ICT + SMC Trading Full Course (Ep.1) | Basic To Advance | Smart Money Concept — backtested on Indian market data | FakeTrades
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ICT + SMC Trading Full Course (Ep.1) | Basic To Advance | Smart Money Concept

Neeraj joshi · watch on YouTube ↗
Analysed 29 Aug 2026, 07:36 PM IST
⏳ Backtest pending — a data-backed verdict will be attached.

Verdict

Not backtestable — no mechanical strategy to test. Educational ICT (Inner Circle Trader) conceptual lecture on market structure, liquidity, and institutional order flow with no mechanical entry/exit rules or backtestable triggers.

We only score videos that teach a rule-based strategy (a defined entry trigger, stop and exit a computer could follow). This one doesn't contain one, so there is nothing to backtest — we show no number rather than a made-up one.

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Full transcript (5246 words)
दोस्तों आज की वीडियो से हमारे चैनल पर एक एडवांस ट्रेडिंग कोर्स शुरू होने जा रहा है। जिसमें हम आपको आईसीटी ट्रेडिंग के बारे में डिटेल में बताएंगे। इसमें टोटल 10 लेक्चर होंगे [संगीत] जिसमें पहले लेक्चर में हम आपको बेसिक्स ऑफ आईसीटी के बारे में बताएंगे। फिर मार्केट स्ट्रक्चर एंड लिक्विडिटी समझेंगे। उसके आगे की भी ये सारे कांसेप्ट हम कवर करने वाले हैं। और यहां पर भी हमारे पिछले कोर्स की तरह ही वीडियो जो होगी वो हफ्ते में दो बार आएगी। एक आपको सैटरडे को वीडियो देखने को मिलेगी और फिर ट्यूसडे को। तो आज की वीडियो आप सैटरडे को देख रहे हैं। फिर ट्यूसडे [संगीत] को आएगी। फिर सैटरडे, फिर ट्यूसडे और ऐसे करते-करते हमारा जो कोर्स है वो 10 वीडियो कंप्लीट होंगी जिसमें आपको यह एडवांस लेवल की ट्रेडिंग बहुत ज्यादा डिटेल में समझ आ चुकी [संगीत] होगी। हमने थोड़ा बहुत जो हमारा ट्रेडिंग का कोर्स था उसमें स्मार्ट मनी कांसेप्ट को डिस्कस किया था। लेकिन यहां पर हम बहुत ज्यादा डिटेल में करने वाले हैं। बट इसको समझने से पहले आपको अपने साथ एक नोटबुक रखनी है और अपना पेन रखना है। तभी आप चीजों को अच्छे से समझ पाएंगे। अगर आप इसे बढ़ा-बढ़ा के देखेंगे तो फिर ज्यादा चीजें आपको अच्छे से समझ नहीं आएंगी। इसलिए पूरा ध्यान से देखें। इसको पढ़ने के हिसाब से देखें। एंटरटेनमेंट के हिसाब से ना देखें। तो चलिए [संगीत] इस सीरीज को शुरू करते हैं। लेकिन हमेशा की तरह इस सीरीज को शुरू करने से पहले वीडियो को लाइक करके अपनी अटेंडेंस जरूर मार्क कर दीजिएगा। और कहां से आप इस वीडियो को देख रहे हैं यह कमेंट करके बताना और साथ ही यह भी बताना कि क्या आपने हमारी इससे पहले वाली जो 10 वीडियो की सीरीज थी [संगीत] वो देखी है या नहीं यह कमेंट करके जरूर बताइएगा। तो आज हम आईसीटी के बेसिक्स के बारे में समझेंगे। अगर आपको ट्रेडिंग के बारे में ही कुछ नहीं पता है तो फिर तो हमने एक 10 वीडियो की [संगीत] पूरी सीरीज़ बना रखी है जिसमें हमने बेसिक टू एडवांस ट्रेडिंग सिखाई है। पहले आप उस सीरीज को देख लीजिए। उसके बाद ही आपको यह जो हमारा कोर्स [संगीत] है वो समझ आएगा। मतलब इस कोर्स को समझने के लिए आपको थोड़ा बहुत ट्रेडिंग के बारे में पता होना चाहिए। तो चलिए सबसे पहले समझते हैं कि आईसीटी आखिर है क्या? [संगीत] तो आईसीटी की फुल फॉर्म होती है इनर सर्कल ट्रेडर और ये ट्रेडिंग करने का एक तरीका है। देखो कुछ लोग इंडिकेटर्स का यूज करके ट्रेड करते हैं। कुछ लोग प्राइस एक्शन देखते हैं। कुछ लोग कैंडलस्टिक पैटर्न्स पे फोकस करते हैं। तो ऐसे [संगीत] ही एक एडवांस लेवल का जो तरीका है वो है ये आईसीटी जो फोकस करता है इंस्टीट्यूशनल ऑर्डर फ्लो के ऊपर और मार्केट में जो लिक्विडिटी है उसके ऊपर। अब ये लिक्विडिटी क्या होती