Full transcript (6122 words)
जब भी हम एक्टिव ट्रेडिंग के बारे में बात करते हैं तो बहुत सारे ट्रेडिंग स्टाइल्स होते हैं जो एक्टिव ट्रेडर्स अडॉप्ट करते हैं। जैसे इंट्राडे ट्रेडिंग, बीटीएसटी ट्रेडिंग, स्विंग ट्रेडिंग, पोजीशनल ट्रेडिंग। इसके अलावा एक और ट्रेडिंग स्टाइल है जिसे हम कहते हैं स्कैल्पिंग। स्कैल्पिंग एक ऐसी एक्टिव ट्रेडिंग स्टाइल है जिसे एक ही दिन के अंतराल में किया जाता है यानी कि इंट्राडे में किया जाता है। लेकिन इसमें हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग हम लोग करते हैं। तो आज के वीडियो में हम बात करेंगे स्कैल्पिंग ट्रेडिंग स्ट्रेटजी के बारे में। हम यह देखेंगे कि स्कैल्पिंग एक्चुअली जो प्रोसेस है वो कैसे किया जाता है। किन ट्रेडर्स के लिए सूटेबल है और कैसे एक पर्टिकुलर स्ट्रेटजी को अडॉप्ट करके आप बहुत अच्छा प्रॉफिट इसमें बना सकते हैं। तो चलिए वीडियो को शुरू करते हैं। हाय, मैं हूं डॉ. प्रियंका। आई एम अ स्टॉक मार्केट मेंटोर, अ फुल टाइम ट्रेडर एंड इन्वेस्टर इन इंडियन मार्केट्स। जब भी हम स्कैल्पिंग के बारे में ट्रेडर्स से बात करते हैं तो इसमें बहुत सारे ऐसे ट्रेडर्स होते हैं जो इसमें कंफ्यूज रहते हैं कि स्कैल्पिंग और इंट्राडे ट्रेडिंग को वो ऑलमोस्ट सेम ही समझते हैं। इसमें कोई डाउट नहीं है कि स्कैल्पिंग जो ट्रेडिंग स्टाइल होता है वो भी इंट्राडे में ही किया जाता है। यानी कि जो टाइम फ्रेम होता है 95 से 3:30 तक ही हम उन ट्रेड्स को एग्जीक्यूट करते हैं। लेकिन जो स्टाइल होता है स्कैल्पिंग का वो इंट्राडे ट्रेडिंग से क्वाइट डिफर करता है। अब देखिए मेजर डिफरेंस क्या होता है? जब हम स्कैल्पिंग की बात करते हैं या फिर हम इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में बात करते हैं। इंट्राडे ट्रेडिंग में आप कोई भी टाइम फ्रेम चूज़ कर सकते हैं। जैसे 5 मिनट्स से लेके 15 मिनट्स, 30 मिनट्स यहां तक कि वन ऑवर चार्ट में भी आप इंट्राडे ट्रेडिंग कर सकते हैं। लेकिन जब हम स्पेसिफिकली स्कैल्पिंग के बारे में बात करते हैं तो इट मींस कि आपका जो टाइम फ्रेम होता है वो बहुत छोटा होता है। यानी कि जो भी टाइम फ्रेम आप चार्ट में सेलेक्ट कर रहे हैं, या तो वह 1 मिनट होगा, 2 मिनट होगा या मैक्सिमम वह 5 मिनट्स हो सकता है। उससे बड़ा टाइम फ्रेम अगर आप चार्ट्स में चूज़ करते हैं इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए, तो फिर वो इंट्राडे ट्रेडिंग के अंतर्गत आता है ना कि स्कैल्पिंग के अंतर्गत। इसे और क्लियरली समझने के लिए एक एनालॉजी लेते हैं। देखिए, स्कैल्पिंग होता कैसे है? कैसे यह एग्जीक्यूट किया जाता है? और इसमें क्या अंडरलाइन मेंटालिटी होती है ट्रेडर्स की या स्कैल्पर्स की? पहले वो समझते हैं। तो स्कैल्पिंग जो प्रोसेस होता है वह एग्जैक्टली काम कैसे करता है? अब देखिए मान लीजिए दो एप्पल सेलर्स हैं। पहला एप्पल सेलर जो है वो एप्पल्स ₹100 पर केजी में खरीदता है और सिर्फ ₹1001 पर केजी में बेच देता है। यानी उसका प्रॉफिट सिर्फ ₹1 पर केजी है। अब पहली नजर में यह लगता है कि ₹1 कमाकर कोई कितना ही कमा लेगा क्योंकि यह प्रॉफिट बहुत छोटा है यहां पे। लेकिन एक बात समझिए यह सेलर दिन भर में हजारों कस्टमर्स को एप्पल बेचता है। मान लीजिए उसका एक दिन में 2000 केजी एप्पल्स सेल करता है वो ऑल ओवर इंडिया डिस्ट्रीब्यूट करता है तो सिर्फ वन पर केजी का प्रॉफिट भी उसके लिए 2000 का प्रॉफिट बन जाएगा एक पर्टिकुलर दिन में और अगर वह महीने के 25 डेज भी इसी तरह बिजनेस करे तो उसका प्रॉफिट ₹0000 हो जाता है। अब समझिए इस बात को। अगर सिर्फ़ ₹1 का प्रॉफ़िट में ₹0000 का प्रॉफ़िट हो सकता है। एक बड़ी क्वांटिटी अगर वह ट्रेड करता है तो तो यहीं अगर उसका प्रॉफिट ₹2 हो जाता है, तो यही ₹0000 का प्रॉफिट ₹1 लाख भी बन सकता है। अब दूसरी तरफ एक और सेलर है। वो भी एप्पल्स ₹100 पर केजी में ही खरीदता है। लेकिन वह वेट करता है कि प्राइस 105 हो जाए। तब बेचता है और एक ही ट्रांजैक्शन में ₹5 पर केजी का प्रॉफिट कमा लेता है। दोनों पैसा कमा रहे हैं। दोनों प्रॉफिट बुक कर रहे हैं। दोनों का बिजनेस प्रॉफिटेबल है। बस उनकी अप्रोच अलग-अलग है। स्टॉक मार्केट में भी बिल्कुल ऐसा ही होता है। कुछ ट्रेडर्स एक बड़े मूव का वेट करते हैं। जैसे कि स्विंग ट्रेडर्स और पोजीशनल ट्रेडर्स और बीटीएसटी ट्रेडर्स। जबकि कुछ ट्रेडर्स मार्केट के छोटे-छोटे प्राइस मूवमेंट से