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रिस्क मैनेजमेंट इन पोजीशन साइजिंग। अब देखो पोजीशन साइजिंग एक ऐसा टर्म है ना कि अगर आप पोजीशन साइजिंग को ही ठीक से कर लोगे ना तो रिस्क अपने आप ही मैनेज हो जाए। पिछले 12 महीने में एक महीने में भी लॉस नहीं किया उस स्ट्रेटजी ने। इतनी अच्छी स्ट्रेटजी मैंने शेयर की है। ट्रेडर ए और ट्रेडर बी। ट्रेडर ए जिसके पास सिर्फ और सिर्फ अभी 6 महीने का एक्सपीरियंस है, सिक्स मंथ्स का एक्सपीरियंस है, वो कैसे अपनी पोजीशन साइजिंग करेगा और ट्रेडर बी किस तरह से पोजीशन साइजिंग करेगा जिसके पास मान लो 5 साल का एक्सपीरियंस है कि यार मेरे पास 2 लाख का कैपिटल है ना। सो इन इन मतलब मेरे को 12 दिन है। 12 दिन में ज्यादा से ज्यादा मेरे को कितना चाहिए? दो हफ्ते हैं। तो इफ आई एम एबल टू मेक वन टू 1.5%। हेलो एवरीवन, मैं हूं कुंदन प्रजापति और आप सभी का स्वागत है लेमन के एक एक और नए वीडियो में। आज आज जो टॉपिक हम डिस्कस करने वाले हैं, इसी टॉपिक के वजह से मैं पिछले 10 साल से स्टॉक मार्केट में स्पेशली ऑप्शन सेलिंग में सर्वाइव कर पाया। मैंने अपर सर्किट भी देखे, लोअर सर्किट भी देखे, बुलिश मार्केट देखा, बेयरिश मार्केट देखा, साइडवेज मार्केट देखा। और मार्केट के जितने भी डायनामिक्स हो सकते थे, मैंने पिछले 10 सालों में देखा और सर्वाइव भी किया। एज आई ऑलवेज से कि ऑप्शन सेलिंग या स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग इज़ लाइक अ टेस्ट मैच। अगर आप यहां पे अपनी विकेट भी बचा पाओगे ना तो आप एटलीस्ट मैच को ड्रॉ कर सकते हो। सेम गोज़ विद ट्रेडिंग कि आपका जो विकेट है ना दैट इज़ योर कैपिटल। कैपिटल आपका आपका बचा हुआ है। अगर आपकी मनी मैनेजमेंट अच्छी है। अगर आपका रिस्क मैनेजमेंट अच्छा है, तो मार्केट कितना भी वॉस्ट डज़ आपको दिखा दे, आप मार्केट में सर्वाइव किए रहोगे। और मार्केट में सर्वाइवल का मतलब है कि पैसा ऑटोमेटिकली टाइम मार्केट आपको देता है। जैसे मैं हमेशा बोलता हूं ऑप्शन सेलिंग में कि देखो बस ना लॉसेस बड़ा नहीं करना है। दैट्स इट। बाकी मार्केट तो थीटा का आपको ऑटोमेटिकली पैसा दे ही देगा। तो आज का जो टॉपिक होने वाला है गाइज़ वो होने वाला है कि रिस्क एंड मनी मैनेजमेंट इन ऑप्शन सेलिंग। कैसे हम अपने रिस्क को मैनेज करते हैं? कैसे पोजीशन साइजिंग करते हैं? कैसे मनी मैनेजमेंट करते हैं? और भी जो इंपॉर्टेंट अंडररेटेड टॉपिक्स है ना वो हम डिस्कस करेंगे। मैं सच बता रहा हूं। बी मतलब आई एम बीइंग वेरी ऑनेस्ट विथ यू गाइस कि सिर्फ और सिर्फ ये रिस्क एंड मनी मैनेजमेंट है या और पोजीशन साइजिंग है जो मैं ध्यान देता हूं इतने सालों तक इसके वजह से ही मैं मार्केट में सर्वाइव कर पाया। नहीं तो कोई भी स्ट्रेटजी स्पेशली ऑप्शन सेलिंग में फुल प्रूफ नहीं होती है। देयर विल बी सम डज़ जो कि मतलब आपको बर्बाद कर सकते हैं। अगर आपका प्रॉपर रिस्क मैनेजर नहीं है तो मैं। सो ऑप्शन सेलिंग में एक कहावत है कि ऑप्शन सेलर्स ईट लाइक एन एंट एंड शिट लाइक एन एलीफेंट। कि छोटा-छोटा प्रॉफिट करते हैं और अगर कोई एक बुरा दिन आता है ना तो वो फिर कुछ ज्यादा ही बुरा हो जाता है। तो सिर्फ एक ही फैक्टर है जो आपको बचा के रखेगी मार्केट में दैट इज़ रिस्क एंड मनी मैनेजमेंट। उसमें पोर्शन साइजिंग आ जाती है। उसमें साइकोलॉजी आ जाता है। उसमें सारे फैक्टर्स आ जाते हैं जो हम डिस्कस करेंगे। जो मेरा 10 साल का एक्सपीरियंस है वो मैं आपको एकदम डीप डाउन जाके मैं समझाऊंगा कि क्या-क्या चीज़ जो मुझे जो आप फॉलो करोगे तो मार्केट में अपर सर्किट लग जाए, लोअर सर्किट लग जाए बर्बाद नहीं होगे। एंड अगर लॉस हुआ भी तो वो लॉस रिकवरेबल लॉस होगा। ठीक है? सो चलो सीधे स्क्रीन पे चलते हैं और समझते हैं। तो ये वीडियो को मैंने छह सेक्शन में डिवाइड किया है। एक-एक सेक्शन करके थोड़ा डिटेल में हम डिस्कस करेंगे। सबसे पहला पार्ट आ जाता है आपका रिस्क एंड पोजीशन। रिस्क मैनेजमेंट एंड पोजीशन साइजिंग। अब देखो पोजीशन साइजिंग एक ऐसा टर्म है ना कि अगर आप पोजीशन साइजिंग को ही ठीक से कर लोगे ना तो रिस्क अपने आप ही मैनेज हो जाता है। फॉर एग्जांपल मैं आपको एग्जांपल के तौर पे दिखाता हूं। यस दिस स्ट्रेटजी दिस वन। सो आप लोगों ने एक एक वीडियो देखी होगी इस चैनल पे। एक Reliance की मैंने एक ट्रेड स्प्लिट की स्ट्रेटजी दी है। वो दिखती कैसे है? पहले वो हम देख लेते हैं और उसके बाद हम समझेंगे कैसे ट्रेड वगैरह लेना है। ठीक है? मैंने यहां पे स्टॉक्स पे गया। मैं यहां पे Reliance सेलेक्ट