Master ICT + SMC Trading in 3 Hours | Full ADVANCE Trading Course | ICT Trading | SMC Trading — backtested on Indian market data | FakeTrades
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Master ICT + SMC Trading in 3 Hours | Full ADVANCE Trading Course | ICT Trading | SMC Trading

Neeraj joshi · watch on YouTube ↗
Analysed 09 Sep 2026, 03:31 AM IST
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Liquidity/ICT

Verdict

Not backtestable — no mechanical strategy to test. Educational content on ICT (Inner Circle Trader) theory, market structure, liquidity, and price action concepts; no mechanical buy/sell rules or backtestable triggers provided.

We only score videos that teach a rule-based strategy (a defined entry trigger, stop and exit a computer could follow). This one doesn't contain one, so there is nothing to backtest — we show no number rather than a made-up one.

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Full transcript (48499 words)
अगर आपको ट्रेडिंग की बेसिक नॉलेज है ना तो अगले 4 घंटे में आपको इंस्टीट्यूशनल लेवल की नॉलेज हो जाएगी। मतलब मैं आपको एडवांस कांसेप्ट बहुत ज्यादा डिटेल में बताने वाला हूं। जिसमें हम मार्केट स्ट्रक्चर फ्रैक्टल लिक्विडिटी प्रीमियम डिस्काउंट, डिस्प्लेसमेंट, एफवीजी, ऑर्डर ब्लॉक, ओटीई, मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस, टाइम कांसेप्ट और इसके अलावा बहुत सारी चीजों के बारे में बात करने वाले हैं। और लास्ट में मैं इन सारी चीजों को एक साथ कैसे यूज़ करना है, यह भी आपको बताऊंगा। यानी पूरी एडवांस लेवल की ट्रेनिंग आपको YouTube में फ्री में सिखा रहा हूं। लेकिन इसको देखने से पहले दो कंडीशन है। सबसे पहला तो आपको ट्रेनिंग की बेसिक नॉलेज होनी चाहिए। अगर बेसिक नॉलेज नहीं है तो यह सब कुछ आपको समझ नहीं आएगा। तो बेसिक नॉलेज लेने के लिए पहले आप YouTube में प्लेलिस्ट वाले सेक्शन पे जाओ और यहां पर 10 वीडियो की आपको प्लेलिस्ट देखने को मिल रही है। इसको देख लेना। इसमें 5 से 6 घंटे लगेंगे। लेकिन अगर देखने के साथ-साथ नोट्स बनाओगे तो आपको बेसिक पूरे आपके क्लियर हो चुके होंगे। तो पहले इस वीडियो को आप लाइक कर लो, वॉच लेटर में सेव कर लो और फिर उस प्लेलिस्ट को देख लो। लेकिन अगर आपको बेसिक नॉलेज है और आप एडवांस नॉलेज लेने जा रहे हो तो अब दूसरी कंडीशन यह है कि आप अपने साथ एक नोटबुक रखो। एक साथ में पेन रखो। हर एक चीज के आपने नोट्स बनाने हैं। क्योंकि अगर आप Netflix की तरह इस कोर्स को देखोगे तो फिर आपको कुछ खास समझ नहीं आएगा। सारी चीजें दिमाग के ऊपर से चली जाएंगी। इसलिए साथ में आपने नोट्स भी जरूर बनाने हैं। तो चलिए सबसे पहले समझते हैं कि ICT आखिर है क्या? [संगीत] तो ICT की फुल फॉर्म होती है इनर सर्कल ट्रेडर और ये ट्रेडिंग करने का एक तरीका है। देखो कुछ लोग इंडिकेटर्स का यूज़ करके ट्रेड करते हैं। कुछ लोग प्राइस एक्शन देखते हैं। कुछ लोग कैंडलस्टिक पैटर्न्स पे फोकस करते हैं। तो ऐसे ही एक एडवांस लेवल का जो तरीका है वो है ये आईसीटी जो फोकस करता है इंस्टीट्यूशनल ऑर्डर फ्लो के ऊपर और मार्केट में जो लिक्विडिटी है उसके ऊपर। अब ये लिक्विडिटी क्या होती है? इंस्टीट्यूशनल ऑर्डर फ्लो क्या होता है? यह सब कुछ हम आगे समझने वाले हैं। यानी इसका जो फोकस है वो कैंडलस्टिक पैटर्न्स के ऊपर नहीं है बल्कि [संगीत] लिक्विडिटी के ऊपर है और मार्केट के ऑर्डर फ्लो के ऊपर है। तो ये जो आईसीटी है इसको इन व्यक्ति ने बनाया है जिनका नाम है माइकल जे हडलस्टन और यहां पर इसको बनाते वक्त उन्होंने पूरा फोकस किया है इस चीज के ऊपर कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं वो किस तरीके से ट्रेड करते हैं। [संगीत] मतलब एक रिटेल ट्रेडर तो अपने हिसाब से देख रहा है। लेकिन जो बड़े इंस्टीटशंस बहुत सारी कैपिटल के साथ आ रहे हैं वो [संगीत] किन चीजों के ऊपर फोकस कर रहे हैं इसके ऊपर इनका पूरा फोकस है और ये जो तरीके हैं ना ये काफी अच्छे से काम भी करते हैं क्योंकि ये मार्केट को बहुत ज्यादा डीप में समझने के बाद मार्केट में जो बड़े इंस्टीटशंस कर रहे हैं उसको समझने के बाद यह कांसेप्ट बनाए गए हैं। देखो माइकल जे हडलस्टन का मानना है कि जो ज्यादातर रिटेल ट्रेडर्स हैं वो ट्रेडिंग में फेल इसलिए हो जाते हैं क्योंकि वो इंडिकेटर्स को देख रहे हैं। वो चार्ट में बनने वाले पैटर्न्स को देख रहे हैं। जबकि असली जो मार्केट में मेजर मूवमेंट आता है वो बड़े-बड़े इंस्टीटशंस की वजह से आता है और उनको चाहिए होती है मार्केट [संगीत] में लिक्विडिटी और वो लिक्विडिटी उन्हें इसलिए चाहिए ताकि वो अपने बड़े-बड़े जो ऑर्डर्स हैं [संगीत] मतलब एक रिटेल ट्रेडर शायद 1000, 10,000, 500, 1 लाख, 10 लाख का ट्रेड लेगा। लेकिन जो [संगीत] बड़े इंस्टीटशंस हैं वो 50 करोड़, 100 करोड़ और बड़ी-बड़ी क्वांटिटी के ट्रेड खरीदते [संगीत] हैं। तो उनके हिसाब से मार्केट चल रहा है। तो रिटेल ट्रेडर्स इसी बात को नहीं समझते हैं। इसलिए वो फेल हो रहे हैं। देखो कई बार आपने नोटिस किया होगा कि जब भी आप ट्रेड लेते हैं उससे थोड़ा सा नीचे आप अपना स्टॉप लॉस रखते हैं। तो [संगीत] पहले वो स्टॉप लॉस हिट होता है। उसके बाद प्राइस ऊपर जाती है। या आपने शॉर्ट करने का ट्रेड लिया है तो जहां पे आपने शॉर्ट किया उससे थोड़ा सा ऊपर स्टॉप लॉस रखा। प्राइस पहले ऊपर गई फिर नीचे आ गई। यानी पहले आपका स्टॉप लॉस हिट हो रहा है। उसके बाद मार्केट में मूवमेंट आ रहा है। तो माइकल जे हडलस्टन का कहना है कि यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि [संगीत] ये जो बड़े-बड़े इंस्टीटशंस हैं ये ऐसा करवा रहे हैं। और ये ऐसा क्यों करवा रहे हैं? इनको आपका [संगीत] नुकसान करके क्या मिलता है? एक्चुअल में इनको आपका नुकसान करके ही सबसे बड़ा फायदा मिलता है। क्योंकि देखिए [संगीत] हम जो रिटेल ट्रेडर्स हैं अगर हम 10 लाख, 50 लाख या 1 करोड़ का भी ट्रेड लेना [संगीत] चाहते हैं तो हमें मार्केट में लिक्विडिटी के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है। हमें यह सोचने की जरूरत नहीं है कि अगर मैं 1 करोड़ का ट्रेड खरीदना चाहता हूं तो वहां पे बेचने वाला [संगीत] कहां से आएगा? लेकिन अगर एक बड़ा इंस्टीटश जो 500 करोड़ का ट्रेड खरीदना चाहता है तो उतने ज्यादा उसको सेलर भी तो चाहिए। अगर बेचने वाले नहीं होंगे तो वह अपनी 500 करोड़ की बाइंग कर कैसे पाएंगे? इसके लिए वह आपके स्टॉप लॉस को हिट करवाते हैं और जब आपका स्टॉप लॉस हिट होता है तब [संगीत] आप सेलर बन जाते हैं और जैसे ही आप सेलर बनते हैं तो वह आपसे लिक्विडिटी यानी जो आपके ऑर्डर्स थे उनको आपसे छीन लेते हैं [संगीत] और उसके बाद जाके मार्केट में मूवमेंट लेके आते हैं। यानी मार्केट अक्सर उस डायरेक्शन में टेंपरेरी मूव करता है जहां रिटेल ट्रेडर्स के स्टॉप लॉस पड़े हुए होते हैं। और इसी वजह से आपने देखा है कि आपके स्टॉप लॉस हिट होने के बाद मूव आ रहा है। और इसी चीज के ऊपर यह पूरी स्टडी की गई है। और ये सब इसलिए होता है क्योंकि रिटेल ट्रेडर्स को सिखाई ऐसी चीजें गई है कि भाई जहां पर आपका सपोर्ट बन रहा है वहां पर आप बाय कर लो। सपोर्ट टूटा तो सेल कर लो। जहां पर रेजिस्टेंस बन रहा है वहां पे सेल कर दो। रेजिस्टेंस टूटा तो बाय कर दो। वो सारी चीजें सिखाई इसलिए [संगीत] गई हैं ताकि ये बड़े इंस्टीटशंस आप लोगों का फायदा उठा सकें। तो कई बार जो आपको ट्रेड में एंट्री आपकी लेट हो जाती है। जहां पर आपने लगाया वहां पे आपको एंट्री नहीं मिलती [संगीत] या फिर आपके स्टॉप लॉस हिट हो जाते हैं क्योंकि वो इतनी ऑब्वियस जगह पे है कि इंस्टीट्यूशन को पता है कि यहां पर अगर इसने बाय किया है तो थोड़ा नीचे अपना स्टॉप लॉस लगा रखा होगा। तो यहां पर अगर मैं इसका स्टॉप लॉस हिट करवा दूंगा तो अगर मैं बाय करना चाह रहा हूं तो फिर यहां पे यह सेलर बन जाएगा और मैं बाय कर पाऊंगा। यानी ये जो पूरा गेम है यह लिक्विडिटी का है और लिक्विडिटी क्या है? लिक्विडिटी वो पेंडिंग ऑर्डर्स हैं जो एग्जीक्यूट [संगीत] होंगे या आप लोगों के जैसे ही स्टॉप लॉस हिट होंगे तो आप एक ऑर्डर बन जाएंगे। [संगीत] यह होती है लिक्विडिटी। तो लिक्विडिटी के बारे में मैंने बहुत ज्यादा बात कर ली है। तो चलिए अच्छे से इस लिक्विडिटी को समझते हैं। अब ये जो लिक्विडिटी का कांसेप्ट है ना इसको समझाने से पहले मेरा आपसे एक सवाल है जिससे [संगीत] आपको समझ आएगा कि इस कांसेप्ट को समझना आपके लिए इतना ज्यादा इंपॉर्टेंट क्यों है और वो सवाल मेरा आपके [संगीत] चार्ट पे है। तो यहां पर ध्यान से देखिए। आपको दिखाई दे रहा है कि ये हमारा एक रेजिस्टेंस लेवल था जिस पर जाने के बाद प्राइस गिर गई [संगीत] थी। अब इसके बाद आपको दिखाई देता है कि प्राइस ने हमारे रेजिस्टेंस को ब्रेक कर दिया है। अब [संगीत] जैसे ही प्राइस ने यहां पर रेजिस्टेंस को ब्रेक किया तो ये क्या बन जाता है? ये हमारा सपोर्ट बन जाता है और उसके बाद हमें दिखाई दे रहा है कि प्राइस वापस से इस सपोर्ट लेवल को रीिटेस्ट करने के बाद यहां से ऊपर को जा रही है। तो ऐसे में मैं [संगीत] आपसे पूछूं कि यहां पर आप बाय करोगे या फिर सेल करोगे? तो आप में से ज्यादातर लोगों का आंसर होगा कि भाई यहां पर हम बाय करेंगे। अब अगर आप यहां पर बाय करोगे तो फिर आप स्टॉप लॉस कहां पर रखोगे? मैं बताता [संगीत] हूं। देखिए जनरली आप क्या करोगे? आप यहां पर बाय करने की पोजीशन लोगे। आप थोड़ा सा ये जो आपका लेवल है इससे थोड़ा सा नीचे अपना स्टॉप लॉस रखोगे और टारगेट फिर जो अभी आपका 1:2 का [संगीत] बनता है। आप इस तरीके से कुछ अपना यहां पर ट्रेड प्लान करोगे। तो ऐसे आपने ट्रेड प्लान किया होगा और यह आपका प्लान है एज अ रिटेल ट्रेडर का। लेकिन अब बड़े इंस्टीट्यूशन का प्लान क्या है वो मैं आपको यहां पर दिखाता हूं। देखिए इसके बाद जो बड़ा इंस्टीट्यूशन है वो क्या करेगा? वो यहां पर सबसे पहले एक बड़ी सी कैंडल लेके आएगा। आपका यहां पर स्टॉप लॉस हिट होगा। [संगीत] तो यहां पर आपका स्टॉप लॉस हिट हो गया। प्राइस उस लेवल से नीचे आ गई। बट हमने तो यही सीखा था। और उसके बाद क्या होता है? प्राइस यहां से आपका स्टॉप लॉस हिट कराने के बाद देखिए सीधा टारगेट और उससे भी ऊपर चली जाती है। यानी अगर आपने यहां पर बाय करने के बाद इधर पे अपना स्टॉप लॉस रखा होता तो आप भी एक लिक्विडिटी है जिसका बड़े इंस्टीट्यूशन बार-बार इस्तेमाल करते हैं। आपका स्टॉप लॉस हिट करवाते हैं और मार्केट में मूवमेंट लेके आते हैं। [संगीत] तो अगर आपके साथ ऐसा होता है या फिर हुआ है तो यह कमेंट करके जरूर बताइएगा। अब चलिए मैं आपको यह लिक्विडिटी का कांसेप्ट समझाता हूं। [संगीत] तो यहां पर हम वापस आ चुके हैं स्क्रीन पे। तो लिक्विडिटी का मतलब क्या होता है? मैं आपको थोड़ा बहुत पहले भी बता चुका था कि लिक्विडिटी का मतलब है कि मार्केट में अवेलेबल बाय और सेल ऑर्डर्स का कलेक्शन। [संगीत] यानी एक जगह पे बहुत सारे बाय ऑर्डर्स होंगे। एक जगह पे बहुत सारे सेल ऑर्डर्स होंगे। [संगीत] तो अगर इंस्टीट्यूशन उन बाय ऑर्डर्स के पास प्राइस को लेके आ जाएंगी तो फिर वो खुद सेलर बन सकते हैं। और अगर सेल लेवल के पास वो प्राइस को लेकर आ जाएंगे तो वो खुद बायरर्स बन सकते हैं क्योंकि वहां पर जाने के बाद बहुत सारे लोग सेलर्स बन जाएंगे। तो जो उन्हें बड़ी क्वांटिटी में बाइंग या सेलिंग करनी है तो वो कर पाएंगे। तो लिक्विडिटी का सिंपल सा मतलब होता है मार्केट में बाय और सेल ऑर्डर्स का कलेक्शन जिसका यूज बड़े इंस्टीटशंस कर सकते हैं अपने ट्रेड्स को एग्जीक्यूट करवाने के [संगीत] लिए। ये क्या होता है? वापस से चार्ट में चल के समझते हैं। तो अब इस चीज को ध्यान से देखिएगा। देखिए यहां पर आपने क्या कर रखा था? आपने बाय कर रखा था और इस जगह पर आपने अपना स्टॉप लॉस लगा रखा था। स्टॉप लॉस का मतलब क्या है? जब आपने पहले बाय किया है तो यहां पर आपकी क्वांटिटी सेल होंगी। अब देखो, यह सिर्फ आपने नहीं सोचा होगा। सभी ने जिन्होंने यह कांसेप्ट समझे हैं उन्होंने यही सोचा होगा कि भाई प्राइस ने यहां पर सपोर्ट को ब्रेक कर दिया है। अब दोबारा से उस चीज को रिटेस्ट करने के बाद ऊपर जा रही है तो मैं यहां पर बाय कर देता हूं। सबने ऐसा ही सोचा होगा और ज्यादातर जो ट्रेडर्स हैं उन्होंने बाय करने के बाद ये जो हमारा लेवल है इससे थोड़ा सा नीचे अपना स्टॉप लॉस लगा रखा होगा और उन सबका स्टॉप लॉस क्या है? वो सबका स्टॉप लॉस क्या है? को सेल करने का आर्डर है। यानी इस जगह पर एक बहुत ही ऑब्वियस सी बात है कि बहुत सारे सेलर्स अवेलेबल हैं। तो अगर कोई इंस्टीट्यूशन अपनी हैवी क्वांटिटी बाय करना चाहता है तो वो अगर प्राइस को इस लेवल पर लेकर आ जाए तो यहां पर उसको अचानक से बहुत सारे सेलर्स मिल जाएंगे। मतलब आप सारे लोग जो हैं वो सेलर्स बन जाएंगे और जैसे ही इतने सारे सेलर्स आएंगे तो अब उन्हें जो बहुत सारी क्वांटिटी अपनी एग्जीक्यूट करनी थी। लाखों करोड़ों के उन्हें ट्रेड्स [संगीत] लेने थे। वो आराम से अपने ट्रेड्स को एग्जीक्यूट कर पाएंगे। और ऐसा ही यहां पर आपके साथ हुआ है। यानी यह [संगीत] एक ऐसा लेवल है जहां पर इंस्टीट्यूशन को पता है कि ऑब्वियसली यहां पर उनको ऑर्डर्स मिल जाएंगे और वो प्राइस को इसीलिए यहां पर लेकर आए ताकि आप लोगों का स्टॉप लॉस हिट करवाया जाए। आप सबको सेलर बनाया जाए और बड़े इंस्टीटशंस ने यहां पर बाइंग की और बाइंग करने के बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस ऊपर गई। मतलब उन्होंने कमाया आपका नुकसान करवा [संगीत] के। चलिए एक और एग्जांपल लेके चलते हैं चिंटू और जेनी का जिसके एग्जांपल से मैं आपको लिक्विडिटी के बारे में बताऊंगा। तो चिंटू मान लीजिए एक रिटेल ट्रेडर है जिसकी कैपिटल मात्र ₹1000 या ₹1000 का ट्रेड लेना चाहता है। जबकि जेनी एक हैज फंड मैनेजर है जो कि ₹100 करोड़ का ट्रेड लेना चाहती है। तो अब इन दोनों में क्या डिफरेंस होगा क्योंकि दोनों सेम ही मार्केट में [संगीत] ट्रेड कर रहे हैं। तो देखो यहां पर चिंटू को दिखाई देता है कि भाई प्राइस बार-बार यह वाला जो लेवल है यहां से [संगीत] रिजेक्शन ले लिया है। इसके बाद दोबारा से प्राइस ने यहां पर रिजेक्शन लिया है। तीसरी बार भी प्राइस ने यहां से रिजेक्शन [संगीत] लिया है और उसके बाद जब उसको दिखाई देता है कि प्राइस इस लेवल पे जाने के बाद रिजेक्शन ले रही है तो वह क्या करता है वो यहां पर अपना शॉर्ट करने का ट्रेड ले लेता है। अब जब वो शॉर्ट करने का ट्रेड लेगा तो रीसेंट जो स्विंग हाई है उससे थोड़ा सा ऊपर का यहां पे उसने अपना स्टॉप लॉस लगा रखा है और इसके बाद चिंटू इंतजार कर रहा होता है कि उसका जो टारगेट है वो 1:2 के पास आएगा और ट्रेड लेके चिंटू सोच रहा होता है कि होगा या नहीं होगा यहां पर आप देख सकते हैं। अब चिंटू को सिर्फ ₹1000 का ट्रेड लेना था तो उसके लिए ट्रेड लेना बहुत आसान था। अगर उसको बाय करना है तो आराम से उसको सेलर मिल जाते हैं। अगर उसको सेल करना है तो आराम से उसको बायर मिल जाते हैं। तो यहां पर उसने ₹1000 की सेलिंग की तो उसको आराम से बायर मिल गए। लेकिन अब बात करते हैं जेनी की जो कि ₹100 करोड़ का ट्रेड लगाना चाहती है। [संगीत] लेकिन इसके लिए प्रॉब्लम यह नहीं है कि मार्केट कहां जाएगा। इसको प्रॉब्लम यह है कि अगर यह 100 करोड़ का सेल करना चाहती है तो उसको उतने सारे बायरर्स भी चाहिए होंगे। तो वो बायरर्स आखिर उसको मिलेंगे कैसे? तो अब यहां पर जेनी को दिखाई देता है कि बार-बार प्राइस इस लेवल से रिजेक्शन ले रही थी। यानी प्राइस ने जाना तो नीचे ही है लेकिन अगर मैं प्राइस [संगीत] को थोड़ा सा ऊपर ले जाऊं तो यहां पर जिन भी लोगों ने सेल किया होगा उन सारे [संगीत] लोगों के यहां पर स्टॉप लॉस होंगे और उनके स्टॉप लॉस क्या होंगे? वो बाय करने के स्टॉप लॉस होंगे क्योंकि उन्होंने पहले बेच रखा है ना। तो इसलिए जेनी यहां पर अपनी तरफ से हैवी बाइंग करती है और जैसे ही वो बाइंग करती है तो यहां पर यह वाली कैंडल आपको दिखाई दे रही है। इसमें प्राइस सीधा ऊपर जाती है और यहां पर जाकर चिंटू का और चिंटू जैसे हजारों ट्रेडर्स का यहां पर जाकर स्टॉप लॉस हिट हो जाता है। और उनका स्टॉप लॉस मतलब क्या है? उनका स्टॉप लॉस है यहां पर बाय करना। [संगीत] और जैसे ही सबके स्टॉप लॉस हिट होते हैं तो जेनी यहां पर अपनी तरफ से सेल करती है। उसको क्या चाहिए थे? उसको चाहिए थे बायर। यहां पर लोगों के स्टॉप लॉस चिंटू जैसे लोगों के स्टॉप लॉस हिट करवा के [संगीत] उसको बायर मिल गए और जैसे ही उसने सेलिंग शुरू की उसके बाद आप देख सकते हैं कि मार्केट में एक बड़ा सा मूव आया और जेनी ने जो कि एक हैच फंड मैनेजर थी उसने अच्छे खासे पैसे कमाए और यहां पर जो चिंटू है उस बेचारे के आंसू [संगीत] निकल आए। यानी कहने का मतलब है कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं उनको मेनली लिक्विडिटी चाहिए और वो लिक्विडिटी यह छोटे रिटेल ट्रेडर्स का बेवकूफ बना के ही बनती है। लेकिन अब जो यह कोर्स आप समझ लेंगे तो उसके बाद आप बेवकूफ नहीं बनेंगे क्योंकि आपको पता होगा कि कहां-कहां पर लोग लिक्विडिटी रखते हैं। आप उस नजरिए से सोच पाएंगे और जब आप उस नजरिए से सोचेंगे ना तब आपको पता चलेगा कि आपने कहां पे अपना स्टॉप लॉस नहीं रखना है। ट्रेड एग्जीक्यूट करना है तो किस जगह पे एग्जीक्यूट करना बेटर रहेगा। ये बड़े इंस्टीटशंस कहां पे एग्जीक्यूट कर रहे हैं? क्योंकि सोचो अगर हम यहां पर शॉर्ट करते जहां पर जेनी ने शॉर्ट किया है। तो उसके बाद सोचिए कि जेनी तो मार्केट को नीचे लेकर जाती और वो मार्केट को नीचे लेकर जाती तो यह बेचारा रिटेल ट्रेडर ₹1000 वाला भी कुछ पैसे कमा ही लेता। तो हमें भी इसी कैटेगरी में आना है कि हमें देखना है कि ये जेनी मार्केट को लेकर कहां जा रही है। मतलब बड़े इंस्टीट्यूशन मार्केट को कहां लेकर जा रहा है और हमें [संगीत] भी उसी डायरेक्शन में अपने ट्रेड को लेना है लेकिन सही जगह पर लेना है। तो आपको इतना तो पता चल गया कि बड़े इंस्टीटशंस को ट्रेड करने के लिए लिक्विडिटी चाहिए। तो अब समझते हैं कि लिक्विडिटी आखिर कहां-कहां पर होती है। लेकिन उससे पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं। यह इंडिया में एफआईयू रजिस्टर्ड है। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से अधीरा एi का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलता है। उसके लिए नीचे Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। उसको भी जरूर फिल कर लीजिएगा। इसके साथ ही और भी काफी सारे बेनिफिट्स मिलते हैं। बट उसके लिए हमारे लिंक से अकाउंट ओपन करने के बाद आपको Google फॉर्म को जरूर फिल करना है। तो अब चलिए समझते हैं कि यह लिक्विडिटी आखिर होती कहां-कहां पर है। [संगीत] तो देखिए मैंने आपको एग्जांपल तो दिखा ही दिया है कि जब सपोर्ट या रेजिस्टेंस है तो जहां पर आप अपना स्टॉप लॉस लगाने के बारे में सोच रहे हो वो ट्रेडिशनल कांसेप्ट्स के बेसिस पे वहां सभी जगह पे लिक्विडिटी है। जैसे जितने भी इक्वल हाईस चार्ट में होते हैं जैसे सेम लेवल पे हाई बनते हैं तो उससे थोड़ा सा ऊपर प्राइस जाएगी क्योंकि उसे पता है कि जब भी एक लेवल पे इक्वल हाई बन रहे हैं तो एज अ रिटेलर वो उसे रेजिस्टेंस समझ रहे हैं और यहां पर रेजिस्टेंस के पास वो शॉर्ट कर रहे होंगे तो थोड़ा सा ऊपर उन्होंने स्टॉप लॉस रखा होगा तो वहां पर लिक्विडिटी होती है। ऐसे [संगीत] ही जो हमारे इक्वल लोस होते हैं उन्हें पता है बड़े इंस्टीटशंस को जो इक्वल लोस के नीचे जो रिटेलर्स हैं उन्होंने अपना स्टॉप लॉस रखा होगा तो वहां पर लिक्विडिटी होती है। इसके अलावा अगर कोई स्विंग हाई होता है या कोई इंपॉर्टेंट हाई या लो लेवल होता है तो वहां पर भी लिक्विडिटी होती है। जैसे ये एक इंपॉर्टेंट हाई लेवल है तो इसके ऊपर भी काफी सारे लोगों ने अपने स्टॉप लॉस रखे होंगे और ये एक इंपॉर्टेंट लो लेवल है तो इसके नीचे भी काफी सारे रिटेलर्स ने अपने स्टॉप लॉस रखे होंगे। तो इन सारी जगहों पे लिक्विडिटी [संगीत] होती है। इसके अलावा प्रीवियस डे का जो हाई एंड लो होता है जैसे हम यहां पर डेल्टा एक्सचेंज के चार्ट पे आ गए हैं। इसको मैं यहां पर रिमूव कर देता हूं [संगीत] और इसके बाद मैं एक दिन की कैंडल खोल देता हूं। तो यहां पर हमने वन डे की कैंडल खोली है। अब इस कैंडल से पहले वाली कैंडल यानी इस कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए यहां पर अब आपको दिखाई देगा। ये देखिए इससे पहले वाले दिन की कैंडल ये है। तो इस कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए भी यहां पर लिक्विडिटी होगी। मतलब ये जो हाई है इससे थोड़ा सा ऊपर और ये जो लो है इससे थोड़ा सा [संगीत] नीचे भी लिक्विडिटी होगी। ऐसे ही अगर हम यहां पर वीकली कैंडल पे चले जाएं तो पिछले वीक का जो हाई एंड लो है उससे ऊपर नीचे भी लिक्विडिटी होगी। जैसे यह पिछला वीक है। इससे थोड़ा सा ऊपर लिक्विडिटी होगी। यह पिछले वीक का लो [संगीत] है। इससे थोड़ा सा नीचे भी लिक्विडिटी होगी। ऐसे ही मंथली और ऐसे ही इयरली भी लिक्विडिटी होती है। [संगीत] लेकिन इयरली लिक्विडिटी मंथली लिक्विडिटी हमारे लिए उतना इंपॉर्टेंट नहीं है। वीकली लिक्विडिटी देख लेनी चाहिए। बट [संगीत] डेली लिक्विडिटी को भी आपने ध्यान में रखना है। स्विंग हाई, स्विंग लो को ध्यान में रखना है। इसके अलावा इक्वल हाई, इक्वल लो का भी आपने ध्यान रखना है। तो अभी समझते [संगीत] हैं कि ये जो बड़े इंस्टीटशंस हैं ये मार्केट को किस तरीके से देखते हैं। रिटेलर तो देख रहा है कि भाई यहां पर सपोर्ट है, यहां पर रेजिस्टेंस है। अरे यहां पर ये ईएमए इंडिकेटर लग रखा है। लेकिन जो बड़े इंस्टीटशंस हैं वो देखते हैं मार्केट में लिक्विडिटी कहां पर है? जो कि मैंने आपको दिखा दिया। इसके अलावा ऑर्डर फ्लो कैसा है? मार्केट का [संगीत] स्ट्रक्चर क्या है? और उनका मेन ऑब्जेक्टिव होता है कि अगर किसी चीज को खरीदने जा रहे हैं तो सबसे सस्ते में खरीदें और जब बेचने जा रहे हैं तो सबसे महंगे में बेचें। [संगीत] तो अब समझो कि अगर वो हम बाय कर रखा है और थोड़ा सा नीचे हमने अपना स्टॉप लॉस रखा है तो इंस्टीटशंस को प्राइस नीचे लाने का यह भी फायदा है कि वो सस्ते [संगीत] में खरीद पा रहे हैं। एक तो स्टॉप लॉस हिट करवा रहे हैं तो लिक्विडिटी मिल जा रही है। दूसरा वहां पे सस्ते में भी खरीद रहे हैं तो इससे अच्छा क्या होगा? ऐसे ही अगर बेचना है तो वहां पे स्टॉप लॉस है तो लिक्विडिटी मिल जा रही है। दूसरा महंगे में बेच रहे हैं इससे अच्छा क्या होगा? तो यह उनका मेन ऑब्जेक्टिव है। यानी रिटेलर्स और इंस्टीटशंस की थिंकिंग में यह डिफरेंस है कि रिटेलर इंडिकेटर को देखता है। रिटेलर ब्रेकआउट को देखता है। रिटेलर सपोर्ट रेजिस्टेंस को देखता है। रिटेलर सिग्नल्स को देखता है। रिटेलर्स लोगों के रिएक्शंस को देखता है। लेकिन जो आईसीटी है वो प्राइस डिलीवरी को देखता है। वो मार्केट में लिक्विडिटी को देखता है। वो लिक्विडिटी पूल्स को देखता है। वो लॉजिक्स को देखता है और वो एंटीिसिपेशन पे जाता है। इवन आईसीटी और इंडिकेटर्स के बीच के डिफरेंस की बात करें तो इंडिकेटर्स देखो लैगिंग होते हैं। बाद में सिग्नल देते हैं। ये हिस्टोरिकल कैलकुलेशंस के ऊपर बेस्ड होते हैं। ये आपको डिलेड सिग्नल्स दे रहे हैं। बेसिकली [संगीत] ऐसा भी नहीं कह रहा हूं कि बिल्कुल ही बेकार चीजें होती हैं। लेकिन प्योरली इनके बेसिस पे ट्रेड करना गलत होता है। जबकि आईसीटी देखता है प्राइस एक्शन को, लिक्विडिटी बेस को, इंस्टीट्यूशनल बेस्ड लॉजिक्स को, लिक्विडिटी को एंड ये सारी चीजें मैं आपको ऑलरेडी बता चुका हूं। तो अब चलिए बात करते हैं फ्रैक्टल नेचर ऑफ़ मार्केट के बारे में। तो आपने सुना होगा कि टाइम इज़ फ्रैक्टल। लेकिन [संगीत] यह फ्रैक्टल आखिर होता क्या है? तो इसका सिंपल सा मतलब है कि मार्केट में भले ही अलग-अलग टाइम फ्रेम है। कोई 5 मिनट में चार्ट देख रहा है, कोई 15 मिनट में चार्ट देख रहा है, कोई 1 घंटे में देख रहा है तो कोई 4 घंटे में देख रहा है। [संगीत] लेकिन जो भी चीजें वो देख रहे हैं उन्हें दिखाई सेम ही चीज दे रही है। मतलब अगर मार्केट 4 घंटे के टाइम फ्रेम में बढ़ रहा है तो 5 मिनट या 15 मिनट के टाइम फ्रेम में भी वो बढ़ ही रहा होगा। हो सकता है आपको थोड़ा बहुत ऊपर नीचे होता हुआ दिखाई दे लेकिन उसका जो लगर ट्रेंड होगा वो अप ट्रेंड ही होगा और मार्केट बढ़ ही रहा होगा। यानी टाइम फ्रेम भले ही अलग-अलग होते हैं लेकिन मार्केट का जो बिहेवियर होता है वो सेम होता है। तो जो पैटर्न आपको 4 घंटे के [संगीत] टाइम फ्रेम में देखने को मिल रहा है वही पैटर्न आपको 15 मिनट के टाइम फ्रेम में भी देखने को मिल रहा है। बट इंपॉर्टेंट ये है कि जो बड़ा टाइम फ्रेम है यानी जो 4 घंटे का टाइम फ्रेम है वो ज्यादा रिलायबल होगा। तो अगर आप कभी ट्रेड कर रहे हैं तो अपने बड़े टाइम फ्रेम के ऊपर ज्यादा भरोसा करना होता है। जैसे यहां पर आपको एक चार्ट दिखाई दे रहा है। इसमें आप देख सकते हैं कि ये हमारा 1 घंटे का टाइम फ्रेम है। तो अब यहां पर आप देख सकते हैं कि 1 घंटे के टाइम फ्रेम में हमें एक फेयर वैल्यू गैप देखने को मिला है। तो वही जो फेयर वैल्यू गैप है वो हमें 5 मिनट के टाइम फ्रेम में भी देखने को मिल रहा है। लेकिन वो ज्यादा रिलायबल कहां पर है? वो ज्यादा रिलायबल है 1 घंटे के टाइम फ्रेम में। [संगीत] इसलिए जब भी ट्रेड ले रहे हो ना तो बड़े टाइम फ्रेम से आपको अपना एनालिसिस शुरू करना चाहिए। भले ही एंट्री आप छोटे टाइम फ्रेम पे लो। जैसे अगर मैं 5 मिनट के टाइम फ्रेम को देख के ही ट्रेड कर रहा होता तो मुझे दिखाई देता कि भाई यहां पर एक बेरिश फेयर वैल्यू गैप बन रखा है। प्राइस ने इसको टैप किया। उसके बाद प्राइस गिरी है। गिरी यहां पर भी है। लेकिन [संगीत] उसके बाद देखिए थोड़ा बहुत मार्केट ऊपर नीचे करता है उतना फास्ट मूव हमें यहां पर देखने [संगीत] को नहीं मिला। लेकिन अगर हम 1 घंटे के टाइम फ्रेम में देखते हैं तो हमें दिखाई दिया कि जैसे ही ये वाला हमारा फेयर वैल्यू गैप टैप हुआ उसके बाद एक इंपल्सिव मूव हमें मार्केट में देखने को मिला था। तो यहां पर एक और फ्रैक्टल नेचर का हमने एग्जांपल ले रखा है। जिसमें आप देख सकते हैं यह हायर टाइम फ्रेम है। यह लोअर टाइम फ्रेम है। लेकिन हायर टाइम फ्रेम में भी हमें दिखाई देता है कि प्राइस ने स्वीप किया है। उसके बाद सीआईएसडी बना है। एफवीजी से प्राइस नीचे गई [संगीत] है। लेकिन अगर हम छोटे टाइम फ्रेम पे जा रहे हैं तो सेम चीज हमें यहां भी देखने को मिल रही है। यहां पर भी स्वीप हुआ है। सीआईएसडी बना है। एफवीजी से प्राइस नीचे गिरी है। मतलब जो मैं आपको बता रहा हूं कि बड़े टाइम फ्रेम और छोटे टाइम फ्रेम दोनों में सेम चीजें होती है। तो वो यहां पर आपको समझ आ रहा है। बाकी ये सारी चीजें ना हम आगे यूज़ करेंगे। इसलिए मैं आपको थोड़ा बहुत आईडिया दे रहा हूं इन चीजों के [संगीत] बारे में। तो अब देखिए यहां पर हम थोड़ा सा बात कर लेते हैं कि फैक्टर इतना इंपॉर्टेंट क्यों है? पहला तो आपको मार्केट की बेटर [संगीत] अंडरस्टैंडिंग होगी इससे। बेटर एंट्रीज मिलेंगी, बेटर कंफर्मेशंस होंगे। आप मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस करेंगे और जिससे आपको जो भी सेटअप्स मिलेंगे वो हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप्स होंगे। तो जब आपको पता है कि दोनों टाइम फ्रेम में सेम चीजें हो रही हैं तो आप लोअर टाइम फ्रेम में ट्रेड तभी लो जब आपको दिखाई दे कि जो हायर टाइम फ्रेम है वो उसको सपोर्ट कर रहा है। तो अब जब आप फ्रैक्ल्स के बारे में जान चुके हो तो अब जानते हैं मार्केट स्ट्रक्चर के बारे में। तो मार्केट स्ट्रक्चर यानी मार्केट का जो स्ट्रक्चर है वो हमें बताता है कि मार्केट अभी बुलिश है, बेयरिश है या फिर एक रेंज में चल रहा है। और यहां पर हमें यह भी पता चलता है कि मार्केट हाईज़ और लोज़ कैसे क्रिएट कर रहा है। मतलब यह जो मार्केट स्ट्रक्चर है, इसका हम यूज़ कर सकते हैं अपने ट्रेंड को आइडेंटिफाई करने के लिए। दूसरा अपना बायस बनाने के लिए। जब भी आप ट्रेड ले रहे हैं, तो कोई ना कोई आपका बायस होता है कि आज आप बाय करने का ट्रेड लेंगे, सेल करने का ट्रेड लेंगे। तो इस बायस को बनाने के लिए भी हम मार्केट स्ट्रक्चर का यूज करते हैं। डायरेक्शन को समझने के लिए करते हैं। और अपनी एंट्रीज मतलब जहां पर हम ट्रेड ले रहे हैं उसको बेटर करने के लिए भी मार्केट स्ट्रक्चर का यूज किया जाता है। इवन ट्रेडिंग में एक रूल होता है स्ट्रक्चर फर्स्ट एंट्री लेटर। मतलब पहले आपने स्ट्रक्चर को समझना है बाद में एंट्री लेनी है। अब मार्केट स्ट्रक्चर में जो सबसे पहली इंपॉर्टेंट चीज होती है वो होता है स्विंग हाई और स्विंग लो। मतलब आप कोई भी चार्ट देखेंगे तो उसका कोई ना कोई हाई होगा। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं इस चार्ट का हाई यह है। उसके बाद लो यह है। इसके बाद चार्ट बीच में घूम रहा है। [संगीत] फिर दोबारा से उसने अपने पिछले वाले हाई से यहां पर हाई बनाया। तो अब स्विंग हाई ये हो चुका है। और फिर प्राइस और ज्यादा नीचे आ गई तो स्विंग लो ये हो चुका है। यानी ये जो मार्केट स्ट्रक्चर है ये इन्हीं स्विंग हाई और स्विंग लो से बनता है। अब इस स्विंग हाई, स्विंग लो को बेटर तरीके से बताने के लिए हम आ चुके हैं चार्ट पे। हम डेल्टा एक्सचेंज का चार्ट यूज कर रहे हैं। आप कोई भी चार्ट यूज कर सकते हैं। लेकिन अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं, तो आप डेल्टा एक्सचेंज में कर सकते हैं। यह इंडिया में एफआई रजिस्टर्ड है। मैं खुद भी उसका यूज़ करता हूं। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके अपना अकाउंट ओपन करेंगे, तो आपको सबसे पहले तो हमारी तरफ से अराई का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन मिलेगा। साथ ही और भी काफी सारे बेनिफिट्स हैं। तो उसके लिए नीचे Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। उसको जरूर फिल कर लीजिएगा। तो अब चलिए इस स्विंग हाई स्विंग लो को चार्ट पे समझते हैं। तो मैंने पूरा चार्ट आपके सामने ओपन कर लिया है। अभी मुझे आपको सिर्फ एग्जांपल देना है। तो मैं यहां पे वीकली कैंडल दिखा रहा हूं। आप हर टाइम फ्रेम में स्विंग हाई स्विंग लो मार्क कर सकते हैं। तो अब जरा ध्यान से देखिए। [संगीत] आपको दिखाई दे रहा है कि अगर हम यहां तक देखें मान लो यहां तक चार्ट बना होता तो ये वाला जो आपका लेवल है ये है आपका [संगीत] इस टाइम पर स्विंग हाई और इसके बाद प्राइस आती है इस लेवल पे फिर यहां से बढ़ने लग जाती है। यानी ये वाला जो हमारा लेवल है यह [संगीत] क्या है? यह है हमारा स्विंग लो लेवल। इसके बाद देखिए प्राइस बढ़ते-बढ़ते बढ़ते बढ़ते इस हाई तक जाती है। यानी ये क्या है? ये हमारा स्विंग हाई है। उसके बाद प्राइस नीचे आती है और यहां पे होता है हमारा स्विंग लो। फिर देखिए प्राइस बढ़ते-बढ़ते यह वाले स्विंग हाई बनाती है और स्विंग हाई बनाने के बाद देख सकते हैं कि आप प्राइस यहां पर हमारा स्विंग लो बना रही है। यानी आपने देखा कि एक प्रॉपर मार्केट स्ट्रक्चर यहां पर फॉलो हो रहा है। और यह मैं आपको वीकली टाइम फ्रेम की कैंडल दिखा रहा था, चार्ट दिखा रहा था। अब मैं अगर छोटे टाइम फ्रेम में भी आ जाऊंगा। तो अब मैं 1 घंटे के टाइम फ्रेम में आ गया हूं। यहां पर भी आप देख सकते हैं कि एक स्विंग हाई बन रहा है। स्विंग लो बन रहा है। स्विंग [संगीत] हाई बन रहा है। स्विंग लो बन रहा है। स्विंग हाई, स्विंग लो, स्विंग हाई, स्विंग लो, स्विंग हाई और [संगीत] यहां पर भी स्विंग लो बनता हुआ हमें दिखाई दे रहा है। तो ये क्या है? ये भी एक तरह का मार्केट स्ट्रक्चर ही है। अब देखिए ये तो हमने ओवरऑल स्ट्रक्चर की बात की थी। लेकिन ये [संगीत] जो मार्केट स्ट्रक्चर है, इसको हम अप ट्रेंड और डाउन ट्रेंड के हिसाब से भी बना सकते हैं। जैसे यह है हमारा बयरिश मार्केट स्ट्रक्चर। यह है बुलिश मार्केट स्ट्रक्चर। इनको बहुत ध्यान से देखिए और मैं कहूंगा साथ में नोट्स बनाते हुए चलिए तभी आपको चीजें क्लियर होंगी। तो सबसे पहले हम बुलिश मार्केट स्ट्रक्चर की बात करते हैं। तो देखिए मार्केट जब भी ऊपर की तरफ बढ़ रहा होता है तो कुछ इस तरीके से बढ़ता है और यहां पर वो बनाता है हायर हाईज एंड हायर लोस। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं मार्केट ने अपना हायर लो बनाया है। फिर प्राइस बढ़ते-बढ़ते गई। यहां पर उसने अपना हायर हाई बनाया। मतलब पिछले वाले हाई से ऊपर हाई बनाया है। फिर [संगीत] प्राइस नीचे आई है। लेकिन पिछले वाले लो जितना नीचे नहीं आई है। उसने हायर लो बनाया है। फिर प्राइस ऊपर गई है और पिछला वाला जो हाई था उससे ऊपर निकल गई। यानी हायर हाई बनाया। फिर नीचे आई तो पिछले वाला जो लो था उससे ऊपर जाके उसने अपना लो बनाया यानी हायर लो बनाया। तो ऐसे हायर हाईज़ एंड हायर लोस की जब भी हमें फॉर्मेशन देखने को मिलती है, इसको हम कहते हैं बुलिश मार्केट स्ट्रक्चर। प्राइस एक्शन में इसे हम अप ट्रेंड बोल देते हैं। अब इसी तरीके से जब मार्केट गिरता है तो वहां पर हमें लोअर हाईज एंड लोअर लोस की फॉर्मेशन देखने को मिलती है। जैसे आप देख सकते हैं कि प्राइस ने अपना लोअर लो बनाया। फिर प्राइस थोड़ा सा ऊपर जाने की कोशिश की और लोअर हाई बनाया। मतलब पिछला वाला जो हाई था उससे नीचे उसने अपना हाई बनाया जिसको हम लोअर हाई बोल रहे हैं। फिर प्राइस ने लोअर लो बनाया। फिर लोअर हाई बनाया, लोअर लो बनाया। इसके बाद लोअर हाई बनाया, लोअर लो बनाया। तो जब भी इस तरीके की फॉर्मेशन हमें चार्ट में देखने को मिलती है, इसको हम [संगीत] कहते हैं डाउन ट्रेंड। हम प्राइस एक्शन में कहते हैं। यहां पर हम बयरिश मार्केट स्ट्रक्चर इसको बोलेंगे [संगीत] जो कि आप देख सकते हैं कि लोअर हाईज़ एंड लोअर लोस की बेसिकली फॉर्मेशन है। अब इसके बाद नेक्स्ट जो कांसेप्ट हमें समझना है वो है ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर [संगीत] का। देखिए ये सारी जो चीजें हैं मैंने थोड़ा बहुत हमारा जो पिछला वाला कोर्स था जिसमें हमने बेसिक टू एडवांस ट्रेडिंग सिखाई थी वहां पर भी डिस्कस किया था। तो अभी आप इसको एज अ रिवीजन ले चल सकते हैं और आगे हम इसमें बहुत ज्यादा डीप में जाने वाले हैं। इसलिए यह सब बताना भी जरूरी है। और मैं कहूंगा कि जब आप सीखने बैठे हो तो सारी चीजों पे फोकस करो। ऐसा नहीं कि ये पहले बताया है तो यार इस पे उतना ध्यान नहीं दिया। पूरा अच्छे से ध्यान दो। तो ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हमें बताता है कि मार्केट पे जो भी ट्रेंड चल रहा है ना वो कंटिन्यू हो रहा है। मतलब अगर अप ट्रेंड चल रहा है तो वो कंटिन्यू हो रहा है। डाउन ट्रेंड चल रहा है तो वो कंटिन्यू हो रहा है। और यह बनता कब है? तब बनता है जब प्राइस प्रीवियस स्विंग लेवल को ब्रेक करती है। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं यह स्विंग हाई था। प्राइस ने इस जगह पे स्विंग हाई को ब्रेक कर दिया। तो इधर पे क्या हुआ? ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ। ऐसे ही यहां पर स्विंग हाई था। प्राइस ने इस जगह पर स्विंग हाई को ब्रेक कर दिया। तो यह हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो गया। अभी मैं ये आपको अच्छे से चार्ट में दिखाऊंगा क्योंकि इसको समझना भी बहुत ज्यादा जरूरी है। अब ये जो ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर मैंने आपको दिखाया है, यह बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर है। क्योंकि आप देख सकते हैं कि यहां पर हायर हाई था। प्राइस ने हायर हाई को ब्रेक किया। फिर [संगीत] हायर हाई को ब्रेक किया है। तो यह हमारा बुलिश ब्रेकआउ स्ट्रक्चर है। लेकिन यहां पर मैंने आपको एक एग्जांपल दिया है जिसमें हमें बयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर भी देखने को मिल रहा है। आप देख सकते हैं प्राइस डाउन ट्रेंड में चल रही है। यानी हमें लोअर हाईज़ एंड लोअर लोस की फॉर्मेशन देखने को मिल रही है। तो हमने लोअर लोस से लगते हुए एक लाइन ड्रॉ की। प्राइस ने उसके नीचे क्लोजिंग दे दी। तो यहां पर हमारा बयरिश ब्रेकआउ स्ट्रक्चर हो गया। ऐसे ही यहां पर हमारा बयरिश ब्रेकआउ स्ट्रक्चर हुआ है। यहां पर हमारा बयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ है। जबकि इस जगह पर प्राइस हायर हाईज़ हायर लोज़ बना रही थी। प्राइस ने अपने हायर हाई को ब्रेक किया। तो हमारा बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ। बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ। बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ। अब इसको थोड़ा सा चार्ट में भी देख लेते हैं। तो चलिए अब समझते हैं कि चार्ट में आप ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर को कैसे मार्क कर सकते हैं। और सबसे पहले हम बात करते हैं बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर की। तो इसके लिए जैसे ही आप चार्ट पे आएंगे तो यहां पर आपको एक ट्रेंड लाइन वाला टूल मिलता है। आपने इस पे क्लिक कर देना है। अब जैसे ही आप इस पे क्लिक कर देते हैं तो उसके बाद आपने क्या करना है? आपने हायर हाई लेवल को पकड़ना है। जैसे आप देख सकते हैं यहां पर हमारा हायर हाई ये है। तो हमने क्या किया? हमने इस हायर हाई से लगते हुए इस तरीके से लाइन ड्रॉ कर लेनी है। और अगर आप स्ट्रेट लाइन ड्रॉ करना चाहते हो तो आप जैसे ही शिफ्ट पे क्लिक करोगे तो यहां पर आपकी स्ट्रेट लाइन ड्रॉ हो जाएगी। तो देखिए यहां पर क्या है इस जगह पर जाकर आपका ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो जाता है। ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर तब होगा जब हमारी कोई भी कैंडल इसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है तो हम कह सकते हैं कि यहां पर हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो गया है। तो ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर भले ही बीच में कोई लिख दे लेकिन हुआ वो यहां पर है। अब ऐसे ही अगर मान लीजिए आप दोबारा से अपना ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर मार्क करना चाहते हैं तो यहां पर आप देख सकते हैं हायर हाई आपको दिखाई दे रहा है तो आपने इसके हाई लेवल से लगते हुए इस तरीके से एक लाइन ड्रॉ कर देनी है और यहां पर अगेन हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो चुका है। फिर से आपने क्या करना है? हमारा जो हाई लेवल आपको दिखाई दे रहा है जैसे ये हमारा हाई लेवल है तो हमने इस हाई से लगते हुए इस तरीके से लैंड ड्रॉ कर देनी है। यहां पर हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो गया है। तो इस तरीके से आप अपना बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर मार्क कर सकते हैं। अब चलिए बेयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर भी देखते हैं। तो देखिए बेयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर के लिए हमें लोअर हाईज़ एंड लोअर लोज़ की फॉर्मेशन चाहिए होती है। तो अगर आप देखेंगे तो आपको दिखाई देगा कि यहां पर आपका एक लोअर लो बनाया है। फिर प्राइस ने बढ़ने की कोशिश की। लोअर हाई बनाया। फिर लोअर लो बनाया। लोअर हाई बनाया। लोअर लो बनाया। लोअर हाई बनाया। तो ऐसे हमें लोअर हाई एंड लोअर लोस की फॉर्मेशन देखने को मिल रही है। तो हम क्या करेंगे? जो भी हमें लोअर लो दिखाई देता है, हमने उससे लगते हुए लाइन ड्रॉ कर लेनी है। जैसे ये हमें लोअर लो दिखाई दे रहा है, तो हमने इससे लगते हुए एक लाइन ड्रॉ की और यहां पर हमारा हो जाता है बेयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर कहां पे हुआ है? यहां पे [संगीत] हुआ है। उसके बाद दोबारा से हमने इसके लो से लगते हुए लाइन ड्रॉ की और उसके बाद हमारा क्या है? यहां पर जाके हो जाता है हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। इसके बाद अगेन आप देख सकते हैं कि यहां पर हमारी लोअर लो है और इससे लगते हुए हमने लाइन ड्रॉ की। हमारा हो गया ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। ऐसे ही आप यहां से लगते हुए भी लाइन ड्रॉ कर सकते हैं। तो आपका यहां पे ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो जाएगा। तो इस तरीके से आप बयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर को मार्क कर सकते हैं। और इन्हें मार्क करके हमें जो सबसे इंपॉर्टेंट चीज मिल रही है वो ये है कि हमें पता चल रहा है कि अगर यहां पर बेयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो गया। मतलब जो डाउन ट्रेंड है वो कंटिन्यू हो रहा है। अगेन बेयरिश ब्रेकआउ स्ट्रक्चर हो गया। मतलब डाउन ट्रेंड कंटिन्यू हो रहा है। तो जब हमें पता है कि डाउन ट्रेंड कंटिन्यू हो रहा है तो हम वहां पर सिर्फ शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान करेंगे। तो इस तरीके से हम अपना बायस बना सकते हैं। तो अब चलिए समझते हैं चेंज ऑफ कैरेक्टर [संगीत] को। देखिए मैंने आपको बताया था कि ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर क्या है? ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हमारा बता रहा है कि ट्रेंड कंटिन्यू हो रहा है। [संगीत] लेकिन ट्रेंड कभी ना कभी तो चेंज होगा। अगर अप ट्रेंड चल रहा है तो कभी ना कभी तो डाउन ट्रेंड आएगा ना। तो ये हमें पता चलता है चेंज ऑफ कैरेक्टर से। तो चेंज ऑफ कैरेक्टर को समझने के लिए आपको यहां पर एक चार्ट दिखाई दे रहा है। देखिए यहां पर आपको दिखाई देता है हायर हाई बना है। हमने इससे लगते हुए लाइन ड्रॉ की। इस जगह पर हो गया हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। यहां पर भी हमने मार्क कर रखा है। हमने इससे लगते हुए लाइन ड्रॉ की और यहां पर हो गया हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। [संगीत] लेकिन इससे लगते हुए हमने फिर से लाइन ड्रॉ की होगी। लेकिन प्राइस इससे ऊपर नहीं गई। मतलब यहां पर हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर नहीं हुआ है। तो जब हमें दिखाई दिया कि भाई इस जगह से हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर नहीं हुआ। तो हम क्या करेंगे? हम यहां पर जो हमारा हायर लो है उससे लगते हुए एक लाइन ड्रॉ कर देंगे। हमने इससे [संगीत] लगते हुए ये लाइन ड्रॉ की और जैसे ही कोई कैंडल इसके नीचे क्लोजिंग दे देती है जैसे यहां पर इस कैंडल ने इसके नीचे क्लोजिंग [संगीत] दे दी है तो इसको हम कहते हैं सीएचओ सीएच यानी चेंज ऑफ कैरेक्टर। इसका मतलब यह है कि अभी तक अप ट्रेंड कंटिन्यू हो रहा था यानी बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर बन रहा था। जबकि अब बेयरिश चेंज ऑफ करैक्टर बना है। मतलब यहां से अब ट्रेंड रिवर्स हो गया है और प्राइस के गिरने के चांसेस होंगे। और इसके बाद आप देख सकते हैं हम इससे लगते हुए लाइन ड्रॉ करेंगे। ये हो गया हमारा अगेन ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। लेकिन ये क्या है? यह बेयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर है। [संगीत] यह भी हमारा बेयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर है। तो, इस तरीके से आप अपना पूरा मार्केट स्ट्रक्चर मार्क कर सकते हैं। तो, अब आपको समझ आ गया है कि बेयरिश चेंज ऑफ कैरेक्टर कैसे मार्क करते हैं। तो, अब चलिए, बात करते हैं बुलिश चेंज ऑफ कैरेक्टर की। तो, बुलिश चेंज ऑफ कैरेक्टर को देखने से पहले यहां पर हमें बयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर दिखाई दे रहा है। देखिए, आपको दिखाई दे रहा है मार्केट डाउन ट्रेंड में चल रहा था। तो, हमने क्या किया? हमने लोअर लो से लगते हुए लाइन ड्रॉ की। जैसे ही किसी कैंडल ने उसके नीचे क्लोजिंग दे दी, तो यहां पर हो गया हमारा बेयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। अगेन हमने लोअर लो से लगते हुए लाइन ड्रॉ की। जैसे ही किसी कैंडल ने उसके नीचे क्लोजिंग दे दी। अगेन हो गया हमारा बयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। फिर हमने लाइन मार्क की बेयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। इसके बाद मान लो हम यहां से भी लाइन मार्क करते। लेकिन किसी भी कैंडल ने इसके नीचे क्लोजिंग नहीं दी ना। इसका मतलब यहां पे बेयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर नहीं हुआ। तो तब हम क्या करेंगे? तब हम लोअर हाई से लगते हुए लाइन ड्रॉ करेंगे। और अगर कोई कैंडल उसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है तो यहां पर हो जाएगा हमारा बुलिश चेंज ऑफ कररेक्टर। [संगीत] इसका मतलब क्या है? इसका मतलब अभी तक डाउन ट्रेंड चल रहा था। अब यहां से ट्रेंड चेंज हो चुका है और अब ट्रेंड स्टार्ट हो गया है और इसके बाद आप अपने ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर को मार्क कर सकते हैं जो कि आप हायर हाई से मार्क करेंगे और ये क्या होगा? ये होगा हमारा बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर। तो इस तरीके से आप अपना पूरा मार्केट स्ट्रक्चर मार्क कर सकते हैं। तो अब आपको चेंज ऑफ कैरेक्टर भी समझ आ गया है। तो अब बात करते हैं मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट की। अब ये मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट सुन के आपको लग रहा होगा कि कोई नया सा कांसेप्ट आपको यहां पे बता रहा हूं। तो थोड़ा सा नया है लेकिन बहुत ज्यादा डिफरेंट नहीं है। यह ऑलमोस्ट चेंज ऑफ कैरेक्टर की तरह ही है। लेकिन यह कह सकते हैं कि एक हाई प्रोबेबिलिटी चेंज ऑफ कैरेक्टर है। क्योंकि इसमें होता तो चेंज ऑफ कैरेक्टर ही है लेकिन जब चेंज ऑफ कैरेक्टर हो रहा है तब वहां पे कंडीशन यह है कि उस जगह पर एक एफपीजी बन [संगीत] रहा हो। एफवीजी यानी फेयर वैल्यू गैप। ये हमने पहले वाले जो हमारा ट्रेडिंग कोर्स था उसमें बताया है। थोड़ा सा आपको यहां पर भी बता दूंगा। उसके लिए सीधा चार्ट पे चलते हैं। वहां पे समझते हैं। तो मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट को समझने से पहले थोड़ा सा एफवीजी को समझ लेते हैं। तो एफवीजी भी बुलिश बेरिश दोनों होता है। ये सब आगे हम आपको और ज्यादा डिटेल में बताएंगे। अभी थोड़ा सा बता देता हूं क्योंकि ये कांसेप्ट बताना ना यहां पर जरूरी था। तो देखिए जब भी आपको दिखाई देता है कि एक नॉर्मल से बड़े साइज की ग्रीन कलर की कैंडल बनी है। जैसा कि यहां पर आपको दिखाई दे रहा है। तो आपने क्या करना है? आपने उससे पहले वाली कैंडल के हाई से लगते हुए यानी ये जो रेड कैंडल है इसके हाई से लगते हुए हमने एक लाइन ड्रॉ करनी है। और जो उसके बाद वाली कैंडल है यानी ये जो ग्रीन कैंडल है उसके लो से लगते हुए हमने इस तरीके से एक लाइन ड्रॉ कर लेनी है। और ये जो एरिया हमारा निकल कर आया है इसको हम कहते हैं मतलब ये जो एरिया है इसको हम कहते हैं फेयर वैल्यू गैप। तो अब अगर मान लीजिए प्राइस कभी दोबारा से इस लेवल पे आती है तो माना जाता है कि प्राइस के यहां से बढ़ने के चांसेस होते हैं। लेकिन ये जो बीच में गैप है इसको ही हम एफवीजी या फेयर वैल्यू गैप कहते हैं। और ऐसे ही अगर हम डाउन ट्रेंड की बात करें तो जब भी आपको नॉर्मल से बड़े साइज की एक रेड कलर की कैंडल देखने को मिलती है। जैसा कि यहां पर हमें दिखाई दे रही है। तो हमने क्या करना है? हमने उससे पहले वाली कैंडल यानी इस कैंडल के लो से लगते [संगीत] हुए उसके बाद वाली कैंडल यानी ये वाली जो कैंडल है इसके हाई से लगते हुए एक इस तरीके से अपना एरिया ड्रॉ कर लेना होता है। और यह होता है हमारा बेयरिश फेयर वैल्यू गैप। अब अगर मान लीजिए प्राइस दोबारा से यहां पर आती है तो यहां से प्राइस के [संगीत] गिरने के चांसेस होते हैं। ये एफवीजी कहता है। तो एफवीजी क्या होता है? ये आपको समझ आ गया। तो अब आपके लिए मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट समझना बहुत ज्यादा आसान है। क्योंकि मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट कुछ भी नहीं है बल्कि चेंज ऑफ कैरेक्टर है। जैसे यहां पर हमने अभी आपको जो चेंज ऑफ कैरेक्टर का एग्जांपल दिखाया था वो बेसिकली चेंज ऑफ कैरेक्टर तो है ही। लेकिन वह इसके साथ ही मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट भी है। क्योंकि जब चेंज ऑफ करैक्टर हो रहा है तब वहां पर हमें एक फेयर वैल्यू गैप बनता हुआ भी दिखाई दे रहा है। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं कि हमारा बयरिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर चल रहा था। उसके बाद आपने देखा कि प्राइस इससे नीचे नहीं आ पाई। तो हमने क्या किया? हमने लोअर हाई से लगते हुए एक लाइन ड्रॉ की और हमें दिखाई देता है कि भाई ये वाली जो कैंडल है इसने इसके ऊपर क्लोजिंग दे दी है। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब हमारा चेंज ऑफ करैक्टर हो चुका है। बट अगर हम समझना चाहते हैं कि भाई यह चेंज ऑफ करैक्टर कितना ज्यादा स्ट्रांग है तो अगर हमें दिखाई देता है कि जिस कैंडल ने चेंज ऑफ करैक्टर को कंफर्म किया है। जैसे [संगीत] इस कैंडल ने उसके ऊपर क्लोजिंग दिया है यानी इसने कंफर्म किया है। तो अगर यहां पर कोई एफवीपीजी बन रहा है तो उसको हम मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट बोलते हैं। जो कि आप हाई प्रोबेबल चेंज ऑफ करैक्टर बोल सकते हैं। और एफवीजी कैसे बन रहा है? उसका एग्जांपल भी आप यहां पर देख सकते हैं कि जिस कैंडल ने यहां पर मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट दिया है या चेंज ऑफ कैरेक्टर दिया है उससे पहले वाली कैंडल के हाई से लगते हुए बाद वाली कैंडल के लो से लगते हुए हमने एक एरिया मार्क किया है और यहां पर ये कैंडल नॉर्मल से बड़े साइज की भी [संगीत] है। यानी ये एक एफवीजी है। तो ये चेंज ऑफ करैक्टर होने के साथ-साथ एक एमएसएस [संगीत] भी है। अब इसके बाद एक बयरिश एमएसएस का एग्जांपल भी देख लेते हैं। देखिए यहां पर आपको दिखाई दे रहा है कि हमारा एक बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर बन रखा था। फिर से बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर बना। अब इसके बाद आपने यहां से भी लाइन खींची होगी। लेकिन प्राइस इसके ऊपर नहीं गई। यानी यहां पर हमारा बुलिश ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर नहीं हुआ। तो हमने क्या किया? हमने हायर लो से लगते हुए एक लाइन ड्रॉ की और जैसे ही किसी कैंडल ने इसके नीचे क्लोजिंग दे दी है तो हमारा यहां पर चेंज ऑफ करैक्टर तो हो चुका है। लेकिन इसके साथ ही हमें दिखाई देता है कि जैसे ही किसी कैंडल ने उसके नीचे क्लोजिंग दी है तो वहीं पर हमें एक एफपीजी बनते हुए भी दिखाई दे रहा है। तो हमने क्या किया? हमने उससे पहले वाली कैंडल के लो से लगते हुए बाद वाली कैंडल के हाई से लगते हुए इस तरीके से एक एरिया ड्रॉ कर लिया जो कि हमारा एफपीजी है और जब इसके साथ हमें एफपीजी बनता हुआ भी दिखाई दे रहा है तो ये क्या है ये हमारा चेंज ऑफ करैक्टर तो है ही लेकिन इसके साथ ही ये एक एमएसएस यानी मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट भी है जो कि एक हाई प्रोबेबल चेंज ऑफ करैक्टर होता है और इसके बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस यहां पर गिरी भी है। तो चेंज ऑफ करैक्टर के साथ-साथ आपको मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट भी क्लियर हो गया है। अब जिनको कंफ्यूजन होगा उनको मैं क्लियर कर दूं कि ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हमें क्या बता रहा है? ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हमें बता रहा है कि ट्रेंड कंटिन्यू हो रहा है। जबकि चेंज ऑफ करैक्टर और या फिर एमएसएस हमें बता रहा है कि ट्रेंड वहां से रिवर्स हो रहा है और अब एक दूसरा ट्रेंड स्टार्ट हो चुका है। अगर अप ट्रेंड चल रहा था तो डाउन ट्रेंड स्टार्ट हो चुका है। डाउन ट्रेंड चल रहा था तो अब शायद अप ट्रेंड स्टार्ट हो चुका है। ये हमें मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट बताता है। तो अब चलिए बात करते हैं लिक्विडिटी के बारे में। तो लिक्विडिटी का सिंपल सा मतलब होता है मार्केट में पेंडिंग बाय और सेल ऑर्डर्स जो कि मेनली स्टॉप लॉसेस की फॉर्म में होते हैं। अब यह जो लिक्विडिटी होती है यह दो तरह की होती है। एक होती है बाय साइड लिक्विडिटी। दूसरी होती है सेल साइड लिक्विडिटी। बाय साइड लिक्विडिटी जनरली मार्केट के हाईज़ के ऊपर होती है। जैसे इक्वल हाईज़ के ऊपर आपको देखने को मिलेगी। प्रीवियस डे के हाई के ऊपर देखने को मिलेगी। स्विंग हाई के ऊपर जो लिक्विडिटी आपको देखने को मिलेगी वो बाय साइड लिक्विडिटी है। क्योंकि ऐसे में क्या होता है कि जो ट्रेडर्स हैं उन्होंने शॉर्ट करने की पोजीशन लगा रखी होती है। ऊपर अपने स्टॉप लॉस रखे होते हैं। तो उनके जो स्टॉप लॉस हैं वो कौन से स्टॉप लॉस हैं? उन्होंने पहले बेचा है। वो बाय करने के स्टॉप लॉस हैं। इसलिए उसको कहा जाता है बाय साइड लिक्विडिटी। और मार्केट जो है वो इन हाईस को टारगेट करता है ताकि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं वो अपने लिए हैवी सेलिंग कर सकें क्योंकि उन्हें अब बायरर्स मिल जाएंगे। और इसका उल्टा होता है सेल साइड लिक्विडिटी जो कि हमें जनरली मार्केट के जो लोज़ होते हैं उनके नीचे देखने को मिलती है। जैसे इक्वल लो के नीचे आपको सेल साइड लिक्विडिटी देखने को मिलेगी। प्रीवियस डे के लो के नीचे देखने को मिलेगी। स्विंग लो के नीचे देखने को मिलेगी। और यह सेल साइड लिक्विडिटी इसलिए है क्योंकि जिन भी ट्रेडर्स ने बाय कर रखे होंगे उन्होंने नीचे अपने स्टॉप लॉस रखे होते हैं। तो यहां पर जो बड़े इंस्टीटशंस हैं अगर वो हैवी क्वांटिटी में बाय करना चाहते हैं तो उन्हें सेलर्स चाहिए तो वो क्या करते हैं? वो पहले नीचे ट्रेडर्स के स्टॉप लॉस हिट करवाते हैं जिससे उन्हें सेलर्स मिल जाते हैं और वह जो हैवी क्वांटिटी में बाइंग करना चाह रहे थे वो अपने मिशन में सक्सेसफुल हो जाते हैं। जैसे यहां पर हमने आपके लिए चार्ट में बाय साइड लिक्विडिटी और सेल साइड लिक्विडिटी मार्क कर रखी है। ये हमने स्विंग हाई एंड स्विंग लो पे मार्क की है। इसके अलावा भी बहुत सारी जगह पे लिक्विडिटी होती है जो कि हमने यहां पर बताया है। तो अब देखिए यहां पर क्या है? यहां पर आपने देखा कि सबसे पहले यह एक स्विंग हाई है। तो यह जो स्विंग हाई है, हमने इससे लगते हुए एक लाइन ड्रॉ की है और हमने देखा कि जब भी प्राइस इसके ऊपर चली जाती है, इसका मतलब यहां पर प्राइस ने क्या किया है? उसने बाय साइड लिक्विडिटी को ले लिया है। और ऐसे ही अगर आपको कोई स्विंग लो नजर आता है। जैसे ये स्विंग लो था इसके बनने से पहले। तो हमने इससे लगते हुए लाइन ड्रॉ की। अब बहुत सारे लोगों ने क्या किया होगा? यहां पर बाय किया होगा। अपना स्टॉप लॉस इससे थोड़ा सा नीचे रखा होगा जो कि सेल करने का स्टॉप लॉस होगा और प्राइस क्या आई? प्राइस उनके इस स्टॉप लॉस के पास आई। उनका स्टॉप लॉस हिट हुआ। प्राइस ऊपर चली गई है। तो ये क्या है? ये है सेल साइड लिक्विडिटी और ये है बाय साइड [संगीत] लिक्विडिटी। अब सबसे इंपॉर्टेंट कांसेप्ट जो हमारे लिए समझना जरूरी है वो है लिक्विडिटी स्वीप। तो लिक्विडिटी स्वीप का सिंपल सा मतलब होता है कि जब भी प्राइस किसी लिक्विडिटी ज़ोन को हिट करती है और वहां से रिवर्स कर जाती है तो इसको हम लिक्विडिटी स्वीप कहते हैं। [संगीत] इससे हम समझते हैं कि यहां पर बड़े इंस्टीटशंस ने लोगों की लिक्विडिटी को स्वीप किया है या कहीं की लिक्विडिटी को गैब किया है। मतलब उनके स्टॉप लॉस हिट करवा दिए हैं और अब मार्केट रिवर्स हो गया है। तो अगर यह ऊपर की तरफ होता है तो हमें दिखाई दिया मार्केट नीचे की तरफ गया है। अगर मान लीजिए नीचे की साइड होगा तो नीचे के स्टॉप लॉस हिट करवाया ना तो यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे। अब ये जो लिक्विडिटी स्वीप है ना ये भी सीधा चार्ट में ही समझ लेते हैं क्योंकि वहीं पर ये चीज क्लियर [संगीत] होगी। तो लिक्विडिटी स्वीप को समझने के लिए जैसे आप यहां पर देख सकते हैं कि प्राइस ने अपना एक हाई बनाया। यहां से फिर प्राइस रिवर्स हुई। दोबारा से प्राइस ने अपना एक हाई बनाया। प्राइस यहां से रिवर्स हुई। यानी ये क्या थे? ये थे हमारे इक्वल हाई। उसके बाद क्या होता है? प्राइस तीसरी बार इस लेवल पे जाती है। अब यहां पर बहुत सारे ट्रेडर्स ने क्या सोचा होगा कि भाई प्राइस यहां से रिवर्स हो जाएगी। तो उन्होंने क्या किया? उन्होंने यहां पर सेल करने की पोजीशन ली होगी। अपना स्टॉप लॉस थोड़ा सा ऊपर यहां पे कहीं पर रखा होगा। तो यहां पे उनका स्टॉप लॉस रहा होगा और वो स्टॉप क्या है? वो उनका बाय करने का स्टॉप लॉस है और टारगेट अपना जो भी प्लान कर रहे होंगे कि भाई 1:2 मिल जाएगा। लेकिन होता क्या है कि तीसरी बार प्राइस उस लेवल पे जाती है और उस लेवल पे जाने के बाद रिवर्स नहीं होती। सीधा उससे ऊपर निकल जाती है। जिन भी लोगों की यहां पर बाय साइड लिक्विडिटी पड़ी थी उन सबके स्टॉप लॉस हिट हो जाते हैं और उसके बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस नीचे आने लगती है। तो इसी को हम कहते हैं लिक्विडिटी स्वीप करना जिसमें बड़े इंस्टीटशंस क्या करते हैं? किसी पर्टिकुलर लेवल पे प्राइस को थोड़ा सा ऊपर या नीचे ले जाते हैं ताकि ट्रेडर्स के स्टॉप लॉस हिट हो और उसके बाद वहां से मार्केट रिवर्स हो जाता है क्योंकि उन्हें क्या करना था? उन्हें एक तो बेचना था और वो भी महंगे से महंगे में बेचना था। तो इसलिए उन्होंने यहां पर रिटेलर्स के स्टॉप लॉस हिट करवाए ताकि जितनी क्वांटिटी वो सेल करना चाहें वो सेल कर पाएं और जब उन्होंने सेल कर दिया उसके बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस अच्छी खासी गिर गई है। तो इसको लिक्विडिटी स्वीप कहा जाता है। तो इससे आपको यह भी समझ आ रहा है कि अगर कभी ऊपर की तरफ लिक्विडिटी स्वीप हुआ है इसका मतलब इंस्टीटशंस ने ट्रेडर के स्टॉप लॉस हिट करवा दिए हैं। अब वो प्राइस को नीचे लेके जाएंगे तो हम उसके बाद अपना ट्रेड प्लान कर सकते हैं। इसके बाद सेल साइड लिक्विडिटी का एग्जांपल आप यहां पर देख सकते हैं। देखिए प्राइस ने यहां पर अपना एक स्विंग लो बनाया था और उसके बाद प्राइस ऊपर गई थी। तो हमने क्या किया? हमने इससे लगते हुए एक लाइन ड्रॉ कर दी और इसके बाद आप देखते हैं कि प्राइस ने क्या किया? प्राइस इस लेवल से थोड़ा सा नीचे आती है। यहां पर जिन भी लोगों ने इस जगह पर अपना बाय कर रखा होगा उसका जो स्टॉप लॉस रहा होगा वो यहां पे रहा होगा। सेल करने वाला स्टॉप लॉस। तो यहां पे क्या होता है? यहां पर उसके स्टॉप लॉस हिट हो जाएंगे। उसके बाद आप देख सकते हैं प्राइस में अच्छा खासा मूव आया था। तो ये क्या है? यह है हमारी सेल साइड लिक्विडिटी। और यह सेल साइड लिक्विडिटी क्यों है? क्योंकि यहां पर जो रिटेलर है, उसके [संगीत] सेल करने वाले स्टॉप लॉस लगे हुए हैं। तो, यह जो लिक्विडिटी स्वीप है ना, यह एक बहुत ही इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है। मैं आपको कहूंगा कि इसको चार्ट में आप जितना प्रैक्टिस कर सकते हैं, आपको उतना प्रैक्टिस करना चाहिए और आपको ट्रेडिंग अच्छे से तभी आएगी जब आप खुद से प्रैक्टिस करेंगे। सिर्फ देखने से ट्रेडिंग आती है तो हर कोई सीख गया होता। अब चलिए मैं आपको एक फाइनल एग्जांपल देता हूं जिसमें अभी तक मैंने आपको जो कुछ सिखाया है ना उस सारी चीज को हम अप्लाई करके देखेंगे और उसके बेसिस पे ट्रेड प्लान [संगीत] करके देखते हैं। बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है तो इसलिए इसको ध्यान से देखना। देखिए सबसे पहले हमें दिखाई दे रहा है कि यहां पर मार्केट जो है वो अप ट्रेंड पे चल रहा है। हम इससे लगते हुए अपना एक ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर मार्क कर सकते थे। हमने यहां पर ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर मार्क कर रखा है। आप चाहो तो उसको भी मार्क कर सकते हो। [संगीत] तो यहां पे मैंने एक ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर मार्क किया है। इसका मतलब यहां तक क्या चल रहा था? मेरा अप ट्रेंड चल रहा था। उसके बाद यहां पर पीछे से हमने एक लेवल मार्क कर रखा है जो हमें दिखाई देता है कि यहां पर हमारा एक लेवल था और उसके बाद क्या होता है कि एक कैंडल इसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है। फिर अगली कैंडल में ही प्राइस इसके नीचे आ जाती है। तो यहां पर एक हमें दिखाई देता है कि भाई हमारा क्या हुआ है? हमारा यहां पर लिक्विडिटी स्वीप हुआ है। लेकिन अभी हम कंफर्म नहीं है कि भाई ये एक्चुअल में स्वीप है या नहीं है। क्योंकि जब तक यहां पर ट्रेंड रिवर्स नहीं होता तब तक हम कंफर्म नहीं हो सकते। तो हम यहां पर कोई एंट्री नहीं लेंगे। हमें बट पहला सिग्नल यहां पे मिल गया था। उसके बाद क्या होता है? उसके बाद हमें यहां पर एक बयरिश फेयर वैल्यू गैप बनता हुआ नजर आता है। देखिए यहां पर आपको दिखाई दे रहा है एक नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल है। उससे पहले वाली कैंडल के लो से लगते हुए बाद वाली कैंडल के हाई से लगते हुए हमने एक एरिया ड्रॉ किया है। तो ये क्या था? ये था हमारा एक बेरिश फेयर वैल्यू गैप। उसके बाद हमने क्या किया? हमने यहां पर एक अपना जो चेंज ऑफ करैक्टर था उसको मार्क किया। अब ये जो चेंज ऑफ कैरेक्टर है उसको मार्क करने के लिए हमने हाई एंड लो से लगते हुए एक लाइन ड्रॉ की। जैसे ही किसी कैंडल ने इसके नीचे क्लोजिंग दे दी है तो हमारा चेंज ऑफ कररेक्टर हो गया है। लेकिन क्योंकि यहां पर एक फेयर वैल्यू गैप भी था इसलिए हमने इसको एमएसएस यानी मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट कहा है। वैसे मैं क्लियर कर दूं कि जिस कैंडल ने उसके नीचे क्लोजिंग दी है जरूरी नहीं है कि वहीं पर फेयर वैल्यू गैप बना हो। अगर उसके आसपास भी बनाई या जहां से वो ट्रेंड शुरू हुआ है उसके बीच में भी बना है तब भी हम इसको एक मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट समझ सकते हैं। तो हमें सबसे पहले स्वीप ने सिग्नल दिया। उसके बाद यहां पर हमें एक फेयर वैल्यू गैप ने सिग्नल दिया। उसके बाद हमें एमएसएस होता हुआ नजर आया। तो हमें यहां पर तीन कंफर्मेशन मिले कि भाई यहां से ट्रेंड रिवर्स होने के चांसेस हैं और ऊपर से हमें दिख तो रहा है ना कि भाई चेंज ऑफ करैक्टर या एमएसएस हो चुका है तो अब शायद प्राइस गिर सकती है। बट हम यहीं पर शॉर्ट करने का ट्रेड नहीं लेंगे। लेकिन उसके बाद जैसे ही हमें दिखाई देता है कि प्राइस फेयर वैल्यू गैप के पास आती है तो हम वहां पर अपना शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान करते हैं। हमारा जो स्टॉप लॉस होगा वो यह जो हमारा स्विंग हाई है इससे थोड़ा सा ऊपर रहेगा और टारगेट के लिए हम 1:2 लेकर चल सकते हैं और उसके बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस गिरी है और हमारा ट्रेड यहां पर बना है। अब अगर आपने सारी चीजें जो मैंने अभी तक बताई है उनको समझा होगा तो आपको यह कांसेप्ट समझ आया होगा। तो अब जब आपको लिक्विडिटी स्वीप भी समझ आ गया है तो अब हम समझते हैं सीबीडीआर के बारे में। तो सीबीडीआर की फुल फॉर्म होती है सेंट्रल बैंक डीलर्स रेंज। ये आईसीटी का एक बहुत ही इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है जो हमें यह पता करने में हेल्प करता है कि कहां पर कोई जो स्टॉक है, कोई जो चार्ट है वो प्रीमियम में है या फिर डिस्काउंट में है। अब अगर खरीदना चाहते हो तो आप डिस्काउंट में खरीदोगे। अगर बेचना चाहते हो तो आप प्रीमियम में बेचोगे। और यही हमें सीवीडीआर पता करने में हेल्प करता है। बेसिकली इसमें हम इंस्टीटशंस के नजरिए से यह पता करने की कोशिश करते हैं कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं वो कहां पर किसी चार्ट को महंगा मान रहे हैं और कहां पर उसको सस्ता मान रहे हैं। अब ये जो सीबीडीआर है ये चार्ट में कैसे मार्क करना है ये मैंने आपको यहां पर दिखा रखा है। बल्कि अभी मैं आपको मार्क करके दिखाऊंगा। चार्ट में दिखाऊंगा। लेकिन मैं आपको बता दूं कि सीबीडीआर एक इंस्टीट्यूशनल रेफरेंस रेंज होती है जिससे ही हमें यह सारी चीजें पता चलती हैं। तो चलिए सीधा चार्ट पे चलते हैं और वहां पर सीबीडीआर को समझते हैं। [संगीत] तो यहां पर हमने आपके लिए सीबीडीआर मार्क कर रखा है। लेकिन इसको मार्क करने से पहले यहां पर आप देख सकते हैं हमने दो लाइन मार्क कर रखी है। यह बेसिकली एक एरिया है। यह एरिया टाइम के बेसिस पर डिसाइड किया गया है। क्योंकि माइकल जे हडलस्टन जिन्होंने आईसीटी कांसेप्ट बनाए हैं। उन्होंने एक पर्टिकुलर टाइम दे रखा है और यह टाइम अमेरिका के हिसाब से दोपहर के 2:00 बजे से रात के 8:00 बजे के बीच का वक्त होता है क्योंकि उनके अकॉर्डिंग जो बड़े-बड़े इंस्टीटशंस हैं वो इसी टाइम पर सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं। तो हमने क्या करना है? हमने इसी का हाई एंड लो को यहां पर सबसे पहले मार्क करना है। तो चलिए वो मैं आपको मार्क करके दिखाता हूं। तो [संगीत] यहां पर मैंने अपनी सारी ड्राइंग्स को रिमूव कर दिया है। तो अब न्यूयॉर्क टाइम के हिसाब से हम कैसे मार्क करेंगे? चलिए समझते हैं। तो इसके लिए देखिए यहां पर आपको जो भी चार्ट आप खोलेंगे चाहे डेल्टा एक्सचेंज के प्लेटफार्म पे खोलेंगे या ट्रेडिंग व्यू के प्लेटफार्म पे खोलेंगे आपको नीचे एक टाइम दिखाई देगा। आपने इस पे क्लिक कर देना है। जैसे ही आप इस टाइम पर क्लिक करते हैं, तो यह जो टाइम है, यह हमारे इंडिया के टाइम के हिसाब से सेट होता है। तो अब आपने यहां पर जाना है और अपने चार्ट का जो टाइम है, उसको न्यूयॉर्क के टाइम के हिसाब से सेट कर देना है। तो न्यूयॉर्क के टाइम के हिसाब से जब आप सेट करने जाएंगे तो आपको दिखाई देगा कि यहां पर कहीं पर हमारा न्यूयॉर्क का टाइम है जो कि है यूटीसी -4। तो हमने इस पे क्लिक कर देना है। तो अब हमने क्योंकि यहां पर जो टाइम सेट किया है वो न्यूयॉर्क का टाइम है। तो अब हमें वो एरिया मार्क करना है जिसके बीच में ही हम अपना हाई एंड लो ढूंढेंगे। तो एरिया मार्क करने के लिए आपने क्या करना है? आपने यहां पे जाना है और यहां पर आपको एक वर्टिकल लाइन का ऑप्शन मिलेगा। आपने इसको सेलेक्ट कर लेना है। अब इसके बाद आपने दोपहर के 2:00 का टाइम सेट करना है। अब क्योंकि आपने न्यूयॉर्क टाइम यहां पर ऑलरेडी लगा दिया है। तो अब आप दोपहर 2:00 बजे का टाइम यहां पर आराम से देख सकते हैं। देखिए हमें यहां पर अभी दिखाई दे रहा है कि दोपहर 2:00 बजे का टाइम यहां [संगीत] पर है। तो यहां पे मैंने अपना जो लाइन है उसको मार्क कर दिया है। और इसके बाद मुझे रात के 8:00 बजे का टाइम मार्क करना है। तो 8:00 बजे का टाइम हमारा यहां पर है जो हमें नीचे दिखाई दे रहा है क्योंकि हमने न्यूयॉर्क वाला टाइम सेट कर दिया है। तो अब हम फिर से यहां पर वर्टिकल लाइन लेते हैं और इसके बाद जो हमारा 8:00 बजे का टाइम है हमने इसको मार्क कर दिया है। तो यह हमारे सामने वो एरिया आ गया है जिसके बीच में ही हमें पता है कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं वो सबसे ज्यादा एक्टिविटी करते हैं। तो अब हम क्या करेंगे? अब हम इसके हाई एंड लो लेवल को मार्क करेंगे। [संगीत] तो यहां पर इसका हाई एंड लो लेवल क्या है? मतलब हमने इससे पीछे के चार्ट से हमें कोई मतलब नहीं है। आगे का चार्ट फिलहाल जो मैं एग्जांपल आपको दिखा रहा हूं उसके हिसाब से मान लीजिए कि अभी बना नहीं है। तो हमने क्या करना है? हमने अब इसके हाई एंड लो को मार्क करना है। तो यहां पर आपको दिखाई दे रहा है इसका हाई है। यहां पर इसका लो है। लेकिन इस हाई एंड लो को मार्क करने के लिए हम यहां पर यूज़ करेंगे स्टैंडर्ड डेविएशन का जिसको हम फिबोनाची रिट्रेसमेंट टूल का यूज़ करके ही बनाते हैं। तो इसके लिए हमें क्या करना है? हमें यहां पे जाना है। यहां पर जाने के बाद ये आपको दिखाई दे रहा है। ये फिबोनाची रिट्रेसमेंट है। हमने इस पे क्लिक कर देना है। [संगीत] अब इसके बाद हमने क्या करना है? हमने यहां से लो टू हाई इसको मार्क करना है। तो ये हमने पकड़ा लो टू हाई हमने इसको ले जा के यहां पर मार्क कर दिया है। [संगीत] अब मैंने क्या है ना ऑलरेडी अपनी जो सेटिंग्स हैं वो यहां पर चेंज कर रखी थी फिबोनाची रिट्रेसमेंट की। इसलिए इसने ऑलरेडी यहां पर स्टैंडर्ड डेविएशन ही मार्क किया है। लेकिन [संगीत] आपने सेटिंग्स कैसे चेंज करनी है वो मैं आपको बता देता हूं। तो इसके लिए आप क्या कीजिए? आपने जो यह टूल लगाया, आपने इसकी सेटिंग्स में चले जाना है और इसकी सेटिंग्स में जाने के बाद जो सेटिंग मैंने यहां पर मार्क कर रखी है, आपने स्टैंडर्ड डेविएशन के लिए यह वाली सेटिंग्स लगानी है। जैसे जो हम नॉर्मली अपने फिबोनाची रिट्रेसमेंट में लगाते हैं जैसे 0.5, 0.618, 0.79 ये सारे लेवल हमने हटा देने हैं। और बाकी जो लेवल मैंने लगा रखा है 1 0 बाकी -1, -2, -3, -4, [संगीत] 4321 ये लेवल्स आपने यहां से ऑन कर देने हैं। और बाकी भी अगर आप कुछ सेटिंग्स यहां से लगाना चाहते हैं तो वह आप [संगीत] यहां से कॉपी कर सकते हैं। तो इस तरीके से हमने अपना यहां पर स्टैंडर्ड डेविएशन जो है उसको मार्क कर दिया है। अब देखिए ये जो मार्किंग्स मैंने कर रखी हैं ये मैंने 15 मिनट के टाइम फ्रेम पे कर रखी हैं। तो अब हमें थोड़े बड़े टाइम फ्रेम पे जाना है। तो हम यहां पर 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे चले जाते हैं। और 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे जाने के बाद अब हमें पीडी एरेज को मार्क करना है। अगर आपको नहीं पता पीडीआरेज़ क्या होते हैं तो मैं आपको बता दूं कि हमने जो हमारा पिछला कोर्स बनाया था बिल्कुल बेसिक टू एडवांस ट्रेडिंग का उसमें हमने आपको स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट के बारे में बताया था। तो वहां पर हमने काफी सारे पीडीआरेज़ डिस्कस किए थे। जैसे कि फेयर वैल्यू गैप के बारे में हमने आपको बताया था। हमने आपको ऑर्डर ब्लॉक के बारे में बताया था। और भी बहुत सारी चीजें वहां पर हमने डिस्कस की थी। अगर आपने उन वीडियोस को नहीं देखा है तो आप उस सीरीज को देख सकते हैं। तो अब हम उन पीडी एरेस को मार्क करेंगे। तो सबसे पहला पीडी एरे हमें यहां पर जो देखने को मिल रहा है वो है एक ऑर्डर ब्लॉक। अब ऑर्डर ब्लॉक क्या होता है यह भी मैं आपको बता देता हूं। तो देखिए जब भी हमें दिखाई देता है कि किसी पर्टिकुलर एरिया से एक डाउन साइड का मूवमेंट आ रहा है तो हमने क्या करना है? हमने उससे पहले वाली कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए [संगीत] एक एरिया ड्रॉ कर लेना है और वो होता है हमारा एक ऑर्डर ब्लॉक। और इसी तरीके से अगर बुलिश ऑर्डर ब्लॉक की बात करें तो जब भी आपको दिखाई देता है कि एक इंपल्सिव मूव मार्केट में आया है तो हमने उससे पहले वाली कैंडल के हाई एंड लो से रखते हुए एक एरिया ड्रॉ कर लेना है। वो होता है हमारा बुलिश ऑर्डर ब्लॉक। फिलहाल हमें यहां पर दिखाई दे रहा है कि [संगीत] हमारा एक बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक यहां पर बन रहा है। तो चलिए उस बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक को मार्क कर लेते हैं। तो इसके लिए हमने क्या करना है? ये जो ड्राइंग वाला ऑप्शन है यहां पे आना है। यहां से रेक्टेंगल वाला टूल हमने सेलेक्ट कर लेना है। और इसको सेलेक्ट करने के बाद देखिए प्राइस ने अपना हाई यहां पर बनाया था। तो मैं क्या करूंगा? मैं इससे पहले वाली कैंडल जो है इसके हाई एंड लो से लगते हुए एक इस तरीके से एरिया ड्रॉ करूंगा। कुछ इस तरीके से यहां पे मैंने अपना एरिया ड्रॉ कर लिया। अब देखिए क्योंकि प्राइस ने यहां तक का अपना हाई बनाया था। तो मैं क्या करता हूं? मैं इस हाई को भी यहां पर ले लेता हूं। तो ये हो गया मेरा ऑर्डर ब्लॉक का एरिया। अब यहां पर आप ध्यान से देखेंगे तो यह जो मेरा एरिया है यह मेरा जो सीबीडीआर का ज़ोन जो मैंने यहां पे मार्क किया था उसके -2 लेवल के आसपास आ रहा है। यानी मेरे सीबीडीआर ज़ोन के आसपास आ रहा है। तो ये हमारे लिए एक वैलिड या फिर कहें कि अच्छा ज़ोन है। अब देखिए ऊपर का लेवल तो मैंने मार्क कर लिया है। लेकिन अब मुझे नीचे का लेवल भी मार्क करना है क्योंकि मुझे यह तो पता है कि प्राइस अगर ऊपर तक जाती है तो कहां से रिवर्स कर सकती है। लेकिन अगर नीचे जाती है तो फिर प्राइस कहां तक जा सकती है। मेरे लिए यह जानना भी जरूरी है। तो इसके लिए हम ढूंढते हैं कि कोई हमें और पीडीआरए मिल जाए। तो हमने थोड़ा सा चार्ट को स्लाइड किया। तो देखिए यहां पर मुझे एक फेयर वैल्यू गैप बनता हुआ नजर आ रहा है। और अगर आपको ये वीडियो पसंद आ रही है तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर दीजिएगा। और अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना डेल्टा एक्सचेंज में अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रखा है। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से अराई का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन भी मिलता है और साथ ही नीचे Google फॉर्म दे रखा है उसको जरूर फिल करना है। बट जो भी डिटेल्स फिल करेंगे वो सही फिल कीजिएगा क्योंकि हम उसको वेरीफाई करते हैं। अब चलिए वापस आते हैं टॉपिक पे। तो मैंने आपको बताया है कि फेयर वैल्यू गैप मार्क करने के लिए आपको जब भी नॉर्मल से बड़े साइज की एक कैंडल देखने को मिलती है तो आपने क्या करना है? आपने उससे पहले वाली कैंडल के लो से लगते हुए उसके बाद वाली कैंडल के हाई से लगते हुए एक एरिया ड्रॉ कर लेना होता है और वो होता है हमारा फेयर वैल्यू गैप। तो यहां पर हम कैसे मार्क करेंगे? देखिए हम गए यहां पर हमने इस पे क्लिक किया और इस पे क्लिक करने के बाद हम आ जाते हैं यहां पर रेक्टेंगल वाला टूल ले लेते हैं। तो हमें दिखाई दे रहा है कि एक नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल है। तो हमने क्या किया? हमने इससे पहले वाली कैंडल के हाई से रखते हुए बाद वाली कैंडल के लो से रखते हुए इस तरीके से [संगीत] एक एरिया ड्रॉ कर लिया। और यह जो एरिया है यह है हमारा बुलिश फेयर वैल्यू गैप। यानी अगर प्राइस इस लेवल पे आती है तो यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होते हैं। और यह लेवल भी हमारा जो सीबीडीआर का लेवल है अगर उसके पास होगा तो यह एक बेटर लेवल होगा या कहें कि हाई प्रोबेबिलिटी लेवल होगा। और आप यहां पर देख सकते हैं कि यह हमारा जो वन लेवल है उसके पास आ रहा है। अब शुरुआत में ही मैंने आपको कहा था कि यह जो सीबीडीआर है यह हमें बताता है कि प्रीमियम लेवल कौन सा है और डिस्काउंट लेवल कौन सा है। तो यहां पर जो ऊपर का लेवल है यह हमारा प्रीमियम लेवल है और जो नीचे का लेवल है यह हमारा डिस्काउंट लेवल है। यानी अगर प्राइस इस लेवल के पास आती है तो यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे। अगर इस लेवल के पास आती है तो यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस होंगे। तो अब चलिए देखते हैं कि प्राइस पहले कौन से लेवल पे जाता है। प्रीमियम लेवल पे जाता है या डिस्काउंट लेवल पे जाता है। प्राइस जिस भी लेवल पे जाएगा प्राइस पहुंच ही चुका है। बल्कि यह वाला जो हमारा लेवल था प्रीमियम लेवल प्राइस वहां पर गई है। और जैसे ही प्राइस उस लेवल के पास आती है तब हम क्या कर सकते हैं? जब प्राइस यहां पर आई होगी हम यहां पर अपना शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान कर सकते हैं। अब ये सब तो हम 1 घंटे के टाइम फ्रेम में देख रहे थे। तो अब हम लोअर टाइम फ्रेम में आ जाएंगे। वापस से 15 मिनट के टाइम फ्रेम पे या फिर अगर आपको लगता है तो आप 5 मिनट के टाइम फ्रेम में भी आ सकते हैं क्योंकि अब आपने एंट्री ढूंढनी है। अभी आपको लोकेशन कंफर्म हो चुकी है। मार्केट की डायरेक्शन कंफर्म हो चुकी है। डायरेक्शन कैसे कंफर्म हुई कि प्राइस हमारे प्रीमियम वाले लेवल से नीचे आ रही है। और दूसरा लोकेशन क्योंकि हमने पहले ही पता कर लिया था कि कौन सा लेवल प्रीमियम है और कौन सा लेवल डिस्काउंट है। तो हमें यहां पर दो चीजें कंफर्म हो चुकी है। तो अब हमें चाहिए बस एंट्री जिसके बेसिस पे हम अपना ट्रेड प्लान कर सकते हैं। तो अब एंट्री के लिए आप या तो किसी पीडी एरे का यूज कर सकते हैं जो पीडी एरेज थोड़े बहुत मैं आपको बता चुका हूं। बाकी डिटेल में आपको आगे बताऊंगा या फिर सीआईएसडी का यूज़ कर सकते हैं। ये सारे कांसेप्ट हम आपको आगे बताने वाले हैं। या फिर अगर आपने हमारी इससे पहले वाली सीरीज देखी होगी फिर तो आपको वो सीआईएसडी एफजी ये सारे कांसेप्ट पता ही होंगे। तो आप उन कांसेप्ट को यहां पर लगा के अपनी जो एंट्री है वो प्लान कर सकते हैं। तो अगर आपने यहां पर एंट्री ली होती तो आप देख सकते हैं कि यहां से मार्केट ने रिवर्स किया था। तो सीबीडीआर का यूज़ कैसे करना है यह आपको समझ आ गया है। तो चलिए अब बात करते हैं डीलिंग रेंज के बारे में। तो डीलिंग रेंज बेसिकली वो रेंज होती है जिसके बीच में पूरी डील चल रही है। मतलब जो भी बाइंग एंड सेलिंग चल रही है जो भी ट्रेड्स चल रहे हैं वो उस रेंज के बीच में चल रहे हैं। तो अब ये रेंज हम मार्क कैसे करेंगे? सिंपल है। स्विंग हाई एंड स्विंग लो को हमें मार्क करना होता है। और इससे हमारी डीलिंग रेंज निकल जाती है। और इसके बाद हम यहां पर भी प्रीमियम एंड डिस्काउंट ज़ोन का पता कर सकते हैं। वो कैसे करना है? चलिए ये भी चार्ट में देखते हैं। तो डीलिंग रेंज मार्क करने के लिए हमें स्विंग हाई एंड स्विंग लो को मार्क करना होता है। अब यहां पर मैं आपको दिखा देता हूं कि स्विंग हाई एंड स्विंग लो कहां पर है। तो देखिए सबसे पहले मैं यहां पर एक स्विंग लो मार्क कर देता हूं। आपको दिखाई दे रहा है ये एक लेवल है जहां से जाने के बाद प्राइस बढ़ रही है। तो यहां पर हमारा स्विंग लो है। तो इससे लगते हुए मैंने एक लाइन ड्रॉ कर दी। अब इसके बाद स्विंग हाई अगर मैं यहां पे मार्क करना चाहूंगा तो ये जो रेंज है ये काफी बड़ी हो रही है। इथेरियम के इतना ऊपर आने के चांसेस बहुत कम होंगे क्योंकि मैं 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे देख रहा हूं। तो इससे पहले वाला जो हाई मुझे नजर आ रहा है वो करीब-करीब यहां पे नजर आ रहा है। आप चाहो तो उसको भी मार्क कर सकते हो। लेकिन फिलहाल मैं इसको मार्क कर देता हूं। तो यहां पर हमें क्या दिखाई दिया? यहां पर हमें दिखाई दे रहा है स्विंग हाई, स्विंग लो। मैंने आपको अगेन बता दिया है यह ना मार्क करने का रीज़न कि वो रेंज बहुत बड़ी है। जहां पर प्राइस के अभी रीसेंट में जाने के जो चांसेस हैं, वो कम है। तो, हमने क्या किया? हमने हाई एंड लो मार्क कर लिया। तो ये हमने एक तरह से डीलिंग रेंज मार्क कर दिया है। तो अब हमें यहां पर प्रीमियम एंड डिस्काउंट ज़ोन को मार्क करना है। तो इसके लिए हम यहां पर जाएंगे और यहां पर जाने के बाद आप चाहे तो फिबोनाची रिट्रेसमेंट टूल का भी यूज़ कर सकते हैं। या फिर ये गेन बॉक्स टूल है। [संगीत] आप इसका यूज़ कर सकते हैं अपनी रेंज मार्क करने के लिए। इसकी सेटिंग्स मैं आपको फिर बताता हूं। पहले मार्क कैसे करना है यह समझ लेते हैं। तो मार्क करने के लिए स्विंग हाई से स्विंग लो तक हम इसको लेके जाते हैं। तो यहां पे हमारा स्विंग लो है। यहां पे हमारा स्विंग हाई है। और इस तरीके से हमने अपनी जो रेंज है उसको मार्क कर दिया है। अब यहां पर मैं आपको सेटिंग्स दिखा देता हूं। क्योंकि जब आप पहली बार इस टूल को यूज करेंगे तो उस टाइम पर इसकी जो सेटिंग्स होंगी वो डिफरेंट होंगी। तो यहां पर आपने यह जो सेटिंग्स हमने लगा रखी हैं, इन सेटिंग्स को लगा देना है जो कि बेसिकली 0, 0.5 और वन का लेवल है। और इन सेटिंग्स को लगाने के बाद आप यहां पर ओके कर दीजिएगा। तो आपका भी जो गेन बॉक्स है वो कुछ इस तरीके का बन जाएगा। तो अब देखिए जो नीचे का लेवल हमें दिखाई दे रहा है ये हमारा डिस्काउंट ज़ोन है। जो ऊपर का लेवल हमें दिखाई दे रहा है वो हमारा प्रीमियम ज़ोन है। अब ये मैंने मार्क किया है बड़े टाइम फ्रेम पे जो कि 1 घंटे का टाइम फ्रेम है। तो अब आ जाता हूं मैं छोटे टाइम फ्रेम पे और ढूंढता हूं कि कहीं पर मुझे क्या कोई एंट्री मिल रही है। तो पहले मैं 15 मिनट के टाइम फ्रेम में आया हूं और यहां पर मैं एंट्री ढूंढ रहा हूं। अब देखिए क्योंकि मुझे पता है कि प्राइस जो है वो प्रीमियम ज़ोन के आसपास है। तो यहां पर अगर मैं एंट्री ढूंढूंगा तो मैं शॉर्ट करने की एंट्री ढूंढूंगा। अगर प्राइस डिस्काउंट ज़ोन पे होगी तो यहां पर एंट्री मैं ढूंढूंगा तो मैं बाय करने की एंट्री ढूंढूंगा। तो एंट्री के लिए अगेन हम पीडी एरेज का यूज कर सकते हैं। तो यहां पर मुझे एक ऑर्डर ब्लॉक नजर आ रहा है। देखिए यहां से एक इंपल्सिव डाउन साइड का मूव आया था। तो उससे पहले वाली जो कैंडल है इस कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए मैं अपना एक एरिया ड्रॉ कर लेता हूं जो कि होगा मेरा ऑर्डर ब्लॉक। तो यहां पर मुझे एक ऑर्डर ब्लॉक नजर आ रहा है। तो यह ऑर्डर ब्लॉक मैंने यहां पर मार्क कर दिया है। और जैसे ही मैंने ऑर्डर ब्लॉक मार्क किया है तो मुझे अभी दिखाई दे रहा है कि जो प्राइस है वो मेरे ऑर्डर ब्लॉक के पास ही है। यानी मैं यहां पर ही अपनी शॉर्ट करने की पोजीशन ले सकता हूं। तो इसके लिए हमने क्या किया होता? हमने यहां पर शॉर्ट करने की पोजीशन ली होती। अपना जो स्टॉप लॉस है वो इस स्विंग हाई के थोड़ा सा ऊपर रखा होता और टारगेट के लिए हम 1:2 लेकर चल रहे होते। तो हमारा जो 1:2 है वो करीब-करीब यहां पर होता। देखिए मैं ये जो कांसेप्ट आपको बता रहा हूं कि 1:2 लेके चल रहे होते तो ऐसा नहीं है कि आपने ये लगाया और इसके बेसिस पे ही ट्रेड ले लिया। और भी काफी सारी चीजें आपने देखनी है क्योंकि तभी तो मैं ये सारी चीजें आपको समझा रहा हूं। अदरवाइज तो मैं आपको एक ही कांसेप्ट समझा देता। तो यहां पर इस तरीके से आप अपना ट्रेड प्लेस करते और उसके बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस जो है वो हमारा 1:2 का जो लेवल था उससे भी काफी नीचे आगे आने लग गई थी। तो अब जब हमारा यहां पर टारगेट हिट हो जाता है तो इसके बाद अब जो प्राइस है वो हमें दिखाई दे रहा है कि डिस्काउंट ज़ोन में आ चुकी है। यानी अगर हम यहां पर एंट्री के बारे में सोच रहे हैं तो हम बाय करने की एंट्री सोच सकते हैं। लेकिन अगेन हमेशा हमें कंफर्मेशन देखनी चाहिए। तो अब चलिए देखते हैं कि आगे चार्ट में क्या होता है। तो अब देखिए यहां पर प्राइस ने ऊपर का मूव दिया था और अगर हम देखेंगे कि यह मूव प्राइस ने दिया था लेकिन कहां से दिया था? क्या कुछ यहां पर था? तो यहां पर भी आपको एक ऑर्डर ब्लॉक दिखाई दे रहा है। देखिए यहां पर हमें दिखाई देता है कि अपसाइड का मूव करीब-करीब यहां से शुरू हुआ था। तो इससे पहले वाली कैंडल यानी ये जो रेड कैंडल है इस रेड कैंडल के हाई एंड लो से रखते हुए मैं अपना इस तरीके से एरिया ड्रॉ कर सकता हूं। तो यह मैंने अपना एरिया ड्रॉ कर दिया है और आप देखेंगे कि बिल्कुल प्राइस ने इस लेवल को टच किया और उसके बाद हमें अपसाइड का यहां पर मूव देखने को मिल रहा है। तो ऐसे आप यहां पर ट्रेड प्लान कर सकते हैं लेकिन एक ना एक बार ऐसा जरूर होगा जब प्राइस किसी ऊपर या नीचे की रेंज को ले लेगा। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं कि प्राइस जो है वो इससे ऊपर की रेंज में जा चुका है। तो अब जब एक बार आपको दिखाई देता है कि प्राइस इस रेंज को ब्रेक कर देती है। देखा आपने कि प्राइस इससे ऊपर निकल चुकी है। तो हम क्या करेंगे? अब पिछली वाली रेंज को भूल जाना है। यह वाली जो रेंज है, यह हमारी हाई रेंज है। और अब हमें लो भी मार्क करना होगा। तो रीसेंट लो देखो लो एक यह भी है। लेकिन रीसेंट लो मुझे यहां पर नजर आ रहा है, तो मैं इससे लगते हुए अपनी एक लाइन ड्रॉ कर लेता हूं। तो ये हो गया मेरा लो। यह हो [संगीत] गया मेरा हाई। अब अगर मान लो प्राइस इससे ऊपर निकल जाती है तो फिर से हम अपना हाई चेंज कर देंगे। तो चलिए इसको प्ले करते हैं और देखते हैं। तो यहां से प्राइस जो है वो इसके ऊपर निकल गई है। तो अब आपको दिखाई देता है कि प्राइस ने अपना हाई बना लिया है। तो हम यह जो ऊपर वाली रेंज है इसको चेंज करके यहां पर कर देते हैं। और ऐसे ही अगर मान लीजिए प्राइस इससे ऊपर निकल जाती है तो आप फिर से अपनी रेंज को चेंज कर सकते हैं। लेकिन मान लेते हैं कि प्राइस जो है इससे आगे नहीं जाती। तो हम क्या [संगीत] करेंगे? हम यहां पर वापस से अपना जो गैन बॉक्स है इसको लगाएंगे और उसके बाद फिर से प्रीमियम एंड डिस्काउंट ज़ोन को देखेंगे। तो हमने इस तरीके से अपना हाई एंड लो मार्क कर दिया और हमें दिखाई दे रहा है कि भाई जो प्राइस है वो अपने अभी प्रीमियम ज़ोन पे है। तो यहां पर अगर हम कोई ट्रेड प्लान करेंगे तो हम शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान करेंगे। लेकिन देखो सिर्फ ऐसे ही आपने देखा कि भाई प्राइस जो है वो तो प्रीमियम ज़ोन में है। मैं यहां से शॉर्ट कर देता हूं तो ऐसे नहीं [संगीत] चलेगा। नीचे आपने ट्रेंड भी देखा कि जो हमारा ट्रेंड है वो तो बुलिश चल रहा है। तो इसके बाद हो सकता है कि प्राइस फिर से ऊपर चली जाए। तो अगर हमें दिखाई दे रहा है कि जो ट्रेंड है वह अप ट्रेंड है तो ऐसे में हम शॉर्ट करने का ट्रेड ना लें तो ही बेटर रहेगा। यानी अगर मान लो प्राइस नीचे आ जाती है हमारे डिस्काउंट ज़ोन में और तब मैं बाय करने का ट्रेड लूं तो यह मेरे लिए ज्यादा बेटर है। रेदर देन कि हमें दिखाई दे रहा है कि भाई अप ट्रेंड चल रहा है और हम ऐसे में शॉर्ट करने का ट्रेड ले लें। तो अब एक बार देखते हैं कि आगे चार्ट में क्या हुआ था। तो यहां पर आप देख सकते हैं प्राइस जो है वो हमारा यहां पर हमें दिखाई दे रहा है जो डिस्काउंट ज़ोन है उसके पास आई थी और वहां से जाके प्राइस वापस से आगे बढ़ने लग गई थी। यानी इस तरीके से आप डीलिंग रेंज को यूज़ कर सकते हैं। तो अब चलिए मैंने अब जब आपको प्रीमियम डिस्काउंट के बारे में थोड़ा बहुत बता ही दिया है तो इसको थोड़ा डिटेल में ही समझ लेते हैं। तो प्रीमियम डिस्काउंट कैसे मार्क करना है ये मैंने आपको बता ही दिया है। सेटिंग्स कैसे चेंज करनी है ये भी आपको समझ आ गया है। तो अब समझते हैं कि ये जो प्रीमियम ज़ोन है ये आखिर होता क्या है? तो यह जो प्रीमियम ज़ोन है वह उस ज़ोन को कहा जाता है जो इक्विलिब्रियम यानी जो बीच की लाइन है ना इससे ऊपर होता है। यानी जो बीच का या 50% का एरिया हम इसे कह सकते हैं इससे ऊपर जो होता है उसको हम कहते हैं प्रीमियम ज़ोन। प्रीमियम ज़ोन का मतलब होता है कि यहां पर कोई चीज क्या है? वो चीज महंगी है। और अगर कोई चीज महंगी है तो बड़े इंस्टीटशंस का जो इंटरेस्ट होगा वो वहां पर सेल करने का होगा। जबकि ये जो बीच की लाइन है यानी इक्विलिब्रियम से जो नीचे का एरिया होता है यानी 50% से नीचे का जो एरिया होगा इसको हम कहते हैं डिस्काउंट ज़ोन। डिस्काउंट ज़ोन का मतलब है कि कोई चीज यहां पे सस्ती मिल रही है। तो ऐसे में जो बड़े इंस्टीटशंस होंगे वो यहां पर उस चीज को बाय करने के बारे में सोचेंगे। [संगीत] इसका मतलब जो बड़े इंस्टीटशंस हैं वो बाय हाई नहीं बल्कि बाय डिस्काउंट और सेल लो नहीं बल्कि सेल प्रीमियम के ऊपर फोकस करते हैं। और इसमें यह जो इक्विलिब्रियम है यानी यह जो 50% की रेंज है यही है जो प्रीमियम और डिस्काउंट को डिवाइड करती है। और इसको एक हम फेयर वैल्यू एरिया भी मान के चल सकते हैं। मतलब यहां पर कोई चीज महंगी है। यहां पर कोई चीज सस्ती है। तो इस जगह पर हम कह सकते हैं कि उसकी जो वैल्यू है वो एक फेयर वैल्यू के आसपास चल रही है। तो अब मैं आपको सबसे बड़े कंफ्यूजन को भी क्लियर कर देता हूं। तो जो बड़े इंस्टीटशंस हैं वो अगर मार्केट बुलिश है तो वहां पर बाय ही करना चाहेंगे लेकिन डिस्काउंट ज़ोन में बाय करना चाहेंगे। ऐसा नहीं कि प्रीमियम ज़ोन में जाकर उसको सेल कर दिया। जबकि अगर मान लीजिए बेयरिश मार्केट चल रहा है तो वो ऐसे में डिस्काउंट में सेल नहीं करेंगे बल्कि प्रीमियम ज़ोन में जाकर सेल करना चाहेंगे ताकि उनको सही प्राइसिंग मिले। अब चलिए दोस्तों, फाइनली मैं आपको इस लेक्चर में प्रीमियम और डिस्काउंट को जो लास्ट लेक्चर में मैंने आपको लिक्विडिटी के बारे में बताया था ना उसके साथ मिलाके बताता हूं कि कैसे आपने चार्ट में इसका यूज़ करना है। तो इसको बहुत ज्यादा ध्यान से देखना। तो इसके लिए हम चलते हैं सीधा हमारे चार्ट पे। आ चुके हैं हम हमारे चार्ट पे और यहां पर आने के बाद आप देख सकते हैं कि मैंने सबसे पहले क्या कर रखा है? देखिए जब मैं यहां पर था मैंने 30 मिनट का टाइम फ्रेम खोल रखा है। आप किसी भी टाइम फ्रेम में इसको कर सकते हैं। तो जब मैं यहां पर था तो ये एक डीलिंग रेंज थी। मतलब प्राइस ने ये वाला हाई बना रखा था। ये वाला लो बना रखा था। तो इसी के बीच [संगीत] में डील चल रही थी। उसके बाद क्या होता है कि यह जो हमारी रेंज है यह ब्रेक हो के प्राइस यह वाला अपना हाई बना देती है और उसके बाद नीचे आने लगती है। और जब प्राइस नीचे आने लगती है तो थोड़ी देर बाद मुझे दिखाई देता है कि प्राइस ने इसका जो हाई है इसको स्वीप कर लिया है। स्वीप करने का मतलब क्या होता है? मैं आपको पहले भी बता चुका हूं। प्राइस ने इसके हाई को ब्रेक किया। यहां पर जितने भी लोग थे उन सबके स्टॉप लॉस हिट करवाए और उसके बाद आप देख सकते हैं कि ये ग्रीन वाली कैंडल ने इस हाई को स्वीप करने के बाद यहां पर कहीं पर क्लोजिंग दिया है। तो मैंने आपको पहले भी बताया कि जब हमें दिखाई देता है कि प्राइस हाई को स्वीप कर रही है तो हम अपना शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान करते हैं। लेकिन अभी तो हमें दिखाई दे रहा है कि भाई ट्रेंड बुलिश है। [संगीत] तो ऐसे में मैं अपना शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान नहीं कर सकता हूं। मुझे यहां पर चेंज ऑफ कैरेक्टर की जरूरत होगी। जो भी हम आपको पहले बता चुके हैं। अगर चेंज ऑफ कैरेक्टर हो जाता है इसका मतलब मैं यहां पे कंफर्म हो जाऊंगा कि भाई जो ट्रेंड है वो अब रिवर्स हो चुका है। अभी तक अप ट्रेंड चल रहा था। अब शायद डाउन ट्रेंड स्टार्ट हो चुका है और उसके बाद ही मैं शॉर्ट करने के बारे में सोचूंगा और शॉर्ट कहां पर करना है यह पता करने के लिए मैं यूज़ करूंगा जो मैंने आपको बताया था प्रीमियम एंड डिस्काउंट ज़ोन का। तो चलिए अब थोड़ा सा आगे बढ़ते हैं और देखते हैं चेंज ऑफ कैरेक्टर का वेट करते हैं। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि हमें इस जगह पर चेंज ऑफ कैरेक्टर मिल चुका है। इवन यह वाली कैंडल ही इसके नीचे क्लोज हो गई थी। तो हमें यहां पर चेंज ऑफ कैरेक्टर मिल गया था और जब हमें चेंज ऑफ करैक्टर मिल गया है तो अब एक तरह से हम यहां पर कंफर्म हो चुके हैं कि यहां से प्राइस के अब गिरने के चांसेस हैं। ट्रेंड रिवर्स हो चुका है। तो अब मुझे चाहिए लोकेशन कि कहां पे जाके शॉर्ट करूं भाई? तो अब चलिए वेट करते हैं कि प्राइस अपना एक लो बनाए ताकि मैं अपना प्रीमियम डिस्काउंट मार्क कर सकूं। तो यहां पर मुझे दिखाई दे रहा है कि प्राइस ने यह वाला हाई बना रखा है। यह वाला लो बना रखा है। तो [संगीत] यहां पर मैं अपना प्रीमियम डिस्काउंट मार्क कर सकता हूं। इसके लिए वापस से मैं आ जाऊंगा यहां पर और यहां पे गेन बॉक्स को ले लेंगे। तो हमें यहां पर अपना हाई दिखाई दे रहा है। यहां पे लो दिखाई दे रहा है। तो इससे लगते हुए मैंने अपना ये जो प्रीमियम डिस्काउंट ज़ोन है इसको मार्क कर दिया है। और अब क्योंकि मैं शॉर्ट करने के बारे में सोच रहा हूं तो मैं ऊपर कहीं पे शॉर्ट करने के बारे में प्लान करूंगा। तो अब हमें जो शॉर्ट करना था वो यहां पर कहीं पे करना था। तो शॉर्ट करने के लिए मुझे कोई ना कोई कन्फर्मेशन चाहिए जो कि पीडी एरेस [संगीत] होते हैं। जैसे कि हम फेयर वैल्यू गैप का यूज कर सकते हैं। ऑर्डर ब्लॉक का यूज कर सकते हैं। तो मुझे यहां पर ऑर्डर ब्लॉक और फेयर वैल्यू गैप दोनों नजर आ रहे हैं। तो उनको भी मार्क कर देते हैं। मार्क करने के लिए हमें यहां पर ये जो रेक्टेंगल वाला टूल नजर आ रहा है, हम इससे मार्क कर सकते हैं। एक सबसे पहले फेयर वैल्यू गैप हमें यहां पर दिख रहा है। नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल है। इससे पहले वाली कैंडल के लो से लगते हुए बाद वाली कैंडल के हाई से लगते हुए। इस तरीके से मैं अपना एक फेयर वैल्यू गैप मार्क कर सकता हूं। पहला ये दूसरा ऑर्डर ब्लॉक की बात करूं तो यहां पर आप देख सकते हैं कि इधर से एक डाउन साइड का मूव आया था। तो इससे पहले की अपोजिट कैंडल यानी ये जो ग्रीन कैंडल है मैं इससे लगते हुए अपना यहां पर ऑर्डर ब्लॉक भी मार्क कर सकता हूं। तो यहां पर मेरा ऑर्डर ब्लॉक भी है। फेयर वैल्यू गैप भी है। और जैसे ही प्राइस इस लेवल के पास आई होती तो यहां पर हम क्या करते? जब प्राइस यहां पे आई होती तो हम यहां पर शॉर्ट करने की पोजीशन ले लेते। अपना जो स्टॉप लॉस था वो यह जो हमारा हाई है इससे थोड़ा सा ऊपर मतलब यहां पर कहीं पर रखते और रही बात टारगेट की तो 1:2 हम लेकर चल सकते थे जो कि हमारा यहां पर जाके अचीव हो गया होता। यानी यहां पे जहां मैं अब दिखा रहा हूं यहां तक हमारा ट्रेड जो था वो पूरा बन गया होता। तो इस तरीके से आप लिक्विडिटी का यूज कर सकते हैं। साथ में आप प्रीमियम डिस्काउंट का यूज कर सकते हैं। और इसके साथ ही आप डीलिंग रेंज का भी यूज कर सकते हैं। तो अब जब आपको प्रीमियम एंड डिस्काउंट भी समझ आ गया है तो अब चलिए बात करते हैं फेयर वैल्यू गैप की। तो फेयर वैल्यू गैप एक पीडी एरे यानी प्रीमियम डिस्काउंट एरे है जो कि हमें बताता है कि कहां पर बड़े इंस्टीटशंस के पेंडिंग ऑर्डर पड़े हुए हो सकते हैं और जिस जगह पे पेंडिंग ऑर्डर्स होंगे अगर प्राइस दोबारा से वहां पर आती है तो वो पेंडिंग ऑर्डर्स जैसे ही एग्जीक्यूट होंगे उसके बाद प्राइस में एक बड़ा मूवमेंट देखने को मिल सकता है। इसलिए [संगीत] फेयर वैल्यू गैप बहुत ज्यादाेंट होता है। बेसिकली इसके लिए हम तीन कैंडल्स का यूज़ करते हैं। जब भी आपको चार्ट में एक नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल देखने [संगीत] को मिलती है। वहां पर हमें कई बार एफजी देखने को मिलता है। कैसे मार्क करना है, यह मैं आपको बताऊंगा। इसके अलावा मैं आपको बता दूं कि ये जो एफपीजी है ना ये इमंबैलेंस एरिया को बताता है। मतलब ये है कि उस जगह पे कुछ ना कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वजह से मार्केट में इमंबैलेंस आया है। अगर नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल बनी है तो हमारा मानना यह होता है कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं शायद उन्होंने यहां पर कोई एक्टिविटी की है जिसकी वजह से ही यहां पर नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल बनी होगी और इसलिए यह बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट माना जाता है। तो चलिए अब इसको सीधा चार्ट पे देखते हैं। अब यह जो एफवीजी है, यह बुलिश भी होता है, बियरिश भी होता है और यह चार्ट में आपको कई बार देखने को मिलेंगे। तो जब भी आपको नॉर्मल से बड़े साइज की एक बुलिश कैंडल देखने को मिलती है, मतलब ग्रीन कलर की कैंडल देखने को मिलती है। जैसे ये कैंडल आपको दिखाई दे रही है, तो आपने क्या करना है? आपने यहां पर एफपीजी मार्क [संगीत] करना है। उसको मार्क करने के लिए आपको यहां पर एक ड्राइंग टूल मिलता है। यहां पे जाइए रेक्टेंगल को सेलेक्ट कीजिए। और इससे पहले वाली जो कैंडल है यानी ये जो छोटी सी कैंडल है इसके हाई से लगते [संगीत] हुए और इसके बाद वाली जो कैंडल है यानी ये जो रेड कैंडल है इसके लो से लगते हुए इस तरीके से आपने अपना एक एरिया मार्क कर लेना होता है और यह होता है आपका फेयर वैल्यू गैप [संगीत] और माना जाता है कि अगर प्राइस दोबारा से इस गैप के बीच में आती है तो यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे और उसके बाद आप देख सकते हैं कि जैसे ही प्राइस इस लेवल के पास आई है और उसके बाद प्राइस ने यहां से अच्छा खासा मूवमेंट दिया है। तो ये था बुलिश एफपीजी। अब बयरिश एफपीजी में तो जब भी हमें एक नॉर्मल से बड़े साइज की रेड कैंडल दिखाई देती है तो हमने उससे पहले वाली कैंडल यानी इस कैंडल के लो से लगते हुए और उसके बाद वाली कैंडल यानी ये जो कैंडल है उसके हाई से लगते हुए इस तरीके से एक एरिया ड्रॉ [संगीत] करना है और जैसे ही कोई कैंडल दोबारा से इस लेवल पे आती है तो यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस होते हैं। [संगीत] तो आप देख सकते हैं कि पहले यहीं पर प्राइस जो है वो इस लेवल के अंदर आ गई थी तो उसके बाद प्राइस गिरी है [संगीत] लेकिन फिर दोबारा से प्राइस उस लेवल के पास आई थी। हो सकता है कुछ और पेंडिंग ऑर्डर्स रह गए होंगे और उसके बाद आप देख सकते हैं कि यहां से प्राइस में एक अच्छा खासा डाउन साइड का हमें मूवमेंट देखने को मिला था। तो अगर आप सिर्फ एफवीजी के बेसिस पे अपना ट्रेड प्लान कर रहे होते तो यहां पर आप क्या करते? आप कुछ यहां पर अपनी एंट्री लेते अपना जो स्टॉप लॉस रखते वो इस एफवीजी से थोड़ा ऊपर रख सकते हैं। कुछ केसेस में हमें जो स्विंग हाई नजर आ रहा है हम वहां तक रखते हैं और 1:2 का हम यहां पर अपना जो ट्रेड है उसको प्लान कर सकते थे। और वो जो हमारा 1:2 का ट्रेड था वो यहां पे जाके अचीव हो गया होता। लेकिन सिर्फ एफवीजी के बेसिस पे हमें ट्रेड नहीं लेना होता है। बस मैं आपको बता रहा था कि कैसे आप एफवीजी को मार्क करते हैं और कैसे आप इसका यूज कर सकते हैं। अब एफवीजी से ही मिलताजुलता एक कांसेप्ट है [संगीत] जिसको हम कहते हैं आईएफवीजी यानी इनवर्स फेयर वैल्यू गैप। देखिए जब भी एक फेयर वैल्यू गैप फेल्ड हो जाता है तब वो एक इनवर्स फेयर वैल्यू गैप बन जाता है। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं कि ये हमारा एक पहले फेयर वैल्यू गैप था। हमने क्या किया? हमने इससे पहले वाली कैंडल के लो से लगते हुए, बाद वाली [संगीत] कैंडल के हाई से लगते हुए एक एरिया ड्रॉ किया और हमने माना कि प्राइस दोबारा से जब इस लेवल पे आएगी तो वहां से प्राइस के गिरने के चांसेस होंगे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होता है। प्राइस इस लेवल पे आती है और सीधा उससे ऊपर निकल जाती है। अब ऐसे में अगर मान लीजिए आपने ट्रेड लिया होता तो आपका छोटा-मोटा स्टॉप लॉस हिट हो सकता था। लेकिन जैसे ही यह इसके ऊपर निकल जाती है ना तो अब यह एक इनवर्स फेयर वैल्यू गैप बन जाता है। मतलब पहले यह एक बेयरिश फेयर वैल्यू गैप था। अब यह एक बुलिश इनवर्स फेयर वैल्यू गैप बन चुका है और अब जैसे ही प्राइस इस लेवल [संगीत] पे आएगी तो यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे। तो आप देख सकते हैं कि जैसे ही प्राइस इससे ऊपर निकल गई इससे ऊपर क्लोजिंग दे दी है इस गैप से तो इसका मतलब ये इनवर्स फेयर वैल्यू गैप बन चुका है और उसके बाद जैसे ही प्राइस इस लेवल पे आई है उसके बाद आप देख सकते हैं कि अप साइड का अच्छा खासा मूवमेंट हमें यहां पर देखने को मिला था। अब ऐसे ही बेयरिश इनवर्स फेयर वैल्यू गैप की बात करें तो यहां पर आप देख सकते हैं कि पहले एक बुलिश फेयर वैल्यू गैप बन रखा था। [संगीत] तो हमने क्या किया? हमने इससे पहले वाली कैंडल के हाई से लगते हुए बाद वाली कैंडल के लो से लगते हुए एक एरिया मार्क किया। हमने माना था कि प्राइस जैसे ही इस लेवल पे आएगी तो यहां से प्राइस बढ़ जाएगी। लेकिन इसका उल्टा [संगीत] प्राइस इससे नीचे आ जाती है। तो अब ये क्या बन जाता है? अब ये बन जाता है हमारा इनवर्स फेयर वैल्यू गैप। और अब अगर प्राइस दोबारा से इस लेवल पे जाती है तो यहां से प्राइस [संगीत] के गिरने के चांसेस हो सकते हैं। तो हमने क्या किया? हम यहां पर शॉर्ट करने का प्लान कर सकते थे। अपना स्टॉप लॉस यहीं पे कहीं पे [संगीत] रख सकते थे। तो इस तरीके से हमारा यह फेयर वैल्यू गैप और इनवर्स फेयर वैल्यू गैप काम करता है। अब चलिए सीआईएसडी के बारे में समझते हैं और उसके बाद बात करेंगे डिस्प्लेसमेंट की। लेकिन इससे पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं। लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके अपना अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से अधीरा एi का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलता है। उसके लिए नीचे [संगीत] Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। उसको भी जरूर फिल कर लीजिएगा। तो चलिए अब सीआईएसडी की बात करते हैं। सीआईएसडी की फुल फॉर्म होती है चेंज इन स्टेट ऑफ डिलीवरी। यह चेंज ऑफ कैरेक्टर से पहले ही हमें बता देता है कि कहां से ट्रेंड रिवर्स होने के चांसेस [संगीत] हैं। मतलब इसको आप एक अर्ली वार्निंग सिस्टम की तरह यूज़ कर सकते हैं। और जब आप ट्रेडिंग करेंगे ना, तो ट्रेड लेते वक्त एंट्री के टाइम पर यह आपकी कई [संगीत] बार हेल्प करेगा कंफर्मेशन के लिए और एंट्री देने के लिए। तो, यह बहुत इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है। इसलिए ध्यान से समझना। तो सीआईएसडी को मार्क करने के लिए जब भी आपको एक इंपल्सिव डाउन साइड का मूव देखने को मिलता है तो आपने उससे पहले वाली कैंडल के क्लोज से लगते हुए एक लाइन ड्रॉ करनी होती है। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं कि दो बड़ी रेड कैंडल बन रखी है। इसका मतलब यहां पर एक इंपल्सिव डाउन साइड का मूव आया है। तो इससे पहले की कैंडल मतलब ये वाली जो ग्रीन कैंडल है इस ग्रीन कैंडल के क्लोज से लगते हुए हमें यहां पर लाइन ड्रॉ करनी होगी। यानी यहां से लगते हुए हम एक लाइन ड्रॉ करेंगे। सीधी लाइन ड्रॉ करने के लिए आप शिफ्ट जैसे ही [संगीत] प्रेस करेंगे तो सीधी लाइन ड्रॉ हो जाती है और जैसे ही कोई कैंडल इसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है तो यहां पर हमें पता चलता है कि हमारा जो सीआईएसडी है वो कंफर्म [संगीत] हो गया है। मतलब ये हमारी सीएसडी लाइन हमने यहां से ड्रॉ की और जैसे ही कैंडल ने क्लोजिंग दी तब जाके हमारा सीएसडी कंफर्म हुआ और अगर आप कभी इसके बेसिस पे एंट्री लेंगे [संगीत] ना तो जैसे ही कोई कैंडल दोबारा से इसके पास आती है तो आप यहां पर मतलब इसको रिटेस्ट करती है वहां पर आप एंट्री ले सकते हैं। [संगीत] तो अगर इसके बेसिस पे आप यहां पर एंट्री लेते लॉन्ग करने की तो आप यह अगली जो रेड कलर की कैंडल है इसमें प्राइस यहां तक आ गई थी। तो यहां पे अपनी एंट्री लेते अपना स्टॉप लॉस आप यहां पर रखते और टारगेट आप 1:2 का प्लान कर सकते थे करीब कुछ ऐसा। बाकी इसके लिए आपको और भी कंफर्मेशन देखने होते हैं। ऑलदो इसमें आपका जो टारगेट था वो हिट हो गया होता। और इस तरीके से आप अपनी एंट्री सीआईएसडी के बेसिस पे प्लान कर सकते हैं बुलिश के केस में। अब चलिए बयरिश का भी एक एग्जांपल देख लेते हैं। तो बयरिश सीआईएसडी मार्क करने के लिए आपको जब भी दिखाई देता है मार्केट में एक अपसाइड का इंपल्सिव मूव आया है। इंपल्सिव मूव मतलब एक साथ काफी सारी ग्रीन कलर की कैंडल बनी होंगी या बड़ी कैंडल्स बनी होंगी। तो यहां पर आपको दिखाई दे रहा है काफी सारी ग्रीन कलर की कैंडल्स एक साथ बनी है। तो हमने उससे पहले जो अपोजिट कैंडल है यानी यहां पर जो ये रेड कैंडल है उसके क्लोज से लगते हुए एक लाइन ड्रॉ करनी है। अब रेड कैंडल का क्लोज जो होता है वो नीचे होता है। यानी [संगीत] हम इससे लगते हुए एक इस तरीके से अपनी जो लाइन है वो ड्रॉ कर सकते हैं। और जैसे ही कोई कैंडल इसके नीचे क्लोजिंग दे देती है। यहां पर हमारा सीएचडी कंफर्म हो जाता है। तो यह हमारी सीएचडी लाइन है। यह वाली कैंडल जो है इसने इसके नीचे क्लोजिंग दे दिया है। यहां पर आप देख सकते हैं। और जैसे ही इसके नीचे क्लोजिंग दी, यहां पर हमारा सीएसडी कंफर्म हो गया। और एंट्री [संगीत] के लिए जैसे ही कोई कैंडल दोबारा से इसके पास आती है तो यहां पर हम एंट्री ले सकते हैं। मतलब हमारी जो एंट्री है वो जैसे ही यह वाली जो कैंडल इस [संगीत] लेवल पे आई थी यहां पर हमारी एंट्री हो गई होती और जो स्टॉप लॉस एंड टारगेट है वो आप उसके बाद डिसाइड कर सकते थे। तो डिस्प्लेसमेंट एक स्ट्रांग इंपल्सिव मूव होता है जो मार्केट में अग्रेसिव बाइंग या अग्रेसिव [संगीत] सेलिंग कहां पर हो रही है इसको शो करता है। अब जहां पे भी डिस्प्लेसमेंट होता है वहां पर आपको या तो बड़ी-बड़ी कैंडल्स देखने को मिलेंगी या फिर स्ट्रांग मोमेंटम देखने को मिलेगा। मतलब काफी सारी कैंडल्स एक साथ बनती हुई नजर आएंगी या फिर आपको रैपिड प्राइस एक्सपेंशन देखने को मिलेगा। मतलब अचानक से प्राइस ऊपर नीचे होगी [संगीत] या फिर किसी स्ट्रक्चर में ब्रेक होगा। स्ट्रक्चर ब्रेक का मतलब है या तो ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो रहा होगा या फिर चेंज ऑफ कैरेक्टर हो रहा होगा। और इससे हमें पता चलता है कि मार्केट में कुछ सिग्निफिकेंट ऑर्डर्स आ रखे हैं और यह ऑर्डर्स जनरली जो बड़ी स्मार्ट मनी है वो लेकर आए होते हैं। और जब स्मार्ट मनी कोई ऑर्डर प्लेस करता है तो वहां से मार्केट में बड़े मूव्स आने के चांसेस होते हैं। अब यह इतना ज्यादा मैटर इसलिए करता है क्योंकि एक तो इससे हमें मार्केट की इंटेंट पता चलती है। हमें पता चलता है कि जो बड़े स्मार्ट मनी है उनकी इंटेंशन क्या है? क्या वो मार्केट को ऊपर ले जाने के बारे में सोच रहे नीचे लाने के बारे में सोच रहे हैं। वो किस मोमेंटम के साथ मार्केट को ऊपर नीचे ले जा सकते हैं। तो एक तरह से यह जो डिस्प्लेसमेंट है ना यह बड़े इंस्टीटशंस की प्रेजेंस को दर्शाता है। और जब भी डिस्प्लेसमेंट होता है वहां पर हमें स्ट्रांग सेटअप्स देखने को मिलते हैं। हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप्स देखने को मिलते हैं। ऐसे सेटअप्स देखने को मिलते हैं जिनके काम करने के चांसेस जो है वो ज्यादा होते हैं। तो अब चलिए इस डिस्प्लेसमेंट को भी चार्ट पे समझते हैं। तो अब देखिए यहां पर हमने चार्ट में डिस्प्लेसमेंट को मार्क कर रखा है। अब यह डिस्प्लेसमेंट को अगर आप देखेंगे तो आपको लगेगा कि भाई यह तो सीआईएसडी है। क्योंकि मैंने आपको बताया था कि जब भी इंपल्सिव डाउन साइड का मूव आएगा तो उससे पहले वाली कैंडल के क्लोज से लगते हुए हमने लाइन ड्रॉ करनी है। जैसे ही कोई कैंडल इसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है तो इसका मतलब सीआईएसडी हो चुका है और दोबारा से प्राइस उस लेवल पे आती है तो यहां से हम अपनी एंट्री प्लान कर सकते हैं। तो बिल्कुल ऐसा ही हुआ है। तो फिर इसको हम डिस्प्लेसमेंट क्यों बोल रहे हैं? सीआईएसडी क्यों नहीं बोल रहे हैं? क्योंकि मैंने आपको बताया कि अगर सिर्फ सीआईएसडी बन रहा है तो वहां पर एंट्री के वीक होने के चांसेस होते हैं। लेकिन अगर वो सीआईएसडी एक डिस्प्लेसमेंट के साथ बन रहा है तो उस एंट्री के स्ट्रांग होने के चांसेस ज्यादा होंगे। वो एक हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप होगा। तो डिस्प्लेसमेंट हम इसे इसलिए [संगीत] कह रहे हैं क्योंकि जैसे ही ये जो अपसाइड का मूव आया है ना तो उसके साथ हमें एक बड़ी इंपल्सिव कैंडल देखने को मिली है और या कहें कि हमें यहां पर एक एफजी देखने को मिल रहा है। तो सीआईएसडी के साथ-साथ हमें यहां पर एक एफजी भी देखने को मिल रहा है। इसलिए हम इसको डिस्प्लेसमेंट कह रहे हैं। अब इससे पहले वाले लेक्चर में मैंने आपको एमएसएस यानी मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट के बारे में बताया था। वो भी बिल्कुल ऐसा ही था कि हमने देखा कि भाई यहां पर सीआईएसडी बना है और इसके ऊपर कैंडल ने क्लोजिंग दे दी और एक एफपीजी के साथ क्लोजिंग दी है तो उसको हम एमएसएस बोल रहे थे। तो एमएसएस भी एक तरह का डिस्प्लेसमेंट ही है। जैसे यहां पर एक और एग्जांपल आप देख सकते हैं। आपको दिखाई दे रहा है कि मार्केट यहां पर अपटेंड में चल रहा था। हमें ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर देखने को मिल रहे थे। लेकिन उसके बाद क्या होता है? प्राइस नीचे आने [संगीत] लगती है और हमें यहां पर चेंज ऑफ कैरेक्टर दिखाई देता है। अब चेंज ऑफ कैरेक्टर क्या है? यह भी हम पहले डिस्कस कर चुके हैं। इसलिए आपको इन वीडियोस को सीरीज से देखना है। साथ में नोट्स बनाएंगे तभी यह सारी चीजें आपको समझ आएंगी। तो जैसे [संगीत] ही हमें चेंज ऑफ करैक्टर दिखाई देता है तो उससे पहले क्या हो रहा है? अब नॉर्मली ये चेंज ऑफ करैक्टर होता एक सेटअप बनता। लेकिन साथ में हमें यहां पर एक फेयर वैल्यू गैप भी देखने को मिल रहा है। इसलिए हम इसको डिस्प्लेसमेंट कह रहे हैं। बेसिकली एक हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप कह रहे हैं। वैसे यहां पर हमें एक एफपीजी देखने को मिला था। अगर देखें तो यहां पर भी एक और एफपीजी बन रहा था। मतलब यहां पर एफपीजी भी बन रहा है, चेंज ऑफ कैरेक्टर भी हो रहा है। तो उसके बाद आप देख सकते हैं कि जैसे ही हमें एंट्री मिली है तो यह एक हाई प्रोबेबिलिटी एंट्री होगी। अब देखो ऐसा नहीं है कि ये जो डिस्प्लेसमेंट है ये सिर्फ चेंज ऑफ कैरेक्टर पे बन रहा है। अगर आपको कहीं पे ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर दिखाई देता है लेकिन उसके साथ [संगीत] भी एक एफपीजी बन रहा है तो उसको भी हम डिस्प्लेसमेंट बोल सकते हैं। जैसे यहां पर आपको एक एग्जांपल दिखाई दे रहा है। यहां पर हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ है। आपने देखा हायर हाई बनाया तो उसके बाद प्राइस थोड़ा नीचे आई है। तो हम क्या करते हैं? ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर के लिए हायर हाई से लगते हुए एक लाइन ड्रॉ कर देते हैं। जैसे ही कोई कैंडल उसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है तो इसका मतलब हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो चुका है। जैसे इस कैंडल ने इस हमारे हाई के ऊपर क्लोजिंग दे दी है। मतलब यहां पर हमारा ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ है। लेकिन उसके साथ ही आप यहां पर देखेंगे कि [संगीत] ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर के साथ ही यहां पर एक एफवीजी भी बना है। तो अगर एफवीजी के साथ ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो रहा है। मतलब यह भी एक डिस्प्लेसमेंट है। अब इसके अलावा आप में से कुछ लोगों को कंफ्यूजन हो सकता है कि भाई ये चेंज ऑफ कैरेक्टर ये है तो सीआईएसडी कहां है? तो सीआईएसडी के लिए मैंने आपको बताया है कि जब भी आपको एक इंपल्सिव अपसाइड का मूव देखने को मिलता है तो उससे पहले वाली कैंडल तो इस रेड कैंडल के क्लोज से लगते हुए हम इस तरीके की लाइन ड्रॉ करेंगे। यानी यहां से लगते हुए हम लाइन ड्रॉ करते तो एक तरह से हमें चेंज ऑफ करैक्टर से पहले सीआईएस मिल जाता और इसके साथ ही आप देखेंगे कि यहां पर क्या है? यहां पर भी एफजी बन रखा है। मतलब ये भी एक डिस्प्लेसमेंट होता। तो अब चलिए दोस्तों, मैंने आपको अभी तक जो जो कांसेप्ट्स बताए हैं, उन सारे कांसेप्ट को यूज करके मैं आपको एक एग्जांपल दिखाता हूं जिसमें यह सारे कांसेप्ट यूज होने वाले हैं। तो सबसे पहले आप देख सकते हैं कि मार्केट हमारा डाउन ट्रेंड में चल रहा था मतलब नीचे की तरफ गिर रहा था। अब जब मार्केट नीचे की तरफ गिर रहा था तो ऐसे में बीच में बहुत बार हमें पैटर्न्स देखने को मिल रहे होंगे। जैसे अगर आप देखना चाहें तो यहां पर आपका एक एफपीजी बनेगा। मतलब नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल है तो उससे पहले वाली कैंडल के लो से लगते हुए बाद वाली कैंडल के हाई से लगते हुए मैं एक एरिया [संगीत] ड्रॉ कर सकता हूं जो मेरा एफपीजी हो जाएगा। फिर से यहां पर मुझे एफपीजी देखने को मिल रहा था। ऐसे बहुत सारे एफजी देखने को मिल रहे थे जिनको आप चाहे तो मार्क भी कर सकते हैं। लेकिन मैंने वही मार्क कर रखे हैं जो हमारे काम आए हैं। क्योंकि एफपीजी, सीआईएसडी ये सारी चीजें आपको बहुत बार चार्ट में देखने को मिलती [संगीत] हैं। तो इसके बाद क्या होता है? देखिए हमें एक इंपल्सिव डाउन साइड का एक और मूव देखने को मिलता है। अब जब इंपल्सिव डाउन साइड का मूव देखने को मिलता है तो उससे पहले वाली कैंडल यानी ये जो ग्रीन कलर की कैंडल है इस ग्रीन कैंडल के क्लोज से लगते हुए मैं एक लाइन ड्रॉ कर देता हूं जो कि मेरी सीआईएसडी लाइन है। अभी सिर्फ मैंने लाइन ड्रॉ कर रखी है। मान लो इसके आगे अभी कुछ नहीं हुआ है। जितना समझा रहा हूं समझो अभी तक उतना ही हुआ है। तो हमने इस तरीके से अपनी लाइन ड्रॉ कर रखी थी जो कि हमारी सीआईएसडी लाइन थी। इसके साथ ही मैं देखता हूं कि यहां पर एक और एफपीजी बन जाता है जो कि एक बयरिश एफपीजी हमें दिखाई दे रहा है। यानी यह एक हमारा बियरिश एफपीजी था। लेकिन उसके बाद होता क्या है कि प्राइस [संगीत] इस एफवीपीजी से ऊपर निकल जाती है। मतलब अगर प्राइस इस एफवीपीजी से ऊपर निकल गई तो यह क्या बन गया? यह हमारा आईएफवीजी बन चुका है और यह एक बुलिश आईएफजी है। मतलब मुझे पहला सिग्नल एक यहां [संगीत] पर मिला कि शायद यहां से ट्रेंड रिवर्स हो सकता है। लेकिन अब मुझे कंफर्मेशन चाहिए था। तो कंफर्मेशन के लिए मैंने आपको बताया कि अर्ली वार्निंग की तरह कौन काम करता है? सीआईएसडी काम करता है। तो इसके बाद क्या हुआ? हमने इससे लगते हुए लाइन ड्रॉ की और जैसे ही किसी कैंडल ने इसके ऊपर क्लोजिंग दे दी जो कि इस ग्रीन कैंडल ने दी है तो यहां पर हमें कंफर्म हुआ कि शायद यहां से ट्रेंड रिवर्स हो सकता है। अभी तक डाउन ट्रेंड चल रहा था। अब शायद यहां से अप ट्रेंड शुरू हो सकता है। तो एक मुझे अर्ली वार्निंग यहीं पर मिल चुकी है। अब अगर मैं चाहता तो मैं यहीं पर अपनी एंट्री ले सकता था क्योंकि मुझे आईएफजी देखने को मिला है। साथ ही मुझे सीआईएसजी देखने को मिला है। तो एक तरह से ये एक डिस्प्लेसमेंट है। मतलब यहां पर हम कंफर्म हो सकते हैं कि प्राइस बढ़ सकती है। तो अब जैसे ही प्राइस दोबारा से इस लेवल पे आई थी मैं यहां पर अपनी बाय करने की एंट्री ले सकता था। हो सकता है कि मैं ले भी लेता। लेकिन इसमें प्रॉब्लम क्या थी ना कि मेरा जो स्टॉप लॉस बन रहा था वो बहुत बड़ा बन रहा था। मतलब यहां पर जाके मेरा स्टॉप लॉस बनता जो कि रिस्क रिवॉर्ड के हिसाब से बिल्कुल भी अच्छा ट्रेड नहीं होता। इसलिए हमारे लिए यहां पर ट्रेड लेना सही नहीं था। अब इसके बाद क्या होता है कि देखिए प्राइस जो है ये वो यहां से थोड़ा सा बढ़ने की कोशिश करती है लेकिन फिर नीचे आ जाती है और नीचे क्यों आती है यह भी सोचिए। देखिए प्राइस ने इससे पहले यहां पर एक लो बना दिया था। अब इस लो में क्या रही होगी? इस लो में लोगों की लिक्विडिटी रही होगी। क्योंकि मैंने कहा ना अगर सोचो मैं यहां पे ट्रेड लेता और यहां पे अपना स्टॉप लॉस रखता तो मेरा भी स्टॉप लॉस हिट हो गया होता। उसके बाद मार्केट में मूवमेंट आता तो मुझे अपना स्टॉप लॉस यहां पे रखना पड़ता। इसी वजह से वह ट्रेड जो है वह हमने वहां पर अवॉइड किया और यहां पर क्योंकि हमें पता था कि मार्केट लिक्विडिटी ले सकता है। तो उसके बाद प्राइस वापस से ऊपर आई और फिर देखिए यहां पर लोगों की लिक्विडिटी रही होगी। प्राइस इससे थोड़ा सा नीचे आई। जिन सब ने यहां पर बाय करने की पोजीशन ले ली होगी। उन सबकी यहां पर जो स्टॉप लॉस हैं वो हिट हो गए। और स्टॉप लॉस हिट होने के बाद जहां पर आईएफपीजी था प्राइस ने यहां से मूव देना शुरू कर दिया और मूव देने के साथ भी जब मूव दिया है तो उसके साथ-साथ आप यहां पे देखेंगे कि फिर से हमें यहां पर एक आईएफपीजी देखने को मिला है और उसके साथ मूव आया है और यहां पर भी अगर आप देखना चाहेंगे तो एक इंपल्सिव डाउन साइड का मूवमेंट था। उससे पहले वाली कैंडल के क्लोज से लगते हुए हमने लाइन ड्रॉ की। यानी यहां पर भी हमें सीआईएसडी देखने को मिला है और जब यह सारी चीजें हमें देखने को मिली है तो इसके बाद यहां पर कहीं पे हम अपनी एंट्री प्लान कर सकते थे। अपना जो स्टॉप लॉस है वो हमें पता है कि अब तो यह वाली लिक्विडिटी स्वीप हो चुकी है। तो हम इससे थोड़ा नीचे यहां पर अपना स्टॉप लॉस रख सकते थे। या फिर अगर आपको रखना है तो आप यहां पे भी अपना स्टॉप लॉस रखते और उसके बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस में अच्छा खासा मूवमेंट हमें देखने को मिला था। तो अब जब आपको एफपीजी, सीआईएसडी और आईएफजी के बारे में भी पता चल गया है तो अब आपके लिए समझना जरूरी है ऑर्डर ब्लॉक को। ऑर्डर ब्लॉक को समझाने से पहले मैं आपको बताता हूं कि ये जो बड़े-बड़े इंस्टीटशंस [संगीत] हैं ये किस तरीके से अपने ट्रेड्स प्लेस करते हैं। देखिए जब भी किसी बड़े इंस्टीटशंस को ट्रेड प्लेस करने हैं तो वो कोई 500, 1 लाख या 2 लाख का तो ट्रेड नहीं लेगा। वो 50 करोड़, 100 करोड़, 200 करोड़ का ट्रेड लेगा। अब अगर मान लो वो बाय करने का ट्रेड ले रहा है और वो 200 करोड़ एक साथ मार्केट में डाल दे तो मार्केट तो सीधा उछल जाएगा। तो फिर जिस प्राइस में वो बाय करना चाह रहा था उसको महंगे में बाय करना पड़ेगा। और दूसरी सबसे बड़ी बात है कि इतने ज्यादा सेलर्स भी तो मार्केट में अवेलेबल होने चाहिए। और ऐसे ही अगर मान लो वो सेल करना चाहते हैं तो जैसे ही वो सेल के अगर अपने सारे ऑर्डर्स एक साथ डाल देगा तो प्राइस एकदम धड़ाम से नीचे गिर जाएगी और फिर उन्हें बहुत कम में सेल करना पड़ेगा। [संगीत] तो इसलिए ये जो बड़े इंस्टीटशंस हैं ये अपने ऑर्डर्स को छोटे-छोटे ब्लॉक्स में तोड़ देते हैं। जैसे एग्जांपल के लिए मान लो कि किसी इंस्टीट्यूशन को 50 करोड़ के ऑर्डर्स प्लेस करने [संगीत] हैं। तो ऐसे में वो क्या करते हैं? वो अलग-अलग ब्लॉक्स में अपने ऑर्डर को तोड़ देते हैं। मान लो 5-प करोड़ के 10 ब्लॉक में उन्होंने अपने ऑर्डर को तोड़ दिया। तो अब ऐसे में मान लो कि ₹105 में वो अपने ट्रेड को एग्जीक्यूट करवाना चाहते थे। तो वो क्या करेंगे? ₹101 पे उन्होंने 5 करोड़ का एक ऑर्डर डाल दिया। ₹102 में 5 करोड़ का ऑर्डर डाल दिया और ऐसे ₹110 तक वह 5 करोड़ के आर्डर डाल देंगे और फिर ऐसे में जो उनकी एवरेज प्राइस निकल के आएगी वो ₹15 की निकल के आएगी। यह मैं आपको सिर्फ एग्जांपल के लिए बता रहा था। वो तो बहुत छोटे-छोटे डिफरेंस के बीच में डालते [संगीत] हैं। यानी यह जो ऑर्डर ब्लॉक्स की मैं बात कर रहा हूं, यह उन इंस्टीटशंस के ऑर्डर्स हैं जो उन्होंने मार्केट में प्लेस कर रखे हैं। और इस कांसेप्ट के थ्रू हम यह पता करने की कोशिश करते हैं कि उनके ऑर्डर ब्लॉक्स कहां-कहां पर हैं। क्योंकि अगर उनका कोई ऑर्डर ब्लॉक ओपन पड़ा होगा तो जैसे ही प्राइस उस लेवल पे जाएगी तो वहां पर अगर उन्होंने बाय करने का ऑर्डर ब्लॉक है तो डिमांड एकदम से बढ़ेगी और प्राइस वहां से बढ़ सकती है। अगर वो शॉर्ट करने का ऑर्डर ब्लॉक है तो प्राइस जैसे ही उस लेवल पे जाएगी वहां पे से एकदम से सेलिंग आएगी और प्राइस तेजी [संगीत] से गिर सकती है। तो अब चलिए समझते हैं कि ये ऑर्डर ब्लॉक्स को हम चार्ट में कैसे पता कर सकते हैं। तो अब आ चुके हैं हम चार्ट पे। तो समझते हैं कि हमें पता कैसे चलेगा कि बड़े इंस्टीट्यूशन का ऑर्डर ब्लॉक आखिर है कहां पे है। तो इसके लिए देखिए [संगीत] हम एक कांसेप्ट का यूज़ करते हैं या कहें कि एक लॉजिक का यूज करते हैं। देखिए जब भी किसी बड़े इंस्टीटशंस ने एक जगह पे अपने ऑर्डर ब्लॉक्स लगा रखे होंगे तो उस जगह पे क्या होगा? उस जगह पे यह होगा कि उससे पहले भी प्राइस वहां [संगीत] से एकदम से तेजी से बढ़ी होगी। यानी एक इंपल्सिव मूव पहले भी आया होगा और जब इंपल्सिव मूव आया होगा तो उनके कुछ ऑर्डर ब्लॉक्स एग्जीक्यूट होने से रह गए होंगे। तो अब वो क्या करेंगे? वो दोबारा से प्राइस को वहां पे लाने की कोशिश करेंगे ताकि उनके जो बचे हुए ऑर्डर्स हैं वो भी एग्जीक्यूट हो जाए। तो ऐसा ही हमें यहां पर देखने को मिलता है और बार-बार आपको ये चीज चार्ट में देखने को मिलती है और काफी अच्छे से काम भी करती है। [संगीत] लेकिन सिर्फ एक चीज को नहीं देखना और भी बहुत सारी चीजें आपको देखनी होती है। तो जैसे यहां पर आप देख सकते हैं कि मार्केट [संगीत] में एक इंपल्सिव मूव आया है। मतलब बहुत सारी ग्रीन कैंडल्स एक साथ बनी है। तो जैसे ही ये इतना बड़ा इंपल्सिव मूव एक साथ आया इसका मतलब किसी ना किसी बड़े इंस्टीट्यूशन ने यहां पे बाइंग की है। इसी वजह से यहां पे मूव आया है। और हमारा मानना ये है कि उसके कुछ ना कुछ ऑर्डर्स तो पेंडिंग रह गए होंगे और उनको वो दोबारा एग्जीक्यूट करवाना चाहेगा। तो वो ऑर्डर्स कहां पर हो सकते हैं? इसके लिए हम क्या करते हैं? इसको मार्क करने के लिए हम क्या करेंगे कि जहां से इंपल्सिव मूव आया इसका मतलब उसने वहां पे बाइंग शुरू कर दी। तो इसके आसपास ही कहीं पे ऑर्डर्स होंगे। तो इसके लिए हम क्या करेंगे कि जहां से इंपल्सिव मूव आया था मतलब यहां से मूव आया था ना तो इससे पहले वाली कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए हम एरिया एक ड्रॉ करेंगे और वो होता है हमारा ऑर्डर ब्लॉक। [संगीत] ड्रॉ करने के लिए यहां पर हमें रेक्टेंगल वाला टूल मिल जाता है। यहां पे जाना है। हमें पता है कि यहां से मूव आया था। तो इससे पहले वाली कैंडल यानी इस कैंडल के [संगीत] हाई एंड लो से लगते हुए मैंने एक एरिया ड्रॉ किया। और ये क्या है? ये है [संगीत] मेरा ऑर्डर ब्लॉक। इस तरीके से मैंने ऑर्डर ब्लॉक को मार्क कर रखा है। और मेरा मानना यह है कि अगर प्राइस दोबारा से इस लेवल पे आती है तो [संगीत] यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे क्योंकि बड़े इंस्टीटशंस के ऑर्डर यहां पर एग्जीक्यूट होंगे। और आप आगे चल के देखेंगे कि यहां पर प्राइस आती है और उसके बाद प्राइस जो है वो आगे बढ़ने लग जाती है। जैसा कि यहां पर आप देख सकते हैं। ऐसे ही देखिए एक और एग्जांपल आपको दिखाता हूं। यहां पर आप देख सकते हैं कि मार्केट [संगीत] में एक इंपल्सिव मूव आया तो उससे पहले वाली कैंडल जहां से ये मूव स्टार्ट हुआ था हमने उसके हाई एंड लो से लगते हुए एक एरिया [संगीत] ड्रॉ किया। जैसे ही प्राइस दोबारा से इस लेवल पे आई उसके बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस ने अच्छा खासा मूव दिया है। तो इस तरीके से आप अपना ऑर्डर ब्लॉक मार्क कर सकते हैं। अब यहां पर मैं एक चीज आपको क्लियर कर दूं कि ऑर्डर ब्लॉक आपको चार्ट में कई बार देखने को मिलेंगे। [संगीत] लेकिन ऐसा नहीं है कि हर ऑर्डर ब्लॉक पे आने के बाद प्राइस ऊपर जाएगी या हर ऑर्डर ब्लॉक तक प्राइस दोबारा आएगी। [संगीत] जब आएगी तब वो हमारे लिए यूज़फुल होंगे। तो मार्क तो आप चाहे सबको कर सकते हैं। लेकिन यूज़ सारे नहीं आएंगे। तो इस चीज का ध्यान रखना। तो अब चलिए एक बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक भी देख लेते हैं। लेकिन उससे पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं। यह इंडिया में एफआईओ रजिस्टर्ड है। मैं खुद भी इसका यूज़ करता हूं। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके डेल्टा एक्सचेंज पे अपना अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से अंधीरा एi का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलता है। इसके लिए नीचे Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। उसको जरूर फिल कर लीजिएगा। चलिए अब टॉपिक पे वापस आते हैं और बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक को देख लेते हैं। तो बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक मार्क करने के लिए जब भी हमें दिखाई देता है कि मार्केट में एक डाउन साइड [संगीत] का इंपल्सिव मूव आया है। तो उससे पहले वाली कैंडल जहां से ये मूव शुरू हुआ था हम उसके हाई एंड लो से लगते हुए एक एरिया मार्क करते हैं। जैसे आप देख सकते हैं कि यहां से एक डाउन साइड का मूव आया है जो कि अच्छा खासा मूव था। तो इससे पहले वाली कैंडल यानी ये जो ग्रीन कैंडल है इसके हाई एंड लो से लगते हुए हमने एक एरिया मार्क किया। लेकिन इसके बाद वाली कैंडल की विक थोड़ा सा ऊपर गई थी। तो हमने उसको भी अपने एरिया में ले लिया है। तो इतने एडजस्टमेंट्स आपने भी करने हैं। तो ऑर्डर ब्लॉक तो हमने यहीं पर मार्क कर दिया था। अब इसके बाद दोबारा से जैसे ही प्राइस यहां पर आती है तो हम यहां पर अपनी शॉर्ट करने की पोजीशन ले सकते हैं। अब अगर मान लो आप यहां पर शॉर्ट करने की पोजीशन लेते तो जैसे ही प्राइस इस लेवल पे आई थी आप यहां पे ले लेते। आपका जो स्टॉप लॉस रहता वो ये जो स्विंग हाई है इससे थोड़ा सा ऊपर यहीं पे कहीं पर रहता और टारगेट की आप 1:2 तक लेकर चल सकते थे। बाकी जो प्राइस है वो तो अच्छा खासा यहां पर गिरी थी। आप देख [संगीत] सकते हैं कि प्राइस तो बहुत ज्यादा गिरी 1:5 भी आपको यहां पे मिल जाता। ऐसे ही यहां पर ऑर्डर ब्लॉक का एक और एग्जांपल आपको दिखाई दे रहा है। देखिए ये एक इंपल्सिव डाउन साइड का मूव आया था। तो उससे पहले की कैंडल यानी ये जो ग्रीन कैंडल है इसके हाई एंड लो से लगते हुए मैंने एक एरिया मार्क किया। [संगीत] जैसे ही प्राइस दोबारा से इस लेवल पे आती है यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस होते हैं। और आप देख सकते हैं इसके बाद अच्छा खासा प्राइस यहां से गिरी है। तो इस तरीके से आप बुलिश एंड बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक को मार्क कर सकते हैं। अब समझते हैं इसके दूसरे कांसेप्ट ब्रेकर ब्लॉक के बारे में। तो एक फेल्ड ऑर्डर ब्लॉक को ही ब्रेकर ब्लॉक कहा जाता है। मतलब आपने एक ऑर्डर ब्लॉक बनाया था लेकिन वो फेल हो गया। तो अब वो बन जाता है ब्रेकर ब्लॉक। पहले मैं आपको दिखा देता हूं। उसके बाद मैं आपको इसके पीछे का लॉजिक भी बताऊंगा। देखिए जैसे यहां पर आपको दिखाई दे रहा है कि एक अपसाइड [संगीत] का इंपल्सिव मूव आया है। यहां पे मैं 1 घंटे के टाइम फ्रेम का यूज़ कर रहा हूं। तो 1 घंटे के टाइम फ्रेम में चार ग्रीन कैंडल बन रखी है। यानी ये एक अच्छा खासा अपसाइड का [संगीत] मूव है। तो हमने क्या किया? हमने उससे पहले वाली कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए एक एरिया मार्क कर लिया। तो अभी तक ये क्या था? अभी तक यानी यहां तक यह था एक ऑर्डर ब्लॉक। [संगीत] लेकिन इसके बाद क्या होता है? प्राइस इस लेवल के पास दोबारा से आती है। जैसा कि आप देख सकते हैं कि [संगीत] प्राइस वापस से यहां पे आई। अब जैसे ही प्राइस यहां पे आई होगी तो ट्रेडर्स ने सोचा होगा कि भाई यह तो ऑर्डर ब्लॉक पे आ गई है। उन्होंने बाय करने की पोजीशन ले ली। अपना स्टॉप लॉस उन्होंने यहां पे कहीं पे रखा होगा और टारगेट का वेट कर रहे होंगे। लेकिन इस [संगीत] बार यह कांसेप्ट काम नहीं करता है। क्योंकि कोई भी ऐसा कांसेप्ट नहीं है जो हमेशा काम करता है। और इस बार क्या होता है? प्राइस इससे नीचे आ जाती है तो जिसने यहां पे बाय करने की पोजीशन ली होगी उसका एक छोटा-मोटा स्टॉप लॉस हिट हो गया होगा और ट्रेडिंग में स्टॉप लॉसेस हिट होंगे। यह आपको मान के चलना है। तो अब जब आपका स्टॉप लॉस हिट हो जाता है तो अब ये जो हमारा ऑर्डर ब्लॉक था ना यहां तक था ये एक ऑर्डर ब्लॉक। लेकिन जैसे ही प्राइस इस लेवल के नीचे आ गई है तो अब यह बन चुका है एक ब्रेकर ब्लॉक। यानी पहले यह एक बुलिश ऑर्डर ब्लॉक था। अब यह एक बियरिश ब्रेकर ब्लॉक बन चुका है। मतलब जैसे ही प्राइस इस लेवल के नीचे आ गई। अब अगर प्राइस [संगीत] दोबारा से इस लेवल के पास आती है तो यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस होंगे जो कि आप देख सकते हैं कि आगे प्राइस अच्छी खासी गिरी भी है। अब आप बोलेंगे भाई इसके पीछे लॉजिक क्या है? या तो कुछ भी कांसेप्ट बना दिए गए हैं। नहीं [संगीत] यहां पर भी एक लॉजिक है। देखिए मैंने आपको बताया था कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं जब वो बाइंग करते हैं तो उनके कुछ ना कुछ ऑर्डर्स पेंडिंग रह जाते हैं। [संगीत] तो अब सोचो कि एक बड़े इंस्टीट्यूशन ने यहां पर बाइंग कर रखी है। जिसकी वजह से ये मूव आया था। लेकिन उसके बाद ये जो बड़ा इंस्टीट्यूशन है ऐसे बहुत सारे बड़े-बड़े इंस्टीटशंस हैं। एक ने बाइंग की दूसरा हो सकता है दूसरे इंस्टीट्यूशन ने सेलिंग कर [संगीत] दी। जिसकी वजह से जिसने यहां पर बाइंग कर रखी होगी ना अब वो बेचारा लॉस में चल रहा होगा। [संगीत] अब वो सोचेगा कि कैसे भी मैं ब्रेक इवन में अपने ट्रेड को क्लोज कर दूं। इसलिए वो दोबारा से प्राइस को यहां पे ले जाने की कोशिश करेगा और जैसे ही प्राइस यहां पे आ जाती है वो अपनी जितनी भी क्वांटिटी उसने यहां पर बाइंग की थी उन सारी क्वांटिटी को यहां पे सेल कर देगा। दूसरा जो इंस्टीट्यूशन है वो पहले से सेल कर रहा है जिसकी वजह से यहां पर मार्केट में सेलिंग आएगी और जैसे ही सेलिंग आएगी तो प्राइस के गिरने के चांसेस होते [संगीत] हैं। तो इसके पीछे लॉजिक ये है। तो इसी तरीके से जो एक ऑर्डर ब्लॉक होता है वो ब्रेकर ब्लॉक बन जाता है और जो बुलिश ऑर्डर ब्लॉक होता है वो बेयरिश बनता है। अब इसका एक दूसरा एग्जांपल भी देखते हैं। [संगीत] तो अब एक बुलिश ब्रेकर ब्लॉक देखते हैं। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि एक इंपल्सिव डाउन साइड का मूव आया था और डाउन साइड का मूव आया है। इसका मतलब इससे पहले वाली जो कैंडल होगी उसके हाई एंड लो से रखते हुए हम एक एरिया मार्क कर सकते हैं जो कि हमारा एक ऑर्डर [संगीत] ब्लॉक होगा। यानी यहां तक वो हमारा एक ऑर्डर ब्लॉक था। तो हमने मार्क कैसे किया? जहां से इंपल्सिव मूव आया उससे पहले वाली कैंडल यानी ये जो कैंडल है इस कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए मुझे एक एरिया [संगीत] मार्क करना था। लेकिन उसके बाद वाली कैंडल की जो विक है वो थोड़ा ऊपर तक चली गई। तो मैंने पूरा यहां तक का एरिया ले लिया और इस तरीके से अपना [संगीत] एरिया मार्क कर लिया। अब हमने सोचा कि भाई प्राइस यहां पे आएगी और यहां से गिर जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं होता है। प्राइस इसके ऊपर निकल जाती है तो ऐसे में एक छोटा-मोटा स्टॉप लॉस हिट हो [संगीत] गया होगा। लेकिन जैसे ही प्राइस इससे ऊपर निकल जाती है ना तो यह जो ऑर्डर ब्लॉक था वो अब बन जाता है ब्रेकर ब्लॉक। यानी अब अगर प्राइस इसके पास आती है तो यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे [संगीत] और बिल्कुल ऐसा ही हुआ है। आप देख सकते हैं यहां से प्राइस ऊपर निकल गई थी। उसके बाद आपको दिखाई दे रहा है काफी सारी वीक में प्राइस इस लेवल पे आई है और उसके बाद आपको यहां से एक [संगीत] अपसाइड का मूव देखने को मिला है। तो यह होता है एक ब्रेकर ब्लॉक जो कि एक फेल्ड ऑर्डर ब्लॉक होता है। अब यहां पर आपके लिए वैलिड वर्सेस इनवैलिड ऑर्डर ब्लॉक को समझना भी बहुत ज्यादा जरूरी है। देखिए ये ऑर्डर ब्लॉक जो है ना ये कोई सपोर्ट रेजिस्टेंस नहीं है कि प्राइस बार-बार इसके पास आती जाए और आप बार-बार उसे ऑर्डर ब्लॉक कंसीडर [संगीत] करते जाएं। एक जो ऑर्डर ब्लॉक है उसको आपने एक ही बार यूज करना है। मतलब जैसे यहां पर आपने देखा कि आपने एक ऑर्डर ब्लॉक मार्क किया [संगीत] था। प्राइस उसके पास आ गई। यहां से मूव आ चुका है। तो अब वो ऑर्डर ब्लॉक खत्म। ऐसा नहीं कि प्राइस बाद में कभी दोबारा यहां पे आती है और आप सोचो कि भाई ये दोबारा से टैप हो गया। अब फिर से ऊपर जाएगा। ऐसा नहीं होगा। एक ऑर्डर ब्लॉक को आपने एक बार ही यूज़ करना है। तो इस चीज का आपने ध्यान रखना है। अब चलिए बात करते हैं पीओआई यानी पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट की। तो पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट बेसिकली वो एरिया होता है जहां पर प्राइस के फ्यूचर में रिएक्ट करने की प्रोबेबिलिटी होती है। जैसे हमने अभी आपको ऑर्डर ब्लॉक दिखाया। वो ऑर्डर ब्लॉक क्या है? वो भी एक तरह से पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट है। क्योंकि प्राइस दोबारा से उस एरिया के पास [संगीत] आएगी तो वहां पर आने के बाद प्राइस रिएक्ट करेगी। इसकी प्रोबेबिलिटी है। ऐसे ही हमने इससे पहले आपको फेयर वैल्यू गैप्स के बारे में बता रखा है। अगर प्राइस फेयर वैल्यू गैप के पास आती है तो वहां से भी प्राइस के रिएक्ट करने की प्रोबेबिलिटी है। यानी वो भी क्या है? वो भी एक पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट है। चलिए अब एक एग्जांपल देखते हैं जिससे आपको समझ आएगा कि पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट को चार्ट पे मार्क कैसे करना है और इससे [संगीत] आप हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप्स को कैसे ढूंढ सकते हैं। तो देखिए यहां पर आपको दिखाई दे रहा है कि प्राइस अभी एक लेवल [संगीत] पे जाने के बाद यहां से रिवर्स कर रही है। तो मैं क्या करता हूं मैं यहां पर इसका जो हाई एंड लो है उसको मार्क कर लेता हूं। तो सबसे पहले मुझे ये एक हाई नजर आ रहा है। तो मैंने क्या किया? इस हाई [संगीत] से लगते हुए इस तरीके से लाइन ड्रॉ कर ली है। और ऐसे ही मुझे जो इसका लो नजर आ रहा है जो कि ये है। मैं इससे लगते हुए भी यहां पर एक लाइन ड्रॉ कर लेता हूं। कुछ [संगीत] इस तरीके से। अब मुझे इसके बाद वेट करना है कि प्राइस अगर किसी लेवल को स्वीप कर दे या फिर यहां पर मुझे कोई पीडीआरे जैसे [संगीत] कि एफवीजी मिल जाए, ऑर्डर ब्लॉक मिल जाए तो उसके बाद मैं सोचूंगा कि मुझे क्या करना है। तो अब चलिए देखते हैं कि इसके बाद आखिर होता क्या है। तो यहां से आप देख सकते हैं कि प्राइस ने अभी हमें कुछ भी नहीं दिया। फिलहाल भी अभी हमें कुछ खास मिला ही नहीं था। लेकिन जैसे [संगीत] ही प्राइस यहां पर दोबारा से आई उस टाइम पर हमें दिखाई देता है कि यहां पर प्राइस ने इस लेवल को स्वीप कर लिया है। आप देख सकते हैं प्राइस इस लेवल से ऊपर चली गई है। [संगीत] तो जैसे ही प्राइस इस लेवल से ऊपर चली गई इसका मतलब प्राइस ने इस लेवल को स्वीप किया मतलब ऊपर जाने के बाद प्राइस वापस नीचे आके क्लोज दे दी ना तो जिसके भी स्टॉप लॉस यहां पे रहे होंगे सबके हिट हो गए होंगे। तो वो लेवल जो है वो स्वीप हो चुका है। तो अब हमें दिखाई दे रहा है कि भाई यह जो हमारा लेवल है यह हो चुका है स्वीप। [संगीत] तो हमने इसे एज अ स्वीप मार्क कर दिया। अब इसके बाद हमें ढूंढना है कि क्या यहां पर हमें कोई ऑर्डर ब्लॉक जैसा बनता हुआ दिखाई दे रहा है या फिर कुछ ऐसा बनता हुआ दिखाई दे रहा है। तो उसको मार्क करते हैं। तो अब इसके बाद हम वेट करते हैं। प्राइस यहां से नीचे आती है और हमें दिखाई देता है कि प्राइस ये जो हमने लेवल मार्क कर रखा था उस लेवल से नीचे प्राइस ने यहां पर क्लोजिंग दे दी है। इस कैंडल में ही इसके नीचे क्लोजिंग आ गई थी। इसका मतलब क्या हुआ है? इसका मतलब यहां पर हो चुका है चेंज ऑफ कैरेक्टर। तो हमने यहां पर अपना चेंज ऑफ कैरेक्टर मार्क कर दिया। तो अब मुझे दिखाई दे रहा है कि यहां पर चेंज ऑफ कैरेक्टर हो चुका है। मतलब अभी तक आप देख सकते हैं प्राइस बढ़ रही थी। यानी अब यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस [संगीत] होंगे। तो अब जो मैं ट्रेड प्लान करूंगा वो मैं शॉर्ट करने के ट्रेड प्लान करूंगा। लेकिन उसके लिए भी मुझे कुछ कंफर्मेशंस चाहिए होंगे। कुछ ना कुछ एंट्री के लिए चाहिए होगा। तो चलिए देखते हैं कि इसके बाद प्राइस ने क्या किया। तो यहां से आप देख सकते हैं प्राइस थोड़ा नीचे आई। बट जब तक हमें कुछ सिग्नल नहीं मिल रहा है तब तक हम ट्रेड नहीं ले सकते ना। तो अब हमने देखा कि प्राइस इस लेवल पे आ गई है। तो हमें यहां पर एक ऑर्डर ब्लॉक दिखाई दे रहा है। तो चलिए उस ऑर्डर ब्लॉक को मार्क कर लेते हैं। आप देख सकते हैं यहां से प्राइस एकदम से नीचे आई थी। तो इससे पहले वाली कैंडल यानी ये जो ग्रीन कैंडल है जिसने [संगीत] स्वीप किया था ये कैंडल क्या होगा? ये होगा हमारा ऑर्डर ब्लॉक। तो हमने इसको एज अ ऑर्डर ब्लॉक मार्क कर लिया है। [संगीत] तो पहला तो मुझे ऑर्डर ब्लॉक दिखाई दे रहा है जहां से प्राइस रिवर्स होती हुई नजर आ रही है। दूसरा मुझे यहां पर एक और चीज नजर आ रही है। देखिए यहां पर हमें एक फेयर वैल्यू गैप बनता हुआ भी नजर आ रहा है। क्योंकि यहां पर एक नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल है। तो इससे पहले वाली कैंडल के [संगीत] लो से लगते हुए बाद वाली कैंडल के हाई से लगते हुए मैंने एक एरिया ड्रॉ किया। तो ये क्या है? यह मेरा फेयर वैल्यू गैप है। अब भले ही प्राइस ने यहां पर इस फेयर वैल्यू गैप को रिस्पेक्ट नहीं किया है क्योंकि प्राइस उससे ऊपर चली गई। वो इसलिए रिस्पेक्ट नहीं किया क्योंकि यहां पर एक ऑर्डर ब्लॉक भी था। तो अब मैं यहां पर जो प्रीमियम डिस्काउंट का कांसेप्ट मैंने आपको सिखाया था उसको लगा लेता हूं और देखता हूं कि प्राइस अभी हमारे कौन से लेवल पे है। प्रीमियम लेवल पे है या फिर डिस्काउंट लेवल पे है। तो इसके लिए यहां पर मैंने आपको बताया था कि गेन बॉक्स करके एक टूल होता है। आप इसका यूज़ कर सकते हैं। और उसके बाद आपने ये हाई टू लो यहां पर इसको मार्क कर देना है। तो [संगीत] हाई टू लो जब मैंने मार्क किया तो मुझे दिखाई दे रहा है कि भाई जो प्राइस है वो अभी प्रीमियम ज़ोन के आसपास है। यानी अगर मैं यहां पे शॉर्ट करूंगा तो ये मेरे लिए बेटर रहेगा। तो पहला तो मुझे दिखाई दे रहा है कि भाई प्राइस ने यहां पर स्वीप कर दिया है। दूसरा मुझे दिखाई दिया है कि भाई यहां पर चेंज ऑफ कैरेक्टर भी हो चुका है। यानी पहले अप ट्रेंड चल रहा था। अब शायद डाउन ट्रेंड स्टार्ट हो सकता है। तीसरा मुझे दिखाई दे रहा है कि प्राइस जो है वो मेरा जो ऊपर वाला ऑर्डर ब्लॉक था इसको रिस्पेक्ट कर रही है। तो ये जो मेरा फेयर वैल्यू गैप था इसको मैं रिमूव कर देता हूं। यानी प्राइस मेरे फेयर वैल्यू गैप से यहां से रिवर्स हो रही है। और कहां पे रिवर्स हो रही है? जहां पे मेरा प्रीमियम ज़ोन है। यानी [संगीत] इतनी सारी चीजें मिल रही हैं। तो, इसको हम कहते हैं कि यह एक हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप है। और इसके बाद जैसे ही प्राइस इस लेवल के पास आई थी ना, तो यहीं पर मैं अपनी शॉर्ट करने की पोजीशन ले सकता था करीब-करीब। [संगीत] यहां पर हमारा जो स्टॉप लॉस होता वो इस स्वीप के थोड़ा सा ऊपर रहता और टारगेट के लिए हम 1:2 प्लान कर सकते थे। या फिर यह जो हमें नीचे का लेवल दिखाई दे रहा है ना, हम यहां तक का भी टारगेट प्लान कर सकते थे जो कि 1:3 के आसपास का टारगेट है। तो, अब चलिए देखते हैं कि प्राइस कहां तक गई थी। तो आप देख सकते हैं कि प्राइस यहां पर हमारा जो टारगेट था वहां तक पहुंच गई थी जो कि 1:3 का टारगेट था। तो इस तरीके से आपको अपने ट्रेड्स प्लान करने चाहिए और जब ये सारे कांसेप्ट आपको पता होंगे तभी आप इन ट्रेड्स को अच्छे [संगीत] तरीके से एग्जीक्यूट कर पाएंगे। तो अब जब आपको ऑर्डर ब्लॉक के बारे में पता चल गया है तो अब हम ओटीई के बारे में जानते हैं। इसमें हम फिबोनाची स्टैंडर्ड डेविएशन और एंट्री रिफाइनमेंट के बारे में भी समझेंगे। तो चलिए समझते हैं हमारे सबसे पहले कांसेप्ट ओटीई के बारे में। ओटीई यानी ऑप्टिमल ट्रेड एंट्री। आईसीटी का एक ऐसा कांसेप्ट है जो मार्केट में हाई प्रोबेबिलिटी रिट्रेसमेंट ज़ोन को आइडेंटिफाई करने के लिए यूज़ किया जाता है। जिससे हम बेटर रिस्क रिवॉर्ड वाले ट्रेड्स ढूंढ सकते हैं। हमारी जो एंट्री की लोकेशन होगी वो काफी बेटर हो सकती है। लोकेशन के बारे में हमने इससे पहले भी बात की है। हमारा जो ड्रॉडाउन होगा उसके चांसेस भी कम होंगे। साथ ही यह हमारी हेल्प करता है हाई प्रोबेबिलिटी एंट्रीज ढूंढने के लिए। यहां पर एक चीज आपको क्लियर कर दूं कि ओटीई कोई स्ट्रेटजी नहीं है बल्कि आपकी जो भी स्ट्रेटजी है उसको रिफाइन करने का यह एक टूल है। अब ओटीई को अगर आप देखेंगे तो आपको यह बिल्कुल फिबोनाची रिट्रेसमेंट जैसा देखने को मिलेगा। अगर आपको नहीं पता फिबोनाची रिट्रेसमेंट क्या है तो मैं आपको बता दूं कि ये कुछ स्क्रीन में इस तरीके का नजर आता है और इसका भी हम काफी ज्यादा ट्रेडिंग में यूज़ करते हैं। लेकिन यहां पर ओटीई जो है वो बिल्कुल इसी तरीके का नजर आता है। मतलब एक्चुअल में अगर आप चार्ट पे लगाएंगे तो आपको बिल्कुल सेम भी दिखाई दे सकता है। और टूल हम फिबोनाची वाला ही यूज़ करते हैं। बट फिबोनाची रिट्रेसमेंट में क्या है? यहां पर हमें काफी सारे लेवल्स दे रखे हैं। जैसे 0.236 का भी लेवल है, 0.382 का भी लेवल है और उसके अलावा भी काफी लेवल है। तो ओटीई में हम क्या करते हैं? हम इन सारे लेवल्स पे नहीं जाते हैं। बल्कि जो सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट लेवल्स हैं जैसे कि ये 0.5, 0.62 और 0.79 का जो लेवल है हम इन पे ज्यादा फोकस करते हैं। क्योंकि आईसीटी ये मान के चलता है कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं उनकी जो एंट्री होने के चांसेस हैं वो इन्हीं लेवल्स के पास सबसे ज्यादा होते हैं। यहां पर मैं एक और चीज आपको क्लियर कर दूं कि ये जो 0.5 का लेवल है ये यहां पर प्रीमियम एंड डिस्काउंट के भी काम आता है जो कि हमने इससे पहले डिस्कस किया है। इसके अलावा 0.62 और 0.79 का जो लेवल है ये एंट्री रिफाइनमेंट के काम आता है। चलिए सीधा इसको चार्ट पे समझते हैं। अब ओटीई को चार्ट पे समझने से पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं। ये इंडिया में एफआईयू रजिस्टर्ड है। मैं खुद भी इसका यूज़ करता हूं। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से अराई का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलता है। बट इसके लिए हमने आपको डिस्क्रिप्शन में Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। उसको जरूर फिल कर लीजिएगा। साथ ही डेल्टा एक्सचेंज का लिंक भी आपको डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। तो ओटीई को समझने के लिए हम आ चुके हैं चार्ट पे। चार्ट पे आने के बाद आपने क्या करना है? आपने यहां पर आपको एक फिबोनाची रिट्रेसमेंट वाला टूल मिलता है। आपने इस टूल को सेलेक्ट कर लेना है। उसके बाद अगर मान लीजिए आप शॉर्ट करना चाहते हैं या शॉर्ट करने की एंट्री देखना चाहते हैं तो आपने हाई टू लो जो हमारा फिबोनाची रिट्रेसमेंट है उसको मार्क करना होता है। और अगर आप बाय करने की एंट्री देखना चाहते हैं तो लो टू हाई आपने मार्क करना होता है। अब यहां पर आपको करंट चार्ट दिखाई दे रहा है। आप इसमें देख सकते हैं कि अगर मान लीजिए इससे आगे का चार्ट अभी नहीं बन रखा होता। आप यह मान के चलिए और मैं देखना चाहता कि भाई मुझे यहां पर शॉर्ट करना है तो मैं कहां पे कर सकता हूं। तो इसके लिए हमें क्या करना है? हमें यह दिखाई दे रहा है स्विंग हाई। हम इससे लेके आए जो हमने यहां से फिबोनाची टूल को सेलेक्ट कर रखा है उसको। तो यहां पर आपको दिखाई दे रहा है स्विंग हाई है और हम शॉर्ट करने की एंट्री यहां पे प्लान करना चाहते हैं। मान लीजिए इसके आगे का चार्ट नहीं बन रखा है। तो हमने क्या किया? हमने ये था स्विंग हाई। स्विंग हाई से मार्क करना शुरू किया और यहां पे स्विंग लो ये वाला था। हम यहां तक इसको लेकर गए और उसके बाद सेम लेवल पे यह वाला हमारा स्विंग लो था। सेम लेवल पे जाने के बाद हमने इसको थोड़ा सा आगे को एक्सटेंड कर देना है। कुछ इस तरीके से। तो ऐसे हम मार्क करते हैं हमारे ओटीई को और फिबोनाची रिट्रेसमेंट को भी कुछ इसी तरीके से मार्क किया जाता है। लेकिन जब आप फिबोनाची रिट्रेसमेंट टूल को मार्क करेंगे तो यहां पर क्या होगा ना यहां पर आपकी जो सेटिंग्स होंगी वो डिफरेंट होंगी। तो इसके लिए आपने क्या करना है? जो सेटिंग्स मैंने यहां पर लगा रखी हैं। आपने उन सेटिंग्स को ही सेलेक्ट कर लेना है। बेसिकली जो यहां पर फालतू के सेलेक्ट हो रखे थे, हमने उनको हटा दिया है। और ये हमने यहां पर सेटिंग्स कर दी है जिसमें 1, 0.5, 0.79, 0.62 और ज़ीरो लेवल हमने यहां पर सेलेक्ट कर रखा है। इसके अलावा हमने थोड़ा बहुत कलर की सेटिंग्स कर रखी हैं जो आप करना चाहते हो तो कर सकते हो, नहीं करना चाहो तो वो आपके ऊपर है। तो आप यहां से इन सेटिंग्स को कॉपी कर सकते हो और उसके बाद आपने ओके पे क्लिक कर देना है। अब जैसे ही आप यहां पर अपना जो ओटीई है उसको मार्क कर देते हैं तो अब देखिए हम सबसे पहली चीज हमें यहां पर क्या समझ आ रही है? सबसे पहली चीज हमें समझ आ रही है यहां पर प्रीमियम डिस्काउंट के बारे में। देखिए जो 0.5 का लेवल है इससे नीचे का जो एरिया है मतलब यहां से लेके यहां तक का जो एरिया है ये हमारा डिस्काउंट लेवल है। और जो इससे ऊपर का एरिया है वो हमारा क्या है? वो हमारा प्रीमियम ज़ोन है। मतलब 0.5 आपको ये दिखाई दे रहा है। इससे नीचे डिस्काउंट है। इससे ऊपर प्रीमियम ज़ोन है। तो अगर आप शॉर्ट करना चाहते हैं तो आप महंगे से महंगे में बेचना चाहेंगे ना तो आपने देखना है कि जब प्राइस 0.5 से ऊपर है आप तब शॉर्ट करने के बारे में सोचेंगे। और अगर आप बाय करना चाहते हैं जो कि इस केस में तो नहीं बन रहा है। लेकिन मान लीजिए आप बाय करना चाहते हैं तो फिर आप 0.5 लेवल के नीचे करेंगे। मैं आपको दूसरा एग्जांपल दिखाऊंगा। उसमें आपको चीजें क्लियर हो जाएंगी। तो पहली चीज तो आपको यहां से ये समझ आ रही है कि चीज प्रीमियम में मिल रही है या फिर डिस्काउंट में मिल रही है। अब इसके बाद दूसरा जो सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट यहां पर ओटीई हमारी हेल्प करता है वो है एंट्री रिफाइनमेंट में। तो एंट्री रिफाइनमेंट को इस तरीके से समझो कि अगर मान लो मैं यहां पर अपना शॉर्ट करने का कुछ प्लान कर रहा होता तो हो सकता है मैं यहां पर शॉर्ट कर देता। यहां पर शॉर्ट कर देता। अब अगर मैं यहां पर शॉर्ट करता तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। प्राइस तो नीचे गई है। लेकिन ध्यान से यहां पर एक बात समझो कि अगर मैं यहां पर शॉर्ट करता तो मेरा जो स्टॉप लॉस होता वो मुझे करीब-करीब यहां पे रखना होता जो कि एक काफी बड़ा स्टॉप लॉस होता। जबकि ये जो ओटीई है ये मुझे बता रहा है कि भाई जो प्राइस है ना वो 0.62 या 0.79 के लेवल तक भी जा सकती है। क्योंकि इस केस में अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको दिखाई देगा कि प्राइस 0.79 के लेवल तक गई है। अगर आप वहां तक वेट नहीं भी करते आप 0.62 के लेवल पे भी अपनी एंट्री लोगे तो आपका जो स्टॉप लॉस होगा अब वो छोटा होगा। यानी यहां पर हमारा जो स्टॉप लॉस है अगर हम उसको छोटा रखना चाहते हैं, बड़े टारगेट के पीछे जाना चाहते हैं तो उसके लिए हम इसकी सबसे पहले हेल्प ले सकते हैं। तो अब आपको थोड़ा बहुत ओटीई कीेंस समझ आ गई होगी। तो चलिए अब एग्जांपल देखते हैं। वहां से चीजें आपको और बेटर क्लियर होंगी। तो अब देखिए यहां पर हमारे सामने एक प्लेन चार्ट है और यहां पर क्योंकि हमें दिखाई दे रहा है कि भाई अप ट्रेंड चल रहा है। तो मैं यहां पर बाय करने की एंट्री लूंगा। लेकिन अब वो एंट्री मुझे कहां पर लेनी है? क्या मुझे यहीं पर बाय कर लेना चाहिए? यहां पर बाय करना चाहिए। कहां पर बाय करना चाहिए? यह मैं समझना चाहता हूं। तो बाय करने के लिए हम क्या करेंगे? यह जो हमारा ओटीई है या जो फिबोनाची रिट्रेसमेंट टूल है उसको लो टू हाई लगाते हैं। अब वो कैसे लगाना है? इसके लिए देखिए यहां पर आपको दिखाई दे रहा है ये हमारा फिबोनाची रिट्रेसमेंट टूल है। हमने इस पे क्लिक किया। उसके बाद हम गए ये हमारा लो वाला लेवल है। तो हम लो वाले लेवल पे आ गए और लो लेवल से लेके हम हाई तक इसको लेकर गए हैं। यह हो गया हाई। अब हाई पे जाने के बाद सेम लेवल पे हमने इसको थोड़ा सा आगे को एक्सटेंड कर देना है। कुछ इस तरीके से। [संगीत] तो ऐसे हम अपने ओटीई लेवल को मार्क कर सकते हैं। फिबोनाची रिट्रेसमेंट ही है। बस यहां पर हमने कुछ लेवल्स को हटा दिया है। इसलिए हम उसको ओटीई यानी ऑप्टिमल ट्रेड एंट्री बोल रहे हैं। तो अब देखिए इस केस में हमें पता है कि जब प्राइस 0.5 के लेवल के ऊपर है। इसका मतलब अभी प्राइस प्रीमियम लेवल पे है। अगर ये 0.5 लेवल के नीचे आती है तो हमें पता चल जाएगा कि ये प्राइस जो प्राइस है वो अब डिस्काउंट लेवल के पास आ गई है। तो पहला तो हमें पता है कि यहां पर बाय करने की एंट्री प्लान करना एक अच्छा ऑप्शन नहीं है। जबकि अगर मैं यहां पर कहीं पर बाय करने की एंट्री प्लान करूंगा तो वह एक बेटर ऑप्शन हो सकता है। लेकिन सिर्फ इतना ही देख के तो हम अपनी एंट्री प्लान नहीं करेंगे। तो अब चलिए देखते हैं कि जब मैंने ओटीई मार्क कर दिया तो उसके बाद आखिर चार्ट में हुआ क्या? तो यहां पर आप देख सकते हैं इसके बाद प्राइस सीधा गिरी और गिरते-गिरते हमारे 0.62 का जो लेवल है इसके पास तक प्राइस यहां पर आ चुकी थी। अब जैसे ही प्राइस 0.62 के लेवल के पास आ गई तो अब हमें यहां पर कोई ना कोई कंफर्मेशन देखना था कि भाई ऐसा भी तो हो सकता है प्राइस यहां से और नीचे गिर जाए। तो मुझे पता तो होना चाहिए कि एक्चुअल में प्राइस यहां से बढ़ेगी या फिर नहीं बढ़ेगी। [संगीत] तो इसके लिए अगर आप ध्यान से चार्ट को देखेंगे तो आपको दिखाई देगा कि यहां पर एक्चुअल में चेंज ऑफ कररेक्टर भी हुआ था और वो चेंज ऑफ करैक्टर आप कैसे मार्क करेंगे? देखिए यहां पर मैं आपको मार्क करके दिखाता हूं। आप देख सकते हैं पहले डाउन ट्रेंड चल रहा था। अगर हम इससे लगते हुए लाइन मार्क करें तो यहां पर हमारा एक ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ था। उसके बाद आप देख सकते हैं यहां पर भी हमारा एक ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ था जो कि डाउन ट्रेंड में था। उसके बाद हम यहां से लगते हुए लाइन मार्क करते लेकिन प्राइस इस लेवल के नीचे नहीं आई। यानी हमारा यहां पर ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर नहीं हुआ है। तो अब हम क्या करेंगे? अब इससे पहले वाला जो हाई था यानी इससे लगते हुए हमने लाइन ड्रॉ की और जैसे ही कोई कैंडल इसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है तो हमें पता है कि यहां पर क्या है? यहां पर हमारा चेंज ऑफ करैक्टर हो चुका है। तो एक तो देखिए हमें दिखाई दे रहा है कि प्राइस 0.62 के लेवल से रिवर्स कर रही है। दूसरा हमें दिखाई दे रहा है कि भाई यहीं पर चेंज ऑफ करैक्टर हुआ है। और तीसरा अगर आप ध्यान से देखेंगे तो यहां पर आपको एक फेयर वैल्यू गैप बनता हुआ भी नजर आ रहा है। तो [संगीत] अगर प्राइस अब दोबारा से फेयर वैल्यू गैप के पास आती है तो यहां पर हम अपना बाय करने का जो ट्रेड था उसको प्लान कर सकते थे। यह हमने अपना फेयर वैल्यू गैप मार्क कर दिया है। अब अगर प्राइस दोबारा से यहां पे आती है तो यहां पर हम अपनी इस तरीके से जो एंट्री [संगीत] थी उसको प्लान कर सकते थे। तो अब इसके बाद देखते हैं कि आखिर मार्केट में क्या हुआ। आप देख सकते हैं कि प्राइस जो है वो वापस से इस लेवल के पास आई है। तो हम यहां पर अपनी एंट्री ले लेते। हमारा जो स्टॉप लॉस होता वो ये वाला जो लो है इससे थोड़ा सा नीचे होता या फिर अगर आप सेफ चलना चाहते हैं ना तो ये जो 0.79 का लेवल है आप इससे थोड़ा सा नीचे भी अपना स्टॉप लॉस रख सकते हैं। तो हमने यहां पर अपना स्टॉप लॉस रखा। रही बात टारगेट की तो हम 1:2 का अपना टारगेट जो था वो प्लान कर सकते थे। या फिर आप जीरो का जो ये लेवल है वहां तक का टारगेट लेकर चल सकते हैं। अब इसके बाद देखते हैं कि कहां पर जाकर हमारा जो टारगेट था वो अचीव हुआ होता। तो आप देख सकते हैं कि यहां से प्राइस बढ़ने लग गई। प्राइस बढ़ती चली गई और यहां पर मैं इसको थोड़ा सा स्पीड बढ़ा देता हूं। तो अब आप देख सकते हैं कि प्राइस बढ़ती गई। पहले हमारे टारगेट के पास से ही थोड़ा सा रिवर्स हो गई थी। फिर प्राइस हमारी यहां पर चल रही थी। वापस से एंट्री के पास आई। उसके बाद देख सकते हैं फिर से थोड़ा सा नीचे आई थी प्राइस। एक बार तो हमारे देखिए अब यहां पे जाके आप देख सकते हैं कि सीधा प्राइस जो थी वो हमारे टारगेट से बहुत ऊपर निकल गई थी। तो इस तरीके से आप अपने ट्रेड्स को प्लान कर सकते हैं। तो ये तो मैंने आपको एक बुलिश का एग्जांपल दिखा दिया है। अब इसके बेसिस पे शॉर्ट कैसे करना है चलिए वो भी देखते हैं। तो जो शॉर्ट करने का एग्जांपल है वो हमने यहां पर मार्क कर रखा है। आप देख सकते हैं मार्केट डाउन ट्रेंड में चल रहा था। तो यहां पर हमें शॉर्ट करने के बारे में प्लान किया और साथ ही हमें यहां पर दिखाई दे रहा था कि भ ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर भी हो रहा है। तो जब तक ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हो रहा है इसका मतलब जो ट्रेंड है वो कंटिन्यू हो रहा है। तो हमने क्या किया? हमने इस हाई से यह वाला जो लो था इससे लगते हुए अपना ओटीई मार्क किया और उसको थोड़ा सा आगे को एक्सटेंड कर [संगीत] दिया है। कुछ इस तरीके से। तो अब यह जब हमने मार्क कर दिया तो इसके बाद देखिए यहां तक तो हमें कोई ट्रेड लेना नहीं था। हमें पता है कि भाई 0.5 से ऊपर जब प्राइस जाएगी तभी हम कोई शॉर्ट करने के बारे में सोचेंगे क्योंकि अभी [संगीत] ये डिस्काउंट ज़ोन के पास है। हमें प्रीमियम में जब जाएगा तब जाके सेल करना है। तो उसके बाद देखिए जो प्राइस है वो 0.5 के लेवल के ऊपर निकल गई। [संगीत] अब 0.5 के लेवल के ऊपर तो निकल चुकी है। लेकिन अब शॉर्ट करने से पहले मुझे कंफर्मेशन चाहिए। तो कंफर्मेशन के लिए मुझे यहां पर एक ऑर्डर ब्लॉक दिखाई दिया। देखिए यहां से एक डाउन साइड का इंपल्सिव मूव आया था। तो उससे पहले की जो कैंडल है उसके हाई एंड लो से रखते हुए मैंने [संगीत] एक एरिया ड्रॉ कर दिया और वो जो एरिया था वो था मेरा ऑर्डर ब्लॉक। और उसके बाद जैसे ही प्राइस हमारे ऑर्डर ब्लॉक के पास आई है। आप देख सकते हैं उसने एक इंपल्सिव डाउन साइड का मूव दिया है। तो हम क्या कर सकते थे? हम जैसे ही प्राइस 0.79 के लेवल के पास आती है, यहीं पर कहीं पे अपना शॉर्ट कर सकते थे। हमारा जो स्टॉप लॉस होता वो यह जो ऑर्डर ब्लॉक है इससे थोड़ा सा ऊपर होता और टारगेट के लिए हम 1:2 लेकर चल सकते थे या फिर यह जो स्विंग लो है हम यहां तक का भी टारगेट लेकर चलते तो ये भी एक अच्छा खासा टारगेट था। अब ये चीजें आप जितना ज्यादा प्रैक्टिस करोगे जितनी बार देखोगे कि हां भाई यहां पर सीआईएसडी है यहां पर ऑर्डर ब्लॉक है। यहां पर एफवीजी है तभी आपको ये चीजें समझ आएंगी। अगर सिर्फ एक एग्जांपल देख लोगे और सोचोगे कि मुझे सब क्लियर हो जाएगा तो पॉसिबल नहीं है। खुद से भी प्रैक्टिस करनी पड़ेगी। तो अब चलिए बात करते हैं स्टैंडर्ड डेविएशन की। तो स्टैंडर्ड डेविएशन से हम यह पता करने की कोशिश करते हैं कि प्राइस कहां तक रिट्रेस कर सकती है और कहां तक एक्सपेंड कर सकती है। देखो ओटी से हमने ये तो पता कर लिया कि प्राइस कहां से रिवर्स हो रही है। मतलब कहां से उसमें मूव आएगा। लेकिन कितना मूव आएगा, कहां तक प्राइस जाएगी यह हमें पता चलेगा स्टैंडर्ड डेविएशन से। अब यह जो स्टैंडर्ड डेविएशन है, इसके लिए भी हम फिबोनाची रिट्रेसमेंट टूल का ही यूज करते हैं। बस वहां पर हम थोड़ी बहुत सेटिंग्स चेंज कर लेते हैं। तो वो क्या सेटिंग्स हैं वो भी मैं आपको चार्ट में दिखाता हूं। और उसको यूज़ कैसे करना है ये भी चार्ट पे समझते हैं। तो स्टैंडर्ड डेविएशन को समझने के लिए यहां पर आप देख सकते हैं। मैंने एक प्लेन चार्ट ओपन कर रखा है। अब सबसे पहले मैं एंट्री प्लान कर रहाऊंगा। तो उसके लिए मैंने क्या किया होगा? मैं यहां पर गया और यहां पर जाने के बाद मैंने फिबोनाची रिट्रेसमेंट को सेलेक्ट किया। लो टू हाई इसको मार्क किया। ये था मेरा लो। ये था मेरा हाई और हाई से मैंने थोड़ा सा एक्सटेंड कर दिया। तो इस तरीके से मैंने मार्क किया। अब 0.62 के लेवल के पास मुझे एंट्री मिल गई होगी जो कि आप देख सकते हैं कई सारे कंफर्मेशन है। अभी उस पे ज्यादा डिटेल में नहीं जाते हैं क्योंकि हमें ये समझना है कि ठीक है हमें एंट्री तो मिल चुकी है। मैं यहां पे मार्क भी कर देता हूं हमारी जो एंट्री है हमें जो एंट्री है वो मान लेते हैं यहां पर मिल गई है। मैंने अपना जो स्टॉप लॉस है वो ये जो वन का लेवल है इससे थोड़ा सा नीचे रखा है क्योंकि छोटा सा ही था यहां पे हमारा जो स्टॉप लॉस था। तो अब मुझे समझना है कि भाई मेरा टारगेट कहां तक हो सकता है। तो इसके लिए हमें क्या करना है? ये तो मैंने मार्क कर लिया है। तो अब मुझे क्या करना है? अब मुझे इसकी सेटिंग्स चेंज कर लेनी है। और वो सेटिंग्स चेंज करने के लिए हम आ गए हैं सेटिंग्स पे। और सेटिंग पे जाने के बाद यहां पर हमें इसे मार्क कर लेना है इसे एज अ स्टैंडर्ड डेविएशन। तो स्टैंडर्ड डेविएशन के लिए हमने ये वाली सेटिंग्स मार्क करनी है -3, -2, -1, -1.5, 1, 0.5 और 0। जैसे ही यह मार्क करने के बाद हम ओके पे क्लिक करते हैं, तो अब आप देख सकते हैं कि आपका ये जो फिबोनाची रिट्रेसमेंट है, यह चेंज हो चुका होगा। और अब यह हमें बता रहा है कि हमारा जो टारगेट है वो सबसे पहले तो प्राइस जो है वो जीरो के लेवल पे जा सकती है और अगर इसके बाद जाती है तो -1 के लेवल तक भी जा सकती है। तो अब आप इस तरीके से अपना यहां पर जो टारगेट है उसको मार्क कर पाएंगे। तो इसके बाद देखते हैं कि प्राइस कहां तक गई थी। तो आप देख सकते हैं कि जो प्राइस है वो हमारे -1.5 के लेवल पे जाने के बाद रिवर्स हुई थी। तो इस तरीके से आप यहां पर स्टैंडर्ड डेविएशन को मार्क कर सकते हैं और अपना जो टारगेट है उसको प्लान कर सकते हैं। यह तो मैंने आपको बाय का एग्जांपल दिखाया। अब शॉर्ट का एग्जांपल भी देख लेते हैं। तो शॉर्ट करने के लिए हमें यहां पर प्लेन चार्ट दिखाई दे रहा था। हमने क्या किया? हमने हाई से लो तक हमने यह जो हमारा फिबोनाची रिट्रेसमेंट था इसको मार्क किया। जिसमें हमने जो लेवल्स डिसाइड कर रखे थे वो ओटीई के थे। अब हमें पता है कि प्राइस या तो 0.5 का जो लेवल है इसके बाद 0.62 से रिवर्स हो सकती है या 0.79 से रिवर्स हो सकती है। अब देखते हैं कि प्राइस कहां से रिवर्स हुई। देखिए 0.62 के लेवल से प्राइस यहां पर रिवर्स हो चुकी है। अब 0.62 के लेवल से जब प्राइस रिवर्स हो रही थी तो अब मुझे जानना है कि भाई यहां पर प्राइस जो है वो कहां तक जा सकती है। तो अब मैंने अपनी एंट्री मान लो किसी भी लॉजिक के बेसिस पे मैंने अपनी जो एंट्री है वो यहां 0.62 के लेवल के पास रख ली। मेरा जो स्टॉप लॉस रहेगा वो तो मुझे पता है कि ये जो हाई है इससे थोड़ा सा ऊपर यानी यहां पर कहीं पे मैं अपना स्टॉप लॉस रख सकता हूं। अब हमें टारगेट डिसाइड करना है। तो इसके लिए हम क्या करेंगे कि हम जाएंगे सेटिंग्स पे। सेटिंग्स पे जाने के बाद जो हमारी यहां पर सेटिंग्स हैं, कौन सी वाली? हमारी स्टैंडर्ड डेविएशन की जो सेटिंग्स हैं, हमने उसको मार्क कर देना है जो कि यहां पे मार्क हो चुकी है। बेसिकली मैंने क्या कर रखा है? मैंने यहां पे टेंप्लेट्स बना रखी हैं। आप भी यहां पर अपनी टेंप्लेट्स बना सकते हैं। अगर आप यहां पे टेंपलेट में जैसे स्टैंडर्ड डेविएशन सेलेक्ट करेंगे तो यहां से स्टैंडर्ड डेविएशन वाले मार्क्स हो जाएंगे। अगर हम यहां पर ओटीई सेलेक्ट करेंगे तो ओटीई मार्क हो जाएगा। अगर आप यहां पे प्रीमियम डिस्काउंट सेलेक्ट करेंगे तो वो भी मार्क हो सकता है। तो यहां से हमने स्टैंडर्ड डेविएशन वाले जो हमारे इस लेवल्स थे उनको मार्क कर दिया। उसके बाद ओके पे क्लिक कर दिया। अब देखिए ये हमें बता रहा है कि यहां पर आपने एंट्री तो ले ली है। अब आपका जो टारगेट होगा वो पहला टारगेट तो ये ज़ीरो के लेवल के पास हो सकता है। दूसरा टारगेट ये -1 का जो लेवल है यहां तक हो सकता है। तो चलिए देखते हैं कि जो -1 का लेवल है वहां तक प्राइस जाती है या नहीं जाती है। तो आप देख सकते हैं तो गाइस बिल्कुल -1 का जो लेवल है वहां तक गई है और इवन इसके आगे के भी क्या-क्या टारगेट्स हो सकते हैं वो भी आपको यहां पर दिखाई दे रहे हैं। तो इस तरीके से आप स्टैंडर्ड डेविएशन का अपने टारगेट्स डिसाइड करने के लिए यूज़ कर सकते हैं। तो अब चलिए एक फाइनल एग्जांपल देखते हैं जिसमें जो कुछ मैंने आपको सिखाया है सब कुछ को मिला के देखेंगे। वीडियो पसंद आ रही है तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर दीजिएगा। साथ ही डेल्टा एक्सचेंज में अकाउंट ओपन करने के बाद नीचे Google फॉर्म दे रखा है उसको जरूर फिल कर लीजिएगा। तो इस एग्जांपल को ध्यान से देखना। तो सबसे पहले समझिए ये हमें एक हाई दिखाई दे रहा था। यह हमें एक लो दिखाई दे रहा था। तो हमने क्या किया? हमने हाई एंड लो को मार्क कर लिया और उसके बाद हम वेट कर रहे थे कि अगर ऊपर की लिक्विडिटी स्वीप होगी तो हम शॉर्ट करने का ट्रेड लेंगे। नीचे की लिक्विडिटी स्वीप होगी तो हम बाय करने का ट्रेड लेंगे। इसके बाद हमें दिखाई देता है कि प्राइस जो है वो हमारे इस हाई को स्वीप कर देती है। स्वीप करने का मतलब यह है कि प्राइस इसके लेवल से ऊपर जाती है और वापस इसके नीचे आ जाती है जिससे यहां पर जिनके भी स्टॉप लॉस रहे होंगे उन सबके जो स्टॉप लॉस हैं वो हिट हो गए होंगे। तो अब जब यह हो जाता है तो हमें पता है कि हमें यहां पर अब शॉर्ट करने का ट्रेड लेना है। लेकिन वो शॉर्ट करने का ट्रेड हम लेंगे कैसे? तो इसके लिए हम वेट करते हैं कि भाई प्राइस थोड़ा नीचे आए एक लो बनाए जिससे हम अपना फिबोनाची रिट्रेसमेंट या कहें कि ओटीई लेवल को मार्क कर सकें। तो उसके बाद क्या होता है? प्राइस यहां से नीचे आती है और इस लेवल तक आ जाती है। अब जब प्राइस इस लेवल तक आती है, तो हम यह वाला जो हाई है, इस वाले हाई से यह वाला जो हमारा लो है, इस वाले लो तक अपना फिबोनाची रिट्रेसमेंट मार्क कर लेते हैं। यानी ओटीई को मार्क कर लेते हैं। और उसके बाद हमें दिखाई देता है कि जैसे ही प्राइस दोबारा से 0.62 के लेवल के पास आती है, हमें दिखाई देता है कि वहां से क्या है? वहां से प्राइस अब रिवर्स होने लगी है। तो हमें पता है कि 0.62 के लेवल से प्राइस रिवर्स हो सकती है। बस हमें उससे पहले एक कंफर्मेशन चाहिए था। तो वो जो कंफर्मेशन है वो हमें यहां पर दिखाई दिया डिस्प्लेसमेंट के रूप में। अब ये डिस्प्लेसमेंट क्या है? हम आपको पहले भी बता चुके हैं। बेसिकली ये वाला डिस्प्लेसमेंट एक ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर ही था। लेकिन जहां पे ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर हुआ है वहां पर एक एफवीजी बन रखा है। तो अगर एफजी के साथ ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर होता है तो उसको हम क्या बोलते हैं? उसको हम बोलते हैं डिस्प्लेसमेंट। [संगीत] तो यहां पर हमें एक डिस्प्लेसमेंट दिखाई दिया। इसलिए हमने 0.62 का जो लेवल था यहां पर अपना शॉर्ट करने का ट्रेड लिया। हमारा जो स्वीप वाला लेवल था उससे थोड़ा सा ऊपर हमने अपना स्टॉप लॉस रखा। और रही बात टारगेट की तो टारगेट के लिए हमने क्या किया? यह जो हमने यहां पर अपना फिबोनाची रिट्रेसमेंट मार्क कर रखा था इसकी ही सेटिंग्स को वापस चेंज किया और हमने इसको कर दिया यहां पर स्टैंडर्ड डेविएशन। तो जैसे ही हमने अपना स्टैंडर्ड डेविएशन मार्क किया तो उसके बाद पहला टारगेट हम अपना यह जो पहले ज़ीरो का लेवल था यहां तक रख सकते थे। लेकिन उसके बाद हमें पता है कि यहां पर लिक्विडिटी थी तो प्राइस इससे नीचे आएगी। इसलिए हमने अपना जो टारगेट था वो - 0.5 का लेवल रखा और आप देख सकते हैं प्राइस वहां पर आई थी और ऐसे हमारा जो टारगेट था वो हिट हो जाता। तो इस तरीके से आप ये सारे कांसेप्ट को एक साथ मिलाकर यूज़ कर सकते हैं। तो अब जब आपको ओटीई के कांसेप्ट समझ आ गए हैं तो अब मैं आपको बताता हूं मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस के बारे में। तो ये जो मल्टीपल टाइम फ्रेम है ना इसमें मैं आपको बताऊंगा कि हायर टाइम फ्रेम क्या होता है? लोअर टाइम फ्रेम क्या होता है? टॉप डाउन एनालिसिस क्या होता है? मार्केट में नैरेटिव क्या होता है? डायरेक्शन वाइज़ क्या होता है? और हायर टाइम फ्रेम टू लोअर टाइम फ्रेम एग्जीक्यूशन फ्रेमवर्क क्या है? ये सब कुछ बताने वाले हैं। जिसमें हमारा ऑब्जेक्ट है आपको यह सिखाना कि आप मार्केट को देखना कैसे है? सिर्फ ये ना समझे बल्कि मल्टीपल टाइम फ्रेम के थ्रू उन्हें रीड कैसे करना है? उसकी भाषा को कैसे समझना है ये आप समझ पाएं। क्योंकि होता क्या है ना कि जो ट्रेडर्स मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस नहीं करते हैं। वो जनरली क्या करते हैं? उन्होंने देखा कि भाई 5 मिनट का चार्ट खोला उसमें उन्हें कोई ना कोई एंट्री सेटअप दिख जाता है। कोई एफपीजी दिख गया, कोई ऑर्डर ब्लॉक दिख गया। उसके बेसिस पर उन्होंने ट्रेड ले लिया और ऐसे में उनके गलत निकलने के चांसेस बहुत ज्यादा हो जाते हैं क्योंकि उन्हें मार्केट का कॉन्टेक्स्ट ही नहीं पता है। उन्हें पता ही नहीं है कि मार्केट की एक्चुअल डायरेक्शन क्या है। क्योंकि 5 मिनट में जो चीज आप देख रहे हैं उसको समझने के लिए पहले आपको बड़े टाइम फ्रेम में मार्केट में क्या चल रहा है। ये समझना जरूरी है। जिसकी वजह से उनका जो बायस होता है कई बार वो गलत होता है। कई बार गलत डायरेक्शन में ट्रेड ले लेते हैं। जिसकी वजह से उन्हें अननेसेसरी लॉस हो जाता है। इसलिए एंट्री से पहले आपको अगर नरेटिव समझना है इसलिए आपको मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस करना होता है। अब सवाल उठता है कि यह मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस आखिर है क्या? तो देखिए ये एक प्रोसेस है जिसमें ट्रेडर मार्केट को अलग-अलग टाइम फ्रेम पे एनालाइज करता है और हर टाइम फ्रेम का अपना एक पर्पस होता है। जैसे एक टाइम फ्रेम के बेसिस पे वो मार्केट कांटेक्ट समझेगा। दूसरे टाइम फ्रेम पे हो सकता है वो बायस बनाएगा और तीसरे टाइम फ्रेम पे हो सकता है वो अपने ट्रेड्स को एग्जीक्यूट करेगा। अब मल्टीपल टाइम फ्रेम में वैसे तो आप कई सारे टाइम फ्रेम देखते हैं लेकिन दो टाइम फ्रेम आपको जनरली देखने ही हैं। जिसमें से एक होता है एसटीएफ और दूसरा होता है एलटीएफ। एचटीएफ का मतलब है हायर टाइम फ्रेम। मतलब वो बड़ा टाइम फ्रेम जिसमें आप चार्ट को देखेंगे वह मंथली भी हो सकता है, वीकली भी हो सकता है, डेली भी हो सकता है या फोर आवर भी हो सकता है। और छोटा टाइम फ्रेम जो कि 1 घंटा भी हो सकता है, 15 मिनट भी हो सकता है, 5 मिनट भी हो सकता है या 1 मिनट भी हो सकता है। यहां पर कोई फिक्स्ड रूल नहीं है। कई बार हो सकता है कि आपके लिए 1 घंटे का टाइम फ्रेम भी अगर आप 5 मिनट में ट्रेड करने के बारे में सोच रहे हो तो हो सकता है आपके लिए हायर टाइम फ्रेम 1 घंटे का हो। तो ये आपके केस टू केस डिफर करता है। लेकिन दोनों का पर्पस क्या है? देखिए हायर टाइम फ्रेम में मार्केट को देखने का पर्पस है मार्केट की डायरेक्शन को समझना। यहां पर लिक्विडिटी को पता करना। यहां पर मार्केट प्रीमियम में है डिस्काउंट में ये समझना। और जो मेजर पीओआई है यानी मेजर पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट है उनके बारे में जानना। जबकि जो छोटा टाइम फ्रेम है उसका पर्पस होता है मार्केट में ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर का पता करना, चेंज ऑफ करैक्टर का पता करना, एमएसएस का पता करना, सीएसडी, डिस्प्लेसमेंट, एफपीजी एग्जीक्यूशन यानी मेनली कहें तो एंट्री के बारे में पता करना। यानी जो हम एंट्री लेते हैं वो छोटे टाइम फ्रेम के बेसिस पे लेते हैं। लेकिन जो हम अपना पूरा बायस बनाते हैं वो बनाते हैं बड़े टाइम फ्रेम के बेसिस पे। इसलिए ये दो टाइम फ्रेम बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट होते हैं। अभी मैं ये सारी चीजें आपको चार्ट में भी दिखाने वाला हूं। तो डोंट वरी पहले थोड़ा बहुत आईडिया देना जरूरी है। फिर जब हम चार्ट में समझेंगे तो सारी चीजें आपको क्लियर होने लग जाएंगी। तो जैसा कि मैंने आपको बताया कि मार्केट में आपको दो चीजें देखनी है। एक है हायर टाइम फ्रेम, एक है छोटा टाइम फ्रेम। अब जो हायर टाइम फ्रेम होता है जनरली उसके बेसिस पे हम अपना बायस बनाते हैं। [संगीत] लेकिन इस बायस को बनाने से पहले या इवन ट्रेड लेने से पहले आपको अपने आप से कुछ क्वेश्चंस पूछने चाहिए। जैसे सबसे पहला सवाल आप अपने आप से पूछ सकते हैं कि यार ये जो चार्ट मैं देख रहा हूं ना इसको देखकर क्या लगता है मार्केट का अभी करंट स्ट्रक्चर क्या है? मार्केट बुलिश है या फिर बेयरिश है? दूसरा सवाल आपका हो सकता है कि मार्केट अभी प्रीमियम ज़ोन में है या फिर डिस्काउंट ज़ोन में है? तीसरा हो सकता है कि भाई मार्केट अभी कौन सी लिक्विडिटी को टारगेट कर सकता है? जैसे अगर ऊपर की साइड कोई लिक्विडिटी है, नीचे की साइड लिक्विडिटी है, मार्केट अभी यहां पर है। तो आपका आंसर क्या होगा कि मार्केट अभी ऊपर वाली लिक्विडिटी के पास है। तो शायद ऊपर वाली लिक्विडिटी को इस तरीके से टारगेट कर सकता है। और चौथा सवाल आपको अपने आप से पूछना चाहिए कि मार्केट में मेजर पीओआई कहां पर है? यानी कहां पर कोई हमें बड़ा फेयर वैल्यू गैप दिखाई दे रहा है? कहां पर कोई बड़ा ऑर्डर ब्लॉक दिखाई दे रहा है? तो जब ये चार सवालों के जवाब आप अपने आप को देने लगेंगे ना, तब आपको मार्केट में जो चीजें हैं वो क्लियर होने लग जाएंगी। अब इन सवालों के जवाब देने कैसे हैं? चलिए, एक-एक करके वह समझते हैं। लेकिन, उससे पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं, तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके अपना अकाउंट ओपन करते हैं, तो आपको हमारी तरफ से अधीराई का ₹20,000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलता है। उसके लिए डिस्क्रिप्शन में आपको Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। हमारे लिंक से अकाउंट ओपन करने के बाद वो Google फॉर्म भी जरूर फिल कर लीजिएगा। इसके अलावा अगर आप मार्केट का लाइव अपडेट चाहते हैं, जब मार्केट में जो चल रहा है, उसके बारे में हर टाइम जानना चाहते हैं, तो इसके लिए हमने एक प्राइवेट Telegram चैनल बना रखा है। उसको ज्वाइन करने के लिए भी हमने डिस्क्रिप्शन में जो फॉर्म दे रखा है, उसको जरूर फिल कर लीजिएगा। तो अब चलिए समझते हैं कि मार्केट में हम अपना नैरेटिव बनाते कैसे हैं। बेसिकली मार्केट नैरेटिव का मतलब होता है एक लॉजिकल एक्सप्लेनेशन जो बताता है कि मार्केट का नेक्स्ट ऑब्जेक्टिव क्या है? यानी मार्केट किस डायरेक्शन में जा सकता है। अब इसको हम मल्टीपल टाइम फ्रेम के थ्रू कैसे एनालाइज करेंगे? चलिए समझते हैं। देखिए यहां पर आपको सबसे पहले एक चार्ट दिखाई दे रहा है जिसमें हमें दिखाई देता है कि भाई ये एक स्विंग लो था। तो हमने क्या किया? हमने इससे लगते हुए एक लाइन ड्रॉ कर दी। ये क्या थी? ये थी हमारी लिक्विडिटी। अब उसके बाद हमें दिखाई देता है कि प्राइस ने ये जो नीचे वाली लिक्विडिटी है ना इसको स्वीप कर दिया है। तो अगर प्राइस ने नीचे वाली लिक्विडिटी को स्वीप कर दिया तो मैं आपको बहुत बार बता चुका हूं कि इसके बाद प्राइस के ऊपर जाने के चांसेस होते हैं क्योंकि नीचे वाले लोगों के स्टॉप लॉस हिट करवा दिए गए हैं। तो अब जैसे ही नीचे लोगों के स्टॉप लॉस हिट करवा दिए जाते हैं तो उसके बाद आप देख सकते हैं कि यहां पर इसके बाद इस वाले चार्ट पे आना है। यहां पर आप देख सकते हैं कि प्राइस बढ़ने लगती है और उसके बाद दोबारा से हमें यहां पर एक और स्वीप होता हुआ नजर आता है और इसके बाद जब स्वीप हो जाता है फिर आप देख सकते हैं कि यहां से प्राइस बढ़ने लगती है और यह जो स्वीप हुआ है यहां पर जो आप देख रहे हैं ये हमें दिखाई दे रहा है कि भाई डिस्काउंट ज़ोन के पास हुआ है। तो अब जब हमें बाय करना है तो हमें डिस्काउंट ज़ोन के पास बाय करना है। तो इसलिए यहां पर हमें काफी सारी चीजें देखने को मिल रही हैं। और ये सब इसीलिए हो पा रहा है क्योंकि हम अलग-अलग टाइम फ्रेम में एक चार्ट को देख रहे हैं। तो अब चलिए सीधा चार्ट पे चलते हैं और वहां पर मैं आपको दिखाता हूं कि ये जो मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस है ये करना कैसे है। तो अभी मैं आपको बिल्कुल करंट एग्जांपल दिखाता हूं जो अभी मार्केट में चल रहा है वो समझाता हूं। देखिए सबसे पहले हमें एक हायर टाइम फ्रेम लेना होता है। जो कि मैं आपको बता चुका हूं कि अगर मान लो 15 मिनट के टाइम फ्रेम में ट्रेड करना है तो 4 घंटे का आपका हायर टाइम फ्रेम हो सकता है। 