है? इंस्टीट्यूशनल ऑर्डर फ्लो क्या होता है? यह सब कुछ हम आगे समझने वाले हैं। यानी इसका जो फोकस है वो कैंडलस्टिक पैटर्न्स के ऊपर नहीं है बल्कि लिक्विडिटी के ऊपर है और मार्केट के ऑर्डर फ्लो के ऊपर है। तो ये जो आईसीटी है इसको इन व्यक्ति ने बनाया है जिनका नाम है माइकल जे हडलस्टन और यहां पर इसको बनाते वक्त उन्होंने पूरा फोकस किया है इस चीज के ऊपर कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं वो किस तरीके से ट्रेड करते हैं। मतलब एक रिटेल ट्रेडर तो अपने हिसाब से देख रहा है। लेकिन जो बड़े इंस्टीटशंस बहुत सारी कैपिटल के साथ आ रहे हैं वो [संगीत] किन चीजों के ऊपर फोकस कर रहे हैं इसके ऊपर इनका पूरा फोकस है और यह जो तरीके हैं ना ये काफी अच्छे से काम भी करते हैं क्योंकि ये मार्केट को बहुत ज्यादा डीप में समझने के बाद मार्केट में जो बड़े इंस्टीटशंस कर रहे हैं उसको समझने के बाद यह कांसेप्ट बनाए गए हैं। [संगीत] देखो माइकल जे हडलस्टन का मानना है कि जो ज्यादातर रिटेल ट्रेडर्स हैं वो ट्रेडिंग में फेल इसलिए हो जाते हैं क्योंकि वो इंडिकेटर्स को देख रहे हैं। वो चार्ट में बनने वाले पैटर्न्स को देख रहे हैं। जबकि असली जो मार्केट में मेजर मूवमेंट आता है वह बड़े-बड़े इंस्टीटशंस की वजह से आता है और उनको चाहिए होती है मार्केट में लिक्विडिटी और वो लिक्विडिटी उन्हें इसलिए चाहिए [संगीत] ताकि वो अपने बड़े-बड़े जो ऑर्डर्स हैं मतलब एक रिटेल ट्रेडर शायद 1000, 10000, 500, 1 लाख, 10 लाख का ट्रेड लेगा। लेकिन जो बड़े [संगीत] इंस्टीटशंस हैं वो 50 करोड़, 100 करोड़ और बड़ी-बड़ी क्वांटिटी के ट्रेड खरीदते [संगीत] हैं। तो उनके हिसाब से मार्केट चल रहा है। तो रिटेल ट्रेडर्स इसी बात को नहीं समझते हैं। इसलिए वो फेल हो रहे हैं। देखो कई बार आपने नोटिस किया होगा कि जब भी आप ट्रेड लेते हैं उससे थोड़ा सा नीचे आप अपना स्टॉप लॉस रखते हैं। तो पहले वो स्टॉप लॉस हिट होता है। उसके बाद प्राइस ऊपर जाती है। या आपने शॉर्ट करने का ट्रेड लिया है तो जहां पे आपने शॉर्ट किया उससे थोड़ा सा ऊपर स्टॉप लॉस रखा। प्राइस पहले ऊपर गई फिर नीचे आ [संगीत] गई। यानी पहले आपका स्टॉप लॉस हिट हो रहा है। उसके बाद मार्केट में मूवमेंट आ रहा है। तो माइकल जे हडलस्टन का कहना है कि यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि ये जो बड़े-बड़े इंस्टीटशंस हैं ये ऐसा करवा [संगीत] रहे हैं। और ये ऐसा क्यों करवा रहे हैं? इनको आपका नुकसान करके क्या मिलता है? एक्चुअल में इनको आपका नुकसान करके [संगीत] ही सबसे बड़ा फायदा मिलता है। क्योंकि देखिए हम जो रिटेल ट्रेडर्स हैं अगर हम 10 लाख, 50 लाख या 1 करोड़ का भी ट्रेड लेना [संगीत] चाहते हैं तो हमें मार्केट में लिक्विडिटी के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है। हमें यह सोचने की जरूरत नहीं है कि अगर मैं 1 करोड़ का ट्रेड खरीदना चाहता हूं तो वहां पे बेचने वाला कहां से आएगा? [संगीत] लेकिन अगर एक बड़ा इंस्टीटश जो 500 करोड़ का ट्रेड खरीदना चाहता है तो उतने ज्यादा उसको सेलर भी तो चाहिए। अगर बेचने वाले नहीं होंगे तो वह अपनी 500 करोड़ की बाइंग कर कैसे पाएंगे? इसके लिए वह आपके स्टॉप लॉस को हिट करवाते हैं और जब आपका स्टॉप लॉस हिट होता है तब आप सेलर बन जाते हैं और जैसे ही आप सेलर बनते हैं तो वह आपसे [संगीत] लिक्विडिटी यानी जो आपके ऑर्डर्स थे उनको आपसे छीन लेते हैं और उसके बाद जाके मार्केट में मूवमेंट लेके आते हैं। [संगीत] यानी मार्केट अक्सर उस डायरेक्शन में टेंपरेरी मूव करता है जहां रिटेल ट्रेडर्स के स्टॉप लॉस पड़े हुए होते हैं। और इसी वजह से आपने देखा है कि आपके स्टॉप लॉस हिट होने के बाद मूव आ रहा है। और इसी चीज के ऊपर यह पूरी स्टडी की गई है। और यह सब इसलिए होता है क्योंकि रिटेल ट्रेडर्स को सिखाई ऐसी चीजें गई हैं कि भाई जहां पर आपका सपोर्ट बन रहा है वहां पर आप बाय कर लो। सपोर्ट