The Most Accurate Commodity Scalping Strategy in 2026? — backtested on Indian market data | FakeTrades
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The Most Accurate Commodity Scalping Strategy in 2026?

Commodities by Dhan · watch on YouTube ↗
Analysed 17 Oct 2026, 12:48 PM IST
⏳ Backtest pending — a data-backed verdict will be attached.

Verdict

Not auto-backtested — too few qualifying signals. AI-decoded: Mean reversion scalping on commodities (crude oil, silver, natural gas) using Z-Score (±2 standard deviations) for entry zones, with HulSweet (HMA-based) crossover as the precise entry/exit trigger, c

We decoded the rules and ran the engine, but it fired too rarely on Indian market data to score honestly. It was designed for a different market (commodity) and its filters (float, market-cap, pre-market volume …) don't map onto Indian data. We show no number rather than a fake one. Flagged for a hand-built review.

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Full transcript (3595 words)
हेलो ट्रेडर्स, वेलकम टू कमोडिटीज बाय धन। जब हम कमोडिटीज मार्केट में स्कैल्पिंग करने लगते हैं, तो हमारा सबसे ज्यादा पहला ऑब्जेक्टिव यह होता है कि हम उसका टाइम फ्रेम सही समझ पाएं। हम उसको यह समझ पाएं कि कैसे कौन से टाइम फ्रेम में कौन सी कमोडिटी को कैसे ट्रेड किया जाए ताकि हम उसके मैक्सिमम रिवॉर्ड टू रिस्क ले सकें। सो ऐसे केस में हमारा ऑब्जेक्टिव यह होता है कि जब मार्केट सुबह ओपन होता है तो हम उसका टाइम फ्रेम जो है हम कुछ 15 मिनट या इवन 30 मिनट्स के टाइम फ्रेम पर भी ट्रेड कर सकते हैं। लेकिन जब इवनिंग आ जाती है जो वोलेटिलिटी है वो मैसिव शूट अप कर जाती है 5 6:00 बजे के बाद तब हम उस टाइम फ्रेम को रिड्यूस करके 5 मिनट तक ले आते हैं। कमोडिटीज का एक और बहुत खास बात है कि जब आपके पास जितना भी टाइम है आप उसके हिसाब से स्कैल्पिंग कर सकते हैं। आपको देखना होता है कि नेक्स्ट 2 से 3 घंटे 4 घंटे हम बैठ सकते हैं स्क्रीन के सामने या नहीं। तो अगर आपके [गला साफ़ करने की आवाज़] पास दिन में टाइम है, आप दिन में स्कैल्पिंग कीजिए। इवनिंग में है तो इवनिंग में या फिर रात को है तो रात को स्कैल्पिंग कर लीजिए। लेकिन स्कैल्पिंग का मतलब यह नहीं है कि आप सुबह ट्रेड कर रहे हो और आपका रात तक ट्रेड चल रहा है। ऐसा बहुत रेयर होता है। उसको ज्यादातर इंट्राडे में काउंट किया जाता है। लेकिन अब हम बहुत ज्यादा एक्सट्रीमली शॉर्ट टर्म काइंड ऑफ ट्रेड्स नहीं करते हैं बिकॉज़ ऑफ़ हायर ट्रांजैक्शन कॉस्ट। तो, हम