Options Trading में Profit कैसे? Nitin Murarka Podcast | 5 Golden Rules, Stock Market, PCR — backtested on Indian market data | FakeTrades
FakeTrades.in
← all strategies

Options Trading में Profit कैसे? Nitin Murarka Podcast | 5 Golden Rules, Stock Market, PCR

The Arvindams · watch on YouTube ↗
Analysed 20 Aug 2026, 05:58 PM IST
⏳ Backtest pending — a data-backed verdict will be attached.

Verdict

Not auto-backtested — honestly, we can't. AI-decoded: PCR-based intraday NIFTY option buying after 11:00 AM with VWAP entry, 1:2 risk-reward on weekly options.

We give real option backtests only for fixed-entry option-selling structures (weekly credit/ratio spreads) priced on real cached NIFTY premiums. This one is directional option BUYING (needs intraday/tick option data), which needs intraday/tick option data and a chart-signal engine we don't have — so we show no number rather than a misleading proxy. Flagged for a hand-built review.

See strategies that scored 4★+ →
Know someone trading this?
Full transcript (10029 words)
ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है आसान भाषा में? [संगीत] बेसिकली ऑप्शंस एक तरीके का लिवरेज प्रोडक्ट है जिसे आप मार्केट की डायरेक्शन को फॉरकास्ट करके एक अच्छा रिटर्न बना सकते हैं। टीबी की जो एक रिपोर्ट है जिसके अनुसार कि 93% लोग जो है लॉस में जाते हैं। हां। वो क्या वजह होती है? डिसिप्लिन की कमी, रिस्क मैनेजमेंट, ओवरनाइट कैरी, ओवर लिवरेजिंग बट 24 महीने तक लगातार प्रॉफिट वो स्ट्रेटजी [संगीत] क्या है? पांच स्टेप्स मैं आपको बताऊंगा जिसको आप फॉलो करके प्रॉफ़िट बना सकते हैं। बहुत सारे लोगों को लग रहा है कि मार्केट ऊपर जाएगी तो मार्केट उस दिन भी हो सकता है कि ज्यादा रिस्क ले तो ज्यादा गेन भी हो जाए। नहीं वो वो नहीं सोचना है। हमें कंसिस्टेंसी पे ध्यान देना है। ऑप्शन ट्रेडिंग को जुआ भी बोलते हैं लोग। जुआ में आप बैक टेस्ट नहीं कर सकते। जुआ में आपको हिस्टोरिकल डाटा नहीं होता। जुआ में आपको स्ट्रेटजीज़ नहीं होती। 10,000 से रोज 5,000 कमाया जा सकता है। 10,000 से जीरो हो सकता है। बट रोज [संगीत] 9:15 पे ट्रेड करना सबसे सही होता है। नहीं वो बहुत रिस्की होता है क्योंकि वो मार्केट में बड़े प्लेयर्स रिटेल ट्रेडर्स का पैसा खा जाते हैं। जो स्मार्ट प्लेयर है जिसको ज्यादा नॉलेज है वो पैसा कमा रहा है। जो टूल्स यूज़ नहीं कर रहे हैं वो पैसा गवा रहा है। क्या कोई स्ट्रेटजी 90% प्लस एक्यूरेसी दे सकती है? 90% प्लस एक्यूरेसी सबसे खतरनाक ट्रेडिंग मिस्टेक सबसे खतरनाक स्टॉप लॉस नहीं लगाना। एक चीज जिसे हर ट्रेडर को छोड़ देनी चाहिए। ओवर लिवरेजिंग ऑप्शंस में ओवर लिवरेजिंग आप बिल्कुल छोड़ दीजिए। ओवरेजिंग से क्या होगी? [संगीत] हर दिन ट्रेड करना जरूरी है। बिल्कुल जरूरी नहीं है। 24 महीने से लगातार फायदे वाली स्ट्रेटजी। तो क्या ऑप्शन ट्रेडिंग के जरिए सही स्ट्रेटजी और डिसिप्लिन से लगातार फायदा कमाया जा सकता है? हमारे साथ हैं नितिन मुरारकाकर जी जो पिछले 20 सालों से पिछले 20 सालों से ऑप्शन ट्रेडिंग में डाटा ड्रिवन और रूल बेस स्ट्रेटजी पर काम कर रहे हैं। और आपको बता दें कि इसी स्ट्रेटजी से इनका फाइव गोल्डन रूल भी निकला है। ऑप्शन ट्रेडिंग का फाइव गोल्डन रूल वो भी आपको बताएंगे। तो आज के पॉडकास्ट में हम बेसिक से शुरुआत करेंगे और उस स्ट्रेटजी तक पहुंचेंगे जहां 2 साल 24 महीने तक लगातार प्रॉफिट बुक करने का एग्जांपल भी हमारे पास है। तो ज्यादा देर नहीं करते हैं। नितिन जी हमारे साथ हैं। सर बहुत-बहुत स्वागत है आपका। थैंक यू अरविंद जी और बहुत-बहुत शुक्रिया जो आपने आज मुझे अपने चैनल पे इनवाइट किया। थैंक यू वेरी मच। सर ये 2 साल स्ट्रेटजी वाली जो आपकी चीजें हैं वो जानना तो बहुत ही जरूरी है लेकिन उससे पहले मैं चाहूंगा कि मेरे वो दर्शक जो नए हैं पैसा तो कमाना चाहते हैं शेयर खरीदते बेचते हैं लेकिन ऑप्शन ट्रेडिंग को उतनी तरह से अच्छी तरीके से नहीं जानते हैं। तो जरा आप बताइए कि ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है आसान भाषा में? देखिए ऑप्शन बेसिकली एक तरीके से लिवरेज प्रोडक्ट है। जैसे मान लीजिए जब आप शेयर में इन्वेस्टमेंट करते हैं तो आप उतने ही स्टॉक्स या शेयर ले सकते हैं जितना आपके पास कैपिटल है। बट ऑप्शंस में क्या है कि आपके पास मान लीजिए ₹10,000 का कैपिटल है तो उसके हिसाब से आपको एक ऑप्शंस मिलती है कि मान लीजिए निफ्टी ऊपर जाएगी तो आप बेट करते हैं कि निफ्टी ऊपर जाएगी तो वहां पे एक लिवरेज प्रोडक्ट हो गया और आप अपसाइड डाउन साइड दोनों प्ले कर सकते हैं ऑप्शन के थ्रू। अब जैसे मान लीजिए स्टॉक्स में क्या होता है? इन्वेस्टमेंट हम करते हैं तो मार्केट ऊपर जाती है तो हमें प्रॉफिट मिलता है। बट नीचे जाने पे नुकसान होने लगता है। बट ऑप्शंस में क्या है? आप कॉल ऑप्शन लेते हैं। अगर आपको लग रहा है मार्केट ऊपर जाएगी और आप पुट ऑप्शन लेते हैं जब आप लगता है मार्केट नीचे जाएगी। तो व्यू पे डिपेंड करता है। अगर व्यू बुलिश है तो कॉल से आप प्ले कर सकते हैं। व्यू बयरिश है तो पुट ऑप्शन से प्ले कर सकते हैं। ऑप्शन का सबसे बड़ा फायदा है कि बहुत कम कैपिटल में आप बड़ी पोजीशंस बना लेते हैं। तो इसके दोनों फायदे हैं। फायदे भी है नुकसान भी है। अगर आप कम कैपिटल में बड़ी पोजीशंस बनाएंगे सही होंगे तो आपको प्रॉफिट बड़ा मिलेगा। परसेंटेज रिटर्न ऑन कैपिटल। अगर आप गलत होंगे तो उसमें नुकसान भी होगा। तो बेसिकली ऑप्शंस एक तरीके का लिवरेज प्रोडक्ट है जिसे आप मार्केट की डायरेक्शन को फॉरकास्ट करके एक अच्छा रिटर्न बना सकते हैं। ऑप्शन बाइंग भी है, ऑप्शन सेलिंग भी सेलिंग भी है। इनमें किस तरह से अंतर क्या है? और आसान में अगर समझ ऑप्शन बाइंग में क्या है? कैपिटल कम लगती है। जब मान लीजिए जैसे मुझे ऑप्शन बाइंग करनी है तो मैं 10,000 के कैपिटल से भी ऑप्शन बाइंग कर सकता हूं। बट जो ऑप्शन सेलिंग होती है उसमें कम से कम आपको 1.5 लाख की कैपिटल चाहिए चाहिए। अगर आप इंडेक्स ऑप्शंस कर रहे हैं तो क्योंकि ऑप्शन सेलिंग में रिस्क भी होता है। ऑप्शन बयर के लिए क्या है? आपका रिस्क बहुत लिमिटेड होता है। क्योंकि जितना आपने प्रीमियम दिया उतना ही आपके लिए रिस्क होता है। तो मेजॉरिटी ऑफ़ द जो रिटेल प्लेयर हैं वो ऑप्शन बाइंग प्रेफर करते हैं क्योंकि वहां पे क्या है? मार्जिन भी कम लगती है और रिस्क भी उनको लिमिटेड लगता है। बट ऑप्शन सेलिंग में क्या है? थोड़ी सी एक्सपर्टीज ज्यादा चाहिए होती है। कैपिटल भी ज्यादा चाहिए होती है। ऑप्शन बाइंग में आप बेसिकली एक राइट खरीदते हो और ऑप्शन सेलिंग में आप एक राइट बेचते हैं। जैसे इंश्योरेंस कंपनी होती है। तो हम लोग क्या है? हम लोग इंश्योरेंस अगर खरीद रहे हैं तो वी आर अ हम लोग बायर हैं। हम लोग ऑप्शन बयर हो गए और इंश्योरेंस कंपनी आपको ऑप्शन दे रही है इंश्योरेंस तो वो एक तरीके से ऑप्शन सेलर्स हो गए। तो ये बेसिकली डिफरेंस है ऑप्शन बायर और ऑप्शन सेलर में। सर एक चीज़ और समझना चाहूंगा कि सेबी की जो एक रिपोर्ट है जिसके अनुसार ये रही है कि 93% लोग जो है जो इंडिविजुअल ट्रेडर्स हैं वो लॉस में जाते