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How to find multi baggers | Best Way to Screen Winning Stocks | Financially Free

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Analysed 01 Aug 2026, 03:15 PM IST
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Verdict

Not backtestable — no mechanical strategy to test. Educational investing podcast on identifying multibagger stock patterns (high growth, government tailwinds, undervalued sectors, asset-light models) — no mechanical, rule-based trading strategy with t

We only score videos that teach a rule-based strategy (a defined entry trigger, stop and exit a computer could follow). This one doesn't contain one, so there is nothing to backtest — we show no number rather than a made-up one.

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Full transcript (5621 words)
जो कंपनियां बहुत-बहुत तेजी से ग्रो करती हैं, वही है हंटिंग ग्राउंड मल्टीबैगर्स का। यह चार्ट आप देखो। यह कंपनी लगभग ₹30 के आसपास ट्रेड करती थी। 3738 ₹30 की कंपनी ₹3400 की हुई। तो लोग मल्टीबैगर बोलते हैं। यह महा मल्टीबैगर है। तो नंबर वन पैटर्न यह है कि कोई भी कंपनी में यह कंपनी का शेयर जो है लगभग ₹100 से 4500 के आसपास गया और यह मीटर बनाती थी। लेकिन एक और कंपनी थी आरएमसी स्विच गियर जो कि मीटर के लिए जो प्लास्टिक के डब्बे होते हैं जिसके अंदर मीटर लगता है वो बनाती थी और यह बहुत छोटी कंपनी थी। यह कंपनी का शेयर ऑलमोस्ट 17-18 का था और यह अभी ₹1000 गया था। मतलब गवर्नमेंट के ऑर्डर्स आए मीटर के लिए सबका जो नजर है वो मीटर पे गया लेकिन मीटर के जो डब्बे में आने वाली कंपनी है वहां पे बहुत ज्यादा ग्रोथ है। ये एक और कंपनी है जैसे एजेंट टेक्नोलॉजी। ये तो जैसे एंटी ड्रोन वाली कंपनी है। तो ड्रोन हमें पता है वॉर का सिनेरियो हो रहा है। रशिया में वॉर हुआ है। इजराइल में वॉर हुआ। तो अभी भी वॉर चल रहा है और यह कंपनी वही एंटी ड्रोन सिस्टम्स बनाती है और सिमुलेटर्स बनाती है। 2023-24 में जब नंबर आए तो यह 200 से पहुंच गया सीधा 2500। ज्यादातर लोग रेलवे में जुपिटर, Wagon और उन सब पे टीटगर Wagon पे ही अटक गए। लेकिन एक और कंपनी थी छोटी सी कॉल्ड फ्रंटियर स्प्रिंग। तो यह जो Wagon के अंदर स्प्रिंग लगता है वो बनाती है। अब डब्बा एक बनेगा लेकिन एक डब्बे में सैकड़ों स्प्रिंग लगेंगे। लेकिन शेयर कितना हुआ? ₹350 से 4000। एवरीबॉडी वाज़ टॉकिंग अबाउट Wagons यहां पे बना असली पैसा। इसके पहले रिस्क क्या है? अब ये देख के तो ऐसा लगता है यार हर किसी में 10 गुना हो रहा है, 20 गुना हो रहा है। तो मोर ऑफ़ अस अपने टाइप है। तो रिस्क देखो मेन चीज़ है एट द एंड ऑफ़ द डे। [संगीत] ओके। ओके। तो जस्ट बिफोर स्टार्टिंग दी पॉडकास्ट आप में से जितने भी लोग हैं जिन्हें स्टॉक मार्केट इन्वेस्टिंग में इंटरेस्ट है उनके लिए एक छोटा सा अपडेट है कि जो शुभम है वो संडे को एक वेबिनार कर रहे हैं। तो जिन्हें नहीं पता शुभम के बारे में शुभम 29 की एज में फाइनेंसियली फ्री हो गए थे। इसीलिए Amazon यूएस की जॉब छोड़ के वो बैंगलोर इंडिया शिफ्ट हो गए और एक फुल टाइम इन्वेस्टर बन गए। तो अगर आप इस वेबिनार में इंटरेस्टेड हैं और शुभम के एक्सपीरियंस से सीखना चाहते हैं तो इसका लिंक हमने डिस्क्रिप्शन और फर्स्ट मिनट में दे दिया है। एनीवेज स्टार्ट करते हैं इस अमेजिंग पडकास्ट से। और शुभम मुझे पता है रिसेंटली आप काफी सारी अपनी कंपनीज़ एनालाइज कर रहे थे क्योंकि कौन सी कंपनी ने अच्छा परफॉर्म किया किसने नहीं किया है तो आपकी फाइंडिंग्स क्या है तो बेसिकली मेरे को यह समझ में आया कि क्या पैटर्न्स हैं जिनकी वजह से कंपनीज़ मल्टीबैगर बनती हैं और आज मैं उसी के बारे में बात करूंगा। तो अभी पीछे मैं बहुत सारी कंपनीज़ को आइडेंटिफाई करने की कोशिश कर रहा था कि मेरे पोर्टफोलियो में जो जो मल्टीबैगर बनी है उन