टूटा तो सेल कर लो। जहां पर रेजिस्टेंस बन रहा है वहां पे सेल कर दो। रेजिस्टेंस टूटा तो बाय कर दो। वो सारी चीजें सिखाई इसलिए गई हैं ताकि ये बड़े इंस्टीटशंस आप लोगों का फायदा उठा सके। तो कई बार जो आपको ट्रेड में एंट्री आपकी लेट हो जाती है। जहां पर आपने लगाया वहां पे आपको एंट्री नहीं मिलती या फिर आपके स्टॉप लॉस हिट हो जाते हैं। क्योंकि वो इतनी ऑब्वियस जगह पे है कि इंस्टीट्यूशन को पता है कि यहां पर अगर इसने बाय किया है तो थोड़ा नीचे अपना स्टॉप लॉस लगा रखा होगा। तो यहां पर अगर मैं इसका स्टॉप लॉस हिट करवा दूंगा तो अगर मैं बाय करना चाह रहा हूं तो फिर यहां पे यह सेलर बन जाएगा और मैं बाय कर पाऊंगा। यानी यह जो पूरा गेम है यह लिक्विडिटी का है और लिक्विडिटी क्या है? लिक्विडिटी वह पेंडिंग ऑर्डर्स [संगीत] हैं जो एग्जीक्यूट होंगे या आप लोगों के जैसे ही स्टॉप लॉस हिट होंगे तो [संगीत] आप एक ऑर्डर बन जाएंगे। यह होती है लिक्विडिटी। तो लिक्विडिटी के बारे में मैंने बहुत ज्यादा बात कर ली है। तो चलिए अच्छे से इस लिक्विडिटी को समझते हैं। अब ये जो लिक्विडिटी का कांसेप्ट है ना इसको समझाने से पहले मेरा आपसे एक सवाल है जिससे आपको समझ आएगा कि इस कांसेप्ट को समझना आपके लिए इतना ज्यादा इंपॉर्टेंट क्यों है और वो सवाल मेरा आपके [संगीत] चार्ट पे है। तो यहां पर ध्यान से देखिए। आपको दिखाई दे रहा है कि ये हमारा एक रेजिस्टेंस लेवल था जिस पर जाने के बाद प्राइस गिर गई [संगीत] थी। अब इसके बाद आपको दिखाई देता है कि प्राइस ने हमारे रेजिस्टेंस को ब्रेक कर दिया है। अब जैसे ही प्राइस ने यहां पर रेजिस्टेंस को ब्रेक [संगीत] किया तो ये क्या बन जाता है? ये हमारा सपोर्ट बन जाता है और उसके बाद हमें दिखाई दे रहा है कि प्राइस वापस से इस सपोर्ट लेवल को रीिटेस्ट करने के बाद यहां से ऊपर को जा रही [संगीत] है। तो ऐसे में मैं आपसे पूछूं कि यहां पर आप बाय करोगे या फिर सेल करोगे? तो आप में से ज्यादातर लोगों का आंसर होगा कि भाई यहां पर हम बाय करेंगे। अब अगर आप यहां पर बाय करोगे तो फिर आप स्टॉप लॉस कहां पे रखोगे? मैं बताता हूं। देखिए जनरली आप क्या करोगे? आप यहां पर बाय करने की पोजीशन लोगे। आप थोड़ा सा ये जो आपका लेवल है इससे थोड़ा सा नीचे अपना स्टॉप लॉस रखोगे और टारगेट फिर जो अभी आपका 1:2 का बनता है। आप इस तरीके से कुछ अपना यहां पर ट्रेड प्लान करोगे। [संगीत] तो ऐसे आपने ट्रेड प्लान किया होगा और यह आपका प्लान है एज अ रिटेल ट्रेडर का। लेकिन अब बड़े इंस्टीट्यूशन का प्लान क्या है वो मैं आपको यहां पर दिखाता हूं। देखिए इसके बाद जो बड़ा इंस्टीट्यूशन है वो क्या करेगा? वो यहां पर सबसे पहले एक बड़ी सी कैंडल लेके आएगा। आपका यहां पर स्टॉप लॉस हिट होगा। [संगीत] तो यहां पर आपका स्टॉप लॉस हिट हो गया। प्राइस उस लेवल से नीचे आ गई। बट हमने तो यही सीखा था। और उसके बाद क्या होता है? प्राइस यहां से आपका स्टॉप लॉस हिट कराने के बाद देखिए सीधा टारगेट और उससे भी ऊपर चली जाती है। यानी अगर आपने यहां पर बाय करने के बाद इधर पे अपना स्टॉप लॉस रखा होता तो आप भी एक लिक्विडिटी है जिसका बड़े इंस्टीट्यूशन बार-बार इस्तेमाल करते हैं। आपका स्टॉप लॉस हिट करवाते हैं और मार्केट [संगीत] में मूवमेंट लेके आते हैं। तो अगर आपके साथ ऐसा होता है या फिर हुआ है तो यह कमेंट करके जरूर बताइएगा। अब चलिए मैं आपको यह लिक्विडिटी का कांसेप्ट समझाता हूं। तो यहां पर हम वापस आ चुके हैं स्क्रीन [संगीत] पे। तो लिक्विडिटी का मतलब क्या होता है? मैं आपको थोड़ा बहुत पहले भी बता चुका था कि लिक्विडिटी का मतलब है कि मार्केट में अवेलेबल बाय और सेल ऑर्डर्स का कलेक्शन। यानी एक जगह पे बहुत सारे बाय ऑर्डर्स होंगे। एक जगह पे बहुत सारे सेल ऑर्डर्स होंगे। तो अगर इंस्टीट्यूशन उन बाय ऑर्डर्स के पास प्राइस को लेके आ जाएंगी तो फिर वो खुद सेलर बन [संगीत] सकते हैं। और अगर सेल लेवल के