हैं। हां। वो क्या वजह होती है? क्यों ऐसा होता है? देखिए मैंने जो स्टडी किया उसमें मुझे यही मिला कि जो 90 95% ऑप्शन बयर मेनली लॉस करते हैं क्योंकि आपने फर्स्ट क्वेश्चन पूछा बायर और सेलर में क्या डिफरेंस है? तो एक तो रिटेल प्लेयर मेजॉरिटी प्लेयर्स बयरर्स हैं। हम और ऑप्शन बाइंग में पूरा का पूरा गेम जो है वो टाइमिंग का है और डाटा और डायरेक्शन प्रेडिक्शन का है। यानी अगर आप कॉल या पुट खरीद रहे हैं तो एक राइट टाइम पे खरीदना। दूसरा डायरेक्शन को फॉरकास्ट कर लेना। तो उसके लिए बहुत सारे जो ट्रेडर्स ट्रेड करते हैं उनके पास टूल्स वगैरह नहीं होते हैं। वो रैंडम या एक इमोशन पे ट्रेड करते हैं। तो एक तो वो बहुत बड़ा रीज़न मुझे मिला। दूसरा पोजीशन मैनेजमेंट, रिस्क मैनेजमेंट जिसे हम स्टॉप लॉस बोलते हैं। तो कई सारे ट्रेडर्स जो हैं वो रिस्क रिस्क मैनेजमेंट प्रॉपर नहीं करते हैं। अब मान लीजिए मेरे पास ₹10,000 की कैपिटल है। मैंने पूरे के पूरे 10,000 का ही ऑप्शन प्रीमियम खरीद लिया और किसी कारण से लॉस हो गया तो वो पूरा कैपिटल खत्म हो जाती है। तो ऑप्शन बाइंग में डिसिप्लिन, रिस्क मैनेजमेंट थोड़ा आपको टेक्निकल्स का नॉलेज होना चाहिए। थोड़ा आपको डाटा ड्रिवन अप्रोच रखनी चाहिए। डिसिप्लिन होना चाहिए। तो कुल मिला के नॉलेज की कमी के कारण ही मुझे ऐसा लगता है कि बहुत सारे ट्रेडर्स लॉस करते हैं। बट ऑप्शन ऐसा प्रोडक्ट है जिसको अगर आप सीख करके करें काम समझ करके काम करें तो इस इंस्ट्रूमेंट से बहुत अच्छा प्रॉफिट बनाया जा सकता है। मतलब मुझे सेबी का डाटा ये जरूर बोलता है कि 93% लूजर्स हैं। बट मुझे ये समझ में नहीं आता है कि क्यों लूज़र्स हैं? क्योंकि पिछले 24 महीने से मैं जिस मेथड को फॉलो कर रहा हूं, उस मेथड से कम से कम आप लॉस नहीं करोगे। हम प्रॉफ़िट आप बनाओ ना बनाओ वह डिफरेंट मैटर है क्योंकि उसमें बहुत सारे रूल्स और डिसिप्लिन फॉलो करने पड़ेंगे। बट यह पक्की बात है कि आप उसमें लॉस नहीं करेंगे। तो मुझे तो यह लगता है कि 93% ऑप्शन ट्रेडर्स को प्रॉफिटेबल होना चाहिए रेदर कि वो जो लूजर्स हैं तो हम लोग आगे बातचीत करेंगे कि क्या रूल्स हैं जिसको आप फॉलो करके प्रॉफिटेबल हो सकते हैं। बट बेसिकली डिसिप्लिन की कमी, रिस्क मैनेजमेंट, ओवरनाइट कैरी, ओवर लिवरेजिंग इन सबके कारण ही मुझे ऐसा लगता है कि लॉस कर रहे हैं। बट प्रॉफिट बना सकते हैं। ये पक्की बात है। तो अब इसी पे आते हैं सीधे-सीधे। ये बड़ा ही अट्रैक्टिव है। कि मतलब 24 महीने तक लगातार प्रॉफिट वो स्ट्रेटजी क्या है आपकी? हां। जरा वही उसी पे चर्चा कीजिए बताते हैं कि आखिर वो कैसे और आप पे ये कैसे काम किया क्या कहीं से इसकी लैकिंग भी है लगातार देखिए नहीं देखिए जैसे मैं क्या है पिछले 20 सालों से ऑप्शंस कर रहा हूं तो मैंने कई सारे स्ट्रेटजी बैक टेस्ट करी ऑप्शन सेलिंग भी बहुत करी बट ऑप्शन सेलिंग में क्या है रिटर्न आपको लिमिटेड बनते हैं जब आप ऑप्शन सेलिंग करेंगे तो आपको महीने का 1 1/2% 2% रिटर्न ऐसे बनता है यानी साल का 22 24% रिटर्न आ गया उसमें किसी महीने नुकसान भी हो गया तो रिटर्न आप मान लीजिए 17 18% तक बना सकते हैं। बट ऑप्शन बाइंग में क्या है? आप रिटर्न हो सकता है 30-40% तक का भी साल का बन सकता है क्योंकि ऑप्शन बाइंग में अगर आप सही डायरेक्शन पे ट्रेड कर रहे हैं तो आपको प्रॉफिट अच्छा मिलता है। तो मेरा ऑप्शन सेलिंग से ऑप्शन बाइंग की तरफ शिफ्ट होने का मेन रीज़न हो गया कि एक तो परसेंटेज रिटर्न ज्यादा बन सकता है और दूसरा कैपिटल पे लिवरेज आपको ज्यादा मिलती है। यानी आप रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड ज्यादा बना सकते हैं। अब कई सारे इंडिकेटर्स पे हम लोगों ने काम किया। बट बहुत सिंपल चारप ऐसे सिंपल सिंपल चीजें मिली जिसको फॉलो करके हम लोग ऑप्शन बाइंग में प्रॉफिट बना सकते हैं। अच्छा ये पिछले जैसे मैं 20 सालों से ऑप्शंस कर रहा हूं तो मुझे पिछले सात आठ सालों में ज्यादा अच्छी एक्यूरेसी मिली। अच्छा जब से मैं कुछ पीसीआर डाटा और वीवप के जो डेटा पॉइंट्स को मैंने एक्सप्लोर किया बैक टेस्ट किया उसको फॉलो करने लगे। तो पांच स्टेप्स मैं आपको बताऊंगा जिसको आप फॉलो करके इंट्राडे में प्रॉफिट बना सकते हैं। इंट्राडे में एक होता है कैरी फॉरवर्ड करना यानी आज पोजीशन लिया आप कैरी कर रहे हैं। तो कैरी वाले में रिस्की होता है। बट इंट्राडे में जब से वीकली ऑप्शंस आई मतलब निफ्टी की वीकली ऑप्शंस ससेक्स की आजकल वीकली ऑप्शंस ट्रेड होती है। वीकली का मतलब इंट्राडे में 5 दिन में वो एक्सपायर हो जाते हैं कॉन्ट्रैक्ट्स। तो उसमें मोमेंटम आपको बहुत अच्छा मिल जाता है और उसमें रिटर्न्स भी जल्दी मिल जाते हैं। तो वीकली ऑप्शंस है ये। हम तो इसमें क्या-क्या स्टेप्स हैं? स्टेप नंबर वन हम उस प्रोसेस को सीखते हैं। अभी सिंपल फाइव स्टेप प्रोसेस को समझते हैं कि कैसे हम लोग बहुत सिंपल है और पिछले जो इतने सालों से प्रॉफिटेबल रहे हैं उसमें ये बेसिक फाइव स्टेप्स हमने प्रोसेस फॉलो किया है। रूल नंबर वन हम इंट्राडे में ट्रेडिंग आपको 11 11:30 के बाद करनी है। अब इसके पीछे लॉजिक ये है कि मार्केट सवा5 बजे खुलती है तो सुबह की जो ओपनिंग होती है वो आप माने इमोशनल ओपनिंग होगी। क्योंकि सुबह की जो ओपनिंग होगी उसमें रात में nसdc में क्या हुआ? डॉज्स में क्या हुआ? जो न्यूज़ में न्यूज़ फ्लो आई, ट्रंप साहब ने क्या बोले? उन सबका इंपैक्ट होता है ओपनिंग में। तो ओपनिंग हमेशा वोलेटाइल होगी। और हम लोग डेटा ड्रिवन ट्रेडिंग करते हैं तो सवा5 बजे से लेके 11:30 बजे तक डेटा को ऑब्जर्व करते हैं कि क्या मार्केट में डाटा बन रहा है। और वो क्या डाटा पॉइंट है मैं आगे डिस्कस करूंगा। बट पॉइंट नंबर यह है वन यह है कि सवा5 से लेके 10:30 11 तक कम से कम 11 तक आपको ऑब्जर्व करना है कि मार्केट में क्या हो रहा है। उसमें प्राइस एक्शन और डेटा एक्शन दो ये ऑब्जर्व करना है। प्राइस एक्शन में क्या देखना है? प्राइस एक्शन में सिंपल आपको ये देखना है कि जहां पे मार्केट खुली ओपनिंग हम 11:00 बजे उस ओपनिंग से ऊपर चल रही है प्राइस या उस ओपनिंग से नीचे चल रही है। मार्केट खुलती है सवा5 बजे मान लीजिए मार्केट खुली आपको 24500 के लेवल पे आपने 11:00 बजे देखा कि 24500 के लेवल पे खुली थी वहां से 25 पॉइंट ऊपर चल रही है। 