सब में क्या कॉमन थी मैं एंड नॉट जस्ट इन द पोर्टफोलियो इरिस्पेक्टिव। बहुत सारी कंपनियां जो मैंने देखी लेकिन खरीदी नहीं। बहुत सारी कंपनियां जो कि मैं देख भी नहीं पाया लेकिन मल्टीबैगर बनी क्योंकि एट एनी पॉइंट ऑफ टाइम हर साल मतलब 100्स ऑफ कंपनीज़ मल्टीबैगर बन रही हैं। लेकिन कंपनियां इतनी सारी हैं। मतलब 6 7000 कंपनीज़ में से वो 100 कंपनियां ढूंढना या 50 कंपनियां ढूंढना दैट इज अ हार्ड टास्क। राइट? तो अ तो पहले ये देखते हैं क्या कॉमन था। तो सीधा एग्जांपल से शुरू करूंगा। ज्यादा कोई फिलॉसफी नहीं। सीधा रियल एग्जांपल में ही समझ में आ जाता है कि क्या एक्चुअली में है। तो जैसे एक कंपनी थी यह नेटवर्क पीपल सर्विज टेक्नोलॉजी जी एनपीएसटी इसे बोलते हैं। ये कंपनी ना मेरे पोर्टफोलियो में भी थी। अब नहीं है। आई हैव ऑलरेडी सोल्ड आउट एंड नॉट अ रिकमेंडेशन जस्ट टॉकिंग अबाउट कि क्या-क्या पैटर्न्स अपने को देखने को मिले थे। तो इस कंपनी का चार्ट दिखाता हूं। यह लोग बोलते हैं मल्टीबैगर मल्टीबैगर। ठीक है? यह चार्ट आप देखो। यह कंपनी लगभग ₹30 के आसपास ट्रेड करती थी। 37 38 इतना छोटा है कि यहां पे फर्क भी नहीं दिखेगा। कहां 20 है, कहां 30 है। सब एक साइड ही दिख रहा है। ये ₹30 की कंपनी 3400 की हुई। तो लोग मल्टीबैगर बोलते हैं। यह महा मल्टीबैगर है। 100 बैगर क्या मतलब ऑलमोस्ट 130 140 बैगर बना है। यह किसी के लिए तो बना ही होगा। मेरे लिए तो नहीं बना। लेकिन अब यहां पर मुश्किल पार्ट यह है। यह ₹30 का शेयर मैंने खरीदा करीब यहां पर ₹800 के आसपास। अब आप इमेजिन करो 30 का शेयर 800 पे खरीदना ही बहुत बड़ा चैलेंज है। मैक्सिमम लोग ₹30 से 800 आने के बाद खरीद ही नहीं पाएंगे। हम तो मेरे लिए कोई बहुत भारी मल्टीबैगर नहीं बना। मेरे लिए हार्डली ये 2x बना है और मैं यह 2x करके निकल गया क्योंकि मुझे फिर उसके बाद समझ नहीं आया। बट इसकी स्टोरी बहुत ही जबरदस्त थी। अच्छा कॉमन पैटर्न क्या दिखा? पैटर्न मुझे यह दिखा आपको नंबर्स में दिख जाएगा। यहां पे आप देखो 15 19 41 ठीक है? यह रेवेन्यू है कंपनी। यह सेल है। सेल 19 से 41 हुई। 141 से 128 हुई। 128 से 173 हुई। ठीक है? तो ऑलमोस्ट मतलब ये देखो आप 100% से ज्यादा की ग्रोथ आ रही है। ये 19 से 41 का मतलब 200% की ग्रोथ। फिर यहां पे 200% की ग्रोथ 80 भी नहीं 120 सीधा 40 से 120। तो अब बेस्ट चीज ये होती है। अच्छा यह तो हुई टॉप लाइन की ग्रोथ। बॉटम लाइन में देखो बॉटम लाइन में टू से 7 से से 27 तो बॉटम लाइन में जो है जो ग्रोथ थी वो और भी ज्यादा ऑलमोस्ट 300% यहां पर आप देखो सात से ऑलमोस्ट 300% 400% यहां पे। तो इन शॉर्ट जो कंपनियां बहुत-बहुत तेजी से ग्रो करती हैं, वह उन वही है हंटिंग ग्राउंड मल्टीबैगर्स का। अब दूसरा एक इंपॉर्टेंट एस्पेक्ट मुझको यह समझ में आया कि भाई यह जो कंपनी है यह अनडिसवर्ड होनी चाहिए। इसके बारे में कोई बात ना कर रहा हो। एनपीएसटी 2022 में 2023 में कौन बात कर रहा था। कोई नहीं बात कर रहा था। आज एनपीएसटी अभी तो हॉट भी नहीं है। अभी तो गिर गया बट 2024 में इट वाज़ अ वेरी-वेरी हॉट स्टॉक। अच्छा जिन्हें नहीं पता ये करती क्या है। मैं थोड़ा सा एक लाइन में बता देता हूं। यह कंपनी एपीआईस बनाती है जो कि यूपीआई में यूज होती हैं। तो कोई भी बैंक अगर अपने यूपीआई को इंटीग्रेट करना चाहता है और वह टेक को खुद नहीं बनाना चाहता तो वह डायरेक्टली इनसे एपीआई ले लेता है समझ लो रेंट पे तो जितनी भी ट्रांजैक्शन होती हैं बैंक एक छोटा सा अमाउंट इनको कुछ पैसे का देता रहता है फॉर एव्री टाइम समबडी फॉर एग्जांपल हम मैं आपको पैसे दे रहा हूं तो शायद एनपीएसटी अर्न कर रहा होगा एक एक पैसा या कुछ बहुत छोटा सा अमाउंट बट वो कलेक्टिवली इतना क्योंकि हमें पता है यूपीआई का अडॉप्शन कैसा हुआ है इस वजह से यह कंपनी तो मेनली एट हाई लेवल पैटर्न अपने को क्या समझ में आया? पहला पैटर्न यह इंडस्ट्री ऐसी होनी चाहिए, सेक्टर या इंडस्ट्री ऐसी होनी चाहिए जहां पर बहुत भयंकर टेलमेंट हो। बहुत भयंकर इंडस्ट्री में मतलब