पास वो प्राइस को लेकर आ जाएंगे तो वो खुद बायरर्स बन सकते हैं। क्योंकि वहां पर जाने के बाद बहुत सारे लोग सेलर्स बन जाएंगे। तो जो उन्हें बड़ी क्वांटिटी में बाइंग या सेलिंग करनी है तो वो कर पाएंगे। तो लिक्विडिटी का सिंपल सा मतलब होता है मार्केट में बाय और सेल ऑर्डर्स का कलेक्शन जिसका यूज बड़े इंस्टीटशंस कर सकते हैं अपने ट्रेड्स को एग्जीक्यूट करवाने के लिए। [संगीत] ये क्या होता है? वापस से चार्ट में चल के समझते हैं। तो अब इस चीज को ध्यान से देखिएगा। देखिए यहां पर आपने क्या कर रखा था? आपने बाय कर रखा था और इस जगह पर आपने अपना स्टॉप लॉस लगा रखा था। स्टॉप लॉस का मतलब क्या है? जब आपने पहले बाय किया है तो यहां पर आपकी क्वांटिटी सेल होंगी। अब देखो, यह सिर्फ आपने नहीं सोचा होगा। सभी ने जिन्होंने यह कांसेप्ट समझे हैं, उन्होंने यही सोचा होगा कि भाई प्राइस ने यहां पर सपोर्ट को ब्रेक कर दिया है। अब दोबारा से उस चीज को रिटेस्ट करने के बाद ऊपर जा रही है, तो मैं यहां पर बाय कर देता हूं। सबने ऐसा ही सोचा होगा और ज्यादातर जो ट्रेडर्स हैं उन्होंने बाय करने के बाद यह जो हमारा लेवल है इससे थोड़ा सा नीचे अपना स्टॉप लॉस लगा रखा होगा और उन सबका स्टॉप लॉस क्या है? वो सबका स्टॉप लॉस क्या है? वो सेल करने का आर्डर है। यानी इस जगह पर एक बहुत ही ऑब्वियस सी बात है कि बहुत सारे सेलर्स अवेलेबल है। तो अगर कोई इंस्टीटशंस अपनी हैवी क्वांटिटी बाय करना चाहता है तो वो अगर प्राइस को इस लेवल पर लेकर आ जाए तो यहां पर उसको अचानक से बहुत सारे सेलर्स मिल जाएंगे। मतलब आप सारे लोग जो हैं वो सेलर्स बन जाएंगे और जैसे ही इतने सारे सेलर्स आएंगे तो अब उन्हें जो बहुत सारी क्वांटिटी अपनी एग्जीक्यूट करनी [संगीत] थी लाखों करोड़ों के उन्हें ट्रेड्स लेने थे वो आराम से अपने ट्रेड्स को एग्जीक्यूट कर पाएंगे और ऐसा ही यहां पर आपके साथ हुआ है। यानी यह एक ऐसा लेवल है जहां पर इंस्टीट्यूशन को पता है कि ऑब्वियसली यहां पर उनको ऑर्डर्स मिल जाएंगे और वो प्राइस को इसीलिए यहां पर लेकर आए ताकि आप लोगों का स्टॉप लॉस हिट करवाया जाए। आप सबको सेलर बनाया जाए और बड़े इंस्टीटशंस ने यहां पर बाइंग की और बाइंग करने के बाद आप देख सकते हैं कि प्राइस ऊपर गई मतलब उन्होंने कमाया आपका नुकसान करवा के। चलिए एक और एग्जांपल लेके चलते हैं चिंटू और जेनी का जिसके एग्जांपल से मैं आपको लिक्विडिटी के बारे में बताऊंगा। तो चिंटू मान लीजिए एक रिटेल ट्रेडर है जिसकी कैपिटल मात्र ₹1000 या ₹1000 का ट्रेड लेना चाहता है। जबकि जेनी एक हैच फंड मैनेजर है जो कि ₹100 करोड़ का ट्रेड लेना चाहती है। तो अब इन दोनों में क्या डिफरेंस होगा क्योंकि दोनों सेम ही मार्केट में ट्रेड कर रहे हैं। तो देखो [संगीत] यहां पर चिंटू को दिखाई देता है कि भाई प्राइस बार-बार यह वाला जो लेवल है यहां से रिजेक्शन ले लिया है। इसके बाद दोबारा से प्राइस ने यहां पर रिजेक्शन लिया है। [संगीत] तीसरी बार भी प्राइस ने यहां से रिजेक्शन लिया है और उसके बाद जब उसको दिखाई देता है कि प्राइस इस लेवल पे जाने के बाद रिजेक्शन ले रही है तो वह क्या करता है वह यहां पर अपना शॉर्ट करने का ट्रेड ले लेता है। अब जब वो शॉर्ट करने का ट्रेड लेगा तो रीसेंट जो स्विंग हाई है उससे थोड़ा सा ऊपर का यहां पे उसने अपना स्टॉप लॉस लगा रखा है और इसके बाद चिंटू इंतजार कर रहा होता है कि उसका जो टारगेट है वो 1:2 के पास आएगा और ट्रेड लेके चिंटू सोच रहा होता है कि होगा या नहीं होगा यहां पर आप देख सकते हैं। अब चिंटू को सिर्फ ₹1000 का ट्रेड लेना था तो उसके लिए ट्रेड लेना बहुत आसान था। अगर उसको बाय करना है तो आराम से उसको सेलर मिल जाते हैं। अगर उसको सेल करना है तो आराम से उसको बायर मिल जाते हैं। तो यहां पर उसने ₹1000 की सेलिंग की तो उसको आराम से बायर मिल गए। लेकिन अब बात करते हैं जेनी की जो कि ₹100 करोड़ का ट्रेड लगाना चाहती