बार-बार प्रॉफिट बुक करते हैं। और इसी टाइप के ट्रेडिंग को हम स्कैल्पिंग कहते हैं। यहां पे जो ट्रेडर्स का गोल होता है वो 1 मिनट के अंदर किसी ट्रेड को लेना और फिर बार-बार दिन के अंतराल उस ट्रेड को लेते रहना। जैसे कि एक दिन में उन्होंने पांच ट्रेड लिए लेकिन जो उनका प्रॉफिट परसेंटेज होता है स्कैल्पर्स का वो काफी छोटा होता है। लेकिन जब वो छोटा-छोटा प्रॉफिट मिलके एक बड़ा प्रॉफिट हो जाता है। सो बेसिकली स्कैल्पिंग जो प्रोसेस होता है उसका मतलब होता है एक हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप का वेट करना पेशेंटली मार्केट से छोटा सा मूव कैप्चर करना, प्रॉफिट बुक करना और फिर डिसिप्लिन के साथ अगले सेटअप का वेट करना। अब देखिए, यह जो एनालॉजी मैंने आपके साथ शेयर की है, इसे निफ्टी के कॉन्टेक्स्ट में समझते हैं। मान लीजिए एक स्कैल्पर निफ्टी फ्यूचर्स में ट्रेड करता है। उसे पूरे दिन में सिर्फ तीन अच्छे सेटअप्स मिले। पहले ट्रेड में उसने 12 पॉइंट्स कैप्चर किए। दूसरे में 15 और तीसरे में 18। यानी पूरे दिन में उसने सिर्फ 45 पॉइंट्स कैप्चर किए। अब पहली नजर में 45 पॉइंट्स बहुत छोटे लग सकते हैं। लेकिन मान लीजिए वो ट्रेडर 10 लॉट्स ट्रेड कर रहा है या फिर उससे भी ज्यादा। अब देखिए निफ़ी फ्यूचर्स का एक लॉट है 65 का तो 45 पॉइंट्स का प्रॉफ़िट होगा 45 * 65 और क्योंकि ट्रेडर 10 लॉट्स में ट्रेड कर रहा है तो उसका टोटल प्रॉफिट यहां पे हो जाएगा 29250 का। यानी मार्केट ने कोई बहुत बड़ा मूव नहीं दिया। फिर भी छोटे-छोटे मूव्स को डिसिप्लिन के साथ कैप्चर करके एक मीनिंगफुल रिटर्न यहां पे उस ट्रेडर्स ने या फिर उस कैलपर ने जनरेट किया है। इसी पर्टिकुलर अप्रोच के साथ जब हम ट्रेड करते हैं, जहां पे हम हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग करते हैं, हाई क्वांटिटी लेते हैं, छोटे-छोटे प्राइस मूव्स को कैप्चर करते हैं, तो इसको हम स्कैल्पिंग कहते हैं। अब देखिए, इसी चीज को हम चार्ट्स में एक बार देखते हैं और थोड़ी सी क्लेरिटी और लेते हैं। इसके बाद हम चलेंगे स्ट्रेटजी की तरफ जहां पे मैं आपके साथ डिस्कस करूंगी एक स्कैल्पिंग स्ट्रेटजी जो कि एक बहुत हाई प्रोबेबिलिटी आपको यहां पे रिजल्ट्स दे सकता है। लेकिन पहले चार्ट्स में यह समझते हैं कि अगर आप एक स्कैल्पर हैं या मैं एक स्कैल्पर हूं तो मैं किस तरीके के ट्रेड्स यहां पे लूंगी। अब सबसे पहले यह जो आपको यहां पे दिखाई दे रहा है, यह निफ्टी 50 का चार्ट है। ठीक है? तो सबसे पहला स्टेप जो यह डिस्टिंग्विश करेगा कि वेदर यू आर डूइंग स्पेसिफिकली इंट्राडे ट्रेडिंग और स्कैल्पिंग वो यह है कि आपने टाइम फ्रेम कौन सा सेलेक्ट किया है। अब देखिए यहां पे जब अगर आप कहते हैं कि आप एक स्कैल्पर हैं तो आप 1 मिनट टाइम फ्रेम चूज़ कर सकते हैं, 2 मिनट कर सकते हैं या फिर मैक्सिमम 5 मिनट तक जा सकते हैं। ठीक है? यही हमारा गोल होता है स्कैल्पिंग के अंतर्गत। अगर मैं कहती हूं कि मैं इंट्राडे ट्रेडिंग करना चाहती हूं तो मेरे लिए ऐसी कोई हिंडरेंस यहां पे नहीं है। मैं 5 मिनट भी सेलेक्ट कर सकती हूं। 10 मिनट्स 15 मिनट्स और थोड़ा लार्जर टाइम फ्रेम भी सेलेक्ट कर सकती हूं। अब देखिए यहां पे मैंने 1 मिनट का टाइम फ़्रेम सेलेक्ट करके स्कैल्पिंग के लिए एक चार्ट यहां पे खोल लिया है। अब ईच कैंडल जो आपको यहां पे दिखाई दे रही है यह निफ़ी की 1 मिनट कैंडल है। यानी कि जितने डाटा पॉइंट्स आपको यहां पे दिखाई दे रहे हैं एक पर्टिकुलर कैंडल स्टिक बार में ओपन हाई, लो, क्लोज वो 1 मिनट का डाटा रिफ्लेक्ट कर रहा है। अब देखिए क्योंकि यह 1 मिनट की कैंडल स्टिक है तो आपको एक-एक दिन में बहुत सारी कैंडल स्टिक यहां पे मिलेंगी क्योंकि हम हर मिनट के लिए यहां पे एक नई कैंडल स्टिक को देख रहे हैं। आप जितनी स्क्रीन पर देख पा रहे हैं यहां कैंडल स्टिक ये सिर्फ 1 घंटे की कैंडल स्टिक का इनेशन आपको यहां पे दिखाई दे रहा है। अब एज अ स्कैल्पर आप करेंगे क्या? अब देखिए एग्जैक्टली स्कैल्पिंग होती कैसे है? एक बार वो समझते हैं और उसके बाद हम डायरेक्टली स्ट्रेटजी पर जाएंगे। तो देखिए यहां पे जो आपको दो कैंडल स्टिक दिखाई दे रही है। यहां से एज अ स्कैल्पर मैं देख पा रही हूं कि मार्केट एक डाउन ट्रेंड में मुझे दिखाई दे रहा है ऑन 1 मिनट टाइम फ्रेम। ठीक है? यहां पे आके मैं देखती हूं एक हाई मोमेंटम कैंडल बनी है। साथ में एक बुलिश एनंगल्फिंग पैटर्न भी मुझे यहां पे