कि गवर्नमेंट का सपोर्ट हो। जिसकी वजह से और कुछ ऐसा जिसकी वजह से कोई एकिस्टिंग इंडस्ट्री रिप्लेस हो रही है। जैसे कि कैश की इंडस्ट्री वो धीरे-धीरे रिप्लेस हो रही है यूपीआई से या मतलब बाकी मोड्स ऑफ जो भी पेमेंट हैं जैसे कि एनईएफटी कह लो या वो अल्टीमेटली लोग यूपीआई पे जा रहे हैं। दूसरा मेन चीज समझ में आई बिजनेस जो है वो एसेट लाइट होना चाहिए। एसेट लाइट का मतलब यह है कि ऐसा कि अगर मैं मानो कि मेरे को 100 लोग यूज कर रहे हैं या 1000 लोग यूज कर रहे हैं या 10,000 लोग यूज़ कर रहे हैं। अगर यही काम मैं मैन्युफैक्चरिंग बिनेस में करूंगा तो 100 से 1000 करने में मुझे 10 गुना की कैपेसिटी लगानी पड़ेगी। कॉस्ट जीरो होना चाहिए। डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट जीरो होना चाहिए। एग्जैक्टली तो बेसिकली जब 100 से 1000 गया और 1000 से 10,000 गया तो मेरा खर्चा सिर्फ 100 से 200 हुआ। मेरा खर्चा नहीं बढ़ा उस हिसाब से। तो यह जनरली सॉफ्टवेयर कंपनीज में ऐसा देखने को मिलता है। आईटी कंपनीज में, एसेट मैनेजमेंट कंपनीज़ में ऐसा देखने को मिलता है। वो सारी कंपनीज़ जहां पर आप यह समझो कि अ जो पीपल है वो मेन रिसोर्स है रादर दैन मशीन। क्योंकि अगर मशीन है तो आपको और ज्यादा मशीन लगानी पड़ेगी। तो, यह हो गया। अह एंड देन तीसरा और मोस्ट इंपॉर्टेंट चीज हमको यह समझ में आई कि अह पहले तो इंडस्ट्री हो गया, इंडस्ट्री की टेलविंड हो गई। एंड फाइनली यह जो कंपनी है यह थोड़ा सा मतलब कि पिटी हुई होनी चाहिए ऐसा कि नोबडी इस टॉकिंग अबाउट इट एंड देन अनऑप्शन ऑफ ग्रोथ आ रही है। तो ये थी इस कंपनी की बात। अब देखते हैं किसी और कंपनी की बात। क्या यह हमको पैटर्न नजर आता है या नहीं? तो फॉर एग्जांपल जैसे एक कंपनी है ये आरएमसी स्विच गिय्स। हम ठीक है? इसके बारे में अब हमने पहले पॉडकास्ट में भी बात करी थी। लेकिन उस टाइम पे इसकी बात नहीं करी थी। उस टाइम हमने बात करी थी इसकी HPL इलेक्ट्रिक की। ठीक है? पर आज हम बात करेंगे आरएमसी स्विच केयर की। तो स्टोरी दोनों की सेम है। लेकिन एक एक चीज होती है कि सेकंड ऑर्डर थिंकिंग जिसे बोला जाता है। ठीक है? तो मैक्सिमम इन्वेस्टर्स फर्स्ट ऑर्डर थिंकिंग सोचते हैं। लेकिन जो मल्टीबैगर बनते हैं अ लॉट ऑफ टाइम्स सेकंड ऑर्डर थिंकिंग में बनते हैं। जैसे एग्जांपल के तौर पे मैं आपको बताता हूं। ये कंपनी जो है वो स्मार्ट मीटर में है। HPL इलेक्ट्रिक। तो हमें पता है कि भाई इंडिया में स्मार्ट मीटर लग रहे हैं। अब यह स्टोरी सबको पता है। हमने पिछले पॉडकास्ट में भी बात करी थी कि इंडिया में यू नो ऑलमोस्ट 23-24 करोड़ स्मार्ट मीटर लगने हैं। हर साल 2 से 3 करोड़ स्मार्ट मीटर लग रहे हैं। एक स्मार्ट मीटर की कॉस्ट ₹3000 की है। एंड देन जो भी मार्केट हमने निकाला था 3000 * बाय 2 करोड़ एंड देन इस कंपनी का मार्केट शेयर 25 से 30% है। तो इनका बिज़नेस इतना आ सकता है। एंड देन इन पे जो ग्रोथ आएगी वो लीनियर आएगी। हम ठीक है? लेकिन अब बहुत बार होता क्या है कि एक कंपनी की पूरी की पूरी एंसिलरी कंपनीज होती हैं। जैसे अगर एक मोटरसाइकिल बन रही है तो एक टायर भी चाहिए, एक रड जो हैंडल की रोड भी चाहिए, एक ब्रेक वाला भी चाहिए एंड इंजन वाला भी चाहिए। 100 तरीके की चीजें चाहिए। जी। तो कहीं ना कहीं कई बार ऐसा हो जाता है कि एक 10% की ग्रोथ इन द ऑटो सेगमेंट रिजल्ट्स इन अ 100% ग्रोथ इन सम अदर सेगमेंट जो कि उसका पार्ट बना रहा है। जैसे क्योंकि नहीं नहीं नॉट जस्ट वो छोटी है। कई बार वो चीजें लीनियर नहीं होती। जैसे मैं आपको एक एग्जांपल बताता हूं। जैसे आप इसको ऐसे समझो कि अगर एक कंपनी है जो कि एक पार्ट यूज कर रही है। ठीक है? अ फॉर एग्जांपल जैसे कि कोई ऐसा पार्ट है जो कि एक मोटरसाइकिल में एक ही यूज़ होता है। ठीक है? लेकिन कोई टेक्नोलॉजी अपग्रेड हुई या कुछ हुआ। कई बार ऐसी चीजें हो जाती हैं। अब अब जो है वो एक की जगह पे उसमें पांच लगेंगे। राइट? तो कई वो मल्टीप्लायर इफेक्ट होता है। राइट? तो वो अपने को जब वो वैल्यू