है तो फिर यह एक गेम चेंजर बन सकता है। तो अगर आपने यह नोटिस कर लिया होता तो आप देखेंगे कि अगली ही कैंडल में जो प्राइस है वो बहुत ज्यादा गिरी है और यहां पर जो डेल्टा था वो -2.19 मिलियन का था। तो इस जगह पर अगर आपने एंट्री ली होती तो यहां पर आप देख सकते हैं कि प्राइस अच्छी खासी गिरी थी। और एक बार आपने ऑर्डर फ्लो देख लिया तो उसके बाद जरूरी नहीं है कि आप सेम कैंडल लगा के रखें। आप उस जगह पे क्या कर सकते हैं? आप नॉर्मल अपनी कैंडल्स भी लगा सकते हैं। [संगीत] लेकिन यूज़ कैसे करना है वो आपको समझ आ गया। तो अब चलिए देखते हैं कि दूसरा आप अगर रिवर्सल पता करना चाहते हैं तो वो कैसे करेंगे। दूसरा अगर मान लो आपको कभी दिखाई देता है कि भाई प्राइस जो है वो तो लगातार गिरती हुई चली जा रही है। लेकिन जो डेल्टा है वो स्ट्रांग होता हुआ जा रहा है। मतलब पहले डेल्टा मान लो बहुत ज्यादा नेगेटिव था। फिर थोड़ा कम नेगेटिव हुआ फिर पॉजिटिव आने लग गया। फिर ज्यादा पॉजिटिव होने लग गया। जबकि प्राइस इसमें गिर रही थी। तो यहां पर हमें यह समझ आता है कि इस टाइम पर जो बाय ऑर्डर्स हैं वो बढ़ रहे हैं। यानी इसके बाद प्राइस के बढ़ने के चांसेस होते हैं। लेकिन अगेन इसको भी अगर आप आईसीटी कांसेप्ट्स के साथ या फिर आप प्राइस एक्शन के साथ मिला के देखेंगे तो यह ज्यादा बेटर रहेगा। अब इसके बाद जो नेक्स्ट कांसेप्ट आपने समझना है वो है एब्सॉर्प्शन वर्सेस एग्जॉर्प्शन का। अब्सॉर्प्शन क्या होता है? सबसे पहले समझते हैं। मान लो जो बायरर्स हैं वो लगातार मार्केट ऑर्डर में बाय कर रहे हैं। लेकिन उस जगह पर कोई बड़ा लिमिट ऑर्डर लग रखा है जो कि एक सेल करने का ऑर्डर है। तो अब जो भी बयरर्स ऑर्डर लेके आ रहे हैं वो सारे ऑर्डर्स तो यहां पर अब्सॉर्ब हो जा रहे हैं ना। मतलब एक तरह से इमंबैलेंस तो क्रिएट हो ही नहीं रहा है। तो इस वजह से यहां पर प्राइस नहीं बढ़ पा रही है। तो इस जगह पर हम कह सकते हैं कि यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस हैं। रिवर्सल के चांसेस हैं। क्योंकि जो भी ऑर्डर्स आए हैं वो अब्सॉर्ब हो गए हैं। तो अब जो सेल ऑर्डर्स आएंगे वो तो प्राइस को गिरा ही देंगे ना। तो एक तरह से यहां पर बयरिश रिवर्सल आने के जो चांसेस होते हैं वह बढ़ जाते हैं। इसका उल्टा अगर आपको कभी दिखाई देता है कि लगातार जो सेलर्स हैं वह मार्केट ऑर्डर में सेल कर रहे हैं। लेकिन कोई बड़ा बाय करने का लिमिट ऑर्डर वहां पे लगा हुआ है तो वो जितने भी सेल करने के ऑर्डर्स लेकर आ रहे हैं वो सारे ऑर्डर्स एग्जीक्यूट हो जा रहे हैं। जिसकी वजह से प्राइस नहीं गिर पा रही है। तो ऐसे में प्राइस के अब बढ़ने के चांसेस होते हैं। यानी बुलिश रिवर्सल यहां से आ सकता है। अब ये हमें चार्ट पे कैसे दिखाई देगा? तो अगर मान लो आपको दिखाई देता है कि वॉल्यूम बहुत ज्यादा बढ़ रखा है। डेल्टा भी बहुत ज्यादा पॉजिटिव है या फिर बहुत ज्यादा नेगेटिव है लेकिन प्राइस में कोई खास मूव नहीं आ रहा है। तो अगर डेल्टा ज्यादा है लेकिन प्राइस में मूव नहीं आ रहा है तो इसका मतलब वहां पर कोई ना कोई जो लिमिट ऑर्डर है उसकी एक वॉल बन रखी है जो कि सारे ऑर्डर्स को अब्सॉर्ब