24525 चल रही है। यानी ओपनिंग से ऊपर है तो आप इसे सिंपल समझो कि पॉजिटिव है। अच्छा और ओपनिंग से नीचे है तो आप सिंपल समझो यह नेगेटिव है। मैं सिंपलीफाई कर रहा हूं। बेसिकली और देखते हैं हम लोग बट मैं सिंपलीफाई कर रहा हूं ताकि एक जो लेमनैन है वो कैसे देख सकता है। ओपनिंग से ऊपर है तो पॉजिटिव ओपनिंग से नीचे है तो नेगेटिव। एक ये प्राइस एक्शन। इसके बाद अगर आप प्राइस एक्शन देखते हैं तो आपको यह देख सकते हैं कि हायर हाई बन रहे हैं या लोअर लो बन रहे हैं। यानी कि हर 510 मिनट में मार्केट नया हाई बना रहा है या नया लो बना रहा है उसे हम टेक्निकल एनालिसिस के लैंग्वेज में हायर हाई या लोअर लोस बोलते हैं। अगर आपको वो देखना नहीं आता है तो सिंपल आप यह देख लीजिए कि ओपनिंग से ऊपर है या नीचे है। ये हो गया प्राइस एक्शन। सेकंड हम सेकंड डाटा देखते हैं कि पुट कॉल रेशियो पीसीआर का डाटा क्या बोल रहा है? अब पीसीआर क्या होता है? मार्केट में कॉल एंड पुट जैसे आपने पूछा था कि कॉल एंड पुट दो इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं। इसको थोड़ा बता भी दीजिए। हां कॉल होती है तेजी खेलने के लिए। कॉल अगर हम खरीद रहे हैं तो हमारा व्यू है कि मार्केट ऊपर जाएगी। और अगर हम पुट खरीद रहे हैं तो हमारा व्यू है कि मार्केट नीचे जाएगी। अब मार्केट में दो तरीके के ट्रेडर हैं। कि किसी ने कॉल खरीदा होगा, किसी ने पुट खरीदा होगा। तो जो मार्केट की मूवमेंट होती है वो इमंबैलेंस पे होती है डिमांड एंड सप्लाई पे। तो जब हम लोगों ने बैक टेस्ट किया कि ये डिमांड एंड सप्लाई कैसे काम करती है तो ये फाइंड आउट किया कि अगर बहुत सारे लोग कॉल खरीद लेते हैं हम तो मार्केट क्या होना चाहिए? अगर बहुत सारे लोग तेजी खेल लिए कॉल खरीद लिए तो मार्केट नॉर्मली रिवर्स चली जाती है। यानी अगर बहुत सारे लोगों को लग रहा है कि मार्केट ऊपर जाएगी तो मार्केट उस दिन नीचे चली जाती है। ऐसा बैक टेस्टिंग डाटा से हमें मिला। यह डाटा इससे भी प्रूफ होता है कि सेबी का डाटा ये बोलता है कि 90% ऑप्शन बायर लूजर्स हैं। तो अगर 90% लूजर हैं इसका मतलब 90% लोग अगर मार्केट में कॉल खरीद रहे हैं तो मोस्ट लाइकली है कि वो कॉल ऑप्शन में उनको पैसा नहीं मिलेगा क्योंकि 90% लोग एक ही तरफ बैठ गए हैं। यानी मार्केट में कॉन्ट्रा ओपिनियन पे मार्केट मूव करती है। यानी कि कॉल एंड पुट दो इंस्ट्रूमेंट हो गए। आपको यह देखना है कि चेंज इन ओपन इंटरेस्ट यानी मार्केट में जो पोजीशंस क्रिएट हो रही है उसे हम बोलते हैं चेंज इन ओपन इंटरेस्ट। अब चेंज इन ओपन इंटरेस्ट का जिधर ज्यादा बन रही है उससे हम लोग पीसीआर निकालते हैं। जैसे कॉल में सपोज़ कीजिए 1 लाख शेयर का ओपन इंटरेस्ट बना कॉल में और पुट में बना 2 लाख शेयर का। तो पुट कॉल रेशियो जब मुझे निकालना होगा पीसीआर जिसे हम बोलते हैं पीसीआर। तो पीसीआर रेशियो मतलब पुट डिवाइडेड बाय कॉल। ठीक है? तो पुट में मान लीजिए 2 लाख शेयर की पोजीशन बनी और कॉल में बनी 1 लाख शेयर की पोजीशंस तो पीसीआर दो पीसीआर दो आ गया मान लीजिए पुट में बनी 4 लाख हम और कॉल में बनी 1 लाख हम चार हो गया तो चार हो गया अगर पीसीआर ग्रेटर देन वन है हम तो इसका मतलब मार्केट के चांसेस ऊपर जाने के ज्यादा है। अच्छा ठीक है। यह हम लोगों ने बैक टेस्ट किया सिंपल। तो आप सिंपल आज यही समझो मेरे 20 साल के एक्सपीरियंस से कि पीसीआर रेशियो ग्रेटर दैन वन है। ग्रेटर दैन वन कब होगा? जब पुट ज्यादा होगी कॉल से हम तो ग्रेटर दैन वन होगा। तो ग्रेटर दैन वन होगा। तो मोस्ट लाइकली आउट ऑफ 10 टाइम्स 70 70% ऑफ़ द टाइम मार्केट ऊपर की तरफ चली जाएगी। अगर पीसीआर ग्रेटर दैन वन है तो। अब ग्रेटर देन वन का मतलब 1.1 भी हो सकता है। 1.2 भी हो सकता है। यहां पे लर्निंग यह है कि वन से ऊपर है। बट मार्केट खुलने के बाद क्या वो 1.1 से 1.2 हो रही है। 1.3 हो रही है, 1.4 हो रही है, 1.5 हो रही है। यानी कि वन से ऊपर तो है, बट जैसे-जैसे मार्केट चल रही है, अगर वो रेश्यो धीरे-धीरे इनक्रीस हो रहा है, इसका मतलब मार्केट में ऊपर की तरफ स्ट्रेंथ आएगी। अगर वो रेशियो से वन है और धीरे-धीरे डिक्रीज हो रहा है। 09 हो रहा है,85 हो रहा है, 75 हो रहा है। इसका मतलब मार्केट नीचे की तरफ जाएगी और हमें पुट ऑप्शन खरीदना है। नीचे जाएगी तो पुट ऑप्शन खरीदना है। ऊपर जाएगी तो कॉल ऑप्शन खरीदना है। बट उसके लिए क्या डाटा देखना है? उसके लिए हमें पीसीआर रेशियो देखना है। पीसीआर रेशियो यह बनता कैसे है? यह बनता है पुट का चेंज इन ओपन इंटरेस्ट डिवाइडेड बाय कॉल का चेंज इन ओपन इंटरेस्ट जिसे हम बोलते हैं पीसीआर रेशियो। ये डाटा देखना कहां से है? अब सवाल मन में आएगा। तो ये देख सकते हैं आप एनएससी की वेबसाइट में जाकर के ऑप्शन चेन का डाटा वहां पे आता है एनएससी में। वहां पे जाकर के ये डाटा देख सकते हैं। आगे मैं आपको दिखाऊंगा भी कि ये डाटा कैसे देख सकते हैं और इसके बेसिस पे क्या इंटरप्रिटेशन मिलेगा। तो यह दूसरा रूल फर्स्ट रूल 11:30 के बाद ट्रेड करना है। यहां पे यह देखना है कि ओपनिंग से ऊपर है या ओपनिंग से नीचे है। अगर ओपनिंग से ऊपर है और पीसीआर ये जो पीसीआर है इसकी वैल्यू वन से ऊपर है तो मैं क्या करूंगा? कॉल ऑप्शन लूंगा। करेक्ट? अब थर्ड रूल आता है ये सबसे इंपॉर्टेंट है ऑप्शन बाइंग में। मोस्टेंट। मुझे एंट्री कहां पे लेनी है? एंट्री कहां पे लेनी है? क्योंकि ऑप्शंस में टाइम वैल्यू डिक होती है। हर मिनट ऑप्शंस की वैल्यू डिक होती जाती है। तो एंट्री आपको टाइमिंग करना बहुत इंपॉर्टेंट है। वीवप क्या होता है? वीवप वी डब्ल्यू एपी इसे बोलते हैं हम वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस। यानी वॉल्यूम स्टैंड्स V स्टैंड्स फॉर वॉल्यूम। वेटेड स्टैंड्स फॉर वेटेज एवरेज प्राइस। जैसे हम लोगों ने सुना होगा मूविंग एवरेज होती है। उसी तरीके से जो भी वॉल्यूम्स सुबह खुलने के बाद 11:30 तक हुए हैं इनका एक वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस निकलता है। उसमें क्या फायदा इसका क्या है कि मान लीजिए रिटेल ने वॉल्यूम किया, एफआई ने वॉल्यूम किया, म्यूच्यूल फंड्स ने वॉल्यूम किया, प्रोपराइटरी फंड्स ने वॉल्यूम किया तो उन सबकी एक एवरेज मिलती है। यानी मार्केट की फेयर वैल्यू मुझे मिलती है। भाई कोई भी चीज की फेयर वैल्यू होती है। एक सपोज़ एक फ्लैट है। उस फ़्लैट का कोटेशन मान लीजिए मैं मुझे एक फ़्लैट खरीदना है। उस फ़्लैट का एक ब्रोकर ने मुझे कोटेशन दिया ₹2 करोड़ का। बट उसकी मार्केट की एवरेज फेयर वैल्यू ₹1 करोड़ 90 लाख है। अगर मैं ₹2 करोड़ खरीद लूंगा तो एप्रिसिएशन होने में मुझे साल 2 साल वेट करना पड़ेगा। बट अगर मैं फेयर वैल्यू पे लूंगा ₹1 लाख 1 करोड़90 पे तो जिस भाव पे मैं खरीदा उसी भाव से एप्रिसिएशन होने के चांसेस रहेंगे। तो ऑप्शंस में भी क्या है? अगर आप फेयर वैल्यू से दूर खरीदेंगे तो आपको वहां पे नुकसान होने का चांसेस बहुत ज्यादा रहेगा क्योंकि वहां पे टाइम वैल्यू डिके भी होती है। तो ऑप्शन में सबसे इंपॉर्टेंट मोस्टेंट ऑप्शन बाइंग हमेशा आपको वीवप पे करनी चाहिए। अदरवाइज आपको वेट एंड वॉच करना चाहिए और पूरे दिन में वीवप पे एक ना एक बार आएगी। अपने एवरेज पे हमेशा हर चीज की प्राइस आती है और फिर वहां से चलती है। फेयर वैल्यू कैसे यह पता चलता है। फेयर वैल्यू का मतलब पूरा जो वॉल्यूम सुबह से हुआ है ना जिस रेट पे वो वॉल्यूम हो रहा है वो कैलकुलेट करके देता है आपको वीवप। अच्छा। अब वीवप कैसे मिलेगी? हां। वो कैसे मिलेगी? वीवप की एक लाइन आपको किसी भी सॉफ्टवेयर में जैसे मान लो अगर मैं ट्रेडिंग कर रहा हूं तो मैं कोई ना कोई चार्ट्स तो यूज़ करूंगा क्योंकि बिना चार्टिंग के आप ट्रेडिंग कैसे करेंगे? अगर आप कोई ना बिना टूल्स के तो आप ट्रेड नहीं कर सकते। तो कोई भी टूल जिसमें चार्टिंग है, मूविंग एवरेज है, आरएसआई है, बिंगर बैंड है, उसमें आपको वीवप लगाना है। वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस अगर नहीं आपको वहां पे भी नहीं मिलता है तो एनएससी की वेबसाइट में ये फ्री ऑफ कॉस्ट मिलता है। अच्छा वो मैं कैसे मिलेगा मैं आपको दिखाऊंगा। एक और तरीका है। एक और तरीका ये है कि एसएमसी का एक प्रोडक्ट है। एसएमसी का ऑटो ट्रेंडर हम ऑटो ट्रेंडर के अंदर आप सारा डाटा देख सकते हैं। पीसीआर का, ससेक्स का, बैंक निफ्टी का। तो वो फिर वो सब्सक्रिप्शन में आपको जाना पड़ेगा। वो सब्सक्रिप्शन मॉडल है। तो अगर आप ऑर्डर अंडर सब्सक्राइब करेंगे तो वहां पे आपको ये सारा डाटा मिल जाएगा। और जो मैं पीसीआर की बात कर रहा हूं उसकी स्लोप उसका मूवमेंट वो सब सब आप लाइव वहां पर ट्रैक कर सकते हैं। तो ये डेट बट यहां पे इंपॉर्टेंट अंडरस्टैंडिंग समझने की बात ये है कि आपको पीसीआर का डाटा देखना है। वीवप के आसपास एंट्री करनी है और फिर एंट्री करने के बाद आपको 30-40 पॉइंट का टारगेट रखना है। 