कर दिया। ठीक है? Reliance हो गया। अब उस स्ट्रेटजी में सिंपल एक क्रेड स्प्रेड है कि आप एक कॉल बेचते हो या पुट बेचते हो और कुछ ऐसा एक स्प्रेड बनाते हो जिसमें आपका लेस दैन 40,000 में आप ऑप्शन सेलिंग कर सकते हो। ये स्ट्रेटजी आप जाके देख सकते हो क्या है उसमें पिछले 12 महीने में 1 महीने में भी लॉस नहीं दिया उस स्ट्रेटजी ने इतनी अच्छी स्ट्रेटजी मैंने शेयर की है। सो मान लो ये 33000 है। अब मान लो फॉर एग्जांपल मेरे पास ₹2 लाख हैं। ठीक है? अब ट्रेडर ए और ट्रेडर बी। ट्रेडर ए जिसके पास सिर्फ और सिर्फ अभी 6 महीने का एक्सपीरियंस है, सिक्स मंथ्स का एक्सपीरियंस है, वो कैसे अपनी पोजीशन साइजिंग करेगा और ट्रेडर बी किस तरह से पोजीशन सर्जिंग करेगा? जिसके पास मान लो 5 साल का एक्सपीरियंस है। ठीक है? दोनों का डिफरेंस मैं आपको समझाऊंगा। ट्रेडर A क्या करेगा? उसके पास अगर ₹2 लाख का कैपिटल लॉस हो जाएगा। ₹33,000 में एक में मेरे को प्रॉफ़िट आ रहा है ₹20,000 का। ₹20,000 से क्या है? ₹ लाख पे 2000 कुछ ही नहीं होता है। एक काम करता हूं। मैं इसको कम से कम ऐसा छह लॉट लेके जाता हूं। छह लॉट लेके जाता हूं जिसप मेरा ₹2 लाख, ₹20,000 का हो रहा है। थोड़ा ₹4,000 आगे पीछे एक्स्ट्रा ऐड कर लेगा अपने जेब से। और सोचेगा कि ₹2 लाख मैं करूंगा ना, तो मेरे को ₹12,000 का प्रॉफ़िट हो जाएगा। दैट विल बी समथिंग अराउंड 6% ऑन माय कैपिटल जो कि अगले 12 दिन में मिलने वाला है। तो ये एक 12,000 का प्रॉफिट होगा तो मेरे कुछ हाथ में आएगा। वो इस तरीके से सोचेगा। ठीक है? वहीं पे वहीं पे अगर जो ट्रेडर बी है जिसके पास 5 साल का एक्सपीरियंस है ना वो वो किस तरह से सोचेगा कि यार मेरे पास 2 लाख का कैपिटल है ना। सो अह इन इन मतलब मेरे को 12 दिन है। 12 दिन में ज़्यादा से ज़्यादा मेरे को कितना चाहिए? अह दो हफ्ते हैं। तो इफ़ आई एम एबल टू मेक 1 टू 1.5% अगर मैं मुझे 1 से 1.5% तक मुझे कमाने को मिल रहा है और मेरा जो ओवरऑल कैपिटल का रिस्क है वो थोड़ा कम है। मतलब कि अ ज्यादा से ज्यादा 4 5% के आसपास है तो मैं वो ट्रेड करूंगा। तो जैसे अब यहां पे वो एक से 1ढ़% वो परसेंटेज टर्म्स में प्रॉफिट सोचेगा ना कि रियल ऑब्सोल्यूट टर्म्स में। अब यहां पे अगर मैं एक लॉट की बात करूं आपके अगर एक लॉट की बात करूं तो एक लॉट में प्रॉफिट है ₹2000 का और रिस्क है ₹8,000 का यानी कि ₹2000 यानी 1% ₹ लाख पे 1% का प्रॉफिट है और 4% का रिस्क है 4% आपके ₹ लाख के कैपिटल पे रिस्क है। तो ट्रेडर बी क्या करेगा? जो ट्रेडर बी है वह सिर्फ और सिर्फ एक लॉट ही ट्रेड करेगा। आपकी मतलब यहां पे ऐसा समझो कि डिप्लॉयड कैपिटल जो है डिप्लॉयड कैपिटल यहां पे लग रहा है सी मैं लिख दे रहा हूं दैट इज़ 33000 या ₹34000 बट उसकी पोजीशन साइजिंग जो है पोजीशन साइजिंग जो है वो ₹ लाख की है। मतलब वो ₹ लाख पर लॉट ट्रेड कर रहा है। अब उससे होगा क्या? उससे होगा क्या? मान लो ट्रेडर A जो था ट्रेडर A ने ऐसा छह लॉट ट्रेड करके गया और छह लॉट ट्रेड करने के बाद मान लो गलती से कभी Reliance अपर सर्किट खुल गई और कुछ भी हो गया तो उसको टोटल लॉस हो जाएगा 48000 का और उसके कैपिटल का 25% खत्म। 25% रिकवर करने के लिए आप समझ रहे हो उसको कम से कम 40% का ड्रॉडाउन प्रॉफिट बनाना पड़ेगा तब जाके मतलब एक ट्रेड और वो मतलब वह रिकवर कर ही नहीं सकता। सिमिलरली उसके पास अगर ₹ लाख जो ट्रेडर बी है उसने लिया उसने एक ही लॉट ट्रेड किया सिर्फ और सिर्फ एक लॉट ट्रेड किया उसको 12 दिन में 12 दिन में 1% बन रहा है यानी कि अगर उसके पास 12 दिन में अगर 1% बना रहा है यानी कि उस महीने भर में आराम से 2 से 2.5% बना सकता है एंड वो खुश रहेगा उसमें और वॉश के सिनेरियो में कभी लॉस हो भी गया ₹ लाख में उसको सिर्फ ₹8000 का लॉस है यानी 4% का लॉस है जो कि वो मोटा-मोटा गया तो 1ढ़ महीने पीछे गया 1ढ़ महीने में वापस वो पैसे से रिकवर भी कर लेगा। तो यहां पे वॉस्ट के सिनेरियो में भी जो ट्रेडर बी है वह प्रोटेक्टेड रहेगा और वह मार्केट में सर्वाइव कर पाएगा। अगर 10 ट्रेड ले रहे हैं 10 ट्रेड में 10 ट्रेड भी अगर लॉस करता है तब भी उसका कैपिटल ब्लो नहीं हो रहा है। बट ऐसे सिचुएशन में जहां आप एकदम लोड करके क्वांटिटी लेके जाते हो ना कि जितना कैपिटल उतने का कैपिटल उठा के क्वांटिटी उठा लो। वहां पे आप रिस्क के बारे में सोचते ही नहीं हो। दैट इज़ योर द बिगेस्ट अह मिस्टेक एज अ ट्रेडर। प्रॉब्लम क्या है आपके साथ कि यू ऑलवेज थिंक इन टर्म्स ऑफ़ प्रॉफ़िट कि मेरे को मेरे कैपिटल का प्रॉफ़िट कितना हो जाएगा? वह