चेन समझ में आती है तब हम वो मल्टीप्लायर इफ़ेक्ट तक पहुंच पाते हैं। उस चीज तक पहुंच पाते हैं कि भाई कौन सी चीज कहां पर क्या यूज़ हो रही है। तो जैसे फॉर एग्जांपल मैं इसी की बात करता हूं HPL इलेक्ट्रिक में तो यहां पर यह जो कंपनी है यह देखते हैं इसका हुआ क्या? यह कंपनी का शेयर जो है लगभग ₹100 से 4500 के आसपास गया। ठीक है? और यह मीटर बनाती थी। लेकिन एक और कंपनी थी आरएमसी स्विच गियर जो कि मीटर के लिए जो प्लास्टिक के डब्बे होते हैं जिसके अंदर मीटर लगता है वो बनाती थी और ये बहुत छोटी कंपनी थी। यह कंपनी का शेयर ऑलमोस्ट ₹18 का था और यह अभी ₹1000 गया था। ठीक है? वाले सालों में हो रहा है। मतलब ये ज्यादा कोई नहीं है। ये 2022 है और ये 204 है। 2 साल में राइट इन टू इयर्स। तो कुछ ऐसा नहीं है कि मैं बहुत लंबे चौड़े टाइम पीरियड की बात कर रहा हूं। अच्छा यह इतना ज्यादा क्यों हुआ? क्योंकि इस कंपनी को अगर आप देखोगे इसका पास्ट का ट्रैक रिकॉर्ड यह कंपनी की सेल ऑलमोस्ट 40 करोड़ से 300 करोड़ हुई है। राइट? लेकिन अच्छी खराब एक बात यह है कि इसके प्रॉफिट जीरो से 43 हुए। क्योंकि जब यह 40 करोड़ की सेल करती थी तो यह कुछ बचा ही नहीं पाती थी। सारा का सारा खर्चों में निकल जाता था। लेकिन जब यह सेल बढ़ी तो इसके मार्जिन बढ़े तो खर्चे उतने बढ़े नहीं। तो मार्जिन बढ़े और बाकी फिक्स्ड क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग में फिक्स्ड कॉस्ट सेम रहती है। अ जैसे कि अगर आपका प्लांट लगा हुआ है जो कि यूज़ नहीं हो रहा। खाली पड़ा हुआ है। अचानक से डिमांड आ गई। पूरा का पूरा प्लांट यूज़ होने लगा। तो जो प्रॉफिट थे वो 300 करोड़ में 40 करोड़ के प्रॉफिट आने लगे। 43 करोड़ के। लेकिन यहां पे ये कुछ लाख था। कुछ लाख से ऑलमोस्ट 40 गुना हो गए प्रॉफिट। अगर इसे वन सीआर भी माने तो प्रॉफिट 40 गुना हो गए। तो इसीलिए शेयर भी उस टाइम पर जो अगर आप देखोगे तो मतलब इसकी वैल्यू्यूएशन हार्डली कुछ होती थी जो आज यह 7800 करोड़ की वैल्यू्यूएशन इसे मिल रही है उस टाइम पे ये शायद 50 करोड़ या कुछ ऐसा 30-40 करोड़ पे पड़ा हुआ था कोई इसको देखता भी नहीं था मतलब गवर्नमेंट के ऑर्डर्स आए मीटर के लिए सबका जो नजर है वो मीटर पे गया लेकिन मीटर के जो डब्बे में आने वाली कंपनी है वो वहां पे बहुत ज्यादा ग्रोथ आई क्योंकि वो पिटी हुई थी वो पिटी हुई थी वो बिल्कुल पिटी हुई थी एंड कोई उसको झांकता भी नहीं था वो इतनी छोटी थी कि नोबडी केयर्ड अबाउट इट तो उसका शेयर मतलब समझो कितने गुना हो गया। पता नहीं अब ये 20 का 1000 हो गया तो ऑलमोस्ट मतलब कि 50 गुना हो गया। इसमें पर्सनली मैं आरएमसी तक नहीं पहुंच पाया था। मैं एचपीएल ही खरीदा था। मैं आरएमसी नहीं खरीदा था लेकिन मैं जानता हूं उन लोगों को जो आरएमसी में ₹30 पे लेकर बैठे हैं और आज भी लेकर बैठे हैं। उसमें वो आता है कि एसेट एलोकेशन कितना किया है? हां एसेट एलोकेशन तो है बट 1% भी किया होगा तो भी 30% हो गया। हां दैट इज यू मतलब जो भी है 40% 50% 50 गुना हुआ है। बट एनीवेज ये एक और कंपनी है जैसे एन टेक्नोलॉजी ये तो जैसे मतलब मेरी कंपनी अभी भी मैं ओन करता हूं। तो इस कंपनी में भी सिमिलर चीज हुई। यहां पे आप पहले तो नंबर्स देख लेते हैं। नंबर्स में क्या हुआ? नंबर्स 70 करोड़ से 900 करोड़ के हुए। यहां पर तो एक्चुअली में प्ले यह बाय द वे यह ड्रोन वाली कंपनी एंटी ड्रोन वाली कंपनी है। तो ड्रोन हमें पता है वॉर का सिनेरियो हो रहा है। रशिया में वॉर हुआ है। इजराइल में वॉर हुआ। अभी भी वॉर चल रहा है। तो सबको एंटी ड्रोन सिस्टम्स चाहिए और यह कंपनी वही एंटी ड्रोन सिस्टम्स बनाती है और सिमुलेटर्स बनाती है। सिमुलेटर वो कि फॉर एग्जांपल अगर आपकी जो आर्मी है आपको उसे ट्रेनिंग देनी है गन शूट करने की। तो अगर आप रियल गन दे दोगे तो तो गोलियां वेस्ट होंगी बहुत ही ज्यादा और इट बिकम्स वेरी कॉस्टली। या फिर रियल टैंक है। अब टैंक की ट्रेनिंग दे रही है। तो भाई रियल गोले अगर वह फोड़-फोड़ के किसी ग्राउंड में