बनता हुआ दिखाई दे रहा है। व्हिच टेल्स मी एज अ प्राइस एक्शन ट्रेडर कि शायद यहां से अभी ट्रेंड रिवर्स हो सकता है। तो इस पर्टिकुलर बुलिश इंगल्फिंग पैटर्न को देख के मैं नेक्स्ट कैंडल स्टिक में अपना एंट्री प्लान करती हूं। अब मेरे लिए बेसिकली ये जो दो कैंडल स्टिक हैं ये सिर्फ 2 मिनट्स की इंफॉर्मेशन है। तो जब मैंने सिर्फ 2 मिनट्स का डाटा देख के एंट्री ली है किसी ट्रेड में तो ऑब्वियसली मेरा जो होल्डिंग पीरियड होगा वो आधे घंटे या 1 घंटे का नहीं होगा। क्योंकि स्कैल्पिंग के अंतर्गत हम छोटा टाइम फ्रेम एंट्री के लिए चूज़ करते हैं और साथ ही छोटा टाइम फ्रेम चूज़ करते हैं एग्जिट के लिए। तो यहां पे जो मेरी एंट्री हो जाएगी इस वाले कैंडल में वो हो जाएगी 24,245 के लेवल पे। ठीक है? यहां पे जो मेरा रिस्क रहेगा वो ऑब्वियसली हम लोग जब भी बुलिश इनंगल्ल्फिंग पैटर्न को ट्रेड करते हैं उसके लो पे अपना स्टॉप लॉस लगाते हैं। तो स्टॉप लॉस मेरा हो जाएगा लो ऑफ़ द पैटर्न पे और जो मेरा टारगेट होगा लेट्स से यहां पे मेरे स्टॉप लॉस पॉइंट्स हैं 10 पॉइंट्स। तो जो मेरा टारगेट होगा वो सिर्फ 20 पॉइंट्स का होगा। यानी कि 1:2 रिस्क रिवॉर्ड हम लेके चलेंगे। तो एक बार जैसे ही वो मेरा टारगेट अचीव होगा मुझे वहां पे एग्जिट कर देना है। अब जो स्कैल्पर की मेंटालिटी होती है वो ये नहीं होती है कि ये यहां से और ऊपर जा सकता था। इतना पॉइंट्स मैं और कैप्चर कर सकता था या कर सकती थी। अब देखिए स्कैल्पिंग में हम एक बहुत ही स्ट्रिक्ट सिस्टम को ट्रेड करते हैं। इसमें सिस्टम यह होता है कि हमने बार-बार मल्टीपल ट्रेड्स लेने हैं। हाई क्वांटिटी में ट्रेड्स लेने हैं। 1000 लॉट्स लेने हैं, 500 लॉट लेने हैं या 200 लॉट लेने हैं। लेकिन जो मेरा पॉइंट्स अपमूव होगा वो बहुत छोटा होगा। तो प्रॉफिट मेरा तब भी बनेगा। लेकिन जो यहां पे जो टेक्निकल पैरामीटर हम यूज़ कर रहे हैं, वह कैंडलस्टिक पैटर्न हम यूज़ कर रहे हैं इसके अंतर्गत एंट्री के लिए। आप और कोई सेटअप भी यूज कर सकते हैं जो ईएमए के बेसिस पे हो सकता है या फिर बॉलिंजर बैंड्स के बेसिस पे हो सकता है या वीवप के बेसिस पे हो सकता है। वो हम बाद में स्ट्रेटजी में डिस्कस करेंगे। लेकिन फिलहाल हम यहां पे सिर्फ यह डिस्कस कर रहे हैं कि अगर आप किसी स्कैल्पिंग ट्रेड में देखते हैं कि आपके एग्जिट करने के बाद स्टॉक या इंडेक्स वहां से और ऊपर चला गया है। तो सिर्फ आपने यह समझना है कि दैट इज़ नॉट अ पार्ट ऑफ़ माय सिस्टम। तो इस तरीके की मेंटालिटी के साथ आपने ट्रेड करना है कि मैंने जो टारगेट फिक्स किया है 10 पॉइंट्स, 15 पॉइंट्स या 20 पॉइंट्स वो मेरे पास आना चाहिए। उसके बाद स्टॉक चाहे वहां से ऊपर जाए या नीचे जाए वो हमारा सिस्टम का पार्ट नहीं है। इसी तरीके से हम एक ट्रेड यहां पे लेंगे। दूसरा ट्रेड अगर मेरा सिस्टम यह कहता है कि मुझे सिर्फ बुलिश कैंडल स्टिक पैटर्न्स को ही ट्रेड करना है। तो एक ट्रेड मेरा यहां पे बनेगा बुलिश एनंगल्फिंग का। दूसरा ट्रेड मेरा यहां पे बन सकता है हैमर का। तीसरा ट्रेड अगेन मेरा यहां पे बन सकता है बुलिश एनंगल्फिंग पैटर्न का। तो इस तरीके से सिर्फ आप देखिए टाइम यहां पे कितना है? 2:30 का टाइम है और यहां पे लगभग 3:00 बजे का टाइम है। लगभग 3:00 बजे का। सिर्फ आधे घंटे के अंतराल में आपको दो या तीन ट्रेड्स मिल सकते हैं। तो इस तरीके के ट्रेड्स जब हम लेते हैं जिनमें हाई फ्रीक्वेंसी हो, लार्ज क्वांटिटी हो और स्मॉल प्रॉफिट टारगेट्स हो तो उसको हम स्कैल्पिंग कहते हैं। तो चलिए आई होप कि यहां तक आपको एक स्कैल्पिंग का बेसिक फ्रेमवर्क पता चल गया होगा कि स्कैल्पिंग एज अ स्ट्रेटजी क्या होती है? किस टाइम फ्रेम में हम ट्रेड करते हैं और किस तरीके की मेंटालिटी के साथ हम यहां पे प्रॉफिट बुक करने का प्लान करते हैं। अब चलते हैं हम अपनी पर्टिकुलर स्ट्रेटजी में कि अगर आपको स्कैल्पिंग स्टार्ट करनी है या अगर मैं स्कैल्पिंग करूं तो मैं कौन सा सेटअप फॉलो करती हूं। देखिए सबसे पहले आपने क्या करना है? राइट टाइम फ्रेम सेलेक्ट करना है। तो यह जो स्कैल्पिंग स्ट्रेटजी मैं आपके साथ डिस्कस कर रही हूं। इसका नाम है 1 मिनट बॉक्स स्कैल्पिंग स्ट्रेटजी। तो इस स्ट्रेटजी के अंतर्गत सबसे पहले हमने डिसाइड करना है कि हमारा टाइम फ्रेम क्या होगा। हम यहां पे चूज़ कर रहे हैं 1 मिनट का टाइम फ्रेम जिसमें हम स्कैल्पिंग करेंगे। अगेन हम यहां पे सिर्फ एक या दो ट्रेड्स नहीं