गलत अप्रोच है। इन ऑप्शन सेलिंग आपका ये पूछना चाहिए कुछ सवाल कि मेरा लॉस कितना हो रहा है? और वर्स्ट किस सिनेरियो का है? मतलब मैक्स लॉस मेरा कितना है? और वो जो मैक्स लॉस है क्या मैं अफोर्ड कर सकता हूं? अगर अफोर्ड कर सकता हूं 2 3 4 5% है मेरे ओवरऑल कैपिटल का। देन इट इज़ फाइन। यू कैन गो अहेड। क्योंकि ऑप्शन सेलिंग में वह वॉस्ट का सिनेरियो उतना चल अगर आप आपका वॉस्ट का सिनेरियो 5% भी लूज़ कर रहे हो कंसीडर योरसेल्फ एज अ गुड ट्रेडर क्योंकि बहुत ही रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर होता है कि आपको अपपर सर्किट लोअर सर्किट लग जाएगी। अदरवाइज़ ये सोच के जाते हो कि नहीं मैं लेके जाता हूं रेयर होता है कभी कुछ नहीं होगा। बट वो एक दिन सारा सब कुछ बर्बाद करके लेके जाएगा। तो अगर मान लो ₹1 लाख हैं। ₹1 लाख हैं ट्रेडर A के पास तो वो क्या करेगा? टोटल टोटल अगर एक स्टॉक में छह लॉट ले रहा है तो टोटल 10 लाख में ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट 30 लॉट से ट्रेड करेगा। 30 लॉट से ट्रेड करेगा। वहीं पे ट्रेडर ये बंदा ए है। वहीं पे जो ट्रेडर बी है ट्रेडर बी सिर्फ कितने लॉट से करेगा? पांच लॉट से। उसको हो सकता है कि इनिशियल जंप दिखे। ये जो ट्रेडर ए है उस पे जल्दी-जल्दी प्रॉफिट से ज्यादा प्रॉफिट आएगा। बट वो एक बुरा दिन जिस दिन सब चला जाएगा और कैपिटल बढ़ता जाएगा। इनिशियल बिगिनर्स लक सबको मिलता है। आपको भी मिला होगा। लेकिन एक बुरा कैपिटल एक बुरा ट्रेड और सारा का कैपिटल उड़ जाएगा। हिम्मत नहीं बचती है। साइकोलॉजिकल प्रेशर इतना आ जाता है एकदम ब्रेकडाउन हो जाता है कि आप हिम्मत ही नहीं होती है कि ट्रेड लूं। वहीं पे अगर ये पांच लॉट लेके चल रहा है। पांच के पांच अगर बर्बाद हो जाएंगे ना तो भी वो ओवरऑल कितने कैपिटल पे लॉस हो रहा है। उसको 7 8% से ज्यादा का ड्रॉडाउन नहीं आएगा। वो जो कि वो रिकवर भी कर लेगा। सो पहला पहला ऐसा क्या है कि आपको कभी भी यह नहीं देखना है कि मेरा मार्जिन कितना है। उस मार्जिन में मैं कितना पैसा बना रहा हूं। ये देखना है कि मैं अगर मैं जो ट्रेड ले रहा हूं उसमें मेरा रिस्क कितना है। अगर मैं डेबिट स्प्रेड के कॉन्टेक्स्ट में बताऊं डेबिट स्प्रेड बहुत सारे लोग करते हैं। ऑप्शन बाइंग बहुत सारे लोग करते हैं। मैं कहता हूं ऑप्शन बाइंग में पैसा बनाया जा सकता है। लेकिन लोग क्या करते हैं कि अगर यहां पे 6000 है। मेरे पास 1 लाख है तो पूरा 1 लाख का क्वांटिटी भर के ले जाएंगे। ठीक है? मतलब ऐसे ऐसे करके ले जाएंगे। कि आया तो आया नहीं तो गया तो गया। अरे जुआ खेलने थोड़ी बैठे हो। गैंबल खेलने थोड़ी बैठे हो। ऐसे नहीं ट्रेडिंग की जाती है। आप चुपचाप से यह सोचो कि अगर मेरे पास ₹2 लाख हैं। ₹ लाख के अगेंस्ट मैंने ये ट्रेड लिया तो मेरा 1:2.8 का रिस्क रिवार्ड रेशियो आ रहा है। 20 मेरा मैक्स लॉस कितना है? ₹2600 का। ₹2 लाख है ना? मैं एक ही लॉट ट्रेड करूंगा। एक लॉट ट्रेड करूंगा बस। क्यों? क्यों एक लॉट? क्योंकि अगर मेरे अगेंस्ट में गया मैं अराउंड अराउंड 1.3% लूज़ कर रहा हूं। ठीक है? और अगर मैं प्रॉफिट कर रहा हूं तो मेरे को 7300 का प्रॉफिट है। मेरे 2 लाख के कैपिटल पर मेरा कितना पैसा बन रहा है? मेरा 3.5% बन रहा है। 3.6% एक्चुअली बन रहा है। तो 12 दिन में मेरे को 3.5% बहुत ज्यादा पैसा आया और लूज़ हुआ अभी तो कितना? 1.3 अगर ऐसे मेरे पांच ट्रेड भी लॉस किए तो मेरे को 5% गया। पांच ट्रेड में ऐसा थोड़ी सब के सब लॉस आएंगे। लेकिन आप क्या करते हो? ₹2 लाख है। ₹27,000 लग रहा है। एक काम करते हैं उसको कम से कम ऐसे सात लॉट लेके जाते हैं। सात लॉट में आपको लॉस कितना हो रहा? ₹18,000 यानी ₹2 लाख पे 9.5% का लॉस कर जाओगे। 10% का लॉस कर जाओगे। दो से तीन ट्रेड में ना यू आर डन। यू आर आउट ऑफ द मार्केट। तो कहने का क्या मतलब है? पोजीशन साइजिंग एक अलग चीज होती है। डिप्लॉयड कैपिटल अलग चीज होता है। कभी भी डिप्लॉयड कैपिटल के बेसिस पे क्वांटिटी मत डिसाइड करो। हर स्ट्रेटजी की अपनी एक पोजीशन साइजिंग बनाओ कि मैं कितना रिस्क मुझे लेना है। कभी भी वर्स्ट के सिनेरियो में ज्यादा से ज्यादा 4 से 5% का लॉस अगर हो रहा है तो फिर आपकी पोजीशन साइजिंग उससे ज्यादा हो रहा है तो पोजीशन साइजिंग को थोड़ा रिड्यूस करना पड़ेगा। ये चीज़ का आपको ध्यान रखना है। अगर ये रूल एक सिंपल फॉलो करोगे आपको कभी भी कैपिटल बर्बाद नहीं होगा। कैपिटल ब्लो नहीं होगा और मार्केट में आप सर्वाइव किए रहोगे और आपको सबको पता है ऑप्शन सेलिंग सर्वाइवल का ही गेम है। वहां