ट्रेनिंग कर रहा है तो एक बंदे को ट्रेन करने में जाने कितना खर्चा हो जाएगा। वो इतने तो टैंक भी नहीं है कि सबको पैरेलल ही कराओ। एक-एक करके कराओगे तो टाइम बहुत ज्यादा लगेगा। तो यह सिमुलेटर बनाते हैं जो कि लुक फील वेट जर्क इसकी कुछ वीडियोस हैं। बहुत जबरदस्त वीडियोस हैं। तो मतलब जो रियल गन होती है बिल्कुल वैसा फील करता है इंसान जब वो उसे शूट करता है लेकिन निकलती सिर्फ हवा है। एंड मतलब अंदर से लेजर निकलती है तो निशाना भी लगता है। बट बेसिकली वो वो काम है इनका। एक कॉमन की पैटर्न और समझ में आया। अभी तक जो पैटर्न थे वो तो थे कि भाई इंडस्ट्री की टेल होनी चाहिए। कहीं ना कहीं कंपनी पहले पिटी हुई होनी चाहिए। एंड ये सब लेकिन एक नया पैटर्न मुझे इसमें ये दिखाई दिया कि गवर्नमेंट की कोई पॉलिसी चेंज होना चाहिए। एंड यहां पे एक्सजेक्टली वही हुआ था। यहां पे आपको याद होगा वो जो पारेकर जी थे जो अब एक्सपायर हो गए हमारे जो डिफेंस मिनिस्टर हुआ करते थे गोवा वाले। बेसिकली उन्होंने उस टाइम पे पॉलिसी चेंज करी थी। उस टाइम पे उन्होंने बोला था आईडीीडीएम लेकर आएंगे। आईडीएम का मतलब यह है कि पहले जितनी भी प्रोक्योर होते थे सब बाहर से विदेश से आते थे। उन्होंने बोला कि भाई अगर इंडिया में आपने टेक्नोलॉजी बनाई है तो हम विदेश से नहीं खरीदेंगे। आप महंगा भी बना रहे हो तो भी आपसे खरीदेंगे। एंड अगर पहले होता था टेंडर होते थे कि अगर तीन लोग हैं नहीं है या दो लोग नहीं है तो टेंडर नहीं हो सकता। एक कोई बहुत इनोवेटिव कंपनी है उसने हाईफाई टेक्नोलॉजी बना दी लेकिन आप गवर्नमेंट उससे खरीदेगी नहीं और विदेशों से जाके खरीद लेगी। क्यों? क्योंकि जब डोमेस्टिक में टेंडर करा रहे हैं तो डोमेस्टिक में एक ही है और टेंडर हो नहीं सकता क्योंकि भाई कोई कॉम्पिटिट नहीं है। हम तो उन्होंने बोला नहीं आईडीीडीएम में इंडियन डिफेंस को हम वो देंगे सपोर्ट देंगे। सिंगल वेंडर भी पास होएगा। कोई टेंशन नहीं है। लेकिन इंडिया को मेक इन इंडिया को फोकस मिलेगा। तो यह लोग सोल बडर होते थे उस टाइम पे ये सिमुलेटर और एंटी ड्रोन में। उस टाइम कोई और बना नहीं रहा था। तो अकेले डालते थे। अकेले ही पास हो जाते थे। अकेले ही जीत जाते थे टेंडर। तो उस टाइम पे इन्हें बहुत फायदा मिला। अब तो खैर काफी प्लेयर्स आ गए एंटी ड्रोन में भी और खैर सिमुलेटर में तो अभी भी इनका काफी वो है। बट दिस इज़ व्हाट हैपेंड। तो गवर्नमेंट पॉलिसी का शिफ्ट वो अगर अब कुछ हुआ है बड़ा तो देन इट रिजल्ट्स इन मल्टीबैगर्स। यहां पे हुआ क्या? यहां पे पॉलिसी शिफ्ट आया था। ऑलमोस्ट 100 का ये 200 हुआ था। लेकिन उसके बाद जब नंबर्स आना शुरू हुए। अभी तक नंबर्स नहीं आ रहे थे। 2023 24 में जब नंबर आए तो यह 200 से पहुंच गया सीधा 2500। तो ये थी इसकी स्टोरी। एक दो कंपनी और बात कर लेते हैं। यह यह बहुत ही जबरदस्त कंपनी है। आई थिंक जैसे बोलते हैं ना कि भाई अपनी आंखें और नाक और कान सब खुले रखो। एग्रो ये कंपनी है। हम सब ने इसके बारे में सुना होगा। मैंने मुझे पर्सनली पता चली थी। मैं लेकिन बहुत लेट पता चली थी। तो मैं तो खाली ट्रेड लेके अपना 30-40% बना के निकल गया। ये किसी ने अगर सुना होगा आजकल एक काफी फेमस ब्रांड चल रहा है विस्की का इंद्री के नाम से। हम आई डोंट नो जो पीते होंगे उन्हें तो पता होगा। मतलब मैं भी नहीं पीता हूं लेकिन मतलब मैं देखता हूं आई आई ऑब्जर्व अ लॉट एंड इनको मुझे मेरी नजर में कैसे आया था? इनको अवार्ड मिला था। तो ये पूरे ग्लोबल वर्ल्ड वाइड विस््की के अवार्ड्स होते हैं। जिसमें वो वाइन टेस्टिंग और ये सब टेस्ट वेस्ट करके निकालते हैं। तो इंद्री को पूरी दुनिया में नंबर वन अवार्ड मिला था कि इंद्री बेस्ट विस्की इन द वर्ल्ड। एंड ये इंडियन कंपनी थी और यह कंपनी शराब बनाती भी नहीं थी। इससे पहले इट वास अ शुगर कंपनी क्योंकि शुगर और वो फर्मेंटेशन से ही बनती है दोनों चीजें। तो प्रोसेस तो सिमिलर होता है। इनके जो प्रमोटर थे उनका वो जो फ्लेवर्स और वो जो विस्की के जो जो भी छोटे-मोटे