15 मिनट आपका लोअर टाइम फ्रेम हो सकता है। 4 घंटे के टाइम फ्रेम में आप अपना बायस बनाओगे। 15 मिनट के टाइम फ्रेम पे आप अपनी एंट्री प्लान करोगे। अब ऐसे ही देखो यहां पर मैंने डेली टाइम फ्रेम को पकड़ रखा है जो कि मेरा हायर टाइम फ्रेम है। तो अब छोटा टाइम फ्रेम मेरा 1 घंटे का टाइम फ्रेम हो सकता है। तो सबसे पहले अगर मैं हायर टाइम फ्रेम डेली टाइम फ्रेम लेकर चल रहा हूं तो सबसे पहले मुझे अपना यहां पर बायस बनाना है। बायस बनाने का मतलब है मुझे ये समझना है कि यहां से मार्केट ऊपर जाएगा या नीचे जाएगा। तो अब यहां पर मुझे क्या दिखाई दे रहा है? सबसे पहले देखिए मुझे दिखाई दे रहा है कि मार्केट का जो ट्रेंड है यह डाउन ट्रेंड चल रहा है काफी लंबे टाइम से जो कि हम डेली टाइम फ्रेम देख रहे हैं। इसके बाद अगर मैं यहां पर ध्यान से देखूं तो एक चीज है जिसको मैं इग्नोर नहीं कर पा रहा हूं और वो है यहां पर एक फेयर वैल्यू गैप। अब ये फेयर वैल्यू गैप क्या होता है ये मैं आपको पहले ही बता चुका हूं। जब भी कोई नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल देखने को मिलती है तो उससे पहले वाली कैंडल यानी इस कैंडल के लो से लगते हुए उसके बाद वाली कैंडल यानी ये वाली कैंडल के हाई से लगते [संगीत] हुए हमें एरिया ड्रॉ करते हैं जो कि होता है हमारा फेयर वैल्यू गैप। तो अब ये कौन सा फेयर वैल्यू गैप है? यह है एक बेयरिश फेयर वैल्यू गैप। यानी अभी यहां पर देख के मुझे यह समझ आ रहा है जो मेरा बायस बन रहा है वो ये है कि अगर प्राइस इस फेयर वैल्यू गैप के पास आती है तो यहां से रिवर्स होने के चांसेस होंगे क्योंकि एक हायर टाइम फ्रेम में यहां पर एक मेजर हमें फेयर वैल्यू गैप देखने को मिल रहा है। यानी यहां से मेरा बायस ये बन रहा है कि प्राइस पहले थोड़ा सा ऊपर जा सकती है। इस लेवल के पास जाएगी और फिर यहां से रिवर्स होने के चांसेस हो सकते हैं। तो इससे मैंने यहां पर क्या समझा? मैंने यह समझा कि मेरा बायस अभी थोड़ा सा बेयरिश साइड पर है। तो अभी अगर मैं 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे अपने ट्रेड को प्लान करने जा रहा हूं तो मैं कोई रैंडम ट्रेड नहीं लूंगा। मैं वेट करूंगा कि प्राइस इस लेवल के पास आए। यहां से थोड़े से रिवर्सल के सिग्नल मुझे दिखने लगे तब जाके मैं अपने ट्रेड को प्लान करूंगा। तो ये तो मैंने हायर टाइम फ्रेम पे देखा। अब मुझे एंट्री जो लेनी है वो मुझे लोअर टाइम फ्रेम पे लेनी होती है। तो जैसे मैं डेली टाइम फ्रेम लेके चल रहा हूं तो मेरा जो लोअर टाइम फ्रेम हो सकता है वो हो सकता है 1 घंटे का टाइम फ्रेम। तो यहां से मैंने वन ऑवर का टाइम फ्रेम सेलेक्ट कर लिया। अब जब मैंने वन ऑवर का टाइम फ्रेम सेलेक्ट किया तो अब आप देखेंगे कि हमने क्या प्लान किया है। हमने प्लान किया है कि भाई जब प्राइस इस लेवल पे आएगी तब जाके हम अपनी कुछ ना कुछ एंट्री प्लान करेंगे। तो अभी प्राइस उस लेवल पे आई ही नहीं है। तो अभी मैं कुछ एंट्री आपको प्लान करके दिखा ही नहीं सकता हूं। तो इसलिए मैं पीछे के कुछ एग्जांपल लेके चलता हूं। जहां पर मैं आपको बुलिश और बेरिश दोनों एग्जांपल दूंगा। तो अब चलिए सबसे पहले मैं आपको एक बुलिश केस का एग्जांपल देता हूं। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि मैं गया हूं सबसे पहले डेली टाइम फ्रेम पे। देखिए टाइम फ्रेम का मैं आपको पहले भी क्लियर कर चुका हूं कि कोई फिक्स नहीं है। आप अपने हिसाब से टाइम फ्रेम यूज़ कर सकते हैं। लेकिन आपको एटलीस्ट दो टाइम फ्रेम यूज़ करना है। तो हम गए सबसे पहले डेली टाइम फ्रेम पे और हमने देखा कि भाई डेली टाइम फ्रेम में लो कौन सा है। तो हमें दिखाई दिया कि भ ये लो था। तो इस लो से लगते हुए मैंने एक लाइन मार्क कर दी और उसके बाद आप देख सकते हैं कि जिस टाइम पर मैं ट्रेड प्लान कर रहा हूं उस जगह पर आप देख सकते हैं कि प्राइस ने ये जो नीचे की लिक्विडिटी है इसको स्वीप किया है। मतलब प्राइस पहले इस लेवल के नीचे गई है और उसके बाद ऊपर आके क्लोजिंग दिया है। तो अगर नीचे की लिक्विडिटी स्वीप होती है तो हम बाय करने का ट्रेड प्लान करते हैं। तो [संगीत] यहां से मेरा एक बायस बना है जो कि मैंने डेली टाइम फ्रेम को एक बार देख लिया जिससे मुझे थोड़ा बहुत आईडिया लग गया। अब इसके बाद मैं आ गया जी 4 ऑवर के टाइम फ्रेम पे। मैं मेनली वैसे फोर आवर्स से जाने वाला था लेकिन मैंने कहा एक बार डेली टाइम फ्रेम भी देख लेते हैं। आप भी ऐसा कीजिए। ऐसा नहीं है कि दो ही टाइम फ्रेम पर करना है। अगर आपको एक टाइम फ्रेम से आईडिया नहीं लग रहा तो आप उससे बड़ा टाइम फ्रेम उससे छोटा टाइम फ्रेम ट्राई करके देखें। ऐसे ही एंट्री में भी अगर मान लो आपको 15 मिनट में एंट्री नहीं मिल रही। 5 मिनट पे देखो। 5 मिनट में नहीं मिल रही 15 मिनट पे देखो। कुछ ना कुछ आपको चीजें ट्राई करके देखनी पड़ेंगी। तो अब हमने यहां पे क्या किया? हमने हमें यह तो पता है कि भाई नीचे की जो लिक्विडिटी है वो स्वीप हो चुकी है। तो यहां पर बाय करने की पोजीशन हमारी बन सकती है। उसके बाद हमें दिखाई देता है कि भाई यहां पर एक फोर ऑवर का ऑर्डर ब्लॉक बन रखा है। देखिए यहां से एक इंपल्सिव अपसाइड का मूव आया है तो उससे पहले वाली कैंडल जो है उसके हाई एंड लो से लगते हुए हमने एक एरिया ड्रॉ किया है जो कि क्या है जो कि है हमारा फोर आवर का ऑर्डर ब्लॉक। अब अगर मान लीजिए दोबारा से प्राइस इस लेवल पे आती है तो यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होते हैं जो कि हमने आपको पहले भी कई बार बताया है। इसके अलावा जब मैं 4 ऑवर का टाइम फ्रेम देख रहा था तो मुझे दिखाई देता है कि फोर ऑवर के ऊपर भी एक लिक्विडिटी लेवल है तो प्राइस क्या कर सकती है प्राइस पहले इस लिक्विडिटी को लेगी और यहां से बढ़ने के चांसेस होंगे। यानी हमें यहां पर काफी सारी चीजें देखने को मिल रही हैं। हमें पहले बायस क्लियर हुआ डेली टाइम फ्रेम पे। दूसरा हमें यहां पर भी दिखाई दे रहा है कि प्राइस कहां पर आने के बाद मूव ले सकती है। तीसरा हमें यह भी पता है कि यहां पर लिक्विडिटी है तो प्राइस इस लिक्विडिटी को भी ले सकती है। तो अब चलिए छोटे टाइम फ्रेम में चलते हैं जो कि हमारा 15 मिनट का टाइम फ्रेम है। तो अब जब हम 15 मिनट के टाइम फ्रेम में आते हैं तो उसके बाद हमें वेट करना होता है। जैसे ही हम वेट करते हैं तो हम देखते हैं कि प्राइस जो है ये बिल्कुल 4 ऑवर का जो हमारा ऑर्डर ब्लॉक था यहां से रिवर्स करने लग जाती है। अब सोचो एक बंदा जो 15 मिनट के टाइम फ्रेम में ही सीधा पहली बार चार्ट को देखता तो उसको क्या दिखता? उसको दिखता कि भाई यहां पर है ऑर्डर ब्लॉक। क्योंकि उसने ये सब तो देखा ही नहीं। उसको ये वाला ऑर्डर ब्लॉक दिखता। वो क्या करता? यहीं पर अपनी एंट्री मार्क करके रखता। प्राइस इस लेवल पे आती वो यहीं पर अपना ट्रेड ले लेता। थोड़ा सा नीचे स्टॉप लॉस रखता और पहले उसका स्टॉप लॉस हिट हो जाता और उसके बाद प्राइस बढ़ती। यानी इसलिए हमारे लिए बड़ा टाइम फ्रेम देखना जरूरी है क्योंकि मैं आपको पहले भी बता चुका हूं कि जो बड़ा टाइम फ्रेम है वो हमेशा छोटे टाइम फ्रेम से ज्यादा इंपॉर्टेंट होता है। इसलिए बड़े टाइम फ्रेम को हमेशा देखना है। तो अब जब हम 15 मिनट के टाइम फ्रेम पे आ चुके हैं तो हमें यहां पर एंट्री ढूंढनी है। सारी चीजें हमें क्लियर है तो एंट्री के लिए हमें बहुत सारी चीजें देखने को मिल सकती हैं। हो सकता है आपको एफपीजी देखने को मिल रहा हो। हो सकता है आपको ऑर्डर ब्लॉक देखने को मिले। आपको जो देखने को मिल रहा है आप उसके बेसिस पे एंट्री प्लान कर सकते हैं। जैसे यहां पर हमें एक सीआईएसडी भी दिखाई दे रहा है। मैंने आपको बताया कि जब भी इंपल्सिव डाउन साइड का मूव आता है हमने उससे पहले वाली कैंडल के क्लोज से लगते हुए इस तरीके से एक लाइन ड्रॉ कर लेनी है। ये क्या होती है? ये होती है हमारी सीआईएसडी लाइन। तो हमें [संगीत] यहां पर दिखाई दिया था दो रेड कैंडल बनी थी। तो उससे पहले वाली कैंडल के क्लोज से लगते हुए मैंने एक लाइन ड्रॉ कर दी जो कि मेरी सीएसडी लाइन है। प्राइस ने जैसे ही इस लाइन के ऊपर को क्लोजिंग दी है तो यहां पर हमारा सीआईएसडी कंफर्म हो गया है। अब अगर प्राइस दोबारा से इस लेवल पे आती है तो यहां पर मैं अपनी बाय करने की एंट्री ले सकता हूं। मेरा जो स्टॉप लॉस रहेगा वो ये वाला जो लेवल है इससे थोड़ा सा नीचे रहेगा और टारगेट मैं 1:2 प्लान कर सकता हूं। तो अब इसके बाद देखते हैं कि क्या होता है। तो यहां पर आप देख सकते हैं। हम इसके बाद काफी देर तक वेट करते हैं। लेकिन आगे जाके हमें यहां पर एंट्री मिल जाती। जैसे मैं लाइन को यहां पर एक्सटेंड करूंगा तो अब आपको दिखाई दे रहा है कि हमें इस जगह पर एग्जैक्टली एंट्री मिल गई होती। तो हम यहां पे अपनी लॉन्ग करने की एंट्री लेते। इस तरीके से अपना जो स्टॉप लॉस था वो ये वाला जो हमारा लो है इससे थोड़ा सा नीचे यानी करीब-करीब यहीं पर हम अपना लो रखते। और रही बात टारगेट की तो 1:2 का हमारा जो टारगेट है हम वो लेकर चल सकते थे। तो हमारा 1:2 करीब-करीब यहां पर बनता है। तो अब चलिए देखते हैं कि इसके बाद क्या हुआ था मार्केट में। तो अब देखिए जब हमें एंट्री मिल गई थी तो उसके बाद प्राइस थोड़ा ऊपर गई लेकिन फिर नीचे आई। अब ऐसे में हमारा जो स्टॉप लॉस होता है ना वो बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट होता है। हमें जो ये वाला लो नजर आ रहा था उससे थोड़ा सा मार्जिन छोड़ के मैंने अपना स्टॉप लॉस रखा। इसलिए मेरा जो स्टॉप लॉस था वो हिट नहीं हुआ। अदरवाइज अगर मैंने बिल्कुल ये वाला जो लेवल था इसके आसपास या हल्का पास भी रखा होता तो भी मेरा स्टॉप लॉस हिट हो जाता। और उसके बाद आप देख सकते हैं कि यहां पर स्टॉप लॉस हमारा हिट होने से बचा और इसके बाद आप देखेंगे कि जैसे ही मार्केट ने यह वाला लेवल खा लिया उसके बाद हमें ऊपर का पूरा अच्छा खासा मूव देखने को मिला है। यानी हमारा जो टारगेट था वो हमें मिल गया होता। तो चलिए अब एक शॉर्ट करने का एग्जांपल देखते हैं। तो यहां पर सबसे पहले मैं डेली टाइम फ्रेम पे आ रखा हूं और हमें साफ दिखाई दे रहा है कि मार्केट में क्या चल रहा है? मार्केट में डाउन ट्रेंड चल रहा है। तो यहां पर हमें पता है कि डाउन ट्रेंड चल रहा है। तो हमें शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान करना चाहिए। लेकिन अभी से हमने बायस नहीं बनाया। हमने यहां पर देखा कि पिछला जो दिन था यानी इससे पहले वाला जो दिन था उसमें क्या हुआ था उसमें हमने हाई मार्क किया लो मार्क किया लेकिन आज वाला जो दिन है यानी ये जो कैंडल है अब क्योंकि डेली टाइम फ्रेम लेके चल रहे हैं तो एक जो कैंडल है ये पूरे दिन की कैंडल है तो ये वाली जो कैंडल है इसने इसका हाई स्वीप कर लिया किसका हाई स्वीप किया पिछले वाले दिन की जो कैंडल है उसका हाई स्वीप किया गया [संगीत] है यहां पर आप देख सकते हैं ये हाई था प्राइस इससे ऊपर गई फिर उसने नीचे क्लोजिंग दे दी है तो इसका हाई स्वीप हो चुका है तो हमने आपको एक सीआरटी के बारे में पहले कभी भी बताया है। तो अगर आपको वो याद होगा तो वो वाला कांसेप्ट हम यहां पे अप्लाई कर रहे हैं। तो जैसे ही हाई स्वीप हो गया तो अब हम क्या करेंगे? अब हम शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान कर सकते हैं। तो सबसे पहली चीज हमें यह समझ आई है तो हमारा बायस जो है वो शॉर्ट करने का ही यहां पर बना है। अब इसके बाद हम जाते हैं 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे। अब जैसे ही मैं 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे आता हूं तो यहां पे मुझे क्या दिखाई देता है कि यहां पर मुझे दिखाई देता है कि यहां पे तो एक ऑर्डर ब्लॉक है। यहां पे देखिए एक इंपल्सिव डाउन साइड का मूव आया था और यहां पे मुझे एक ऑर्डर ब्लॉक दिखाई दिया। तो अब अगर आप 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे ट्रेड लेना चाहते थे तो आपका बायस तो क्लियर है। तो अब आपको 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे यहां पर एक ऑर्डर ब्लॉक दिखाई दे रहा है। तो जैसे ही प्राइस ये ऑर्डर ब्लॉक के पास आई थी आप यहां पर कहीं पे अपना एंट्री ले सकते थे। आपका जो स्टॉप लॉस होता वो ये जो हाई है इससे थोड़ा सा ऊपर होता। यानी इस जगह पर आपकी एंट्री कुछ इस तरीके से बनती जिसमें आपका जो स्टॉप लॉस था वो करीब-करीब यहां पर होता और टारगेट जो था वो 1:2 के हिसाब से आप प्लान कर सकते थे। यह अगर आप वन ऑवर के टाइम फ्रेम पे आए होते। लेकिन अगर मान लीजिए आप और छोटे टाइम फ्रेम पे एंट्री लेना चाहते हैं तो आप क्या कर सकते हैं? अब आप 5 मिनट या 15 मिनट के टाइम फ्रेम पे जाकर भी देख सकते हैं। जैसे इसके बाद में आया 5 मिनट के टाइम फ्रेम पे। तो 5 मिनट के टाइम फ्रेम में हमें दिखाई देता है कि प्राइस जो है वो ऑर्डर ब्लॉक को टैप करके अगर मान लो आगे निकल गई होती तब आप एंट्री करना चाह रहे हैं। तो आप छोटे टाइम फ्रेम में आ गए। वहां पर आपने देखा कि क्या कोई कंफर्मेशन मिल रहा है? तो प्राइस जो है वो ऑर्डर ब्लॉक के पे टैप करके नीचे आई है। तो हमने क्या किया? हमने यहां पर एक सीआईडी मार्क किया। देखिए यहां पर एक बड़ी ग्रीन कैंडल थी। तो उससे पहले वाली कैंडल यानी ये जो रेड कैंडल है इसके क्लोज से लगते हुए मैंने लाइन ड्रॉ कर दी जो कि मेरी सीआईएसडी लाइन है। जैसे ही प्राइस ने इसके नीचे क्लोजिंग दी है तो मेरा जो सीआईएसडी है वो कंफर्म हो चुका है। अब अगर प्राइस दोबारा से इस लेवल पे आती है तो यहां पर मैं अपनी एंट्री प्लान कर सकता हूं। तो अब एंट्री कैसे होती मेरी? तो वो देखिए यहां पर अगर प्राइस आती तो मेरी एंट्री होती। मेरा जो स्टॉप लॉस रहता वो इस हाई के थोड़ा सा ऊपर रहता और टारगेट के लिए मैं अगेन 1:2 लेके जाता। तो मेरा जो 1:2 था वो करीब-करीब यहां पे [संगीत] बन रहा है। तो अब देखते हैं कि इसके बाद हमारा ट्रेड में क्या होता। देखिए आप देख सकते हैं कि यहां पर हमारी एंट्री हो गई होती। इसके बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस जो है वो नीचे आई थी और यहां पर हमारा जो टारगेट था वो आराम से अचीव हो गया होता। तो इस तरीके से आप हायर टू लोअर टाइम फ्रेम एनालिसिस कर सकते हैं। तो अब मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस के बादेंस ऑफ टाइम एंड ट्रेडिंग के बारे में भी जान लेते हैं। तो देखिए जो नॉर्मल ट्रेडर्स होते हैं, रिटेल ट्रेडर्स होते हैं वो क्या देखते हैं कि जब भी सेटअप बना वो वहां पर अपना ट्रेड प्लान कर लेते हैं और कई बार हो सकता है कि उनकी स्ट्रेटजी सही थी। लेकिन उनकी टाइमिंग गलत थी जिसकी वजह से उन्हें नुकसान हुआ है। क्योंकि ट्रेडिंग में सिर्फ यह जरूरी नहीं है कि आप क्या ट्रेड ले रहे हैं बल्कि यह भी जरूरी है कि आप कब ट्रेड ले रहे हैं क्योंकि अगर आप ऐसे टाइम पे ट्रेड लेंगे जब बड़े इंस्टीटशंस भी मार्केट में इनवॉल्व हैं। यानी मार्केट में बड़ी एक्टिविटी हो रही है तो आपके सेटअप के सही निकलने के जो चांसेस होंगे वो ज्यादा हो जाएंगे। मार्केट में जो वोलेटिलिटी होगी वो ज्यादा होगी। यानी आपको हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप्स मिलेंगे। लेकिन अगर आप किसी ऐसे टाइम पर ट्रेड ले रहे हैं जब मार्केट में कुछ खास एक्टिविटी नहीं है तो फिर भले ही आपकी स्ट्रेटजी सही हो लेकिन आपका जो सेटअप है ना वो एक वीक सेटअप बन जाता है और ऐसे टाइम पे आपकी स्ट्रेटजी के फेल होने के जो चांसेस होते हैं वो बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसलिए ये जो टाइम है ये बहुत ज्यादा मैटर करता है और ट्रेडिंग में इस टाइम को हम अलग-अलग तरीके से बांटते हैं जिनको हम सेशंस कहते हैं। अब बेसिकली मार्केट में आपको तीन तरह के सेशंस देखने को मिलते हैं। तो इसमें जो पहला सेशन है वो है एशिया सेशन, दूसरा है लंदन सेशन और तीसरा है न्यूयॉर्क सेशन। अब इस मार्केट को जो कि 24 घंटे चलते हैं इनको तीन अलग-अलग सेशंस में डिवाइड करने का मेजर रीजन क्या है? मेजर रीजन ये है कि एक ऐसा सेशन है जहां पर मार्केट में ज्यादा एक्टिविटी नहीं होती है। और वो है एशिया सेशन। इसके पीछे रीज़न क्या है? रीज़न ये है कि देखिए दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट कौन सा है? न्यूयॉर्क का मार्केट है। दूसरा दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट कौन सा है? यूरोप का मार्केट है और सबसे छोटा मार्केट अगर हम कहेंगे तो वो एशिया का मार्केट है और वो इतना छोटा है कि जो एशिया सेशन हम लेके चल रहे हैं ना इसमें हमने ऑस्ट्रेलियन सेशन को भी इनवॉल्व कर लिया है। तब जाके भी ये मार्केट बहुत ज्यादा छोटा है। इसलिए यहां पर मार्केट में हमें बहुत ज्यादा एक्टिविटी देखने को नहीं मिलती है एज कंपेयर टू न्यूयॉर्क और लंदन सेशन। तो माना ये जाता है कि मार्केट में जो सबसे बड़े मूव्स आते हैं वो आते हैं न्यूयॉर्क सेशन में। उससे थोड़े-छोटे जो मूव्स मार्केट में आते हैं वो आते हैं लंदन सेशन में और एशिया सेशन में तो जनरली मार्केट साइडवेज चलता है। ऐसा एक ओवरऑल व्यू है ग्लोबल मार्केट के बारे में। अब चलिए इन तीनों सेशंस को एक-एक करके समझते हैं क्योंकि ऐसा नहीं है कि एशिया सेशन में मार्केट साइडवेज चल रहा है तो ये बिल्कुल बेकार है। इवन ये हमारे सबसे ज्यादा काम का भी हो सकता है क्योंकि यहां पर हमें कई सारे ऐसे लेवल्स मिलते हैं जिनके बेसिस पे हम अपना ट्रेड प्लान कर सकते हैं। तो अब चलिए सबसे पहले बात करते हैं एशिया सेशन की। अब अगर आप कोई भी सेशन को समझना चाहते हैं या फिर अभी जब मैं ये वीडियो बना रहा हूं उस टाइम पर मार्केट पे कौन सा सेशन चल रहा है ये आप देखना चाहते हैं तो वैसे तो जब आपको एक्सपीरियंस हो जाएगा जब आपको नॉलेज हो जाएगी तो आपको पता होगा कि अभी लंदन सेशन हमारा चल रहा है। न्यूयॉर्क सेशन हमारा शायद शुरू होने वाला है या आई थिंक शुरू हो चुका होगा। 5:30 बजे शुरू हो जाता है। अभी मैं 5:55 पे इस वीडियो को शूट कर रहा हूं। तो हमारा न्यूयॉर्क सेशन शुरू हो चुका है जो कि मुझे पता है। लेकिन अगर शुरुआत में आपको नॉलेज नहीं है तो एक वेबसाइट है बेबी पिप्स करके। आपने इस वेबसाइट पे जाना है और यहां पर जाने के बाद टूल्स पे जैसे ही आप जाएंगे तो यहां पर आपको एक फॉरेक्स मार्केट आवर्स का ऑप्शन देखने को मिलता है। आपने इस पे क्लिक कर देना है। जैसे ही आप इस पे क्लिक करते हैं तो उसके बाद आप इस पेज पे पहुंच जाते हैं और इस पेज में आपको पता चलता है कि अभी कौन सा सेशन चल रहा है। जैसे अभी हमें दिखाई दे रहा है कि ये जो न्यूयॉर्क सेशन है ये 5:30 स्टार्ट हो चुका है। इंडियन टाइम के हिसाब से जबकि यूएस के हिसाब से कुछ और टाइम चल रहा होगा। तो अब जब आप किसी भी सेशन को पता करना चाहते हैं तो यहां पर आपको दिखाई दे रहे हैं कि यहां पे चार सेशंस हैं। बेसिकली यहां पर जो एशिया सेशन है उसको टोक्यो एंड सिडनी सेशन को मिलाकर यहां पे एशिया सेशन कहा गया है। लंदन सेशन अलग है, न्यूयॉर्क सेशन अलग है। तो ये दोनों जो हैं इन दोनों सेशन का जब टाइमिंग चल रही होगी तो आप कह सकते हैं कि अभी एशिया सेशन चल रहा है। और जब एशिया सेशन का एंड होता है उससे 1 घंटे पहले ही हमारा जो लंदन सेशन है वो स्टार्ट हो जाता है और फिर न्यूयॉर्क सेशन हमारा जो है वो लंदन सेशन और न्यूयॉर्क सेशन की जो टाइमिंग है वो काफी हद तक मैच हो जाती है। तो अब यहां पर सबसे पहले समझना है कि भाई हमारा जो एशिया सेशन है वो इंडियन टाइम के हिसाब से कब शुरू होता है। अगर आप मान लीजिए पाकिस्तान या किसी और कंट्री से वीडियो देख रहे हैं तो आप यहां पर जाएंगे जब भी आप इस वेबसाइट पे जाएंगे तो वो आपके हिसाब से आपको टाइम बता देगा। ये स्पों्सर्ड नहीं है। मैं यूज़ करता हूं इसलिए आपको बता रहा हूं। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि जो एशिया सेशन की शुरुआत होती है वो होती है रात के 2:30 बजे। जब इंडिया में रात का 2:30 बज रहा होता है तब सिडनी का जो सेशन है वो शुरू हो जाता है। अब इसको भी हम एशिया सेशन ही मानते हैं। इसके बाद सुबह जब इंडिया में 5:30 हो रहे होते हैं तब टोक्यो का मार्केट भी खुल जाता है तो वो भी एशिया सेशन के अंदर ही आ जाता है। यानी अगर हम देखें तो रात के 2:30 बजे से लेके दोपहर के 2:30 बजे के बीच का जो ये टाइम है इसमें टोटल ये जो 12 घंटे हैं इसमें हमारा सिडनी और टोक्यो का मार्केट चलता है। जिसमें हम कहते हैं कि मार्केट जनरली साइडवेज रहता है। क्योंकि अगर आप नीचे देखेंगे यह जो आपको दिखाई दे रहा है इस टाइम पीरियड में सबसे कम वॉल्यूम होता है मार्केट में। तो अगर आप यह टाइम देखेंगे जब तक हमारा टोक्यो का सेशन चल रहा है तो आप देखेंगे कि सबसे कम एक्टिविटी है। आप यहां पर देख सकते हैं। बीच [नाक से की जाने वाली आवाज़] में थोड़ी बहुत एक्टिविटी बढ़ रही है लेकिन वो भी बहुत ही कम है। एज कंपेयर टू जब हम न्यूयॉर्क या लंदन सेशन को देखते हैं। तो वैसे तो देखिए पूरे 12 घंटे थे जिस टाइम पीरियड में जो मार्केट है वो साइडवेज रहता है। लेकिन टोक्यो सेशन और लंदन सेशन का जो टाइम है वो ओवरलैप करता है। जो कि आज के टाइम पर दोपहर 12:30 बजे स्टार्ट हो जाता है। तो यहां पर आप देख सकते हैं 12:30 लंदन सेशन शुरू हो रहा है और यहां पर अगर आप देखेंगे तो जैसे ही लंदन सेशन शुरू हुआ है ना तो यहां पर आप देखेंगे कि मार्केट में वॉल्यूम जो है वो बढ़ने लगता है। तो लंदन सेशन दोपहर के 12:00 बजे शुरू हो रहा है। उसके बाद आप देख सकते हैं मार्केट में वॉल्यूम अच्छा खासा बढ़ जाता है। थोड़ा बहुत शाम के 4:00 बजे वॉल्यूम कम होता है। लेकिन उसके बाद आप देखेंगे कि शाम के 5:30 न्यूयॉर्क सेशन ओपन हो जाता है। अब जैसे ही न्यूयॉर्क सेशन ओपन होता है उस टाइम पर मार्केट में सबसे ज्यादा वॉल्यूम होता है। इसलिए मार्केट में जो सबसे बड़े मूव्स हैं, वह हमें इस टाइम पर ही दिखने के चांसेस होते हैं। इसके बाद ही आप देख सकते हैं कि रात के 10 11:00 तक जो टाइमिंग है इंडिया के हिसाब से तब मार्केट में ठीक-ठाक वॉल्यूम रहता है। यानी अगर हम कहें कि मार्केट में ट्रेड करने का सबसे बेटर टाइम कौन सा है? तो हम कहेंगे कि भाई जब मार्केट में सबसे ज्यादा मूवमेंट है तभी तो ट्रेड करना चाहिए। तो वो मूवमेंट हमें दोपहर के 12:30 से लेके रात के हम कह सकते हैं कि 11 12 11:30 तक देखने को मिलने के चांसेस जो होते हैं वो ज्यादा होते हैं। इसलिए ये जो टाइम है ये ट्रेडिंग के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है। अब अगर आप इन जनरल आप मुझसे पूछेंगे कि भाई किस टाइम पर ट्रेड नहीं करना चाहिए तो मैं आपको कहूंगा कि ये जो एशिया सेशन का टाइम है इस टाइम पीरियड पे ट्रेड अवॉइड करोगे तो बेटर रहेगा। आप मुझसे पूछेंगे कि भाई इन जनरल बता दो कि कौन से टाइम पे ट्रेड करना सही रहेगा या सेटअप बन रहा है तो ट्रेड ले लेना चाहिए। तो वो मैं आपको कहूंगा कि भाई ये जो हमारा लंदन सेशन जब शुरू हो रहा है मतलब दोपहर के 12:30 से रात के 12:30 तक का जो टाइम है इस टाइम पीरियड में अगर आप ट्रेड लेंगे तो आपके ट्रेड के सही निकलने के जो चांसेस होंगे वो ज्यादा होंगे। लेकिन इसमें भी अगर आप कहेंगे कि नहीं मुझे तो एकद घंटे बताओ। वो टाइम बताओ जिस टाइम पर सबसे बेस्ट वॉल्यूम है और सबसे सही मूव मुझे मार्केट में देखने को मिल सकते हैं। तो वो जो टाइम पीरियड है ना यह ICT ने हमें बताया है जिसको कहा गया है किल ज़ों्स। यानी आईसीटी में किल जोन ऐसे कुछ घंटे हमें बताए गए हैं जब मार्केट में सबसे ज्यादा एक्टिविटी होती है और सबसे ज्यादा मूव आने के चांसेस होते हैं। तो चलिए अब उसके बारे में बात करते हैं। लेकिन उससे पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अकाउंट ओपन कर सकते हैं। यह इंडिया में एफआई रजिस्टर्ड है। मैं खुद भी इसका यूज़ करता हूं। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके अपना अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से अधीरा एi का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलता है। उसके लिए नीचे Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। उसको जरूर फिल कीजिएगा। वहां पर यूजर आईडी और अपना जो मोबाइल नंबर है उसको सही डालिएगा। तो किल ज़ोन मार्केट के वो स्पेसिफिक टाइम विंडो होते हैं। यानी कुछ आवर्स होते हैं जिस टाइम पर इंस्टीटशंस सबसे ज्यादा एक्टिव हैं। यानी पूरे दिन में सबसे ज्यादा एक्टिविटी उन कुछ घंटों में होती है जिनको किल ज़ोन कहा जाता है। ये इसलिए ज्यादा इंपॉर्टेंट है क्योंकि यहां पर हमें सबसे ज्यादा मार्केट में लिक्विडिटी देखने को मिलेगी। एज अ ट्रेडर हमें मार्केट में वोलेटिलिटी भी चाहिए तो वो भी हमें देखने को मिलेगी और सबसे बेटर ट्रेडिंग अपॉर्चुनिटीज भी हमें इस टाइम पीरियड में देखने को मिलेगी। यानी अगर आप एक परफेक्ट टाइमिंग पे ट्रेड करना चाहते हैं तो ये जो किल ज़ोन वाली टाइमिंग है आप उस टाइम को प्रेफर कर सकते हैं। अब चलिए इसको भी समझ लेते हैं। तो इसके लिए अगेन आप देख सकते हैं। देखिए एशिया सेशन जो है इसको तो हम इग्नोर करेंगे। इसका हम यूज़ करते हैं अपने लेवल्स ड्रॉ करने के लिए। यह भी मैं आपको आगे बताऊंगा। लेकिन मैं ट्रेड करने के किल ज़ोन वाले टाइम्स की बात कर रहा हूं। तो इस टाइम पर देखिए यहां पर हमें सबसे पहले दिखाई दे रहा है कि जब हमारा लंदन सेशन शुरू होता है आप नीचे देखिए यहां पर जब लंदन सेशन शुरू हो रहा है उस टाइम पर आपको दिखाई देगा कि थोड़ा जो एक्टिविटी है वो मार्केट में बढ़ जाती है। तो जैसे ही ये मार्केट में एक्टिविटी बढ़ी है वो कब बढ़ी है? जब लंदन सेशन शुरू हुआ है। तो जैसे ही लंदन सेशन शुरू होता है तो उसके शुरुआत के जो 3 घंटे होते हैं ना इनको हम सबसे पहला किल ज़ोन कहते हैं। क्योंकि इस टाइम पीरियड में इंस्टीट्यूशन ज्यादा एक्टिव होंगे। उसके बाद आप देख सकते हैं कि यहां पर जो मार्केट में वॉल्यूम है वह घटने लगता है। यानी आज के टाइम पर जो लंदन सेशन है वह दोपहर के 12:30 शुरू हो रहा है। तो दोपहर के 12:30 से 3:30 का टाइम आप मान के चल सकते हैं कि ये एक अच्छा टाइम हो सकता है ट्रेड करने के लिए अगर आप दिन में ट्रेड करना चाहते हैं। वैसे यहां पर मैं आपको एक चीज क्लियर कर दूं कि मैं कह रहा हूं कि आज के टाइम पर जो लंदन सेशन है वो 12:30 ओपन हो रहा है। क्योंकि अभी गर्मियों का टाइम चल रहा है। अब जब सर्दियां शुरू हो जाती है ना उस टाइम पर वहां पर डे लाइट सेविंग के लिए एक घंटे का जो टाइम होता है उसको चेंज कर दिया जाता है। मतलब वहां पर पूरा ही टाइम चेंज हो जाता है। इसलिए तब जो हमारा न्यूयॉर्क सेशन होगा या लंदन सेशन होगा वो 1 घंटे बाद शुरू होते हैं। यानी जो हमारा लंदन सेशन होता है वो इंडिया के हिसाब से 1:30 बजे शुरू होता है। और जो हमारा न्यूयॉर्क सेशन है वो इंडिया के हिसाब से अभी तो 5:30 ओपन हो रहा है तब 6:30 ओपन होता है। तो इस चीज का आपने ध्यान रखना। इसलिए जब सर्दियां शुरू होंगी तो एक बार टाइम जरूर चेक कर लेना। बट क्योंकि मैं आपको कांसेप्ट समझा रहा हूं इसलिए मैं आपको यहां पर अभी जो टाइमिंग चल रही है वो बता रहा हूं। तो आप टाइमिंग का थोड़ा सा ध्यान रखना। तो मैंने आपको लंदन का टाइम तो बता दिया कि भाई 12:30 शुरू हो रहा है। तो 12:30 से 1:30 2:30 3:30 ये 3 घंटे [गला साफ़ करने की आवाज़] मान के चलो कि एक हमारा किल ज़ोन है। अगर दिन में ट्रेड करना चाहते हो तो ये सबसे बेटर टाइमिंग होगी। इसके बाद जो दूसरा टाइम हमारा होता है जो कि सबसे परफेक्ट टाइमिंग मांगी जाती है वो है न्यूयॉर्क सेशन की टाइमिंग। अब न्यूयॉर्क सेशन कब शुरू हो रहा है? न्यूयॉर्क सेशन शुरू होता है शाम के 5:30। तो शाम के 5:30 बजे आप देखेंगे एकदम से मार्केट में जो वॉल्यूम है वो बढ़ता है जो कि अभी पर्टिकुलर टाइम की हम बात कर रहे हैं। अभी शाम का 6:00 बज चुका है। यानी एक घंटा मार्केट को शुरू हुआ अभी हुआ नहीं है। तो इस टाइम पर मार्केट में एकदम से एक्टिविटी बढ़ती है। इसके बाद से ये जो वॉल्यूम है ये बढ़ते-बढ़ते अगर आप देखेंगे तो रात के 8:30 से 9:00 बजे का जो टाइम होता है इस टाइम पर वॉल्यूम इंडियन टाइम के हिसाब से बता रहा हूं। पीक पे होता है। यानी ये वो किल ज़ों्स हो सकते हैं जब मार्केट में आपको सबसे बेस्ट एक्टिविटी देखने को मिलेगी। यानी अभी के टाइम पे मैं कहूं तो 5:30 से 6:30, 7:30, 8:30 और 1 घंटा आप और जोड़ लो 9:30 बजे तक। यानी ये वो परफेक्ट टाइमिंग हो सकती है जिसको हम एक दिन में किल ज़ोन कहते हैं। और इसमें भी अगर आपको और ज्यादा एक्यूरेट जाना है तो जब ये सेशन शुरू हो रहा है ना उसका एक घंटा 2 घंटा देखोगे उस टाइम पर सबसे ज्यादा मार्केट में वॉल्यूम होगा। सबसे ज्यादा मार्केट में एक्टिविटी [संगीत] होगी। बट एक चीज का ध्यान रखना कि जैसे ही मार्केट ओपन होता है ना उस टाइम पर मार्केट में मैनपुलेशंस भी बहुत ज्यादा होते हैं। प्राइस एकदम से ऊपर जाएगी एकदम से नीचे आएगी। तो अगर आप इन मैनपुलेशन से बचना चाहते हैं तो या तो आप शुरुआत का 1 घंटा छोड़ दो उसके बाद के दो घंटे यूज़ कर लो। जैसे 5:30 मार्केट ओपन हो रहा है तो 5:30 से 6:30 आपने छोड़ दिया। 6:30 से 7:30 8:30 का जो टाइम है आप इस टाइम को यूज़ कर लो। या फिर आप क्या करो कि जब मार्केट ओपन हो रहा है उस टाइम पर आप ट्रेड लेना चाहते हो तो अपने जो लिक्विडिटी के लेवल्स हैं वो भी बड़े टाइम फ्रेम में उन्हें मार्क करके रखो। जब प्राइस उसमें से किसी भी लेवल को ले लेती है यानी लोगों के स्टॉप लॉस सेट करवा लिए गए हैं। जो मैनपुलेशन करना था वो हो चुका है। अब मार्केट में असली मूव आने के चांसेस होते हैं। तो उस लिक्विडिटी लेवल का जरूर ध्यान रखो। तो अब देखिए मैंने आपको एशिया सेशन, न्यूयॉर्क सेशन, लंदन सेशन की टाइमिंग तो बता दी है। तो जब आपको टाइमिंग पता है तो आप खुद से चार्ट में वो टाइमिंग देख सकते हैं। लेकिन इसके लिए एक इंडिकेटर भी आता है। तो वो इंडिकेटर भी आपको बता देता हूं। अगर आप बैक डेट पे कहीं एनालिसिस करना चाह रहे होंगे तो वहां पर आपकी हेल्प हो जाएगी। क्योंकि अभी हमें पता है न्यूयॉर्क सेशन चल रहा है। तो वो तो हमें बार-बार देखने की जरूरत है ही नहीं। कोई इंडिकेटर लगाने की जरूरत नहीं है। तो इंडिकेटर को लगाने के लिए आपने यहां पर इंडिकेटर पे क्लिक करना है और उसके बाद सेशंस लिख के सर्च करना है। जैसे ही आप सेशन लिख के सर्च करेंगे तो एक तो ट्रेडिंग सेशन वाला आता है। इसको इग्नोर करिए। यहां पर सेशंस लक्स एल्गो करके आता है। आपने इस पे टैप कर देना है। जैसे आप इस पे टैप करते हैं तो आपका जो चार्ट होगा उसमें सारे जो सेशंस है वो प्लॉट हो चुके होंगे। अब यहां पर आप देख सकते हैं। बहुत ध्यान से देखिएगा इस चीज को। देखिए ये हमारे जो अलग-अलग सेशंस है वो अलग-अलग टाइम से यहां पर आपको दिखाई दे रहा है कि मार्क कर रखे हैं। जैसे ऑरेंज में न्यूयॉर्क मार्क कर रखा है। ये ब्लू है या पर्पल है। इसमें लंदन मार्क कर रखा है। और ये यहां पर आप देख सकते हैं सिडनी सेशन और टोक्यो सेशन भी यहां पर मार्क हो रखे हैं। तो अब मैंने आपको क्या बताया था? मैंने बताया था कि जो हमारा एशिया सेशन है उसमें जनरली मार्केट क्या रहता है वो साइडवेज रहता है। तो यहां पर लेवल्स बनते हैं। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि ये जो हमारा एशिया सेशन है हमने इसका हाई एंड लो मार्क किया है। यहां पर आप देख सकते हैं ये लो मार्क कर रखा है और ये आप देख सकते हैं कि हाई मार्क कर रखा है। तो पूरा यहां पर देखो जो एशिया सेशन चल रहा था इसमें मार्केट साइडवेज था। एक ही रेंज में घूम रहा था। इवन इसके बाद लंदन सेशन में भी मार्केट में कोई खास मूव हमें देखने को नहीं मिला। ऑलदो जनरली लंदन सेशन में हमें ठीक-ठाक मूव देखने को मिल जाते हैं। लेकिन इस केस में देखने को नहीं मिला था। फिर शुरू होता है न्यूयॉर्क सेशन जिसमें सबसे पहले क्या हुआ है यहां पर ध्यान से देखना। तो देखिए जैसे ही यहां पर आपको दिखाई दे रहा है कि यहां से न्यूयॉर्क सेशन शुरू हुआ है। तो जैसे ही न्यूयॉर्क सेशन शुरू हुआ सबसे पहले मार्केट ने क्या किया? ये जो हाई बना रखे थे ना एशिया और लंदन सेशन ने मार्केट ने इस हाई को स्वीप किया। स्वीप करने का मतलब यह है कि प्राइस पहले ऊपर गई जिससे बहुत सारे लोगों को लगा होगा कि भाई यहां पर तो अब ब्रेकआउट हो चुका है। वो बाय कर रहे होंगे। लेकिन इसकी जगह पर प्राइस ऊपर जाने के बाद वापस नीचे आ गई तो उन सभी लोगों के स्टॉप लॉस हिट हो गए और उसके बाद आप देख सकते हैं कि मार्केट में एक्चुअल जो मूव आया था वो उसके बाद आया था। इवन अगर आप ध्यान से देखेंगे ना तो आपको दिखाई देगा कि जो लो वाला लेवल था मार्केट ने उसको भी खाने की कोशिश की। यानी जो ऊपर बैठा है उसका भी घाटा कराऊंगा। जो नीचे बैठा है उसका भी घाटा कराऊंगा। जो आईसीटी जानता है केवल वही कमा पाएगा। तो यहां पर हुआ क्या? देखिए मार्केट पहले नीचे आया। यहां पर जिसके स्टॉप लॉस रहे होंगे लो वाला लेवल समझ के उसके स्टॉप लॉस हिट हुए। तो इसके बाद प्राइस वापस से ऊपर गई। लोगों को फिर से उसने उम्मीद जगाई कि अब तो मैं ऊपर जाऊंगी। तो ऐसे में ट्रेडर्स ने क्या किया? उन्होंने बाय कर दिया। यहां पर थोड़ा नीचे अपना स्टॉप लॉस रख दिया और उसके बाद होता क्या है? प्राइस वापस से नीचे आ जाती है। तो बाकी सबका नुकसान हो जाता है। लेकिन जो ICT को समझता है, जो सेशंस को समझता है, उसका क्या होता है? वही अकेला है जो यहां पर प्रॉफिट कमा पाया होगा। क्योंकि इसके बाद आप देख सकते हैं कि मार्केट में अच्छा खासा मूव वहां से लेकर यहां तक आया है। तो इस तरीके से आपने सेशंस का यूज़ करना है। अब देखिए ये जो सेशंस हैं इनके बेसिस पे ट्रेड कैसे लेना है वो भी मैं आपको दिखा देता हूं। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं ये जो सेशन हमें दिखाई दे रहा है ये हमारा एशिया सेशन है। मैंने आपको पहले बताया खुद से भी आप इनको मार्क कर सकते हैं। अदरवाइज इंडिकेटर तो मुझे आपको बैक डेट का दिखाना है इसलिए मैं यूज़ कर रहा हूं। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि जो एशिया सेशन का लो है मैंने उसको मार्क किया। तो जो सबसे नीचे का लो था वो ये वाला लो था। मैंने इस लो से लगते हुए लाइन ड्रॉ की। तो अब जैसे ही लंदन सेशन यहां पर शुरू हुआ है ना तो सबसे पहले उसने नीचे की लिक्विडिटी स्वीप की है। आप यहां पर ध्यान से देखेंगे तो आपको दिखाई देगा कि ये वाला लो था। प्राइस इस वाले लो से थोड़ा सा नीचे आई। यानी आप एक छोटी सी डंडी यहां पर दिखाई दे रही है। तो प्राइस इससे नीचे आई है। मतलब जिसने भी यहां पर स्टॉप लॉस रखा होगा उनका स्टॉप लॉस हिट हो गया। यानी जो लिक्विडिटी है वो स्वीप कर ली गई है। अब जब लिक्विडिटी स्वीप होती है नीचे की साइड की तो प्राइस के बढ़ने के चांसेस होते हैं। तो जब नीचे की लिक्विडिटी स्वीप हो गई है तो अब प्राइस बढ़ सकती थी ये हमें पता है। तो अब हमें चाहिए कंफर्मेशन। तो उस कंफर्मेशन के लिए हमें यहां पर एक सीआईएसडी दिखाई दे रहा है। आप देख सकते हैं कि जो इंपल्सिव मूव आया है उससे पहले वाली कैंडल यानी ये ग्रीन कैंडल के क्लोज से लगते हुए मैंने एक लाइन ड्रॉ की। जैसे ही कोई कैंडल इसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है हमारा सीआईएसडी कंफर्म हो जाता है। तो यहां वाली जो कैंडल है इसने इसके ऊपर क्लोजिंग दे दी है। तो यहां पर सीआईएसडी कंफर्म हो गया। अगली कैंडल यानी ये जो रेड कैंडल है यहां पर जो प्राइस है वो दोबारा से इस लेवल पे आई है। तो यहां पर हमारी एंट्री हो जाती। हमारा जो स्टॉप लॉस रहता वो ये जो स्वीप वाला लेवल है इससे थोड़ा सा नीचे रहता और टारगेट के लिए हम 1:2 लेकर चल सकते थे। और उसके बाद आप देख सकते हैं कि क्योंकि लंदन सेशन शुरू हो चुका था तो यहां पर मार्केट में अच्छा खासा मूव आया है। तो [संगीत] इस तरीके से अपने सेशंस का यूज़ करना है और वहां पर लिक्विडिटी का भी ध्यान रखना है। लिक्विडिटी स्वीप का बहुत ज्यादा ध्यान रखना है। इवन मैं कहूंगा कि ये जो हमारा पूरा कोर्स है इसका जो कोर है ना वो लिक्विडिटी स्वीप ही है जो आपके लिए समझना बहुत ज्यादा जरूरी है। अब चलिए बात करते हैं न्यूज़ ट्रेडिंग के बारे में। अब न्यूज़ ट्रेडिंग यानी न्यूज़ को समझना इतना ज्यादा इंपॉर्टेंट पता है क्यों है? यह इसलिए इंपॉर्टेंट है क्योंकि अगर मार्केट में कभी कोई न्यूज़ होती है या न्यूज़ आ गई होती है या आने के चांसेस होते हैं ना तो उस टाइम पर मार्केट में कोई भी चार्ट पैटर्न, कोई भी कैंडलस्टिक पैटर्न, कोई भी आईसीटी कुछ भी काम नहीं करता है। क्योंकि वहां पर जो काम करती है वो होती है न्यूज़। तो आपको पहले से पता होना चाहिए कि आज कहीं मार्केट में कोई मेजर न्यूज़ है तो नहीं। अगर है तो उस टाइम पीरियड में या तो आपने ट्रेडिंग को अवॉइड करना है या फिर अपने ट्रेड्स को उस हिसाब से प्लान करना है। क्योंकि अगर मान लो आपने पूरा टेक्निकल एनालिसिस सब कुछ देखते हुए अपना ट्रेड प्लान किया और उसी टाइम पर कोई मार्केट में न्यूज़ आने वाली थी जो कि आ गई जो कि आपके बिल्कुल अपोजिट है तो सीधा मार्केट गिरेगा और आप सोचोगे यार मेरी स्ट्रेटजी सही थी मेरा सब कुछ सही था लेकिन फिर भी मुझे घाटो हो गया। तो अब ये न्यूज़ हमें पता कैसे करनी है? तो इसके लिए बहुत सारी वेबसाइट है। जिसमें से एक वेबसाइट है फॉरेक्स फैक्ट्री। आप इसका भी यूज़ कर सकते हैं। इसके अलावा एक और वेबसाइट है। अगर आपको बिल्कुल शॉर्ट में न्यूज़ देखनी है तो यहां पे फाइनेंसियल जूस नाम से एक वेबसाइट है। आप इस वेबसाइट को भी देख सकते हैं। इसमें आपको एकदम से फीड की तरह यहां पे न्यूज़ दिखाई जाती है। इसमें जो इंपॉर्टेंट न्यूज़ होती है वो न्यूज़ आपको यहां पर रेड में दिखाई देती है। जैसे यहां पर 6:20 पे अभी न्यूज़ आई है जब मैं इस वीडियो को शूट कर रहा हूं। जिसमें यहां पर कुछ ईरान से रिलेटेड न्यूज़ है। तो वो भी आप देख सकते हैं कि हमें यहां पर एकदम से पता चल गया। कोई भी इंटरेस्ट रेट में चेंज आने वाला है तो वो भी यहां से हमें पता चल जाता है। जैसे यूएस हाउसिंग से रिलेटेड कोई डाटा है तो वो हमें पता चल जाता है। तो एक तो आप इसका यूज़ कर सकते हैं। आसान है। एकदम से आपको थोड़ी बहुत इनफार्मेशन मिल जाती है। लेकिन अगर आप डिटेल में न्यूज़ देखना चाहते हैं कौन सी न्यूज़ आने वाली है ये जानना चाहते हैं तो फिर फॉररेक्स फैक्ट्री ये जो वेबसाइट है आप इसका यूज़ कर सकते हैं। अब इसका यूज़ कैसे करना है? चलिए समझते हैं। तो इस वेबसाइट में अगर आप हाई इंपैक्ट न्यूज़ को समझना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको सबसे पहले इस वेबसाइट में आ जाना है। उसके बाद यहां पर एक फिल्टर का ऑप्शन देखने को मिलता है। आपने इस फिल्टर पे क्लिक करना है। अब इसके बाद देखिए यहां पर आपको चार तरह के फोल्डर देखने को मिल रहे हैं। इसमें ये जो ग्रे कलर का फोल्डर है इसका मतलब यह है कि जिस भी मार्केट से रिलेटेड अगर कोई न्यूज़ होगी तो वो मार्केट आज बंद है। तो फिर उसका मार्केट में कोई खास इंपैक्ट नहीं पड़ेगा। इसके बाद जो येलो कलर का फोल्डर है वो बताता है कि मार्केट में न्यूज़ तो है लेकिन उस न्यूज़ का मार्केट में कोई खास इंपैक्ट नहीं पड़ेगा। फिर आता है ऑरेंज फोल्डर। अब ये कहता है कि भाई मार्केट में न्यूज़ है लेकिन इसका थोड़ा बहुत इंपैक्ट पड़ सकता है। बहुत ज्यादा इंपैक्ट नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर रेड फोल्डर वाली कोई न्यूज़ होती है इसका मतलब होता है कि इस न्यूज़ का मार्केट में बहुत ज्यादा इंपैक्ट पड़ने के चांसेस हैं। तो हमारे लिए सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट कौन सी न्यूज़ है? ये रेड फोल्डर वाली न्यूज़ है। तो हमने फिल्टर में से जो बाकी तीन फोल्डर हैं इनको अनटेक कर देना है। इसके बाद देखिए इवेंट टाइप में भी आप कर सकते हैं। लेकिन मैं कहूंगा करने की जरूरत नहीं है। अब जो हमारे लिए इंपॉर्टेंट है वो है करेंसीज़। अब देखिए अगर आप क्रिप्टो में ट्रेड करते हैं या इन केस फॉरेक्स में ट्रेड करते हैं या इंडियन मार्केट में भी ट्रेड करते हैं ना तो आपके लिए यूएस डॉलर से रिलेटेड जो न्यूज़ होगी वो इंपॉर्टेंट होगी। बाकी करेंसीज आपके लिए इंपॉर्टेंट नहीं है। तो यहां पर आपने क्या करना है? आपने सिर्फ यूएस डॉलर की जो न्यूज़ है उसको सेलेक्ट कर लेना है और उसके बाद अप्लाई फिल्टर पे क्लिक कर देना है। अब जैसे ही आप अप्लाई फिल्टर पे क्लिक करते हैं तो यहां पर आपको दिखाई दे रहा है कि कोई भी हमें फोल्डर नहीं देखने को मिल रहा है। मतलब आज के टाइम पर कोई भी न्यूज़ अभी मार्केट में नहीं है। तो अब हमने क्या करना है? हम इससे पीछे का मैं आपको एग्जांपल दिखा देता हूं। तो यहां पर जिस दिन कोई मार्केट में न्यूज़ होगी उस दिन हमें पता कैसे चलेगा? तो इसके लिए हम 15 तारीख को आ गए हैं। 15 तारीख को भी कोई इंपॉर्टेंट न्यूज़ नहीं थी। तो ऐसे 14 तारीख को भी कोई खास न्यूज़ नहीं थी। वैसे भी मार्केट में संडे था। तो मैं एक बार देख लेता हूं कि 1 जून से लेके 30 जून तक मार्केट में क्या न्यूज़ है। तो इसके लिए मैंने यहां से जो डेट है वो सेलेक्ट कर लिया है। उसके बाद अप्लाई सेटिंग पे क्लिक किया। तो अब आप देख सकते हैं कि यहां पर 1 जून को एक न्यूज़ थी। इसके बाद यहां पर आप देख सकते हैं कि 5 जून को न्यूज़ थी। 6 7 8 को कोई न्यूज़ नहीं थी। नौ को भी कोई न्यूज़ नहीं थी। 10 को एक न्यूज़ थी। 11 को न्यूज़ थी। अब इसके बाद सीधा 17 तारीख को तीन इंपॉर्टेंट न्यूज़ है। जिसमें सबसे इंपॉर्टेंट ये तीन न्यूज़ है। फेडरल फंड रेट से रिलेटेड न्यूज़ आएगी। एफओएमसी इकोनमिक प्रोजेक्शन से रिलेटेड न्यूज़ आएगी और एफओएमसी की स्टेटमेंट आएगी। इसके बाद 18 तारीख को एफओएमसी की जो प्रेस कॉन्फ्रेंस है वो होगी जो कि बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट न्यूज़ है। तो [संगीत] यहां से हमें पता है कि ये न्यूज़ जब आने वाली है उस टाइम पर हम थोड़ा सा मार्केट में सावधान रहेंगे। अब मैं आपको थोड़ा सा यह भी बता देता हूं कि इन न्यूज़ को रीड कैसे करना है ताकि आपको यह तो पता हो ठीक है न्यूज़ तो है लेकिन उन उस न्यूज़ का इंपैक्ट क्या हो सकता है यह भी समझते हैं मैं ये नहीं कह रहा हूं कि न्यूज़ के बेसिस पे ट्रेड करना मैं तो कहूंगा कि वो टाइम अवॉयड करना लेकिन फिर भी आपके लिए ये समझना जरूरी है तो चलिए अब इसके बारे में बात करते हैं वैसे डेल्टा एक्सचेंज में अकाउंट ओपन नहीं किया तो डिस्क्रिप्शन में लिंक दिया है खोल लेना Google फॉर्म का लिंक दे रखा है उसको फिल जरूर कर लेना वीडियो को लाइक भी कर देना तो अब देखिए यहां पर अगर आप किसी भी न्यूज़ को एनालाइज करना चाहते हैं जैसे ये जो कल को न्यूज़ आने वाली है अगर मैं इसको एनालाइज़ करना चाहता हूं तो यहां पर हमें एक फोल्डर देखने को मिल रहा है। हमने इस पे क्लिक करना है। अब जैसे ही हम इस पे क्लिक करते हैं ना तो यहां पर हमें सारी इंफॉर्मेशनेशन देखने को मिल जाती है। जैसे ये साल में आठ बार आती है। इसके अलावा ये जो पूरी न्यूज़ है इसका मतलब क्या है? ये सारा हमें यहां पर देखने को मिल जाता है। इससे पहले ये न्यूज़ कब आई थी? उस टाइम पर फॉरकास्ट क्या था? एक्चुअल क्या निकल कर आया? उससे पहले फॉरकास्ट क्या था? क्या एक्चुअल निकल कर आया? यह सब कुछ देखने को मिलता है। उससे रिलेटेड जो मार्केट में न्यूज़ आई होंगी उस टाइम पर वो सारी चीजें भी हमें यहां पर देखने को मिल जाती है। अब चलिए मैं आपको एक न्यूज़ का एग्जांपल दे देता हूं। जो न्यूज़ मान लो अभी आने वाली होती तो आप उस न्यूज़ को कैसे प्रेडिक्ट कर सकते थे, कैसे एनालाइज कर सकते थे। जैसे यहां पर हमें एक न्यूज़ दिखाई दे रही है नॉन फार्म एंप्लॉयमेंट चेंज। तो अगर आप इस न्यूज़ को डिटेल में जानना चाहते हैं तो यहां पर आपको दिखाई दे रहा है। आपने इस पे क्लिक करना है। जैसे ही आप इस पे क्लिक करते हैं तो आप देख सकते हैं इस न्यूज़ से रिलेटेड हमें डिटेल्स देखने को मिल रही है। जैसे उस न्यूज़ का सोर्स क्या है? इसके अलावा इसको मेजर कैसे किया जाता है और उसके बाद सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट उसका इफेक्ट क्या होगा। जैसे यहां पर बताया गया है कि अगर यह न्यूज़ जो फॉरकास्ट आया है जैसे मैंने आपको बताया यहां पे फॉरकास्ट रहते हैं उस फॉरकास्ट से अगर बेटर निकल के आती है अच्छी निकल के आती है तो वो यूएस डॉलर जो करेंसी है उसके लिए बेटर होगी। अब देखो यूएस डॉलर के लिए वो न्यूज़ अच्छी है। तो अगर यूएस डॉलर में आप ट्रेड कर रहे होते तो वहां पर ही आपके लिए पॉजिटिव था। लेकिन सोचो आप गोल्ड में ट्रेड कर रहे हो तो गोल्ड का जो हम चार्ट कहें वो क्या होता है? वो होता है एक्स यू ऑब्लिक यूएसडी। इसका मतलब यहां पर जो डॉलर है वो कोर्ट करेंसी है। तो अगर कोट करेंसी स्ट्रांग हो रही है, डॉलर स्ट्रांग हो रहा है तो ऐसे में गोल्ड की प्राइस इस टाइम पे गिरी होगी। और अगर आप क्रिप्टो में ट्रेड करते हैं तो पैक जी = गोल्ड। तो अगर उस टाइम पर डॉलर स्ट्रांग हुआ है तो वहां पर भी गोल्ड की जो प्राइस है वो गिरी होगी। इवन अगर हम बिटकॉइन इथेरियम की बात कर लें तो अगर डॉलर स्ट्रांग होगा तो फिर वहां पर जो बिटकॉइन या इथेरियम है इसकी प्राइस जाहिर सी बात है गिरेगी। तो अब इंपैक्ट दिखाने के लिए हम आ चुके हैं डेल्टा एक्सचेंज के चार्ट पे। यहां पर आप गोल्ड देखना चाहते हैं तो पैक्स जी आपको दिखाई दे रहा है। आपने पैक्स जी पे जाना है और पैक्स जी पे जाने के बाद आपने फुल स्क्रीन खोल लेना है। अब मैंने आपको बताया था न्यूज़ कितने बजे आई थी? शाम के 6:00 बजे आई थी। कब आई थी? 5 जून को आई थी। तो यहां पर आप देखिए 5 जून को शाम के 6:00 बजे आप देख सकते हैं कि मार्केट में फॉल आना स्टार्ट हुआ और उसके बाद आप देख सकते हैं अच्छा खासा फॉल आया। किस में आया? गोल्ड में आया। क्यों आया? आपको पता है कि उसमें जो कोड करेंसी है वो यूएस डॉलर है। अब अगर आप यूएस डॉलर का चार्ट देखें ना तो वहां पर आपको दिखाई देगा कि उस टाइम पर हमें एक अपसाइड का मूव देखने को मिला होगा। तो देखो ये जो न्यूज़ थी ये करेंसी के लिए अच्छी थी यानी क्रिप्टो के लिए गोल्ड के लिए नेगेटिव थी। लेकिन कई ऐसी भी न्यूज़ होंगी जो करेंसी के लिए नेगेटिव होंगी। तो वो गोल्ड के लिए कैसी होंगी? वो उसके लिए पॉजिटिव होंगी। इथेरियम या बिटकॉइन के लिए कैसी होंगी? पॉजिटिव होंगी। [संगीत] और एक और चीज का ध्यान रखना कि जरूरी नहीं है कि जो डाटा है वो फोरकास्ट से बेटर निकल कर आ गया तो ये मार्केट के लिए अच्छा ही है। कई बार यहां पर इनवर्स रिलेशन भी होता है। जैसे मैं एक न्यूज़ आपको दिखाता हूं। तो जैसे यहां पर आप देख सकते हैं एक न्यूज़ है अनइंप्लॉयमेंट रेट नाम से। अगर आप इसको अच्छे से समझना चाहते हैं तो यहां पर आपने क्लिक कर दिया। जैसे ही आपने इस पे क्लिक किया तो यहां पर आप उस न्यूज़ को समझ सकते हैं। जैसे यहां पर लिखा है एक्चुअल लेस देन फॉरकास्ट इज गुड फॉर करेंसी। यानी जो फॉरकास्ट किया गया है अगर उससे कम नंबर निकल कर आएगा तो ही यह करेंसी के लिए अच्छा होगा। क्यों होगा? क्योंकि देखो भाई वो अनइंप्लॉयमेंट रेट का डाटा है। अगर अनइंप्लॉयमेंट ज्यादा निकल के आएगी तो ऑब्वियस सी बात है करेंसी के लिए खराब है। अगर कम निकल के आती है, कम लोग बेरोजगार हैं तो ये करेंसी के लिए बेटर होगा ना। तो इसलिए यहां पर हम कह सकते हैं कि इनवर्स रिलेशन है। तो अब इस केस में हुआ क्या था वो भी देख लीजिए। इस केस में आप देख सकते हैं कि वो बिल्कुल सेम ही निकल कर आई थी। तो कोई खास इंपैक्ट हमें मार्केट पे नहीं देखने को मिला होगा। तो जैसे यहां पर आप देख सकते हैं जो फॉरकास्ट था वो 4.3% का था और जो एक्चुअल निकल कर आया है वो भी 4.3% का है। तो यह भी एक तरह से कह सकते हैं कि मार्केट के लिए अच्छी न्यूज़ है क्योंकि कुछ खराब नहीं हुआ है कुछ बिगड़ा नहीं है तो इसको भी एक तरह से पॉजिटिव न्यूज़ माना जा सकता है। लेकिन अगर यहां पर 4.3% का फॉरकास्ट था और ये 4.4% आ गया होता तो यहां पर नंबर तो ज्यादा है लेकिन ये करेंसी के लिए खराब होता। करेंसी मतलब यूएस डॉलर के लिए खराब होता। यूएस डॉलर के लिए खराब होता तो इथेरियम, बिटकॉइन या फिर गोल्ड के लिए ये न्यूज़ पॉजिटिव होती। तो इस तरीके से आप न्यूज़ को एनालाइज कर सकते हैं। तो अब जब आपको पता चल गया है कि न्यूज़ कैसे देखनी है, उन्हें एनालाइज कैसे करना है तो अब जानते हैं एएमडी के बारे में। इसमें मैं आपको कुछ स्ट्रेटजीस के बारे में भी बताऊंगा। तो चलिए सबसे पहले समझते हैं पावर ऑफ थ्री के बारे में जिसको हम शॉर्ट में एएमडी यानी एक्यूमुलेशन मैनपुलेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन भी बोलते हैं। [संगीत] यह हमें बताता है कि मार्केट जो है वो रैंडम नहीं है। मार्केट हमेशा तीन फेसेस में मूव करता है जिसमें सबसे पहला फज़ होता है एक्यूमुलेशन का। दूसरा फज़ होता है मैनपुलेशन का और तीसरा फज़ होता है डिस्ट्रीब्यूशन का। यानी मार्केट जो है वो बार-बार यही सीक्वेंस को फॉलो कर रहा है। अब ये [संगीत] तीनों चीजें आखिर है क्या? तो सबसे पहले यहां पर हम आपको शॉर्ट में समझा देंगे। उसके बाद मैं आपको यह चार्ट में भी दिखाऊंगा तब आपको सारी चीजें क्लियर हो जाएगी। तो एक्यूमुलेशन का मतलब होता है जहां पर आपको एक फेस जो हमने दिखा रखा है ये एक्यूमुलेशन फेस है जिसमें माना जाता है कि मार्केट जनरली कंसोलिडेट करता है एक रेंज में घूमता है। रेंज में घूमने के पीछे मार्केट का पर्पस होता है लिक्विडिटी क्रिएट करना और लिक्विडिटी क्रिएट करने के साथ-साथ मार्केट कुछ रेंज भी बनाता है। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं मार्केट साइडवेज चल रहा है। यहां पर ऊपर और नीचे के लेवल्स पे लिक्विडिटी बन रही है। जैसे यहां पर भी लिक्विडिटी बन रही है। यहां पर भी लिक्विडिटी बन रही है। तो, यह कुछ लिक्विडिटी लेवल्स क्रिएट हो रहे हैं। इसके अलावा यहां पर मार्केट में रेंज [गला साफ़ करने की आवाज़] भी बन रही है। इसके बाद जो दूसरा फज़ मार्केट में होता है, वह होता है मैनपुलेशन का। जिसमें जो बड़े इंस्टीटशंस हैं, वो लिक्विडिटी स्वीप करते हैं या लिक्विडिटी गैब करते हैं। लोगों के स्टॉप लॉस हिट करवाते हैं। जिसके लिए वो लेकर आते हैं मार्केट में एक फेक मूव। जैसे कि यहां पर आप देख सकते हैं मार्केट ने सबसे पहले वाले एक्यूमुलेशन फेज में रेंज बनाई थी। तो ट्रेडर्स ने क्या किया होगा? कुछ ट्रेडर्स ने यहां पर शॉर्ट कर दिया होगा। कुछ ट्रेडर्स ने यहां पर बाय कर दिया होगा। तो एक तो देखो यहां पर जिन भी लोगों ने इस लेवल के आसपास क्या कर रखा होगा? शॉर्ट कर रखा होगा। उनसे थोड़ा सा ऊपर प्राइस गई। यहां पर आप देख सकते हैं उनके स्टॉप लॉस हिट करवा दिए। इसके अलावा देखिए बहुत सारे ऐसे भी ट्रेडर्स होंगे जिन्हें लगा होगा कि भाई यह वाला इंपॉर्टेंट लेवल ब्रेक हो गया है। अब तो प्राइस यहां से ऊपर जाएगी। तो उन्होंने यहां पर बाय कर लिया होगा। अपना थोड़ा नीचे इस लेवल के आसपास स्टॉप लॉस रख लिया होगा। और उसके बाद क्या होता है? प्राइस पहले थोड़ा सा ऊपर जाती है फिर नीचे आ जाती है। यानी एक तो जिसने यहां पर शॉर्ट किया उसका भी स्टॉप लॉस हिट करवा दिया। जिसने यहां पर बाय किया उसका भी स्टॉप लॉस हिट करवा दिया। और उसके बाद आप देख सकते हैं मार्केट में असली मूव आया है। [संगीत] यानी यह जो फज़ है यह मैनपुलेशन का फज़ है। और इस फेज के बाद जो सबसे बड़ा मूव मार्केट में या कहें कि एक्चुअल मूव जो मार्केट में आता है वो आता है थर्ड फज़ में जिसको कहा जाता है डिस्ट्रीब्यूशन जिसमें मार्केट ने ऊपर लोगों के स्टॉप लॉस तो हिट करवा दिए हैं। तो अब नीचे की जो लिक्विडिटी है उसको टारगेट किया जाता है। और इस तरीके से जो मार्केट है वो लिक्विडिटी से दूसरी लिक्विडिटी के पास मूव करता है। अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि मार्केट इन तीन फेज में मूव क्यों करता है? सिर्फ हमने कह दिया इसलिए मूव थोड़ी करता है। तो उसके पीछे लॉजिक यह है कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं उन्हें अपने ट्रेड प्लेस करने के लिए लिक्विडिटी चाहिए होती है। जैसे अगर आप मान लीजिए 10,000, 20,000, 5,000 या 5, 10 लाख का ट्रेड लेना चाहते हैं तो आपको यह सोचने की जरूरत नहीं है कि अगर आप बाय कर रहे हैं तो सेलर कौन होगा? अगर आप सेल कर रहे हैं तो बायर कौन होगा? लेकिन जो बड़े इंस्टीटशंस 50 करोड़, 100 करोड़ का ट्रेड लेना चाहते हैं तो अगर वो बाय करना चाह रहे हैं तो उन्हें इतने सारे सेलर्स चाहिए जो कि जरूरी नहीं है कि एट अ टाइम मार्केट में अवेलेबल हो। तो इसलिए वो इस तरीके के गेम खेलते हैं जिससे रिटेलर्स के स्टॉप लॉस हिट होते हैं। जो पहले बयर था उसको सेलर बना देते हैं। जो सेलर था उसको बायर बना देते हैं और वहां से वो लिक्विडिटी लेके आते हैं। यानी पहले फज़ में वो लिक्विडिटी बिल्ड कर रहे हैं जो कि एक्यूमुलेशन फज़ है। दूसरे फज़ में वो लिक्विडिटी को कलेक्ट कर रहे हैं जो कि मैनपुलेशन फज़ है और तीसरे फज़ में एक्चुअल में प्राइस में मूवमेंट लेके आ रहे हैं। तो इसलिए कहा भी जाता है कि मार्केट का ऑब्जेक्टिव होता है एक लिक्विडिटी से दूसरी लिक्विडिटी पे मूव करना। तो चलिए अब सीधा चार्ट में चलते हैं। लेकिन उससे पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं। मैं खुद भी इसका यूज़ करता हूं। यह इंडिया में एफआईयू रजिस्टर्ड है। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके अपना अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से अधीरा एi का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलता है। इसके लिए हमने आपको डिस्क्रिप्शन में Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। उसको जरूर फिल कर लीजिएगा। तो चलिए अब सीधा चार्ट पे चलते हैं और यहां पर आप देख सकते हैं कि मैंने आपके सामने एक प्लेन चार्ट खोल रखा है। अब सबसे पहले मैं आपको दिखाता हूं वो फेस जहां पर मार्केट एक्यूमुलेशन कर रहा है। आप देख ही सकते हैं वैसे आपको क्लियरली नजर ही आ रहा होगा कि यहां पर जो मार्केट है वो काफी टाइम से साइडवेज चल रहा था। यानी यहां पर चल रहा था हमारा एक्चुअल एक्यूमुलेशन फेस। अब एक्यूमुलेशन फज़ को मार्क करने के लिए जो हमें वहां पर हाई दिखाई दे रहा है, हमने हाई से लगते हुए एक एरिया ड्रॉ कर लेना है। और जो लो दिखाई दे रहा है, हम इस लो से लगते हुए भी एक एरिया ड्रॉ कर लेंगे। अब आप चाहो तो लाइन से भी मार्क कर सकते हो। आप चाहो तो यहां पर रेक्टेंगल वाला आपको फीचर देखने को मिलता है। आप इससे भी मार्क कर सकते हो। तो यह हमारा हाई है। यह हमारा लो है। हम इस तरीके से अपना यह जो एक्यूमुलेशन फेज है, वह हमने मार्क कर दिया है। यानी आप देख सकते हैं कि हमने इस हाई को ले रखा है। इस लो को ले रखा है। और इस पूरे फज़ में हम कह सकते हैं कि मार्केट में एक्यूमुलेशन हुआ है। अब यहां पर मैं इसका थोड़ा सा कलर भी चेंज कर देता हूं ताकि हमें पता चल जाए कि यह हमारा एक्यूमुलेशन फज़ है। और यहां पर मैं लिख भी देता हूं कि यह हमारा एक्यूमुलेशन फज़ है। इसके बाद मैं आपको यहां पर मैनपुलेशन फज़ दिखाऊंगा। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि हमने एक्यूमुलेशन फेस को मार्क कर दिया गया है। जिसमें क्लियरली आपको नजर आ रहा है कि मार्केट एक साइडवेज रेंज चल रहा था। जहां पर वो कुछ लेवल्स बना रहा था। जिन लेवल्स के नीचे या ऊपर साइड पे हमें लिक्विडिटी नजर आ रही है। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं इस लेवल के ऊपर जो है वो वहां पर लिक्विडिटी रही होगी। अब जब ये हमारा एक्यूमुलेशन फेस बन जाता है ना तो इसके बाद या तो मार्केट हाई को ब्रेक करता है या फिर लो को ब्रेक करता है। जैसे इस केस में आप देखेंगे तो यहां पर इसके बाद जो मार्केट है वो उसने हाई को ब्रेक किया था। यहां पर आप देख सकते हैं इसके हाई से ऊपर चला गया है मार्केट। तो मार्केट इसके [संगीत] हाई के ऊपर गया। यानी यहां पर जिन भी लोगों ने अपने शॉर्ट करने की पोजीशन ले रखी होगी उन सबके स्टॉप लॉस कहां रहे होंगे? इसके ऊपर रहे होंगे। तो उन सबके स्टॉप लॉस यहां पर पहले हिट हो गए। तो इस जगह पर क्या हुआ है? एक्चुअल में इस जगह पर मार्केट में मैनपुलेशन हुआ है। तो इसको भी हम अलग कलर से मार्क कर देते हैं। आप देख सकते हैं ये [संगीत] है मैनपुलेशन फज़। तो पहले हमने देखा कि मार्केट ने एक्यूमुलेशन किया। उसके बाद हम देख रहे हैं कि यहां पर मार्केट ने मैनपुलेशन किया है। तो अब जब मार्केट ने मैनपुलेशन कर दिया तो इसके बाद शुरू होता है असली गेम जहां पर एक्चुअल में मार्केट में मूवमेंट आता है और उस फज़ को कहा जाता है डिस्ट्रीब्यूशन फज़। जैसे आप देख सकते हैं कि इसके बाद यहां पर मार्केट में एक अच्छा खासा मूव आना शुरू हुआ है। अब ये जो मैनपुलेशन फज़ है वो थोड़ा लंबा चल सकता है। मतलब ऐसा जरूरी नहीं है कि यहां पर इसके ऊपर गया और उसके बाद ही प्राइस नीचे आने लग जाएगी। हो सकता है कि थोड़ा बहुत प्राइस ऊपर हाई बनाए। लेकिन एक बार जब प्राइस यह जो हमारा एक्यूमुलेशन फज़ वाला हाई था इस हाई से नीचे आ जाती है। जैसे यहां पर आप देख सकते हैं प्राइस इस हाई से नीचे आ गई है। तो जैसे ही हाई से नीचे आई है तब हम कंफर्म हो गए हैं कि [संगीत] एक्चुअल में ये मैनपुलेशन ही था और जैसे ही प्राइस इसके नीचे आती है तो अब हमें क्या करना है? अब हम यहां पर जब हमें पता है कि एक्यूमुलेशन हो चुका है, मैनपुलेशन हो चुका है। तो अब मार्केट में एक्चुअल मूव आने के चांसेस हैं। तो अब हम यहां पर अपना ट्रेड प्लेस करेंगे और उस ट्रेड को प्लेस करने के लिए हमें कुछ ना कुछ कंफर्मेशन चाहिए होगा। तो यहां पर हमने देखा कि यहां पर हमें एक सीआईएसडी बनता हुआ नजर आ रहा था। तो हमने उस सीआईएसडी को मार्क कर दिया है। जैसे ही प्राइस ने सीआईएसडी के नीचे क्लोजिंग दी है, हम समझ गए हैं कि हमारा सीआईएसडी कंफर्म हो गया है। और उसके बाद जैसे ही प्राइस दोबारा से सीआईएसडी [संगीत] को टैप करती है, हम वहां पर अपनी शॉर्ट करने की पोजीशन लेते हैं। हमारा जो स्टॉप लॉस होगा वो जाहिर सी बात है यहां पर जो मैनपुलेशन का हाई है इससे थोड़ा सा ऊपर रहेगा जो कि है। और रही बात टारगेट की तो या तो आप 1:2 का टारगेट लेकर चल सकते हैं या फिर अगर आपको नीचे का कोई लिक्विडिटी लेवल नजर आ रहा है तो आप वहां तक का भी टारगेट लेकर चल सकते हैं। जैसे इस केस में यहां पर हमें दिखाई दे रहा है कि भाई यह एक लिक्विडिटी लेवल है तो हम यहां पर अपना टारगेट लेकर जा सकते हैं। और इसके बाद आप देख सकते हैं कि जब प्राइस में एक्चुअल मूवमेंट आया है। हमने ये लिक्विडिटी लेवल मार्क कर दिया और आप देख सकते हैं कि प्राइस इस लेवल पे आई। इस तरीके से मार्केट ने टारगेट दिया है। और यहां पर एक्चुअल में इंस्टीटशंस ने पैसे कमाए हैं। जबकि जो रिटेलर्स रहे होंगे जिनको लिक्विडिटी का नहीं पता, एक्यूमुलेशन का नहीं पता, मैनपुलेशन का नहीं पता उन्होंने नुकसान किया होगा। लेकिन अब क्योंकि आपको ये तीनों चीजें के बारे में पता चल चुका है तो आप यह समझ सकते हैं कि कहां पर एक्यूमुलेशन हो रहा है, कहां पर मैनपुलेशन हो रहा है और एक्चुअल डिस्ट्रीब्यूशन जब होगा तब आप अपना ट्रेड प्लेस कर सकते हैं। ऐसे ही यहां पर एक और एग्जांपल हमने आपके लिए मार्क कर रखा है। आप देख सकते हैं कि ये एक लेवल है जहां पर क्या हुआ? मार्केट ने एक रेंज बनाई है। तो ये क्या था? ये था हमारा एक्यूमुलेशन लेवल। उसके बाद नीचे वाली जो रेंज थी मार्केट ने ब्रेक की लोगों के यहां पर स्टॉप लॉस हिट करवाए। तो यहां पर मैनपुलेशन हुआ। उसके बाद जैसे ही आप देख सकते हैं कि प्राइस इस लो से ऊपर चली गई है। तो हमें पता चल गया कि एक्चुअल में यह मैनपुलेशन ही था और उसके बाद हमने यहां पर एक सीआईएसडी मार्क किया। आप देख सकते हैं [संगीत] इससे लगते हुए एक सीआईएसडी मार्क किया। जैसे ही किसी कैंडल ने इसके ऊपर क्लोजिंग दे दी तो हमारा सीआईएसडी यहां पर कंफर्म हो गया है और उसके बाद प्राइस ने जैसे ही सीआईएसडी को दोबारा से टैप किया उसके बाद एक्चुअल में मार्केट में यहां पर डिस्ट्रीब्यूशन आया है। यानी सारा मूवमेंट यहां पे आया है। यहां पर जिन्होंने भी ट्रेड लिया था उन सबके स्टॉप लॉस हिट करवा दिए गए हैं। तो इस तरीके से पावर ऑफ थ्री मॉडल काम करता है। आपने इसको खुद से प्रैक्टिस करना है। जितना प्रैक्टिस करोगे जितना चार्ट में देखोगे उतना आपके लिए बेटर रहेगा। अब चलिए जो हमारा नेक्स्ट मॉडल है सिल्वर बुलेट स्ट्रेटजी उसको समझते हैं। इस स्ट्रेटजी में हम एक पर्टिकुलर टाइम फ्रेम में 1 घंटे की कैंडल का हाई एंड लो को मार्क करते हैं और उसके बाद हम सीआईएसडी देखते हैं और फिर एफपीजी के बेसिस पे एंट्री लेते हैं। अब वो पर्टिकुलर टाइम है क्या और क्यों है? तो वो जो पर्टिकुलर टाइम फ्रेम है वो इंडिया के हिसाब से मैं आपको टाइम बताऊं तो वो है शाम के 6:30 बजे से 6:30 बजे। यानी [संगीत] इस टाइम फ्रेम में जो हमें 1 घंटे की कैंडल देखने को मिलेगी, हम उस कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए एक एरिया ड्रॉ करेंगे। उसके बाद हम छोटे टाइम फ्रेम पे जाते हैं और वहां पर अपनी एंट्री प्लान करते हैं। अब सवाल उठता है कि हम ये पर्टिकुलर टाइम फ्रेम लेकर क्यों चल रहे हैं? तो इसके पीछे लॉजिक ये है कि यूएस का जो स्टॉक मार्केट है वो शाम के 7:00 बजे खुलता है। मैं इंडिया के हिसाब से बता रहा हूं। अगर अमेरिका के टाइम के हिसाब से देखेंगे तो वो वहां के टाइम के सुबह के 9:00 बजे होता है। तो इंडिया [संगीत] के टाइम के हिसाब से यह शाम के 7:00 बजे खुलता है। तो हम 6:30 बजे वहां पर जो प्री मार्केट सेशन होता है वो ओपन हो जाता है। तो 6:30 से 7:30 बजे तक का टाइम इसलिए लेके चल रहे हैं क्योंकि उस टाइम पर यूएस का मार्केट खुलेगा। सबसे ज्यादा वोलेटिलिटी उस टाइम पर मार्केट में आएगी। अब यहां पर आप यूएस सेशन में कंफ्यूज मत हो जाना क्योंकि वो टाइमिंग जो हमने आपको बताई है वो शाम के 5:30 से है। तो वो टाइमिंग इसलिए बताई गई है क्योंकि यूएस के जो बड़े बैंक्स हैंच फंड्स हैं वो उस टाइम पीरियड में एक्टिव होते हैं। [संगीत] जबकि उनका जो स्टॉक मार्केट है वो आम जनता के लिए 7:00 बजे खुलता है। जबकि प्री ओपनिंग सेशन जो होता है वो 6:30 होता है। इसलिए हम 6:30 से 7:30 की कैंडल लेके चल रहे हैं। क्योंकि सबसे ज्यादा मार्केट में वोलेटिलिटी उस टाइम फ्रेम पे [संगीत] ही होती है। तो इस टाइम को सेलेक्ट करने के पीछे का लॉजिक आपको समझ आ गया है। तो अब चलिए जो स्ट्रेटजी है यह सीधा मैं आपको चार्ट पे दिखाता हूं। तो अब आ चुके हैं हम चार्ट पे और यहां पर आप देख सकते हैं कि यह जो टाइम फ्रेम में मैंने सबसे पहले 1 घंटे का टाइम फ्रेम यहां पे सेलेक्ट कर रखा है और उसके बाद 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे ये 6:30 से 7:30 की कैंडल है जिसका मैंने हाई एंड लो मार्क कर रखा है। अब यहां पे जो मैंने टाइम सेलेक्ट कर रखा है आप अपना टाइम यहां पर देख सकते हैं। यहां से मैंने जो टाइम सेलेक्ट कर रखा है वो इंडिया का टाइम है। अगर यहीं पर मैं न्यूयॉर्क वाला टाइम सेलेक्ट कर दूंगा तो यहां पर आप देख सकते हैं कि यह जो टाइम होगा यह सुबह के 9:00 बजे का होगा जो टाइम फ्रेम मैंने आपको बताया है। तो न्यूयॉर्क का टाइम अगर आप यहां से सेलेक्ट कर लेते हो तो सुबह के 9:00 बजे आपने देखना है और अगर आप इंडिया का टाइम फ्रेम यहां पर सेलेक्ट करते हो तो फिर आपने अपना शाम के 6:30 [संगीत] से 7:30 का टाइम फ्रेम देखना है और अगर आप किसी दूसरी कंट्री से देख रहे हैं तो वहां पर आप अपना टाइम एडजस्ट कर लीजिएगा। तो अब जब ये 1 घंटे की कैंडल आपकी कंप्लीट हो जाती है। इसके बाद आपने छोटे टाइम फ्रेम पे जाना है। जैसे कि यहां पर मैं 5 मिनट के टाइम फ्रेम पे चला जाता हूं। तो अब जब हम 5 मिनट के टाइम फ्रेम पे आ चुके हैं तो हमारी वही जो कैंडल थी 1 घंटे की वो 12 कैंडल्स में टूट चुकी है। यानी सेम टाइम फ्रेम है बस वो 12 कैंडल्स में डिवाइड हो गया है क्योंकि हम 5 मिनट के टाइम फ्रेम की कैंडल देख रहे हैं। तो अब हमें वेट करना है कि कहीं ना कहीं पर लिक्विडिटी स्वीप हो। अगर मान लीजिए नीचे की साइड से लिक्विडिटी स्वीप होती है तो हम बाय करने का ट्रेड लेंगे। ऊपर लिक्विडिटी स्वीप होती है तो हम शॉर्ट करने का ट्रेड लेंगे। तो अब हम देखते हैं जब हम 5 मिनट के टाइम फ्रेम पे आ गए तो इसके बाद देखते हैं कि उसके बाद मार्केट में क्या हुआ। तो आप देख सकते हैं कि इसके बाद मार्केट में यहां वाली जो कैंडल आपको दिखाई दे रही है इस वाली कैंडल पर आप ध्यान दीजिए कि यहां पर जो प्राइस है वो सबसे पहले हमारा यह जो लो था इसको ब्रेक करके नीचे जाती है और वापस से इसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है। यानी यह जो लो था इसको स्वीप कर लिया गया है। तो अगर हमें दिखाई दे रहा है कि लो स्वीप किया गया है यानी यहां से अब प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे। तो अब हमें चाहिए होंगे कंफर्मेशन जिसके लिए हम सीआईएसडी और एफपीजी का यूज़ करेंगे। तो इसके बाद आप देख सकते हैं कि यहां पर जो हमारी नेक्स्ट कैंडल थी वो एक बहुत बड़ी ग्रीन कलर की कैंडल बनी थी। तो हमने क्या किया? हमने यहां पर अपना सबसे पहले हम सीएसडी मार्क कर सकते हैं। आप देख सकते हैं ये जो दो रेड कलर की कैंडल बनी है इससे पहली कैंडल यानी ये वाली जो हमारी ग्रीन कैंडल है इस ग्रीन कैंडल के क्लोज से लगते हुए मैं इस तरीके से अपनी एक लाइन ड्रॉ कर सकता हूं। ये क्या होगी? ये होगी मेरी सीआईएसडी लाइन। अब अगर मान लीजिए प्राइस दोबारा से इसके ऊपर आती है तो यहां से हम अपनी एंट्री प्लान कर सकते हैं सीआईएसडी के बेसिस पे। और सीआईएसडी कंफर्म हमारा तभी हो जाता है जब भी कोई कैंडल इसके ऊपर क्लोजिंग दे देती है तो ये कैंडल ने इसके ऊपर क्लोजिंग दे दी है। तो हमारा सीआईएसडी तो कंफर्म हो चुका है। अब देखते हैं कि इसके बाद क्या होता है। तो आप देख सकते हैं कि एक ग्रीन कैंडल बनी थी। लेकिन उसके बाद एक बड़ी सी रेड कलर की कैंडल बनती है। जहां पर जो प्राइस है वो हमारा जो ये सीआईएसडी लेवल था इसको टच कर लेती है। तो आप चाहें तो आप यहां से भी अपनी एंट्री प्लान कर सकते थे। तो अगर मान लीजिए आप यहां से एंट्री प्लान करते तो इधर पे आपकी एंट्री हो जाती। आपका जो स्टॉप लॉस होता वह तो यह देखिए यह जो स्विंग लो है इससे थोड़ा सा नीचे यहां पर आपको रखना होता और टारगेट के लिए आप 1:2 लेकर चल सकते थे। वैसे तो देखिए यहां पर जो पहला टारगेट होता है ना वो हमारा स्विंग हाई होता है। यानी जहां पे हमारा उस कैंडल का हाई लेवल था। तो पहला टारगेट 1:1 का बन रहा था। लेकिन इसके बाद जो हमारा नेक्स्ट टारगेट था वो हम 1:2 का प्लान कर सकते थे। तो अब 1:2 का जो हमारा टारगेट था वो करीब-करीब यहां पे बनता। तो एक तो यह तरीका था जिसके बेसिस पे आप चाहते तो अपना ट्रेड प्लान कर सकते थे। या फिर अगर मान लीजिए कि आप इसके बाद वेट करते या किसी रीजन से आपने वहां पर ट्रेड नहीं लिया तो फिर अब आपको यहां पर एक एफपीजी भी दिखाई दे रहा है जिसके बेसिस पे भी आप ट्रेड ले सकते थे। जैसे यहां पर आपने देखा कि एक नॉर्मल से बड़े साइज की ग्रीन कलर की कैंडल बनी है। तो उससे पहले वाली कैंडल के हाई से लगते हुए बाद वाली कैंडल के लो से लगते हुए हमने एक एरिया ड्रॉ किया जो क्या है जो कि हमारा एक फेयर वैल्यू गैप है। तो यहां पर हमारा फेयर वैल्यू गैप बन रखा है तो हम इसके बेसिस पे एंट्री ले लेते। मान लीजिए जैसे ही प्राइस इस लेवल पे आ गई हमने यहां पर कहीं पे अपनी एंट्री ले ली होती। हम चाहे यहां से भी ले सकते हैं, बीच से भी ले सकते हैं। वो अपने ऊपर होता है। मान लीजिए यहां से मैंने अपनी एंट्री ली। अपना स्टॉप लॉस यहां पे रखा और टारगेट के लिए पहला टारगेट अगेन मैंने आपको बताया कि यहां तक रखते या फिर 1:2 लेकर जाना चाहते तो आपका जो टारगेट होता वो करीब-करीब यहां पे होता। अब इसके बाद देखते हैं कि मार्केट में क्या हुआ था। देखिए प्राइस कई बार हमारे इस लेवल के पास आई थी और उसके बाद यहां पे जाके आप देख सकते हैं कि हमारा जो टारगेट था वो ऑलमोस्ट हमें 1:22 का मिल गया था। तो यहां पर मैंने आपको एक एग्जांपल दे दिया है जिसमें बाय करने का ट्रेड आप कैसे ले सकते हैं? हैं सिल्वर बुलेट के बेसिस पे। अब शॉर्ट करने का ट्रेड कैसे लेना है? चलिए वह भी समझ लेते हैं। तो इसके लिए मैं दूसरा चार्ट ओपन कर लेता हूं। तो यहां पर एक और एग्जांपल है जिसमें आप देख सकते हैं कि हमने क्या किया है? हमने सेम वही जो टाइम फ्रेम आपको बताया था 6:30 से 7 1:30 का इसके हाई एंड लो से लगते हुए ये जो 1 घंटे की कैंडल है इसको मार्क कर दिया है। इसके बाद हम आ जाते हैं अपने 5 मिनट के टाइम फ्रेम पे। जैसे ही 5 मिनट के टाइम फ्रेम पे आते हैं। वही जो एक कैंडल थी वो हमारी कितनी कैंडल्स में टूट चुकी है? 