पे पैसा बन जाता है। ठीक है? तो अगर आपने ठीक से अपनी पोजीशन साइजिंग कर ली तो रिस्क मैनेजमेंट अपने आप हो सकता है। ठीक है? नाउ सेकंड पॉइंट एडजस्टमेंट्स एंड एंड हार्ड स्टॉप लॉस। देखो बहुत सारे लोग ना एडजस्टमेंट के पीछे पड़े रहते हैं कि एडजस्टमेंट सीख लूंगा तो मैं कुछ किसी मार्केट में सर्वाइव कर दूंगा। तो देखो मेरे पास ना 20 घंटे का एडजस्टमेंट का कंटेंट है। देखो ये जो मैं सिखाता हूं उसमें आप देखोगे सारा का सारा 75 स्लाइड्स है। उसमें सारे एडजस्टमेंट का अलग-अलग वेरिएशन के कैसे ट्रेड को रिस्क फ्री बनाना है। क्या-क्या वेरिएशंस करने हैं। इतना सारा एडजस्टमेंट पे ही कंटेंट है। मतलब कितना कुछ नहीं है। लेकिन फिर भी आपने मेरे को क्या करते हुए देखा है? आपने मुझे देखा है ज़ीरो एडजस्टमेंट स्ट्रेटजीज़ पढ़ाते हुए। राइट? क्यों? क्यों? ऐसा क्यों चेंज आया? तो देखो 2000 मतलब 2019 से मैं प्रॉपर ऑप्शन ट्रेडिंग कर रहा हूं। ऑप्शन हैेजिंग कर रहा हूं और 2022 तक आया 2022 का 2023 तक अगले 4 साल 5 साल तक मेरे को ये लगता था कि मुझे बहुत सारे एडजस्टमेंट क्योंकि मैंने सीख लिए थे तो मेरे में ये हमेशा रहता था कि मैं ना मतलब आराम से ट्रेडिंग तो कर ही लूंगा और कुछ कैसा ही मार्केट रहेगा मैं पैसे बना लूंगा मैं एडजस्ट कर लूंगा और होता ये था कि पहला हफ्ता प्रॉफिट आया दूसरा हफ्ता प्रॉफिट आया तीसरा हफ्ता प्रॉफिट आया चौथा ट्रेड जो फंसा है उसमें क्रेडिट मेरे को दिखता था कि यार 4% तक तो क्रेडिट है अभी मेरे को 1ढ़% का लॉस हो रहा है कोई बात नहीं यह मार्केट इवेंचुअली तो एक्सपायर होगा और और वो 4% का क्रेडिट मैं खा जाऊंगा और मेरा प्रॉफिट में आ जाएगा। तो मैं आई आई यूज़्ड टू कीप ऑन एडजस्टिंग द ट्रेड। मैं एडजस्ट करता रहता था, करता रहता था। और इवेंचुअली जो मुझे 1% का टारगेट अगर मैं ले रहा हूं तो मेरे को 1% का स्टॉप लॉस पे काट लेना चाहिए। बट बिकॉज़ ऑफ़ द एडजस्टमेंट वाला फैक्टर मैं उसको एडजस्ट करते-करते और एट द एंड इतना खराब हो जाता था ट्रेड कि मेरे को 3% 4% का लॉस लेके निकलना पड़ता था। तो पूरा महीना मेरा अच्छा जाता था और एक ट्रेड खराब होता था और काम खत्म। तो धीरे-धीरे धीरे विद टाइम मैंने एक चीज डिसाइड करी कि एक एडजस्टमेंट की एक लिमिट है। इट्स नॉट अ सुपर पावर। सेकंड एक हार्ड स्टॉप लॉस होना चाहिए। जैसे मान लो अगर कोई भी आप मंथली ट्रेड लेते हो। मंथली ट्रेड में मेरा जो हार्ड स्टॉप लॉस होता है वो 3% का होता है। और कोई वीकली ट्रेड लेता हूं उसमें जनरली मेरा स्टॉप लॉस हार्ड स्टॉप लॉस होता है। वो 1% का होता है। मान लो अगर मंथली ट्रेड है तो आपने लेट्स से आयरन फ्लाई बना रखी है। ठीक है? फॉर एग्जांपल 3% पे आप ले तो ऐसा तो है नहीं ना नहीं कि ये 3% का जब 3% हिट हो जाएगा तब आप एडजस्टमेंट स्टार्ट करोगे। नहीं आपके आयरन फ्लाई जब यहां से यहां रहेगी इस पॉइंट पे जहां पे आपको लेट्स से 7% या 8% का लॉस हो रहा होगा उसके बाद आप एडजस्टमेंट स्टार्ट कर दोगे इसको ऊपर लेके जाओगे इसको नीचे लेके जाओगे अपोजिट साइड से बेचोगे 50 तरह की चीजें लोग सिखाते हैं YouTube पे तो वो आप करने लगोगे 8% नहीं है पॉइंट या 1% के लॉस पे ही आप करो लेकिन तब तक करो जब तक कि आपका जो एवरेज प्रॉफिट उस स्ट्रेटजी से निकालो लेट से मंथली है तो मैं 3% का प्रॉफिट निकाल रहा हूं तो 3% % का अगर प्रॉफ़िट आपका आ गया, ठीक है? मतलब सॉरी 3% का प्रॉफ़िट आप मत निकाल रहे हो। 3% का स्टॉप लॉस हिट हो गया। डन फॉर द ट्रेड। आप उस ट्रेड से निकल। मतलब जब तक आपका 3% का हार्ड स्टॉप लॉस नहीं हिट हुआ है, आप उसको एडजस्ट कर सकते हो। बार-बार बार-बार जितनी मर्जी उतनी एडजस्टमेंट करो। लेकिन वंस योर हार्ड स्टॉप लॉस इज़ हिट यू आर डन फॉर द ट्रेड। उसके बाहर नहीं निकला। सेम गोज़ फॉर द वीकली। वीकली मान लो आपने एक लेट्स से कोई भी आयरन कंडर बनाया। एक एलपीआईसी जो मैंने सिखाई लो प्रोबिटी आयरन कंडर बनाया। उसमें आप एडजस्टमेंट करना चाहते हो। ऊपर गया मार्केट को ऊपर लेके गया नीचे आया मार्केट को नीचे लेके गया जो भी है मान लो34% से आपने एडजस्टमेंट स्टार्ट करना अह मतलब अह स्टार्ट किया लेकिन 4 से8 चला गया 9 चला गया आप एडजस्ट कर रहे हो जो मर्जी आया करो लेकिन जैसे ही आपका 1% का स्टॉप लॉस हिट हो डन फॉर द वीक कोई ट्रेड नहीं कुछ नहीं वो मेरा काम हो गया ये डिसिप्लिन आना जरूरी है मतलब वो एग्जिट वो सारा एग्जिट ऑल बटन करना बहुत पीस मिलेगा बहुत सारे लोगों को लगता है ना अरे यार इतना लॉस हो चुका है कैसे उल्ट होल्ड करो। ट्रस्ट मी एक बार