एस्पेक्ट्स होते हैं उसके लिए वो इनके इंटरव्यूज अवेलेबल हैं पुराने। आप देखोगे ना बहुत ही ज्यादा प्रिसाइज कि नहीं ऐसी स्मूदनेस होनी चाहिए। ऐसी खुशबू होनी चाहिए। पूरे टाइम नाक से सूंघते रहना उस टाइप का। तो इन्होंने भाई इन्होंने कहा नहीं मुझे अपना ब्रांड बनाना है। इन्होंने बनाया इंद्री एंड देन व्हाट हैपेंड वी ऑल नो स्टॉक देखो कहां से कहां पहुंचा। यह ₹40 का स्टॉक पहुंचा ₹1000 पे। सेम चीज अपने को नंबर्स में भी देखने को मिली। हालांकि नंबर्स में उतना बड़ा नहीं दिखा। लेकिन जो मैं बोल रहा था वही टॉप लाइन में नहीं दिखा। बॉटम लाइन में देखा। टॉप लाइन तो मतलब वही 4500 करोड़ से 800 करोड़ ही पहुंची। लेकिन चीनी वाली कंपनी जो कि 8% के मार्जिन 10% के मार्जिन बनाती है। अब अब प्रीमियम वििस्की वो भी ऐसी जो वर्ल्ड में नंबर वन है जो कि अब तीन-ती 444000 की बोतल बिक रही है। आज की डेट में जो आईएमएफएल यानी विदेशी आईएफएल मतलब इंडियन मेड फॉरेन लेकर जिसमें कि ये मतलब ब्लैक डॉग और ये वो जो ये सब विस्कीज़ आती है। राइट? उन सब से वह लोग इतने मार्जिन नहीं बना पाते जितने आज की डेट में इनकी विस्की बनाती है। इसमें जो कॉमन पैटर्न आ रहा है एक तो जैसे गवर्नमेंट या फिर वही नया ब्रांड वगैरह है तो हाई ग्रोथ है लाइक रेवेन्यू में भी प्रॉफिट्स में भी और कहीं में मार्जिन भी हो रहा है। और गवर्नमेंट जो खाली सिर्फ गवर्नमेंट गवर्नमेंट को भी ट्रैक करें वो भी आई थिंक काफी अपोरर्चुनिटी है। मतलब बाकी सब छोड़ के सिर्फ गवर्नमेंट के पीछे पड़ जाओ कि भाई तू ये क्या लाएगा? किसको मिला अवार्ड? क्योंकि डॉक्यूमेंट्स भी विज़िबल हैं और एक स्किल को आई थिंक या एक उस चीज को ज्यादा टाइम देना कैन बी मोर रिवार्डिंग एस कंपेयर टू कि मैंने सारी चीजें ही सीख लेनी है। बिल्कुल बिल्कुल तो जैसे फॉर एग्जांपल आप रेलवे वाज़ अ थीम राइट तो फॉर एग्जांपल रेलवे में ज्यादातर लोग रेलवे में जुपिटर वैगन और उन सब पे टीटगर Wagon पे ही अटक गए। लेकिन एक और कंपनी थी छोटी सी कॉल्ड फ्रंटियर स्प्रिंग। राइट? तो यह जो Wagon के अंदर स्प्रिंग लगता है वह बनाती है। अब डब्बा एक बनेगा लेकिन एक डब्बे में सैकड़ों स्प्रिंग लगेंगे। मतलब हर व्हील पर स्प्रिंग लग रहे हैं। राइट? तो इनकी जो डिमांड थी इनकी जो कॉन कॉल पे मतलब कि जो बातें हो रही थी दैट वाज़ मच मच बिगर देन जो मतलब परसेंटेज टर्म्स लो। अब्सोल्यूट नहीं कंपनी तो बहुत ही छोटी है। लेकिन इनकी सेल हुई 70 से 230 लेकिन इनके प्रॉफिट हो गए 8 से 35 करोड़। ऑलमोस्ट चार गुना प्रॉफिट हो गए पिछले 4 साल में। लेकिन शेयर कितना हुआ? क्योंकि पिटी वही कंपनी थी। नोबडी वाज़ टॉकिंग अबाउट इट ₹350 से 4000 तो वही मतलब जैसे मैं बोल रहा था एंसिलरी एवरीबॉडी वाज़ टॉकिंग अबाउट वैग्स यहां पे बना असली पैसा हम तो एक बार इसको समराइज़ कर लेते हैं मतलब व्हाट वर द पैटर्न्स इवेंचुअली नंबर वन हां तो नंबर वन पैटर्न ये है कि कोई भी कंपनी में पहली बात तो हाई ग्रोथ होनी चाहिए बहुत ही ज्यादा। राइट? अब वो हाई ग्रोथ कहां से आ रही वो शायद किसी कैपेसिटी एक्सपेंशन से आ सकती है। वह हो सकता है कि हाई मार्जिन प्रोडक्ट बना रहा है। जैसे कि पहले चीनी बना रहा था अब शराब बना रहा है। तो मार्जिन 10% से 22 25% के मार्जिन पहुंच गए। या तो फिर कोई गवर्नमेंट फेवरेबल पॉलिसी हो सकती है। एंड देन उसके अलावा इंडस्ट्री शुरू में पिटी हुई होनी चाहिए। तो जिसकी वजह से वो जो पीई रेटिंग जिसे बोलते हैं कि भाई पहले सिर्फ 10 का पीई था एंड अब जो है 50 का पीई मिल रहा है। तो मतलब प्रॉफिट तो पांच गुना हुए, चार गुना हुए लेकिन पीई 10 का 50 हो गया। तो नेट नेट स्टॉक प्राइस जो है वो 5x तो सिर्फ रीरेटिंग की वजह से हो गया एंड देन व्हाटएवर 5x 10x जो भी है वो ग्रोथ की वजह से हो गया तो वो 40x 50x देन इट लुक्स लाइक क्रेजी कि 40 गुना हो गया 50 गुना हो गया तो एट अ हाई लेवल यही कॉमन पैटर्न अपने को दिखाई देते हैं और भी बहुत कंपनियां है ये कंपनी है ये मेरी पर्सनल कंपनी मतलब मैंने