30 से 40 पॉइंट का टारगेट और स्टॉप लॉस हमें 20 से 25 पॉइंट का रखना है। तो ये तो सिंपल स्टेप्स आपको मैंने थ्योरिटिकली समझाया। कैसे भी ठीक है तो एक तो पहले हम डाटा को समझ लेते हैं कि एनएससी में ये डाटा कैसे देख सकते हैं ठीक है उसके बाद फिर हम चार्ट्स में चल के समझते हैं कि कैसे इसको देखना है अभी देखिए ये मैं आपके सामने मैंने एनएससी इंडिया खोला है और एनएससी में यहां पे देखिए ऑप्शन चेन दिख रहा है ये ऑप्शन चेन का डाटा अब जब आप ऑप्शन चेन पे क्लिक करेंगे तो आपको यह निफ्टी बैंक निफ्टी आप किसी का भी ऑप्शन चेन का डाटा देख सकते हैं। करेक्ट? अब यह जैसे मान लीजिए मार्केट अभी चल रही है 24,000 580 के आसपास चल रही है। ठीक है? ठीक है? तो बेसिकली आपको ये देखिए 24,500 का जो नियरेस्ट स्ट्राइक है, नियर स्ट्राइक क्या आएगी? 24,600 आएगी। 24,600 नियरेस्ट आएगी। राउंड ऑफ अगर हम करेंगे तो और 24,600 की यहां पे आपको स्ट्राइक लगानी है। अब 24,600 में ये एक मेथड मैं सिखा रहा हूं जिसे जैसे मान लीजिए चेंज इन ओपन इंटरेस्ट यहां पे 24,600 और ये 24,600 अब ये कॉल है और इधर आपको पुट दिख रही है। ठीक। कॉल में चेंज इन ओपन इंटरेस्ट कितना दिख रहा है? लॉट्स में यह 41,000 51,000 और पुट में कितना दिख रहा है? 50 50000 अब आप पीसीआर निकालिए पीसीआर पीसीआर पीसीआर का फार्मूला क्या था पुट पुट डिवाइडेड बाय डिवाइडेड बाय कॉल कॉल तो यानी कि 5500 69 69 बाय 41000 हम 0 26 तो रेशियो इज़ ग्रेटर देन वन वन हो गया ठीक है तो यानी हमें कॉल ऑप्शन पे काम करना है ठीक है ठीक है? हमें पुट ऑप्शन पे ट्रेड नहीं करना है। अगर और यहां पे समझने की और सिंपल ऐसे समझें 41,000 लोगों ने कॉल ऑप्शन लिया है और 50,000 लोगों ने पुट ऑप्शन लिया है। ज्यादा वजन किधर है? पुट। पुट की तरफ। तो जिसमें वजन ज्यादा होगा वो चीज नीचे आ जाएगी और जिसमें जो हल्की होगी वो ऊपर चली जाएगी। सिंपल ऐसे समझे। यानी अगर यह पुट कभी-कभी 1 लाख हो जाएगी और यह 400 है तो इधर वजन बहुत ज्यादा है। बहुत तेजी से कॉल ऊपर जाएगी। बट जब वजन में डिफरेंस कम है इसका मतलब मार्केट बैलेंस्ड मार्केट है। ना कॉल ऊपर जाएगी ना पुट ऊपर जाएगी। समझ गए क्या? अगर बैलेंस बहुत फर्क नहीं है। यहां पे सपोज़ कीजिए 41 kg है 41,000 वहां पे 50,000 बहुत ज्यादा डिफरेंस नहीं है तो इसका मतलब मार्केट साइडवेज रहेगी। ना कॉल ऊपर जाएगी ना पुट ऊपर जाएगी। बट कई बार आपको ऐसा देखने को मिलेगा कि वहां पे 1 लाख हो गया और यहां पे 40,000 है तो बहुत तेजी से कॉल ऊपर चली जाएगी। तो इस तरीके से ऑप्शन बाइंग जब आप कर रहे हैं तो आपके लिए यह सिंपलेस्ट डाटा है जो एनएससी की वेबसाइट में जाइए। आप यह देखिए कि उस समय मार्केट क्या चल रही है। अब यह मैंने 24,600 क्यों लिया? क्योंकि अगर आप ऊपर में देखेंगे तो यह मार्केट 24,583 है। इसको मैंने राउंड ऑफ कर दिया। नियरेस्ट राउंड ऑफ। अगर यह राउंड ऑफ में 24,550 आता तो 550 ले लेते। तो 24,600 राउंड ऑफ करके आ गई। अब 24,600 की कॉल और पुट दोनों क्योंकि इधर तेजी वाले हैं कॉल में और उधर मंदी वाले हैं पुट में। अब दोनों को इमंबैलेंस देख लीजिए। जिधर वजन ज्यादा है वो चीज गिर जाएगी और जिधर वजन कम है वो चीज ऊपर चली जाएगी। अब हम लोग ऑप्शन बयर हैं। तो बयर क्या खरीदेगा? जो चीज ऊपर जाएगी। बिल्कुल। ठीक है? तो मैं कॉल ऑप्शन खरीदूंगा यहां पे। तो यह जो मॉडल है इसको जब आप बैक टेस्ट करेंगे या लाइव मार्केट में प्रैक्टिस करेंगे तो इसकी एक्यूरेसी आपको 10 में से सात बार सही होएगी। यानी 10 में से सात बार सही बनेगा। 10 में सात बार सात बार। अब एक चीज और 70% हिट रेशियो आ गया। अब ये डाटा काम 11:00 बजे के बाद इसलिए करेगा क्योंकि जब 9:15 बजे मार्केट खुलेगी तो यहां पे होंगे 10,000 लोग और वहां पे होंगे 15,000 लोग। तो वह डाटा बहुत कम है। वो डाटा चेंज हो सकता है। अगर आप 10:30 तक देखेंगे तो हो सकता है यहां पे और लोग आ गए। मार्केट में पार्टिसिपेशंस हो गया तो डाटा और स्ट्रांग हो गया। जब आप 11:00 बजे के बाद देखेंगे तो मार्केट मैच्योर हो गई। आपको क्लेरिटी मिल गई कि ये लोग जो बैठ गए हैं चुपचाप बैठे हैं और इधर भी बैठे हैं। यानी कि आपको एक क्लेरिटी मिल जाएगी कि इतनी पोजीशंस इधर, इतनी पोजीशंस इधर और इसके बेसिस पे मेरा क्या आउटपुट आ रहा है। तो इसलिए आप 11:00 बजे तक वेट करके अगर आप ट्रेड लीजिएगा तो आपको एक्यूरेसी ज्यादा मिलती है। तो ये तो हो गया पीसीआर। क्लियर है पीसी? टाइम बिल्कुल मस्ट है। मस्ट है। हां फॉलो करना। कई बार एक्सपायरी वाले दिन हम लोग नॉर्मली 10:30 11 तक ट्रेड ले लेते हैं। बट नॉर्मली 11 के बाद ही आपको एक्यूरेसी मिलती है। अब अब जैसे मान लीजिए कॉल है। अब आज देखिए ये प्राइस चेंज आपको दिख रहा है। आज ₹38 कॉल डाउन है। हम और पुट भी आप देखिएगा तो ₹30 डाउन है ये वाली। यानी दोनों गिरी हुई है। यानी आज कॉल बयर को भी पैसा नहीं मिला। पुट बयर को भी पैसा नहीं मिला। रीजन क्योंकि दोनों में इमंबैलेंस नहीं है। अगर यह इमंबैलेंस होता तो दोनों नहीं टूटती। एक ना एक में पैसा हमें मिलता। तो इसका तो कोई तरीका नहीं है। कोई इसका एक ही तरीका है ऑप्शन सेलर बनना पड़ेगा। अच्छा अगर मुझे लग रहा है कि दोनों गिरेगी तो मैं दोनों बेच के कमा लूंगा ना। ऑप्शन का यही तो फायदा है कि आप तेजी में भी कमा सकते हो, मंदी में भी कमा सकते हो और कुछ नहीं हो रहा है तो भी कमा सकते हो। और स्टॉक में क्या है? स्टॉक में आप तभी कमाओगे जब मार्केट ऊपर जाएगी। जाएगी। तो ऑप्शन एक ऐसा इंस्ट्रूमेंट है जिसमें आप हर सिचुएशन में प्रॉफिट बना सकते हो। सब्जेक्ट टू कि आपको पता होना चाहिए कि उस कंडीशन को कैसे मुझे एक्सप्लइट करके प्रॉफिट बनाना है। अब जब आपको बैलेंस मार्केट है तो आप कॉल पुट बेच के पैसा बनाइए और जब इमंबैलेंस मार्केट है तो आप ऑप्शंस खरीद के पैसा बनाइए। ये इसमें सर अगर बेसिक तरीके से समझा तो इसमें एक्टिव आपको रहना पड़ेगा। हां ऑप्शन ऑप्शन में तो आपको बिल्कुल एक्टिव होना होगा। आप ऐसा अगर सोचते हैं कि ज्यादा बना रहे हैं तो आपको एक्टिव रहना। होना पड़ेगा। मतलब कितना ज्यादा बनाते हैं सर? जो अगर नॉर्मल हम शेयर खरीद के रख लेते हैं। देखो शेयर आप खरीदिएगा तो आप मैक्सिमम 18% 20% साल की बना सकते हैं। मान लीजिए म्यूच्यूल फंड की अगर एवरेज रिटर्न निकालें तो 18 20% से ज्यादा नहीं बनती है सीएजीआर बट ऑप्शंस में तो आप 50% 100% भी बना सकते हैं साल का। डिपेंड करता है आपकी कितनी एक्सपर्टी अगर आपकी फॉलो किया जाए तो आप 2 साल लगातार हां लगातार और मतलब साल का 50% बनाना कोई ऐसी बहुत डिफिकल्ट नहीं है। बट सब्जेक्ट टू आप प्रॉपर रूल्स एंट्री को फॉलो करें। अब मान लीजिए मैंने पीसीआर बताया बट आप एंट्री रूल फॉलो नहीं करेंगे तो पैसे नहीं बनेंगे। आप स्टॉप लॉस फॉलो नहीं करेंगे तो पैसे नहीं बनेंगे। आप ओवरनाइट कैरी करेंगे और