है। लेकिन इसके लिए प्रॉब्लम यह नहीं है कि मार्केट कहां जाएगा? इसको प्रॉब्लम यह है कि अगर यह 100 करोड़ का सेल करना चाहती है तो उसको उतने सारे बायरर्स भी चाहिए होंगे। तो वो बायरर्स आखिर उसको मिलेंगे कैसे? तो अब यहां पर जेनी को दिखाई देता है कि बार-बार प्राइस इस लेवल से रिजेक्शन ले रही थी। यानी प्राइस ने जाना तो नीचे ही है। लेकिन अगर मैं प्राइस को थोड़ा सा ऊपर ले जाऊं तो यहां पर [संगीत] जिन भी लोगों ने सेल किया होगा उन सारे लोगों के यहां पर स्टॉप लॉस होंगे और उनके स्टॉप लॉस क्या होंगे? वो बाय करने के स्टॉप लॉस होंगे क्योंकि उन्होंने पहले बेच रखा है ना। तो इसलिए जेनी यहां पर अपनी तरफ से हैवी बाइंग करती है और जैसे ही वो बाइंग करती है तो यहां पर यह वाली कैंडल आपको दिखाई दे रही है। इसमें प्राइस [संगीत] सीधा ऊपर जाती है और यहां पर जाकर चिंटू का और चिंटू जैसे हजारों ट्रेडर्स का यहां पर जाकर स्टॉप लॉस हिट हो जाता है। और उनका स्टॉप लॉस मतलब क्या है? उनका स्टॉप लॉस है यहां पर बाय करना। और जैसे ही सबके स्टॉप लॉस हिट होते हैं तो जेनी यहां पर अपनी तरफ से सेल करती है। उसको क्या चाहिए थे? उसको चाहिए थे बायर। यहां पर लोगों के स्टॉप लॉस चिंटू जैसे लोगों के स्टॉप लॉस हिट करवा के उसको बायर मिल गए और जैसे ही उसने सेलिंग शुरू की उसके बाद आप देख सकते हैं कि मार्केट में एक बड़ा सा मूव आया और जेनी ने जो कि एक हैच फंड मैनेजर थी उसने अच्छे खासे पैसे कमाए और यहां पर जो चिंटू है उस बेचारे के आंसू निकल आए। [संगीत] यानी कहने का मतलब है कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं उनको मेनली लिक्विडिटी चाहिए और वह लिक्विडिटी यह छोटे रिटेल ट्रेडर्स का बेवकूफ बना के ही बनती है। लेकिन अब जो यह कोर्स आप समझ लेंगे तो उसके बाद आप बेवकूफ नहीं बनेंगे [संगीत] क्योंकि आपको पता होगा कि कहां-कहां पर लोग लिक्विडिटी रखते हैं। आप उस नजरिए से सोच पाएंगे और जब आप उस नजरिए से सोचेंगे ना तब आपको पता चलेगा कि आपने कहां पे अपना स्टॉप लॉस नहीं रखना है। ट्रेड एग्जीक्यूट करना है तो किस जगह पे एग्जीक्यूट करना बेटर रहेगा। ये बड़े इंस्टीटशंस कहां पे एग्जीक्यूट कर रहे हैं? क्योंकि सोचो अगर हम यहां पर शॉर्ट करते जहां पर जेनी ने शॉर्ट किया है तो उसके बाद सोचिए कि जेनी तो मार्केट को नीचे लेकर जाती और वो मार्केट को नीचे लेकर जाती तो यह बेचारा रिटेल ट्रेडर ₹1000 वाला भी कुछ पैसे कमा ही लेता। तो हमें भी इसी कैटेगरी में आना है कि हमें देखना है कि ये जेनी मार्केट को लेकर कहां जा रही है। मतलब बड़े इंस्टीट्यूशन मार्केट को कहां लेकर जा रहे हैं और हमें भी उसी डायरेक्शन में अपने ट्रेड को लेना है लेकिन सही जगह पर लेना है। तो आपको इतना तो पता चल गया कि बड़े इंस्टीटशंस को ट्रेड करने के लिए लिक्विडिटी चाहिए। तो अब समझते हैं कि यह लिक्विडिटी आखिर कहां-कहां पर होती है। लेकिन उससे पहले अगर आप क्रिप्टो के फ्यूचर्स में ट्रेड करने के लिए अपना अकाउंट ओपन करना चाहते हैं तो आप डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन कर सकते हैं। यह इंडिया में एफआई रजिस्टर्ड है। और अगर आप हमारे लिंक का यूज़ करके डेल्टा एक्सचेंज में अपना अकाउंट ओपन करते हैं तो आपको हमारी तरफ से अधीरा एi का ₹2000 का सब्सक्रिप्शन बिल्कुल फ्री में मिलता है। उसके लिए नीचे Google फॉर्म का लिंक दे रखा है। उसको भी जरूर फिल कर लीजिएगा। इसके साथ ही और भी काफी सारे बेनिफिट्स मिलते हैं। बट उसके लिए हमारे लिंक से अकाउंट ओपन करने के बाद आपको Google फॉर्म को जरूर फिल करना है। तो अब चलिए समझते हैं कि यह लिक्विडिटी आखिर होती कहां-कहां पर है। तो देखिए मैंने आपको एग्जांपल तो दिखा ही दिया है कि जब सपोर्ट या रेजिस्टेंस है तो जहां पर आप अपना स्टॉप लॉस लगाने के बारे में सोच रहे हो वो ट्रेडिशनल कांसेप्ट्स के बेसिस पे वहां सभी जगह पे लिक्विडिटी है। जैसे