Master Liquidity & Order Flow Trading Strategy | Smart Money Concepts Explained Hindi — backtested on Indian market data | FakeTrades
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Master Liquidity & Order Flow Trading Strategy | Smart Money Concepts Explained Hindi

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Analysed 01 Aug 2026, 03:28 PM IST
⏳ Backtest pending — a data-backed verdict will be attached.

Verdict

Not backtestable — no mechanical strategy to test. Educational content on liquidity, order flow, break-of-structure, and fair-value gaps with no mechanical entry/exit rules.

We only score videos that teach a rule-based strategy (a defined entry trigger, stop and exit a computer could follow). This one doesn't contain one, so there is nothing to backtest — we show no number rather than a made-up one.

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Full transcript (1747 words)
लिक्विडिटी मार्केट को ड्राइव करने वाली सबसे पावरफुल फोर्स है। लेकिन इसी को ट्रेडर्स सबसे ज्यादा गलत समझते हैं। ट्रेडर्स के दिमाग में हमेशा दो बड़ी कंफ्यूजन होती हैं। कौन सा लिक्विडिटी लेवल टारगेट हो रहा है और प्राइस उस लेवल को हिट करके कंटिन्यू करेगा या रिवर्स होगा। इस वीडियो में हम इसको सिर्फ चार सिंपल स्टेप्स में ब्रेकडाउन करेंगे ताकि आप ईजीली समझ सको। वीडियो के एंड तक आपको लिक्विडिटी का क्लियर आईडिया होगा और आप सीख जाओगे कैसे इसे यूज करके स्मार्टर एंट्रीज लेना है और कॉन्फिडेंस के साथ ट्रेड करना है। अगर आपको ट्रेडिंग के बारे में सीखना इंटरेस्टिंग लगता है तो लाइक बटन दबाना मत भूलना और हां सब्सक्राइब करो चैनल को और नोटिफिकेशन बेल ऑन करो ताकि जब भी हम नई वीडियो डालें आपको तुरंत अपडेट मिले। चलिए शुरू करते हैं। स्टेप वन है अलग-अलग टाइप्स ऑफ लिक्विडिटी समझना ट्रेडिंग में। लिक्विडिटी चार्ट के वह एरियाज होते हैं जहां एक लार्ज नंबर ऑफ पेंडिंग ऑर्डर्स या स्टॉप लॉस क्लस्टर्स होते हैं। यह मेनली दो फॉर्म में अपीयर होती है। पहली है एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी जो प्रीवियस स्विंग हाईज़ या लोज़ पर होती है। यह लेवल्स इंपॉर्टेंट होते हैं क्योंकि यह डिसाइड करते हैं कि मार्केट ट्रेंड कंटिन्यू करेगा या रिवर्स होगा। जब ऐसा होता है तो इसे लिक्विडिटी रंस या लिक्विडिटी स्वीप्स कहते हैं। दूसरी है इंटरनल रेंज लिक्विडिटी जिसे फेयर वैल्यू गैप्स भी बोलते हैं। यह लिक्विडिटी बेसिकली फ्यूल की तरह काम करती है एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी को अटैक करने के लिए। मतलब स्विंग हाईज और लोज़। दोनों तरीके की लिक्विडिटी को समझना इंपॉर्टेंट है क्योंकि इनके रिएक्शन से ही मार्केट की अगले मूव की क्लू मिलती है। स्टेप टू है ऑर्डर फ्लो। ऑर्डर फ्लो हमें गाइड करता है कि कौन सा लिक्विडिटी लेवल टारगेट हो रहा है। चार्ट एनालाइज करने का पहला स्टेप होता है ऑर्डर फ्लो को समझना। बुलिश है या बेरिश। यह डिपेंड करता है कि प्राइस बाय साइड लिक्विडिटी के थ्रू मूव कर रहा है या सेल साइड लिक्विडिटी के थ्रू। शुरू में यह कॉम्प्लिकेटेड लग सकता है। लेकिन इसको सिंपलीफाई करने के लिए सिर्फ दो चीजें याद रखनी होती हैं। ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर और चेंज ऑफ कैरेक्टर। समझने के लिए एक एग्जांपल लेते हैं। जब भी चार्ट पर एक नया स्विंग बनता है तो लिक्विडिटी लेवल दोनों जगह बनते हैं। स्विंग हाई और स्विंग लो। स्विंग हाई पर जो लिक्विडिटी होती है उसे बाय साइड लिक्विडिटी बोलते हैं और स्विंग लो पर होती है सेल साइड लिक्विडिटी। अब जब हम ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर और चेंज ऑफ कैरेक्टर की बात करते हैं तो फोकस होता है कि नया स्विंग बनते वक्त कौन सा लिक्विडिटी लेवल ब्रेक हुआ। इस केस में प्राइस ने बाय साइड लिक्विडिटी को तोड़ दिया। इसका मतलब मार्केट बुलिश ऑर्डर फ्लो में है। अब इस सिचुएशन में करंट ब्रेकअप स्ट्रक्चर लेवल होगा बाय साइड लिक्विडिटी क्योंकि बीओएस वही लेवल होता है जिसे तोड़ना जरूरी होता है ताकि ट्रेंड कंटिन्यू रहे और यहां अप ट्रेंड है। दूसरी तरफ चेंज ऑफ कैरेक्टर लेवल होगा सेल साइड लिक्विडिटी। क्योंकि अगर यह नीचे वाला लेवल ब्रेक हो गया तो इसका मतलब होगा कि बुलिश ऑर्डर फ्लो अब बेरिश में शिफ्ट हो रहा है। इस केस में प्राइस बाय साइड लिक्विडिटी के ऊपर ब्रेक करता है। जिससे ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर बनता है और अप ट्रेंड के कंटीन्यूएशन को कंफर्म करता है। अब इस नए बुलिश स्विंग के साथ एक नया सेट ऑफ ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर और चेंज ऑफ कैरेक्टर लेवल्स एस्टैब्लिश होते हैं। जिन्हें हम यूज़ कर सकते हैं इवैल्यूएट करने के लिए कि ट्रेंड आगे कंटिन्यू करेगा या नहीं। अब बड़ा सवाल यह है हम कैसे पहचाने कि ऑर्डर फ्लो वास्तव में रिवर्स हो गया है? चलो एक्सप्लेन करता हूं। यहां हमारे पास एक अप ट्रेंड है। नॉर्मली हम एक्सपेक्ट करते हैं कि प्राइस हायर लोस बनाएं ताकि ट्रेंड कंटिन्यू हो। लेकिन इंस्टेड प्राइस गिरता है और एक लोअर लो क्रिएट करता है। यह एक चेंज ऑफ कैरेक्टर है। पहला साइन कि ऑर्डर फ्लो बुलिश से बेरिश की तरफ शिफ्ट हो रहा है। इस पॉइंट पर यह लोअर लो नया ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर लेवल बन जाता है। जबकि पिछला स्विंग हाई चेंज ऑफ कैरेक्टर लेवल बन जाता है। क्योंकि अब वह स्विंग हाई वो की लेवल है जिसे ब्रेक करना होगा ताकि मार्केट दोबारा बुलिश ऑर्डर फ्लो में शिफ्ट हो सके। लेकिन हमें तुरंत अस्यूम नहीं करना चाहिए कि ट्रेंड बेरिश में फ्लिप हो गया है। क्योंकि यह चेंज ऑफ कैरेक्टर सिर्फ लिक्विडिटी स्वीप भी हो सकता है। ट्रू डाउन ट्रेंड कंफर्म करने के लिए हमें देखना होगा कि प्राइस ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर लेवल के नीचे ब्रेक करे। तो समरी यह है। ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर कंफर्म करता है ट्रेंड कंटिन्यूएशन को। जबकि चेंज ऑफ कैरेक्टर सिग्नल देता है ऑर्डर फ्लो में पॉसिबल रिवर्सल का। अब चलते हैं अगले स्टेप की तरफ। स्टेप नंबर थ्री है समझना कि एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी का रिलेशन इंटरनल रेंज लिक्विडिटी से कैसे होता है। इस एग्जांपल में मार्केट अप ट्रेंड में है जिसे कंफर्म किया गया है एक बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर से क्योंकि प्राइस पिछले स्विंग हाई से ऊपर चला गया। अब इस नए बुलिश स्विंग के इस्टैब्लिश होने के बाद हम करंट एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी लेवल्स आइडेंटिफाई कर सकते हैं। क्योंकि स्ट्रक्चर यहां बुलिश है। हम एंटीिसिपेट कर सकते हैं कि प्राइस अपर बाय साइड लिक्विडिटी लेवल की तरफ एम करेगा। लेकिन ऐसा करने के लिए मार्केट को पहले सपोर्ट एस्टैब्लिश करना पड़ेगा जो अगला बुलिश मूव ड्राइव कर सके। यहीं पर हम पिछले स्विंग को देखते हैं बुलिश इंटरनल रेंज लिक्विडिटी के लिए जो अक्सर बुलिश फेयर वैल्यू गैप के रूप में दिखता है। मार्केट इसका यूज करता है मोमेंटम के तौर पर ताकि बाय साइड एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी को ब्रेक कर सके। मतलब सिंपल वर्ड्स में मार्केट इंटरनल रेंज लिक्विडिटी को टैप करता है और उसे फ्यूल की तरह यूज करता है एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी पर अटैक करने के लिए। यह मूवमेंट अब एक नया स्विंग बना चुका है जिसके अपने एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी लेवल्स हैं। अगर हम एक्सपेक्ट करते हैं कि अपटेंड कंटिन्यू होगा तो हमें फिर से इस नए स्विंग के अंदर देखना होगा बुलिश फेयर वैल्यू गैप के लिए जिसे प्राइस फ्यूल की तरह यूज करेगा अगले अपवर्ड लेग के लिए। समरी में अपटेंड के दौरान इंपल्सिव मूव्स आमतौर पर पीछे छोड़ जाते हैं। इंटरनल रेंज लिक्विडिटी जो बुलिश फेयर वैल्यू गैप्स के रूप में होते हैं। बाद में मार्केट इन गैप्स का यूज करता है प्राइस को ड्राइव करने के लिए बाय साइड एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी से ऊपर और नए हायर हाई एस्टैब्लिश करने के लिए। डाउन ट्रेंड के लिए भी यही कांसेप्ट अप्लाई होता है। बस इसके ठीक उल्टा। अगर हम एंटीिसिपेट करते हैं कि प्राइस सेल साइड एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी से नीचे ब्रेक करेगा तो हमें पिछले इंपल्सिव बेरिश स्विंग को देखना होगा इंटरनल रेंज लिक्विडिटी के लिए जो अक्सर बेरिश फेयर वैल्यू गैप के रूप में आता है और यही फ्यूल बनता है प्राइस को सेल साइड एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी तक ले जाने के लिए। यही कनेक्शन है इंटरनल और एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी के बीच और यही बताता है कि ट्रेंडिंग मूव्स चार्ट में कैसे बिल्ड होते हैं। इसको टेक्निकल एनालिसिस करते समय ध्यान में रखना बहुत जरूरी है क्योंकि जब इंटरनल रेंज लिक्विडिटी होल्ड नहीं करता तो यह अर्ली इंडिकेशन होता है कि मार्केट शायद चेंज ऑफ कैरेक्टर लेवल को टारगेट करेगा और इससे पूरा ट्रेंड रिवर्सल सिग्नल हो सकता है। अगला स्टेप है समझना लिक्विडिटी रंस और लिक्विडिटी स्वीप्स का डिफरेंस और उससे भी ज्यादा इंपॉर्टेंट एंटीिसिपेट करना कि कौन सा होगा। जब प्राइस किसी एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी लेवल पर पहुंचता है, चाहे वह