करके देखना माइंड फ्रेश हो जाता है कि ठीक है यार कोई बात नहीं मेरा लॉस हुआ। यह 3% का लॉस मैं अगले महीने रिकवर कर लूंगा। बट एटलीस्ट बैठे रहोगे ना गलतियां करोगे। ट्रस्ट मी ये चीजें मेरे साथ हुई हैं और ये मैंने धीरे-धीरे धीरे विद टाइम करके मैंने सुधारा है। इस वजह से मैं आपको समझा रहा हूं। तो आप एक किसी भी एडजस्टमेंट की एक लिमिट रखो। एक स्ट्रेटजी का हार्ड स्टॉप लॉस डिसाइड करो। दैट यू कैन डिसाइड बेस्ड ऑन योर एवरेज प्रॉफिट फ्रॉम दैट स्ट्रेटजी। एवरेज प्रॉफिट आ रहा है। वही आपका एवरेज स्टॉप लॉस या हार्ड स्टॉप लॉस होना चाहिए। वंस योर इज़ अ हार्ड स्टॉप लॉस इज़ डन फॉर द वीक। ठीक है? थर्ड पॉइंट आ जाता है रियल पर्पस ऑफ़ हैेजिंग। राइट? दिस इज़ वेरी क्रूशियल। मैं आपको कैसे समझाता हूं? देखो, बहुत सारे लोग क्या करते हैं? हैेजिंग को ना ऐसे समझाते हैं। जैसे मैंने देखा है लोगों को ट्रेड करते हुए लोगों को सिखाते हुए कि एक काम करो ये ना स्ट्रडल बेच दो। ठीक है? स्ट्रडल बेच दिया। स्ट्रडल बेचने के बाद एक काम करो। हैेजेस ना एकदम ही दूर-दूर के खरीद लो। ₹-5 के हैजेस खरीद लो। ठीक है? ऐसे हैेजेस खरीद लो। यह तो काफी पास ही कर दिया। ऐसे हैजेस खरीद लो। यह दिस इज़ नॉट हैेजिंग। यह आप इसको हैेजिंग कह के ना मतलब आप हैेजिंग का नाम बदनाम कर रहे हो। हैेजिंग टर्म को बदनाम कर रहे हो। दिस इज़ नॉट हैेजिंग। यहां पे मैक्स लॉस कितना है? 30% 30% मैक्स लॉस की हैेजिंग होती है। नहीं। कोई भी आप प्रॉप फंड्स पे कोई भी आप प्रॉप फर्म पे जाओगे। कोई भी आप बड़े फर्म के साथ जाके ट्रेड करने जाओगे ना, आप अपने सिस्टम पे मैक्स लॉस 28.8% निकला वो प्रॉप फर्म आपको तुरंत भगा देगा। वो बोलेगा भाई यू आर नॉट एलिजिबल। क्या होता है यहां पे? क्या किया जा रहा है? अगर मैं इस हैज को हटा दूं। मेरा मार्जिन है 2 लाख और हैेज को रख दूं। मेरा मार्जिन हो गया 1 लाख। सो बेसिकली यहां पे आप मार्जिन बेनिफिट कर रहे हो। हैेजिंग नहीं कर रहे हो। हैेजिंग क्या होती है? अगर मान लो सिंपल बहुत सारे लोग हैं स्ट्रेंगल बेचते हैं कि चलो वीक का एक काम करो ना। वीकली बेसिस पे ना यह ₹10 ₹1 का ₹10 का यह बेचो और जाके ₹2 का खरीद लो। बहुत सारी इंडस्ट्री में ये लोग काम करते हैं। बेच लोग सिखा भी रहे हैं कि ₹10 का इधर से बेच दो। ठीक है? ₹935 और ₹2 का कुछ भी जाके खरीद लो। ठीक है? समथिंग सिमिलर टू दिस। ये सिखाया जा रहा है कि एक हफ्ते में अगर ये पांच दिन है, पांच दिन में आप देखो 0.9% मतलब हफ्ते का एक हफ्ते का 1% मिल रहा है। चार हफ्ते में 4% मिल जाएगा। बुलit ठीक है? क्यों बुल शट मैं बता रहा हूं? क्योंकि आप यहां पे मैक्स लॉस देखो। 44.6% किसी दिन अगर लोअर सर्किट लग गई, किसी दिन लोअर सर्किट लग गई, बर्बाद हो गए। दिस इज़ नॉट हैेजिंग। यह ₹1,15,000 है ना? सिर्फ और सिर्फ इसको मार्जिन बेनिफिट देने के लिए ₹1,76,000 को कम करके मार्जिन देने के लिए यह आपके लेग्स लिए गए। इस तरीके से हैेजिंग नहीं होती। हैेजिंग का मतलब क्या है? हैेजिंग का मतलब है आपके रिस्क को कम करना। जैसे फॉर एग्जांपल, इफ आई एम सेलिंग दिस। ठीक है? मेरा हैेज यह रहेगा। इफ आई एम सेलिंग दिस मेरा हैेज यह रहेगा। अब नाउ यू कैन सी कि मेरा 3.5% का प्रॉफिट है और 5.5% का लॉस है। दिस इज समथिंग जो कि रिस्क एंड रिवॉर्ड रेशियो थोड़ा मैच कर रहा है। अगर बॉस के सिनेरियो भी ये मार्क अगर कल को लोअर साइड पे लगती है तो ठीक है। 5% का लॉस होगा। एटलीस्ट 50% का तो नहीं होगा। तो हैज को ना टाइट रखो। बहुत दूर। अब लोग बोलते हैं सर हैज टाइट रख के ना आपका मार्जिन आप आपका प्रीमियम आपका प्रॉफिट परसेंटेज रिड्यूस हो रहा है। चलो 1 सेकंड के लिए मैं मान लेता हूं यहां पे 3.5% का प्रॉफिट आ रहा है। मैं दूर कर लेता हूं। 3.5% की जगह 5.5% हो गया। बट आप रिस्क भी तो सोचो कितना लेके जा रहे हो और आज के टाइम पे जहां पे ग्लोबल अनसर्टेनिटी इतनी ज़्यादा है। मार्केट में वोलेटिलिटी इतनी ज़्यादा है। कुछ भी न्यूज़ आती है, मार्केट रिएक्ट करता है। वैसे सिचुएशन में आप ऐसे पोजीशन को होल्ड करके ओवरनाइट कैसे पीसफुली कैरी कर सकते हो। और कोई भी पोजीशन आप पीसफुली ओवरहेड कैरी कर नहीं पाओगे। वो ट्रेडिंग ही नहीं है। इवन फॉर द इंट्राडे इवन फॉर द इंट्राडे पर्पस आपको अप्रैल मंथ में 2024 में 1 मिनट में निफ्टी 200 पॉइंट नीचे गिरी थी और फिर लोगों के एसएल जंप हो गए थे। एल्गोस के एसएल जंप हो गए थे। उस दिन 18-18% का लॉस हुआ था। जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ द एल्गोर