जितने भी इक्वल हाईस चार्ट में होते हैं जैसे सेम लेवल पे हाई बनते हैं तो उससे थोड़ा सा ऊपर प्राइस जाएगी क्योंकि उसे पता है कि जब भी एक लेवल पे इक्वल हाई बन रहे हैं तो एज अ रिटेलर वो उसे रेजिस्टेंस समझ रहे हैं और यहां पर रेजिस्टेंस के पास वो शॉर्ट कर रहे होंगे तो थोड़ा सा ऊपर उन्होंने स्टॉप लॉस रखा होगा तो वहां पर लिक्विडिटी होती है। ऐसे [संगीत] ही जो हमारे इक्वल लोस होते हैं उन्हें पता है बड़े इंस्टीटशंस को जो इक्वल लोस के नीचे जो रिटेलर्स हैं उन्होंने अपना स्टॉप लॉस रखा होगा तो वहां पर लिक्विडिटी होती है। इसके अलावा अगर कोई स्विंग हाई होता है या कोई इंपॉर्टेंट हाई या लो लेवल होता है तो वहां पर भी लिक्विडिटी होती है। जैसे ये एक इंपॉर्टेंट हाई लेवल है तो इसके ऊपर भी काफी सारे लोगों ने अपने स्टॉप लॉस रखे होंगे और ये एक इंपॉर्टेंट लो लेवल है तो इसके नीचे भी काफी सारे रिटेलर्स ने अपने स्टॉप लॉस रखे होंगे। तो इन सारी जगहों पे लिक्विडिटी होती है। इसके अलावा प्रीवियस डे का जो हाई एंड लो होता है जैसे हम यहां पर डेल्टा एक्सचेंज के चार्ट पे आ गए हैं। इसको मैं यहां पर रिमूव कर देता हूं और इसके बाद मैं एक दिन की कैंडल खोल देता हूं। तो यहां पर हमने वन डे की कैंडल खोली है। अब इस कैंडल से पहले वाली कैंडल यानी इस कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए यहां पर अब आपको दिखाई देगा। [संगीत] यह देखिए इससे पहले वाले दिन की कैंडल ये है। तो इस कैंडल के हाई एंड लो से लगते हुए भी यहां पर लिक्विडिटी होगी। मतलब यह जो हाई है इससे थोड़ा सा ऊपर और यह जो लो है इससे थोड़ा सा नीचे भी लिक्विडिटी होगी। ऐसे ही अगर हम यहां पर वीकली कैंडल पे चले जाएं तो पिछले वीक का जो हाई एंड लो है उससे ऊपर नीचे भी लिक्विडिटी होगी। जैसे यह पिछला वीक है। इससे थोड़ा सा ऊपर लिक्विडिटी होगी। यह पिछले वीक का लो है। इससे थोड़ा सा नीचे भी लिक्विडिटी होगी। ऐसे ही मंथली और ऐसे ही इयरली भी लिक्विडिटी होती है। लेकिन इयरली लिक्विडिटी मंथली लिक्विडिटी हमारे लिए उतनाेंट नहीं है। वीकली लिक्विडिटी देख लेनी चाहिए। बट डेली लिक्विडिटी को भी आपने ध्यान में रखना है। स्विंग हाई स्विंग लो को ध्यान में रखना है। इसके [संगीत] अलावा इक्वल हाई इक्वल लो का भी आपने ध्यान रखना है। तो अभी मैंने आपको लिक्विडिटी का थोड़ा बहुत आईडिया दे दिया जो कि आईसीटी का एक कांसेप्ट है। आगे जब यह कोर्स आएगा तो इसमें हम ये सारी चीजों को डिटेल में बात करेंगे। बहुत सारे एग्जांपल्स देकर आपको बताएंगे। अभी समझते [संगीत] हैं कि ये जो बड़े इंस्टीटशंस हैं ये मार्केट को किस तरीके से देखते हैं। रिटेलर तो देख रहा है कि भाई यहां पर सपोर्ट है, यहां पर रेजिस्टेंस है। अरे यहां पर ये ईएमए इंडिकेटर लग रखा है। लेकिन जो बड़े इंस्टीटशंस हैं वो देखते हैं मार्केट में लिक्विडिटी कहां पर है? जो कि मैंने आपको दिखा दिया। इसके अलावा ऑर्डर फ्लो कैसा है? मार्केट का स्ट्रक्चर क्या है? और उनका मेन ऑब्जेक्टिव होता है कि अगर किसी चीज को खरीदने जा रहे हैं तो सबसे सस्ते में खरीदें और जब बेचने जा रहे हैं तो सबसे महंगे में बेचें। तो अब समझो कि अगर वो हम बाय कर रखा है और थोड़ा सा नीचे हमने अपना स्टॉप लॉस रखा है तो इंस्टीटशंस को प्राइस नीचे लाने का यह भी फायदा है कि वो सस्ते में खरीद पा रहे हैं। एक तो स्टॉप लॉस हिट करवा रहे हैं तो लिक्विडिटी मिल जा रही है। दूसरा वहां पे सस्ते में भी खरीद रहे हैं तो इससे अच्छा क्या होगा? ऐसे ही अगर बेचना [संगीत] है तो वहां पे स्टॉप लॉस है तो लिक्विडिटी मिल जा रही है। दूसरा महंगे में बेच रहे हैं इससे अच्छा क्या होगा? तो यह उनका मेन ऑब्जेक्टिव है। यानी रिटेलर्स और इंस्टीटशंस की थिंकिंग में यह डिफरेंस है कि रिटेलर इंडिकेटर को देखता है। रिटेलर ब्रेकआउट को देखता है। रिटेलर सपोर्ट रेजिस्टेंस को देखता है। रिटेलर सिग्नल्स को देखता है। रिटेलर्स