लेंगे। हम अपने आप को रिस्ट्रिक्ट नहीं करेंगे कि हमने एक ट्रेड लेना है या दो ही लेना है। जितनी बार यह सेटअप दिखेगा, जितनी बार हमारी यह टेक्निकल पैराटर्स यहां पे मैच करेंगे। उतनी बार हम उस सेटअप को यहां पे ट्रेड करेंगे। क्वांटिटी आपने कितनी लेनी है यह आप अपने रिस्क प्रोफाइल या अपने कैपिटल साइज के हिसाब से डिसाइड कर सकते हैं। जैसे फॉर एग्जांपल अगर आप 50 लॉट्स लेना चाहते हैं निफ्टी के या 10 लॉट्स लेना चाहते हैं या 100 लॉट्स लेना चाहते हैं या 1000 लेना चाहते हैं। बहुत सारे ऐसे स्कैल्पर भी होते हैं जो बहुत बड़ी क्वांटिटी में ट्रेड करते हैं। जैसे 1000 लॉट या 10,000 लॉट। तो यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप कितना क्वांटिटी लेना चाहते हैं। क्योंकि जैसे-जैसे आप क्वांटिटी इनक्रीस करते हैं, वैसे-वैसे आपका रिस्क भी बढ़ता चले जाता है। फॉर एग्जांपल अगर आप 10 लॉट्स पे ट्रेड करते हैं और आपका जो रिस्क पॉइंट है वो 10 का है। तो 10 * 10 आपका हो जाएगा टोटल रिस्क अमाउंट। लेकिन अगर वहीं पे आप 1000 क्वांटिटी पे ट्रेड करना चाहें तो 1000 * 10 आपका जो रिस्क है वो भी 10 टाइम्स बढ़ जाएगा। तो इसीलिए वो चीज आप अपने हिसाब से डिसाइड कर सकते हैं। अब समझते हैं कि कौन सा सेटअप हमने यहां पे स्पॉट करना है जो कि मुझे हाई प्रोबेबिलिटी ट्रेड्स दे व्हिच मींस कि मेरे यहां पे स्टॉप लॉस हिट होने के चांसेस कम हो लेकिन विनिंग चांसेस ज्यादा हो। तो इसके लिए देखिए एक बहुत ही हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप मैंने यहां पे डिज़ाइन किया है। इस सेटअप के अंतर्गत हमारा जो एफेसिस रहेगा वो रहेगा कैंडलस्टिक पैटर्न्स पे। तो बेसिकली हम यहां पे एक टाइम पीरियड सेलेक्ट करेंगे। ऐसी कैंडल स्टिक्स को स्पॉट करेंगे जो हमें कंसोलिडेशन दिखा रही है। कैसे दिखता है कंसोलिडेशन? 1 मिनट टाइम फ्रेम में। देखिए मार्केट में तीन टाइप के ट्रेंड्स आपको देखने मिलते हैं। सबसे पहला होता है अप ट्रेंड। किसी भी टाइम फ्रेम में अगर आप किसी स्टॉक को या इंडाइससेस को ट्रेड करते हैं तो या तो वह आपको अप ट्रेंड में दिखेगा या फिर डाउन ट्रेंड में दिखेगा। इस टाइप की मूवमेंट होगी या फिर वह एक साइडवेज ट्रेंड में दिखेगा। अप ट्रेंड का मतलब होता है कि स्टॉक कंटीन्यूअसली हायर हाईज़ बना रहा है और हायर लोज़ बना रहा है। डाउन ट्रेंड में जब कोई स्टॉक होगा या इंडेक्स होगा तो वो लोअर हाईज़ एंड लोअर लोज़ बना रहा है। जब हम साइडवेज मूवमेंट की बात करते हैं तो वहां पे ना हमको हायर हाईज़ दिखते हैं और ना हमको लोअर हाईज़ दिखते हैं। बेसिकली जो स्टॉक की मूवमेंट होगी वो एक रेक्टेंगल शेप में आपको दिखाई देगी। जैसे कि आपको यहां पे भी दिखाई दे रहा है। एक चीज यहां पे मैं और ऐड करना चाहूंगी कि इस स्कैल्पिंग स्ट्रेटजी के अंतर्गत कौन से इंस्ट्रूमेंट आप ट्रेड कर सकते हैं या कौन से एसेट क्लासेस ये जो स्ट्रेटजी है आप बेसिकली सारे स्टॉक्स में जो भी स्टॉक आप ट्रेड करना चाहते हैं या इंडेक्स ट्रेड करना चाहते हैं जैसे निफ्टी बैंक निफ्टी या और कोई एसेट क्लास अगर आप ट्रेड करते हैं सेम इसी तरीके से आपने स्ट्रेटजी को ट्रेड करना है। फ्यूचर्स में ट्रेड कर सकते हैं या फिर कैश में भी ट्रेड कर सकते हैं। अब देखिए पॉइंट पर वापस आते हैं। जब भी किसी एसेट क्लास को आप ट्रेड करते हैं ना और आप देखते हैं कि उस एसेट क्लास में कोई भी एक प्रॉपर ट्रेंड नहीं है। ना अप ट्रेंड है ना डाउन ट्रेंड है। बल्कि वो एसेट क्लास एक साइडवेज मूवमेंट में आपको दिखाई देता है। इसका मतलब है दैट देयर इज़ अ हाई चांस कि सूनर और लेटर या तो वो एक ब्रेकआउट करेगा ऊपर की साइड प्राइसेस मूव करेंगे इन एन अप ट्रेंड और वो ब्रेकडाउन करेगा नीचे की साइड जहां से प्राइसेस शार्पली नीचे की साइड जाएंगे। कुछ इस टाइप की मूवमेंट आपको देखने को मिलेगी क्योंकि टेक्निकल एनालिसिस के अंदर एक बहुत ही मेजर प्रिंसिपल यह है कि प्राइसेस बहुत देर तक साइडवेज मूव में नहीं रह सकते। या तो वह ब्रेकआउट देंगे ऊपर की साइड मतलब कि वहां पे डिमांड सूर और लेटर बढ़ेगी काउंटर में कुछ इस टाइप से या फिर उस काउंटर में जो अभी साइडवेज मूवमेंट में है उसमें सप्लाई बढ़ेगी सूर और लेटर। आप कोई भी चार्ट उठा के देखिए और उस चार्ट में ऑब्ज़र्व कीजिए। किसी भी टाइम फ्रेम में 1 मिनट टाइम फ्रेम में, 2 मिनट, 5 मिनट या फिर आप डेली टाइम फ्रेम में भी देखिए जो भी स्टॉक या जो भी