चाहते हैं कि हमें ज्यादा लंबा मूव मिल जाए विद द स्मॉलर काइंड ऑफ़ अ रिस्क। और हमारे पास जो नंबर ऑफ ट्रेड्स हैं वो बहुत ज्यादा ना हो। क्योंकि ओवरऑल कमोडिटीज का जो ट्रांजैक्शन कॉस्ट है चाहे स्टॉक से बहुत कम है बिकॉज़ ऑफ़ द लोअर सीटीटी कमोडिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स लेकिन फिर भी हमें ओवरपे करने की कोई जरूरत नहीं है। तो हम काफी हद तक अपने सिग्नल्स को फ़िल्टर आउट कर देते हैं ताकि हमारे पास लेस एंट्री सिग्नल्स हो और हमारी ओवरऑल चार्जेस जो हैं वो कम आए। तो हम इस टाइप की स्कैल्पिंग स्ट्रेटजीस डिवाइस करते हैं कि हमारे पास सिग्नल्स चाहे कम आए जिनका हायर दन बेटर स्ट्राइक रेट हो और हमें एक अच्छा ट्रैक्शन ऑफ़ द मूव भी मिल जाए। आपने कमोडिटीज मार्केट्स में एक और चीज को नोट किया होगा कि कई बार जब मूव आते हैं तो फिर वह काफी एक्सटेंड कर जाते हैं और आपने इस टर्म को बहुत सुना होगा मीन रिवर्ज़न कि रिवर्ट टू द मीन आएगा वापस अपने मीन पर आएगा तो अगर मार्केट चल रहा है क्रूड ऊपर जा रहा है या गोल्ड ऊपर जा रहा है तो उसको शॉर्ट कर देते हैं या अगर सिल्वर नीचे जा रहा है नीचे गिरता ही जा रहा है तो उसको लॉन्ग कर देते हैं और कितना ही गिरेगा। तो ऐसे टाइप के जो वेग स्टेटमेंट्स हैं उस पर ट्रेड करने की जरूरत नहीं है कि और कितना बढ़ेगा या और कितना गिरेगा। हम उसको प्रॉपर सिस्टेटिकली भी ट्रेड कर सकते हैं विथ द मीन रिवर्ज़ सिस्टम। अब इस मीन रिवर्ज़ सिस्टम में हम बहुत जबरदस्त दो इंडिकेटर्स ऐड करने वाले हैं जो सिर्फ धन के प्लेटफार्म पर ही मिलेंगे आपको। सबसे पहले आपको आना है धन चार्ट्स पर और धन चार्ट्स पर आकर आपको इंडिकेटर्स लोड करने हैं। पहला इंडिकेटर जो इंस्टॉल करना है आपको लोड करना है अपने चार्ट्स पर वो है Zee स्कोर। Zee स्कोर होता है जो प्राइस है अपने मीन से स्टैटिस्टिकली कितना डेविएशन दूर है? वन डेविएशन दूर है, टू डेविएशन या थ्री डेविएशन या उससे ज्यादा। हमारे लिए टू डेविएशन सबसे ज्यादा जरूरी है। हम उसको बाय डिफॉल्ट ही रखने वाले हैं। तो हम पहला इंडिकेटर ये ऐड कर लेंगे। Zee Score। अभी जो ऊपर मैंने इंडिकेटर ऐड किया हुआ है Hulsw उसको इग्नोर करके चलते हैं। हम इस इंडिकेटर को समझ लेते हैं कि Zesर इंडिकेटर कर क्या रहा है। तो क्या करता है? आप इंडिकेटर में आपको दिखेंगे यहां पर -1, -2 और +1 और +2। यहां पर आपको सिर्फ चार चीजें दिखेंगी और ज़ीरो। अब जो ज़ीरो है वह मीन है। मीन के पास प्राइस चल रहा है। लेकिन जैसे आप यह मान कर चलो एक ट्रैफिक है। अगर वह सेंटर में एक लेन है। चाहे वह यहां पर जाए उसका एक +3 स्टैंडर्ड डेविएशन इधर है और -3 स्टैंडर्ड डेविएशन इधर है। घूम कर जो बकर होते हैं