खेली थी इसके बारे में काफी बात करी है पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट तो ये फॉर एग्जांपल ये एसी बनाती थी एंड धीरे-धीरे ये और चीजों में मैन्युफैक्चरिंग में कॉन्ट्रैक्ट मैन मैन्युफैक्चरिंग में घुस गई। सेम चीज आपको एग्जैक्टली सेम पैटर्न दिखेगा। यहां पर आप सेल की ग्रोथ देखो 700, 1100, 2100, 2700, 4000 तो ऑलमोस्ट यू नो छह गुना हो गई। मतलब इवेंचुअली धंधा ही इंप्रूव हो रहा है। सबसे पहले तो ये है। बिल्कुल अ इसके मतलब रिस्क क्या है? अब ये देख के तो ऐसा लगता है यार हर किसी पे 10 गुना हो रहा है, 20 के गुना हो रहा है। तो मोर ऑफ़ अ सपने टाइम है। बिल्कुल। तो रिस्क देखो मेन चीज यह है एट द एंड ऑफ द डे द रियलिटी इज कि यह हैं साइट में हमको दिखाई दे जाता है कि यार इतना हो गया इतना हो गया राइट ये चेंज ये स्टोरी हो रही थी लेकिन द रियल वर्ल्ड इज मोर नवांस्ड दन जो मतलब हमारा हैंडसाइड बायस है बहुत बार ऐसी बहुत सारी कंपनियां हैं जहां पे हमें ऐसी चीजें दिखाई दे रही होती हैं लेकिन क्योंकि बीच में कुछ हो गया कहीं पे कुछ हो गया तो चीजें बदल जाती हैं इट इज़ इट इज़ रियल वर्ल्ड। अब बहुत सारी कंपनियां हैं जो इतनी ज्यादा हाई ग्रोथ की बात कर रही हैं। लेकिन कहीं पे वॉर छिड़ गया, फ्रेट कॉस्ट बढ़ गई। उसकी वजह से अब वो माल जो जाना था उसकी शिपिंग की कॉस्ट बढ़ गई है। अब वो जा नहीं पा रहा है। मतलब इन दिस वर्ल्ड देयर आर सो मेनी वेरिएबल्स। तो कहीं ना कहीं मेन रिस्क ये है कि ये जितनी भी कंपनीज़ होती हैं ये ज्यादातर ये मल्टीबैगर्स जो आपको देखने को मिलते हैं ये ऐसा मतलब 1 लाख, 2 लाख, 5 लाख करोड़ की कंपनी में नहीं मिलते। वहां तो अगर 2x भी हो जाए ना 3 साल में तो बहुत मतलब अचीवमेंट माना जाता है। 50 एक्स, 100x ये सब मिड और स्माल कैप्स में ही होता है। एंड मेजर रिस्क इनमें ये है कि भ दीज़ आर नॉट बाय एंड होल्ड। काफी लोग बोल देते हैं बाय एंड होल्ड। कोई भी कंपनी अपनी स्टेजेस से निकल के आती है। तो फॉर एग्जांपल शुरू में जब वह अह मतलब कि हो सकता है कि लो ग्रोथ हो। फिर एक एक ग्रोथ की स्टेज आती है। फाइनली जब वह बड़ी हो जाती है, तो मैच्योरिटी की स्टेज और फाइनली डिक्लाइनिंग स्टेज। तो जो मोटा पैसा बनता है ना वो इस स्टेज में बनता है। ये जो ग्रोथ वाली स्टेज है ये इंट्रोडक्शन वाली स्टेज में रिस्क बहुत ही ज्यादा है और इस वाली स्टेज में ग्रोथ नहीं है तो ज्यादा रिटर्न नहीं बनता और इसमें तो पैसा मतलब एक्चुअली में बनता ही नहीं है जो डिक्लाइन वाली स्टेज है। तो अ काफी बार ये जो ग्रोथ वाली स्टेज है वो बीच में ही जो है अब्रप्ट हो जाती है। तो वो बाय एंड होल्ड नहीं है। दैट इज़ व्हाट आई वाज़ ट्राइंग टू से। आपको बाय एंड ट्रैक करना पड़ेगा कि क्या हो रहा है, क्या नहीं हो रहा है। अ उसके बाद मेजर रिस्क जो मुझे दिखाई देता है बहुत बार यह जो ग्रोथ होती है वो बिना कैश फ्लो के आती है। तो इन छोटी कंपनीज़ में कई बार स्कैम हो जाते हैं। तो आई एम नॉट सेइंग ये जो कंपनी मैं दिखा रहा हूं इसमें स्कैम है। लेकिन यह कंपनी हमने कवर करी थी। एंड मुझे इस कंपनी में बिल्कुल भी कॉन्फिडेंस नहीं आया था। इवन दो नंबर्स अगर आप पैटर्न देखोगे तो यहां पर भी सेम पैटर्न दिखेगा। तो कोई बोलेगा यार यह मल्टीबैगर क्यों नहीं बना? 121 264 500 1000 राइट सेल देखो कितने गुना हो गई तो आइडली तो यह 100 एक्स हो जाना चाहिए था प्रॉफिट दो से 31 हो गया तो सेम ही पैटर्न है जो हम ऊपर बात कर रहे थे लेकिन अगर आप स्टॉक प्राइस को देखो स्टॉक प्राइस नहीं गया कुछ खास यहां पे मतलब कि 2030 का शेयर था ये बीच में 70 तक गया लेकिन अभी वापस 30 पे आ गया तो इट फील सरप्राइजिंग एंड बहुत बार जो नए इन्वेस्टर्स होते हैं उन्हें लगता है कि यार ये तो आप जो बोल रहे रहे हो गलत है। यह तो यहां पे तो हुआ नहीं। हम तो फंस गए। राइट? बट द रियलिटी इज़ आपने सिर्फ प्रॉफिट एंड लॉस देखे। आपको इसको कोरिलेट करना पड़ता है यहां पर कैश फ्लो स्टेटमेंट से। यह कंपनी की ग्रोथ आ रही है। लेकिन यह ग्रोथ अच्छा बाय द वे यह टीवी, एसी फ्रिज, एसी सब बनाती है। यह इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है। अपने ब्रांड से बेचती है। लेकिन इनका नाम किसी ने नहीं सुना होगा। ठीक है? सेल सेलिक और मैंने तो सुना नहीं है। पता नहीं कहां पे बेच रहे हैं। लेकिन यह दिखाते हैं कि हमारी सेल हुई जा रही है। और यहां पे हो क्या रहा है कि ये अपने चैनल को डंप करे जा रहे हैं। चैनल को डंप करे जा रहे हैं। मतलब कि ये रेवेन्यू तो इनके तब आ जाएंगे जब ये दुकान पे सामान दे देंगे। अब दुकान से सामान बिके या ना बिके उससे कुछ इतना ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। ठीक है? तो ग्रोथ इसलिए आ रही है क्योंकि पहले ये सिर्फ फोन बनाते थे। तो फोन डंप हो रहे थे। फोन बिक नहीं रहे थे। लेकिन शुरू में तो रेवेन्यू आ गए। फिर उसके बाद इनकी सेल उतनी ज्यादा ग्रो नहीं हुई तो इन्होंने टीवी बनाना शुरू कर दिए क्योंकि फोन तो आप एक पॉइंट तक आपने सारे स्टोर्स तक पहुंचा दिए मगर स्टोर वाले पैसे तब देंगे जब बिकेगा स्टोर वाले पैसे नहीं दे रहे स्टोर वाले क्या बोल रहे हैं तो इसीलिए कैश फ्लो नहीं है रेवेन्यू है बिल कट रहे हैं लेकिन पैसा नहीं आ रहा स्टोर से एंड सिस्टम है पता नहीं है ये हां और ग्रोथ कहां से आ रही है क्योंकि आप हर दो चार महीने में नया प्रोडक्ट ही ल्च कर देते हो और फिर उसे डंप करते हो मार्केट में हम तो ये कैश फ्लो फ्लो इज़ वेरी वेरीेंट। तो कहीं ना कहीं आपको यह अकाउंटिंग की भाषा सीखनी पड़ेगी जिसमें आप बैलेंस शीट, कैश फ्लो, प्रॉफिट एंड लॉस सबको ट्रायंगुलेट करके देन यू गेट एन आईडिया कि भाई क्या यहां पे कुछ फ्रॉड तो नहीं हो रहा? आई थिंक यह मुझे मोस्टेंट लगता है। पर मेन चीज है कि इसके बावजूद भी आप गलत हो सकते हो। दैट्स व्हाई यू शुड हैव अ प्रोसेस। बिल्कुल। एट द एंड ऑफ़ डे करेक्ट। बिल्कुल आपने सही बोला। तो एवरेज अप कब करना है? एवरेज डाउन कब करना है, होल्ड कब करना है, सेल कब करना है, बाय कब करना है? एट अ हाई लेवल यही चारप डिसीजंस होते हैं जो हमें लेने होते हैं। एंड उसका जो पूरा का पूरा प्रोसेस है वह अभी इस वीडियो में नहीं बताया जा सकता क्योंकि वह थोड़ा मतलब ज्यादा ही क्या बोलते हो कि वैसा हो जाएगा एग्जॉस्टिव एंड वीडियो भी बहुत लंबी हो जाएगी। बट आई थिंक हमने अपनी कम्युनिटी में यही कवर करते हैं। उसका पूरा का पूरा प्रोसेस एंड जहां पर भी हमको नए-नए ऐसे आइडियाज मिलते रहते हैं जो हाई ग्रोथ कंपनीज़ हैं, जहां पे इमर्जिंग सेक्टर्स हैं, मिड एंड स्माल कैप में जहां पे वैल्यू्यूएशन भी रीज़नेबल है, वी ट्राई टू कवर अ लॉट ऑफ़ कंपनीज़। एव्री वीक वी कवर अ सेक्टर और अ कंपनी। मैं एक बार समराइज़ कर देता हूं। तो जो भी हमने लर्न किया कि सबसे पहले तो ग्रोथ आनी चाहिए। ग्रोथ इन टर्म्स ऑफ़ परसेंटेज। एब्सोल्यूट नंबर में से कोई 1 लाख करोड़ की सवा लाख करोड़ होगी तो वो तो मतलब 25% का हुआ बट कोई 10 करोड़ का 20 करोड़ हो गया 20 से 40 हो गया 40 से 80 हो गया तो उसका ऐसा लग रहा है कि 100-100% की ग्रोथ आ रही है सेम चीज वो बॉटम लाइन में भी दिखाई दे रही है प्रॉफिट्स में मतलब उसकी वजह से ज्यादा ग्रोथ आएगी प्लस मार्केट ज्यादा अच्छी है तो पीई भी मिल गया और उस ग्रोथ की वजह से भी मिल गया तो फिर वो जो 2x वाली चीज थी वो फाइव या 6x तक हो सकती है करेक्ट और उसके लिए आई थिंक गवर्नमेंट पॉलिसीज कुड बी वन ऑफ़ द फिल्टरिंग मैकेनिज्म वहां तक पहुंचने के लिए। बट उसके बाद भी आप गलत हो सकते हो। तो इसलिए देन यू शुड हैव अ प्रोसेस कि भाई यह स्टेज टू का था एंड ऊपर गया नहीं मेरी थ्योरी के अकॉर्डिंग काट दो। अब आपको भी नहीं पता क्या हो रहा है तो हाथ जोड़ के मेरे को नहीं पता निकल जाओ। बिल्कुल बिल्कुल करके शुभम। थैंक यू सो मच। आई थिंक काफी कुछ सीखा होगा। कुछ तो सीखा होगा किसी ने। ठीक है। थैंक यू सो मच। मिलते हैं। जय हिंद। बाय-ब टेक केयर। बाय-ब।

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