कर रही है। तो ऐसे में क्या होता है? हमें छोटी कैंडल दिखाई देती है या फिर लंबी विक वाली कैंडल दिखाई देती है क्योंकि जैसे ही सेल करने का ऑर्डर आया जो बाय करने वाले लिमिट ऑर्डर्स की एक बड़ी सी वॉल थी या बहुत बड़ा ऑर्डर था उस सबको अब्सॉर्ब कर लेता है तो प्राइस नीचे आती है फिर से एकदम से ऊपर बढ़ जाती है तो विक देखने को मिलती है या छोटी कैंडल्स देखने को मिलती हैं। ऐसा ही एक सिमिलर कांसेप्ट है एग्जॉशन। अगर आपको कभी दिखाई देता है कि जो नए बाय ऑर्डर्स या नए सेल ऑर्डर्स आ रहे हैं, वह बहुत कम हो चुके हैं या जो एग्रेसिव ऑर्डर्स हैं, वह आना बंद हो चुके हैं, तो इसे एग्जॉशन कहा जाता है। अब बाय एग्जॉशन क्या होगा? अगर मान लो अप ट्रेंड आया है और उसके बाद नए ऑर्डर्स आने कम हो गए हैं तो यह होगा बाय एग्जॉशन और यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस होंगे। और सेल एग्जॉशन क्या होगा? मान लो डाउन ट्रेंड के बाद आपको दिखाई देता है कि नए जो सेल वाले ऑर्डर्स हैं वो आने कम हो चुके हैं। तो इसका मतलब अब सेलर्स एग्जॉस्ट हो चुके हैं और यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे। तो ये चार्ट में तब होगा जब आपको दिखाई देता है कि अप ट्रेंड के बाद मान लो ये एक अपटेंड चला था और अप ट्रेंड के बाद आपको दिखाई देता है कि भाई जो ये वॉल्यूम है वो बहुत कम हो गया है। लेकिन अब क्या है? अब डेल्टा भी कम हो गया है। तो इसका मतलब यहां पर जो बयरर्स हैं वो एग्जॉस्ट हो चुके हैं। प्राइस के गिरने के चांसेस होंगे। अगर आपको दिखाई देता है डाउन ट्रेंड के बाद जो अब वॉल्यूम है वो कम होने लग गया है। साथ ही डेल्टा भी कम होने लग गया है। तो इसका मतलब है कि जो सेलर्स हैं वो अब थक चुके हैं और यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे। तो ये कुछ तरीके हैं जिससे आप ऑर्डर फ्लो का यूज कर सकते हैं। ऑर्डर फ्लो एक बहुत ही बड़ा कांसेप्ट है। इसमें बहुत सारी चीजें आती है। इवन मैं आपको कहूंगा कि ये जो डाटा है ना यह बहुत महंगा भी होता है और यह जो मैं आपको चार्ट दिखा रहा हूं यह चार्ट भी एक प्रीमियम चार्ट है। जिस वजह से यह डाटा आपको यहां पर दिख पा रहा है। अगर आप ट्रेडिंग व्यू का फ्री वर्जन यूज़ करते हैं तब तो यह चार्ट्स आपको देखने को ही नहीं मिलेंगे। और जो बाकी वेबसाइट्स हैं जहां पर यह डाटा दिखता है और ज्यादा एक्यूरेट दिखता है वो भी प्रीमियम में आती हैं। तो अगर आप चाहते हो कि हम ऑर्डर फ्लो के ऊपर एक और वीडियो बनाएं तो कमेंट करके जरूर बताइएगा। अगर आपने डेल्टा एक्सचेंज में अकाउंट ओपन नहीं किया है तो डिस्क्रिप्शन में लिंक दिया है वहां से जरूर खोल लीजिएगा। हमारे लिंक के थ्रू खोल रखा है तो Google फॉर्म को जरूर फिल कर लेना जिससे आपको Telegram एक्सेस और साथ ही अरा AI का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन मिलता है। ऐसी ही वीडियोस देखने के लिए हमें सब्सक्राइब जरूर कीजिएगा और अगर आप बिल्कुल बेसिक टू एडवांस ट्रेडिंग सीखना चाहते हैं तो आप यहां पर क्लिक करके यह पूरी प्लेलिस्ट को देख सकते हैं। धन्यवाद।

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