कॉलेज के जो बकर्स होते हैं बहुत रैश ड्राइव कर रहे हैं और इधर से उधर लेन चेंज कर रहे हैं। वो बार-बार टू द मीन वापस आते ही रहते हैं। तो जो कमोडिटीज के प्राइसेस हैं कई बार रिवर्ट टू द मीन करते ही हैं। विथ दैट बेस अंडरस्टैंडिंग कि कमोडिटीज के जो प्राइसेस हैं वो मीन रिवर्ट करते ही हैं। इसलिए करते हैं कमोडिटीज मार्केट जो है वो फिजिकल मार्केट है। अगर प्राइसेस बहुत गिरना स्टार्ट करते हैं तो बयरर्स आके उसको सपोर्ट करते हैं। उनको डिलीवरी लेनी है और अगर प्राइसेस बहुत बढ़ जाते हैं तो सेलर्स अपने जिनके पास डिलीवरी पड़ी है उसको बेचना स्टार्ट कर देते हैं उनको जब एक्स्ट्रा सुपर नॉर्मल प्रॉफिट्स होने स्टार्ट हो जाते हैं। सो प्राइसेस ऑटोमेटिकली स्टेबलाइज़ इकोनॉमिक्स है। बेसिक इकोनॉमिक्स है। प्राइस अगर बिय्ड एक थ्रेशहोल्ड चला जाता है तो या तो सप्लायर्स आ जाएंगे मार्केट में या फिर बायरर्स आ जाएंगे मार्केट में। इसीलिए कमोडिटीज़ का मार्केट जो है ज्यादातर रिवर्ट टू द मीन करता है। इसीलिए यह थ्योरी बहुत ज्यादा वैलिड भी है। मिड कैप्स में, स्माल कैप्स में यह थ्योरी इतनी वैलिड नहीं होती है। इसलिए हम इस चीज को हर जगह इंप्लीमेंट नहीं कर सकते हैं। इसी थ्योरी को कमोडिटीज के स्ट्रेटजीस को कमोडिटीज में ही इंप्लीमेंट करना है। कहीं और इंप्लीमेंट नहीं करना है। हमारे पास ये क्वेश्चंस कई बार कमेंट्स में आते हैं कि इस स्ट्रेटजीस को हम स्टॉक्स में इंप्लीमेंट कर सकते हैं या इंडेक्स में कर सकते हैं। हमारा एक स्टैंडर्ड आंसर है कि अगर हम कोई कमोडिटीज का स्ट्रेटजी आपको बता रहे हैं तो वो उसको आप कमोडिटीज में ही इंप्लीमेंट कीजिए। उसको ज्यादा स्टॉक्स में या इंडेक्स में लेकर मत जाइए। क्योंकि कमोडिटीज की स्ट्रेटजीस का एक नेचर है। कमोडिटीज का एक अपना एक इनहेरेंट प्राइस का एक मूवमेंट का एक नेचर है। उसको आप हर जगह पर रेप्लिकेट नहीं कर सकते हो। तो इस स्ट्रेटजी को आप कमोडिटीज में ही इंप्लीमेंट कीजिए। तो अब जहां पर हमने देख लिया कि कमोडिटीज का जो प्राइसेस हैं वो रिवर्ट टू द मीन करते हैं। वो एक बेसिक इकोनॉमिक्स है। तो अब हम उस चीज को प्ले आउट कैसे कर सकते हैं। सो यहां पर हमने क्रूड ऑयल के प्राइसेस देखे। क्रूड ऑयल के प्राइसेस गिर रहे हैं। यहां पर हमने 15 मिनट का चार्ट लगाया है। 15 मिनट के चार्ट से आप स्टार्ट कर सकते हैं ताकि आपको मार्केट थोड़ा समझ में भी आए। लेकिन जैसे-जैसे आपका मार्केट पर ग्रिप इनक्रीस हो जाएगा, कंसंट्रेशन इंक्रीज हो जाएगा, आपके रिफ्लेक्सेस बेटर हो जाएंगे या आप इवनिंग में ज्यादा वोलेटाइल टाइम पर ट्रेड कर रहे हो तो आप इस चीज को 5 मिनट के टाइम फ्रेम पर भी ट्रेड कर सकते हो। लेकिन जैसे-जैसे आपका ग्रिप