जंप। क्योंकि वो स्ट्रड्स एंगल में बैठे थे। देयर वाज़ नो हैेज। अगर वह ₹2 का हैेज आप इंट्राडे में भी रखते ना आपको बचा के ले जाता। एक मैंने इंट्राडे की स्ट्रेटजी शूट की मन पे मे बी आएगी बहुत जल्द उसमें मैंने समझाया कि हैज टाइट रखने का क्या एग्जांपल है तो आप कुछ भी कर रहे हो इवन इफ आई एम ट्रेडिंग लेट्स से आर अगर मैंने स्टडल बेचा तो मेरा ये ये रहेगा ₹100 का इधर है 100 का इधर है 200 हुआ तो 200 पॉइंट दूर जाके मैंने हैजेस अपने खरीद लिए सो दिस इज़ माय एयरन फ्लाई दिस इज़ माय एयरन फ्लाई मेरा मैक्स प्रॉफ़िट है 11% मेरा मैक्स लॉस 45% ठीक है कभी बर्बादी जैसा नौबत आएगा अभी तो भी 4% जाएगा व्हिच आई कैन रिकवर इन नेक्स्ट नेक्स्ट फोर वीक्स फाइव वीक्स इवन 2 महीने में तो हो ही जाएगा ना रिकवर 4% एटलीस्ट ऐसा तो नहीं है कि मेरे पास ₹1 लाख थे और मेरे पास ₹5 लाख ठीक है ₹1 लाख थे ₹400 चलेगा मेरे पास ₹95 लाख अभी भी है तो वो सुकून देता है वो आपके दिल को कहता है कि यार मेरा पैसा बचा हुआ है मैं इससे बना लूंगा ₹95 लाख से ₹40 बनाना आसान है लेकिन 10 लाख में से 6 लाख बचाना 6 लाख से 4 लाख बनाना इंपॉसिबल ठीक है तो ये चीज ध्यान रखो कि आप जो हैज कर रहे हो आप जो अपने पोजीशन के हैेज कर रहे हो आप सिर्फ और सिर्फ मार्जिन बेनिफिट के लिए ना करो। आप अपने मैक्स लॉस को रिड्यूस करने के लिए करो। हैेजेस टाइट रखो। अगर आप डायरेक्शनल कर रहे हो तो 100 पॉइंट दूर का हैेज रखो। अगर आप नॉन डायरेक्शनल कर रहे हो वीकली में तो 200 पॉइंट दूर का हैेज रखो। सेम गोज़ विद द मंथली वाला। मंथली में निफ़ी में ज्यादा से ज्यादा 300 400 पॉइंट दूर का हैज हैेज बाय करो। उससे दूर का हैज का कोई मतलब नहीं है। सिर्फ़ और सिर्फ़ आप मार्जिन बेनिफ़िट के लिए कर रहे हो। एंड यू आर जस्ट वन डे अवे फ्रॉम लोइंग द कैपिटल। मैं ऐसा बोलता हूं कि वॉर के लिए ऐसा नहीं है कि हमारी जो इंडियन आर्मी बॉर्डर पर खड़ी है तो रोज वॉर हो रहा है। तो इट मींस थोड़ी है कि हम वहां से अपना जो गवर्नमेंट एक्सपेंड करती है जो हमारे जीडीपी है जो एलोकेट होता है डिफेंस सिस्टम के लिए वो हटा दो कि क्योंकि कुछ तो वॉर हो ही नहीं रहा है। नहीं इट इज़ अ प्रिपरेशन फॉर दैट वन बैड डे जिस दिन अगर कुछ अटैक हुआ तो हमारी आर्मी प्रिपयर्ड है। सेम गोज़ विद द हैेजिंग पार्ट कि आप वह हर रोज वह एक्सपेंस दे रहे हो, एक्स्ट्रा प्रीमियम पे कर रहे हो फॉर दैट वन डे जिस दिन बहुत बुरा होगा, बहुत सारे लोग रो रहे होंगे और आप चिल करके बैठे रहोगे कि यार मेरा कैपिटल बच गया और मैं अभी भी मार्केट में अगले 5 साल तक फिर से ट्रेडिंग करूं और बाकी जिनका बर्बाद हुआ थर्ड फेब को कितने लोगों ने ट्रेडिंग छोड़ दी जब मार्केट में अपपर सर्किट खुला था वो आपको नहीं करना। ठीक है? फिर आता है स्ट्रेटजी रिस्क वर्सेस पोर्टफोलियो रिस्क। दिस इज़ वन थिंग जो कि आपको शायद अभी समझ में नहीं आएगा। मान लो मेरे पास ₹ लाख हैं। सो मैं अपने स्टूडेंट्स को यह बोलता हूं कि ₹20 लाख है ना तो आप ₹1 लाख एक स्ट्रेटजी में जो थोड़ी हायर एक्यूरेसी वाली है उसमें डिप्लॉय करो। ₹5 लाख ये मान लो वन। ठीक है? ₹5 लाख आप दूसरी स्ट्रेटजी में डिप्लॉय करो। ठीक है? एंड फिर अगेन ₹5 लाख आप तीसरी स्ट्रेटजी में डिप्लॉय करो। ठीक है? और कोशिश करता हूं कि सारी स्ट्रेटजीज़ एक दूसरे से कॉन्ट्रा पोजीशन हो। मान लो एक मुझे जो बुलिश साइड में लॉस दे रही है। मतलब मार्केट यहां से ऊपर जाएगा तो मेरे को लॉस देगी। बट दूसरा मेरे को है कि चलो ऊपर जाएगा तो ये वाली ट्रेड मेरे को प्रॉफिट देगी। ठीक है? तो इस तरीके से कॉन्ट्रा रखो। ऐसा नहीं कि तीनों ट्रेड हैं। तीनों के तीनों आपने लेट्स से बुलिश साइड में ही बनाया हुआ है। मार्केट ऊपर जा रहा है तो 10 लाख वाला भी लॉस दे रहा है। 5 लाख वाला भी लॉस दे रहा है। ये भी लॉस दे रहा है। पहला दूसरा तीसरा ऊपर बुलिश ही सारा बना दिया है। रिस्क एक्सपोज़र सारा बुलिश साइड में। इस तरीके से नहीं करना है आपको। आपका एक फंड है उसको तीनचार अलग-अलग स्ट्रेटजी में डवर्सिफाई करना है। एंड उस डवर्सिफिकेशन में भी ध्यान रखना है कि थोड़ा सा कॉन्ट्रा पोजीशन से बुलिश हो एक प्रॉफिट दे रहा है दूसरा थोड़ा मतलब उसको एक लॉस दे रहा है दूसरा उसको कंपनसेेट करने के लिए रहना चाहिए। तीसरा अगर आप स्ट्रेटजी में डवर्सिफाई नहीं कर सकते हो तो यू कैन डवर्सिफाई इंटू द टाइम फ्रेम कि वीकली कर लो, मंथली कर लो, बाय मंथली कर लो, क्वार्टरली कर लो, लीप योर ऑप्शंस कर लो। तो एटलीस्ट डवर्सिफाई योर फंड एक ही स्ट्रेटजी में नहीं करो। मतलब अदरवाइज आपके एक ही स्ट्रेटजी में सारा का सारा पैसा डाल दिया। मान लो आपको 20 लाख फंड है उसी में सारा का सारा 20 लाख डाल दिया। अब उसमें मान लो 3% का एसएल हिट हो गया। आपको 60 माइनस हो गया ना उस महीने के 3% डाउन है। लेकिन आपने 20 लाख डाला है। 