एसेट क्लास साइडवेज मूवमेंट में है बहुत टाइम से लेट्स से फॉर डज़, फॉर वीक्स और फॉर मंथ्स वहां पे सूर और लेटर एक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन आता ही है। अभी फिलहाल क्योंकि हम स्कैल्पिंग की बात कर रहे हैं। लेकिन जो कांसेप्ट्स हैं टेक्निकल एनालिसिस के वो सेम ही रहते हैं। हमारा टाइम फ्रेम बेस रिड्यूस होता रहता है। अब देखिए यहां पे जब हम साइडवेज मूवमेंट की बात करते हैं कैंडल स्टिक में 1 मिनट टाइम फ्रेम में तो यहां पे आप देख पा रहे हैं कि जो कैंडल स्टिक्स हैं वह हायर हाईज़ नहीं बना रही हैं। इंस्टेड वो एक ही लेवल के आसपास ट्रेड कर रही हैं। आप नीचे के साइड इस सेटअप के अंतर्गत एक लाइन खींच पाएंगे। अब देखिए यहां पे अगर मैं ये दो लाइंस ड्रॉ करूं तो नीचे के साइड जो कैंडल स्टिक के लोज़ हैं वो ऑलमोस्ट सेम ही लेवल पे मुझे आते हुए दिखाई दे रहे हैं। ठीक है? पिछले कुछ टाइम से तो 24258 लेट्स से वह लेवल है या फिर 24255 ऊपर के साइड जो हाईज़ बन रहे हैं कैंडल स्टिक के वो भी लगभग एक ही लेवल के आसपास बन रहे हैं और वो है 24264 के अराउंड। सो बेसिकली 10 पॉइंट्स की मूवमेंट के अंदर जो कैंडल स्टिक्स हैं 1 मिनट कैंडल स्टिक्स हैं वो कंसोलिडेट कर रही हैं। और यही इस सेटअप की पावर है। बेसिकली वी हैव टू आइडेंटिफाई अ बॉक्स व्हेयर इन द 1 मिनट कैंडल स्टिक्स आर कंसोलिडेटिंग। लगर द कंसोलिडेशन स्ट्रांगर विल बी द ब्रेकआउट और ब्रेकडाउन। तो, अभी इस सेटअप के अंतर्गत हमें क्या नहीं पता ऐज़ अ स्कैल्पर। हमें यह नहीं पता है कि यहां पे अभी ब्रेकआउट आने वाला है या ब्रेकडाउन आने वाला है। क्या हम जानते हैं? हम यह जानते हैं कि स्टॉक में अभी डिमांड और सप्लाई इक्विलिब्रियम में है। मतलब ना बयरर्स बहुत स्ट्रांगली एक्टिवेट है इस काउंटर में और ना सेलर्स। बट सूनर और लेटर कोई एक पार्टी होगी जो इस यू नो कंसोलिडेशन से बाहर आ जाएगी। और जिस पे करेक्ट का ब्रेकआउट आएगा वी हैव स्कैल्पर वी विल टेक पोजीशन ऑन दैट साइड। अब देखिए बहुत देर तक यहां पे कंसोलिडेशन हो गया। इसके बाद का मूवमेंट देखिए। यह 10 पॉइंट्स की रेंज थी और जैसे यह ब्रेकआउट आया स्टॉक बहुत तेज़ से ऊपर की साइड मूव किया है। अब एज अ स्कैल्पर मुझे कैसे ट्रेड करना है? मुझे पता है जो नीचे का लेवल है वो 24,255 के अराउंड है। मैं जो अपना एंट्री पॉइंट लगाऊंगी वो किस लेवल पे हो जाएगा? मेरी जो एंट्री होगी वो इस कंसोलिडेशन का जो ऊपर का रेंज है यानी इस कैंडल स्टिक में मैं अपनी एंट्री प्लान कर सकती हूं। आप इस कैंडल के क्लोज होने का भी वेट कर सकते हैं और नेक्स्ट कैंडल में अपनी एंट्री प्लान कर सकते हैं। सो बेसिकली बहुत ही स्पीड और एग्जीक्यूशन की हमें यहां पे जरूरत पड़ती है क्योंकि हमने लार्ज क्वांटिटी को ट्रेड करना है। जो बेसिकली स्कैल्पिंग का ट्रेड होता है वो कभी-कभी 2 मिनट 3 मिनट 4 मिनट या 5 मिनट में एंट्री एंड एग्जिट दोनों क्लोज हो जाते हैं। सो बेसिकली अब आप यह इमेजिन कीजिए कि आप यहां पे एंट्री लेते हैं 24265। हाउ द ट्रेड विल प्ले आउट? आपका रिस्क कितना है यहां पे? आपका रिस्क मान लीजिए यहां पे हो जाता है 10 पॉइंट्स अगर आपको ज्यादा लग रहे हैं फाइव पॉइंट्स का आप लगा सकते हैं जो कि इस कैंडल स्टिक का ओपनिंग प्राइस हो सकता है। यहां पे आपने अपना स्टॉप लॉस लगाया। यहां पे एंट्री ली नेक्स्ट कैंडल पे इसको थोड़ा मूव कर देते हैं। इस कैंडल पे आपने एंट्री ली। अब आपका जो टारगेट है वो कितना होगा? 10 या 15 पॉइंट्स का। सो बेसिकली जितना मेरा रिस्क है मेरा पहला टारगेट उसका डबल होना चाहिए। अगर फाइव पॉइंट्स का रिस्क है तो सिर्फ 10 पॉइंट्स का टारगेट। इसी तरीके से अगर आप 20 पॉइंट्स का रिस्क लेते हैं तो 40 पॉइंट्स का टारगेट। सो बेसिकली परसेंटेज टर्म्स में देखेंगे तो ये जो टारगेट्स हैं ये बहुत छोटे टारगेट्स हैं। अब निफ्टी अगर 24200 के अराउंड ट्रेड कर रहा है तो इसका 1% कितना होता है? लगभग 250 पॉइंट्स के लगभग। लेकिन हमारा जो प्रॉफिट टारगेट है स्कैल्पिंग के अंतर्गत सिर्फ 30 पॉइंट, 40 पॉइंट या 50 पॉइंट का हो रहा है। तो परसेंटेज टर्म्स में ये आपको बहुत कम लग सकता है। बट दैट इज हाउ स्कैल्पिंग प्रोसेस इज़। क्योंकि हम यहां पे क्वांटिटी सिर्फ एक या दो लॉट नहीं ले रहे। हम यहां पे ज्यादा क्वांटिटी को ट्रेड कर रहे हैं। जैसे कि मैंने आपको वीडियो के शुरुआत में भी कुछ एग्जांपल्स दे के बताया था। अब देखिए मान लीजिए आपके पास यहां पे निफ्टी की 1000 क्वांटिटी है और आप 20 पॉइंट्स के लिए ट्रेड करते हैं तो आपका टोटल प्रॉफिट यहां पे कितना हो जाएगा? 