इंक्रीस हो जाएगा ट्रेडिंग सिस्टम्स पर, ट्रेडिंग स्ट्रेटजीस पर और आपका कंसंट्रेशन इंक्रीस हो जाता है और आपका पूरा रिस्क मैनेजमेंट, पोजीशन साइजिंग, स्टॉप लॉसेस, प्रॉफिट टेकिंग ये सारा कुछ जो है रिफ्लेक्सेस पर आ जाता है। इन दैट केस आप इसको ऑटोमेटिकली 5 मिनट पर भी लेकर आ सकते हो। बट प्रेफरेबली स्टार्ट विद 15 मिनट ताकि आपके पास थोड़ा ईज़ हो, सोचने के लिए, टाइम हो, आपका समझने के लिए, डिसीजन मेकिंग के लिए। आपके पास थोड़ा सा टाइम एडवांटेज होगा। एक्स्ट्रा टाइम होगा तो आप उस चीज में यू कैन जस्ट फ्लो इन और आपके पास थोड़ा सा कुशन होगा समझने के लिए ट्रेडिंग सिस्टम को। अब यहां पर हम यह नहीं कर रहे हैं। यहां पर कोई डायवर्जेंस नहीं कर रहे हैं। यहां पर हमें एक सिंपल सी चीज फॉलो करनी है कि जब Zee स्कोर -2 के नीचे आएगा और उसके बाद ऊपर आ रहा है। ऐसे केस में जब ये huls स्वीट के प्राइस के ऊपर आता है। हम ऐसे केस में प्राइस को लॉन्ग कर लेंगे। उस कमोडिटी को लॉन्ग कर लेंगे। अब यहां पर जो हमने सेकंड इंडिकेटर जो ऐड किया था उस इंडिकेटर के बारे में बात कर लेते हैं। यह सेकंड इंडिकेटर Hulsit है। यह अपने आप में ही बिल्कुल सफिशिएंट है वैसे तो इंडिकेटर लेकिन हम इस इंडिकेटर को एंट्री और एग्जिट के लिए यूज़ करने वाले हैं। दिस इंडिकेटर इज़ कॉल्ड Hulsit। यहां पर आप HUL ऐड करेंगे तो आपको Hul मिल जाएगा। यह Hul मूविंग एवरेज के बेसिस पर है। तो Hul मूविंग एवरेज के बेसिस पर यह वाला इंडिकेटर है। आपको रेड और ग्रीन इसको सिंपलीफाई कर दिया गया है हमारे ट्रेडिंग प्लेटफार्म पर। यह आपको धन चार्ट्स पर ही मिलेगा। Hulsweet एंड Zeecore। अब इस ट्रेडिंग सिस्टम को इन अ नटशेल हम कैसे समझ सकते हैं कि Zee Score हमें एक बता रहा है कि किस एक्सटेंट तक जा चुका है मार्केट और वहां से रिवर्ट बैक कर सकता है टू द मीन। लेकिन हमें एंट्री कब करनी है? एंट्री तब करनी है जब वो Huls स्वीट को क्रॉस करे। जब वो Huls स्वीट को क्रॉस करेगा और हमें ग्रीन या रेड उसके फेवर में दिखेगा अपना कलर तब हम उस टाइम पर एंटर कर जाएंगे। अब हम इस चीज को थोड़ा प्रिसाइजली समझ लेते हैं कि हमें एंट्री और एग्जिट कब करनी है। ब्रॉडली हमें ये चीज समझ में आ चुकी है कि जब जी स्कोर -2 के ऊपर जाएगा -2 तक आ चुका है तो हमें लॉन्ग्स के लिए हंट करना है या जी स्कोर +2 के ऊपर जाएगा तो हमें शॉर्ट्स के लिए हंट करना है। तो हमें ऐसे केस में एक बेसिक चीज समझ में आ चुकी है। लेकिन हमें एंट्री और एग्जिट कब करनी है। अब हम उस चीज को समझ लेते हैं। तो हम यहां पर देख लेते हैं कि हमें एंटर कब करना है। सो फॉर इंस्टेंस यहां पर जी स्कोर +2 के ऊपर था। अब Zee स्कोर जो है - +2 से नीचे आ रहा है। तो