वो भी ओपन पोजीशंस कैरी करेंगे तो पैसे नहीं बनेंगे। तो बहुत सारे सिंपल-सिंपल चीजों को फॉलो करना पड़ेगा आपको। बट ये है कि जिस मेथड पे मैं बात कर रहा हूं इस मेथड में आप ये मान के चलो कि आप उल्टे डायरेक्शन में नहीं फंसोगे। आज के दिन क्या होता है? मार्केट तेजी का ट्रेंड है। लोग पुट खरीद के बैठे हैं और उनकी पुट टूट रही है। तो कम से कम आप लॉस को तो बचा सकते हो। प्रॉफिट हो नहीं हो वो अपनी अलग बात है। बट आपका कैपिटल इरोड ना हो ये ज्यादा जरूरी है। उसके लिए आप ये मेथड फॉलो कीजिए और ये मेरा टेस्टेड मेथड है। आप जिस दिन भी ये वीडियो देखो जिस दिन भी आप वीडियो देखें अगले एक हफ्ते तक आप पेपर ट्रेडिंग कर लो और आप नोट डाउन कर लो। आपको सक्सेस रेशियो 65 टू 70% तक मिलेगा। इसमें क्या रोज हम प्रॉफिट ले सकते हैं इस रूल को इस मेथड को या फिर एवरेज निकाल एवरेज जैसे आप मानिए 70% हिट रेशियो है तो 10 में से तीन बार तो गलत आप होंगे। अच्छा कभी-कभी 10 में से चार बार भी गलत होता है ऐसा नहीं है। बट उस समय आपको छोटा स्टॉप लॉस ले के निकलना पड़ेगा। अब यहां पे पूरा रिस्क मैनेजमेंट और ट्रेड मैनेजमेंट की बात आती है कि जब आप प्रॉफिट बनाओ तो 1:2 के रिस्क रिवार्ड पे प्ले करो। यानी कि आप अगर ₹1 का रिस्क रख रहे हैं तो ₹ का प्रॉफिट टारगेट आप रखते हैं। जैसे मैंने अभी अपने रूल बुक में दिखाया कि आप 30 पॉइंट का टारगेट रखो। 15 से 20 पॉइंट का स्टॉप लॉस रखो। 1:2 का रिस्क रेशियो। तो अगर आप गलत जाओगे तो आपका छोटा लॉस होगा और सही जाओगे तो बड़ा प्रॉफिट होगा और नेट नेट आप प्रॉफिटेबल हो जाओगे। आपका ऑब्जेक्टिव ये होना चाहिए कि हर दिन प्रॉफिट नहीं कमाना है मुझे। हम मुझे मंथ के एंड में प्रॉफिटेबल होना है। हम इसी ऑब्जेक्टिव के साथ हम लोग काम करते हैं जिसके कारण इस मेथड पे पिछले 24 महीने से लॉस नहीं है। हम ठीक है? तो ऑब्जेक्टिव आजकल जो रिटेल ट्रेडर्स हैं उनका ऑब्जेक्टिव क्या होता है? हर दिन मेरा पैसा डबल हो जाए ऑप्शंस में और मुझे हर दिन प्रॉफिट हो जाए। यह प्रैक्टिकली किसी भी स्ट्रेटजी में पॉसिबल ही नहीं है। आप अपनी एक्सपेक्टेशन को नॉर्मल एक्सपेक्टेशन रखिए और आप जैसे रिस्क ले रहे हो ऑप्शंस में तो आपकी एक्सपेक्टेशन लाजमी है कि ज्यादा रहेगी इक्विटी से। बट ऐसा भी नहीं होगा कि हर महीने आपका डबल हो जाए और हर हर दिन आप प्रॉफिटेबल हो जाएंगे। आप यह रख के चलो कि हां साल के दो चार महीने लूजिंग भी होंगे। बट कम से कम हम मंथ ऑन मंथ ईयर ऑन ईयर आप अगर प्रॉफिटेबल हैं तो आप अच्छी ट्रेडिंग कर पा रहे हैं। हम तो इसमें अगर कोई हेल्प लेना चाहे या कहीं से जुड़ जुड़ना चाहे कोई क्योंकि कहीं ना कहीं एक टूल भी तो अपने आप में एक इंपॉर्टेंट चीज है और अगर कहीं से किसी का अगर मिल रहा है उस तरह से मार्गदर्शन मैं देख रहा था कि आप लोगों का टेलीग्राम चैनल भी है जिस पे काफी लोग जुड़े हुए हैं। जी वो कैसे काम करता है? देखिए मैं क्या है मैं सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट हूं और मेरी जो जॉब प्रोफाइल है वो है कि लोगों को एडवाइस देना लाइव मार्केट में तो हम लोग एक लाइव ट्रेडिंग कराते हैं तो प्रीमियम टेलीग्राम चैनल है जो एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज स्टॉक कार्ट इनका सेबी रजिस्ट्रेशन के ऊपर है और हम लोग मैं एसएमसी में एंप्लॉयड हूं तो हम लोग क्या करते हैं लाइव मार्केट में ये डाटा एनालिसिस करके प्रीमियम tlegram चैनल एक है जिसके ऊपर हम आपको ट्रेड देते हैं और उसके साथ-साथ ट्रेड्स के लॉजिक शेयर करते हैं। लर्निंग इंपॉर्टेंट क्या है? ट्रेड देना इंपॉर्टेंट नहीं है। ट्रेड अगर हम ले रहे हैं तो क्यों ले रहे हैं? मैं आपको वो दिखाता हूं। जैसे क्या क्या और उसमें क्या है? आप जुड़ के हमारे साथ लाइव मार्केट में आप ट्रेड कर सकते हो। अच्छा। तो उससे फायदा क्या होगा कि आपको लर्निंग मिलेगी। जैसे ये आज देखिए जिस दिन हम लोग आज वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। आज ही का है ये। अच्छा। और आज हम लोगों ने ट्रेड लिया था। अब ट्रेड जो लिया उसका लॉजिक शेयर किया कि एडवांस डिक्लाइन एडवांस और पीसीआर दोनों पॉजिटिव है। अच्छा ठीक है। इसके बाद इसके बाद एंट्री की आती है वीवप देखिए ये वीवप लाइन है। हम मार्केट साइडवेज है और यह देखिए 1:00 बजे का मैसेज है। यानी कि मार्केट साइडवेज है। यानी कॉल एंड पुट दोनों में से किसी में पैसे मिलने का चांसेस नहीं है। साइडवेज क्यों है? क्योंकि पुट कॉल रेशियो जो मैंने अभी दिखाया दोनों तरफ बैलेंस्ड है। हम इसलिए हमें कॉल एंड पुट दोनों को अवॉइड करना चाहिए। तो ये आपको लॉजिक्स जब हम शेयर करते हैं लाइव मार्केट में लाइव मार्केट में तो आपकी लर्निंग होती है और लर्निंग के साथ-साथ अर्निंग भी होती है। तो हम लोग लाइव मार्केट में आपको ट्रेड्स देते हैं और ट्रेड्स के साथ उस ट्रेड को क्यों ले रहे हैं? हमारा क्या एग्जिट होगा? क्या हमारे टारगेट्स होंगे? यह सारे शेयर करते हैं। उसके साथ-साथ हम अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट ट्रेड के बाद हर ट्रेड के बाद आपको हम परफॉर्मेंस रिपोर्ट देते हैं विद टाइम स्टैंप यानी सेकंड्स में कि इतने बजे हमने ट्रेड लिया तो हमारी ये परफॉर्मेंस रिपोर्ट है और जिसे आप जज कभी भी करें तो उसे हमें मंथली रिटर्न्स पे जज करना चाहिए। बहुत सारे जैसे वीडियो देखेंगे आप तो कई बार जॉइ करते हैं प्रीमियम Telegram चैनल तो हो सकता है जॉइ करने के एक-द दिन में ही उनको नुकसान हो गया तो वो बड़े घबरा से जाते हैं कि ऑप्शंस में कैसे हो गया तो ऑप्शन ट्रेडिंग पेशेंस का गेम है और इसे अगर आपको जज करना है अपनी परफॉर्मेंस तो आप मंथली बेसिस पे जज कीजिए कि पूरे मंथ में अगर मैंने काम किया तो पूरे मंथ में मेरे को नेट प्रॉफिटेबल है कि नहीं है। अगर आप डेली डेली देखिएगा प्रॉफिट लॉस तो आप कंफ्यूज हो जाएंगे। मंथली में अगर आपका प्रॉफिट है इसका मतलब अच्छा परफॉर्म कर पा रहे हैं। तो हम लोग का पिछले 24 महीने से हम नेट नेट नेगेटिव नहीं है। हर महीने कुछ ना कुछ हम प्रॉफिट लेके निकलते हैं। किसी वीक में लॉस हो सकता है बट ओवरऑल हम प्रॉफिटेबल रहते हैं। तो ये प्रीमियम टेलीग्राम चैनल है जो आपने पूछा जिसमें 7660 पेड मेंबर हैं। अच्छा पेड जो सब्सक्रिप्शन ले के हमारे साथ जुड़ते हैं और इन्हें हम लाइव मार्केट में ट्रेड कराते हैं। प्रॉपर टारगेट स्टॉप लॉस जैसे देखिए यहां पे आज ट्रेड देख सकते हैं। बाय निफ्टी 24,800 कॉल ये इस तरीके से प्रॉपर ट्रेड्स होते हैं और इसमें जो लॉस प्रॉफिट जो भी हुआ उसकी हम परफॉर्मेंस रिपोर्ट लाइव हर दिन अपडेट करते हैं। हम तो एक मोटे तौर पर अगर इस tlegram से कोई जुड़ना चाहे तो क्या ये बहुत कॉस्टली है क्योंकि आप अरे नहीं सर बहुत कॉस्टली नहीं है। अगर आप देखोगे तो साल का केवल ₹10,000 हम लोग लेते हैं। अप्रोक्स ₹10,000 प्लस जीएसटी के आसपास कॉस्टिंग होती है। तो आपकी महीने की आप कॉस्ट पकड़ लो। मोटा-मोटी ₹1000 आप महीने की कॉस्ट पकड़ लो। ठीक है? ₹1000 आपकी कॉस्ट हो गई महीने की। तो एक महीने की कॉस्ट हो गई और निफ्टी का लॉट साइज होता है 65। यहां पे हम ट्रेड खाली निफ्टी में कराते हैं निफ्टी ऑप्शंस में। 