20,000 का हो जाएगा। या फिर मान लीजिए आपके पास निफ्टी की 500 क्वांटिटी है और आपका जो प्रॉफिट टारगेट है वो 40 पॉइंट्स का है। तो उस केस में आपका जो टोटल प्रॉफिट अगेन कितना हो जाएगा? 20,000 का हो जाएगा। सो वीडियो की शुरुआत में मैंने जो आपको एक एप्पल सेलर का एग्जांपल दिया था। हमारा प्रॉफिट उतना ही बन रहा है। लेकिन यह ट्रेडर टू ट्रेडर वैरी करता है कि उसने कितनी क्वांटिटी बाय करनी है। अब देखिए हो सकता है मेरी रिस्क एपेटाइट 1000 लॉट की हो। पर किसी और ट्रेडर की एपेटाइट हो सकता है रिस्क एपेटाइट कम हो। तो उस हिसाब से वो अपनी पोजीशन साइजिंग को कम रखें और प्रॉफिट टारगेट को बढ़ा सकते हैं। तो यह दिस इज़ समथिंग व्हिच यू हैव टू डिसाइड ऑन योर लेवल। तो अभी जैसे इस स्ट्रेटजी के अंतर्गत हम बात कर रहे थे कि ये जो स्ट्रेटजी है जब भी आप इस टाइप के कंसोलिडेशन देखेंगे 1 मिनट कैंडल स्टिक में तो ये हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप्स होते हैं जिनमें आपको एक अच्छा प्रॉफिट देखने को मिलता है। अब चलिए देखते हैं कि ऐसे सेटअप हमें निफ्टी के चार्ट में कितनी बार देखने को मिले। एक ये पॉइंट है जो मैंने आपके साथ डिस्कस किया। उसके बाद लेट्स से यहां पे एंट्री लेके हम यहां कहीं जाके इस ट्रेड से निकल जाते हैं। उसके बाद अगेन हम सर्च करते हैं ड्यूरिंग द डे कि ऐसा सेटअप हमको दोबारा देखने को मिले। अब देखिए यहां कहीं जाके ये जो सेटअप है मुझे दोबारा देखने को मिलता है। कैसे पहचानेंगे इस सेटअप को? सबसे पहले जो कैंडल स्टिक्स यहां पे बन रही हैं वो न्यूट्रल कैंडल स्टिक्स हैं। देखिए दो टाइप की कैंडल स्टिक होती हैं ट्रेडिंग के अंतर्गत। एक होती है हाई मोमेंटम कैंडल स्टिक जो हमें डायरेक्शन का क्लियर सेंस देती हैं। जैसे कि अगर हम इस वाली कैंडल स्टिक के बात करें। दिस इज़ अ हाई मोमेंटम कैंडल स्टिक एंड इट इज़ रेड इन कलर व्हिच सजेस्ट कि यहां से अभी सप्लाई बढ़ रही है। उसी तरीके से हाई मोमेंटम कैंडल स्टिक बयरर्स की साइड भी हो सकती है। जैसे कि एक ग्रीन कैंडल स्टिक है। यह क्या है? एक हाई मोमेंटम कैंडल स्टिक है। कैसे पता चलेगा? लॉन्ग ग्रीन कैंडल है, शैडोज़ नहीं है। जब भी बॉडी बहुत लंबी होती है ना, तो यह हमें एक सेंस ऑफ डायरेक्शन देती है। यानी कि यहां से अभी बढ़त और बढ़ सकती है। कोई भी लॉन्ग ग्रीन कैंडल। लेकिन जब आप देखते हैं कोई कैंडल स्टिक है जिसकी बॉडी बहुत छोटी है। जैसे कि यह कैंडल स्टिक है। बॉडी बहुत छोटी है। शैडोज़ भी ऊपर नीचे हैं। शैडोज़ भी बहुत ज्यादा लंबी भी हो सकती हैं, छोटी भी हो सकती हैं। बट बेसिकली द बॉडीज़ आर वेरी स्मॉल। ये सजेस्ट करते हैं कि यहां पे जो ओपनिंग प्राइस है, क्लोजिंग प्राइस है, दोनों एक ही रेंज के आसपास है। व्हिच अगेन सजेस्ट मी इट इज़ अ कंसोलिडेशन गोइंग ऑन। नाउ जब मुझे पांच छह ऐसी कैंडल्स मिनिमम तीन आपको देखनी ही देखनी है। तीन से ज्यादा हो तो बेटर है। तो यहां पे देखिए जैसे अगर हम इस बॉक्स पैटर्न के अंतर्गत कैंडल स्टिक को काउंट करें तो 1 2 3 4 5 6 7 8 9 ऑलमोस्ट नाइन 10 कैंडल स्टिक्स मुझे ऐसे देखने को यहां पे मिल रही हैं। जिनमें एक न्यूट्रल स्टांस मुझे पता चल रहा है। कैसे पता चल रहा है? बॉडीज आर वेरी स्मॉल। शैडोज़ आर देयर बट अगेन ऑल दीज़ कैंडल स्टिक्स कैन बी पैक्ड इनू अ बॉक्स और वह बॉक्स की रेंज बहुत छोटी होनी चाहिए। कई बार हम कंसोलिडेशन देखते हैं जिनमें जो रेंज है वह बहुत ज्यादा हो सकती है। अब देखिए यहां पे जो रेंज बन रही है नीचे की साइड 24290 का लेवल है और ऊपर की साइड 24298 का लेवल है। सिर्फ आठ पॉइंट्स की यहां पे हमारी रेंज बन रही है। तो अगर इसके बेसिस पे हम कोई ट्रेड लेते हैं, ब्रेकआउट पे ट्रेड करते हैं या ब्रेकडाउन पे ट्रेड करते हैं इस बॉक्स के बेसिस पे, तो यह हम मान के चलते हैं कि यहां पे हमें एक बहुत अच्छा प्रॉफ़िट बुक करने का मौका मिल सकता है। क्योंकि जो सप्लाई बढ़ेगी कुछ टाइम बाद वह काफी ज्यादा हाई मोमेंटम सप्लाई होगी। और जैसा कि हम यहां पे देख भी पा रहे हैं। देखिए सिर्फ एक कैंडल में सप्लाई इतनी ज्यादा यहां पे बढ़ गई है। और जैसा कि हम यहां पे देख भी पा रहे हैं। जैसे ही यह बॉक्स पैटर्न बना है जिसमें एक बहुत ही नैरो रेंज थी। जो कैंडल स्टिक हैं वो उनका न्यूट्रल