हम ऐसे टाइम पर एंटर नहीं करेंगे। हम एंटर कब करेंगे? जब प्राइस नीचे आ जाएगा Huls के। यह क्रॉस डाउन हो रहा है। यह हमारा शॉर्ट का सिग्नल है। सो विद दिस शॉर्ट सिग्नल वी एंटर द शॉर्ट। और यहां पर जब हम शॉर्ट एंटर कर रहे हैं, हमारा स्टॉप लॉस बन जाता है यह वाला हाई। सिंपल सी बात है। आप सुपर ऑर्डर का यूज़ कीजिए। यहां पर जब हम शॉर्ट एंटर कर रहे हैं। यह एक स्टॉप लॉस बन गया। जब स्टॉप लॉस बन गया। जितना भी डिस्टेंस है हमारा स्टॉप लॉस का सपोज 50 पॉइंट है, 100 पॉइंट है। अगर 100 पॉइंट है तो हमें 150 पॉइंट या 200 पॉइंट का एक टारगेट लगा के भी छोड़ देना है। सुपर ऑर्डर की यह खासियत है कि आप उसमें एक स्टॉप लॉस लगा रहे हो। एक साइमलटेनियसली एक टारगेट लगा दो और 10-10 पॉइंट का एक ट्रेल लगा दो या पांच पॉइंट का एक ट्रेल लगा दो या सिर्फ एक एक पॉइंट का ट्रेल लगा के छोड़ दो। जैसे ही आपने ट्रेड एंटर किया उसके बाद आपको देखने की भी जरूरत नहीं है। उसके बाद वो ट्रेड ऑटोमेटिकली स्क्वायर ऑफ हो जाएगा। व्हाटएवर कम्स फर्स्ट। एक ट्रेड के साथ एक इमोशनल डिटचमेंट होनी चाहिए। यह एक ट्रेडिंग का एक सबसे बड़ा पैराडॉक्स यह है कि चाहे आपको चाहिए आपने बहुत बड़ा होमवर्क किया, यू रियली वांट टू सक्सीड एज अ ट्रेडर। लेकिन आपका जो नेक्स्ट ट्रेड है, आपको उससे डिटच्ड रहना है। क्योंकि हमें यह नहीं पता कि नेक्स्ट ट्रेड का आउटकम क्या होगा। हमें सीक्वेंसेस ऑफ विंस एंड सीक्वेंसेस ऑफ लॉसेस नहीं पता होते। लेकिन हमें यह पता है नेक्स्ट 10 ट्रेड्स, नेक्स्ट 20 ट्रेड्स में हमारा जो एज है, जो हमारा ट्रेडिंग सिस्टम का जो एज है, जो उसका जो स्ट्रेंथ है, वो प्ले आउट हो जाएगी। लेकिन हमारे पास नेक्स्ट ट्रेड का आउटकम का कोई भी गारंटी नहीं होती है। नेक्स्ट ट्रेड का आउटकम नहीं पता होता है। दिस वाज़ वेरी क्लियरली सेड बाय मार्क डगलस इन ह बुक ट्रेडिंग इन द ज़ोन कि हमें सीक्वेंसेस ऑफ विंस एंड लॉसेस नहीं पता होते तो हमें अपने एज को प्ले आउट होने देना होता है फॉर द नेक्स्ट 10 ट्रेड्स 20 ट्रेड्स फॉर द नेक्स्ट 50 ट्रेड्स तब तक हमें जो नेक्स्ट ट्रेड्स है हमें डिटच्ड रहना होता है। सो, यहां पर हमने सुपर ऑर्डर के थ्रू एंटर कर लिया शॉर्ट और उसके बाद हमने छोड़ दिया स्टॉप लॉस लगा के यहां ऊपर और टारगेट 2x ऑफ़ द स्टॉप लॉस लगाकर हमने छोड़ दिया अलोंग विथ द ट्रेल। सिमिलरली यहां पर हमारे पास एक ज़ी स्कोर -2 तक गया। लेकिन उसके बाद हमें एक एंट्री प्रॉपर नहीं मिली। यह टच एंड गो सिनेरियो था और उसके बाद हमें एक सेकंड एंट्री मिली। एट दैट पॉइंट ऑफ़ टाइम प्रॉपर हuls स्वीट को क्रॉस किया। एट अगेन हमने सुपर ऑर्डर रखा लॉन्ग के लिए और हमने उसको प्ले आउट होने दिया। येट अगेन