20 लाख में 10 इधर करा है। पांच इधर करा है और पांच इधर करा है। ठीक है? उस केस में क्या होगा? उस केस में क्या होगा कि आपका मान लो इसमें 30,000 का लॉस हो गया। ठीक है? 3% का सेम ही रेट था तो। लेकिन इसमें आपने मान लो 2% का प्रॉफिट बनाया तो 10,000 इधर आ गया। 2% का इधर प्रॉफिट है और 10,000 इधर आ गए। तो टोटल टोटल 20,000 आपके प्रॉफिट में है और 10,000 का ये लॉस है। तो नेट टू नेट -10 के ही है। 20 लाख पे आपको क्या हुआ? सिर्फ और सिर्फ 5% का ड्रॉडाउन जो कि यहां पे 3% का ड्रॉडाउन था। ठीक है? तो इस तरीके से आप डवर्सिफाई करोगे या मतलब इवन एक्सपायरी में भी अलग-अलग है। कुछ 10 लाख में से 5 लाख डाल दिया मैंने एनुअल ट्रेड में जो मेरे को साल के 20% देगा। 5 लाख मैंने डाला हुआ है क्वार्टरली में जो कि सेफ है थोड़ा सेफर साइड में है। नॉन मान लो आयरन कंडर भी मैंने एक क्वार्टरली में बना रखा है। बाकी 10 लाख को मैं एक्टिव ट्रेड कर रहा हूं वीकली में और मंथली में तो डवर्सिफाई करके रखोगे तो कभी भी एक स्ट्रेटजी में पूरा रिस्क नहीं रहेगा और कभी एक में लॉस भी होगा तो नेट टू नेट आपके ओवरऑल कैपिटल पे बहुत ज्यादा इफ़ेक्ट नहीं आएगा। ठीक है? इवन अगर मान लो ये ट्रेड मैंने नहीं भी लिया होता दोनों। सिर्फ इसमें मेरे को लॉस ही हो जाता तो भी मैं अपने कैपिटल 1.5% ही लॉस में हूं। व्हिच इज़ ऑलवेज बेटर देन 3% कट ऑड। तो, यह एक चीज़ होती है। नाउ सेक्शन फाइव रिस्क ऑफ़ रन एंड सर्वाइवल। ठीक है? इसमें देखो क्या होता है कि आप ना स्ट्रेटजी आपकी अच्छी है। बट फिर भी आपकी कुछ साइकोलॉजिकल एरर में या जल्दीबाजी में या इन सब चीजों से आपका नुकसान हो सकता है। वो कैसे मैं समझाता हूं। मान लो जैसे आपके पास लेट्स से यू हैव यू आर हैविंग अ वन सीआर ऑफ़ फंड। ठीक है? आपने किसी का भी सीखा, किसी कोई वीडियो देखी, कोई स्ट्रेटजी, किसी का कोर्स लिया और आपको देख के लगा बहुत क्रेजी स्ट्रेटजी और कल से कल आप ₹1 करोड़ आप डिप्लॉय करने लग जाते हो। दिस इज़ अ रॉन्ग अप्रोच। ठीक है? आपने 1 करोड़ किसी से भी सीखा, कुछ भी स्ट्रेटजी आपको अच्छी लगी, यू स्टार्ट विद दिस 5 लाख। मतलब आपने कैपिटल का 5% से स्टार्ट करो। फिर 2-3 महीना ट्रेड करो। प्रॉफ़िट आया, फिर आप 10% पे स्केल करो। फिर 2-3 महीना ट्रेड आया, फिर आप 20% पे ले जाओ। फिर 2-3 महीना ट्रेड आया, फिर मतलब थोड़ा-थोड़ा प्रॉफ़िट आ रहा है, तब आप ग्रेजुअली इंक्रीज़ करो। तो अदरवाइज होता क्या है? लोग एक-दो हफ्ते ना थोड़ा फॉरवर्ड टेस्ट करते हैं। एक-ए दो-दो लॉट से एक लॉट करा, दो लॉट करा और फिर तीसरे लॉट से सीधे 50 लॉट। ठीक है? और फिर वहां पे उनको उस बड़े फंड पे लॉस हो जाता है और वो लॉस इतना बड़ा हो जाता है कि उसको रिकवर करना मतलब आपने जो थोड़ा छोटा-छोटा प्रॉफिट किया वो कहीं काम का नहीं होता है। लेकिन वही 5% आप इंक्रीज़ करोगे ना आफ्टर एव्री 2 मंथ्स। मतलब आपको अपने पोजीशन साइजिंग का 5% इंक्रीज़ करना है। वंस यू गेन कॉन्फिडेंस वंस यू मेक मनी फॉर 2 मंथ्स। देन क्या होगा कि कल को बड़ा लॉस भी हो जाएगा ना तो आपने क्योंकि प्रॉफिट बनाते बनाते वहां तक गए हो तो आपको बहुत बड़ा रिस्क नहीं दिखेगा। मैं आपको यहां पे एक कांसेप्ट दिखाता हूं कि भाई ड्रॉडाउन और इस पे क्या डिफरेंस हो सकता है? देखो आपको लगता है ना अरे 5% का ड्रॉडाउडाउन है। ठीक है? 5% का ड्रॉडाउन आया उसको रिकवर करने के लिए आपके पास जो कैपिटल बचा है मतलब 9 ₹1 लाख था उसमें 500 का नुकसान हो गया। अब जो ₹9 लाख का फंड है उस पे आपको प्रॉफिट बनाना पड़ेगा। 5.3% फिर भी 0.3% में है कि वो चल जाएगा। लेकिन 10% का लॉस हो रहा है उसमें मतलब 11.1% का ड्रॉडाउन है। 