स्टैंड्स था। स्मॉल बॉडीज थी। एक छोटी सी रेंज हमको बनते हुए यहां पे दिखाई दे रही है सेवन एट पॉइंट्स की। जैसे ही यह ब्रेकडाउन आया है, जैसे ही यह बॉक्स टूटा है नीचे की साइड, उसके बाद एक शार्प सेलिंग प्रेशर हमें स्टॉक में देखने को मिला है। देखिए, इसके बेसिस पे अगर आप यहां पे एंट्री लेते हैं, आपका रिस्क सिर्फ हो जाएगा पांच या छह पॉइंट का और आपका जो प्रॉफिट टारगेट होगा, वह 10 से 12 पॉइंट्स का हो सकता है। और उसके बाद इस ट्रेड को होल्ड करके रख सकते हैं टिल योर टारगेट इज़ अचीव्ड। अब देखिए, यह वाली मूवमेंट हमें यहां पे कैप्चर करने का मौका मिल सकता है इस वाले ट्रेडिंग सेटअप के अंतर्गत। अब देखिए आपको देखने में लग सकता है कि ये कैंडल स्टिक्स तो बहुत सारी हैं। पर अगर आप मिनट्स के हिसाब से देखें तो ये सिर्फ 1 मिनट के कैंडल है। तो बेसिकली इतनी सारी कैंडल्स में भी आपके सिर्फ 5 मिनट्स या 10 मिनट्स ही जा रहे हैं। सो दैट इज़ हाउ स्कैल्पिंग इज़ 10। यू आइडेंटिफाई अ सेटअप व्हिच इज़ अ हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप। यू एंटर वेरी फास्ट विथ लार्ज क्वांटिटी एंड यू एग्जिट वेरी फ़ास्ट। ठीक है? 5 से 10 मिनट आप होल्ड करते हैं और आप उस ट्रेड से एग्जिट कर सकते हैं। अब आगे चलते हैं चार्ट में और देखते हैं क्या यह सेटअप फिर से रिपीट हुआ है। अब देखिए यहां पे यह सेटअप फिर से हमें रिपीट होता हुआ दिखाई दे रहा है। यहां पे ये जो कैंडल्स हैं ये तीन कैंडल स्टिक जैसा कि मैंने आपको बताया था तीन मिनिमम होनी चाहिए आपकी कैंडल स्टिक जो आपको यह बताएं कि यहां पे एक बॉक्स बन रहा है और यहां पे एक न्यूट्रल स्टैंड्स है और सूर और लेटर एक ब्रेकआउट यहां पे आने वाला है। अब देखिए ये जो तीन कैंडल स्टिक हैं ना इनका हाई भी ऑलमोस्ट सेम लेवल पे है। लो भी ऑलमोस्ट सेम लेवल पे है। और जो बॉडीज हैं ये कोई हाई मोमेंटम को रिफ्लेक्ट नहीं कर रही हैं। लेकिन जब ब्रेकआउट आया है उसके बाद एक अच्छा मोमेंटम कैप्चर करने का आपको मौका यहां पे मिल सकता है। सो बेसिकली 20 पॉइंट्स, 30 पॉइंट्स, 40 पॉइंट्स, 50 पॉइंट्स यही हमारा टारगेट है। लेकिन इसके साथ मेरी क्वांटिटी बहुत बड़ी है। ऐसा मैं दिन में कितनी बार करूंगी? तीन से चार बार करूंगी या आप ज़्यादा बार भी कर सकते हैं। अब देखिए अगर हम चार्ट्स में और आगे चलें तो यहां से मुझे एक अच्छा डाउन ट्रेंड देखने को मिल रहा है। फिर मुझे यह बॉक्स पैटर्न कहीं भी देखने को नहीं मिल रहा है। आप यह कह सकते हैं कि यहां पे भी तो ट्रेंड कैप्चर किया जा सकता था यह वाला और प्रॉफिट बुक किया जा सकता था। बिल्कुल किया जा सकता था। लेकिन ट्रेडिंग में क्लेरिटी इज़ मोरेंट। हमने अपने सेटअप को ट्रेड करना है। देखिए बहुत टाइप के ट्रेडिंग सेटअप होते हैं, ट्रेडिंग स्ट्रेटजीस होती हैं जिनको हम ट्रेड कर सकते हैं। लेकिन हम सारी स्ट्रेटजीस और सारे सेटअप को ट्रेड नहीं कर सकते। इसलिए वी हैव टू चूज़ व्हाट टाइप ऑफ ट्रेडर वी आर। सो इफ आई हैव चूज़न कि मैं एक स्कैल्पर हूं। और मेरे लिए ये पर्टिकुलर सेटअप वर्क करता है। तो सबसे इंपॉर्टेंट है मेरे लिए एज अ स्कैल्पर उस सिस्टम के साथ स्टिक रहना। अब देखिए यहां पे भी ट्रेंड दिख रहा है। यहां पे भी ट्रेंड दिख रहा है। लेकिन इसको हम इग्नोर करेंगे। हम सिर्फ उन सेटअप्स को ट्रेड करेंगे जिनमें एक हाई प्रोबेबिलिटी ऑफ़ विनिंग है। और ये जो सेटअप्स मैं आपके साथ डिस्कस करती हूं ये बैक टेस्टेड है। हमने बहुत बार इन पे ट्रेड किया हुआ है। इसीलिए मैं आपके साथ इनको शेयर कर रही हूं। अब देखिए अगेन ये सेटअप मुझे आगे बॉक्स में देखने को मिल रहा है। जिसमें ऊपर की तरफ एक रेजिस्टेंस लाइन है। नीचे की तरफ एक सपोर्ट लाइन है। ठीक है? और ये जो सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस है ऊपर की तरफ कैंडल स्टिक के हाईज़ को टच कर रही है और नीचे की तरफ कैंडल स्टिक के लोस को टच कर रही है। ऑलमोस्ट टच कर रही है। जितनी भी कैंडल स्टिक मुझे यहां पे दिखाई दे रही है वो न्यूट्रल स्टैंड्स की है। ज्यादातर कैंडल्स आप देखेंगे न्यूट्रल स्टैंड्स की आपको पता चल रहा है कि एक पर्टिकुलर रेंज के अंदर ही वो कैंडल स्टिक का प्राइस एक्शन कंटेंड है। तो हम क्या करेंगे? हम एक यहां पे बाय स्टॉप ऑर्डर लगा सकते हैं। जब यह रेंज ऊपर की साइड टूटे। लेट्स से यह मैं यहां पे रखती हूं। तो जिस भी कैंडल स्टिक में यह ब्रेकआउट आएगा वहां पे हम एंट्री ले सकते