आवर टारगेट गॉट हिट। एंड अगेन ऐसे केस में आपको क्या होगा कि अगर बैक टू बैक आप कॉन्सक्यूटिव विनर्स देखोगे कंजक्यूटिव विनर्स देखने के बाद आपको लगेगा कि ये सिस्टम तो बहुत ही अच्छा सिस्टम है। ये सिस्टम में तो मेरे पास जहां पर मेरे पास 10 लाख थे मैं उसी में डबल कर देता हूं क्वांटिटी या डबल कर देती हूं क्वांटिटी और आप 20 लैक्स कर दोगे क्वांटिटी और 30 लै लगाना स्टार्ट कर दोगे ऐसे केस में आपको ट्रेड नहीं करना है। आपको एक ट्रेडिंग सिस्टम को कम से कम 3 महीने 6 महीने तक एक सिंगल क्वांटिटी के साथ ट्रेड करना है ताकि आपके पास एक इनफ डाटा बन जाए कि कितने विंस और कितने लॉसेस थे। कितने क्सक्यूटिव विनर्स थे, कितने क्सक्यूटिव लूजर्स थे, उसके हिसाब से पोजीशन साइजिंग करी जाती है। एक माइंड बन जाता है कि आपको कितना कैसे रिस्क परसेप्शन के हिसाब से ही ट्रेड को क्वांटिटी को प्ले आउट करना होता है। अगेन येट अगेन यहां पर एक हमें जी स्कोर फिर से -2 के नीचे जाता हुआ दिखा। वो कितना भी जा सकता है -3, -4 जितना भी जाए। हमारा एक सेटअप क्लियर हो जाता है जब वो -2 के नीचे जाता है कि हमें उसके बाद सिर्फ लॉन्ग को हंट करना है। जब वो हल स्वीट क्रॉस करेगा तब हमें लॉन्ग करना है। अब ऐसे केस में हमने यहां पर लॉन्ग किया और तीन बार्स के बाद ही हमारा स्टॉप लॉस ट्रिगर हो गया। पांच बार्स के बाद वो नीचे आने लगा और उसके बाद स्टॉप लॉस ट्रिगर हो गया। सो हमें स्टॉप लॉसेस का भी ध्यान देना है। जब आप ओवर कॉन्फिडेंस ज़ोन में जाओगे तो मार्केट आपको ऑटोमेटिकली लेवल डाउन कर देगा। उसी को कहते हैं व्हाई इज़ इट कॉल्ड मार्केट इज़ द बिगेस्ट लेवलर। आपका कभी भी ओवर कॉन्फिडेंस नहीं हो सकता। आपका कभी भी जजमेंट जो है वह सब्जेक्टिव ही रहेगा। आप हमेशा दो या पांच ट्रेड्स या 10 ट्रेड्स के बेसिस पर अपनी पोजीशंस को इंक्रीस मत करो क्वांटिटीज़ को। यू हैव टू लेट इट प्ले फॉर 3 मंथ्स, सिक्स मंथ्स बिफोर यू डिसाइड कि मैं क्वांटिटी को डबल कर देता हूं ताकि अपनी क्वांटिटी को कैपिटल को डबल करना है। उस चीज को आपका जो डिसीजन है वो तीन या 6 महीने की कंटीन्यूअस ट्रेडिंग के बाद ही होना चाहिए। सेकंड टाइम हमें जब ट्रेड मिला तो ऐसे केस में ट्रेड अच्छा मिला हमें। यहां पर एक और क्रॉसओवर मिला। लेकिन फिर से स्टॉप लॉस ट्रिगर हुआ। थर्ड क्रॉसओवर हमें बहुत ही अच्छा मिला एंड देयर वी कुड राइड हाई और हमें टू टाइम्स द टारगेट भी मिला। और अगर आप उसको जब आप प्रोफिशिएंट हो जाओगे इस ट्रेडिंग सिस्टम में तब आप हायर्ड क्वांटिटी रख सकते हो और फिर आप 2x तक का जो टारगेट है वो कुछ क्वांटिटी तक रखो एंड फॉर द रेस्ट यू कैन लेट इट राइड। तो ये जो प्रोफिशिएंसी ऑफ़ ट्रेडिंग सिस्टम है ये कम से कम 6 महीने 8 महीने के बाद आती है क्वांटिटी ट्रेड करते-करते। अदरवाइज आपकी ए्जायटी हमेशा ज़्यादा रहती है कि व्हाट इफ माय स्टॉप लॉस गेट्स ट्रिगरर्ड। व्हाट इफ दैट हैपेंस। ऐसे केस में आपको ट्रेलिंग स्टॉप लॉस रखना होता है। जब आपका 3- 66 महीने के बाद एक प्रॉफिट का बफर बन जाए तो आपको क्या करना है कि क्वांटिटीज इंक्रीस करके उसका एक ट्रेलिंग स्टॉप लॉस लगा दो और ट्रेलिंग स्टॉप लॉस एंड लेट इट राइड अंटिल इट ब्रेक्स अगेन बिलो हul स्वीट अंटिल देन यू जस्ट लेट द प्रॉफिट्स राइड। तो वो आपको एक सुपर नॉर्मल प्रॉफिट दे सकता है। लेकिन दैट एक्स्ट्रा वेरी मिनिमल क्वांटिटी। तो वो जो वेरी मिनिमल क्वांटिटी जब आती है वो सिर्फ तभी आती है जब आपके पास एक प्रोफिशिएंसी ऑफ़ ट्रेडिंग सिस्टम बन जाती है आफ्टर ट्रेडिंग इट फॉर सेवरल मंथ्स। अब यह तो हमने देखा क्रूड ऑयल में। इसी चीज को आप नेचुरल गैस में भी ट्रेड कर सकते हो। सिमिलरली हमने यहां पर देखा -2 के नीचे गया। उसके बाद हमने एक लॉन्ग किया। लॉन्ग करने के बाद क्या हुआ कि वो स्टॉप लॉस ट्रिगर नहीं हुआ। लेकिन उसके बाद हमें धीरे-धीरे करके पूरे दिन के बाद प्रॉफिट मिला। अब यहां पर जो एंट्री थी वो एक गैप अप से एंट्री थी। सो यू मस्ट लेट इट अ वेट। और उसके बाद अगर एंट्री मिल रही है प्रॉपर क्रॉसओवर के बाद तो एंटर करना है वरना ट्रेड को छोड़ देना है। कई बार आपको ऐसे भी होगा टेंप्टेशन कि यहां पर हमने शॉर्ट किया और शॉर्ट करने के बाद एक स्टॉप लॉस ट्रिगर भी नहीं हुआ और फिर दिन खत्म हो गया और वो एग्जिट करना पड़ा। ऐसे टाइम भी होता है एंड देन अगेन इट जस्ट एग्जिट्स वायर द ट्रेल स्टॉप लॉस। तो ऐसे केस में क्या हुआ है कि हमने शॉर्ट एंटर किया। इट जस्ट टच्ड स्टॉप लॉस मार्क एंड देन इट केम डाउन एंड फिर शायद जाते-जाते हमारा ट्रेलिंग स्टॉप लॉस ट्रिगर हो गया होगा। तो हमें कुछ नेट प्रॉफिट, नेट लॉस कुछ भी नहीं हुआ। ब्रेक इवन पर भी ट्रेड एग्जिट कर गया। एंड देन जो सेकंड एंट्री मिली उसने हमें एक सुपर नॉर्मल प्रॉफिट दे दिया। अगर हम प्रोफिशिएंट ट्रेडर के फॉर्म में ट्रेड कर रहे हो विद अ हायर क्वांटिटी एंड वी आर लेटिंग द प्रॉफिट्स राइड। ऐसे केस में हमने जो स्टॉप लॉस रखा था वो स्टॉप लॉस कि हमें 2x से कहीं ज्यादा प्रॉफिट हुआ। प्रोवाइडेड वी हैड ट्रेडेड दिस सिस्टम फॉर मोर देन सिक्स मंथ्स। इस चीज में दो कॉम्बिनेशंस हैं। मीन रिवर्ज़ है जहां पर हम देख रहे हैं +2 स्टैंडर्ड डेविएशन के बाद शॉर्ट कर रहे हैं या -2 स्टैंडर्ड डेविएशन के बाद लॉन्ग कर रहे हैं। और दूसरी चीज हम इसको ट्रेंड से कैच अप भी कर रहे हैं। ट्रेंड से फॉलो थ्रू भी कर रहे हैं। तो इस ट्रेडिंग सिस्टम में मीन रिवर्ज़ प्लस ट्रेंड