65 का लॉट होता है। तो अगर आपने ₹15 का प्रॉफिट बुक किया एक दिन में तो आपकी कॉस्ट पूरे महीने की रिकवर हो जाती है। ठीक है? मिनिमम एक लॉट में भी आप ट्रेड करते हैं। ठीक है? तो कोई ऐसी दिक्कत वाली बात नहीं। कॉस्ट बहुत कम है। दूसरा एक और हमारी पॉलिसी है कि आप अगर हमारा सब्सक्रिप्शन लेते हैं और आपको एक वीक तक समझ में नहीं आता है तो 100% फुल्ली रिफंडेबल है। अच्छा ये भी है। 100% फुल्ली रिफंडेबल विद इन अ वीक। तो आपके साथ वो भी टेंशन नहीं है। आप ज्वाइन कर लो एक वीक आप टेस्ट कर लो। समझ में नहीं आता है। आप अपना फुल रिफंड आपको सिखाया भी जाएगा साथ-साथ में कि कैसे हां लर्निंग्स भी होती है क्योंकि क्या लाइव मार्केट में जब आप ट्रेड्स के लॉजिक शेयर करेंगे तो यूजर को समझ में आ जाएगा ना कि ये ट्रेड मैंने लिया क्यों लिया अगर लॉस हुआ तो उसको समझ में आएगा कि इस कारण से लॉस हुआ। वो भी हम आगे इंडिकेट करते हैं कि देखो हमें लॉस हुआ तो इस रीज़न से लॉस हुआ। प्रॉफिट हुआ तो हम ये इंडिकेट करते हैं कि देखो हम लोगों ने यह डाटा फॉलो किया तो प्रॉफिट हुआ। प्लस हम लोग हर 10 दिन 15 दिन में हमारे वेबिनार्स होते हैं। एजुकेशनेशनल वेबिनार्स जिसमें अलग-अलग टॉपिक्स पे हम लोग बातचीत करते हैं। रिट्रेसमेंट थ्योरी, सपोर्ट रेसिस्टेंस और भी बहुत सारे ये जो पीसीआर की एक्सप्लेनेशन है इसके ऊपर डिटेल में हम लोग बातचीत करते हैं। तो वेबिनार्स भी आपको मिलते हैं और लाइव मार्केट में ट्रेड्स भी मिल रहे हैं और लाइव मार्केट में आपको डाटा भी मिल रहा है। तो कुल मिला के पूरा अगर आप निफ़ी ऑप्शंस में इंट्राडे ट्रेड करना चाह रहे हैं तो यहां पे आपको कंप्लीट सॉलशंस हम लोग देते हैं और हम लोग सेबी रजिस्टर्ड एनालिस्ट हैं। हां तो वह भी आपके लिए रिस्क नहीं है और फिर भी आपको समझ में नहीं आता है तो वििन अ वीक आप अपना फुल रिफंड भी ले सकते हैं। एक फ्री चैनल भी आपका Telegram का है। वो क्या काम करता है? फ्री टेलीग्राम चैनल में आज के दिन में करीब 2 लाख से ज्यादा मेंबर्स हैं। हम और इसमें ट्रेड्स एक्टिव नहीं होते हैं। अब पेड एंड फ्री में मेनली ये डिफरेंस होता है कि फ्री में हम लोग इंफॉर्मेशनेशंस देते हैं कि ये ट्रेंड बन रहा है। ये पॉसिबिलिटीज है। बट ट्रेड की बात करें तो ट्रेड आपको प्रीमियम में मिलेंगे। हम तो ये बेसिक डिफरेंस है ट्रेड का। तो कोई प्रीमियम में लेकर सीख ले और फिर वो इधर हां कर सकता है कर सकता है भाई भाई आपकी कॉस्ट तो बहुत कम है ना आप अब मान लो आपने सीख लिया फिर आप अपना ट्रेड करो हमारा ऑब्जेक्टिव ये नहीं है कि हम आपसे सब्सक्रिप्शन का प्रॉफिट बनाएं हमारा ऑब्जेक्टिव ये है कि आप भी सीखो और आप प्रॉफिट बनाइए ये हम ऑब्जेक्टिव के साथ वहां पे ट्रेड देते हैं तो फ्री में भी बहुत सारी इंफॉर्मेशन मिलती है आपको फ्री टेलीग्राम चैनल में आप जाकर के देख सकते हैं जैसे इंडेक्स ट्रेडिंग विद सीए नितिन मुरार का ये हमारा फ्री टेलीग्राम चैनल ठीक है? इसमें अगर आप जा के देखिएगा तो आपको बहुत सारी हमारी इंफॉर्मेशन डाटा मिलेगी और आपको समझ में आ जाएगा कि किस तरीके से हम लोग लाइव मार्केट में काम करते हैं। उसके बाद आप फिर प्रीमियम टेलीग्राम चैनल भी ज्वाइन कर सकते हैं। ये आप बताना सर मुझे कैसे इसको ज्वाइन करना है तो मैं डिस्क्रिप्शन में डाल दूंगा। अगर इसको ज्वाइन करना चाहें या आपका जो पेड वाला है वो ज्वाइन करना चाहे तो वो है क्योंकि उसमें तरीके वो है कि आपके पास ऑप्शन दोनों हैं। अगर आप चाहे तो कुछ भी कर सकते हैं। कर सकते हैं। बिल्कुल आप फुल रिफंड ले सकते हैं विद इन अ वीक। तो सर ये आपकी जो फाइव स्टेप वाली स्ट्रेटजी है वो तो है मजेदार लेकिन अभी भी जैसे लग रहा है कि थोड़ा सा और बेहतर तरीके से आप बता पाए ना तो चार्ट में क्या पॉसिबल है कि बताएं पूरा एक लाइट तरीके से हां हां बिल्कुल अभी जैसे देखिए आप लोगों ने डाटा स्टेप्स तो सब समझ में आ गया कि 11:00 बजे के बाद ट्रेड करना है। पीसीआर का डाटा देखना है। वीवप पे एंट्री लेनी है। 2025 पॉइंट का स्टॉप लॉस रखना है। 30-35 पॉइंट का टारगेट रखना है। अब इसको चार्ट्स पे हम चलते हैं और एक-एक करके समझते हैं कि कैसे ये स्टेप्स को फॉलो किया जा सकता है। तो अरविंद जी आइए हम लोग चार्ट्स पे समझते हैं चीजों को और यह कैंडलस्टिक चार्ट है। कैंडलस्टिक चार्ट में 10 मिनट्स का कैंडलस्टिक चार्ट है। यानी यहां पे आपको ये क्लियर हो गया कि कौन से टाइम फ्रेम में चार्ट देखना है। यानी एक-एक जो कैंडल बन रही है 10-10 मिनट की बन रही है। इस पे जाएंगे कैसे सर? थोड़ा ये बताइए। ये ये तो नॉर्मल कोई भी चार्टिंग प्लेटफार्म आप यूज़ कर रहे हैं क्योंकि मैं ये अस्यूम कर रहा हूं कि अगर आप ट्रेडिंग कर रहे हैं तो किसी भी ब्रोकर के साथ अगर आप ट्रेड कर रहे हैं तो उनके चार्टिंग प्लेटफार्म होते हैं। तो आपने चार्ट लगा लिया। ये निफ्टी का चार्ट है और निफ्टी के चार्ट पे आपको 10 मिनट का कैंडलस्टिक चार्ट यूज़ करना है। नंबर वन इसके साथ आपको प्लॉटिंग करनी है। ये ब्लू लाइन दिख रही है। इसे हम बोलते हैं वीवप लाइन जहां पे एंट्री करेंगे हम लोग। वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस। तो ये अपने आप प्लॉट हो के आ जाएगी। वीवप इसे बोलते हैं वीवप वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस। तो यह ऑटोमेटिक कैलकुलेट हो के चलती रहेगी। और इसका लॉजिक क्या है कि एंट्री हमें इसके आसपास लेना है क्योंकि ये मार्केट की फेयर वैल्यू है। ठीक है? अब कॉल और पुट दो इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं। ठीक? कॉल किस लिए होती है? जब लगता है कि मार्केट ऊपर जाएगी तो हम कॉल खरीदते हैं। और जब मार्केट नीचे जाएगी तो हम पुट खरीदते हैं। तो सबसे फर्स्ट आपको यह डिसाइड करना है 11:00 बजे तक कि मुझे लेना क्या है? कॉल लेना है कि पुट लेना है। तो मार्केट यह खुल गई और खुल के यह यहां 11:00 बज गए। 11:00 बजे मुझे क्या-क्या देखना है? मुझे एक स्टेप ये देखना है कि ओपनिंग से ऊपर चल रही है या नीचे चल रही है। अब जैसे देखिए यहां पे ओपनिंग हुई थी मार्केट। ये आप देख पा रहे हैं। इस लेवल के आसपास कहीं ओपनिंग हुई थी। अब ओपनिंग से मार्केट अगर आप देखिएगा 11:00 बजे तो ऊपर चल रही है। हम तो फर्स्ट चेक लिस्ट मेरा क्या हुआ? अप है। अप है। हां। ठीक है? हम सेकंड चेक लिस्ट रूल में क्या था? पीसीआर का डाटा वन से ऊपर है या नीचे है? तो वो वन से ऊपर था क्योंकि पुट में 50,000 था। कॉल में 40,000 था तो वन से ऊपर है। तो ये सेकंड चेक लिस्ट क्या हुआ? अप हुआ। तो ये दोनों चेक लिस्ट सिंपल अप है। तो मैं क्या करूंगा? कॉल ऑप्शन लूंगा। मार्केट ऊपर जाने के चांसेस हैं। थर्ड स्टेप क्या था? वीवप पे लेना है। हम करेक्ट। ठीक। अब वीवप लाइन यह चल रही है। हम हम अब देखिए यह यहां पे नहीं लेंगे। नहीं लेंगे वेट करेंगे। वेट करेंगे। वीवप लाइन इसके आसपास आने की कोशिश हुई। ये देख रहे हैं टाइमिंग कितने बजे? ये करीब 1:35 के आसपास वीवप के आसपास आई। अगर आप यहां पे एंट्री करते तो यहां से एक मूव मिली आपको। हम करेक्ट। सेकंड सेकंड फिर इस ये देखिए वीवप के आसपास आई। हम आई ना एवरेज के आसपास और यहां से एक हल्का सा बाउंस मिला ज्यादा नहीं मिला हम यानी कि मूव मिली बट ज्यादा नहीं मिली तो इसलिए ज्यादा नहीं मिली क्योंकि मार्केट में जो पीसीआर था वो एक तरीके का बैलेंस पीसीआर था। अगर ये इमंबैलेंस पीसीआर होता यानी पुट में बहुत ज्यादा होते और