प्रीवियस स्विंग हाई हो या स्विंग लो, तो उसके दो आउटकम्स हो सकते हैं। या तो प्राइस उसी डायरेक्शन में कंटिन्यू करेगा जिसे हम लिक्विडिटी रन कहते हैं या फिर वहीं से रिवर्स होगा जिसे लिक्विडिटी स्वीप कहते हैं। यह सुनने में सिंपल लगता है, लेकिन सच में प्रेडिक्ट करना कि प्राइस इन लिक्विडिटी लेवल्स पर कैसे रिएक्ट करेगा, यह ट्रेडर्स के लिए सबसे बड़ी चैलेंजेस में से एक है। चलो अब लिक्विडिटी रंस को एग्जामिन करना शुरू करते हैं। इस एग्जांपल में हमारे पास एक स्विंग हाई है जो करंट एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी की तरह एक्ट कर रहा है और प्राइस उसे टारगेट कर रहा है। फिर प्राइस ऊपर पुश करता है और उस लेवल के ऊपर क्लोज कर देता है। लेकिन जब ऐसा होता है तब भी इसे लिक्विडिटी रन नहीं माना जाता। यह बस एक ब्रेकउ क्रिएट करता है। हमें जो देखना है वह है एक और बुलिश कैंडल जो फेयर वैल्यू गैप बनाए और वह एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी के ब्रेकआउट को ओवरलैप करें। यह इंपॉर्टेंट है क्योंकि बुलिश मूव को कंटिन्यू करने के लिए मार्केट को एक इंटरनल रेंज लिक्विडिटी इस्टैब्लिश करनी होगी जो अगली रिट्रेसमेंट के दौरान सपोर्ट का काम करेगी। अब चलते हैं लिक्विडिटी स्वीप्स की तरफ। इस केस में हमारे पास एक और स्विंग हाई है जो लिक्विडिटी टारगेट की तरह एक्ट कर रहा है। लेकिन इस बार जब प्राइस ने लेवल को तोड़ा तो वह उसके ऊपर क्लोज नहीं कर पाया और तुरंत रिवर्स हो गया कैंडल विक से उस लेवल को रिजेक्ट करते हुए। यह बयरर्स की सिग्निफिकेंट वीकनेस दिखाता है और कॉमनली इसे फेक आउट कहा जाता है जो यह स्ट्रांगली इंडिकेट करता है कि लिक्विडिटी स्वीप हो रहा है। इस पॉइंट से हम एंटीिसिपेट करते हैं ऑर्डर फ्लो में शिफ्ट जिसका मतलब है कि अब हमें सेलिंग ओपोरर्चुनिटीज देखनी चाहिए। लेकिन अभी शॉर्ट पोजीशंस में एंटर नहीं करेंगे। क्योंकि जैसा हमने पहले मार्केट स्ट्रक्चर कांसेप्ट्स में सीखा। हमें पहले देखना होगा कि प्राइस पिछले स्विंग लो से नीचे ब्रेक करे जिससे एक चेंज ऑफ कैरेक्टर बने। यह होगा ऑर्डर फ्लो शिफ्ट का दूसरा कंफर्मेशन। उसके बाद फाइनल फैक्टर जिस पर ध्यान देना है, वह यह कि क्या यह बेरिश लेग एक बेरिश फेयर वैल्यू गैप बनाता है या नहीं? क्योंकि वही रेजिस्टेंस का काम करेगा। प्राइस को और नीचे ड्राइव करेगा। एक नया ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर क्रिएट करेगा और कंफर्म करेगा कि मार्केट ऑफिशियली बेरिश ऑर्डर फ्लो में शिफ्ट हो चुका है। यह टिपिकल सेटअप है जो हम अक्सर देखते हैं जब मार्केट एक लिक्विडिटी स्वीप फॉर्म करता है। की पॉइंट याद रखने वाली बात यह है कि हमें ट्रेड्स सिर्फ एक्सटर्नल रेंज लिक्विडिटी पर प्राइस की रिएक्शन देखकर नहीं लेनी चाहिए। हमें देखना होगा कि मार्केट स्ट्रक्चर कैसे डेवलप हो रहा है और एंट्रीज तभी लेनी चाहिए जब क्लियर डायरेक्शनल बायस स्टैब्लिश हो जाए। अगर आपको यह वीडियो हेल्पफुल लगा हो तो लाइक बटन जरूर दबाएं और कमेंट करें कि अगला कौन सा ट्रेडिंग कांसेप्ट आप चाहते हैं हम कवर करें। हैप्पी ट्रेडिंग।

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