हैं या फिर उसके बाद वाली कैंडल स्टिक में ले सकते हैं। आप अगर चाहें तो इसको स्किप भी कर सकते हैं। जस्ट फॉर कंफर्मेशन कि यहां से ब्रेकआउट आ चुका है। तो क्लोजिंग पे ले सकते हैं इस वाली पर्टिकुलर कैंडल स्टिक की या अगले कैंडल स्टिक के लिए। स्टॉप लॉस कहां लगाएंगे? अगर आप इस वाली कैंडल स्टिक में एंट्री ले रहे हैं, तो स्टॉप लॉस अगेन आपका बेस ऑफ़ कंसोलिडेशन हो जाएगा और प्रॉफ़िट टारगेट पॉइंट्स आपके उसी हिसाब से डिसाइड होंगे 1:2 का। आप 1:3 के लिए भी इस ट्रेड को होल्ड कर सकते हैं। देखिए, इस सेटअप के बाद एक अच्छा अपमूव देने के बाद जो इंडेक्स है वो अगेन 1 मिनट चार्ट में कंसोलिडेशन और एक बॉक्स बना रहा है। यह बॉक्स जो है अगेन जो कैंडल स्टिक है, न्यूट्रल स्टैंड्स हमें बता रही हैं। कहां पे ट्रेड करना है? यह मुझे ब्रेकउ या ब्रेकडाउन बताएगा। तो मेरे ऑर्डर्स कैसे रहेंगे? मेरे जो स्टॉप ऑर्डर्स हैं, वह ऊपर के साइड भी प्लेस्ड रहेगा। 24,325 के ऊपर भी प्लेस्ड होगा और नीचे के साइड 24,318 के नीचे भी प्लेस्ड होगा। हम एंट्री तब लेंगे जब हमें चार्ट्स में कंफर्मेशन मिल जाएगी कि इट इज़ अ ब्रेकडाउन। तो मेरा जो भी ब्रेकडाउन आएगा या ब्रेकआउट आएगा वो एग्जीक्यूट हो जाएगा। ऊपर वाला ऑर्डर जहां पे ब्रेकआउट आया ही नहीं। जैसे इस केस में ब्रेकआउट नहीं आया तो वह ऑर्डर को आपने कैंसिल कर देना है जब आपका नीचे वाला ऑर्डर एग्जीक्यूट हो जाए। तो इस तरीके से आप यहां पे 1:2 के टारगेट के लिए वेट कर सकते हैं जो कि आपके शायद सेकंड कैंडल में यहां पे अचीव हो जाएगा। अगेन देखिए यहां पे जब आप आगे जाएंगे तो तीन कैंडल स्टिक्स आपको दिखाई दे रही हैं जो कि एक बॉक्स को रिप्रेजेंट कर रही हैं। इसके बाद आप नीचे की तरफ एक लाइन खींच सकते हैं। यहां पे अगेन ऊपर की साइड भी खींच सकते हैं और इसके ब्रेकडाउन पे इस वाली कैंडल स्टिक के क्लोज पे आप एंट्री ले सकते हैं। अब देखिए जितनी बार भी हमने यहां पे इस ट्रेड को डिस्कस किया है। अगर थोड़ा ज़ूम आउट करके इस चार्ट को देखेंगे, तो एक ही दिन के अंतराल में 11:00 बजे से लेके 3:00 बजे तक हमें चार-प ट्रेड यहां पे सेम सेटअप के अंतर्गत देखने को मिले। और सबसे ज्यादा एक्सप्लोसिव मूव आप देखेंगे उन्हीं सेटअप्स के बाद आ रहा है। अब देखिए यहां पे एक सेटअप बना था। उसके बाद एक अच्छा एक्सप्लोसिव मूव आया। उसके बाद एक ही दिन के अंतराल में दूसरी बार यहां सेटअप बना। एक अच्छा मूव हमें देखने को मिला है। तीसरा जो सेटअप है यहां पे बना। उसके बाद एक मूव आया। अगेन एक कंसोलिडेशन आई। नीचे की साइड मूव आया और अगेन एक यहां पे कंसोलिडेशन बनी है और नीचे की साइड मूव आया है। हालांकि यह टुवर्ड्स द क्लोजिंग है तो इसको आप इग्नोर भी कर सकते हैं। मतलब 3:00 बजे के बाद आप कोई भी स्कैल्पिंग ट्रेड ना लें तो वो ज्यादा एडवाइज़ेबल है। लेकिन इस टाइप के बॉक्स सेटअप जो है आपको लगातार चार्ट्स में देखने को मिल सकते हैं। सो आईडिया बिहाइंड दिस स्ट्रेटजी यही है कि हमने ऐसे पॉइंट पे एंट्री लेनी है जहां पे मार्केट कहीं मूव नहीं कर रहा है। या बेसिकली ऐसे पॉइंट से जस्ट पहले एंट्री लेनी है जहां पे मार्केट एक अच्छा मूव देने के हाई चांसेस हैं। कई बार हम ईएमएस को भी ट्रेड करते हैं। वीव एप्स को ट्रेड करते हैं या डिफरेंट सेटअप्स को यूज़ करते हैं। उनकी अपनी एक्यूरेसी होती है। उनका अपना विन रेशियो होता है। पर यह जो सेटअप मैंने आज आपके साथ डिस्कस किया है, इसका मैं बता पर यह जो सेटअप मैंने आज आपके साथ डिस्कस किया है, यह वन ऑफ़ द मोस्ट प्रॉफिटेबल सेटअप्स में से एक है। पर यह जो सेटअप मैंने आपके साथ डिस्कस किया है, आज यह एक हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप है क्योंकि इसमें हम उस टाइम एंटर कर रहे हैं जब मार्केट इज़ गोइंग न्यूवेयर और उसके बाद हम एक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन को एक्सपेक्ट कर रहे हैं। तो चलिए इसी के साथ मैं इस वीडियो के एंड पर आती हूं। आई होप आपको यह एक्सप्लेनेशन अच्छी लगी होगी। अगर आपको मेरी टेक्निकल इंसाइट्स अच्छी लगती है तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कीजिएगा और वीडियो को लाइक जरूर कीजिएगा। आई विल सी यू वेरी सून इन द नेक्स्ट वीडियो। टिल देन बाय बाय। [घंटी की आवाज़] इन्वेस्टमेंट्स इन द सिक्योरिटीज मार्केट आर सब्जेक्ट टू मार्केट रिस्क। रीड ऑल द रिलेटेड डॉक्यूमेंट्स केयरफुली बिफोर इन्वेस्टिंग।