कॉल में कम होते तो बहुत तेज बाउंस मिलती। हम तो ये बेसिकली सिंपल समझने की चीज ये तीन स्टेप्स हैं। फर्स्ट खुलने के बाद कहां है? सेकंड पीसीआर क्या है? एंट्री हमें वीवप पे लेनी है। अब मान लीजिए आपने यहां पे कॉल ऑप्शन खरीद ली तो आपका प्रॉफिट टारगेट क्या होगा? आपका प्रॉफिट टारगेट 30 से 35 पॉइंट ऑप्शंस का होगा। अब आपके मन में सवाल आएगा कि मुझे कौन सी कॉल ऑप्शन लेनी चाहिए? ऐड द मनी लेनी चाहिए या आउट ऑफ मनी लेनी चाहिए? एट द मनी का मतलब होता है कि जिस लेवल पर मार्केट चल रही है वह हो गई एट द मनी। अगर मार्केट 25 24600 चल रही है तो अगर आप 24,600 की कॉल ऑप्शन लेंगे तो इसे हम बोलेंगे ऐड द मनी। और अगर आप 24,800 की कॉल ऑप्शन लेंगे तो इसे हम बोलेंगे आउट ऑफ द मनी। तो हमेशा ट्रेड आपको ऐड द मनी में करना चाहिए। और जो हम स्टॉप लॉस और टारगेट बता रहा हूं वो ऐड द मनी के हिसाब से है कि 30 से 35 पॉइंट का टारगेट और 20 पॉइंट के आसपास का स्टॉप लॉस। तो ये सिंपल पांच स्टेप है जिसमें से तीन फर्स्ट के थ्री स्टेप जो होते हैं वो होते हैं ट्रेड इनिशिएशन और डायरेक्शन को डिसाइड करने के लिए और लास्ट के दो स्टेप है वो रिस्क मैनेजमेंट स्टेप है वहां पे प्रॉफिट बुकिंग और स्टॉप लॉस मैनेज करने के लिए। तो यह बड़ा सिंपल मतलब बेसिकली क्या है? आप ऑप्शंस को जितना कॉम्प्लेक्स बना देंगे उतना वो कॉम्प्लेक्स हो जाएगा। बट अगर आप इसको सिंपल तरीके से ट्रेड करेंगे तो देखिए कितना सिंपल है। कुछ नहीं करना है। मुझे 11:00 बजे तक वेट करना है। 11:00 बजे देखना है कि ओपन से ऊपर है कि ओपन से नीचे है। क्राइटेरिया नंबर वन क्राइटेरिया नंबर टू पीसीआर पॉजिटिव है या नेगेटिव है। अगर दोनों कंडीशन मीट हो गई तो कुछ नहीं। कॉल अगर वीवप के आसपास आती है तो मुझे यहां पे कॉल ऑप्शन लेनी है और अगर यह रिवर्स कंडीशन होगी तो वीवप के आसपास पुट ऑप्शन लेनी है। उसके बाद सिंपल रिस्क मैनेजमेंट करना है। और ये पांच स्टेप फॉलो करके पिछले 24 महीने से तो लॉस नहीं हुआ है। नहीं हुआ है। बड़ी बात है। मैं अगर इसको अमाउंट मैं समझना चाहूं कि मान लीजिए मेरे पास 1 लाख है। तो मुझे स्टेप बाय स्टेप बताइए कि कहां पर मतलब मैं एंट्री लूं। अच्छा कहां पर बड़ा पॉइंट है। बहुत ही बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट है। देखिए क्या है? हम स्टॉप लॉस एंट्री टारगेट वो तो अलग चीज है। अगर मेरे पास मान लीजिए ₹1 लाख का फंड है। 1 लाख का फंड है। अब कई ट्रेडर्स क्या करते हैं? ऑप्शंस मान लीजिए मुझे ₹100 में मिल रही है। तो वो क्या करते हैं? और 65 का लॉट है। ठीक है? तो ₹6500 मुझे एक लॉट खरीदने में लगेंगे। 6500 अब कई लोग ऐसा गलती करते हैं कि वो एक ही साथ 20 लॉट खरीद लिया। हम तो उनकी कैपिटल तो ज्यादा लगी नहीं। मतलब 1 लाख के अंदर सारा काम हो गया। बट वह रिस्की होता है। रिस्क मैनेजमेंट पॉइंट ऑफ व्यू से 1 लाख के फंड पे ज्यादा से ज्यादा आपको दो लॉट से ज्यादा ट्रेड नहीं करना चाहिए। अच्छा। क्यों? इसके पीछे भी रीज़न है। जैसे मैंने बोला कि हमें 20 पॉइंट का स्टॉप लॉस रखना है। ठीक है? 65 का लॉट साइज है। अगर मेरा स्टॉप लॉस हिट हो गया तो मुझे कितना लॉस आएगा? करीब करीब 1300 से ₹1500 इंक्लूडिंग ब्रोकरेज मैं मैक्सिमम मानता हूं। ठीक है? अगर मैं एक लॉट में मुझे 1300 1500 के आसपास आएगा। अगर मैं दो लॉट कर रहा हूं 1 लाख के फंड पे तो मेरा लॉस मान लीजिए ब्रोकरेज वगैरह लगा के 2500 के आसपास आया। करेक्ट? 1 लाख के फंड पे मेरा लॉस कितना हुआ? 2.5% हम तो 2.5% मुझे लॉस होगा। और अगर सपोज कीजिए मैंने ये 10 लॉट 20 लॉट कर लिया तो एक लॉट पे मुझे कम से कम 1 लाख पे मुझे 10 से 15% का लॉस आ जाएगा जो मैं बियर नहीं कर पाऊंगा एक दिन में तो एक दिन में मैक्सिमम रिस्क आपको फंड पे किसी भी कंडीशन में 2 2ाई% से ज्यादा का नहीं लेना है। अगर आप 2% का रिस्क लोगे तो कम से कम 30-40 बार आपको लॉस होगा तब जाके आपका कैपिटल डिप्लीट होगा। और जिस मॉडल की हम लोग बात कर रहे हैं जब इसका हिट रेशियो 60 70% है और आप इस मेथड से काम कीजिएगा रिस्क मैनेजमेंट फॉलो कीजिएगा तो आपको कैपिटल डिप्लेट नहीं हो सकती ना क्योंकि ऐसा भी हो सकता है कि ज्यादा रिस्क ले तो ज्यादा गेन भी हो जाए नहीं वो वो नहीं सोचना है हमें कंसिस्टेंसी पे ध्यान देना है कि मेरे कैपिटल पे अगर मैं महीने का 5% भी कमा लूं अच्छा तो साल का कितना हो गया 60% तो आप तो बोल रहे हैं 90% लोग लूजर हैं और यहां मैं बात कर रहा हूं कि साल का 60% कम मालूम मतलब हमें लॉन्ग टर्म पे ही खेलना है। हमें लॉन्ग टर्म सोचना है। हमें यह नहीं सोचना है कि मुझे एक दिन में अपने कैपिटल को डबल करना है। उस चक्कर में कैपिटल आपकी खत्म हो जाती है। गेम में आप रहोगे तभी तो नेक्स्ट डे आप प्ले कर पाएंगे ना और और उसके लिए आपकी कैपिटल इंपॉर्टेंट है। आपकी कैपिटल खत्म हो गई तो अगले दिन आप ट्रेड नहीं कर पाओगे। कई मेरे जो प्रीमियम मेंबर्स हैं उनके लिए भी एक मैसेज होगा कि आप लोग क्या करते हैं? कई बार आप गलती ये करते हो कि आप ओवर लिवरेजिंग कर लेते हो। 1 लाख के फंड पे कभी भी दो लॉट से ज्यादा काम मत कीजिए और हम लोग कभी भी 15 पॉइंट से ज्यादा का स्टॉप लॉस पे काम करते ही नहीं है। बहुत छोटे स्टॉप लॉस पे काम करते हैं। और अगर मेरा इस मॉडल का हिट रेशियो 60 70% है और मैं रिस्क ले रहा हूं 15 पॉइंट और मैं रिवार्ड प्ले कर रहा हूं 20-25 पॉइंट तो मेरा कैपिटल कभी डिप्लीट हो ही नहीं सकती इसमें क्योंकि रिस्क वर्ड रेशियो आपका 1:1.5 आ गया और आप छोटे स्टॉप लॉस पे कैपिटल पे आपको 1ढ़ 2% का आप रिस्क ले रहे हो तो आप ऐसा हो ही नहीं सकता कि आप 50 बार कंटीन्यूअस गलत हो जाओ। हम तो इसलिए प्रोबेबिलिटी ऑफ़ विनिंग बहुत अच्छी है। ऑप्शन क्या है ना? ऑप्शन एक तरीके से मैं बोलता हूं यह मैथ्स भी है, साइंस भी है, फिजिक्स भी है क्योंकि यह पूरा का पूरा प्रोबेबिलिटी गेम है। आप कभी भी किसी ट्रेड में सर्टेन नहीं हो सकते बट उसकी प्रोबेबिलिटी आप निकाल सकते हो कि मैं कितने परसेंट चांसेस हैं कि मैं जीतूंगा और उसी पे ये पूरा का पूरा ऑप्शन ट्रेडिंग का गेम चलता है। आप इसको सर साइंस बता रहे हैं, मैथमेटिक्स बता रहे हैं। बट ऑप्शन ट्रेडिंग को जुआ भी बोलते हैं लोग। तो चलिए इसी से शुरुआत करते हैं। कुछ मिथ एंड रियलिटी वाले मेरे कुछ सवाल हैं। ऑप्शन ट्रेडिंग जुआ। नहीं ऑप्शन ट्रेडिंग 100% कैलकुलेशन है। जुआ में आप बैक टेस्ट नहीं कर सकते। जुआ में आपको हिस्टोरिकल डाटा नहीं होता। जुआ में आपको स्ट्रेटजीस नहीं होती। ऑप्शंस में आपके पास चार्ट्स हैं, रूल्स हैं, बैक टेस्टिंग है। तो ऑप्शन 100% एक तरीके से प्लंड मूव है। जुआ बिल्कुल भी नहीं है। 10,000 से आप रोज 5,000 कमा सकते हैं। नहीं ऐसा नहीं हो सकता। 10,000 से ज़ीरो हो सकता है। बट रोज 5,000 नहीं कमा सकते। 