लोगों के रिएक्शंस को देखता है। लेकिन जो आईसीटी है वो प्राइस डिलीवरी को देखता है। वो मार्केट में लिक्विडिटी को देखता है। वो लिक्विडिटी पूल्स को देखता है। वो लॉजिक्स को देखता है और वो एंटीिसिपेशन पे जाता है। इवन आईसीटी और इंडिकेटर्स के बीच के डिफरेंस की बात करें तो इंडिकेटर्स देखो लैगिंग होते हैं। [संगीत] बाद में सिग्नल देते हैं। ये हिस्टोरिकल कैलकुलेशंस के ऊपर बेस्ड होते हैं। ये आपको डिलेड [संगीत] सिग्नल्स दे रहे हैं। बेसिकली ऐसा भी नहीं कह रहा हूं कि बिल्कुल ही बेकार चीजें होती हैं। लेकिन प्योरली इनके बेसिस पे ट्रेड करना गलत होता है। जबकि आईसीटी देखता है प्राइस एक्शन को, लिक्विडिटी बेस को, इंस्टीट्यूशनल बेस्ड लॉजिक्स को, लिक्विडिटी को एंड ये सारी चीजें मैं आपको ऑलरेडी बता चुका हूं। तो अब चलिए ये सब हम आगे डिटेल में डिस्कस करने वाले हैं। एक्चुअल में 10 वीडियोस हैं। अभी तो मैं आपको अभी ओवरव्यू ही दे रहा हूं। इसके बाद जब हम आगे बढ़ेंगे तो बहुत सारी चीजें बताने वाला हूं। वैसे वीडियो पसंद आ रही है तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कीजिएगा। तो चलिए अब बात करते हैं फ्रैक्टल नेचर ऑफ मार्केट के बारे में। तो आपने सुना होगा कि टाइम इज फ्रैक्टल। लेकिन ये फ्रैक्टल आखिर होता क्या है? तो इसका सिंपल सा मतलब है कि मार्केट में भले ही अलग-अलग टाइम फ्रेम है। कोई 5 मिनट में चार्ट देख रहा है, कोई 15 मिनट में चार्ट देख रहा है, कोई 1 घंटे में देख रहा है तो कोई 4 घंटे में [संगीत] देख रहा है। लेकिन जो भी चीजें वो देख रहे हैं उन्हें दिखाई सेम ही चीज दे रही है। मतलब अगर मार्केट 4 घंटे के टाइम फ्रेम में बढ़ रहा है तो 5 मिनट या 15 मिनट के टाइम फ्रेम में भी वो बढ़ ही रहा होगा। हो सकता है आपको थोड़ा बहुत ऊपर नीचे होता हुआ दिखाई दे लेकिन उसका जो लगर ट्रेंड होगा वो अप ट्रेंड ही होगा और मार्केट बढ़ ही रहा होगा। यानी टाइम फ्रेम भले ही अलग-अलग होते हैं लेकिन मार्केट का जो बिहेवियर होता है वो सेम होता है। तो जो पैटर्न आपको 4 घंटे के टाइम फ्रेम में देखने को मिल रहा है वही पैटर्न आपको 15 मिनट के टाइम फ्रेम में भी देखने को मिल रहा है। बट इंपॉर्टेंट यह है कि जो बड़ा टाइम फ्रेम है यानी जो 4 घंटे का टाइम फ्रेम है वो ज्यादा रिलायबल होगा। तो अगर आप कभी ट्रेड कर रहे हैं तो अपने बड़े टाइम फ्रेम के ऊपर ज्यादा भरोसा करना होता है। जैसे यहां पर आपको एक चार्ट दिखाई दे रहा है। इसमें आप देख सकते हैं कि यह हमारा 1 घंटे का टाइम फ्रेम है जिसमें एक फेयर वैल्यू गैप बन रखा है। अगर आपको नहीं पता फेयर वैल्यू गैप क्या होता है डोंट वरी। आगे हम इस कोर्स में आपको बताएंगे। ऑलरेडी हमारा जो पिछला ट्रेडिंग का कोर्स था जिसमें हमने 10 वीडियोस बताई थी। उसमें भी हमने ये चीजें बता रखी थी। अगर आप वो कोर्स देखना चाहते हैं तो उसको भी देख लीजिएगा। तो अब यहां पर आप देख सकते हैं कि 1 घंटे के टाइम फ्रेम में हमें एक फेयर वैल्यू गैप देखने को मिला है। तो वही जो फेयर वैल्यू गैप है वो हमें 5 मिनट के टाइम फ्रेम में भी देखने को मिल रहा है। लेकिन वो ज्यादा रिलायबल कहां पर है? वो ज्यादा रिलायबल है 1 घंटे के टाइम फ्रेम में। इसलिए जब भी ट्रेड ले रहे हो ना तो बड़े टाइम फ्रेम से आपको [संगीत] अपना एनालिसिस शुरू करना चाहिए। भले ही एंट्री आप छोटे टाइम फ्रेम पे लो। जैसे अगर मैं 5 मिनट के टाइम फ्रेम को देख के ही ट्रेड कर रहा होता तो मुझे दिखाई देता कि भाई यहां पर एक बेरिश फेयर वैल्यू गैप बन रखा है। प्राइस ने इसको टैप किया। उसके बाद प्राइस गिरी [संगीत] है। गिरी यहां पर भी है। लेकिन उसके बाद देखिए थोड़ा बहुत मार्केट ऊपर नीचे करता है। उतना फास्ट मूव हमें यहां पर देखने को नहीं मिला। [संगीत] लेकिन अगर हम 1 घंटे के टाइम फ्रेम में देखते हैं तो हमें दिखाई दिया कि जैसे ही यह वाला हमारा फेयर वैल्यू गैप टैप हुआ उसके बाद