12 कैंडल्स में टूट चुकी है। अब हमें वेट करना है। अगर ऊपर का स्वीप होगा तो फिर शॉर्ट करने का ट्रेड बनेगा। नीचे का स्वीप होगा तो बाय करने का ट्रेड बनेगा। तो इसके बाद देखते हैं क्या हुआ। इसके बाद आप देख सकते हैं कि अगली ही कैंडल में अगर मैं यहां पे थोड़ा सा आगे बढ़ गए हैं आपको समझाने के लिए। यहां पे आप देख सकते हैं कि यह जो हमारी ठीक नेक्स्ट वाली कैंडल बनी है, इस कैंडल में क्या हुआ? प्राइस पहले थोड़ा सा ऊपर गई। यहां पर आप देख सकते हैं हाई बना रखा है प्राइस ने इस लेवल पे। तो प्राइस पहले थोड़ा सा ऊपर गई है और उसके बाद प्राइस ने इसके नीचे क्लोजिंग दे दी है। यानी यहीं पर हमारा स्वीप हो चुका है। तो अब जब स्वीप हो गया है तो हमें अब वेट करना है कि सीआईएसडी हो जाए या एफवीजी के बेसिस पे हमें एंट्री मिले। तो अब देखते हैं कि इसके बाद क्या हुआ? तो यहां पर आप देख सकते हैं कि यह वाली जो हमारी रेड कैंडल है इस रेड कैंडल के क्लोज से लगते हुए हमने अपनी यहां पर लाइन ड्रॉ कर ली। क्योंकि आप देख सकते हैं यहां पर मूव आया था। तो इससे पहले वाली कैंडल यानी इस रेड कैंडल के क्लोज से लगते हुए हमारा इस तरीके से हमने सीआईएसडी लाइन ड्रॉ की है। आप चाह तो यहां पर मैं लिख भी देता हूं सीआईएसडी। तो अब इसके बाद अगर कोई भी कैंडल इसके नीचे क्लोजिंग दे देती है तो हमारा जो सीआईएसडी है वो कंफर्म हो जाएगा। यहां पर आप देख सकते हैं हमारा सीआईएसडी कंफर्म हो चुका है। अब इसके बाद मान लीजिए प्राइस दोबारा से इस लेवल पे आती तो हम इसके बेसिस पे भी एंट्री ले सकते हैं। लेकिन इसके बाद नेक्स्ट में क्या हुआ? यहां पर आप देख सकते हैं नेक्स्ट में एक और हमारे सामने कैंडल बन गई है। जिस कैंडल के साथ हमें एक एफपीजी बनता हुआ नजर आ गया। क्योंकि यह एक नॉर्मल से बड़े साइज की कैंडल थी। तो हमने क्या किया? हमने इससे पहले वाली कैंडल यानी ये रेड कैंडल के लो से लगते हुए बाद वाली कैंडल यानी ग्रीन कैंडल के हाई से लगते हुए इस तरीके से एक एरिया ड्रॉ कर लिया जो कि हमारा एफवीजी था। तो अब या तो प्राइस सीएसडी पे आए हम तब एंट्री ले लेंगे या फिर प्राइस दोबारा से जब एफवीजी को टैप करे तब भी हमारी एंट्री बन जाएगी। तो अब जो हमारी नेक्स्ट कैंडल है इसमें आप देख सकते हैं प्राइस एफवीजी के पास आई थी। यानी हम क्या कर सकते थे? हम यहीं पर अपनी शॉर्ट करने की एंट्री प्लान कर सकते थे। हमारा स्टॉप लॉस ये जो स्विंग हाईएस्ट से थोड़ा सा ऊपर होता और रही बात टारगेट की तो हम 1:2 का टारगेट लेकर चल सकते थे। तो वो जो हमारा 1:2 का टारगेट था वो करीब-करीब यहां पे होता। अब इसके बाद देखते हैं कि क्या टारगेट हिट होता। हमारा जो टारगेट है प्राइस अभी तो फिलहाल उस पे नहीं पहुंची है। तो इसके बाद आप देख सकते हैं प्राइस एक बार पहले भी इसके टारगेट के पास तक आई थी। तो आप चाहते तो आप वहां पे भी अपना टारगेट हिट कर सकते थे। लेकिन इसके बाद क्या होता है यहां पर सीधा गैप डाउन ओपनिंग होती है और इसके बाद जो प्राइस है वह हमारे टारगेट से भी आगे निकल जाती है। मतलब आपको अच्छा खासा टारगेट यहां पर भी मिल सकता था। तो इसी तरीके से यह जो सिल्वर बुलेट स्ट्रेटजी है यह काम करती है। अब चलिए दूसरी स्ट्रेटजी जो वेनम मॉडल है उसके बारे में जानते हैं। वीडियो पसंद आ रही है तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर दीजिएगा। तो ये जो वेनम मॉडल है इसमें हम क्या करते हैं? हमने इससे पहले आपको सेशंस के बारे में बता रखा है। एशिया सेशन होता है, न्यूयॉर्क सेशन होता है, लंदन सेशन होता है। तो हम क्या करते हैं? जैसे ही किसी भी सेशन की स्टार्टिंग होती है, उस स्टार्टिंग में हम वेट करते हैं कि प्राइस किसी हाई या लो रेंज को स्वीप करे। स्वीप के बाद हम वेट करते हैं कि या तो प्राइस में कहीं पर हमें सीआईएसडी देखने को मिले या फिर इनवर्स फेयर वैल्यू गैप के बेसिस पे हमें एंट्री मिल जाए। तो चलिए इसको भी सीधा चार्ट पे देखते हैं। तो इस स्ट्रेटजी में हमें क्या करना है कि जब भी कोई नया सेशन शुरू होने वाला होता है जैसे लंदन सेशन जब शुरू हो रहा होगा या न्यूयॉर्क सेशन शुरू हो रहा होगा तो उसके शुरू के एकद घंटे में मार्केट में सबसे ज्यादा वोलेटिलिटी होती है। इसलिए हमें क्या करना है? जब वो सेशन शुरू होता है उससे पहले का जो स्विंग हाई या स्विंग लो होगा उसको मार्क करना है। जैसे यह है हमारा स्विंग लो तो हमने स्विंग लो मार्क कर रखा है और यहां पर हमें स्विंग हाई दिखाई दे रहा है तो हमने स्विंग हाई भी मार्क कर रखा है। अब इसके बाद जब सेशन शुरू होता है तब हमें देखना है कि किस साइड पे स्वीप हो रहा है और फिर हम अपनी स्ट्रेटजी बनाएंगे। अब सेशन आप चाहें तो आपको टाइमिंग पता है। हमने आपको बेबी वेबसाइट में दिखाया भी था कि कैसे आप टाइमिंग वहां पे मार्क कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए एक इंडिकेटर भी आता है जिससे आपको खुद से मैनुअली टाइमिंग मार्क नहीं करनी पड़ेगी। आप वहां पर यह जो इंडिकेटर है आपकी हेल्प कर सकता है। तो इंडिकेटर को लगाने के लिए आपने इंडिकेटर वाले सेक्शन पे जाना है और यहां पर जाकर आपने लिखना है आईसीटी किल ज़ों्स। यहां पर आपको आईसीटी किल ज़ोन प्लस पवट दिखाई दे रहा है ट्रेड फॉर ओपीपी का। ये आपने लगा देना है। अब जैसे ही आप चार्ट पे लगा देते हैं तो जो भी इंपॉर्टेंट ज़ोंस होते हैं किसी पर्टिकुलर सेशन के वो यहां पे मार्क कर देता है। जैसे देखिए एशिया इसने मार्क कर रखा है। लंदन मार्क कर रखा है। ऐसे ही यहां पर आपको न्यूयॉर्क दिखाई दे रहा है। मतलब जितने भी इंपॉर्टेंट सेशंस हैं वो सारे यहां पर मार्क किए जा रहे हैं। तो ऐसे ही अब इसके बाद मान लीजिए कोई सेशन बनेगा तो वह भी यहां पर आपको मार्क करके दिखा दिया जाएगा। तो अब देखते हैं कि इसके बाद मार्केट में क्या होता है। हमने तो अभी फिलहाल अपना हाई एंड लो मार्क करके रखा है। तो यहां पर इसके बाद आप देख सकते हैं कि हमारा यह जो न्यूयॉर्क सेशन है वो शुरू हो गया। यहां पर आपको दिखाई दे रहा है न्यूयॉर्क सेशन हमारा शुरू हुआ। तो इसने इंडिकेटर ने हमें मार्क करके दिखा दिया कि भाई सेशन शुरू हो चुका है। तो अब इसके बाद हमें दिखाई देता है कि जैसे ही सेशन शुरू हुआ तो यहां पर यह जो नीचे आपको एरिया दिखाई दे रहा है ना यहां पर हमें दिखाई दे रहा है कि इसने [संगीत] स्वीप कर दिया है। अब देखिए ये था लो प्राइस इस लो से नीचे गई। फिर वापस से इसके ऊपर क्लोजिंग दे दी। इसका मतलब यहां पर स्वीप हो चुका है। तो अब जब स्वीप हो चुका है तो अब हम क्या कर सकते हैं? अब हम हमें पता है कि नीचे स्वीप हुआ है तो हम बाय करने का ट्रेड प्लान करेंगे। अब वो ट्रेड हम सबसे पहले हमें कंफर्मेशन चाहिए होता सीआईएसडी का कि भाई एक्चुअल में चलो स्वीप हो गया है लेकिन मार्केट ऊपर जा रहा है या फिर नहीं जा रहा है। तो हम क्या करेंगे? हम सबसे पहले यहां पर सीआईएसडी मार्क करेंगे। तो सीआईएसडी के लिए आप देख सकते हैं कि यहां से एक इंपल्सिव डाउन साइड का मूव आया था। तो इससे लगते हुए हमने लाइन ड्रॉ की। जैसे ही किसी कैंडल ने इसके ऊपर क्लोजिंग दे दी है तो इसका मतलब क्या है? इसका मतलब हमारा सीआईएसडी कंफर्म हो चुका है। तो हमें यह कंफर्मेशन हो चुकी है कि जो हम सोच रहे हैं कि नीचे स्वीप हुआ है प्राइस ऊपर जाएगी वो बिल्कुल सही सोच रहे हैं क्योंकि यहां पर सीआईएसडी भी हो गया है। अब हमें चाहिए एंट्री। तो एंट्री के लिए हम यहां पर आईएफजी का यूज़ कर सकते हैं। आईएफजी क्या होता है? मैं आपको पहले भी बता चुका हूं। जब भी आपको दिखाई देता है कि इंपल्सिव डाउन साइड का मूव आया। आपने क्या किया? हाई एंड लो से रखते हुए एरिया ड्रॉ किया। लेकिन अगर मान लीजिए इसके ऊपर कोई कैंडल क्लोज दे देती है तो यहां पर क्या होता है यहां पर हमारा जो डाउन साइड का यानी बियरिश फेयर वैल्यू गैप था अब वो बुलिश इनवर्स फेयर वैल्यू गैप बन गया है क्योंकि ये वाली जो ग्रीन कैंडल है इसने इसके ऊपर क्लोजिंग दे दिया है तो अब हम क्या कर सकते थे अब हम जैसे ही इसके बाद हमें पता है कि सीएसडी हो चुका है और प्राइस अब मान लीजिए इस आईएफजी पे आती तो हम अपनी यहां पर एंट्री प्लान कर सकते थे और इसके बाद आप देख सकते हैं कि जो प्राइस है वो वापस से आईएफजी लेवल पे आई है तो यहां पर हमारी एंट्री होती हमारा जो स्टॉप लॉस होता वो यह जो स्वीप हुआ था जहां पर इससे थोड़ा सा नीचे होता और टारगेट के लिए हम 1:2 लेकर चल सकते थे और इसके बाद आप देखेंगे कि यहां से जो प्राइस है वो बढ़ गई थी और सीधा हमारे टारगेट से भी काफी ऊपर निकल चुकी थी। तो इस तरीके से आप वेनम मॉडल का यूज कर सकते हैं। अब अगर मान लीजिए आपको चार्ट यहां पर थोड़ा बहुत कंफ्यूजिंग लग रहा है तो जब एक बार आपने यहां पर देख लिया कि स्वीप हो चुका है सेशन स्टार्ट हो चुका है। तब आप क्या कर सकते हैं कि जो इंडिकेटर आपने लगा रखा है आप इस इंडिकेटर को यहां पर पर्टिकुलर टाइम के लिए हाइड कर सकते हैं। तो अब क्या किया जब हमें पता है कि यहां पर हमारा सेशन में स्वीप हो गया है। तो अब इंडिकेटर की हमें जरूरत नहीं है। तो हमने वहां पर इंडिकेटर हाइड कर दिया। बाद में जब आपको देखना है वापस आप ऐसे शो भी कर सकते हैं। तो इस तरीके से आपके लिए इंडिकेटर काफी हेल्प कर देते हैं। बाकी मैंने बताया इंडिकेटर की उतनी जरूरत नहीं है। आपको जब टाइमिंग पता होगी तो फिर आपको इंडिकेटर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तो अब जब मैंने आपको सारी चीजें सिखा दी हैं। तो अब मैं आपको बताता हूं कि ट्रेड आखिर लेना कैसे है आईसीटी का यूज़ करके। तो ये जो कंप्लीट आईसीटी का मॉडल मैं आपको अभी चार्ट में दिखाने वाला हूं। सारी चीजें इसमें चार्ट में ही दिखाएंगे। तो यहां पर सबसे पहले हम मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस करेंगे। उसके बाद मैं आपको मार्केट का नरेटिव समझना सिखाऊंगा। फिर लिक्विडिटी मैपिंग करेंगे। फिर प्रीमियम डिस्काउंट देखेंगे। पीओआई सेलेक्शन करेंगे। कंफर्मेशन देखेंगे और उसके बाद एग्जीक्यूशन कैसे करना है ये सब कुछ समझेंगे। तो चलिए सीधा चार्ट पे चलते हैं। लेकिन उससे पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अकाउंट ओपन कर सकते हैं। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके अपना अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से अराई का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलता है। उसके लिए नीचे Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। उसको जरूर फिल कर लीजिएगा। चलिए अब हम आ चुके हैं चार्ट पे और अब समझते हैं पूरे जो कांसेप्ट है उसको एक ही चार्ट पे एक ही जगह पे बताऊंगा। यह बहुत ज्यादा डीप होने वाला है। तो अगर आपको इससे पहले के कांसेप्ट की नॉलेज नहीं है तो थोड़ा बहुत आपके दिमाग के ऊपर से जा सकता है। लेकिन इसके बाद आप सारी चीजों को जब दोबारा से ध्यान से देखेंगे तब आपको ये और बेटर समझ आएगा। तो अभी भी आप देख सकते हो। तो जैसा कि मैंने आपको बताया कि जब भी आप किसी चार्ट का एनालिसिस करना चाहते हैं मान लीजिए यहां पर कहीं पे आप अपना ट्रेड लेना चाहते हैं और उसके लिए आपको एनालिसिस करना है आप पहली बार चार्ट को देख रहे हैं चार्ट में कुछ भी नहीं है मान लीजिए तो अब आप अपना एनालिसिस कैसे करेंगे ये सारे जो कांसेप्ट सिखाए हैं उनका इस्तेमाल करते हुए ये अब हम समझेंगे तो इसके लिए मैंने आपको बताया कि पहले बड़े टाइम फ्रेम पे जाना होता है तो आप अपने हिसाब से बड़ा टाइम फ्रेम सेलेक्ट कर सकते हैं। हमने आपको बताया आप 4 घंटे के टाइम फ्रेम में देख सकते हैं। 1 घंटे के टाइम फ्रेम में, 2 घंटे के टाइम फ्रेम में यह बड़े टाइम फ्रेम आपके हो सकते हैं। जिसमें आप मार्केट को समझते हैं, अपना बायस बनाते हैं। और उसके बाद जो आपकी एंट्री होती है वो आप छोटे टाइम फ्रेम में करते हैं। जो कि हो सकता है आप 15 मिनट के टाइम फ्रेम में एंट्री करें, 5 मिनट के टाइम फ्रेम में एंट्री करें। मतलब एक बड़ा टाइम फ्रेम आपको देखना है। एक छोटा टाइम फ्रेम आपको देखना है। तो यहां पर जो बड़ा टाइम फ्रेम हम यूज़ करने वाले हैं यानी हायर टाइम फ्रेम जो होगा वो होगा हमारा वन ऑवर का टाइम फ्रेम। तो अभी हमने 1 घंटे के टाइम फ्रेम में आपके सामने चार्ट ओपन कर रखा है। और इस चार्ट में हमने सबसे पहली चीज क्या मार्क कर रखी है वो मैं आपको बता देता हूं। तो सबसे पहली चीज हमने यहां पर मार्क कर रखा है एक हाई लेवल। ये हाई लेवल कौन सा हाई लेवल है? ये है हमारा एक लिक्विडिटी लेवल। और जब ये ऊपर की साइड लिक्विडिटी लेवल होता है, इसको हम कहते हैं बाय साइड लिक्विडिटी। और ये बाय साइड लिक्विडिटी क्यों है? क्योंकि जिन भी ट्रेडर्स ने यहां पर शॉर्ट किया होगा उनका स्टॉप लॉस इसके ऊपर होगा। और वो स्टॉप लॉस कैसा होगा? वो बाय करने का स्टॉप लॉस होगा। इसलिए इसको बाय साइड लिक्विडिटी कहा जाता है। और यहां पर देखिए ये जो स्विंग लो है वो हमें यहां पे नजर आ रहा है। तो अब ये जो हमें लेवल नजर आ रहा है ये क्या है? [संगीत] ये है हमारा लो लेवल। तो यहां पे होगी हमारी सेल साइड लिक्विडिटी। क्योंकि जिसने भी यहां पर बाय किया होगा उसके [संगीत] थोड़ा नीचे उसने अपना स्टॉप लॉस रखा होगा और वो स्टॉप लॉस कैसा स्टॉप लॉस होगा वो होगा उसका सेल करने का स्टॉप लॉस। इसलिए यहां पर जो लिक्विडिटी होती है उसको सेल साइड लिक्विडिटी कहा जाता है। [संगीत] तो यह बेसिक सी चीज़ मैंने मार्क कर रखी है। बेसिकली स्विंग हाई और स्विंग लो मार्क कर रखा है। तो इतना तो आपको समझ आ गया है। अब थोड़ा सा चार्ट को जब आप बड़े टाइम फ्रेम पे ही ध्यान से देखोगे तो आपको यहां पर दिखाई देगा कि भई यहां पर मार्केट ना थोड़ा साइडवेज चल रहा था। यानी [संगीत] ये जो एरिया पे मार्केट साइडवेज चल रहा था ये क्या था? यहां पर मार्केट एक्यूमुलेशन कर रहा था। हमने आपको पावर ऑफ थ्री के बारे में बताया ना कि सबसे पहले मार्केट क्या करता है? मार्केट लिक्विडिटी को एक्यूमुलेट करता है। तो वह सब यहां पर हुआ जब मार्केट जो है वह साइडवेज चल रहा है। तो यहां पर हम क्या करते हैं? यहां पर हम अपना एक्यूमुलेशन लेवल भी मार्क कर सकते हैं। ज़ोन मार्क कर सकते हैं। [संगीत] देखो मेरे को आपको समझाना है तो मैं हर एक चीज मार्क कर रहा हूं। हर एक चीज करके दिखा रहा हूं। जब आपको नॉलेज हो जाएगी तो आप झटके में एक चीज देखेंगे। आपको मार्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बट मुझे आपको समझाना है तो मुझे तो हर एक चीज मार्क करनी पड़ेगी। तभी आपको चीजें समझ आएंगी। इसलिए हम सब कुछ मार्क करके दिखा रहे हैं। जिसके बाद हो सकता है आपको चार्ट में बहुत सारी चीजें देखने को मिले और अगर आप आगे बढ़ के जाएंगे या टूट को देखेंगे तो फिर आपको थोड़ा कंफ्यूजन हो सकता है। इसलिए इसको बहुत ध्यान से देखिए। साथ में नोट्स भी बनाओगे स्लो स्लो देखोगे तो बेटर रहेगा। तो यहां पर ये जो मैंने ज़ोन मार्क किया है ये [संगीत] क्या है? ये है हमारा एक्यूमुलेशन ज़ोन। अब बेसिकली इसके ऊपर ये जो लेवल है इसके ऊपर भी लिक्विडिटी होगी। मतलब यहां पर भी लिक्विडिटी होगी और ये जो हमारा नीचे वाला लेवल है यहां पर भी लिक्विडिटी होगी। तो ये भी लिक्विडिटी के ज़ोंस हैं। तो सबसे पहले मार्केट क्या करता है? मार्केट एक्यूमुलेशन करता है और उसके बाद होता है मैनपुलेशन। तो अब देखिए यहां पर क्या हुआ? यहां पर हुआ है मैनपुलेशन। मार्केट ने ये जो लेवल मार्क किया था ना नीचे का [संगीत] इस लेवल को ब्रेक कर दिया। मतलब यहां पर जिन भी लोगों ने अपने ट्रेड ले रखे होंगे उनके स्टॉप लॉस हिट करवा दिए। तो यहां पर एक्चुअल में क्या हुआ है? नीचे का लेवल ब्रेक हुआ है और उसके बाद आप देखोगे ना तो यहां पर प्राइस वापस से इस लेवल के अंदर आ गई है। तो वापस से इस लेवल के अंदर आई मतलब ये एक्चुअल में एक मैनपुलेशन था और जब नीचे की लिक्विडिटी स्वीप की जाती है। मैनपुलेशन में बेसिकली लिक्विडिटी स्वीप तो की जा रही है ना जो यहां पर लिक्विडिटी थी उस लिक्विडिटी को ही तो यहां पर मार्केट ने ले लिया। जिन लोगों के स्टॉप लॉस यहां पे लगे थे उन्हीं स्टॉप लॉस को तो यहां पर खा लिया गया है। तो इसीलिए ये क्या हुआ? ये लिक्विडिटी [संगीत] स्वीप हुआ जो कि कहां पे हुआ है? नीचे की साइड हुआ है और अगर नीचे की साइड हुआ है तो यहां से प्राइस के क्या होंगे? बढ़ने के चांसेस होंगे जो कि आपको अभी दिखाई भी दे रहा है। और इसके साथ ही आप देख सकते हैं कि यहां पर ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर भी हुआ है। तो अब यहां पर यह जो मैनपुलेशन जहां पर हुआ है इसको भी हम मार्क कर लेते [संगीत] हैं। ये एक्यूमुलेशन था और यह हो चुका है यहां पर मैनपुलेशन। इसको भी हमने मार्क कर लिया। अब ये एक्चुअल में मैनपुलेशन था या नहीं। एक तो हमें पता चल गया कि भाई प्राइस इस लेवल पे आ चुकी है। ठीक है? लेकिन कई बार क्या होता है प्राइस यहां पर आने के बाद फिर से नीचे चली जाती है। लिक्विडिटी रन हो जाता है। तो ये ऐसा है या नहीं हमें कैसे पता चलेगा? तो इसके लिए हमें क्या करना है? हमें सीआईएसडी का यूज़ करना है। हमने बहुत बार आपको सीआईएसडी के बारे में बता रखा है। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि मार्केट ने एक इंपल्सिव मूव दिया है। तो जहां पर इंपल्सिव मूव दिया है, हम उस ज़ोन से लगते हुए क्या कर सकते हैं? एक लाइन ड्रॉ कर सकते हैं। तो यहां पर हम एक लाइन ड्रॉ करेंगे। ये क्या है? ये है हमारी सीआईएसडी [संगीत] लाइन। तो जैसे ही हमने देखा कि कैंडल ने इसके ऊपर क्लोजिंग दे दिया है। इसका मतलब हम कंफर्म हो गए कि यहां पर सीआईएसडी हो गया है। तो देखिए जब हमें दिखाई देता है कि यहां पर सीआईएसडी हो गया है। तो बेसिकली हम कंफर्म हो चुके हैं कि एक्चुअल में मार्केट ने मैनपुलेशन किया है। तो अब हम क्या कर सकते हैं? अब हम यहां पर अपना बायस बना सकते हैं कि अगर [संगीत] नीचे की साइड का लिक्विडिटी स्वीप हुआ है। उसके बाद हमें बड़े टाइम फ्रेम में सीआईएसडी देखने को भी मिल गया है। तो इसका मतलब यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस होंगे। तो मैं यहां पे अपना बायस बनाऊंगा कि भाई अगर मैं ट्रेड लूंगा तो मैं सिर्फ बाय करने का ट्रेड लूंगा। लेकिन वो ट्रेड मैं बड़े टाइम फ्रेम में नहीं लूंगा। मैं छोटे टाइम फ्रेम में लूंगा। तो अब जब हम लोअर टाइम फ्रेम में आए जो कि हमारा 15 मिनट का टाइम फ्रेम है। तो यहां पर हमने देखा कि प्राइस ने यह जो लो बनाया था इसको स्वीप कर दिया है। मैं यहां पे लो मार्क भी कर देता हूं। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि प्राइस पहले थोड़ा सा इसके नीचे आई और उसके बाद कैंडल ने इसके ऊपर क्लोजिंग दे दी है। मतलब हमें यहां पर छोटे टाइम फ्रेम में भी स्वीप देखने को मिला है और वह स्वीप कहां पर हुआ है? वह नीचे की साइड हुआ है। मतलब अगेन यहां से प्राइस के बढ़ने के चांसेस हैं। यह चीज़ हमें क्लियर हुई। इसके अलावा हमने यहां पर ढूंढा कि क्या कोई हमें पीडी एरे देखने को मिल रहा है। तो हमें यहां पर एक फेयर वैल्यू गैप देखने को मिल रहा है। तो आप देख सकते हैं इससे पहले वाली कैंडल के हाई से लगते हुए बाद वाली कैंडल के लो से लगते हुए हम यहां पर अपना एक एरिया ड्रॉ कर लेते हैं। ये क्या है? ये है हमारा फेयर वैल्यू गैप। तो हमें यहां पर एक फेयर वैल्यू गैप भी देखने को मिल रहा है। हो सकता है जब आप ट्रेड करें आपको कोई ऑर्डर ब्लॉक देखने को मिल रहा हो या फिर कुछ और देखने को मिल रहा हो। तो जो भी आपको देखने को मिल रहा है वो आप यहां पर मार्क कर सकते हैं। तो अब जब यहां पर आपको एक एफपीजी देखने को मिल रहा है। आपको यहां पर स्वीप भी देखने को मिल गया है। तो अब आप क्या कर सकते थे? आप सीधा वेट करते प्राइस इस एफपीजी पे आए और यहां पर आप अपनी बाय करने का ट्रेड प्लान कर सकते थे। आपका जो स्टॉप लॉस होता वो ये जो स्विंग लो है इससे थोड़ा सा नीचे होता। अब इसके [संगीत] बाद देखते हैं कि प्राइस यहां पर आई थी या नहीं आई थी। और जो आपका टारगेट होता वो आप 1:2 का टारगेट लेकर चल सकते थे। तो आप देख सकते हैं कि प्राइस अगली ही कैंडल में यहां पे आई। बिल्कुल हमारे [संगीत] एफवीजी पे आई और उसके बाद प्राइस ऊपर जाने लग गई है। तो अब आप देख सकते हैं कि प्राइस जब ऊपर जा रही है तो हम 1:2 इसको मार्क कर देते हैं। अब देखते हैं कि प्राइस क्या हमारे टारगेट तक गई थी। बिल्कुल आप देख सकते हैं टारगेट से भी काफी ऊपर जाकर निकल गई थी। तो एक तरीका ये हो सकता था जिसके बेसिस पे आप ट्रेड ले लेते। बिल्कुल सिंपल सा हमने ज्यादा चीजें अभी इसमें नहीं घुसाई है। आप जो चाहे वो घुसा सकते हैं। आपको इतने सारे कांसेप्ट हमने आपको बताए हैं। तो आप ये कभी यूज़ कर लो, कभी ये यूज़ कर लो, कभी हो सकता है ये अप्लाई हो रहा हो, कभी ये अप्लाई हो रहा हो। तो अब चलिए और एग्जांपल देखते हैं। इसके अलावा देखिए यहां पर अगर मैं कोई और कांसेप्ट भी लगाता जैसे अगर मैं ओटीई लगाता तो यहां पर हम स्विंग लो से लेके स्विंग [संगीत] हाई तक अपना ओटीई मार्क करते ऑप्टिमल ट्रेड एंट्री हम आपको ऑलरेडी बता चुके हैं और उसमें हमने आपको बताया था कि ये जो 0.62 या 0.79 का लेवल है वहां पर आप एंट्री ले सकते हैं। आप देख सकते हैं प्राइस बिल्कुल हमारे 0.62 के लेवल के पास आई है। साथ ही हमें यहां पर एफजी भी देखने को मिल रहा था। तो ये हमारी एक हाई प्रोबेबिलिटी एंट्री ज़ोन ऐसे भी बन रहा था। मतलब ओटीई को भी आप चाहे तो यहां पर लगा सकते थे। तो इतनी सारी चीजें आपने ओटीई लगा लिया, एफपीजी लगा लिया या कोई भी कांसेप्ट जो वहां पे अप्लाई हो रहा है वो आपने लगा लिया। तो एक एग्जांपल तो आपने देख लिया। अब चलिए वापस से बड़े टाइम फ्रेम पे चलते हैं और मैं आपको दूसरा एग्जांपल दिखाता हूं और ये जो इतना सारा हमने मार्क रखा है इसको रिमूव कर देते हैं ताकि आपको चीजें ईजीली नजर आए। [संगीत] तो अब चलते हैं हम सीधा 1 घंटे के टाइम फ्रेम पे और यह जो खिचड़ी पकाई है इसको हम यहां पर रिमूव कर रहे हैं ताकि हम आपको ईजीली एक्सप्लेन कर सकें। आपको समझा सकें और मैं अगेन आपको क्लियर कर रहा हूं कि ये सारी चीजें इसलिए बार-बार मार्क कर रहा हूं ताकि मैं आपको समझा सकूं। हर एक चीज [संगीत] मार्क करूंगा तभी आपको चीजें समझ आएंगी और मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं कि जितनी आसान लैंग्वेज मैं आपको समझा सकूं उतनी आसान लैंग्वेज में मैं आपको समझाऊं। तो अब जब हम वापस से बड़े टाइम फ्रेम में यानी 1 घंटे के टाइम फ्रेम में आ चुके हैं तो यहां पर हमने देखा कि मार्केट ने अभी ना तो सेल साइड लिक्विडिटी को लिया है ना तो बाय साइड लिक्विडिटी को लिया है और मार्केट जो है वो अभी बीच में कहीं पे घूम रहा है। तो अब हमें वेट करना है कि मार्केट बाय साइड लिक्विडिटी को लेता है या सेल साइड लिक्विडिटी को लेता है। हम यह भी देख सकते हैं। तो चलिए देखते हैं कि इसके बाद मार्केट में क्या हुआ। तो यहां पर आप देख सकते हैं मार्केट जो है वो हमारा यह जो बाय साइड लिक्विडिटी हमने मार्क कर रखी थी इससे ऊपर निकल गया और वापस से इसके नीचे आ गया। मतलब क्या किया? उसने यह जो बड़े टाइम फ्रेम की बाय साइड लिक्विडिटी थी, इसको स्वीप कर दिया। तो अब जब हमें दिखाई दे रहा है कि मार्केट ने बाय साइड लिक्विडिटी को स्वीप कर दिया है, तो हमें पता है कि अब यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस हैं और हमें पता है कि मार्केट लिक्विडिटी टू लिक्विडिटी मूव करता है। यानी अब मार्केट के सेल साइड लिक्विडिटी को लेने के चांसेस होंगे। तो बड़े टाइम फ्रेम में हमें यह पता चल गया है कि यहां से हमारा बायस क्या बन रहा है। जब ऊपर की लिक्विडिटी को मार्केट ने ले लिया तो हमारा बायस बनता है कि प्राइस के अब गिरने के चांसेस हैं। तो अगर प्राइस के गिरने के चांसेस हैं तो फिर हम क्या करेंगे? हम सिर्फ शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान करेंगे। तो हमने यहां पर यह तो देख लिया है कि मार्केट ने ऊपर से नीचे आ गया है। लिक्विडिटी को स्वीप कर लिया है। लेकिन कंफर्मेशन के लिए हम यहां पर सीएसडी देख लेते हैं। तो आप देख सकते हैं कि ये जो हमारी रेड कैंडल है इसके क्लोज से लगते हुए हमने लाइन ड्रॉ की जो कि हमारी सीएसडी लाइन है। और ये वाली जो कैंडल है इसने इसके नीचे क्लोजिंग दे दी है। इसका मतलब हमारा सीआईएसडी भी कंफर्म हो चुका है। तो हमारा जो बायस्ड है कि यहां से प्राइस गिर सकती है। जो हम शॉर्ट करने का ट्रेड प्लान कर रहे हैं वो बहुत हद तक सही है। यह हमें समझ आ गया है हमारे बड़े टाइम फ्रेम में। अब वापस से छोटे टाइम फ्रेम में जाएंगे और वहां पर अपने ट्रेड को प्लान करेंगे। तो अब चलते हैं छोटे टाइम फ्रेम में। लेकिन उससे पहले देखिए यहां पर मुझे एक एफपीजी देखने को मिल रहा है जो कि एक बेयरिश एफपीजी है। तो हमने क्या किया? हमने उस एफवीपीजी को भी यहां पर मार्क कर लिया है। तो इससे हमें पता रहेगा कि ठीक है इस जगह पे एफपीजी है जो कि हमारे ट्रेडिंग में काफी हेल्प करेगा। तो अब चलिए छोटे टाइम फ्रेम में चलते हैं। यानी 15 मिनट के टाइम फ्रेम में हम यहां पर आ चुके हैं। तो अब जब हम 15 मिनट के टाइम फ्रेम में आ गए हैं और हमें पता है कि हमारा जो बायस है वो बेयरिश है। तो अब हमें बेयरिश ट्रेड लेना है तो उसके लिए हमें चीजें यहां पर ढूंढनी पड़ेंगी। तो अब हम छोटे टाइम फ्रेम पे आ चुके हैं। यहां पर हमने जो एफजी मार्क किया था वो भी हमें दिखाई दे रहा है। साथ ही सीएसडी दिखाई दे रहा है। लेकिन इसके अलावा अब छोटे टाइम फ्रेम में भी मैं अपना सीआईएसडी मार्क करना चाहूं। तो यहां पर आप देख सकते हैं कि यहां से इंपल्सिव मूव आया है। तो लास्ट कैंडल के क्लोज से लगते हुए मैंने लाइन ड्रॉ की। तो ये भी क्या है? यह भी मेरा एक सीआईएस दिया है। तो अब मुझे वेट करना है कि कहां से मार्केट अब रिएक्ट करता है। मतलब यहीं पर हमें पेशेंस रखना होता है और एंट्री आने का वेट करना होता है। तो चलिए देखते हैं कि इसके बाद मार्केट में होता क्या है। उसके बेसिस पे ही हम अपना ट्रेड जो है वो प्लान करेंगे। मतलब मैं यह सोच के चल रहा हूं कि प्राइस जो है वो या तो एफवीजी को टैप करके गिरेगी और अगर सीआईएसडी तक चली जाए तो और ज्यादा हाई प्रोबेबिलिटी एंट्री है मेरी बन जाएगी। तो अब देखिए यहां पर हमें दिखाई दे रहा है कि मार्केट क्या कर रहा है? मार्केट कंसोलिडेट कर रहा है। यानी एक तरह से यहां पर भी एक्यूमुलेशन चल रहा है। और जब एक्यूमुलेशन चलेगा तो फिर क्या होगा? उसके बाद मैनपुलेशन होगा और उसके बाद एक्चुअल मूव आएगा। तो ये हमें एक्यूमुलेशन भी यहां पर साथ-साथ देखने को मिल रहा है। मतलब जितने भी कांसेप्ट मैंने आपको सिखाए हैं सारे यूज हो सकते हैं। ऐसा नहीं है कि मैं कोई चीज मिस कर रहा हूं तो वो आप लगा नहीं सकते। आप वो भी लगा सकते हो। आपकी अपनी-अपनी समझ के हिसाब से हमें ट्रेड्स देखने होते हैं। लेकिन कांसेप्ट जब आपको पता होंगे तभी तो आप उनका यूज कर पाएंगे ना। तो अब चलिए यहां पर हम अपना एक प्रीमियम डिस्काउंट लेवल भी लगा लेते हैं जिससे हमें पता चलेगा कि भाई मार्केट अभी कौन से लेवल पे है और हम क्योंकि शॉर्ट करना चाह रहे हैं तो हम तो प्रीमियम लेवल पे ही शॉर्ट करना चाहेंगे। तो अभी हमें दिखाई देता है कि मार्केट जो है वो डिस्काउंट लेवल पे है और ये जो हमारे एफवीजी वगैरह हैं ये प्रीमियम लेवल पे है। यानी अगर हम यहां पर जाके शॉर्ट करते हैं तो फिर हमारी अगेन जो एंट्री होगी वो एक हाई प्रोबेबिलिटी एंट्री बन जाएगी। तो अब अगेन हम वेट करेंगे और इसके बाद देखेंगे कि मार्केट में क्या होता है। तो आप देख सकते हैं कि जो प्राइस है वह हमारे एफवीजी लेवल पे आ गई है। इवन मुझे लगता है कि यहां से अगर मैं देखूं तो शायद सीआईएसडी लेवल के पास भी बिल्कुल सीआईएसडी लेवल को टैप करके प्राइस यहां से नीचे जा रही है। [संगीत] यानी मैं चाहूं तो एफवीजी पे जैसे ही टैप हुआ वहां पर भी मैं अपनी शॉर्ट करने की एंट्री ले सकता था और अपना जो स्टॉप लॉस था वो इसको थोड़ा सा यह जो हमारा हाई लेवल है इससे थोड़ा सा ऊपर रख सकता था। या फिर जैसे प्राइस अगर मुझे लगता कि सीआईएसडी तक जाएगी तो मैं सीआईएसडी से भी अपनी एंट्री जो है वो इस तरीके से प्लान कर सकता था और मेरा जो टारगेट है वो मैं 1:2 का टारगेट जो है वो लेके चल सकता था या फिर एटलीस्ट जो स्विंग लो होता है वो तो हमारा टारगेट होता ही है। तो देखिए यहां पर हमें एंट्री मिल गई होती। अब इसके बाद देखते हैं कि मार्केट में क्या हुआ था। तो यहां पर आप देख सकते हैं प्राइस एकदम से गिरने लगी और हमारे टारगेट के पास पहुंच गई थी। मतलब आप देख सकते हैं कि बिल्कुल स्नाइपर एंट्री थी। जैसे ही प्राइस पहुंची उसके बाद ही हमें यहां पर मूव देखने को मिला और यह क्या था? यह अगेन एक यहां पर मैनपुलेशन हुआ था और उसके बाद इसको हम एक डिस्ट्रीब्यूशन कह सकते हैं। अब देखिए जब मुझे पता है कि मार्केट ने बाय साइड की लिक्विडिटी ले ली थी। उसके बाद अभी सेल साइड की जो लिक्विडिटी है वो हमारी काफी नीचे है। आप यहां पर देख सकते हैं और मार्केट यहां पर आ रखा है तो हमारा यहां तक जब तक मार्केट है ना तब तक जो बायस है वो हमेशा शॉर्ट करने का ही रहेगा। क्योंकि हमें पता है कि मार्केट इस वाली लिक्विडिटी को लेने आने के जो चांसेस हैं वो बहुत ज्यादा हैं। तो हम शॉर्ट करने के ही यहां पे जो ट्रेड्स हैं उनको प्लान करेंगे। तो इसके बाद देखते हैं कि क्या हमें कोई और अपॉर्चुनिटी देखने को मिल रही है। उसके बेसिस पे हम प्लान कर सकते हैं। तो अब चलिए एक थर्ड एग्जांपल दिखाता हूं जिसमें फिर से हम क्या करेंगे? फिर से हम चलेंगे हायर टाइम फ्रेम में जो कि 1 घंटे का हमारा टाइम फ्रेम है। 1 घंटे के टाइम फ्रेम में हम आ चुके हैं। और यहां पर हम फिर से क्या कर सकते हैं? फिर से अपने लेवल्स मार्क कर सकते हैं या कुछ हमें देखने को मिल रहा है तो वो मार्क कर सकते हैं। जैसे यहां पर मुझे एक चेंज ऑफ करैक्टर देखने को मिल रहा है। तो मैंने क्या किया? मैंने यहां से अपना चेंज ऑफ करैक्टर मार्क कर लिया है कुछ इस तरीके से। [संगीत] तो जैसे ही मेरा यहां पर चेंज ऑफ करैक्टर हो जाता है। तो इसके बाद मुझे पता है कि जो मैं सोच रहा हूं जो मेरा बायस है कि यहां से प्राइस गिरेगी वो बहुत हद तक सही है। यानी अगेन इससे भी मुझे कंफर्मेशन देखने को मिल रहा है कि ठीक है यहां से प्राइस के गिरने के चांसेस होंगे। इसके अलावा मुझे देखना है कि क्या यहां पर कोई और पीडी एरे तो नहीं देखने को मिल रहा है। जैसे यहां पर मुझे एक एफवीजी देखने को मिल रहा है। तो यह एफवीजी मैंने यहां पर मार्क कर दिया है और ये मैंने किया है बड़े टाइम फ्रेम में। अब वापस से इसके बाद चलते हैं अपने छोटे टाइम फ्रेम में जो कि हमारा 15 मिनट का टाइम फ्रेम है। मतलब इसी तरीके से देखो हमारे ट्रेड्स प्लान हो रहे हैं। तो हम 15 मिनट के टाइम फ्रेम में अगेन आ गए हैं। अब हमें पता है कि यह हमारा एफवीजी लेवल है। अब अगर प्राइस इस लेवल पे जाती है तो यहां से हम अपनी शॉर्ट करने की एंट्री प्लान कर सकते हैं। प्राइस ने बिल्कुल एफवीजी लेवल को टैप किया। उसके बाद आप देख सकते हैं प्राइस नीचे आ गई। यहां पर हमने शॉर्ट किया होता। हमारा जो स्टॉप लॉस रहता वो यह वाला जो हमारा हाई लेवल है इससे थोड़ा सा ऊपर रहता और टारगेट के लिए हम 1:2 लेके चलते जो कि हमारा यह वाला लेवल था। अब इसके बाद देखते हैं कि प्राइस क्या हमारे टारगेट तक आई थी। तो देखिए पहले एक बार आने के बाद वापस रिवर्स कर गई थी। लेकिन इसके बाद सीधा देखिए टारगेट से भी काफी नीचे तक निकल गई और नीचे तक निकली तो निकली। लेकिन इसके बाद देखिए बिल्कुल हमारी जो सेल साइड लिक्विडिटी है प्राइस अभी सेल साइड लिक्विडिटी के पास घूम रही है और अभी मुझे लगता है कि प्राइस जो है इस सेल साइड लिक्विडिटी को यहां पर नीचे स्वीप करेगी। [संगीत] देखिए आप प्राइस ने इस सेल साइड लिक्विडिटी को यहां पर टारगेट किया और इस लेवल पे आ गई है। अब इसके बाद एक बार वापस से हायर टाइम फ्रेम में जाके देख लेते हैं कि प्राइस जो ऊपर आई है वो क्यों आई है। तो अब यह बड़े टाइम फ्रेम में मैं इसलिए आया हूं कि मैं देख सकूं कि भाई मैंने यहां पे एंट्री ली थी। उसके बाद प्राइस जो है वो वापस से उठ गई थी तो क्यों उठी थी। तो यहां पर मुझे साफ दिखाई दे रहा है कि यहां पर एक फेयर वैल्यू गैप था। इस वजह से प्राइस वापस से उठ के इस फेयर वैल्यू गैप से आई और वहां से भी रिवर्स की। इसके बाद देखिए फिर से मुझे यहां पर एक फेयर वैल्यू गैप देखने को मिल रहा है। प्राइस जो बिल्कुल हमारी सेल साइड लिक्विडिटी के पास पहुंचने के बाद थोड़ा सा रिवर्स हुई थी ना वो इसलिए हुई थी क्योंकि फिर से उसे यहां पर फेयर वैल्यू गैप देखने को मिला था और तब जाके उसने हमारी इस सेल साइड लिक्विडिटी को भी ले लिया। तो इस तरीके से हमें ट्रेड प्लान करना होता है जिसमें हम पहले बड़े टाइम फ्रेम पे जाते हैं। फिर छोटे टाइम फ्रेम पे जाते हैं और ये सारे जो कांसेप्ट आपको सिखाए उसमें से कौन सा कांसेप्ट उस टाइम पे अप्लाई हो रहा है उसको अप्लाई करके देखते हैं। बड़े टाइम फ्रेम पे अपना बायस बनाते हैं। छोटे टाइम फ्रेम पे अपनी एंट्री लेते हैं। तो इसी के साथ हमारा एक कोर्स एंड होता है। अगर आपने यहां तक कोर्स देखा है ना तो कमेंट में 14 लिखना। इससे हमें समझ आ जाएगा कि आपने यहां तक वीडियो को देखा था। साथ ही वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर देना। बाकी डेल्टा एक्सचेंज का लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रखा है। साथ ही Google फॉर्म का लिंक भी डिस्क्रिप्शन में दे रखा है। और अगर आप डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हो तो यह वाली वीडियो देख सकते हो। और अगर आप अकाउंट ओपन कर चुके हो, ट्रेड लेना कैसे है यह समझना चाहते हो तो फिर यह वाली वीडियो देख लेना। धन्यवाद।

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