फॉलोइंग दोनों का कॉम्बिनेशन है। सो मीन रिवर्ज़ से आप स्टार्ट करेंगे ताकि आपका जो है एक तरीके से कंजर्वेटिव ट्रेडिंग बनना स्टार्ट हो जाए। प्रॉफिट बफर बनना स्टार्ट हो जाए। एंड वंस यू हैव अ प्रॉफिट बफर इन द अकाउंट देन यू कैन आल्सो फॉलो द ट्रेंड फॉलोइंग पार्ट ऑफ इट। कि आप अपने एक्स्ट्रा क्वांटिटी को लेट इट राइड टिल इट ट्रेल्स एंड हिट्स द हल स्वीट अगेन। टिल देन यू कैन जस्ट लेट द प्रॉफिट्स राइड। सो इसमें मीन रिवर्ज़ प्लस ट्रेंड फॉलोइंग दोनों है। ऐसी चीज बहुत रेयर ट्रेडिंग सिस्टम्स में होती है। लेकिन इस ट्रेडिंग सिस्टम में है। सो अगेन हमने यहां पर देखा कुछ स्टॉप लॉसेस के ट्रेड्स भी समझ लेते हैं। बिकॉज़ स्टॉप लॉसेस भी होते रहते हैं मार्केट्स में। तो ट्रेडिंग में ऐसे केस में यहां पर प्लस टू स्टैंडर्ड डेविएशन हिट किया और उसके बाद हमने यहां पर शॉर्ट किया। शॉर्ट के बाद हमने एक स्टॉप लॉस लगाया और यहां जाकर पूरा दिन लगाने के बाद वो स्टॉप लॉस ट्रिगर हो गया। सो ऐसे केस में हमें स्टॉप लॉसेस भी ट्रिगर होते रहेंगे। वी हैव टू रिमेन प्रिपयर्ड फॉर द स्टॉप लॉसेस आल्सो। यह सिल्वर का स्टॉप लॉस था। लेकिन यहां पर हमारा सेकंड वाले ट्रेड में जो सिल्वर का जो ट्रेड था पुराना ट्रेड है जहां पर हमें एक -2 के बाद लॉन्ग की एंट्री मिली। थोड़ा सा एक जंप मिला और उसके बाद आकर हमारा एक स्टॉप लॉस हिट हो गया। तो हमें कई बार ऐसा भी होगा कि थोड़ा सा प्रॉफिट दिखा अकाउंट में और उसके बाद फिर से लॉस ट्रिगर हो गया। सो ऑलदो दिस ट्रेडिंग सिस्टम हैज़ अ वेरी गुड स्टैटिस्टिकल बेस टू इट, स्टैटिस्टिकल स्ट्रेंथ टू इट और उसका स्ट्राइक रेट भी डिसेंट आ जाएगा। लेकिन फिर भी आपको लॉसेस के लिए प्रिपयर्ड रहना होगा। फॉर अ फ्यू कंजक्यूटिव लूजर्स आपका अकाउंट में हमेशा एक्स्ट्रा बफर रहना चाहिए ताकि अगर स्टॉप लॉसेस ट्रिगर हो रहे हैं तो हमेशा हमारे पास एक्स्ट्रा अकाउंट में पैसा रहना चाहिए। सो वि दैट माइंडसेट, रिस्क रिवॉर्ड और ऐसे केस में रिस्क परसेप्शन के साथ और विद दैट काइंड ऑफ़ एक्यूरेसी आप अपनी पोजीशन को धीरे-धीरे करके इंक्रीस कीजिए। आफ्टर 3 मंथ्स, आफ्टर सिक्स मंथ्स उसको इवैल्यूएट कीजिए और धीरे-धीरे अपनी पोजीशन को इंक्रीस कीजिए। एंड दिस इज़ अ वेरी स्ट्रांग ट्रेडिंग सिस्टम। मीन रिवर्जन प्लस ट्रेंड फॉलोइंग साइमलटेनियसली कैन बी डन ऑन स्कैल्पिंग विथ 15 मिनट्स एंड 5 मिनट बोथ। कीप लर्निंग न्यू थिंग्स एंड कीप फॉलोइंग अस ऑन कमोडिटीज बाय धन। [घंटी की आवाज़] इन्वेस्टमेंट्स इन द सिक्योरिटीज मार्केट आर सब्जेक्ट टू मार्केट रिस्क। रीड ऑल द रिलेटेड डॉक्यूमेंट्स केयरफुली बिफोर इन्वेस्टिंग।

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