एक इंपल्सिव मूव हमें मार्केट में देखने को मिला था। तो यहां पर एक और फ्रैक्टल नेचर का हमने एग्जांपल ले रखा है। जिसमें आप देख सकते हैं यह हायर टाइम फ्रेम है। यह लोअर टाइम फ्रेम है। लेकिन हायर टाइम फ्रेम में भी हमें दिखाई देता है कि प्राइस ने स्वीप किया है। उसके बाद सीआईएसडी बना है। एफवीजी [संगीत] से प्राइस नीचे गई है। लेकिन अगर हम छोटे टाइम फ्रेम में जा रहे हैं तो सेम चीज हमें यहां भी देखने को मिल रही है। यहां पर भी स्वीप हुआ है। सीआईएसडी बना है। एफवीपीजी से प्राइस नीचे गिरी है। मतलब जो मैं आपको बता रहा हूं कि बड़े टाइम फ्रेम और छोटे टाइम फ्रेम दोनों में सेम चीजें होती है। तो वो यहां पर आपको समझ आ रहा है। बाकी ये सारी चीजें ना हम आगे यूज़ करेंगे। इसलिए मैं आपको थोड़ा बहुत आईडिया दे रहा हूं इन चीजों के बारे में [संगीत] क्योंकि हमने 10 लेक्चर आपको बताने हैं। वैसे सेकंड लेक्चर जल्दी देखना चाहते हो तो कमेंट जरूर करना। वीडियो अभी तक लाइक नहीं किया तो लाइक जरूर कीजिएगा। तो अब देखिए यहां पर हम थोड़ा सा बात कर लेते हैं कि फैक्टर इतना इंपॉर्टेंट क्यों है? पहला तो आपको मार्केट की बेटर अंडरस्टैंडिंग होगी इससे। बेटर एंट्रीज मिलेंगी, बेटर कंफर्मेशंस होंगे। आप मल्टीपल टाइम फ्रेम एनालिसिस करेंगे और जिससे आपको जो भी सेटअप्स मिलेंगे वो हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप्स होंगे। तो जब आपको पता है कि दोनों टाइम फ्रेम में सेम चीजें हो रही हैं तो आप लोअर टाइम फ्रेम में ट्रेड तभी लो जब आपको दिखाई दे कि जो हायर टाइम फ्रेम है वो उसको सपोर्ट कर रहा है। तो इस लेक्चर में हमने सीखा है कि आईसीटी क्या होता है? किसने डेवलप किया है? रिटेल ट्रेडर्स क्यों फेल होते हैं? इंस्टीटशंस मार्केट को कैसे देखते हैं? लिक्विडिटी क्या होती है? बाय साइड लिक्विडिटी, सेल साइड लिक्विडिटी मैंने नाम भले ही नहीं लिया लेकिन आपको कांसेप्ट समझाया है। [संगीत] मार्केट लिक्विडिटी को क्यों टारगेट करता है? यह भी मैंने आपको बताया कि जो बड़े इंस्टीटशंस हैं उनको क्योंकि अपने ऑर्डर एग्जीक्यूट करने हैं और साथ ही फ्रैक्टल नेचर ऑफ मार्केट के बारे में मैंने आपको बताया है। तो इससे हमें समझ आता है कि मार्केट रैंडम [संगीत] नहीं है। मार्केट का हर मूव किसी ना किसी लिक्विडिटी ऑब्जेक्टिव के साथ होता है और इसी लिक्विडिटी को समझना आईसीटी की फाउंडेशन है। अब नेक्स्ट लेक्चर में हम आपको बताएंगे मार्केट स्ट्रक्चर क्या [संगीत] होता है? स्विंग हाई स्विंग लो क्या होते हैं? हायर हाई हायर लो क्या होते हैं? लोअर हाई लोअर लो क्या होते हैं? ब्रेक ऑफ स्ट्रक्चर, मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट, बाय साइड लिक्विडिटी, सेल साइड लिक्विडिटी, लिक्विडिटी स्वीप का कांसेप्ट भी हम आपको नेक्स्ट लेक्चर में बताएंगे। तो इसके लिए नेक्स्ट लेक्चर आपको ट्यूसडे को देखने को मिलेगा। शाम के 7:30 तक आ जाता है। तो उस लेक्चर को बिल्कुल मिस मत कीजिएगा। लेकिन तब तक आपने सिर्फ बैठ नहीं जाना है। बल्कि आपने चार्ट्स को देखना है। जो लिक्विडिटी का कांसेप्ट मैंने आपको बताया कि प्राइस ऊपर जा रही है, नीचे जा रही है, इन सबको प्रैक्टिस करना है। जब आप प्रैक्टिस करेंगे तभी आपको ये चीजें समझ आएंगी। मैं उम्मीद करता हूं आपको ये वीडियो पसंद आई होगी। वीडियो पसंद आई है तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर दीजिएगा। डेल्टा एक्सचेंज का लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रखा है। साथ ही Google फॉर्म का लिंक डिस्क्रिप्शन में दे रखा है। उसको जरूर फिल कर लीजिएगा। और अगर आप इस पूरी प्लेलिस्ट को देखना चाहते हैं, तो यहां पर क्लिक कर लो। और अगर आप बिल्कुल बेसिक टू एडवांस ट्रेडिंग वाली हमारी प्लेलिस्ट देखना चाहते हैं तो आप यहां पर क्लिक करके देख सकते हैं।

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