9:15 पे ट्रेड करना सबसे सही होता है। नहीं वो बहुत रिस्की होता है क्योंकि वो इमोशनल ओपनिंग है। आपको मेरे हिसाब से 11 के बाद ट्रेड करना चाहिए। स्टॉप लॉस लगाने से प्रॉफिट कम हो जाता है। नहीं स्टॉप लॉस आपको रिस्क को मैनेज करने के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। बिना स्टॉप लॉस के ऑप्शंस में कभी ट्रेड नहीं करना चाहिए। ठीक है? ऑप्शन बाइंग हमेशा रिस्की है। नहीं, आप रिस्क मैनेज करके चलिए ना। ऑप्शन से प्रॉफिट बनता है। ऑप्शन से बहुत अच्छा प्रॉफिट बन सकता है। अगर आप रिस्क को मैनेज करें। आप रिस्क मैनेज नहीं कीजिएगा तो रिस्की है। हर दिन ट्रेड करना जरूरी है। बिल्कुल जरूरी नहीं है। जिस दिन अच्छे अच्छे इमंबैलेंस मिले उस दिन आप ट्रेड करो। पुट कॉल रेशियो में अगर बराबर सा दिख रहा है तो ट्रेड नहीं लेना। अगर एक साइड में मुझे दिख रहा है 2 लाख एक साइड में 400 दिख रहे हैं तो उस दिन आप दबा के ट्रेड करो। पैसे मिलेंगे। टेक्निकल एनालिसिस से ज्यादा जरूरी है आपका ऑप्शन डाटा। नहीं दोनों इंपॉर्टेंट है। टेक्निकल एनालिसिस क्या है ना? मान लीजिए मेरी बॉडी है तो बॉडी मेरी स्ट्रांग दिख रही है बट डाटा उसके अंदर कैसा बन रहा है वो ब्लड है तो दोनों अगर आप कंबाइन करेंगे तो एक्यूरेसी अच्छी आ जाएगी। प्राइस एक्शन इज अ टेक्निकल एनालिसिस और उस प्राइस एक्शन के पीछे लॉजिक क्या है? दैट इज अ डेटा एनालिसिस। तो मिक्स करके ट्रेड करेंगे तो ज्यादा अच्छी ट्रेडिंग कर पाएंगे। मार्केट में जो बड़े प्लेयर हैं वो रिटेल ट्रेडर्स का पैसा खा जाते हैं। ऑप्शन ट्रेडिंग जीरो सम गेम है। कोई कमा रहा है तो कोई लॉस कर रहा है। जो स्मार्ट प्लेयर है जिसको ज्यादा नॉलेज है वो पैसा कमा रहा है और जिस जो जो टूल्स यूज़ नहीं कर रहे हैं वो पैसा गवा रहे हैं। तो अब आप देख लो कि आप टूल के साथ काम कर रहे हो या बिना टूल के साथ काम कर रहे हो। तो जो स्मार्ट प्लेयर हैं वो टूल्स और डाटा के साथ काम कर रहे हैं तो वो पैसा कमा रहे हैं और जीरो सम गेम है तो वो कमा रहे हैं तो जो डाटा यूज नहीं कर रहा है वो गवा रहा है। क्या कोई स्ट्रेटजी ऐसी है जो 90% प्लस एक्यूरेसी दे पाए पॉसिबल ही नहीं है। 90% प्लस एक्यूरेसी दे दे तो हर आदमी मार्केट में करोड़पति बन जाएगा। किसी भी स्ट्रेटजी की 60 65% से हायर एक्यूरेसी नहीं आती है। अब बाकी रिस्क मैनेजमेंट पे डिपेंड करता है। बट एवरेज एक्यूरेसी अगर आप बैक टेस्ट करेंगे तो 65 70% तक आ रही है। तो दैट इज़ अ वेरी गुड स्ट्रेटजी। हम मजा आ रहा है आपके साथ बात करके बहुत सारी चीजें पता चली। लेकिन कुछ ऐसी चीजें हैं जो रैपिड फायर में निकल के आती है और लोगों को समझ में भी आता है वो। 10,000 कैपिटल है अगर ऑप्शन बाइंग या नहीं? 10,000 है तो आप बाइंग ही कर सकते हैं। बट मेरे हिसाब से केवल 10,000 है तो ऑप्शन नहीं करना चाहिए। आपको करना ही नहीं चाहिए हम क्योंकि बहुत कम कैपिटल से आप ऑप्शन करेंगे तो ना बड़ी रिटर्न बना पाएंगे और वो खोज कैपिटल खो सकती है। इंट्राडे या स्विंग? कम कैपिटल है तो फिर आपके पास इंट्राडे ही ऑप्शन है। मेरी एक्सपर्टीज तो इंट्राडे में है। अह बट मैं यह बोलूंगा कि अगर कैपिटल कम है तो इंट्राडे और अगर कैपिटल सफिशिएंट है तो फिर स्विंग कर सकते हैं। आप निफ्टी या बैंक निफ्टी निफ़ी ज़्यादा बेहतर है क्योंकि बैंक निफ़ी में कंपोनेंट्स कम होते हैं। 14 स्टॉक मिलके बैंक निफ़ी बनती है और निफ़ी बनती है। 50 स्टॉक बनके निफ़ी ज्यादा स्टेबल है। तो निफ़ी इज़ बेटर देन बैंक निफ्टी। कॉल या पुट। डिपेंड करता है मार्केट पे। मार्केट तेज है तो कॉल और मंदा है तो पुट। तो आपको तो बुल बियर दोनों प्ले करना है और ऑप्शन ट्रेडर कुछ भी कर सकता है। तो कॉल पुट दोनों डिपेंडिंग ऑन द मार्केट ट्रेंड इन सिचुएशन। ऑप्शन बाइंग या सेलिंग? मैं ऑप्शन बायर हूं। ऑप्शन बाइंग में आप 50% का भी साल का रिटर्न बना सकते हैं और ऑप्शन सेलिंग में 202% रिटर्न नहीं बनता है। बट ऑप्शन बायर को बहुत ज्यादा चौकन्ना रहने की जरूरत है टाइमिंग के पॉइंट ऑफ व्यू से। तो दोनों के प्लस और माइनस है। मैं प्रेफर करता हूं ऑप्शन बाइंग। टेक्निकल एनालिसिस या ऑप्शन डाटा। दोनों अपने आप में इंपॉर्टेंट है। टेक्निकल से आप प्राइस एक्शन पढ़ते हो और डाटा से उस प्राइस एक्शंस के पीछे लॉजिक को पढ़ते हो। तो जब आपको लॉजिक्स भी पता है और प्राइस एक्शंस दोनों मैच होएंगे तो आपका ट्रेडिंग कॉन्फिडेंस डबल हो जाता है। तो मेरे हिसाब से कॉम्बिनेशन होने होना चाहिए यानी टेक्निकल मतलब टेक टेक्निकल एनालिसिस और डाटा मिला दीजिए तो टेक्निकल होंगे तो ज्यादा अच्छा कर पाएंगे। सबसे खतरनाक ट्रेडिंग मिस्टेक सबसे खतरनाक स्टॉप लॉस नहीं लगाना। बिना स्टॉप लॉस के ट्रेड करना सबसे खतरनाक मिस्टेक है क्योंकि आपकी पूरी कैपिटल वाइप आउट हो सकती है ऑप्शन ट्रेडिंग में। एक रूल अह जिसे हर बिगिनर्स को फॉलो करना चाहिए। अगर आप वीकली ऑप्शंस कर रहे हैं, आप निफ़ी और ससेक्स में ट्रेड कर रहे हैं, तो आप ओवरनाइट नेकेड ऑप्शंस कैरी मत कीजिए। यानी कि आपने सपोज़ कॉल खरीदा और आप उसको कैरी फॉरवर्ड कर रहे हो, यह करना बिल्कुल रिस्की है। आप कैरी भी कर रहे हो, तो आप हैेज हैेजिंग वाली करो। बुल कॉल स्प्रेड ले जाइए। बियर पुट स्प्रेड ले जाइए। बट नेकेड ऑप्शंस ओवरनाइट कैरी मत कीजिए। और बिना स्टॉप लॉस के ऑप्शन ट्रेडिंग कभी भी नहीं करना चाहिए। एक चीज जो हर ट्रेडर्स को मतलब छोड़ ही देनी चाहिए। ओवर लिवरेजिंग ऑप्शंस में ओवर लिवरेजिंग आप बिल्कुल छोड़ दीजिए। ओवर लिवरेजिंग से क्या होगी कि आपकी कैपिटल जो मैंने अभी एग्जांपल के साथ सिखाया कि 1 लाख के फंड पे मैक्सिमम दो लॉट और 10 लाख के फंड पे उसी हिसाब से आप कैलकुलेशन कर सकते हैं। तो ओवर लिवरेजिंग ऑप्शंस में बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। अगर आपको कोई एक सलाह देनी हो जिससे जिसने पहली बार जो व्यक्ति जो है ऑप्शन ट्रेडिंग में जा रहा है तो वो क्या होगा? देखिए ऑप्शन ट्रेडिंग आप यह मान के चलो रिस्की तो है। तभी 90% ऑप्शन बायर लॉस कर रहे हैं। तो ऑप्शन बायर अगर आप ऑप्शन में आ रहे हो तो पहले सीखना चाहिए ऑप्शन को। आप धीरे-धीरे सीखो। ऐसा नहीं है कि आज हमारी वीडियो देख के आप तुरंत ऑप्शन ट्रेडिंग चालू कर दो। ऑप्शंस प्राइमरी आप ये समझो सीखो और फिर आप छोटे कैपिटल से जितना कैपिटल आप अफोर्ड कर सकते हो कि मेरा लॉस हो जाए तो मेरी फाइनेंसियल हेल्थ पे कोई इंपैक्ट नहीं आए। मैं मान के चलता हूं कि चलो 202000 से आपने स्टार्ट किया और आप छोटे-छोटे से करके देखो। अगर लगता है कि आपको सूट कर रहा है आपके रिस्क पैरामीटर को आपके मेंटल हेल्थ को वो डिस्टर्ब नहीं कर रहा है। फिर आप आगे बढ़ो और फिर अगर आपको लगता है कि नहीं ठीक है तो फिर धीरे-धीरे आप बिल्ड कर सकते हो। बट इनिशियली लर्निंग इंपॉर्टेंट है और छोटे कैपिटल से आप स्टार्ट कीजिए। फिर आप बढ़ाइए। शुरू में ज्यादा कैपिटल से करने में रिस्की है ऑप्शन। रिस्की है और सर साथ हैं ही तमाम चीजें बताई गई हैं और जुड़ने के लिए सर आप मुझे डिटेल देना अगर कोई जुड़ना चाहता है तो डिस्क्रिप्शन में मैं डाल दूंगा जुड़ सकता है और कोई भी दिक्कत आ रही है कोई सवाल हो तो आप जो है कमेंट में लिखिए बताइए और एक बार हम फिर जुड़ेंगे कुछ और चीजों को लेकर लेकिन हां यहां अभी तक जितनी चीजें पता चली सर थैंक यू सो मच और अगर आप चाह रहे हैं कि वाकई पैसा बनाए तो कहीं ना कहीं आपको थोड़ा दिमाग और कुछ टेक्निकल चीजों को तो जानना पड़ेगा और आजकल तो सर सुविधाएं इतनी है आप जैसे लोग हैं बिल्कुल थैंक यू सो मच।

💬 Trader reviews (traded this? tell others what really happened)

No reviews yet — be the first. Real experiences help other traders more than any backtest.

User opinions, not investment advice. Reviews are moderated before publishing.