20% का लॉस हो गया तो आपको 25% का ड्रॉडाउन रिकवरी करनी है। अगर 50% का लॉस हो गया मतलब ₹1 लाख थे उसमें 5 लाख का लॉस हो गया तब आपको 100% की रिकवरी मतलब साल 100% रिटर्न बनाना है। सो देखो यहां तक तो फिर भी थोड़ा चल जाता है। यहां तक फिर भी मतलब टिल 10% का ड्रॉडाउन इज रिकवरेबल इन माय ओपिनियन। लेकिन उसके ऊपर अगर आप कुछ भी ड्रॉडाउन में पहुंच गए वो रिकवर करना नेक्स्ट टू इंपॉसिबल होगा क्योंकि ये 11% 6 महीने में आप बना सकते हो और अगले 6 महीने में थोड़ा ब्रेक इवन पे आप मतलब 10 12% साल फिर भी क्लोज कर सकते हो लेकिन अगर एक बार ये 10% का डाउटडाउन हिट हुआ ना यू आर यू आर डन आपका कुछ भी नहीं हो सकता फिर उसके बाद ठीक है तो इस तरीके से आप थोड़ा सोच के चलो कि आप ग्रेजुअली इंक्रीस करो कि पहले दो लॉट किया दो लॉट पे दो महीना प्रॉफिट बनाया फिर चार लॉट किया। फिर चार लॉट पे दो महीना प्रॉफिट बनाया। फिर छह किया। फिर तो ये जो प्रॉफिट बना रहे हो ना कभी 10 लॉट पे आप लॉस भी करोगे तो आठ लॉट से छह लॉट से चार लॉट से दो लॉट से प्रॉफिट किया था। वो आपको बचाए रखेगा। एटलीस्ट आपके पास कुशन रहेगा प्रॉफिट का। लेकिन दो से सीधे 10 पे गए। दो पे दो महीने आपने प्रॉफिट बनाया और सीधे 10 लॉट पे आपको लॉस कर दिया ना। उसको बोलते हैं रिस्क ऑफ़ रन। आपने रून्य कर दिया अपने प्रॉफिट्स को और स्ट्रेटजी अच्छी होते हुए भी आप उस पे पैसा नहीं बना पाए। ठीक है? सिक्स्थ पार्ट आ जाता है साइकोलॉजी ऑफ़ एन ऑप्शन सेलर। देखो, इसमें बहुत सारे फैक्टर्स हैं। मैं यह मानता हूं कि आपको ऐसी स्ट्रेटजी करनी चाहिए जिसका एमटीएम स्विंग बहुत स्मूथ हो। बहुत एमटीएम वो हाई वोलेटाइल एमटीएम को ना बहुत बड़े कैपिटल पे स्केल नहीं किया जाता। जैसे फॉर एग्जांपल रेशियोज़ हैं जो मैं करता हूं। बहुत स्मूथ एमटीएम होता है। प्रॉफ़िट भी स्लो आता है। लॉस भी स्लो होता है। तो मैं आराम से स्केल लेवल पे ट्रेड कर पाता हूं और बैठा रहता हूं। दूसरी चीज़ भी करना कर पाता हूं। मुझे बार-बार स्क्रीन देखने की ज़रूरत नहीं पड़ती। यहीं पे मेरे पास अगर कैलेंडर्स हैं। ठीक है? या स्टैडल है या स्टैंगल है उसमें क्या है? एमटीएम स्विंग थोड़ा हाई रहता है। तो उसको जब तक अगर मैं स्विंग के सामने मैं नहीं बैठूं मैं नहीं कर पाऊंगा। राइट? सो दीज़ आर द थिंग्स जो एक ऑप्शन सेलर को ध्यान में रखनी है। प्लस ऑप्शन सेलर आपको आपको ना अपनी आंखों को ट्रेन करना पड़ेगा एमटीएम स्विंग को देखने के लिए। और वो तभी होता है जब आप ग्रेजुअली चीजों को इंक्रीज़ करते हो। मतलब एक टाइम था व्हेन मतलब ₹2000 का प्रॉफिट लॉस होता था तो थोड़ा समझ आता था कि यार ₹2000 का हो रहा है। आज ₹2 लाख का भी प्रॉफिट लॉस ऊपर नीचे होता है। तो असर ही नहीं पड़ता कुछ भी क्योंकि ये 10 सालों में ना ये जर्नी पूरी देखी हुई है। उस वजह से वो ट्रेंड है मेरी आंखें उन सब चीजों के। अचानक से एक दिन में देख लोगे तो हालत खराब हो जाएगी। हो सकता है आज से 5 साल बाद 2 करोड़ का भी एमटीएम डेली का दिखेगा तो शायद उतना फर्क नहीं पड़ेगा। राइट? सो दिस इज़ समथिंग जो एक धीरे धीरे धीरे-धीरे टाइम को आएगा। मतलब कहते हैं ना कि हर चीज का एक टाइम होता है। समय समय को समय वक्त को थोड़ा वक्त दो अपने आप वक्त सुधर जाएगा। राइट सेम विद ऑप्शन सेलिंग आप थोड़ा टाइम स्पेंड करो। साल 2 साल 3 साल मार्केट में स्पेंड करो। सर्वाइवल का इंस्टेंट रखो कि मेरे को सर्वाइव करना है। बहुत ज्यादा पैसे बनाने की चाह मत रखो। मार्केट आपको पैसा जब बना के देना होगा तो दे देगा। एंड धीरे धीरे धीरे धीरे आप खुद ब खुद मार्केट आपको इतनी सारी चीजें सिखा देगा। जो आप खुद से शायद सीखने में आपको बहुत टाइम लगता है। सो ये छह इंपॉर्टेंट पॉइंट्स थे जो मैंने थोड़ा ब्रीफ में एक्सप्लेन किया। अगर आप इसको फॉलो करते हो, इसको आप इंप्लीमेंट करते हो ऑप्शन सेलिंग में तो आई कैन असोर यू वन थिंग कि आपका कैपिटल कभी ब्लो नहीं होगा। मार्केट में आप सर्वाइव किए रहोगे एंड ग्रेजुअली तो मार्केट पैसा दे ही देगा। आप थोड़ा स्ट्रेटजी वीडियो नहीं है। आई आई डू अंडरस्टैंड कि स्ट्रेटजी वीडियो नहीं है। लोग इसको बहुत सारे लोगों ने अभी तक स्किप कर दिया होगा। लेकिन अगर अभी तक आप टिके हुए हो एंड आप यह वीडियो एंड तक आपने देखा है तो प्लीज कमेंट करके बताओ। प्रो ट्रेडर और उसके नीचे आपको कोई क्वेश्चन है तो वह पूछ लेना। मैं उसको जरूर आंसर करूंगा। या अगर नहीं है तो सिंपल प्रो ट्रेडर भी कमेंट कर दोगे तो मैं समझ जाऊंगा कि आपने ये वीडियो एंड तक देखा है। एंड बाकी और भी आपको कोई डाउट्स है, कोई क्वेश्चन है, कोई क्वेरी है तो आप कमेंट सेक्शन में बताओ। आई विल श्योरली ट्राई टू आंसर दैट। एंड और बताओ आप कौन से टॉपिक्स पे डिस्कस करना चाहते हो? ऐसे अंडररेटेड टॉपिक्स जो ऑप्शन सेलिंग में इंपॉर्टेंट हैं। अगर आपको एस और भी समझना है और भी जैसे टॉपिक्स होते हैं ऑप्शन सेलिंग में तो बताओ। मैं उस पे और भी वीडियोस बनाऊंगा। मिलते हैं अगले वीडियो में। कीप ट्रेडिंग, कीप लर्निंग एंड कीपिंग। बाय-ब इन्वेस्टमेंट्स इन द सिक्योरिटीज मार्केट आर सब्जेक्ट टू मार्केट रिस्क।